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20.5.08

शाकाहार जिंदाबाद या मांसाहार जिंदाबाद

मेरी एक मित्र हैं, पूजा प्रसाद। इन दिनों रफ्तार डाट काम www.raftaar.com में असिस्टेंट कंटेंट एडीटर हैं। उन्होंने एक मेल भेजा है, शाकाहार के गुणों के बारे में। संभवतः वो मुझ जैसे घनघोर मांसाहारी को बदलने के लिए प्रेरित करना चाहती हैं। मेरे पर क्या असर होगा इस मेल का, मुझे खुद नहीं पता पर मैं चाहता हूं कि पूजा की भावनाएं बाकी भाई भड़ासियों तक भी पहुंचे। उम्मीद है कुछ लोग मांसाहार के गुणों के बारे में भी मुझे मेल भेजेंगे या भड़ास पर पोस्ट करेंगे।

वैसे एक गुण तो मैं यहीं गिना सकता हूं कि कई धर्मों के अनुयायी जबरदस्त मांसाहारी होते हैं, उससे न तो उनकी कौम नष्ट हुई और न उनकी औसत उम्र कम हुई। उल्टे, उनके धर्म ने मांसाहार से आई प्रचंड ऊर्जा के चलते विश्व में अपने आक्रामक अभियानों के जरिए कई देशों पर विजय पताका लहरा दिया। आदि काल से लेकर मध्य काल और आधुनिक काल तक के कई कई उदाहरणों के जरिए यह बात साबित है।

उसके उलट, आलू, घास-फूस, कंद-मूल समर्थक हिंदू धर्म जो शुद्ध शाकाहर पर जोर देता है, हमेशा उन धर्मों से हारा जो मांसाहार को तवज्जो देते हैं।

मैं यहां किसी धर्म की बुराई और किसी धर्म की प्रशंसा या दो धर्मों की तुलना शाकाहार या मांसाहार के आधार पर नहीं कर रहा बल्कि सोचने के लिए एक बिंदु दे रहा। मुझे मालूम है कि डा.रूपेश जी मेरी बात से सहमत नहीं होंगे पर हरे भइया तो खुलकर मेरे संग बोलेंगे....मांसाहार जिंदाबाद।
जय भड़ास
यशवंत


शाकाहार किस तरह कैंसर के लिए उपयुक्त स्थियों को दूर रखता है:
--पूजा प्रसाद--
* मांस में सैचुरेटेड फैट अधिक होता है जो शरीर में कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है। (चर्बी निकाले हुए चिकेन से भी, मिलने वाली ऊर्जा की कम से कम आधी मात्रा चर्बी से ही आती है।) चिकेन और कोलेस्ट्रॉल शरीर में ईस्ट्रोजन हार्मोन को बढ़ाता है जो कि स्तन कैंसर से सीधा संबंधित है। जबकि शाकाहार में मौजूद रेशे शरीर में ईस्ट्रोजन के स्तर को नियंत्रित रखते हैं।

* मांस को हजम करने में ज्यादा पाचक एंजाइम और समय लगते हैं। ज्यादा देर तक अनपचा खाना पेट में अम्ल और दूसरे जहरीले रसायन बनाता है जिससे कैंसर को बढ़ावा मिलता है।

* इसके अलावा मांस- मुर्गे का उत्पादन बढ़ाने के लिए आजकल हार्मोन, डायॉक्सिन, एंटीबायोटिक, कीटनाशकों, भारी धातुओं का इस्तेमाल धड़ल्ले से होता है जो कैसर को बढ़ावा देते हैं। इसे ऐसे समझें कि थोड़ी सी जगह में ढेरों मुर्गों को पालने से वे एक-दूसरे से कई तरह की बीमारियां लेते रहते हैं। ऐसे हालात में उन्हें जिलाए रखने के लिए उन्हें खूब एंटीबायोटिक्स दी जाती हैं जिनमें आर्सेनिक जैसी कैंसरकारी भारी धातुएं भी होती हैं।

* मांस-मुर्गे में मौजूद परजीवी और सूक्ष्म जीव कुछ तो पकाने पर मर जाते हैं और कुछ हमारे शरीर में बढ़ने लगते हैं और कैंसर और दूसरी बीमारियां पैदा करते हैं, हमारी प्रतिरोधक क्षमता को थका देते हैं। ऐसे में शरीर कैंसर से लड़ने और जीतने में नाकाम हो जाता है।

* शाकाहार में मौजूद रेशे बैक्टीरिया से मिलकर ब्यूटिरेट जैसे रसायन बनाते हैं जो कैंसर कोषा को मरने के लिए प्रेरित करते हैं। दूसरे, रेशों में पानी सोख कर मल का वजन बढ़ाने की क्षमता होती है जिससे जल्दी-जल्दी शौच जाने की जरूरत पड़ती है और मल और उसके रसायन ज्यादा समय तक खाने की नली के संपर्क में नहीं रह पाते।

* खूब फल और सब्जियां खाने से मुंह, ईसोफेगस, पेट और फेफड़ों के कैंसर की संभावना आधी हो सकती है।फलों और सब्जियों में एंटी ऑक्सीडेंट की प्रचुर मात्रा होते हैं जो शरीर में कैंसर पैदा करने वाले रसायनों को पकड़ कर उन्हें 'आत्महत्या' के लिए प्रेरित करते हैं।

* शाकाहार में मौजूद विविध विटामिन शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं और इस तरह कैंसर कोषाएं फल-फूल नहीं पातीं।

* शाकाहार जरूरी लवणों का भी भंडार है।

( ye jankaari RAINBOW/इंद्रधनुष se lee gai hai)

5.4.08

कहां लिखा है कि मुस्लिम हूं तो मांसाहार ही करूं?????....

पिछले कई दिनों से स्कूल में बच्चों की परीक्षाएं चल रही हैं तो उसमें व्यस्त रही क्योंकि प्रश्नपत्र बनाने से लेकर उत्तरपुस्तिकाएं जांचने तक बहुत जिम्मेदारी रहती है। भड़ास पर लिखने का समय नहीं मिलता है लेकिन दो-चार दिन में नजर मार लेती हूं। कल घर में जो हुआ उसने मजबूर कर दिया कि भड़ास पर जाकर उगल दूं वरना उस बात से तो दिल ही जला जा रहा है। कल हमारे घर डा.रूपेश आए और अब्बा हुज़ूर ने उन्हें भोजन का आग्रह करके मनुहार करके रोक लिया,वे अपनी व्यस्ततता के बावज़ूद प्रेमवश रुक गए। मैने जनाब डा.रूपेश के लिये शाकाहारी भोजन बनाया लेकिन मेरी बेटी ज़िद करके दस्तरख़्वान पर दोपहर का उसके द्वारा पकाया गोश्त लेकर बैठ गयी। मैंने उसे दबी जुबान से मना किया लेकिन वो मानी नहीं। इस बीच हमेशा की तरह हमारे अब्बा हुज़ूर और जनाब बातों में मशगूल थे और विदेशी गायक माइकल जैक्सन का जिक्र आया तो मेरी बेटी ने बीच में उछल कर कहा कि अभी हाल ही में उसने एक गाना गाया है जो समझ में तो कुछ ज्यादा नहीं आता पर उस गाने में अल्लाह शब्द कई बार आया है और ढेरों अरबी शब्द हैं और शायद हो सकता है कि वह कन्वर्ट होकर मुस्लिम बनने का इरादा रखता होगा जैसे कि विश्वप्रसिद्ध मुक्केबाज़ कैसियस क्ले कन्वर्ट हो कर मुहम्मद अली बन गये थे। दुनिया मुसलमान बनने की राह पर है लेकिन हमारे घर के लोग हैं कि डा.अंकल के कारण हिन्दू बने जा रहे हैं। उसका इशारा हमारे खाने-पीने में आये परिवर्तन की ओर था। बच्चे ते़ज़, चटपटा और मसालेदार मांसाहार के शौकीन हैं लेकिन मैंने जबसे डा.रूपेश के कहे अनुसार अपने भोजन में बदलाव लाया है मैं जोकि हाईब्लड प्रेशर की एक भयंकर मरीज़ा थी अब बिना दवाओं के स्वस्थ हूं बस ध्यान करती हूं और भड़ास से जुड़ी हूं यही मेरे स्वास्थ्य का राज़ है। क्या कारण है कि लोग अभी भी खान-पान को धर्म या मजहब से जोड़ कर देखते हैं जबकि डा.रूपेश कहते हैं कि खान-पान पेट का विषय है और धर्म आत्मा का विषय है,कुछ भी खाने पीने से आप अधार्मिक नहीं हो जाते; शाकाहार और मांसाहार का मुद्दा धर्म जैसी विराटता का करोड़वां हिस्सा भी नहीं हो सकता है। कहां लिखा है कि मुस्लिम हूं तो मांसाहार ही करूं? अगर ऐसा लिखा भी है तो मैं इसे मानने से आप सबके सामने इंकार कर रही हूं। जिसे मेरे बारे में जो सोचना है सोचे मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता। यशवंत भाईसाहब जानते हैं कि डा.रूपेश की भोजन संबंधी सोच कितनी शाइस्ता है।
भड़ास ज़िन्दाबाद