Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

Showing posts with label क्रिकेट. Show all posts
Showing posts with label क्रिकेट. Show all posts

4.4.11

गधे बन गए बाप?- `माही` (धोनी)

गधे बन गए बाप?- `माही` (धोनी)


  http://mktvfilms.blogspot.com/2011/04/blog-post_04.html


============
 

`माही..माही..माही..भाई, ये तुमने क्या कही..!!`
 गधे बन गए बाप, बता क्या ग़लत, क्या सही?"

 

============
 

प्रिय भाई, श्रीमहेन्द धोनी उर्फ माही,
 

सबसे पहले तो क्रिकेट विश्व कप जीतने की खुशी में, हम सभी ब्लॉगर्स बंधु-भगिनी की ओर से ढेर सारी बधाई ।
 

मगर..मगर..मगर?  फाइनल मैच जीतने के पश्चात हुए साक्षात्कार में, एक सवाल के जवाब में, तुमने ये बात क्यों कही और कैसे कही ?
 

प्रिय माही,शायद तुम्हें पता होगा, रोमन तत्व चिंतक,छटादार वक़्ता, राजनीतिक, प्रसिद्ध न्यायविद और रोमन साम्राज्य के संविधान के रचनाकार, मार्कस ट्यूलिस सिसेरो (कार्यकाल, ३ जनवरी १०६ बीसी से ७ दिसम्बर ४३ बीसी) ने, भले ही कहा हो की, " हमें यही कल्पना करनी चाहिए, सारी अखिल सृष्टि (पृथ्वी) और समग्र मानव जाति, एक अखंड राष्ट्र समूह है । परमेश्वर और सारे मानव इस राष्ट्र समूह का हिस्सा है । (वसुधैव कुटुंबकम ।)
 

मिस्टर मार्कस ट्यूलिस सिसेरो की, ये बेतुकी बात, माही तुमने क्यों दोहराई? ऐसा कोई करता है क्या?
 

तुमने कहा," हम टॉस भले की हार गए, पर आज दोनों टीम, अच्छे टीम स्पिरिट के साथ, एक होकर खेली, क्रिकेट विश्व में खेल भावना की जीत हुई..!!"
 

क्यों भाई, जीतने के बाद, थकी-हारी विरोधी `अतिथि टीम` को, ऐसा चुटकुला कोई सुनाता है क्या? हमारे देश की `अतिथि देवो भवः।` की परंपरा भूल गए क्या?
 

( भूल गए हो तो, हमारे कई ब्लॉगर, तुम्हारे ब्लॉग पर टिप्पणी करके याद दिला सकते हैं, भेज दूँ, क्या उन सब को?)
 

हमारे कई  ब्लॉगर मित्रों का यह मत है की, तुमसे एक सीधा सा सवाल किया गया था, इसका मतलब ये नहीं है, हँसी-मज़ाक समझकर, शालीनता त्याग कर कोई भी, कैसा भी मन चाहा, अंट शंट उत्तर दे दो..!! हँसी मज़ाक भी एक मर्यादा में हो तो ही बेहतर होता है ।  `हे..माँ, मा..ता..जी..!!` 


मैं भी अपने मित्रों की इस बात से सहमत हूँ, यह सब कुछ ज्यादा हो गया..!!
 

हमें अपनी इन्सानियत नहीं छोड़नी चाहिए । बेशक, वर्ल्ड कप के फाइनल में हिंदुस्तान ने,श्रीलंका को हराया, मगर ये एक खेल है । जीतने के बाद भी, हमें खेल भावना बरकरार रखनी चाहिए ।
 

"ये बात अलग है की  श्रीलंकाई क्रिकेट टीम के कप्तान कुमार संगकारा , टॉस उछलने के बाद, तुरंत अपनी बात से मुकर गया और फिर से टॉस उछालना पड़ा..!!"
 

फिर भी इन्सानियत के खिलाफ दिए गये, तुम्हारे इस उत्तर की हम कड़ी निंदा करते हैं..!!
 

============
 

अब तुमने ये भी कहा," अच्छा हुआ, हम मैच जीत गए, वर्ना मुझे देशवासीओं को जवाब देना पड़ता की, अश्विन की जगह श्रीसंत क्यों और बल्लेबाजी के क्रम में, युवराज की जगह, मैं क्यों?"
 

माही, अगर तुम चाहो तो, हमारे देश में, आजकल सब के बाप होने का दावा करके बिंदास धूम रहे, कई पदासिन या पदभ्रष्ट (पथ भ्रष्ट?) गधों के नाम लेकर, मैं  अभी उनकी संख्या बता सकता हूँ..!! ऐसे नकली बाप को तो, किसी ने कुछ नहीं कहा?  फिर, तुम को ही क्यों कुछ कहते?
 

तुम ये भी तो कह सकते थे, "मैं मजबूर था, मेरे हाथ बंधे हुए थे..!! इतना ही नहीं, किसी बड़े नामधारी सिलेक्टर, मीडिया महिला या पुरुष पत्रकार  या फिर मेरी मर्ज़ी विरुद्ध, दूसरे किसी के दबाव में आकर श्रीसंत को टीम में सामिल करना पड़ा?"
 

रही,  युवराज से, आगे क्रम में खेलने की  बात..!! देश की आपत्ति के वक़्त, अपने कंधो पर सारी जिम्मेदारी लेकर, टीम की रहनुमाई करने जैसा, ग़लत उदाहरण कायम करके, तुमने आज की युवा पीढ़ी को गुमराह करने का, बहुत बड़ा पाप किया है..!! तुम्हें ये शोभा नहीं देता..!! 

 

माही, अब मैं तुमसे एक सवाल करता हूँ, ईमानदारी से उत्तर देना..!!
 

( भ्रष्ट नेताजी की तरह, ये मत पूछना, ईमानदारी किस चिड़िया का नाम है?)
 

*  रियलिटी शॉ, `राखी का इन्साफ़` पर कथित आरोप था की, किसी निर्दोष लक्ष्मण को, ` नामर्द- नपुंसक` कहा गया और उसे  उकसा कर, ख़ुदकुशी करने के लिए  मजबूर किया गया..!! उनको तो किसी ने कुछ नहीं कहा?  फिर, तुम्हें ही क्यों कुछ कहते?
 

(आज, कलयुग के रामराज्य का यह दुर्भाग्य है की, " हम लंका तो जीत लेते हैं, पर लक्ष्मण को `नामर्द` की गाली देकर, बे-मौत ही मार देते हैं ..!! हे  बजरंग बली, आप तो सदा अमर हैं, अब तो गदा धारण कीजिए?")
 

* रियलिटी के नाम पर, `बिग बॉस` में अली और सारा की, सुहाग रात `LIVE` दिखाने के आरोप चेनलवालों पर हुए थे..!!  हुए थे ना? तो फिर, उनको तो किसी ने कुछ नहीं कहा? तुम को ही क्यों कहते?
 

============  
मैच के बाद, साक्षात्कार में, तुमने यह भी कहा की," ये जीत हमारे कोच- गैरी कर्सटन से लेकर, सारी टीम के प्रयत्न का फल है । इस जीत में जिन्होंने अपना योगदान किया है, उन सब का मैं शुक्रिया अदा करता हूँ ।"
 

क्यों भाई,माही? ऐसा झूठ उगलने की क्या ज़रुरत थी? आज़ादी के `स्वर्ण जयंती महोत्सव` का जश्न मना कर अब हम `प्लॅटिनम ज्यूबिली` की ओर बढ़ रहे हैं ।  इतने बरसों में,हमारे देश में, इतनी सारी सरकारें सत्ता पर आसीन होकर, निष्ठापूर्वक अपना-अपना ( खुद का) `काम` करके चली भी गई..!!  आजतक, एक भी सरकार ने, अपनी किसी उपलब्धि या तो फिर कामयाबी का श्रेय, अपनी कैबिनेट टीम, या  देशवासीओं को दिया? नहीं ना? (ही..ही..ही..ही..!!)
 

सत्तासिन (नशाधिन?) उच्च पदाधिकारी,  पी.एम.से लेकर चपरासी तक, सभी लोग अच्छे-अच्छे कामों का श्रेय किसी आलतु-फालतु को नहीं देते और बुरे कामों में अपनी असहायता-मजबूरी का राग आलापते हैं? फिर क्या सोचकर, तुमने अपने जीत के जश्न में, सभी साझीदारों की वाहवाही की? ये ठीक नहीं किया..!!
 

श्रीसुभाषचंद्राजी की, ICL (इंडियन क्रिकेट लीग) को टूर्नामेंट आयोजित करने के लिए, BCCI के मना करने के बाद, Bihar Cricket Association (BCA-1935) के  प्रेसिडन्ट श्रीलालुप्रसादजीने, जब वह रेल मंत्री थे तब देश के  सारे रेलवे स्टेडियम की सुविधा ICL  को  देने की उदारता जताई थी ना? उनको तो किसी ने `थेंक्यु`  तक नहीं कहा..!!
 

( ये बात और है की, उस वक़्त, श्रीसुभाषचंद्राजी ने, रेलवे स्टेडियम पर, गाय-भैंस को, बचा कूचा हुआ चारा चरते हुए पाया था?)
 

सोचो अगर, रेलवे जैसी महा मुनाफ़ा करनेवाली सरकारी संस्था के पास, सुविधाओं के नाम पर, क्रिकेट स्टेडियम का ऐसा हाल है तब, दूसरे खेलों के स्टेडियम्स का, क्या हाल होगा, सब लोग जानते हैं..!!
 

शायद, सभी खेलों के लिए, देश में आधुनिक सुविधा मुहैया जब कराई जायेगी, उस समय तक, कई आशास्पद, उगते खिलाड़ीओं के बारे में, यही  कहने की नौबत आ जायेगी की,`गढ़ आला पर सिंह गेला..!!`
 

दोस्त माही,सच कहना, हिंदुस्तान की क्रिकेट टीम के कप्तान बनने से पहले, खुद तुम्हें खेलने के लिए कितनी सरकारी सुविधा मुहैया कराई गई थीं? शायद..०,०..!!
 

============
 

तुमने साक्षात्कार में ओर, यह भी कहा की," हमें लगातार प्रोत्साहित करने के लिए, मैं सारे देशवासीओं का शुक्रिया अदा करता हूँ ।"
 

माही, हमें मज़ाक पसंद नहीं है और ऐसे मज़ाकिया स्टेटमेन्ट्स कतई कबूल नहीं है..!!  हम विद्वान, गुणवान, कदरदान, नादान क्रिकेट प्रेमी ब्लॉगर्स, तुम्हारी ऐसी मज़ाक की घोर निंदा करते हैं, क्योंकि..!!
 

अगर, तुम्हारी सारी बातों के साथ हम सहमत हो गये तो, सभी देशवासीओं के `जश्न -ए- जुलूस` में  हमारे साथ, मलिन इरादे वाले कुछ गिने चूने भ्रष्ट गधे भी, `बाप` बन कर,अपने चारों पैरों को उछालते हुए, `होंची..होंची..होंची`, का बेसुरा राग छेड़ कर, सारा माहौल सरकारी-तरकारी मार्केट (संसद?) जैसा बना देंगे..!!
 

ठीक है..!! आज तक, हम ऐसे गधों को बरदाश्त कर रहे हैं, पर अब उनकी गद्धा-लातों से, ज़ख्मी होने के लिए हम तैयार नहीं है..!! 
 

माही, आइन्दा किसी से भी, अगले साक्षात्कार के समय, हम सब ब्लॉगर्स की यह अमूल्य नसीहत को ध्यान में रखना और कुछ अनाप-सनाप जवाब देने से पहले सौ बार सोचना, वर्ना..!!


हम `ऑल इंडिया` के सारे नसीहतबाज, उत्साहयुक्त ब्लॉगर्स, सभी क्रिकेटर्स  के ब्लॉग पर आकर,अपने मन की सारी भड़ास निकाल कर, ऐसी-ऐसी  टिप्पणियां करेंगे की, आप सब लोग  ब्लॉगिंग करना तो क्या, क्रिकेट खेलना  भी छोड़ देंगे..!!
 

अंत में,  हम सभी ब्लॉगर्स, देश के सभी, विद्वान और बुद्धिजीवी महानुभव से, यही कहना चाहते हैं की,
 

" एवमेतध्यथात्थ   त्वमात्मानं   परमेश्वर ।
  द्रष्टुमिच्छामि  ते रूपमैश्वरं पुरूषोत्तम ॥३॥"  

 

"विश्व रुप दर्शन योग-अध्याय-११- श्रीमद्भागवत  गीतापुराण "  
मित्र माही, हम जीत के आनंद को अपनी कटु वाणी से कलुषित करना नहीं चाहते थे,मगर क्या करें? कोई सुननेवाला नहीं है..!!



हम तो बस इतना ही चाहते हैं की, श्रीमद्भागवत  गीतापुराण में, धनुर्धर अर्जुन को विषाद योग से मुक्ति दिलाकर, भगवान श्रीकृष्णने जैसे अर्जुन को विजयपथ पर प्रेरित किया था, इसी तरह, किसी ग़रीब आदिवासी या समाज के पिछड़े दलित परिवार के संतान को, ज्ञान, ऐश्वर्य, शक्ति, वीर्य और तेज युक्त, साक्षात ईश्वर रुप रमतवीर के,`विश्व रुप` का हम दर्शन करना चाहते हैं ।
 

दोस्तों, अब क्या करें?


चलो, कोई दिक्क़त नहींजी..!!


अगले क्रिकेट वर्ल्ड कप के आने तक, प्रतीक्षा करें..!! ओर क्या?
 

============

`ANY COMMENT`


(ख़ास अनुरोध) "कृपया, हो सके तो टिप्पणी, मेरे ब्लोग MKTVFILMS या तो, E-Mail; mdave42@gmail.com  पर ही करें, अगर व्यंग समझ न आयें तो, कृपया टिप्पणी न करें..प्ली..ज़..!! मेरे मन को  गहरी ठेस पहुँचती है । बहुत-बहुत शुक्रिया ।) 

मार्कण्ड दवे । दिनांकः ०३-०३-२०११.

3.4.11

कलयुग जायेगा,सतयुग आएगा

श्रीगंगानगर-अब ठीक है। बेक़रार दिल को सुकून मिल गया। मन प्रसन्न है। आत्मा ख़ुशी के तराने गा रही है। हिन्दूस्तान क्रिकेट का बादशाह बन गया। सब चिंताएं समाप्त। कोई परेशानी नहीं। देश में क्रांति होगी। कप आ गया अब जो आपके सपने हैं सब पूरे हुए समझो। घोटाले नहीं होंगे। जो हो चुके उनके पैसे सरकारी खजाने में आ जायेंगे। नेता ईमानदार हो जायेंगे। करप्शन इतिहास बन जायेगा। देश में कानून का राज होगा। कानून भी सब के लिए बराबर। जाति,धर्म,अमीर,गरीब देख कर कोई भेद भाव नहीं। मंत्री भी सरकारी कर्मचारी,अफसर की तरह दफ्तरों में बैठेंगे। वे भी तो वेतन लेते हैं। जनता के काम कर्मचारी,अधिकारी,मंत्री अपना काम समझ कर तुरंत करेंगे। अब फैसले नहीं न्याय होगा। पीड़ित को न्याय के लिए इंतजार नहीं करना होगा। वह खुद उसकी चौखट पर आएगा। पुलिस दादागिरी छोड़कर प्रताड़ित का साथ देगी। खुद किसी को तंग परेशान नहीं करेगी। अपराधियों से अपनी मित्रता तोड़ देगी। सज्जन लोगों का साथ करेगी। थानों में सुनवाई होगी। ऊपर की कमाई नहीं होगी। फरियादी को भटकना नहीं पड़ेगा। नेता जनता के प्रति जवाबदेह होंगे। चुनाव में भले आदमी खड़े होंगे। कई भले लोगों में से सबसे भले को चुनना होगा। नगर पालिका से लेकर संसद तक में जनता के लिए काम होगा। हल्ला-गुल्ला,लड़ाई झगडा,मार-पीट, गाली-गलौच बिलकुल बंद। संवेदनशील अफसर फिल्ड में लगेंगे। काम के लिए सिफारिश की जरुरत ख़तम। सरकारी अस्पतालों में इलाज होगा। सभी उपकरण एकदम ठीक काम करके सही रिपोर्ट देंगे। दवाई सस्ती होगी। जेलों में सालों से बंद पड़े बंदियों की सुनवाई होगी। रसोई का सामान सस्ता होगा । भिखारी नहीं रहेंगी। सबको योग्यता के हिसाब से काम मिलेगा। कोई भूखा नहीं सोयेगा। सब के तन पर कपडे होंगे। बेघर के घर अपने होंगे। काला धन सब देश में आ जायेगा। वह देश,जनता की उन्नति के लिए खर्च होगा। हमारा प्रधानमंत्री मजबूर नहीं होगा। अफजल,कसाब को फंसी होगी। जम्मू-कश्मीर सच में हमारा होगा। जैसे बाकी राज्य। टैलेंट की कद्र होगी। आरक्षण नहीं रहेगा। न्यूज चैनलों पर खबर दिखाई जाएगी। कलयुग सतयुग में बदल जायेगा। दूध दही की नदियाँ बहने लगेगी।देश की सभी समस्याओं का अंत तुरंत हो जायेगा। अमेरिका की हुकूमत हिन्दूस्तान पर नहीं चलेगी। दुनिया हमारे इशारे पर चलेगी। क्योंकि हम विश्व विजेता हैं क्रिकेट के। क्या बकवास करते हो? ऐसा कुछ नहीं होने वाला! क्यों? किसने कहा? ना जाने किस किस बात से दुखी, हैरान,परेशान करोड़ों लोग रात भर से ख़ुशी में सराबोर होकर बेवजह थोड़ी नाच रहे हैं। माता पिता के जन्म दिन पर उनको बधाई दी हो या नहीं मगर अब जाने अनजाने सबको मुबारक बाद दे रहे हैं। जब सब खुश हैं। सभी में उमंग है। बधाई दे ले रहे हैं। मिठाइयाँ बाँट रही है। पटाखे चल रहे हैं। सभी छोटे बड़ों के चेहरों पर मुस्कान है। और तुम कह रहो हो कि वर्ल्ड कप जीतने के बावजूद जनता की किसी भी परेशानी, दुःख,तकलीफ पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। वे सब की सब हमारी नियति है। हमारी तक़दीर है। इनको तो भोगना ही है। हम तो वर्ल्ड कप के बहाने कुछ क्षण के लिए इनको भूलना चाहते हैं इसलिए ख़ुशी दिखाकर अन्दर के दर्द छिपा रहे हैं। सच्चाई सबको पता है।

1.4.11

ये क्‍या कह रही हो तुम....


http://www.atulshrivastavaa.blogspot.com/

फाईल फोटो साभार samaylive.com

सबसे पहले मैं माफी चाहता हूं, इस तस्‍वीर को अपने ब्‍लाग में लगाने के लिए, लेकिन क्‍या करूं लगाना पडा। फिल्‍मों में हिरोईन कम कपडों में दिखाई देती हैं और अंतरंग दृश्‍य देती हैं, बाद में यह कहकर अपना पल्‍ला झाड लेती हैं कि कहानी की यह मांग थी। मैं भी शायद इसी सोच के साथ इस तस्‍वीर का प्रयोग कर रहा हूं। अब वे हिरोईनें कितना सच बोल रही होती हैं, यह तो मैं नहीं जानता पर मैं यहां सोलह आने सच बोल रहा हूं यह मैं आपको यकीन दिलाता हूं। (इसीलिए मैंने इस तस्‍वीर को निंगेटिव शेड दे दिया है।)  
अब आता हूं मुददे  की बात पर। भारत विश्‍व कप के फायनल में पहुंच गया है। दो अप्रैल को उसका श्रीलंका से मुकाबला है। क्रिकेट पर सटटा लग रहा है, क्रिकेट को लेकर जुनून चरम पर है। कोई व्रत रख रहा है  तो कोई हवन कर रहा है, इस उम्‍मीद में कि भारत विश्‍वकप जीत जाए। 1983 का इतिहास दोहरा दिया जाए। कुल मिलाकर जुनून पूरे चरम पर है। विश्‍वकप में भारत जीते यह हर भारतीय की इच्‍छा है और हर भारतीय विश्‍व कप को इस बार अपने देश में ही रखने की तमन्‍ना रखता है लेकिन इसी बीच एक माडल ने जो बात कही है वह अपने आप में न सिर्फ आपत्तिजनक है बल्कि भारतीय परंपरा के बिल्‍कुल विपरीत भी है।
अब फिर से इस तस्‍वीर पर आता हूं। यह तस्‍वीर है, एक उभरती हुई माडल पूनम पांडे की। किंगफिशर जैसी कंपनियों के लिए विज्ञापन करने वाली पूनम का कहना है कि भारत के विश्‍वकप जीतने पर वह न्‍यूड  होकर अपनी खुशी का इजहार करेगी। वह कहती है कि वह ऐसा टीम इंडिया के हौसले को बढाने के लिए करना चाहती है। अब यह तो पूनम पांडे ही जाने कि यदि टीम विश्‍वकप जीत जाती है तो उसकी इस ‘हरकत’ से टीम का हौसला किस तरह बढ जाएगा। खैर अपनी धुन में मगन पूनम यह भी कहती है कि वह ड्रेसिंग रूप में खिलाडियों के सामने न्‍यूड होगी और यदि सरकार और बीसीसीआई उसे इजाजत दे तो वह स्‍टडियम में भी ऐसा कर सकती है।
विदेशों में इस तरह की घटनाएं आम हैं लेकिन भारत में इस तरह की घोषणा अपने आप में नई बात है और आश्‍चर्यजनक भी। पूनम की इस घोषणा ने यह तो दर्शाया  है कि भारत में क्रिकेट को लेकर दीवानगी किस हद तक है लेकिन क्‍या पूनम की इस तरह की घोषणा भारतीय संस्‍कृति के अनुकूल है। क्‍या किसी को अपनी दीवानगी दिखाने का यही एक तरीका सूझ सकता है।
इस खबर को जब मैंने पढा तो ऐसा लगा कि यह महज क्रिकेट के प्रति दीवानगी की बात  नहीं, कहीं न कहीं प्रचार पाने का तरीका है और मानसिक दीवालिएपन का भी परिचायक है। आप इस बारे में क्‍या सोचते हैं। हर भारतीय चाहता है कि भारत विश्‍वकप जीते लेकिन क्‍या एक भी भारतवासी ऐसा होगा जो यह सोचता होगा कि इसके बाद पूनम की इच्‍छा पूरी हो। ईश्‍वर से यही कामना कि भारत को विश्‍व विजेता बनाए और पूनम को सदबुध्दि दे।

31.3.11

हमारी संस्कृति है,संस्कार है

श्रीगंगानगर-कमाल है,खेल खेल में भारत एकता के सूत्र में बंध गया। क्रिकेट ने वह कर दिखाया जो राजनेताओं की अपील,धर्मगुरुओं के उपदेश, टीचर्स की क्लास नहीं कर सकी। देश के कण कण से एक ही स्वर सुनाई दे रहा था, हम जीत गए। भारत विजयी हुआ। जाति,धर्म,समाज,पंथ सब गौण हो गए। रह गया तो भारत और उसकी पाक पर विजय का उल्लास। दिन के समय किसी काले पीले तूफान के कारण गहराती शाम का दृश्य तो याद है। लेकिन आधी रात को दिन जैसा मंजर पहली बार देखा। १९८३ में भी हमारी टीम रात को ही वर्ल्ड कप जीती थी। ऐसा कोलाहल तो तब भी नहीं दिखाई,सुनाई दिया। तीन दशक में क्रिकेट बादशाह होकर हम पर राज करने लगा। क्रिकेट खेलों का राजा हो गया। इसके आगे कोई नहीं ठहरता। क्रिकेट जन जन के दिलों में धड़कता है। वह उम्मीद है। जीवन है। जुनून है। कारोबार है। ग्लेमर है। उसकी जीत भारत के अलग अलग कारणों से परेशान जनता को खुश कर देती है चाहे कुछ देर के लिए ही सही। इससे अधिक और कोई खेल किसी को दे भी क्या सकता है। जो क्रिकेट दे रहा है, वह तो तमाम खेल मिल कर भी नहीं दे सकते। इसे क्रिकेट की महानता कहो या जनता का पागलपन,दीवानगी। क्रिकेट ऐसा ही रहेगा। अन्दर तक जोश भर देने वाला। सभी आवश्यक कामों को मैच के बाद तक टाल देने वाला। क्रिकेट मैच की जीत जनता के अन्दर नवजीवन का संचार करती है। हार मायूसी। खिलाडी हार के बाद उतने मायूस नहीं होते जितने लोग। क्रिकेट मैच ने कई घंटे तक सबको एक जगह रुकने के लिए मजबूर कर दिया।सरकार ने मैच देखने के आदेश नहीं दिए थे। कोई टोटका भी नहीं था कि मैच देखने से जीवन में खुशहाली आएगी। इसको देखने से कोई ईनाम भी नहीं मिलना था। इसके बावजूद सब व्यस्त थे। मैच के अंतिम क्षणों में जब भारत की जीत साफ दिखाई दी तो हल्ला गुल्ला शुरू हो गया। जैसे ही पाकिस्तान हारा भारत की जीत का उल्लास घरों के कमरों से लेकर सड़कों पर उतर आया। टीं,पीं,पों ,हुर्रे,हूउ...... के मस्ती भरे कोलाहल ने कई घंटे से पसरे सन्नाटे की गिल्लियां उड़ा दी। जो सड़क,गली सुनसान थी वहां पटाखों के शोर ने विजय के तराने गाए। गलियों में भारत माता की जय का उदघोष करती टोलियाँ घरों की चारदीवारी,बालकोनी में खड़े बच्चों को जोश दिला रही थी। फिर ना तो माता पिता की डांट की परवाह ना सुबह होने वाली परीक्षा की चिंता। सबके स्वर एक हो गए। विजय का उदघोष और तेज होकर वातावरण को आह्लादित करने लगा। कई घंटों से ठहरा हुआ भाव रूपी जल लहरें बन ख़ुशी से नृत्य करने लगा। क्रिकेट की अ,आ,इ ..... नहीं जानने वाला पूरे माहौल को अचरज से देख रहा था। उसके चेहरे पर ख़ुशी थी। ख़ुशी इस बात की कि वह जानता है कि यह भारत में ही संभव है जहाँ खेल खेल में अनेकता को एकता में बदला जा सकता है। क्रिकेट तो एक बहाना है। असल में यह हमारे संस्कार है। हमारी संस्कृति है। जिस पर युगों युगों से हमें गर्व है और हमेशा रहेगा।

30.3.11

लाटरी में भारत की जीत

जयपुर--सुबह का वक्त। कृषि विपणन मंत्री गुरमीत सिंह कुनर अपने सरकारी आवास पर आज कुछ अधिक व्यस्त हैं। दोपहर बाद मंडियों के आरक्षण की लाटरी निकालनी है। इसी से उनके दिल में आइडिया आया। भारत -पाक के लिए लाटरी निकालने का। सेमी फ़ाइनल में दो दिन बाकी थे । मन में उत्सुकता है कि कौन जीतेगा!वह दो दिन बाद होने वाले नतीजे को अभी जां लेना चाहता है। मगर आज बताए कौन कि जीत किसकी होगी। इस बारे में भविष्यवाणी करना असंभव है। तो क्या करे! दिल है की मानता नहीं। यही है क्रिकेट का जुनून,जादू । कोई भी हो, सर चढ़ कर बोलता है। बस, कुनर ने उन्होंने दो पर्चियां बनाई। एक पर लिखा भारत,एक पर पाकिस्तान। दोनों को मेज पर रख दिया। अपनी नन्ही सी पोती ख़ुशी को बुलाया। पर्ची उठवाई। जो पर्ची ख़ुशी ने मासूमियत से उठाई उस पर भारत लिखा था। मतलब, सेमी फ़ाइनल भारत की टीम जीतेगी। पर्ची कोई ऑक्टोपस नहीं,लेकिन गुरमीत सिंह को विश्वास है। मन को तसल्ली हुई। एक मासूम बालिका जो क्रिकेट को ना तो जानती है ना समझती है उसके हाथ ने जो पर्ची उठाई उस पर भारत है इसलिए भारत की जीत की सम्भावना है। इस प्रकार के टोटके हिन्दूस्तान में बहुत किये जाते हैं। असल मैच में क्या होगा? कौन जानता है। परन्तु श्री कुनर का दिल यह मानता है कि जीत भारत की होगी। बहुत कम लोग जानते हैं कि गुरमीत सिंह कुनर क्रिकेट मैच देखने के बहुत शौकीन हैं। आज से नहीं पहले से ही। यह उनके द्वारा अपने घर में निकलवाई गई लाटरी से भी साबित होता है। बेशक उस लाटरी का कोई मतलब नहीं मगर यह बात यह तो साबित करती ही है कि उनको क्रिकेट कितना भाता है।

6.1.10

हार से हुई साल की शुरूआत


हैप्पी नहीँ इयर 20टेन


अपनी किस्मत की कहानी अगर कोई लिखना चाहता है तो वो उसी वक्त हार की ओर चल देता है । जीत उनके कदमों से कोसों दूर हो जाती है और मंजिल का तो अता-पता ही नहीं होता। मैं ये लाइन इसलिए लिख रहा हूं कि टीम इंडिया ने दावा किया था कि साल 20टेन की शुरूआत जीत के साथ करेंगे और दावा मजबूत भी दिखा क्योंकि बांग्लादेश में ट्राईसीरीज के दौरान टीम इंडिया अपना पहला मैच उस टीम के खिलाफ खेल रही थी जिसे 2009 के अंत में करारी शिकस्त दी थी। सबकी उम्मीदें भारत श्रीलंका के खिलाफ मुकाबले पर टिक गई। पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया ने अच्छा खासा स्कोर भी खड़ा कर दिया। 279 रन बनाकर टीम इंडिया ने श्रीलंका को हराने का ख्वाब भी देख लिया लेकिन माही की सेना ये भूल चुकी थी की पिछला सीरीज उन्होंने बल्लेबाजों के दम पर जीता था न कि गेंदबाजों की बदौलत। 280 रनों का पीछा करने उतरी श्रीलंकाई टीम दिलशान,जयवर्धने जयसूर्या,मेंडिस और मुरलीधरन के बगैर ये मैच आसानी से जीत ले गई। और सेनापति धोनी के अलावा उनके रणवीर खिलाड़ी देखते ही रह गए। ये थी साल 20टेन की शुरूआत में ही मिली करारी शिकस्त। मैच से पहले क्रिकेट फैंस से जीत का दावा करने वाले धोनी मैच के बाद अपनी गलतियों पर ध्यान न देकर हार के लिए ड्यू फैक्टर को जिम्मेदार ठहराने लगे । ये वही धोनी की वाणी है जिनके बारें में कहा जाता है कि किस्मत उनके दरवाजे पर सजदा करती है। तो क्या धोनी की किस्मत साल के शुरूआत में उनसे रूठ गई। या फिर धोनी उस लम्हें को भूल गए जब माही ने अपनी सेना के साथ न जाने कितने किले फतह किए। खैर हमारे एमएस साहब को भी समझ आ गया कि किस्तम के वो कब तक खाते रहेंगे कभी तो किस्मत उनसे आगे निकलेगी और हुआ भी वही हैप्पी न्यू ईयर अभी शुरू हुआ भी नहीं होगा कि माही की किस्मत उनसे आगे निकलना शुरू कर दिया। साल की पहली हार पर एक कहावत याद आ जाती है जिसे खासकर ग्रामीण इलाके में काफी बोली जाती है-बोहनी ही अच्छा नहीं हुआ तो दिन क्या खाक बेहतर गुजरेगा। ये कहावत खासकर बनिया समाज के लोग ज्यादा उपयोग में लातें है । यही हाल टीम इंडिया का हुआ है जीत से बोहनी नहीं हुई तो क्या खाक आगे की कहानी पहले से बताएंगे। खैर टीम इंडिया को जो होना था सो हो गया लेकिन पलटवार करने में माहिर माही के मतवाले का भरोसा भी नहीं होता क्योंकि सेनापति महेंद्र सिंह धोनी कभी भी अपनी रणनिती की धार दिखा सकतें है। लेकिन हम तो टीम इंडिया के रणबांकुरों से यही उम्मीद करतें है कि वो भारतीय फैंस का मनोबल यूं न तोड़ें ।


रजनीश मेहता
स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट

2.2.08

क्रिकेट भी बन गया है व्यापार

खेल में हार भी नहीं होती हार
खेल में जीत नहीं होती प्यार

मिलती किसे सदा खेल में हार
खेले जाओ सदा यही करो वार

हारने पर भी गले में डलवायें हार
हारना भी है एक अनोखा उपहार

खेलो खेल भावना से करो प्यार
हारो और हारो भारत के सरदार

गिरो तुम भी डरो मत मेरे यार
क्रिकेट भी बन गया है व्यापार

गिरो तुम भी थमो मत लाचार
जैसे गिर रहा रोज़ शेयर बाज़ार