ये देश है दंगा, फसादों का,
कहीं शोर मचा है मन्दिर का,
कुर्सी ही इनका सपना है,
ये देश है दंगा फसादों का,
(बुरा न लगे किसी को और गाओ ये देश था वीर जवानों का.......ये देश है वीर जवानों का........ये देश रहेगा वीर जवानों का......)
अगर कोई बात गले में अटक गई हो तो उगल दीजिये, मन हल्का हो जाएगा...
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राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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हास्य कविता :प्रतियोगिता
मित्रो,होली के अवसर पर आप सभी कलम उठाइए , लिखा भेजिए एक छोटी सी हास्य रचनामध्य-प्रदेश लेखक संघ, जबलपुर की और सेप्रथम तीन विजेता प्रतिभागीयों को क्रमश: 300/- , 200/- तथा 100/- की पुरूस्कार राशी एक एक प्रशस्ति पत्र भेजा जावेगा। 10 प्रतिभागी भी सम्मानित होंगे,नियम:
रचना की मौलिकता ज़रूरी होगी,
स्पष्ट पता -मेल आई डी , तथा मौलिकता की घोषणा पत्र , रचना के साथ संलग्न हों।
कविता ए-फॉर आकार के पेज से अधिक लम्बी होने पर प्रतियोगिता से हटाने का अधिकार निर्णायक मंडल का होगा
व्यक्तिगत आक्षेप न हों
एक रचना कार एक रचना ही भेज सकते हैं,
यूनीकोड पर टंकित कर ने इस लिंक का सहारा लीजिये => http://www.google.com/transliterate/indic
तथा रचना/प्रविष्ठी girishbillore@gmail.com पर मेल करिए
अन्तिम तिथि:- १०/०३/२००८
गिरीश बिल्लोरे "मुकुल "
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Girish Billore Mukul
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