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13.4.08

कहीं मुझे पीलिया तो नहीं हो गया?

(भड़ासियों के डाक्टर और आयुर्वेद के मास्टर मुंबई के डाक्टर रूपेश श्रीवास्तव के जनहिताय मेडिकल एडवाइजरी ब्लाग पर जाकर मैंने उनसे खुद के बारे में एक संभावित रोग के बारे में पूछा तो डाक्टर साहब ने बिना देर किये जो मुझे इलाज बताए वो इस तरह है.....यशवंत)

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डा.साहब, शायद change of water या ऐसे ही किसी संभावित कारण से मुझे ऐसा लग रहा है कि कहीं मुझे पीलिया तो नहीं हो गया है क्योंकि मूत्र का रंग एकदम पीला आ रहा है। मैं कभी-कभी शराब का सेवन कर लेता हूं और मांसाहार भी करता हूं। मेरी नौकरी के कारण मुझे अकसर टूर पर रहना पड़ता है। उपाय बताएं।
यशवंत सिंह,दिल्ली

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भाईसाहब, आपने जो संभावना बतायी है उस आधार पर और आपसे फोन पर जो बाते हुईं है बहुत संभव है कि आपको पीलिया की शुरूआत है। इसे अगर नजरअंदाज करा तो संभव है कि बीमारी गंभीर रूप ले ले। कुछ उपचार लिख रहा हूं अविलंब ले लीजिये---

१ . नवायस लौह ३-३ रत्ती दिन में दो बार मट्ठे या शहद के साथ लें।
२ . पुनर्नवादि मंडूर की १-१ गोली दिन में तीन बार मट्ठे या गो मूत्र के साथ लें।
३ . लोहासव २-२ चम्मच सुबह शाम बराबर मात्रा जल के साथ लें।


अगर ये शास्त्रोक्त औषधियां न मिल सकें तो एक सफेद फिटकरी को तवे पर भून लीजिये ध्यान रहे कि जलने न पाए, फिर दो ग्राम भुनी हुई फिटकरी को २० ग्राम दही के साथ लीजिये अथवा कलमी शोरा १० ग्राम और ५० ग्राम मिश्री(खड़ी शक्कर) बारीक पीस लें ये मिश्रण ३-३ ग्राम जल से लीजिये। अगर ये कुछ भी न मिले तो मूली के हरे पत्तों शक्कर मिला कर मीठा कर लें और दिन में इसी तरह बनाया रस २-२ कप तीन बार पियें। आपकी बीमारी गायब हो गयी आपको दो-चार दिनों में ही समझ आ जाएगा।
-डा. रूपेश श्रीवास्तव
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(साभारः आयुषवेद)

((आप भी अपनी किसी दिक्कत, समस्या, परेशानी, बीमारी के बारे में बिना साइडइफेक्ट वाली आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज चाहते हैं तो डाक्टर रूपेश श्रीवास्तव के आयुषवेद ब्लाग पर पहुंचे। यूआरएल है http://aayushved.blogspot.com))

2.4.08

नींद गायब है इस कारण पागल न हो जाऊं ...... (आयुषवेद से साभार)

डाक्टर साहब मैं पेशे से वकील हूं । आप अंदाज लगा सकते हैं कि मैं किस कदर मानसिक श्रम करता हूं और चौबीसो घंटे मानसिक दबाव बना रहता है । इस मानसिक उद्वेग और उत्तेजना के चलते नींद गायब है और अब लगता है कि कहीं इस कारण पागल न हो जाऊं । एलोपैथी की दवा "डायजेपाम" के दुष्प्रभावों से वाकिफ़ हूं इसलिये हिम्मत नहीं होती लेने की । कोई नशा नहीं करता हूं । कोई कारगर इलाज बताइये ताकि डायजेपाम ए बच सकूं क्योंकि एलोपैथी वाले डाक्टर को दिखाया तो उसने यही दवा लिख दी है । मेरी उम्र ५९ वर्ष है ।
एडवोकेट नरेन्द्र सिंह,आगरा

--सिंह साहब आपकी तकलीफ़ भली प्रकार से समझ रहा हूं । चलिये सीधे आपका उपचार बताता हूं..

१ . चिन्तामणि चतुर्मुख रस आधी गोली(१२५ मिलीग्राम की गोली को तोड़ कर आधा कर लें यानि लगभग ६१ मिलीग्राम ) + वातकुलान्तक रस १ गोली + माहेश्वर रसायन १ ग्राम ,इन सबको मिला कर एक चम्मच शहद से दिन में दो बार चाटें ।

२ . संभव है कि यह दवा मंहगी लगे तो एकदम सरल और सस्ता उपाय बताता हूं ,तीन ग्राम भांग को गाय के घी में डाल कर पका लीजिए और उस घी को छान लीजिए । इस घी की दोनो पैरों के तलवों में हलके हाथ से मालिश करिये ।

३ . दिन में दो बार चंद्रासव + अश्वगंधारिष्ट को मिला कर दो दो चम्मच लें (अगर चंद्रासव नहीं मिलता है तो अश्वगंधारिष्ट ही लिया जा सकता है )

४ . सर्पगन्धा चूर्ण ५० ग्राम + रस सिन्दूर ३ ग्राम ,इस कुल ५३ ग्राम दवा को रस सिन्दूर की चमक समाप्त होने तक घुटवा लें अधिकतम दस मिनट लगेंगे । एक-एक रत्ती दवा दिन में तीन बार गाय के दूध से लें (ध्यान रहे दवा खाली पेट न लें)

५ . यदि अनिद्रा के साथ रक्तचाप भी बढ़ा हो तो ऊपर लिखी दवा में थोड़ा बदलाव करेंगे ,सर्पगन्धा चूर्ण ५० ग्राम + जहरमोहरा पिष्टी ६ ग्राम + प्रवाल पिष्टी ६ ग्राम + गिलोय सत्व ६ ग्राम ,इन सबको लेकर कस कर खरल करा लें । आधा-आधा ग्राम मात्रा दिन में तीन बार गुलकंद के साथ लीजिए । (सर्पगन्धा को स्थानीय भाषा में सफ़ेद चांद,छोटी चांदड़,धवल बरुआ नामों से भी जाना जाता है)

६ . सोंठ + छोटी पीपर + काली मिर्च + पीपरामूल इन सबको समभाग लेकर बारीक पीस लीजिए । चूर्ण में शहद मिला कर २५० मिलीग्राम की गोलियां बना लें और ऊपर से इन गोलियों को सोंठ के बारीक चूर्ण में लपेट लें ताकि ये आपस में चिपकें नहीं । दिन में तीन बार २-२ गोलियां लीजिए ।
इनके नियमित प्रयोग से आपको अच्छी नींद तो आयेगी ही और साथ में मस्तिष्क भी पित्त की शान्ति के कारण ठंडा रहेगा । जल्द से जल्द स्वस्थ हो जाइए और ईश्वर को धन्यवाद करिए ।

आयुर्वेद के विशेषज्ञ डाक्टर रूपेश श्रीवास्तव की फ्री मेडिकल एडवाइजरी ब्लाग आयुषवेद http://aayushved.blogspot.com से साभार, आप भी अपनी दिक्कतों के स्थायी हल के लिए डाक्टर साहब से उनके ब्लाग पर जाकर उनकी मेल आईडी के जरिए संपर्क कर उपचार पा सकते हैं

8.3.08

साहिबान, मेहरबान, कद्रदान...भड़ासी हो गए हैं नशेबाज, कंपनी की तरफ मुफ्त में होगा इलाज!!!

नशा तो नशा होता है (ब्लागिंग को छोड़कर:), वो चाहें बीड़ी सिगरेट का हो या चिलम या खैनी या दारू की। इससे त्रस्त लोगों के दिल से पूछो। छोड़ने के लिए जाने कितने जतन किए लेकिन सब बेकार। खासकर भड़ासियों में तो नशाखोरी की लत बढ़ती ही जा रही है, ये मैं अपनी तीसरी आंख से देख कर बता रहा हूं। सो इन नशेबाज भड़ासियों का इलाज करने को दूसरा लौह पुरुष भड़ासी डा. रूपेश श्रीवास्तव ने कमर कस लिया है। पिछली बार तो भड़ासी नशेबाजों को डाक्टर साहब ने अपना ही मूत्र पीने की नेक सलाह दे दी थी लेकिन मैं कभी हिम्मत नहीं कर पाया। उसके अलावा भी उन्होंने ढेर सारे उपाय बताए थे जिसे आप भड़ास की पिछली पोस्टों में या फिर डाक्टर साहब के ब्लाग आयुषवेद पर जाकर पढ़ सकते हैं। इस बार डाक्टर साहब ने फूल पत्ती घास फूस के पिटारे से निकाला है एक अद्भुत रामबाण। डाक्टर रूपेश का दावा है कि इस रामबाण औषधि से बनी चाय को पंद्रह दिन पी लीजिए, फिर देखिए, नशे के बारे में सोचते हुए आपको उबकाई आने लगेगी....(हे भगवान, ये दिन कभी न दिखाएं, मरने के बाद ही ऐसा मौका आए)।

तो साहिबान, मेहरबान, कद्रदान....बस चलने वाली है, दो मिनट का टेम है, इस बीच मैं आप लोगों को कंपनी की तरफ से विशेष छूट पर ये दवा दिखा रहा हूं। पिछले पंद्रह साल से इस बस अड्डे पर मैं यह दवा बेच रहा हूं और जिन भाइयों की दवा खत्म हो जाती है वो हर बार यहीं से आकर ले जाते हैं। आप भी एक बार आजमाएं। जिस तरह पुराने लोगों ने एक बार आजमाया था और उसके बाद वे लोग इस दवा के आदी हो गए, उसी तरह आप भी दवा के आदी हो जाएंगे।

तो साथियों, मेहरबान, बंदर छाप दंतमंजन ले जाएं। दांत में लगाएं और दांतों से मुक्ति पाएं। न रहेंगे दांत और न जरूरत पड़ेगी किसी मंजन की।

भाइयों मेहरबान, दो मिनट का वक्त है तो मैं डाक्टर रूपेश जी की नशा छोड़नी वाली शर्तिया दवा के बारे में बताना चाहूंगा। कंपनी की तरफ से विशेष छूट में या यों कहिए लगभग मुफ्त में ये दवा आपको दी जा रही है। अगर इस दवा को 15 दिन तक आजमाने के बाद भी आप नशा नहीं छोड़ पाते हैं तो फिर आप अपने लौंडों से बोल दीजिए कि वो आपकी कब्र खोदकर अभी से तैयार रखें। तो चलिए, सज्जनों देवियों......दवा के बारे में बतियाते हैं....


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कई नशों से छुटकारे के लिए एक ही रामबाण औषधि

डा. रूपेश श्रीवास्तव

वे लोग जो अन्जाने में ही किन्हीं व्यसनों से ग्रस्त हो गए हैं उनके लिए अपने वर्षों के श्रम ,शोध एवं अनुभव के आधार पर एक रामबाण तरीका बता रहा हूं । मुझे पूर्ण विश्वास है कि इसे आप धन कमाने के स्थान पर लोकहित में ही प्रयोग करेंगे । इसका उपयोग किसी एक विशेष नशे की आदत से छुटकारा पाने के लिए नहीं बल्कि कई तरह के नशों की आदत से छुटकारे के लिए मैंने प्रयोग कराया है और सफलता पाई है । इससे आप यदि इन नशीले पदार्थों के आदी हैं तो फिर देर किस बात की है बस अपने गुरू या इष्ट का स्मरण करके एक बार मन में यह विचार तो लाइए कि आपको उक्त नशा छोड़ना है फिर शेष काम तो यह चमत्कारी औषधि करेगी और कुछ ही दिनों में आप पाएंगे कि जादू हो रहा है कि जिस पदार्थ की आपको जानलेवा तलब होती थी वह पता नहीं कहां विलीन हो गई है । मैंने जिन पदार्थों पर इस श्रेष्ठ औषधि का प्रयोग किया है वे हैं : -
बीड़ी
सिगरेट
चिलम
चबाने वाली तम्बाकू
चाय
काफ़ी
अफ़ीम
अगर मौका लगेगा तो इसे नींद की गोलियां खाने वाले मरीजों के लिए भी अनुभव करूंगा ताकि उनकी इस नामुराद दवा (या जहर) से पीछा छूट जाए ।
पारस पीपल (यह एक बड़ा पेड़ होता है इसके पत्ते अचानक देखने में प्रसिद्ध पेड़ पीपल के पत्तों की तरह होते है तथा भिंडी के फूलों की तरह पीले फूल आते हैं तथा कुछ दिनों में ये फूल गाढ़े गुलाबी होकर मुर्झा जाते हैं ,इस पेड़ को मराठी में "भेंडी " ही कहा जाता है ) के पुराने पेड़ की छाल जो स्वतः ही पेड़ से अलग हो जाती है ,उसको लेकर खूब बारीक पीस कर मैदे की तरह बना लें व शीशी में भर लें । यह बारीक चूर्ण बारह ग्राम लेकर २५० मि.ली. पानी में हलकी आंच पर जैसे चाय बनाते हैं वैसे ही पकाएं और १०० मि.ली. पक कर रह जाने पर छान कर चाय की तरह ही हलका गर्म सा पी लीजिए । सुबह शाम नियमित रूप से पंद्रह दिनों तक सेवन कराने से मैंने पाया है कि मादक द्रव्यों की आदत छूट जाती है तथा नफ़रत सी होने लगती है । एकबार व्यसन छूट जाए तो पुनः इन दुर्व्यसनों को प्रयोग नहीं करना चाहिए फिर व्यसन से मुक्त होने के बाद मैं आदी व्यक्ति को दो माह तक बैद्यनाथ कंपनी का "दिमाग दोष हरी" नामक दवा का सेवन कराता हूं । अगर आपके क्षेत्र में पारस पीपल नहीं पाया जाता है तो किसी महाराष्ट्र में रहने वाले मित्र से मंगवाने में देर न करिए और लाभान्वित होइए । ईश्वर को धन्यवाद दीजिये कि उसने साधारण सी दिखने वाली चीज़ों में कैसे दिव्य गुण भर रखे हैं
(डा. रूपेश के आयुर्वेदिक दवाखाने पर पहुंचने के लिए आगे खड़ी सवारी पर माउस कोंच दें, वो खुद ब खुद आपको उड़ा के ले जाएगा.....रथ तैयार है, दवाखाने तक ले जाने के लिए)

जय भड़ास
प्रस्तुतकर्ताः यशवंत सिंह

26.2.08

डाक्टर साहब, मैं दारू छोड़ना चाहता हूं....

कमाल का ब्लाग है आयुषवेद, जिसे डाक्टर रूपेश श्रीवास्तव ने शुरू किया है। दिल्ली के किन्हीं विनय ने एक सवाल किया है, जो लगभग मेरे जैसा ही सवाल है, ये कहना गलत न होगा कि उन्होंने मेरे ही सवाल को, जो मैं लगभग पूछने ही वाला था डाक्टर साहब से, विनय ने कर दिया है।

वो सवाल ये है.....

शराब छोड़ना चाहता हूं .....
डाक्टर साहब, मेरा एक सवाल है। शराब छोड़ना चाहता हूं पर छोड़ नहीं पाता। सुबह कसम खा लेता हूं रोज कि नहीं पीनी। शाम होते ही सिर भारी होने लगता है और तलब महसूस होने लगती है। कोई ऐसी दवा या तरकीब बतायें ताकि शराब की तलब महसूस न हो।दूसरा सवाल है कि अगर मैं पिछले 15 साल से लगभग रोजाना पांच पैग दारू पी रहा हूं तो मेरा लीवर इस वक्त किस स्थिति में होगा। इसे ठीक रखने के क्या क्या देसी उपाय हो सकते हैं। मैं बहुत झिझकते हुए ये सवाल पूछ रहा हूं। कृपया उत्तर विस्तार से देने की कृपा करें। आपका आभारी रहूंगा। विनय, नई दिल्ली

इस सवाल का जो उत्तर दिया है डाक्टर रूपेश ने, जिन्हें आयुर्वेद में महारत हासिल है, वो काफी डराने चौकाने वाला है। मैं तो पढ़कर घबरा गया। बाप रे, दारू पीने के इत्ते गंभीर नतीजे। विश्वास न हो तो आप इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ लीजिए.....

दारू पीने के कितने नुकसान हैं, जान लो


इसके बाद आप पढ़िए....
लीवर तुझसे बदला लेगा बेटा, सुन बे...बड़ा आसान है शराब छोड़ना बोले तो बिलकुल शहद माफिक मीठा


और अंतिम पीस पढ़िए....

शराब छोड़ने के साधुओं के आजमाए नुस्खे


यकीन मानिए, आप अगर अव्वल दर्जे के दारूबाज हैं (मेरे जैसे) तो निश्चित ही ये तीनों पोस्टें पढ़कर पहले तो आपकी पूरी की पूरी फट जाएगी, भड़ाम हो जाएगी, पुर्जे पुर्जे बिखर जाएंगे, उसके बाद में थोड़ा साहस व ऊर्जा का संचार होगा, आखिर में आपके अंदर एक ऐसा जज्बा पैदा होगा कि आप तय कर लेंगे, अमां यार, इतना आसान है तो चलो एक बार देख ही लेते हैं डाक्टर साहब के इस चूतियापे के सुझाव को। और भाई जान, हो सकता है ये चूतियापे के सुझाव मेरे व आप जैसों की जिंदगी में किसी चमत्कार की तरह लौट आए।

आपको मालूम है, किन चीजों के सहारे दारू छोड़ सकते हैं हम, वो ये हैं....


शहद की एक शीशी,
शिमला मिर्च,
सल्फ्यूरिक एसिड,
शिवाम्बु बोले तो स्वमूत्र,
गुलकंद,
SPIRTAS GLANDIUM QUERCUS नामक चर्चित होम्योपैथी दवा जिसको बेचकर कई लोगों ने करोड़ों रुपये कमाए हैं,
पूजा अर्चना,
परिजनों के साथ शाम बिताने की तमन्ना....

जैसी चीजों के जरिए आप शराब को टाटा बायबाय कह सकते हैं। उपरोक्त चीजौं को कैसे करना है, कब लेना है, क्यूं लेना है, इसके बारे में पहले आप पढ़ें फिर तय करें। और पढ़ने के लिए उपर दिये गये तीनों लिंक पर क्लिक करें।

मैंने तो इन नियमों को आजमाने की ठान ली है क्योंकि आदमी से कभी बड़ी शराब नहीं होती और इच्छा शक्ति से कभी बड़ी चीज कोई बुराई नहीं होती। हां, ये सही है कि मैं दारू को प्यार करता हूं लेकिन पिछले कई महीनों से हर सुबह दारू से घृणा करने लगता हूं और शाम होते होते दारू तलाशने लगता हूं। मतलब एक अच्छे खासे शराबी और नशेबाज जैसा हो चुका हूं। इससे पिंड छुड़ाने के लिए अपने दिल्ली वाले किसी विनय नामक साथी के सवाल पूछने पर डाक्टर रूपेश ने जी कीमती सलाह दी है, वो वाकई काबिलेतारीफ है। अगर डाक्टर साहब अनुमति देंगे तो मैं उपरोक्त तीनों पोस्टों को भड़ास पर अलग अलग हेडलाइन के साथ डालना चाहता हूं।

और हां, भाई भड़ासियों, देखा भड़ास का कमाल, डाक्टर रूपेश जैसा जो साथी भड़ास को मिला है, उसी की बदौलत हम ये नेक काम कर पा रहे हैं जिसमें अपन जैसे दरूहल साथियों को दारू छुड़ाने के लिए इतने अच्छे सलाह मिलने लगे हैं। तो जोर से बोलो...
जय भड़ास,
जय डा. रूपेश,
जय मनुष्यता....

अगर भड़ास के फेमिली डाक्टर ब्लाग आय़ुषवेद पर अपने व अपने परिजनों व मित्रों की किसी चिकित्सा समस्या का हल चाहते हैं तो आप डाक्टर साहब से सीधे सवाल कर सकते हैं, उनकी मेल आईडी पर भेजकर, वो उसका जवाब आयुषवेद पर प्रकाशित कर देंगे। डाक्टर साहब की मेल आईडी है...
rudrakshanathshrivastava7@gmail.com


यशवंत

15.2.08

भड़़ासियों को फेमिली डाक्टर मिला...जय आयुषवेद

जम के पियो, डाक्टर अपने घर में है

भड़ासियों के लिए एक अच्छी खबर। उन्हें अब अपने व अपने परिवार के सेहत की चिंता फिकिर नहीं करनी चाहिए क्योंकि उन्हें उनका फेमिली डाक्टर मिल गया है। जी, ये फेमिली डाक्टर कोई और नहीं, अपने डाग्डर साहब हैं। डा. रूपेश श्रीवास्तव। अपना डाक्टर अव्वल दर्जे का भड़ासी है, यकीन न हो तो उनकी कल की पोस्ट पढ़ लीजिए जिसमें अपना डाक्टर कहता है कि उन्हें पीने वाले बहुत पसंद है। जब डाक्टर यह कह रहा है तो फिर क्या, पिये जाओ, लीवर वीवर की टेंशन छोड़ के। क्योंकि डाक्टर साहब ने भड़ासियों के लिए शाही दवाखाना खोल दिया है।

मुनव्वर सुल्ताना, जो की मुंबई की हैं, भड़ासी भी हैं, को आप पढ़ ही चुके हैं कि किस तरह डाग्डर साहब ने बड़े से बड़े रोग बिना पैसा लिए और बिना कोई गोली खिलाए ठीक कर दिया, सिर्फ अपने भारतीय आयुर्वेद के बल पर। डाग्डर साहब अपनी इस खूबी का कतई प्रचार नहीं करते। वैसे इस क्या, किसी खूबी का वो प्रचार नहीं करते, और न चाहते। मैंने उनसे रिक्वेस्ट किया था, डाग्डर साहब, एक ऐसा ब्लाग बनाओ जो सिर्फ आपके आयुर्वेद पर हो और वो डाक्टरी का ब्लाग भड़ासियों के लिए नर्सिंग होम की तरह हो। और उन्होंने कई दिनों की मेहनत के बाद भड़ासियों के लिए दवाखाना खोल ही दिया।

अब किसी भी भड़ासी को जुकाम हो जाए, दारू पीने से लीवर खराब हो रहा हो, पेट ज्यादा निकल रहा हो, बीपी हाई रहता हो, लिंग में किसी तरह की कोई दिक्कत हो, सांस उपर नीचे हो रही हो, कमर में दर्द रहता हो....तो वो शाही दवाखाने पे आएं। अपने भड़ास के डाक्टर की इस शाही क्लिनिक पर पहुंच जाएं। वहां अपना मर्ज विस्तार से बताए। नाम गुप्त रखना चाहे तो नाम गुप्त रखा जाएगा। और देखिए, ब्लाग पर डाक्टर साहब प्रिसक्रिप्शन लिख देंगे। बताएंग कि कौन सा फूल किस पत्ती के साथ मिलाकर बूक व पीस दें और उसे बकरी के दूध के साथ घोलकर पी जाएं। इसी तरह वो विस्तार से बतायेंगे कि आप किस रोग के लिए किस तरह की घास चरें, किस बीमारी के लिए गो मूत्र का सेवन करें.....मेरी बातें मजाक लग रही होंगी लेकिन का करें, ससुरी सीरियस बात भी मजाक में कहने की आदत है, या मजाक को भी सीरियसली पेश करने की आदत है, और इसी का नाम ज़िंदगी है, हंसते हुए जियो, मस्ती में जियो....देखो, पहले तो किसी डाक्टर की जरूरत ही नहीं पड़ेगी, दूसरे खुदा न खास्ता पड़ ही जाये तो अपने डाक्टर साहब का दवाखाना ज़िंदाबाद।

तो इतना लंबा भाषण पेलने के बाद आपको बता ही देते हैं, डाक्टर साहब की क्लीनिक, दवाखाना, नर्सिंग होम का पता, जहां वो दिन में दो बार बैठते हैं, सुबह और शाम। हालांकि मर्ज आप वहां पहुंच कर कभी भी बता सकते हैं, उनकी मेल आईडी पर।

तो नोट कीजिए, डाग्डर साहब के दवाखाने का नाम
आयुषवेद
अब आप कहेंगे कि नाम तो बता दिया, पता भी बताओ तो भइया आप नाम को उंगली करो, चूहे से कटवाओ, वो खुद ब खुद भागा भागा डाक्टर साहब के दवाखाने पे ले जायेगा, बिना किराया लिये.....।

डाक्टर साहब ने एक गलती कर दी है, अपने दवाखाने में यह कहीं नहीं लिखा है कि मरीज उनसे संपर्क कैसे कर सकते हैं? वो अपना मेल आईडी देना भूल गए हैं। उनसे उम्मीद करूंगा कि वो इसे जल्द ठीक कर लेंगे, लेकिन उनके ठीक करने के पहले ही मैं सभी बीमारों, सभी होशियारों, सभी बेचारों, सभी बेकरारों, सभी भड़ासियों को डाग्डर साहब की मेल आईडी बता देना चाहूंगा ताकि डाक्टर साहब इससे खुश होकर मेरा लीवर खराब होने पर मेरा इलाज करने मुंबई से खुद ब खुद दिल्ली चले आवे.....हा हा हा हा
डाक्टर साहब की मेल आईडी है....
rudrakshanathshrivastava7@gmail.com
(इसमें इतने लेटर माने अक्षर हैं कि लिखते लिखते कलम हांफने लगेगी)

तो साथियों, डाक्टर साहब का ब्लाग देखें, अपनी टिप्पणी वहां लिखें और आप या आपके परिजनों को कोई समस्या हो तो डाक्टर साहब को मेल करें। फ्री में बढ़िया वाला, बिना साइड इफेक्ट वाला इलाज करेंगे....।
जय भड़ास
यशवंत