कभी भी उपचार के लिये औषधियों का खर्च तो मांग नही सका, परामर्श शुल्क का तो सवाल ही पैदा नही हुआ और मेरी इसी फ़ितरत ने मुझे डा.रूपेश श्रीवास्तव बनाए रखा है। जिस दिन मैं आपके धन से रोटी खाने लगूंगा मुझे यकीन है कि मेरे हाथों का चिकित्सकीय गुण विदा हो जाएगा। जो मुझे निजी तौर पर जानते हैं वे मेरी इस बात से परिचित हैं। आज मैं हाथ जोड़ कर विनयपूर्वक उन लोगो से सहायता मांग रहा हूं जिन्हें मैंने मुंबई में अभय तिवारी भाईसाहब के घर पर देखा और जाना है, इनमें श्री प्रमोद सिंह जी, बोधि(सत्त्व)भइया , श्री उदय यादव जी, और श्री अनिल रघुराज जी; दूसरे दिन श्री हर्षवर्धन त्रिपाठी और श्री शशी सिंह से मिला था। आप सब में एक बात सर्वनिष्ठ है कि आप सब भावुक हैं दूसरों की पीड़ाओं को भली प्रकार समझ पाते हैं। आज मैं बिना किसी भूमिका के आप सभी से करुणाकर की बीमारी के इलाज के लिये यथासंभव अधिकतम आर्थिक सहायता की आशा कर रहा हूं ये धन आप सीधे ही उसके बैंक एकाउंट (Karunakar Mishra ,State Bank of India ,AC No. 30037096026) में जमा कर सकते हैं। जैसा कि आप सब जानते हैं कि वो बच्चा फ़ेफ़ड़ों के कैंसर की असाध्य स्थिति में पहुंच चुका है। एम्स के महान डाक्टरों ने उसे मात्र छह माह का जीवन है कह कर घर भेज दिया है लेकिन जब ऐसी परिस्थिति में कि रोगी गतायु हो तब कहा जाता है कि वैद्य अपने मान की रक्षा के लिये इस तरह के रोगियों का उपचार न करें किन्तु मैंने कभी इस नियम को अपने ऊपर लागू नही होने दिया और एक बार फिर से मैं इस नियम का उल्लंघन कर रहा हूं आप सब के सामने, जब कि सब जानते हैं कि करुणाकर की हालत कैसी है। मुझे भरोसा रहता है कि यदि मिल कर दुआ करें तो गतायु रोगी की भी प्राणरक्षा हो जाती है। मुझे जिन महानुभावों से आशा है कि वे मुझे इस कार्य की सफलता के लिये सहायता करेंगे वे हैं-- श्री अनिल रघुराज जी,श्री अभय तिवारी जी, श्री उदय यादव जी, श्री अजय ब्रह्मात्मज जी, श्री हर्षवर्धन त्रिपाठी जी, श्री शशी सिंह, श्री बोधिसत्त्व, श्री प्रमोद सिंह, श्री गुरुदत्त तिवारी, श्रीमती मुनव्वर सुल्ताना और सबसे अंत में मनीषा दीदी से भी आशा कर रहा हूं जो कि स्वयं भिक्षा पर ही जीवन यापन करती हैं(सहर्ष राजी हो गयीं हैं)। ज्यादा लिख नहीं पा रहा हूं दवाएं कूटने पीसने में लगा हूं क्योंकि कल या परसों करुणाकर आने वाला है। फिर करबद्ध प्रार्थना है कि सहायता शीघ्र करें विलंब से सब व्यर्थ होगा, हो सकता है कि आप कागज के रुपयों से किसी की जान बचा सकें..........
1.7.08
मैं डा.रूपेश श्रीवास्तव करुणाकर के उपचार हेतु आपके आगे झोली फैला रहा हूं
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डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
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Labels: करुणाकर, चिकित्सा, डा.रूपेश, दान, मरणासन्न, लंग्स कैंसर, सहायता
15.2.08
भड़़ासियों को फेमिली डाक्टर मिला...जय आयुषवेद
जम के पियो, डाक्टर अपने घर में है
भड़ासियों के लिए एक अच्छी खबर। उन्हें अब अपने व अपने परिवार के सेहत की चिंता फिकिर नहीं करनी चाहिए क्योंकि उन्हें उनका फेमिली डाक्टर मिल गया है। जी, ये फेमिली डाक्टर कोई और नहीं, अपने डाग्डर साहब हैं। डा. रूपेश श्रीवास्तव। अपना डाक्टर अव्वल दर्जे का भड़ासी है, यकीन न हो तो उनकी कल की पोस्ट पढ़ लीजिए जिसमें अपना डाक्टर कहता है कि उन्हें पीने वाले बहुत पसंद है। जब डाक्टर यह कह रहा है तो फिर क्या, पिये जाओ, लीवर वीवर की टेंशन छोड़ के। क्योंकि डाक्टर साहब ने भड़ासियों के लिए शाही दवाखाना खोल दिया है।
मुनव्वर सुल्ताना, जो की मुंबई की हैं, भड़ासी भी हैं, को आप पढ़ ही चुके हैं कि किस तरह डाग्डर साहब ने बड़े से बड़े रोग बिना पैसा लिए और बिना कोई गोली खिलाए ठीक कर दिया, सिर्फ अपने भारतीय आयुर्वेद के बल पर। डाग्डर साहब अपनी इस खूबी का कतई प्रचार नहीं करते। वैसे इस क्या, किसी खूबी का वो प्रचार नहीं करते, और न चाहते। मैंने उनसे रिक्वेस्ट किया था, डाग्डर साहब, एक ऐसा ब्लाग बनाओ जो सिर्फ आपके आयुर्वेद पर हो और वो डाक्टरी का ब्लाग भड़ासियों के लिए नर्सिंग होम की तरह हो। और उन्होंने कई दिनों की मेहनत के बाद भड़ासियों के लिए दवाखाना खोल ही दिया।
अब किसी भी भड़ासी को जुकाम हो जाए, दारू पीने से लीवर खराब हो रहा हो, पेट ज्यादा निकल रहा हो, बीपी हाई रहता हो, लिंग में किसी तरह की कोई दिक्कत हो, सांस उपर नीचे हो रही हो, कमर में दर्द रहता हो....तो वो शाही दवाखाने पे आएं। अपने भड़ास के डाक्टर की इस शाही क्लिनिक पर पहुंच जाएं। वहां अपना मर्ज विस्तार से बताए। नाम गुप्त रखना चाहे तो नाम गुप्त रखा जाएगा। और देखिए, ब्लाग पर डाक्टर साहब प्रिसक्रिप्शन लिख देंगे। बताएंग कि कौन सा फूल किस पत्ती के साथ मिलाकर बूक व पीस दें और उसे बकरी के दूध के साथ घोलकर पी जाएं। इसी तरह वो विस्तार से बतायेंगे कि आप किस रोग के लिए किस तरह की घास चरें, किस बीमारी के लिए गो मूत्र का सेवन करें.....मेरी बातें मजाक लग रही होंगी लेकिन का करें, ससुरी सीरियस बात भी मजाक में कहने की आदत है, या मजाक को भी सीरियसली पेश करने की आदत है, और इसी का नाम ज़िंदगी है, हंसते हुए जियो, मस्ती में जियो....देखो, पहले तो किसी डाक्टर की जरूरत ही नहीं पड़ेगी, दूसरे खुदा न खास्ता पड़ ही जाये तो अपने डाक्टर साहब का दवाखाना ज़िंदाबाद।
तो इतना लंबा भाषण पेलने के बाद आपको बता ही देते हैं, डाक्टर साहब की क्लीनिक, दवाखाना, नर्सिंग होम का पता, जहां वो दिन में दो बार बैठते हैं, सुबह और शाम। हालांकि मर्ज आप वहां पहुंच कर कभी भी बता सकते हैं, उनकी मेल आईडी पर।
तो नोट कीजिए, डाग्डर साहब के दवाखाने का नाम
आयुषवेद
अब आप कहेंगे कि नाम तो बता दिया, पता भी बताओ तो भइया आप नाम को उंगली करो, चूहे से कटवाओ, वो खुद ब खुद भागा भागा डाक्टर साहब के दवाखाने पे ले जायेगा, बिना किराया लिये.....।
डाक्टर साहब ने एक गलती कर दी है, अपने दवाखाने में यह कहीं नहीं लिखा है कि मरीज उनसे संपर्क कैसे कर सकते हैं? वो अपना मेल आईडी देना भूल गए हैं। उनसे उम्मीद करूंगा कि वो इसे जल्द ठीक कर लेंगे, लेकिन उनके ठीक करने के पहले ही मैं सभी बीमारों, सभी होशियारों, सभी बेचारों, सभी बेकरारों, सभी भड़ासियों को डाग्डर साहब की मेल आईडी बता देना चाहूंगा ताकि डाक्टर साहब इससे खुश होकर मेरा लीवर खराब होने पर मेरा इलाज करने मुंबई से खुद ब खुद दिल्ली चले आवे.....हा हा हा हा
डाक्टर साहब की मेल आईडी है....
rudrakshanathshrivastava7@gmail.com
(इसमें इतने लेटर माने अक्षर हैं कि लिखते लिखते कलम हांफने लगेगी)
तो साथियों, डाक्टर साहब का ब्लाग देखें, अपनी टिप्पणी वहां लिखें और आप या आपके परिजनों को कोई समस्या हो तो डाक्टर साहब को मेल करें। फ्री में बढ़िया वाला, बिना साइड इफेक्ट वाला इलाज करेंगे....।
जय भड़ास
यशवंत
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यशवंत सिंह yashwant singh
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