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26.2.08

डाक्टर साहब, मैं दारू छोड़ना चाहता हूं....

कमाल का ब्लाग है आयुषवेद, जिसे डाक्टर रूपेश श्रीवास्तव ने शुरू किया है। दिल्ली के किन्हीं विनय ने एक सवाल किया है, जो लगभग मेरे जैसा ही सवाल है, ये कहना गलत न होगा कि उन्होंने मेरे ही सवाल को, जो मैं लगभग पूछने ही वाला था डाक्टर साहब से, विनय ने कर दिया है।

वो सवाल ये है.....

शराब छोड़ना चाहता हूं .....
डाक्टर साहब, मेरा एक सवाल है। शराब छोड़ना चाहता हूं पर छोड़ नहीं पाता। सुबह कसम खा लेता हूं रोज कि नहीं पीनी। शाम होते ही सिर भारी होने लगता है और तलब महसूस होने लगती है। कोई ऐसी दवा या तरकीब बतायें ताकि शराब की तलब महसूस न हो।दूसरा सवाल है कि अगर मैं पिछले 15 साल से लगभग रोजाना पांच पैग दारू पी रहा हूं तो मेरा लीवर इस वक्त किस स्थिति में होगा। इसे ठीक रखने के क्या क्या देसी उपाय हो सकते हैं। मैं बहुत झिझकते हुए ये सवाल पूछ रहा हूं। कृपया उत्तर विस्तार से देने की कृपा करें। आपका आभारी रहूंगा। विनय, नई दिल्ली

इस सवाल का जो उत्तर दिया है डाक्टर रूपेश ने, जिन्हें आयुर्वेद में महारत हासिल है, वो काफी डराने चौकाने वाला है। मैं तो पढ़कर घबरा गया। बाप रे, दारू पीने के इत्ते गंभीर नतीजे। विश्वास न हो तो आप इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ लीजिए.....

दारू पीने के कितने नुकसान हैं, जान लो


इसके बाद आप पढ़िए....
लीवर तुझसे बदला लेगा बेटा, सुन बे...बड़ा आसान है शराब छोड़ना बोले तो बिलकुल शहद माफिक मीठा


और अंतिम पीस पढ़िए....

शराब छोड़ने के साधुओं के आजमाए नुस्खे


यकीन मानिए, आप अगर अव्वल दर्जे के दारूबाज हैं (मेरे जैसे) तो निश्चित ही ये तीनों पोस्टें पढ़कर पहले तो आपकी पूरी की पूरी फट जाएगी, भड़ाम हो जाएगी, पुर्जे पुर्जे बिखर जाएंगे, उसके बाद में थोड़ा साहस व ऊर्जा का संचार होगा, आखिर में आपके अंदर एक ऐसा जज्बा पैदा होगा कि आप तय कर लेंगे, अमां यार, इतना आसान है तो चलो एक बार देख ही लेते हैं डाक्टर साहब के इस चूतियापे के सुझाव को। और भाई जान, हो सकता है ये चूतियापे के सुझाव मेरे व आप जैसों की जिंदगी में किसी चमत्कार की तरह लौट आए।

आपको मालूम है, किन चीजों के सहारे दारू छोड़ सकते हैं हम, वो ये हैं....


शहद की एक शीशी,
शिमला मिर्च,
सल्फ्यूरिक एसिड,
शिवाम्बु बोले तो स्वमूत्र,
गुलकंद,
SPIRTAS GLANDIUM QUERCUS नामक चर्चित होम्योपैथी दवा जिसको बेचकर कई लोगों ने करोड़ों रुपये कमाए हैं,
पूजा अर्चना,
परिजनों के साथ शाम बिताने की तमन्ना....

जैसी चीजों के जरिए आप शराब को टाटा बायबाय कह सकते हैं। उपरोक्त चीजौं को कैसे करना है, कब लेना है, क्यूं लेना है, इसके बारे में पहले आप पढ़ें फिर तय करें। और पढ़ने के लिए उपर दिये गये तीनों लिंक पर क्लिक करें।

मैंने तो इन नियमों को आजमाने की ठान ली है क्योंकि आदमी से कभी बड़ी शराब नहीं होती और इच्छा शक्ति से कभी बड़ी चीज कोई बुराई नहीं होती। हां, ये सही है कि मैं दारू को प्यार करता हूं लेकिन पिछले कई महीनों से हर सुबह दारू से घृणा करने लगता हूं और शाम होते होते दारू तलाशने लगता हूं। मतलब एक अच्छे खासे शराबी और नशेबाज जैसा हो चुका हूं। इससे पिंड छुड़ाने के लिए अपने दिल्ली वाले किसी विनय नामक साथी के सवाल पूछने पर डाक्टर रूपेश ने जी कीमती सलाह दी है, वो वाकई काबिलेतारीफ है। अगर डाक्टर साहब अनुमति देंगे तो मैं उपरोक्त तीनों पोस्टों को भड़ास पर अलग अलग हेडलाइन के साथ डालना चाहता हूं।

और हां, भाई भड़ासियों, देखा भड़ास का कमाल, डाक्टर रूपेश जैसा जो साथी भड़ास को मिला है, उसी की बदौलत हम ये नेक काम कर पा रहे हैं जिसमें अपन जैसे दरूहल साथियों को दारू छुड़ाने के लिए इतने अच्छे सलाह मिलने लगे हैं। तो जोर से बोलो...
जय भड़ास,
जय डा. रूपेश,
जय मनुष्यता....

अगर भड़ास के फेमिली डाक्टर ब्लाग आय़ुषवेद पर अपने व अपने परिजनों व मित्रों की किसी चिकित्सा समस्या का हल चाहते हैं तो आप डाक्टर साहब से सीधे सवाल कर सकते हैं, उनकी मेल आईडी पर भेजकर, वो उसका जवाब आयुषवेद पर प्रकाशित कर देंगे। डाक्टर साहब की मेल आईडी है...
rudrakshanathshrivastava7@gmail.com


यशवंत

14.2.08

बड़े प्यारे होते हैं दारू पीने वाले....

बड़े प्यारे होते हैं दारू पीने वाले ,ऐसा जब भी मैं कहता हूं तो कुछ लोग मेरा विरोध कर सकते हैं । थोड़ा सा आयुर्वेद उगल देता हूं तो आप लोग समझ लेंगे कि मैं क्यों ऐसा मानता हूं ।
सुरासार यानि अल्कोहाल का जो देह पर प्रभाव होता है वह तो सब को दिखाई देता है लेकिन जो मन पर घटित होता है वह दिखता नहीं है । आपने देखा होगा कि जो लोग शराब पी लेते हैं उनमें से कुछ चढ़ जाने पर बड़बड़ाते हैं ,कुछ शान्त हो जाते हैं । वस्तुतः उस समय जो विचार मन में रहते हैं वे व्यक्ति के स्वभाव के अनुसार मुखर होने लगते हैं और जो कुछ भी अंदर दबा रहता है वह बाहर आने लगता है । मेरे गुरूदेव शराबियों से बहुत प्रसन्न रहते थे और हम सब को एक झेन गुरू की कथा सुनाया करते कि एक बहुत बूढ़े हो चुके झेन गुरू की अत्यंत सुन्दर युवा पत्नी थी । जो भी दीक्षा के लिये गुरू के पास आता तो गुरू उससे कहते कि दीक्षा तो दे दूंगा लेकिन परम्परा के अनुसार चलो पहले गुरू-शिष्य मिल कर शराब पीते हैं फिर आगे की क्रिया करेंगे । पहला पैग अंदर जाता तो शिष्य खुलना शुरू हो जाता ,तीसरे पैग तक तो शिष्य की भाषा ही बदल चुकी होती थी, "बुढ़ऊ दीक्षा की किस चूतिया को जरूरत है वो तो तेरी खूबसूरत जवान बीवी मुझे यहां खींच लाई है ,अबे तू उसे कैसे सम्हालता होगा तेरे तो दोनो पैर कब्र में लटक रहे हैं....वगैरह वगैरह.....। "
जब लोग सत्य बोलने लगते हैं तो उनका आत्मिक सौन्दर्य निखर कर सामने आ जाता है । अब इतना जान कर भी मैं दारू पीने वालों को बुरा कहूं तो ये बिल्कुल गलत होगा क्योंकि एक सत्य यह भी है कि उनके कारण बहुत से गरीब डाक्टरों के घर का चूल्हा जलता है । इसलिये भाई लोग अगर पीते हो तो बुरा क्या है पिए जाओ । मेरे एक कट्टर बेवड़े मित्र श्री मिलिन्द कामत (उसके प्रति ये आदर इसलिये है क्योंकि अब तक मैंने उसे गैलनों दारू पी जाने के बाद भी बहका हुआ नहीं देखा ,उसका कहना है कि जिस दिन चढ़ गई उस दिन छोड़ दूंगा ) का कहना है कि ये अगर बुराई है तो आओ इसे मिल कर खत्म कर दें जितनी जल्दी हो सके सारा चखना और दारू ऐसे साफ़ कर दो जैसे हमारे जवान दुश्मनों को साफ़ कर देते हैं । इन भाई का यही जज़्बा मुझे उनके प्रति आदर बनाए रखने को मज़बूर करे रहता है ।
जय जय भड़ास

8.2.08

भडासी गुरु यशवंत के फ़ंडे।


कभी कभी ब्लागस्पाट अपने आप में एक चूतियापा लगता है। साली तीन बार टिप्पणी टाईप कर के पोस्ट कर चुका हूं लेकिन टिप्पणी भी लगता है अपने गुरु की तरह है, अड गई तो बस अड गई,
मैने भी सोचा कि टिप्पणी क्यों एक पोस्ट ही जड़े देता हूं। बहराल अपने भडासी गुरु यशवंत भाई की दारु बाज़ी के कुछ फ़ंडे मै भी जानता हूं पढि़ये->
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१.) बिना नानवेज दारू नही।

२.) दारू के लिये कोई भी बहाना बढिया है, वो चाहे गम हो खुशी हो, गुस्सा, भडास, प्यार या कुछ भी नही।
३.) अकेले दारू पीने से बचते है, कम से कम एक साथी तो हो।

४.) दारू के लिये कभी आपसे पैसे निकालने को नही कहेंगे। अपने पैसे से दारू ले कर आते हैं। आप चाहे तो चिकन-मटन ला सकते हैं ।

५.) दारू पीकर रास्ते भूल जाते हैं। (याद है मुझे दफ़्तर छोड कर आप घंटो ग्रेटर नोएडा हाईवे पर भटके थे)

६.) दारू पीकर किसी भोजपुरी गीतकार का भूत सर चढ कर नाचने लगता है, खूब भोजपुरी गीत गाते हैं ४ पेग के बाद।

७.) दारू पीकर धंधे की बात नही।

८.) दारू पीने के लिये साथी ढूंढने के लिये दूरियों के कोई मायने नही। कहीं भी चले जायेंगे।

९.) दारू पीकर एकदम मस्तान हो जाते हैं। नं वन कामेडियन (याद है कुत्तों को कैसे भूंक कर भगाया था। से० १८ में)

अभी के लिये इतना ही बाकी फ़िर कभी...
जय भडास
अंकित माथुर...

17.1.08

पीने के बाद अपन भाई लोग कुछ ऐसे ही बहकते हैं...

Common lines after people get drunk.....

1. Tu Mera bhai hai...

2. Gaadi mai Chalunga...

3. Abe abhi itni Aur Andar ja sakti hai...

4. Tu bura mat manana bhai...

5. Mai teri Dil Se Izzat Karta hu...

6. Aaj Chad nahi rahi hai kya bat hai...

7. Tu Kya samajh raha hai mujhe chad gayi hai...

8. Ye mat samajh ki piye me bol raha hu...

9. Abe yaar kam to nahi padegi

10. Chhote, Ek Ek Chhota aur ho Jae...

11. Baap ko mat Sikha.

12. Yaar magar Dil dukha diya yaar...

13. Kuchh bhi hai par Bhai hai Apna...

14. Tu Bolna Bhai, kya chahiye...Jaan chahiye hazir hai ???