भड़ास ने जिस प्रकार से तमाम आयामों में रिकार्ड रच दिये हैं वह वाकई चमत्कारिक सा जान पड़ता है। लेकिन बस इतना ही कहना है कि इसके पीछे है ईमानदार सोच का जादू। लीजिये भड़ास के नाम दर्ज हो रही अनन्यतम उपलब्धियों की श्रंखला में एक और कड़ी; ये उपलब्धि है इंसानियत के इतिहास को रच पाने की उपलब्धि। भड़ास ने कभी भी दिखावा नहीं किया और इसी मानवता के प्रति सच्चे हार्दिक प्रेम के चलते अनजाने में ये उपलब्धि हासिल हुई जो किसी और को मिलने की कल्पना भी नहीं होगी-- विश्व की पहली "लैंगिक विकलांग हिन्दी ब्लागर" मनीषा नारायण को अभिव्यक्ति का मंच प्रदान करना। मैंने कभी इस तरफ ध्यान नहीं दिया कि वास्तव में ईश्वर मेरे माध्यम से भड़ास के द्वारा क्या लीला रच रहा है, मैंने लोकल ट्रेन में ताली बजाते हुए भीख मांगने वाले हाथों को अचानक प्यार से जकड़ कर रख लिया और राखी बंधवा कर ही रहा। पढ़ी-लिखी मनीषा को करीब लाने के लिये मैंने तेलुगू भाषा सीखना शुरू किया और मनीषा से मनीषा दीदी बना लिया। इस तरह से शुरू हुआ हमारी बहन के हिन्दी सीखने का सिलसिला और इसी क्रम में मैंने उन्हें सिखाना प्रारंभ किया कंप्युटर की ए बी सी...... ब्लागिंग के बारे में बताया और मनीषा पांडेय नामक महिला पत्रकार के नाम के साथ समानता होने के कारण हुए विवाद ने दीदी को ज्यादा प्रकाश में ले आया और इस विवाद के चलते ही धीरे-धीरे मनीषा दीदी अधिक मुखर होती चली गईं। हिजड़ा जैसे कठोर शब्द के दायरे से बाहर मैंने और दी्दी ने एक नया शब्द रचा जिसने इस समाज को एक नई परिभाषा दी - "लैंगिक विकलांग"...। भड़ास से जुड़ने और हमारे यशवंत दादा और हरे भइया के प्रोत्साहन ने उन्हें प्रेरणा दी उनके ही समाज से संबंधित एक नया हिंदी ब्लाग बनाने की जिसे मैंने नाम दिया - अर्धसत्य । तीन दिन पहले मुझे दिल्ली से एक पत्रकार बहन ने फोन करा और कहा कि वे मनीषा दीदी का इंटरव्यू लेना चाहती हैं। तब मुझे पता चला कि हमारी दीदी ने तो हिंदी की पट्टी पर एक महत्त्वपूर्ण स्थान बना लिया है वह है - विश्व की सर्वप्रथम लैंगिक विकलांग हिन्दी ब्लागर होने का स्थान। आज जब वंदना बहन दीदी से फोन पर बात कर रहीं थीं तो बेसाख्ता मेरी आंखों से निकल पड़े खुशी के आंसू और मुझे लगा कि हाशिये से भी अलग-थलग अस्तित्त्व के लिये जूझ रही मेरी बहन को उसका सम्मानित स्थान भड़ास ने दिला दिया। आज वो भड़ास के संचालक मंडल में बतौर सलाहकार हैं। मैं दिल से ये चाहता हूं कि जब हम लोग भड़ासोत्सव रखें तो मनीषा दीदी का इस बात के लिये सम्मान करा जाए जिसे सारी दुनिया देखे साथ ही वो परिवार और (अ)सभ्य समाज भी देखे जिसने उन्हें किस्मत के सहारे दर-बदर ठोकरें खाने के लिये छोड़ दिया था। भड़ास की बारंबार जय हो जिस मंच ने उन्हें उनका वजूद सिद्ध करने के लिये मौका दिया और खुद के वजूद को बुद्धिजीवियों के सामने दांव पर लगा दिया और आप सब जानते हैं कि जीत हमारी ही हुई। आइये इस महत्तम मानवीय उपलब्धि के लिये हम एक बार फिर भड़ास की जयजयकार करें और दीदी का सम्मान करने की अनुशंसा करें। नीरव दादा से मनुहार है कि मनीषा दीदी के लिये कुछ ऐसा रच दीजिये कि वे जीवन भर दिल में लिये रहें प्यार से.............
जय जय भड़ास
14.5.08
विश्व की पहली "लैंगिक विकलांग हिन्दी ब्लागर" मनीषा नारायण को अभिव्यक्ति का मंच प्रदान किया भड़ास ने.......
Posted by
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava)
10
comments
Labels: अर्धसत्य, ब्लागिंग, मनीषा, मानवीयता, यशवंत, लैंगिक विकलांग, हरेप्रकाश
10.2.08
मेरे दर्द को आप सबने समझा, शुक्रिया--हरे प्रकाश उपाध्याय
((लीजिए, बुरे लोगों और बुरी चीजों से जीवन मंत्र निकालने वाले और भड़ासियों के लिए सर्वश्रेष्ठ कविता लिखने वाले साथी हरेप्रकाश उपाध्याय की तलाश पूरी हो गई। वे दिल्ली में ही रहते हैं। कादंबिनी मैग्जीन में बतौर सीनियर जर्नलिस्ट कार्यरत हैं। उससे पहले वे हंस में सहायक संपादक थे। कल उन्होंने भड़ास पर प्रकाशित अपनी कविताओं पर कमेंट किया तो उनके नाम के जरिए उनके ब्लाग तक पहुंचा और उनके ब्लाग पर उनका मोबाइल नंबर मिला। फोन किया तो बातचीत हुई। हरेप्रकाश ने भड़ास में प्रकाशित अपनी कविता पर जो कमेंट दिया है, वो इस प्रकार है.....बिलकुल नीचे दो लिंक दिए गए हैं जो उनकी कविताओं के है, क्लिक कर उनकी कविता संबंधी मूल पोस्ट भी पढ़ सकते हैं...यशवंत))
-------------
हरे प्रकाश उपाध्याय has left a new comment on your post "सच ने नहीं, झूठ ने दिया संबल...सर्वश्रेष्ठ भड़ासी ...":
sb bhai logon ko nmste, shukriya...
mere drd ko aap sb ne snjha shukriya...
mera ek snkln bhartiy jnanpith me atka hai, dua kren ki jldi chhp jae, nam hai-BURAI KE PAKSH MEN
Posted by हरे प्रकाश उपाध्याय to भड़ास at 9/2/08 4:35 PM
------------
हरे प्रकाश उपाध्याय has left a new comment on your post "हमें नपुंसक होने से बचाया, बददिमाग और बुरे माने गय...":
bhaee login ke nmaskar
hmar do kaudi ke kvita pr kya kahte hain jrranvajee khatir...
aap sbka hee,
hare prakash
Posted by हरे प्रकाश उपाध्याय to भड़ास at 9/2/08 4:29 PM
------------
आप उपरोक्त कविता को, जो दो पार्ट में भड़ास पर प्रकाशित हुई थी, नीचे दी गई हेडिंग पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं...
हमें नपुंसक होने से बचाया, बददिमाग और बुरे माने गये साथियों ने
सच ने नहीं, झूठ ने दिया संबल
जय भड़ास
यशवंत
