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23.8.13

आसाराम बापू जी विश्वास को खंडित न करें!

ऐसा लगता है जैसे सारे विवादों का ठेका लेने के बाजीगर आजकल बाबा ही हो रहे हैं। फिर चाहे वह बाबा रामदेव हों या संत आसाराम बापू। दोनों ही अपनी विवादित शैली के लिये जाने जाते हैं। आसाराम नए विवाद में घिरे हैं। कभी जमीनों पर कब्जे, कभी यौन शोषण के आरोप, कभी पत्रकार के साथ मारपीट, कभी किसी का मजाक उड़ाने जैसे आरोप ऐसे व्यक्ति को कहां शोभा देते हैं। ऐसा भी नहीं होता सब झूठ की गठरी ओर अकेले बाबा ही सत्य का
झंडा लेकर लहरा रहे हैं। बलात्कार का आरोप लगना साजिश है या हकीकत यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा, लेकिन एक सं
त सत्य के साथ होता है। जब कुछ गलत किया ही नहीं तो क्यों सामने आकर गिरफ्तारी नहीं दे दी? यदि झूठ होगा तो सामने आ जायेगा। सत्य को सामने लाने से किसी भी जांच से परहेज भी नहीं करना चाहिए। हकीकत यह है कि जिसका जो काम है वह कर ही नहीं रहा बाकी में टांग उड़ाकर खुद को महान बना रहा है। बाबा खुद को भगवान समझते हैं उनके भक्त भी यही मानते हैं। सत्य जानिए ऐसे लोग असाधारण तो हो सकते हैं परन्तु भगवान नहीं। हमारी तरह हाड़-मांस के पुतले हैं एक दिन पंचतत्व में विलीन भी हो जायेंगे। लोगों के दिलों में आदर के साथ बसने वाले बाबाओं द्वारा जनता की भावनाओं को छलने का सिलसिला पुराना है। कलयुग की आश्चर्यजनक हकीकत यह है कि जिनके ऊपर सभ्यता, संस्कृति की जिम्मेदार है वही उसे खंडित भी कर रहे हैं। लोगों को भोग-विलास से दूर रहकर सादगीपूर्ण जीवन जीने की शिक्षा देने वाले क्या स्वयं वास्तव में ऐसे हैं? एक साधारण व्यक्ति भी इसका जवाब ना में ही देगा। ऐसा क्यों? आश्रम सिर्फ नाम के होते हैं सुविधाए फाइव स्टार होटल से कहीं ज्यादा होती हैं। धरती की जन्नत आश्रमों में ही बसती है। देश के बाबा धर्म के नाम पर धंधा करने से संभल जाये तो ही अच्छा है वरना वह दिन भी दूर नहीं होता जब जनता उन्हें ढूंढकर इलाज करेगी। यह भी सच है कि अतिमहत्वाकांक्षा ओर बड़बोलेपन के घोड़े पर सवार होने वाले एक दिन गिरते जरूर हैं।

9.7.13

तबाही के निशां हमेशा रहेंगे अब सबक लें!

-नेताओं को बयानबाजी, हवाई दौरो व बाबाओं को चुप्पी के लिये याद रखा जायेगा।
-सेना को फर्ज अदायगी के लिये लोग कभी नहीं भुला पायेंगे।
समुंद्र तल से 3584 मीटर की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ में आयी मौत की तबाही को सदियों तक याद रखा जायेगा। अब की पीढ़ी न रहेगी तो काला इतिहास दर्ज रहेगा। खास बात यह भी कि नेताओं को बयानबाजी, सिर्फ हवाई दौरे क
रके हवा में ही दर्द समझने व अरबपति ब्रांडेड संतों-बाबाओं को चुप्पी के लिये हमेशा याद रखा जायेगा। दूसरी तरफ राहत का सबसे बड़ा आपरेशन चलाने वाली सेना ने जिस जज्बे के
साथ अपने फर्ज को निभाया उसे भी कभी नहीं भुलाया जा सकता। महत्वपूर्ण सवाल यह भी कि क्या इससे कोई सबक भी लिया जायेगा? प्रकृति को गुस्सा क्यों आया?
आपदा को तो नहीं रोका जाता लेकिन लोगों को बचाया जा सकता था। जाहिर है लापरवाही सरकारी तंत्र की भी रही है। लोगों ने भी केदारनाथ को पिकनिक केंद्र बना दिया। धर्म के नाम पर कम घूमने के लिये लोग ज्यादा जाते थे। कड़वा सवाल ही सही लेकिन बताये कि तीन साल का बच्चा क्या धार्मिक यात्रा पर जा रहा था। लोग इंटरव्यू में बता रहे थे कि हम वहां घूमने गए थे। धर्म के गढ़ में अधर्म की लीला, रासलीला क्या-क्या नहीं हुआ। 50 साल पहले केदारनाथ की तस्वीर देखिए। कितना शांत था। बस चंद बाबाओं की झोपड़ियां। बाद में विकास के पंख लग गए। अनगिनत लोगों की मौत के साथ ही उत्तराखंड के गढ़वाल इलाके का ढांचा ही गड़बड़ा गया। सभी स्तर बुरी तरह प्रभावित हैं। सैंकड़ों पुल, सड़कें सरकारी-गैर सरकारी इमारतें सबकुछ तबाह। तबाही के निशां अभी बाकी हैं। यह लोगों के दिल-ओ-दिमाग से कभी नहीं मिटेंगे। यूं भी कुछ जख्मों के मरहम ओर ऐसे दर्द की दवा नहीं हुआ करती।-----सेना को फर्ज, नेताओं को हवाई यात्रा व लड़ने ओर बाबाओं को चुप्पी के लिये हमेशा याद रखा जायेगा। ब्रांडेड अरबपति बाबाओं, उनके चेले-चपाटों, समाज-धर्म के ठेकेदारों की चुप्पी भी राज रही। दर्द के तूफान को लोगों ने झेला।

8.8.12

कौभांडी नेतागण - सेक्स समस्या ।




(courtesy-Google images)

" हमको अगर कोई छेड़ेगा तो हम छोड़ेगें नहीं ।"
योगगुरु बाबा रामदेवजी उवाच..!!

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प्रिय मित्र,

यह लेख काल्पनिक है ।

साम्यता योगानुयोग है ।

इसका हाल की घटनाओं से कोई लेनादेना नहीं है ।
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मगध के राजा धननंद के दरबार में, ऋषिवर चणक के युवा पुत्र विष्णुगुप्तने अपने राजा को, उनके शासन में प्रवर्तमान भ्रष्टाचार और भ्रष्ट अधिकारीओंके बारे में जानकारी दी, तब विष्णुगुप्त की यह बात राजा धननंद के मन को रास न आयी. राजा को यह बात में अपना अपमान भाव महसूस हुआ और उन्होंने अपने सेनापति को आदेश देकर विष्णुगुप्त को अपने राज्य की सर हद के पार फेंकवा दिया ।

राजा के इस कृत्यसे आहत विष्णुगुप्त तक्षशिला जाकर विद्यार्थीओं को अर्थ शास्त्र पढ़ाने लगे और चाणक्य के नाम से प्रसिद्ध हुए । इधर विलासी राजा धननंदके भ्रष्ट शासन से जनता त्रस्त हो गई, तब चाण्क्यने चंद्रगुप्त की सहायता से मगध में राजा धननंद से सत्ता छीन ली और प्रजा को सुशासन व्यवस्था कैसी होती है, यह बात का परिचय करवाया ।

शायद आज के भारत वर्ष में यही परिस्थिति का फिर से निर्माण हुआ है । रोज़ नये नये भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं और भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज़ उठानेवालोंकी आवाज़ दबाने के लिए दिल्ली के आका के इशारे पर , संत, साधु और पत्रकारों से लेकर स्वच्छ अधिकारीओंको जिंदा जलाने तक के जघन्य कृत्य को अंजाम दी ये जा रहे है ।

जनता- "महँगाई कब कम होगी?"

नेताजी -" मैं ज्योतिषि नहीं..!!"

जनता-" महँगाई क्यों इतनी बढ़ गई?"

नेताजी-" लोगों की आमदनी और ख़र्च क्षमता बढ़ने की वजह से..!!"

अब आप ऐसे हास्यास्पद बातों का क्या करें । सारे नेतागण करीब करीब करोड़पति हैं, ऐसे में सावन के अंधे को सारी कायनात हरी देखना स्वाभाविक बात है ।

यह सब देखकर मेरे मन में एक सवाल उठा ।

* अगर कई   भ्रष्ट नेताओं  को  बाबा  रामदेवजी और  अण्णाजी की भ्रष्टाचार निर्मूलन की बातें कड़वी लगती हैं, तो फिर बाबा की योग शिबिरमें वह उपस्थित क्यों रहते हैं ?

मेरे मित्र ने इस सवाल का उत्तर दिया की," ये अभी भ्रष्टाचार में पकड़े गये सभी नेतागण को तनाव की वजह से सेक्स समस्या सताती है और वह सब योगासन के द्वारा सेक्स क्षमता वापस पाना चाहते हैं ।

यह उत्तर पाकर, मेरे मन में यह विचार आया, अगर ये भ्रष्ट नेता बाबा जी के पास अपनी सेक्स समस्या लेकर जाते तब यह सब पे गुस्साए बाबा जी उनको कौन सा उपाय बताते?

उपाय काल्पनिक है, फिर भी आप सुनिए ।

बाबा जी - " बताइए नेताजी, आप तो वही एस-बेन्ड वाले इसरो के, दो लाख करोड़ कौभांड वाले हैं ना? आप को क्या समस्या है?"

नेताजी -१," बाबा जी, मेरी सेक्स लाइफ़ समाप्त हो चली है, मानो सभी अंग पर तालें लग गये हैं, मैं क्या करुं?"

बाबा जी -" समझ लीजिए आपको अपनी ही तपास समिति के अध्यक्ष बना दिये गये हैं, अब आप अपने दोनों पैर फैला के, अपना सर नीचे कर के अपना ताला खुद खोलने का योगाभास कीजिए,सब ठीक हो जायेगा । चलो नेक्स्ट?"

नेताजी - २," बाबा जी मैं कोलाबा की आदर्श सोसाइटी कौभांडवाला, मुझे पहचाना?"

बाबा जी - " परिचय बाद में । समय कम है, समस्या क्या है?"

नेताजी -२," बाबा जी, दूसरों के मुकाबले मैं जल्दी क्लाईमेक्स पर पहुंच गया । देश-विदेश के दूसरे भ्रष्ट लोगों का वीडियो देखकर मैं लधुता का अनुभव कर रहा हूँ ।"

बाबा जी -" आप एक काम कीजिए । पर्यावरण वाले `तयराम नरेश` को आपत्ति न हों, ऐसी एकान्त जगह, स्थान ग्रहण करके श्वासोश्वास स्तम्भन की क्रिया करें ।आपका परफोर्मन्स सुधर जायेगा ।  नेक्स्ट?"

नेताजी -३,"बाबाजी, मैं माईन्स और मीट्टीचोरी कौभांडवाला । मेरे इतने सारे प्रयत्न के बावजूद मेरे सारे साथीदारों को संतोष नही हो रहा? क्या करुं?"

बाबा जी -" बचपन में आप मिट्टी में लेटकर खेलते (प्लॅ..!!) थे?"

नेताजी ३ -" हाँ, मैं तीन बार खेला था ।"

बाबा जी," जाइए, अपने सारे साथीदारों के साथ माईन्स और मिट्टी में लंबे समय तक चौथी बार ( 4 PLAY) खेलिए । आप के साथीदारों को परमानंद प्राप्त होगा ।"

अचानक बाबा जी किसी को देखकर, उठ खड़े हुए ।

बाबा जी," आइए,आइए, कॉमनवेल्थवाले दला तरवाडीजी, क्या समस्या है?"

नेताजी ४-" बाबा जी, मेरे पकाये हुए भोजन का स्वाद सभी ने चखा है, अब वही लोग मुझे ब्लॅकमेल की चिट्ठियाँ भेज रहे हैं । मुझे फिर से कारावास में बंद करने की धमकी दे रहे हैं ? मैं हताशा के मारे ठंडा हो गया हूँ ।"

बाबा जी," अरे..!! तरवाडीजी, आप तो बगैर गेम खेले सब को पछाडनेवाले काबिल खिलाड़ी हो फिर भी ठंडे हो गए? आप एक काम करें, सब के सामने, आप अपने एक हाथ की जगह दोनों हाथ का उपयोग करें ।"

नेताजी ४ -(चौंककर)" मतलब?"

बाबा जी," आप ठंडे पड गये हैं ना? सब के सामने आप दो हाथ की हथेली को परस्पर ज़ोर से घींसे? सारा बदन गर्म हो जायेगा । देखो, ऐसे..ऐसे..!! ठीक है?"

नेताजी ५ -" ओँ..ओँ..ओँ..ओँ..!! बा..बा..जी, मैं टू जी स्पेक्टम घोटालेवाला खाजाबाबु..!! मेरी बीबी तलाक चाहती है । कहती है, तुमने अपनी जेब-तिजोरी तो गर्म कर ली,अब ये ठंडे बिस्तर का मैं क्या करुं? ओँ..ओँ..ओँ..ओँ..!! "

बाबा जी,"चुप हो जा । सारे देश को खून के आँसू रूलाकर अब खुद रोता है? मेरे यह शिष्य को साथ ले जा, तेरा बिस्तर गर्म कर देगा ।"

नेताजी ५ (अचानक चुप होकर)" बाबा जी, यह आप क्या बक रहे हो..!!"

बाबा जी," तेरा दिमाग सड़ गया है? ज्यास्ती नहीं समझने का..!! मेरा शिष्य तेरे ठंडे बिस्तर के नीचे आग जला कर गर्म कर देगा । चल अब भाग यहां से..!!"

शिष्य -" बाबा जी, आप जल्दी समाधी लगा लें । मध्यप्रदेशवालें `बकबकविज्यसिंह` आ रहे हैं । फोगटमें आपका सर खपायेगें ।"

बाबाजी," अरे..!! उसे रोकना मत, आने दे और सारे रूममें गुलाबजल छीडक दे । उसे सेक्स की समस्या नहीं है । उसके उदरमें, नेता होनेका अभिमान का गेस भर गया है, आने दे, वायुमूक्तासन कराके उसका सारा गेस अभी नीकाल देता हूँ ।"

MARKAND DAVE. DT: 25/02/2011.

23.6.11

श्रीबकबक विजय सिंह भानपा में?


श्रीबकबक विजय सिंह 
भानपा में?
सौजन्य-गूगल


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(नोट- यह पूरा आलेख १००% काल्पनिक है और इसका जीवित या मृतक किसी भी इन्सान से, स्नानसूतक का भी  कोई संबंध नहीं है, अतः इसे व्यक्तिगत न लें ।)

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स्थल- दिल्ली प्रमुख कार्यालय -भानपा ।

समय- दोपहर ४.०० बजे ।

पत्रकार परिषद शुभारंभ की तैयारी है ।

मंच पर उपस्थित पार्टी के महानुभव ।

१.पक्ष प्रमुख श्रीकड़वीकरीजी ।

२. साध्वी सुश्री मख्खी मारतीजी तथा

३. ढोंगरेस पार्टी से ताज़ा निष्कासित, 
महान मंत्री श्री बकबक विजय सिंहजी ।

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श्रीकड़वीकरीजी," क्या माइक चालू है? हे...लो, वन..टू.. थ्री; वन..टू.. थ्री; वन..टू.. थ्री; आवाज़ क्यों नहीं आती?"


श्री बकबक विजय सिंह," मैं हूँ ना? आज के बाद आपको माइक की चिंता करने की ज़रूरत नहीं है..!! हे...लो, वन..टू.. थ्री; वन..टू.. थ्री; वन..टू.. थ्री; चलो हो गया ठीक, ब..स?


साध्वी सुश्री मख्खी मारतीजी," देखो,आदरणीय श्री बकबक विजयजी, आप ये ग़लत कर रहे हैं..!! पक्ष प्रमुख आदरणीय श्रीकड़वीकरीजी के होते आप माइक को हाथ नहीं लगा सकते, अगर ऐसा ही चलता रहा तो मैं पक्ष छोड़ दूँ गी..!!"


श्री बकबक विजय सिंह," अजीब बात है..!! पहले आज भारतीय नचणिया पार्टी में, आपका दाख़िला तो होने दो? भले ही, बाद में पक्ष छोड़ देना? आप को यु.पी. में `कायावती` प्रजाति की ज़हरीली मख्खीयों का उप-द्रव कम करने का काम सौंपा है, वह कब, अगले जन्म में करोगी?"


सुश्री मख्खी मारतीजी," भारतीय नचणिया पार्टी का सहारा ले कर आपको मध्य-प्रदेश का मुख्यमंत्री बनना है क्या? मैं सब जानती हूँ मुझे यु.पी. क्यूँ भेजा जा रहा है, हाँ..आँ..!!


श्रीकड़वीकरीजी,(दोनों पर गुस्सा होते हुए?) चू..उ..उ..प, ओसामा के नाती? दिखता नहीं है, न्यूज़ चैनल वालों के कैमरे चालू है?"


श्रीकड़वीकरीजी,(पत्रकारों से)," चलो भैया, आपका सब ठीक हो गया? अब पत्रकार परिषद शुरू करें?"

(सभी पत्रकार `हाँ` कहते हुए अपना सिर हिलाते हैं ।)

श्रीकड़वीकरीजी," हाँ तो, मैं क्या कह रहा था?"

श्री बकबक विजय सिंह," आप कह रहे थे, चु..उ..उ..प, ओसामा के नाती?" 

श्रीकड़वीकरीजी," या,,र..!! श्री बकबक विजयजी, आप थोड़ी देर चुप नहीं बैठ सकते क्या?"

(श्रीकड़वीकरीजी पत्रकारों की ओर मुड़ कर..!!)


श्रीकड़वीकरीजी," आप सब जानते हैं कि, आज मैं एक बहुत बड़ा एनाउन्समेन्ट करने जा रहा हूँ । हमारी भारतीय नचणिया पार्टी में, आज साध्वी सुश्री मख्खी मारतीजी और ढोंगरेस के महान मंत्री श्री बकबक विजय सिंहजी  प्रवेश कर रहे हैं । मैं उन दोनों का आज पार्टी में प्रवेश निश्चित करने की घोषणा बड़े ही फख़्र के साथ करता हूँ । आप अगर उनसे कोई सवाल करना चाहे तो कर सकते हैं ।"


पत्रकार-१," सर, मेरा सवाल श्री बकबकजी से है, आपने ढोंगरेस को  क्यों  त्याग  दिया?"


श्री बकबक विजय सिंह," आप सब ने नोट किया होगा, ढोंगरेस पक्ष के राज माता सुश्री मौनियाजी और युवराज श्री व्यर्थ हूल बाबाजी के लिए मैं ने आजतक क्या-क्या नहीं किया? फिर भी, युवराज श्री व्यर्थ हूल बाबाजी को प्रधानमंत्री बनाने के बयान और देश के प्रधानमंत्री-न्यायाधीश सहित सभी नागरिकों को, हयात सरकार द्वारा पेश होनेवाले`चोर-पाल बील` में शामिल करने के बयान पर इन सारे ढोंगी लोगों ने मुझे थूका हुआ वापस चटा कर, कैसे अपमानित किया था..!! इसीलिए, ब..स  इसीलिए,मैंने ढोंगीओं की पार्टी ढोंगरेस को त्याग कर, भारतीय नचणिया पार्टी जोईन कि है..!!"


पत्रकार-२," पर श्रीबकबकजी भारतीय नचणिया पार्टी में आपका क्या रोल रहेगा?"


श्रीकड़वीकरीजी," इस सवाल का जवाब मैं दे रहा हूँ । साध्वी सुश्री मख्खी मारतीजी को यु.पी. में फैले `कायावती` प्रजाति की मख्खीयों के उपद्रव को मिटाने का कार्यभार सौंपा गया है और श्रीबकबक विजयजी को, दिल्ली कार्यालय में भानपा के प्रमुख प्रवक्ता का कार्यभार सौंपा गया है..!!"


पत्रकार-३," सुश्री मख्खी मारतीजी, जनता के मन में आशंका है कि, क्या आप `कायावती` प्रजाति की मख्खीयों के उपद्रव को मिटा पाएंगी?"


सुश्री मख्खी मारतीजी," देखिए, मुझे करीब साढे पांच-छह साल से मख्खीयां मारने का भयानक अनुभव हो गया है, इस लिए मैं हमारे पक्ष प्रमुखजी और यु.पी. की अवाम को आश्वस्त करना चाहती हूँ कि, चाहे `कायावती` हो या `छायावती` ब्राँड मख्खीयां, सारी की सारी मख्खीयां मेरे ड़र से दूम दबा कर भाग जायेगी..!!"


पत्रकार-४," श्रीबकबक विजयजी, आपने अभी तक बटला हाउस से योगीबाबा श्रीमनमेला देवजी विरूद्ध इतने सारे बयान किए हैं, उसके बारे में आप क्या कहना चाहेंगे? और फिर आपने कौन से आधार पर युवराज श्री व्यर्थ हूल बाबाजी को प्रधानमंत्री बनाने का बयान किया था?"


श्री बकबक विजय सिंह," देखिए साहब, हम जिसकी शादी में जाते हैं, उसी  घर के सदस्यों का नाम जोड़ कर  उन्हीं के  गीत गाते हैं कि नहीं..!! मैंने भी मज़बूरी में गाये इसमें ग़लत क्या है? पर हकीक़त यही है कि, वर्तमान सरकार का हिड़न एजेंडा है, जिसके तहत अगले चुनाव में श्री व्यर्थ हूल बाबा को प्रधानमंत्री के उम्मीदवार एनाउन्स करना तय है  और  इसीलिए, सरकार `चोरपाल बील` में प्रधानमंत्री को शामिल करने से कतरा रही है ताकि भविष्य में युवराज जम कर भ्रष्टाचार करें, फिर भी पकड़े न जाए?"


पत्रकार-५," श्रीबकबकजी, आपने ढोंगरेस की पत्रकार परिषद में, श्री झूठार्दन दिवेली को चप्पल दिखाने वाले पत्रकार को खुद पीटा था, क्यों?"


श्री बकबक विजय सिंह,"  मेरे प्यारे पत्रकार दोस्तों, आज मैं सार्वजनिक तौर पर उस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के लिए माफ़ी मांगता हूँ और ये एलान करता हूँ कि, यहाँ उपस्थित किसी भी पत्रकार मित्र को आदरणीय श्री झूठार्दन दिवेली को जूता मारने का मन करें तो मुझे बताएं, इसी बहाने  मैं भी,  उनके सिर पर, दो-चार जूतें  मारूंगा..!! ढोंगरेस  पार्टी में मुझे साइडलाईन करने में, श्री झूठार्दनजी का भी अहम हाथ रहा है..!! O.K. NOW HAPPY?"


(ये सुनकर बीच में ही..!!)


सुश्री मख्खी मारतीजी," वाह, श्रीबकबक विजय सिंहजी, ये हुई ना, मर्दों वाली बात..!!"   


पत्रकार-६," श्रीबकबकजी, आप ने भारतीय नचणिया पार्टी में प्रवेश किया है, तो क्या आपको सुश्री उष्माजी कुराज्य की तरह नाचना आता है?"


श्री बकबक विजय सिंह," मुझे नाचना नहीं, पूरे देश को अच्छी तरह नचाना आता है, अब ढोंगरेस के विरूद्ध, अंटसंट बयानबाज़ी करके, ढोंगरेसवालों को मैं   कैसे  ताताथैया  नचाता हूँ,  ये पूरा देश देखेगा?"  


पत्रकार-७," आपने `चोरपाल बील` की मांग करने के कारण, जनता के प्रतिनिधि बाबा श्रीमन मेला देवजी को `ठग बाबा` और श्रीगन्ना बंजारे को `तानाशाह` कहा था?"


श्री बकबक विजय सिंह,"  अरी..छोड़, ये बातें..!! ढोंगरेस पक्ष के दबाव में आ कर, मैंने ऐसा कह दिया होगा, वर्ना उनके जैसे देश भक्त, तो  पूरे देश में  चिराग़ ले कर ढूंढने से भी नहीं मिल सकते..!!"


पत्रकार-७," श्रीकड़वी करीजी, आप ये बताएँगे कि, आपने श्रीबकबक विजय सिंहजी का, भारतीय नचणिया पार्टी में प्रवेश तो करा लिया है पर क्या आपको उन पर विश्वास है कि, ढोंगरेस पक्ष ने उन्हें, आपके पक्ष की खुफ़िया जानकारी प्राप्त करके, भानपा  को तोड़ने के लिए भेजा नहीं होगा? 


श्री बकबक विजय सिंह,"  अरे..!! आपको कैसे पता चला? या..र..!! ये आपको  ढोंगरेस के  श्री झूठार्दनजीने बताया ना? सा..; ओसामाजी बिन लादेनजी का नाती, मेरा दुश्मन वही  तो है..!!"


श्रीकड़वी करीजी,"अबे साले, कब से बकबक करता है? चल, भाग यहाँ से, मेरा पक्ष तोड़ने आया था? उसे जूतें मारो दो-चार..!! पत्रकार मित्रों, श्रीबकबक विजय सिंह की सदस्यता, भारतीय नचणिया पार्टी से अभी,इसी वक़्त समाप्त कि जाती है..!!"


(पत्रकार परिषद में हंगामा मच जाता है । भानपा के वफादार पत्रकार और उनके कर्मचारी मिल कर, आदरणीय श्री बकबक विजय सिंहजी को, चप्पल-जूतों से बुरी तरह पीट ने में व्यस्त हो जाते हैं..!! मौका पाते ही, आदरणीय श्री बकबक विजय सिंहजी, भानपा कार्यालय से भाग निकलते है पर, आदरणीय श्री बकबक विजय सिंहजी को रोकते हुए..!!)



साध्वी सुश्री मख्खी मारतीजी," अरे वाह..!! बकबकजी, बड़े बेआबरू हो कर तेरे कूचे से हम निकले, बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले ?"


(हंगामा होने की वजह से सारे पत्रकार वहाँ से चले जाते हैं..!! दोस्तों, ये पूरा एपिसोड शत प्रति शत काल्पनिक है, पर ये सारे नौटंकीबाज  इकट्ठा हो कर इस एपिसोड को वास्तविक नौटंकी का स्वरूप दें तो, आप हैरान मत होना..!!)


मार्कण्ड दवे । दिनांक- २२-०६-२०११.

7.6.11

आधुनिक बोधकथाएँ -५. वीर विक्रम और बैताल ।

आधुनिक बोधकथाएँ -५. 
वीर विक्रम और बैताल ।
सौजन्य-गूगल
हमेशा  की तरह, परदुःखभंजन राजा वीर विक्रम ने, अड़ियल बैताल को, शव के साथ, पेड़ से नीचे उतारा और, अपने कंधे पर रखकर, राजा ने अपनी राह पकड़ ली ।

बैताल - " विक्रम, मेरी समझ में, ये बात नहीं आ रही  है  कि, तुम्हारी इस  व्यर्थ मेहनत पर, मैं  दया दिखाउँ या तेरी मूर्खता पर मैं  हँसूं..!! खैर, आसानी से रास्ता कट जाएं इसलिए, मैं तुम्हें एक आधुनिक बोधकथा सुनाता हूँ, अगर ये कथा सुनने के पश्चात मेरे द्वारा पूछे गये सवालों का सही  जवाब तुमने नहीं दिया, तो तुम पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे, ऐसा श्राप मैं तुम को दूँगा..!!

बैताल की यह बात सुनकर राजा विक्रम कुछ बोले बिना ही, मंद-मंद मुस्कुराता  हुआ, अपने मार्ग पर, आगे चलता  रहा ।

बैताल - " भारत वर्ष में, एक हठयोगी बाबा  रहता था ।  कोई उसे  बहुत बड़ा ठग कहता था, कोई उसे संत कहता था..!! पूरे भारत वर्ष में, उसके नाम का शोर्ट कट कर के,  लोग  उन्हें,`अनुलोम-विलोम बाबा` भी कहते थे ।

ये हठयोगी बाबा, कभी किसी के सामने भी, झुकने को तैयार न थे, इसीलिए  वहाँ के सत्ता अधिकारीओं के साथ अक्सर उनकी कहा सुनी हो जाती थी और  वहाँ  की समाचार पत्रिकाएँ और दूर दृश्य  डिब्बे को (TV) चौबीसों घंटे की ख़ुराक मिलती रहती थी, जिसके कारण उनके कर्मचारीओं को,  खाना-पीना नसीब होता था और प्रजा का भी हमेशा मनोरंजन होता था..!!

एक दिन की बात है, इस हठयोगी को न जाने कहाँ से पता चल गया कि, भारत वर्ष के सभी राज्यों में और केन्द्रीय राज्य में, भ्रष्टाचार ने, सभी सीमाओं को लाँघ कर, आम जनता का जीना हराम कर दिया है..!!

इतना ही नहीं, केन्द्रीय राजा और उनके कई मंत्री ने, भारत वर्ष की जनता के  ख़ून पसीने की कमाई से,  टैक्स के रूप में इकट्ठा किया हुआ ये सारा धन, जन हित में उपयोग कर ने के बजाय, उसे काला धन बना कर, भारत के बाहर दूसरे देशों में , बद-नियत से संग्रह किया  है?

बस फिर क्या था? ये सुनते ही बाबा ने, हठयोग आज़माते हुए, राजा के सामने  आमरण अनसन का एलान कर दिया और कई लाखों इन्सानों की भीड़ जमा करके, भ्रष्टाचार, काले धन और शीर्ष  राजा के खिलाफ़, जो दिल में आए  वो बोलना शुरु कर दिया..!!

केन्द्रीय शीर्ष राजा ने, समय की नज़ाकत को देखते हुए, बाबा का हठयोग भंग करने के लिए कई मंत्री को अपना दूत बनाकर, उनके पास वार्तालाप करने के लिए भेजा, पर बाबा ने अपना हठयोग-आमरण अनशन समाप्त करने से इनकार करते हुए, अनशन शिविर में पूरे राज्य से और कई लोग जमा करना शुरु करके, अपना भ्रष्टाचार और काला धन विरोधी अभियान और तेज़  कर दिया..!!

बाबा के आह्वान पर, अभियान के दूसरे ही दिन, शाम होते-होते, आंदोलन स्थल पर, लाखो लोग एकत्रित होने लगे..!!

राज्य शासन के प्रति प्रजा का  भारी आक्रोश  बढ़ता  देखकर ,अब राजा को  डर लगा कि, कहीं उसका सिंहासन  छिन न जाये..!!  अतः उसने मंत्रीओं  की आपात क़ालीन  बैठक बुलाई और सभी ने मिलकर कुछ ठोस निर्णय किए और उस पर अमल करने की ज़िम्मेदारी भी कुछ मंत्रीओं को सौंपी गई..!!

दूसरे दिन पूरे भारत वर्ष की प्रजा ने बड़े आश्चर्य के साथ देखा कि, हठयोगीबाबा के आमरण अनशन अभियान स्थल पर, बाबा तो क्या, लाखों की भीड़ में से, सुबह होते-होते एक भी इन्सान, उस पंडाल में मौजूद नहीं है, वहाँ से सब लोग भाग गए हैं..!!

वीर विक्रम, मैं तुम्हें इतना अवश्य बता दूँ  कि, उस केन्द्रीय राजा ने, बाबा के आमरण-अनशन अभियान स्थल पर, भीड़ को भगा ने लिए, न तो सैनिक भेजे थे, ना आँसू गैस के गोले छोड़े थे, ना वहाँ पंडाल में आग लगाई थी, ना  तो  किसी मंत्री द्वारा, बाबा को कोई धमकी दी गई थी..!!

हे..वीर विक्रम, अब सवाल यह है कि,  राजा ने, उस भीड़ को भगाने के लिए, अगर कोई भी कदम नहीं उठाये थे तो फिर, अचानक आमरण-अनशन अभियान स्थल से,रात ही रात में,  सारी भीड़ अचानक  कहाँ भाग गई और क्यों भाग गई?

हे..वीर विक्रम, अगर तुमने  इन सवालों के सही-सही उत्तर न दिया तो, मैं तेरे द्वारा आजतक किए गये, सारे  भ्रष्टाचार के सबूत की फाइलें ,केन्द्रीय राजा के सुपर-डुपर कार्यक्षम महामंत्री श्री बकबक विज्य सिंह को पहुंचा दूँगा और साथ में श्राप भी दूँगा कि, तुम्हें  भी प्रजा भ्रष्टाचारी कह  कर जूतों से बूरी तरह पीटे..!!"

बैताल के मुख से, अत्यंत आधुनिक बोधकथा सुनकर, परदुःखभंजन राजा वीर विक्रमादित्य ने मंद-मंद मुस्कुराते हुए, बैताल को उत्तर दिया,

" केन्द्रीय राजा के मंत्रीओ की आपात काल बैठक में जो निर्णय किए गये थे, उसी को कार्यान्वित करने के कारण, आमरण-अनशन अभियान स्थल से, बाबा समेत, सारी भीड़  रात ही रात में  भाग गई..!!

हे..बैताल, मेरे पास खुफ़िया जानकारी है कि, हठयोगी बाबा के आमरण-अनशन अभियान स्थल पर, उन शातिर और चालाक मंत्रीओं के, भाड़े के कई  आदमीओं ने, बाबा और वहाँ जमा आंदोलनकारीओं की भीड़ को गहरी नींद में, सोते हुए देखकर, मौका पाते ही वहाँ `इतालियन लाल चींटीओं के  सेकडों बॉक्स उँड़ेल दिये थे, जिस  इतालियन लाल चींटी का काटा, पानी तो क्या ठीक से सांस भी नहीं ले पाता..!!

अतः बाबा समेत सारी भीड़ वहाँ से सैन्य कार्यवाही किए बिना ही इतालियन चींटीयों के कहर से, पंडाल से उठ कर भाग गई..!!"

वीर विक्रम का बिलकुल सही उत्तर सुनते ही, बैताल उस शव के साथ फिर से वही पेड़ पर जा कर लटक गया ।

आधुनिक बोध- सारे भारत वर्ष में, बड़े-बड़े सुरमाओं से भयभीत न होनेवाले हठयोगी और अन्य जवाँमर्द भी, इतालियन लाल चींटी के काटने के डर से, अत्यंत भयभीत होकर, उसे देखते ही भाग जाते हैं..!!

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कैरेक्टर ढीला है? (कहानी)

" अचानक, मृगया को अपनी नाज़ुक कमर पर, देव के मज़बूत हाथों की पकड़ महसूस हुई । मृगया भय के कारण कांप उठी और वह कुछ ज्यादा सोचे-समझे उसके पहले ही, रूम का दरवाज़ा बंद हो चुका था । किसी मुलायम पुष्प जैसी कोमल-हल्की मृगया को, देव ने अपने मज़बूत कंधे पर उठाया और वासना पूर्ति के बद-इरादे के साथ, मृगया को बेड पर पटक दिया..!!"

इस कहानी का सटीक और सशक्त अंत दर्शाने के लिए अपने अमूल्य प्रतिभाव देकर मेरा मार्गदर्शन  करनेवाले, सभी विद्वान पाठक मित्रों का तहे दिल से धन्यवाद करते हुए प्रस्तुत है ये कहानी । 

आप पूरी कहानी इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं ।

http://mktvfilms.blogspot.com/2011/06/blog-post_06.html

मार्कण्ड दवे । दिनांक-०६-०६-२०११.

28.2.08

राधे राधे, जय गोविंदा, जय श्रीकृष्णा, हरिओम, नमो नारायण....

आजकल लगातार टूर पर रहता हूं। काम कुछ इस तरह का है कि धर्म गुरुओं और धार्मिक संगठनों से हर दिन पाला पड़ता रहता है। पहली बार इतनी करीब से, इतने नजदीक से इन्हें जाना व समझा है। जैसा कि हर जगह होता है, यहां भी अच्छाइयां और बुराइयां दोनों ही हैं। सबसे मजेदार है इन सभी धार्मिक संगठनों, गुरुओं के अभिवादन की पंचलाइन। कोई लोग फोन करते ही राधे राधे कहकर फोन उठाते हैं तो कोई मिलते ही हरिओम कहते हैं। इनके जवाब में मुझे भी राधे राधे या फिर हरिओम कहना पड़ता है। इसी तरह जय श्रीकृष्णा, जय गोविंदा, नमो नारायण जैसे संबोधन भी कई अलग अलग बाबाओं व धर्म संगठनों के हैं।

इनके यहां जो सबसे अच्छा अनुभव होता है वो प्रसाद खाना। इतना सादा व सात्विक खाना मिलता है कि पंगत में बैठकर खाने पर मन खुश हो जाता है। पिछले दिनों हरिद्वार तो फिर इन दिनों वृंदावन में इन अनुभवों से दो चार हो रहा हूं। चूंकि अभी अनुभव प्रक्रिया लगातार जारी है सो इस पर ज्यादा लिखना उचित नहीं लेकिन मैं इसे अपना सौभाग्य मानता हूं कि अपने इस कार्यकाल में मैं मार्केटिंग व बिजनेस के लिए काम करते हुए हिंदू धर्म गुरुओं, बाबाओ, आश्रमों, संगठनों को काफी करीब से जान पा रहा हूं। इनमें से ढेर सारे शीर्ष बाबाओं से तो अब लगभग दोस्ती हो चुकी है। उनके साथ उनके जीवन के अनुभवों, उनकी सांगठनिक क्षमता, उनके आध्यात्मिक अनुभवों को सुनना, सहेजना मजेदार अनुभव है।

इस पर फिर कभी विस्तार से लिखूंगा। फिलहाल तो इतना ही कहना चाहूंगा कि जैसे हम सभी भड़ासियों की पंच लाइन व अभिवादन लाइन जय भड़ास है, उसी तरह से पूरे दिन के दौरान अलग अलग बाबा लोगों से मुझे अलग अलग तरीके से अभिवादन करना पड़ता है। कई बार तो गड़बड़ा भी जाता हूं। जिनसे राधे राधे कहना होता है उनसे हरिओम कह देता हूं। पर अनुभव बढ़ने के साथ ही लोगों को अलग अलग समझने बूझने व डील करने में पक्का होता जा रहा हूं। इसी को तो कहते हैं एक ही जीवन में ढेर सारे अनुभव पा जाना .....

तो हे मन, चलो अब गंगा तीर....
आप सभी लोगों को कहता हूं....राधे राधे, हरिओम, नमो नारायण, जय श्रीकृष्णा, जय गोविंदा, राम राम....

जय भड़ास
यशवंत