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9.7.13

तबाही के निशां हमेशा रहेंगे अब सबक लें!

-नेताओं को बयानबाजी, हवाई दौरो व बाबाओं को चुप्पी के लिये याद रखा जायेगा।
-सेना को फर्ज अदायगी के लिये लोग कभी नहीं भुला पायेंगे।
समुंद्र तल से 3584 मीटर की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ में आयी मौत की तबाही को सदियों तक याद रखा जायेगा। अब की पीढ़ी न रहेगी तो काला इतिहास दर्ज रहेगा। खास बात यह भी कि नेताओं को बयानबाजी, सिर्फ हवाई दौरे क
रके हवा में ही दर्द समझने व अरबपति ब्रांडेड संतों-बाबाओं को चुप्पी के लिये हमेशा याद रखा जायेगा। दूसरी तरफ राहत का सबसे बड़ा आपरेशन चलाने वाली सेना ने जिस जज्बे के
साथ अपने फर्ज को निभाया उसे भी कभी नहीं भुलाया जा सकता। महत्वपूर्ण सवाल यह भी कि क्या इससे कोई सबक भी लिया जायेगा? प्रकृति को गुस्सा क्यों आया?
आपदा को तो नहीं रोका जाता लेकिन लोगों को बचाया जा सकता था। जाहिर है लापरवाही सरकारी तंत्र की भी रही है। लोगों ने भी केदारनाथ को पिकनिक केंद्र बना दिया। धर्म के नाम पर कम घूमने के लिये लोग ज्यादा जाते थे। कड़वा सवाल ही सही लेकिन बताये कि तीन साल का बच्चा क्या धार्मिक यात्रा पर जा रहा था। लोग इंटरव्यू में बता रहे थे कि हम वहां घूमने गए थे। धर्म के गढ़ में अधर्म की लीला, रासलीला क्या-क्या नहीं हुआ। 50 साल पहले केदारनाथ की तस्वीर देखिए। कितना शांत था। बस चंद बाबाओं की झोपड़ियां। बाद में विकास के पंख लग गए। अनगिनत लोगों की मौत के साथ ही उत्तराखंड के गढ़वाल इलाके का ढांचा ही गड़बड़ा गया। सभी स्तर बुरी तरह प्रभावित हैं। सैंकड़ों पुल, सड़कें सरकारी-गैर सरकारी इमारतें सबकुछ तबाह। तबाही के निशां अभी बाकी हैं। यह लोगों के दिल-ओ-दिमाग से कभी नहीं मिटेंगे। यूं भी कुछ जख्मों के मरहम ओर ऐसे दर्द की दवा नहीं हुआ करती।-----सेना को फर्ज, नेताओं को हवाई यात्रा व लड़ने ओर बाबाओं को चुप्पी के लिये हमेशा याद रखा जायेगा। ब्रांडेड अरबपति बाबाओं, उनके चेले-चपाटों, समाज-धर्म के ठेकेदारों की चुप्पी भी राज रही। दर्द के तूफान को लोगों ने झेला।

21.6.13

आपदा में जाबांज सैनिकों को सलाम!

उत्तराखंड में आयी विनाशकारी आपदा में जाबांज सैनिक जान पर खेलकर सैंकड़ों लोगों की जिंदगियां बचा रहे हैं। उन्होंने किसी का इंतजार नहीं किया ओर बचाव व राहत कार्य में जुट गए। असहाय सरकार भी उन्हीं की भरोसे है। शीर्ष नेता हवाई दौरा करके ही हवा में दर्द समझ रहे हैं उन्हें नहीं पता पीड़ा को समझने के लिये जमीन पर आना होता है। यह लोग भूल जाते हैं कि जनता की वोटों से ही उन्हांेने सत्ता का ताज पहना है। जनता के नेताओं को लेकर जबर्दस्त गुस्सा हैं। यह गुस्सा जायज भी है। हकीकत उन लोगों से पूछिए जिन्हें सैनिकों ने फरिश्तें बनकर बचाया है। यकीनन यदि सैनिक नहीं होते, तो बहुत से लोग जिंदा नहीं होते। वतन व लोगों की हिम्मत आर्मी है। जाबांज सैनिकों को सलाम! जय हिन्द!

8.8.12

कौभांडी नेतागण - सेक्स समस्या ।




(courtesy-Google images)

" हमको अगर कोई छेड़ेगा तो हम छोड़ेगें नहीं ।"
योगगुरु बाबा रामदेवजी उवाच..!!

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प्रिय मित्र,

यह लेख काल्पनिक है ।

साम्यता योगानुयोग है ।

इसका हाल की घटनाओं से कोई लेनादेना नहीं है ।
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मगध के राजा धननंद के दरबार में, ऋषिवर चणक के युवा पुत्र विष्णुगुप्तने अपने राजा को, उनके शासन में प्रवर्तमान भ्रष्टाचार और भ्रष्ट अधिकारीओंके बारे में जानकारी दी, तब विष्णुगुप्त की यह बात राजा धननंद के मन को रास न आयी. राजा को यह बात में अपना अपमान भाव महसूस हुआ और उन्होंने अपने सेनापति को आदेश देकर विष्णुगुप्त को अपने राज्य की सर हद के पार फेंकवा दिया ।

राजा के इस कृत्यसे आहत विष्णुगुप्त तक्षशिला जाकर विद्यार्थीओं को अर्थ शास्त्र पढ़ाने लगे और चाणक्य के नाम से प्रसिद्ध हुए । इधर विलासी राजा धननंदके भ्रष्ट शासन से जनता त्रस्त हो गई, तब चाण्क्यने चंद्रगुप्त की सहायता से मगध में राजा धननंद से सत्ता छीन ली और प्रजा को सुशासन व्यवस्था कैसी होती है, यह बात का परिचय करवाया ।

शायद आज के भारत वर्ष में यही परिस्थिति का फिर से निर्माण हुआ है । रोज़ नये नये भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं और भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज़ उठानेवालोंकी आवाज़ दबाने के लिए दिल्ली के आका के इशारे पर , संत, साधु और पत्रकारों से लेकर स्वच्छ अधिकारीओंको जिंदा जलाने तक के जघन्य कृत्य को अंजाम दी ये जा रहे है ।

जनता- "महँगाई कब कम होगी?"

नेताजी -" मैं ज्योतिषि नहीं..!!"

जनता-" महँगाई क्यों इतनी बढ़ गई?"

नेताजी-" लोगों की आमदनी और ख़र्च क्षमता बढ़ने की वजह से..!!"

अब आप ऐसे हास्यास्पद बातों का क्या करें । सारे नेतागण करीब करीब करोड़पति हैं, ऐसे में सावन के अंधे को सारी कायनात हरी देखना स्वाभाविक बात है ।

यह सब देखकर मेरे मन में एक सवाल उठा ।

* अगर कई   भ्रष्ट नेताओं  को  बाबा  रामदेवजी और  अण्णाजी की भ्रष्टाचार निर्मूलन की बातें कड़वी लगती हैं, तो फिर बाबा की योग शिबिरमें वह उपस्थित क्यों रहते हैं ?

मेरे मित्र ने इस सवाल का उत्तर दिया की," ये अभी भ्रष्टाचार में पकड़े गये सभी नेतागण को तनाव की वजह से सेक्स समस्या सताती है और वह सब योगासन के द्वारा सेक्स क्षमता वापस पाना चाहते हैं ।

यह उत्तर पाकर, मेरे मन में यह विचार आया, अगर ये भ्रष्ट नेता बाबा जी के पास अपनी सेक्स समस्या लेकर जाते तब यह सब पे गुस्साए बाबा जी उनको कौन सा उपाय बताते?

उपाय काल्पनिक है, फिर भी आप सुनिए ।

बाबा जी - " बताइए नेताजी, आप तो वही एस-बेन्ड वाले इसरो के, दो लाख करोड़ कौभांड वाले हैं ना? आप को क्या समस्या है?"

नेताजी -१," बाबा जी, मेरी सेक्स लाइफ़ समाप्त हो चली है, मानो सभी अंग पर तालें लग गये हैं, मैं क्या करुं?"

बाबा जी -" समझ लीजिए आपको अपनी ही तपास समिति के अध्यक्ष बना दिये गये हैं, अब आप अपने दोनों पैर फैला के, अपना सर नीचे कर के अपना ताला खुद खोलने का योगाभास कीजिए,सब ठीक हो जायेगा । चलो नेक्स्ट?"

नेताजी - २," बाबा जी मैं कोलाबा की आदर्श सोसाइटी कौभांडवाला, मुझे पहचाना?"

बाबा जी - " परिचय बाद में । समय कम है, समस्या क्या है?"

नेताजी -२," बाबा जी, दूसरों के मुकाबले मैं जल्दी क्लाईमेक्स पर पहुंच गया । देश-विदेश के दूसरे भ्रष्ट लोगों का वीडियो देखकर मैं लधुता का अनुभव कर रहा हूँ ।"

बाबा जी -" आप एक काम कीजिए । पर्यावरण वाले `तयराम नरेश` को आपत्ति न हों, ऐसी एकान्त जगह, स्थान ग्रहण करके श्वासोश्वास स्तम्भन की क्रिया करें ।आपका परफोर्मन्स सुधर जायेगा ।  नेक्स्ट?"

नेताजी -३,"बाबाजी, मैं माईन्स और मीट्टीचोरी कौभांडवाला । मेरे इतने सारे प्रयत्न के बावजूद मेरे सारे साथीदारों को संतोष नही हो रहा? क्या करुं?"

बाबा जी -" बचपन में आप मिट्टी में लेटकर खेलते (प्लॅ..!!) थे?"

नेताजी ३ -" हाँ, मैं तीन बार खेला था ।"

बाबा जी," जाइए, अपने सारे साथीदारों के साथ माईन्स और मिट्टी में लंबे समय तक चौथी बार ( 4 PLAY) खेलिए । आप के साथीदारों को परमानंद प्राप्त होगा ।"

अचानक बाबा जी किसी को देखकर, उठ खड़े हुए ।

बाबा जी," आइए,आइए, कॉमनवेल्थवाले दला तरवाडीजी, क्या समस्या है?"

नेताजी ४-" बाबा जी, मेरे पकाये हुए भोजन का स्वाद सभी ने चखा है, अब वही लोग मुझे ब्लॅकमेल की चिट्ठियाँ भेज रहे हैं । मुझे फिर से कारावास में बंद करने की धमकी दे रहे हैं ? मैं हताशा के मारे ठंडा हो गया हूँ ।"

बाबा जी," अरे..!! तरवाडीजी, आप तो बगैर गेम खेले सब को पछाडनेवाले काबिल खिलाड़ी हो फिर भी ठंडे हो गए? आप एक काम करें, सब के सामने, आप अपने एक हाथ की जगह दोनों हाथ का उपयोग करें ।"

नेताजी ४ -(चौंककर)" मतलब?"

बाबा जी," आप ठंडे पड गये हैं ना? सब के सामने आप दो हाथ की हथेली को परस्पर ज़ोर से घींसे? सारा बदन गर्म हो जायेगा । देखो, ऐसे..ऐसे..!! ठीक है?"

नेताजी ५ -" ओँ..ओँ..ओँ..ओँ..!! बा..बा..जी, मैं टू जी स्पेक्टम घोटालेवाला खाजाबाबु..!! मेरी बीबी तलाक चाहती है । कहती है, तुमने अपनी जेब-तिजोरी तो गर्म कर ली,अब ये ठंडे बिस्तर का मैं क्या करुं? ओँ..ओँ..ओँ..ओँ..!! "

बाबा जी,"चुप हो जा । सारे देश को खून के आँसू रूलाकर अब खुद रोता है? मेरे यह शिष्य को साथ ले जा, तेरा बिस्तर गर्म कर देगा ।"

नेताजी ५ (अचानक चुप होकर)" बाबा जी, यह आप क्या बक रहे हो..!!"

बाबा जी," तेरा दिमाग सड़ गया है? ज्यास्ती नहीं समझने का..!! मेरा शिष्य तेरे ठंडे बिस्तर के नीचे आग जला कर गर्म कर देगा । चल अब भाग यहां से..!!"

शिष्य -" बाबा जी, आप जल्दी समाधी लगा लें । मध्यप्रदेशवालें `बकबकविज्यसिंह` आ रहे हैं । फोगटमें आपका सर खपायेगें ।"

बाबाजी," अरे..!! उसे रोकना मत, आने दे और सारे रूममें गुलाबजल छीडक दे । उसे सेक्स की समस्या नहीं है । उसके उदरमें, नेता होनेका अभिमान का गेस भर गया है, आने दे, वायुमूक्तासन कराके उसका सारा गेस अभी नीकाल देता हूँ ।"

MARKAND DAVE. DT: 25/02/2011.

25.4.11

नेता है तो देश है..!!

नेता है तो देश  है..!!




(courtesy Google Images)


नेता नेता क्या करता है, नेता है तो देश  है..!!
छद्म छलावा, रूप निराला,क्यों करता अंदेश* है? (संदेह)*

 
क्यों करता अंदेश* है?मौज उड़ा ले,जश्न मना ले,
नानी तेरी मर गई क्या, फटीं हुई क्यों  ड्रेस है?
नेता नेता क्या करता है, नेता है तो देश  है..!!


फटीं हुई क्यों ड्रेस है,पहन साड़ी,खादी पहन,
नहीं तो तु,बर्बादी पहन,तेरे नाम संदेश है..!!
नेता नेता क्या करता है, नेता है तो देश  है..!!


तेरे नाम संदेश है,गांधी बेच दिया,नेहरू बेचा,
तु  है बाक़ी,तु  भी आजा,क़ीमत राशि कैश  है..!!
नेता  नेता  क्या  करता है, नेता है तो देश  है..!!


क़ीमत राशि कैश है,बिका नहीं तो,रह जायेगा,
जो  मिले  अमृत  बराबर,किस्मत तेरी ऐश है..!!
नेता  नेता  क्या  करता  है, नेता है तो देश  है..!!

 
किस्मत तेरी ऐश है,कल बिका तो ज़हर बराबर,
देख ले अपनी  ओर  ज़रा, लगता तु दरवेश है..!!
नेता  नेता  क्या  करता  है, नेता  है  तो देश  है..!!

 
लगता  तु  दरवेश है, भूखों मरेगा,कष्ट सहेगा,
मस्त हो जा, भ्रष्ट हो जा, हमें देता क्यों ठेस है..!!
नेता  नेता  क्या  करता  है, नेता है तो देश  है..!!
छद्म  छलावा, रूप निराला, करता क्यों संदेह है?


 मेरा ब्लॉग-
http://mktvfilms.blogspot.com/2011/04/blog-post_25.html
 
मार्कण्ड दवे । दिनांक-२५-०४-२०११.

29.4.10

बड़ा कौन, मीडिया या मंत्री

गर्मी के दिनों की सुहानी सुबह के समय पार्क में काफी रौनक है। एक पत्रकार का आगमन। किसी ने कोई परवाह नहीं की। पांच सात जनों ने दूर से हाय हैल्लो किया बस। उसके मित्र कुछ क्षण उसके पास रुके। वहीँ हवा खोरी करने एक बड़ा सरकारी अफसर आ गया। बहुत से लोग घूमना छोड़ कर उसके आस पास आ गये। जो ज्यादा चालाक थे उन्होंने अपना परिचय भी दे दिया। कुछ लोग उसके साथ साथ सैर करने लगे। अभी अफसर गया भी नहीं था कि सत्तारूढ़ पार्टी का नेता आ गया। उसके आते ही तो अफसर सहित बड़ी संख्या में लोग उसके करीब आ गये। उसका जलवा अफसर से अधिक लगा। लेकिन पता नहीं आज क्या बात थी कि अभी नेता जी का जलवा पूरे शबाब पर आया भी नहीं था कि सरकार के एक मंत्री का निजी सचिव पार्क में पहुँच गया। उसके आते ही नेता जी का जलवा ठंडा हो गया। जो लोग नेता जी की हाँ में हाँ मिला रहे थे वे निजी सचिव से दुःख सुख की बात करने लगे। अफसर कहाँ जाता वह तो उनके निकट ही था। मंत्री की कृपा से तो टिका हुआ था। लेकिन ये क्या, मंत्री जी भी वहीँ आ गये। बस अब तो पार्क में सैर को आये लोगों ने अपने परिचितों को भी फोन करके बुला लिया। मंत्री जी का एक समान दरबार लग गया। सब मंत्री के आगे पीछे। दूर बैठ के नेता, अफसर,निजी सचिव के जलवे देखने वाले पत्रकार को भी मंत्री के न केवल निकट आना पड़ा बल्कि फोन करके फोटोग्राफर को बुलाना पड़ा ताकि अख़बार में फोटो सहित खबर लग सके। वही हुआ भी। अगले दिन के अख़बार में मंत्री जी की संवेदनशीलता की जानदार शानदार खबर छपी,फोटो के साथ। ये कोई कहानी नहीं वह है जो आजकल होता है। उन्ही पत्रकारों को आम जन की तवज्जो मिलती है जिसके पत्रकारिता से हटकर सामाजिक सम्बन्ध हों। वरना तो कहीं कोई नहीं पूछता। लोकतंत्र का चौथा खम्बा कहलाने वाला यह मीडिया लोकतंत्र के ठेकेदारों के आगे पीछे घूमता है। ऐसा करना उसकी मज़बूरी है या नहीं ये तो बड़े पत्रकार जाने। लेकिन सच तो यही है। आम आदमी से लेकर पूरा सिस्टम मंत्रियों के इर्द गिर्द रहता है। मंत्री नहीं होता तो नेता या उनका सचिव। वह भी हाथ नहीं आये तो कोई कार्यकर्त्ता ही सही। अब ऐसे में ताकतवर कौन है इसका फैसला कम से कम हम तो नहीं कर सकते।

22.9.08

इस देश का नेता शातिर है.......

एक गीत देश में होने वाली हर शादी में बजता दीखता है "ये देश है वीर जवानों का, अलबेलों का मस्तानों का....." क्यों बजता है इस पर चर्चा नहीं कर रहे हैं। बहुत साल पहले इसी गीत की तर्ज़ पर देश के नेताओं पर एक गीत लिखा था, अज के हालातों ने फ़िर पुरानी डायरी पलट कर वही गीत आप लोगों के सामने रखने को मजबूर किया. आइये आप लोग भी "ये देश है वीर जवानों का..." की धुन के साथ नेताओं के गीत का आनंद उठायें.

ये देश है दंगा, फसादों का,
घोटालों का, बेईमानों का,
इस देश का नेता.....ओये...
इस देश का नेता शातिर है,
बस जीता अपनी खातिर है।
ओ॥ओ...ओ॥ओ॥ओ....

कहीं शोर मचा है मन्दिर का,
कहीं गूँज उठी है मस्जिद की,
कहीं तड-तड गोली....
कहीं तड-तड गोली चलतीं हैं,
बस खून की नदियाँ बहतीं हैं।

कुर्सी ही इनका सपना है,
अरे देश कौन सा अपना है,
चाहे देश हमारा..... ओये
चाहे देश हमारा मिट जाए,
पर कुर्सी इनको मिल जाए।
ओ...ओ...ओ...ओ...ओ....

ये देश है दंगा फसादों का,
घोटालों का...........

(बुरा न लगे किसी को और गाओ ये देश था वीर जवानों का.......ये देश है वीर जवानों का........ये देश रहेगा वीर जवानों का......)

11.6.08

bada dard hai

sarkar me jab tak budhe logo angad ke pair bane rahenge, yuvao ke chehre se hansi vanvashi sita ki tarah gayab rahegi. in murda dilo ko kya pata ki college ki shan 150 cc bike se hi banti hai. second me raftar 40 ke par, bike jitni tej kudio ka dil usse jyada raftar se aapke pichhe. sarkar ne soch samajh kar yuvao ko is sukh se vanchit karne ka phaisla kiya hai.

petro ki kimat badha di. ek pal ki liye bhi nahi socha ki yuya dil par kitna bada pahar tut padega. jis din khabar phaile, jar-jar rote yuya ek hi vilap kiye ja rahe the. hay, bike se college jane ka sapna adhura rah jayega. mamni to tv dekhte hi chikha padi thi. kaya se sambhalungi kichan. ek sillneder par 50 rupaye badha diya. mera chera to khun huye arman me duba tha.

jara sochiye, bin bike kabhi koi garl friend banegi. ban bhi gayi to himmat kr ke bhi long drive par nikalne ki bat bhi soch paunga. ufffffffffffffff.............

love life me hi marrige life ka pravesh ho jayega. tana degi, sunil ko ek bar bol du to 200 km ka chhakar lagva de, tum kanjus,,,,,,,,,,,,,,,,,,,abhi nahi ghuma sakte, shadi ke bad...........? aage soch nahi paya. laga andhera chhha raha hai. uffffffff.............

pujipati sarkar ka itna kala kartut............samajvad ka nara achhak yad aa gaya. sochata hu lenin, ruso, stalin ke sath hi ko aisa julm to nahi hua hoga........

Aap to jante bhi honge, bina girl friend college life kitni jalat bhari hoti hai. kasam kha kar kahta hu,,,,,,,,bilkul maja nahi aata,,,,,,,,,,,, jinke hai ve aise dekhte hai jaise ameriki kuposhit indian ko. upechha se to padhai tak gadbada jati hai

krant ki rah yahi se shuru hogi.................
sarkar ne takatwar nas par hath diya hai............

-राजेश राज

(भड़ास के लिए प्रेषित एक मेल)