कमाल का ब्लाग है आयुषवेद, जिसे डाक्टर रूपेश श्रीवास्तव ने शुरू किया है। दिल्ली के किन्हीं विनय ने एक सवाल किया है, जो लगभग मेरे जैसा ही सवाल है, ये कहना गलत न होगा कि उन्होंने मेरे ही सवाल को, जो मैं लगभग पूछने ही वाला था डाक्टर साहब से, विनय ने कर दिया है।
वो सवाल ये है.....
शराब छोड़ना चाहता हूं .....
डाक्टर साहब, मेरा एक सवाल है। शराब छोड़ना चाहता हूं पर छोड़ नहीं पाता। सुबह कसम खा लेता हूं रोज कि नहीं पीनी। शाम होते ही सिर भारी होने लगता है और तलब महसूस होने लगती है। कोई ऐसी दवा या तरकीब बतायें ताकि शराब की तलब महसूस न हो।दूसरा सवाल है कि अगर मैं पिछले 15 साल से लगभग रोजाना पांच पैग दारू पी रहा हूं तो मेरा लीवर इस वक्त किस स्थिति में होगा। इसे ठीक रखने के क्या क्या देसी उपाय हो सकते हैं। मैं बहुत झिझकते हुए ये सवाल पूछ रहा हूं। कृपया उत्तर विस्तार से देने की कृपा करें। आपका आभारी रहूंगा। विनय, नई दिल्ली
इस सवाल का जो उत्तर दिया है डाक्टर रूपेश ने, जिन्हें आयुर्वेद में महारत हासिल है, वो काफी डराने चौकाने वाला है। मैं तो पढ़कर घबरा गया। बाप रे, दारू पीने के इत्ते गंभीर नतीजे। विश्वास न हो तो आप इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ लीजिए.....
दारू पीने के कितने नुकसान हैं, जान लो
इसके बाद आप पढ़िए....
लीवर तुझसे बदला लेगा बेटा, सुन बे...बड़ा आसान है शराब छोड़ना बोले तो बिलकुल शहद माफिक मीठा
और अंतिम पीस पढ़िए....
शराब छोड़ने के साधुओं के आजमाए नुस्खे
यकीन मानिए, आप अगर अव्वल दर्जे के दारूबाज हैं (मेरे जैसे) तो निश्चित ही ये तीनों पोस्टें पढ़कर पहले तो आपकी पूरी की पूरी फट जाएगी, भड़ाम हो जाएगी, पुर्जे पुर्जे बिखर जाएंगे, उसके बाद में थोड़ा साहस व ऊर्जा का संचार होगा, आखिर में आपके अंदर एक ऐसा जज्बा पैदा होगा कि आप तय कर लेंगे, अमां यार, इतना आसान है तो चलो एक बार देख ही लेते हैं डाक्टर साहब के इस चूतियापे के सुझाव को। और भाई जान, हो सकता है ये चूतियापे के सुझाव मेरे व आप जैसों की जिंदगी में किसी चमत्कार की तरह लौट आए।
आपको मालूम है, किन चीजों के सहारे दारू छोड़ सकते हैं हम, वो ये हैं....
शहद की एक शीशी,
शिमला मिर्च,
सल्फ्यूरिक एसिड,
शिवाम्बु बोले तो स्वमूत्र,
गुलकंद,
SPIRTAS GLANDIUM QUERCUS नामक चर्चित होम्योपैथी दवा जिसको बेचकर कई लोगों ने करोड़ों रुपये कमाए हैं,
पूजा अर्चना,
परिजनों के साथ शाम बिताने की तमन्ना....
जैसी चीजों के जरिए आप शराब को टाटा बायबाय कह सकते हैं। उपरोक्त चीजौं को कैसे करना है, कब लेना है, क्यूं लेना है, इसके बारे में पहले आप पढ़ें फिर तय करें। और पढ़ने के लिए उपर दिये गये तीनों लिंक पर क्लिक करें।
मैंने तो इन नियमों को आजमाने की ठान ली है क्योंकि आदमी से कभी बड़ी शराब नहीं होती और इच्छा शक्ति से कभी बड़ी चीज कोई बुराई नहीं होती। हां, ये सही है कि मैं दारू को प्यार करता हूं लेकिन पिछले कई महीनों से हर सुबह दारू से घृणा करने लगता हूं और शाम होते होते दारू तलाशने लगता हूं। मतलब एक अच्छे खासे शराबी और नशेबाज जैसा हो चुका हूं। इससे पिंड छुड़ाने के लिए अपने दिल्ली वाले किसी विनय नामक साथी के सवाल पूछने पर डाक्टर रूपेश ने जी कीमती सलाह दी है, वो वाकई काबिलेतारीफ है। अगर डाक्टर साहब अनुमति देंगे तो मैं उपरोक्त तीनों पोस्टों को भड़ास पर अलग अलग हेडलाइन के साथ डालना चाहता हूं।
और हां, भाई भड़ासियों, देखा भड़ास का कमाल, डाक्टर रूपेश जैसा जो साथी भड़ास को मिला है, उसी की बदौलत हम ये नेक काम कर पा रहे हैं जिसमें अपन जैसे दरूहल साथियों को दारू छुड़ाने के लिए इतने अच्छे सलाह मिलने लगे हैं। तो जोर से बोलो...
जय भड़ास,
जय डा. रूपेश,
जय मनुष्यता....
अगर भड़ास के फेमिली डाक्टर ब्लाग आय़ुषवेद पर अपने व अपने परिजनों व मित्रों की किसी चिकित्सा समस्या का हल चाहते हैं तो आप डाक्टर साहब से सीधे सवाल कर सकते हैं, उनकी मेल आईडी पर भेजकर, वो उसका जवाब आयुषवेद पर प्रकाशित कर देंगे। डाक्टर साहब की मेल आईडी है...
rudrakshanathshrivastava7@gmail.com
यशवंत
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26.2.08
डाक्टर साहब, मैं दारू छोड़ना चाहता हूं....
Posted by
यशवंत सिंह yashwant singh
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Labels: आयुषवेद, इलाज, जय, डा. रुपेश, डाक्टर साहब, दारू, भड़ास, मुफ्त, सलाह
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