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23.8.13

आसाराम बापू जी विश्वास को खंडित न करें!

ऐसा लगता है जैसे सारे विवादों का ठेका लेने के बाजीगर आजकल बाबा ही हो रहे हैं। फिर चाहे वह बाबा रामदेव हों या संत आसाराम बापू। दोनों ही अपनी विवादित शैली के लिये जाने जाते हैं। आसाराम नए विवाद में घिरे हैं। कभी जमीनों पर कब्जे, कभी यौन शोषण के आरोप, कभी पत्रकार के साथ मारपीट, कभी किसी का मजाक उड़ाने जैसे आरोप ऐसे व्यक्ति को कहां शोभा देते हैं। ऐसा भी नहीं होता सब झूठ की गठरी ओर अकेले बाबा ही सत्य का
झंडा लेकर लहरा रहे हैं। बलात्कार का आरोप लगना साजिश है या हकीकत यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा, लेकिन एक सं
त सत्य के साथ होता है। जब कुछ गलत किया ही नहीं तो क्यों सामने आकर गिरफ्तारी नहीं दे दी? यदि झूठ होगा तो सामने आ जायेगा। सत्य को सामने लाने से किसी भी जांच से परहेज भी नहीं करना चाहिए। हकीकत यह है कि जिसका जो काम है वह कर ही नहीं रहा बाकी में टांग उड़ाकर खुद को महान बना रहा है। बाबा खुद को भगवान समझते हैं उनके भक्त भी यही मानते हैं। सत्य जानिए ऐसे लोग असाधारण तो हो सकते हैं परन्तु भगवान नहीं। हमारी तरह हाड़-मांस के पुतले हैं एक दिन पंचतत्व में विलीन भी हो जायेंगे। लोगों के दिलों में आदर के साथ बसने वाले बाबाओं द्वारा जनता की भावनाओं को छलने का सिलसिला पुराना है। कलयुग की आश्चर्यजनक हकीकत यह है कि जिनके ऊपर सभ्यता, संस्कृति की जिम्मेदार है वही उसे खंडित भी कर रहे हैं। लोगों को भोग-विलास से दूर रहकर सादगीपूर्ण जीवन जीने की शिक्षा देने वाले क्या स्वयं वास्तव में ऐसे हैं? एक साधारण व्यक्ति भी इसका जवाब ना में ही देगा। ऐसा क्यों? आश्रम सिर्फ नाम के होते हैं सुविधाए फाइव स्टार होटल से कहीं ज्यादा होती हैं। धरती की जन्नत आश्रमों में ही बसती है। देश के बाबा धर्म के नाम पर धंधा करने से संभल जाये तो ही अच्छा है वरना वह दिन भी दूर नहीं होता जब जनता उन्हें ढूंढकर इलाज करेगी। यह भी सच है कि अतिमहत्वाकांक्षा ओर बड़बोलेपन के घोड़े पर सवार होने वाले एक दिन गिरते जरूर हैं।

1.5.09

दैनिक हिंदुस्तान को कोर्ट में घसीटने की तैयारी

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2.4.09

खबरें न प्रकाशित करने देने की अर्जी कोर्ट में खारिज

एचटी मीडिया बनाम भड़ास4मीडिया : सुनवाई की अगली तारीख 24 जुलाई

शैलबाला-प्रमोद जोशी प्रकरण से संबंधित खबरें भारत के नंबर वन मीडिया न्यूज पोर्टल भड़ास4मीडिया पर पब्लिश किए जाने के खिलाफ एचटी मीडिया और प्रमोद जोशी द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट में दायर केस की पहली सुनवाई आज हुई। वादी एचटी मीडिया और प्रमोद जोशी की तरफ से दायर केस में भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह और तीन अन्य को प्रतिवादी बनाया गया है। हाईकोर्ट में दर्ज इस केस संख्या सीएस (ओएस) 332/2009 की सुनवाई हाईकोर्ट के कोर्ट नंबर 24 में विद्वान न्यायाधीश अनिल कुमार ने की।

इस दौरान एचटी मीडिया और प्रमोद जोशी की तरफ से हाजिर हुए वकील ने केस निपटारे तक भड़ास4मीडिया पर एचटी मीडिया और इससे जुड़े लोगों से संबंधित खबरें प्रकाशित न करने देने का आदेश पारित करने का अनुरोध कोर्ट से किया। इस बाबत एचटी मीडिया और अन्य की तरफ से कोर्ट में अर्जी भी दी गई थी। कोर्ट ने इस अनुरोध को ठुकरा दिया। प्रतिवादियों की तरफ से दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील निलॉय दासगुप्ता ने कोर्ट को जानकारी दी कि कुछ प्रतिवादियों ने नोटिस 29 मार्च को रिसीव किया है और एक प्रतिवादी के पास अभी तक नोटिस सर्व नहीं हुआ है। इस पर कोर्ट ने वादी एचटी मीडिया और प्रमोद जोशी के वकील को सभी प्रतिवादियों को नोटिस समेत सभी जरूरी दस्तावेज मुहैया कराने के आदेश दिए। प्रतिवादियों को अगले चार हफ्तों में जवाब दाखिल करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई की तारीख 24 जुलाई तय की गई है। प्रतिवादियों के वकील निलॉय दासगुप्ता ने बाद में बताया कि एचटी मीडिया और प्रमोद जोशी की तरफ से जो केस दायर किया गया है, उससे संबंधित जो नोटिस प्रतिवादियों के पास भेजा गया है, उसमें कई चीजें मिसिंग हैं। उदाहरण के तौर पर नोटिस के पेज नंबर 117 पर जिस कांपैक्ट डिस्क के होने का उल्लेख किया गया है, वो नदारद है। साथ ही सभी प्रतिवादियों को अभी तक नोटिस सर्व नहीं हुआ है। ऐसे में कोर्ट ने वादियों के वकील को सभी दस्तावेज व कागजात प्रतिवादियों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। वेबसाइट पर वादियों से संबंधित कंटेंट पब्लिश न करने को लेकर जो अनुरोध कोर्ट से किया गया, उसे नामंजूर कर दिया गया।

इस खबर से संबंधित तस्वीर और वीडियो देखने के लिए क्लिक करें-- भड़ास बनाम एचटी

21.3.09

भड़ास4मीडिया पर हुआ पहला मुकदमा

प्रमोद जोशी ने शैलबाला समेत चार पर किया मुकदमा

दैनिक हिंदुस्तान, दिल्ली के वरिष्ठ स्थानीय संपादक प्रमोद जोशी द्वारा वरिष्ठ पत्रकार शैलबाला से दुर्व्यवहार किए जाने के मामले में नया मोड़ तब आ गया जब एचटी मीडिया और प्रमोद जोशी ने संयुक्त रूप से दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया। सूत्रों के अनुसार शैलबाला के अलावा जिन तीन लोगों को कोर्ट में आरोपी बनाया गया है, उनके नाम हैं- यशवंत सिंह (भड़ास4मीडिया), राजीव रंजन नाग (वरिष्ठ पत्रकार) और अनिल तिवारी (पूर्व एचटी कर्मी)। बताया जाता है कि मानहानि के एवज में एचटी ग्रुप और प्रमोद जोशी ने लाखों रुपये की मांग की है। भड़ास4मीडिया प्रतिनिधि ने प्रमोद जोशी से जब मुकदमे के बाबत फोन पर बात की तो उन्होंने शैलबाला, यशवंत, राजीव और अनिल पर मुकदमा किए जाने की बात को कुबूल किया और इसे संस्थान की रूटीन कार्यवाही का हिस्सा करार दिया।

एक संपादक द्वारा छंटनी के शिकार अपने मीडियाकर्मियों पर ही मुकदमा किए जाने के सवाल पर प्रमोद जोशी ने कहा कि अगर कोई खुद को पीड़ित महसूस करता है तो उसे कोर्ट जाने का अधिकार है और उन्होंने इसी अधिकार का उपयोग किया है। प्रमोद जोशी ने यह भी कहा कि वे एचटी ग्रुप के कर्मचारी हैं और ग्रुप ने कोर्ट में जाने का अगर फैसला किया है तो उन्हें इसके लिए सहमत होना ही पड़ेगा। श्री जोशी ने कहा कि उनकी छवि खराब करने के लिए उन्हें तरह-तरह से निशाना बनाया जा रहा है और उनके खिलाफ तमाम तरीकों से दुष्प्रचार किया जा रहा है। इसी के चलते वे बतौर पीड़ित, न्याय पाने के लिए कोर्ट की शरण में गए हैं।

मुकदमा किए जाने की सूचना मिलने पर वरिष्ठ पत्रकार शैलबाला बिफर पड़ीं। उन्होंने कहा कि यह मेरे पर अत्याचार है। एक तो 32 साल की नौकरी करने के बाद धक्के देकर और दुर्व्यवहार करके बाहर निकाला गया। दुर्व्यवहार के खिलाफ न्याय पाने के लिए मैं थाने गई पर ऊंचे पद पर बैठे आरोपियों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। बेरोजगारी की इस स्थिति में मुकदमा होना मेरे साथ एक और अन्याय है। मुकदमा लड़ने के लिए कहां से पैसा लाऊंगी? पीड़ित महिला को न्याय दिलाने के बजाय उल्टे मुकदमों में फंसाकर कोर्ट-कचहरी में घसीटा जा रहा है। नौकरी छीनने और दुर्व्यवहार करने से पेट नहीं भार तो अब बेरोजगार महिला को मुकदमें के जरिए तंग किया जा रहा है। मैं न्याय की लड़ाई लड़ रही हूं और लड़ती रहूंगी। इन धमकियों से डरने वाली नहीं हूं। अगर कोर्ट में घसीटा ही गया है तो कोर्ट में मैं वो सब बताऊंगी जो मेरे साथ किया गया है। मैंने एचटी ग्रुप में 32 साल तक सात संपादकों के अधीन काम किया है। कोई नहीं कह सकता कि मैंने कभी किसी पर कोई आरोप लगाया हो या किसी के साथ कोई गलत व्यवहार किया हो। जब मैंने दुर्व्यवहार किए जाने की रिपोर्ट थाने में लिखाई तो प्रबंधन के लोगों ने थाने में अप्लीकेशन दे दिया कि उन्हें आशंका है कि शैलबाला आरोप लगा सकती हैं। आखिर उन्हें यह सपना कैसे आया? यह सब पैसे और पद के दुरुपयोग का खेल है। वे एक वरिष्ठ पत्रकार होकर यह सब झेल रही हैं तो आम आदमी के साथ क्या होता होगा, इसकी कल्पना भर की जा सकती है। सबसे दुखद यह है कि एक महिला के साथ उसी संस्थान के लोग अत्याचार कर रहे हैं जिस संस्थान के वरिष्ठ पदों पर जानी-मानी महिलाएं बैठी हैं।

वरिष्ठ पत्रकार राजीव रंजन नाग का कहना है कि मुकदमें के बारे में मुझे आपसे जानकारी मिल रही है। अगर नोटिस मिलता है तो वे कोर्ट के सामने पक्ष रखेंगे। लीगल फोरम के जरिए इसका सामना करेंगे। अगर दुर्व्यवहार की शिकार एक वरिष्ठ महिला पत्रकार का साथ देना कोई अपराध है तो मैंने ये अपराध किया है। हकीकत का पर्दाफाश अदालत में किया जाएगा। प्रमोद जोशी ने अगर अदालत में जाने का साहस किया है तो उनके इस साहस को मैं सलाम करता हूं। यह एक बड़ी लड़ाई है। प्रतिष्ठान और पद की आड़ में व्यक्तियों को धमकाने की प्रवृत्ति पर रोक लगनी चाहिए। अगर पीड़ित महिला का पक्ष लेना मानहानि है तो इसका जवाब अदालत में दिया जाएगा। हम अदालत का सम्मान करते हैं और अदालत के फैसले का भी सम्मान करेंगे। पर हम ये जानना चाहते हैं कि इस धर्मनिरपेक्ष देश भारत में पैगंबर मोहम्मद की आकृति प्रकाशित करने वाले अभी जेल के पीछे क्यों नहीं गए? किस तरह मामले को रफा-दफा किया गया? सबको पता है कि इस्लाम में पैगंबर मोहम्मद की आकृति प्रकाशित करने से परहेज करने की बात कही गई है। इंडिया सेकुलर कंट्री है लेकिन ये अखबार धर्म का अपमान कर रहे हैं। जो संपादक गांधी को फासिस्ट बताने वाले लेख उसी अखबार में लिख और छाप चुके हैं जो अखबार कभी गांधी का प्रवक्ता हुआ करता था, उऩकी समझ पर तरस आता है। फ्रीडम आफ एक्सप्रेसन की लड़ाई लड़ने वाले अखबार में बैठे लोग अब न्याय की आवाज उठाने वाले लोगों की आवाज बंद करने पर तुले हुए हैं, यह शर्मनाक है। हम जानना चाहते हैं कि प्रमोद जोशी ने अपने पूरे करियर की मानहानि की कीमत क्या लगाई है?

भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह ने इस प्रकरण पर कहा कि अभी तक कोई नोटिस नहीं मिला है लेकिन प्रमोद जोशी जी ने बातचीत में स्वीकारा है कि मुकदमा कर दिया गया है। प्रमोद जी वरिष्ठ पत्रकार और संपादक हैं। उनसे अपेक्षा नहीं थी कि वे पत्रकारों पर ही मुकदमा कर देंगे। संपादक का दूसरा मतलब सहृदय, सरल और सहज भी होता है। संपादकों पर मुकदमें होते आए हैं, ये तो हम लोगों ने सुना है लेकिन संपादक को अपने पत्रकारों पर ही मुकदमा करना पड़ा, यह पहली बार सुन रहा हूं। प्रमोद जी की यह हरकत उनकी सोच और व्यक्तित्व को दर्शाती है। रही बात शैलबाला प्रकरण की, तो इसको लेकर जितनी भी खबरें भड़ास4मीडिया पर प्रकाशित की गईं, उस पर एचटी मीडिया की तरफ से जो भी पक्ष आया, उसे हू-ब-हू और ससम्मान प्रकाशित किया गया। बावजूद इसके, मुकदमा करना नीयत में खोट दर्शाता है। कहीं न कहीं यह मामला वेब जर्नलिस्ट सुशील कुमार सिंह के मामले जैसा है जिसमें उन्हें अपनी वेबसाइट पर एचटी ग्रुप के बारे में एक खबर लिखने पर पुलिस का सामना करना पड़ा था और आज तक वे परेशान हैं। सुशील जी के प्रकरण के वक्त देश भर के पत्रकारों ने एकजुट होकर आवाज बुलंद किया था लेकिन लगता है एचटी ग्रुप ने सबक नहीं लिया। ऐसा प्रतीत होता है जैसे कुछ लोग एचटी ग्रुप की छवि खराब करने पर आमादा हैं। तभी वे बार-बार अपने गलत कार्यों का खुलासा करने वालों को कोर्ट-कचहरी और पुलिस के जरिए परेशान करने में लग जाते हैं। जहां तक भड़ास4मीडिया की बात है तो यह देश के लाखों पत्रकारों की आवाज उठाने वाला पोर्टल है और यह संभावित है कि प्रबंधन के लोग इसे अपना निशाना बनाएंगे। अभी तक निशाना क्यों नहीं बनाया गया, यही आश्चर्य की बात है।

यशवंत सिंह ने आगे कहा कि भड़ास4मीडिया की टीम देश भर के आम पत्रकारों की शारीरिक, आर्थिक और नैतिक मदद से कोर्ट में पूरी मजबूती से अपना पक्ष रखेगी। अगर जेल जाने की स्थिति आती है तो हम सहर्ष जेल जाएंगे क्योंकि यह मसला लोकतांत्रिक दायरे में अभिव्यक्ति की आजादी का मामला है। अगर एचटी ग्रुप और प्रमोद जोशी के चलते भड़ास4मीडिया का संचालन बंद कराया जाता है तो यह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में कारपोरेट मीडिया की दबंगई व मनमानी के गहन भयावह दौर का प्रारंभ होगा। न्यू मीडिया माध्यम (ब्लाग, वेबसाइट, मोबाइल आदि) अभी जब अपने पैर पर खड़ा होने सीख रहे हैं, ऐसे में परंपरागत और स्थापित मीडिया माध्यमों में सर्वोच्च पदों पर बैठे स्वनामधन्य लोगों द्वारा इस तरह का दादा जैसा व्यवहार करना, न सिर्फ अनैतिक और गैर-पेशेवराना है बल्कि लोकतंत्र व मीडिया में आस्था रखने वालों को हताश करने वाला भी है। अभी तो मामला सिर्फ मुकदमें तक है। मुझे आशंका है कि ये लोग अपनी श्रेष्ठता और सर्वोच्चता साबित करने के लिए प्रतिक्रियास्वरूप हम न्यू मीडिया माध्यम के संचालकों को शारीरिक रूप से भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं। लेकिन सच कहने की जिद के चलते हम लोग वो सब कुछ झेलने को तैयार हैं जो हर युग में किसी न किसी सच कहने वाले को झेलना पड़ा है। मुझे पूरा विश्वास है कि देश भर के मीडियाकर्मी इस संकट की घड़ी में भड़ास4मीडिया के साथ खड़े होंगे। यह मुकदमा अगर शुरू होता है तो ऐतिहासिक मुकदमा होगा जिसकी अनुगूंज दूर तक सुनाई देगी।

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ये हैं वो खबरें जिन पर मुकदमा किए जाने की बात पता चली है-
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हिंदुस्तान के कई दिग्गज पत्रकारों से लिया गया इस्तीफा
प्रमोद जोशी के खिलाफ थाने पहुंचीं शैलबाला
शैलबाला के थाने जाने की आशंका प्रबंधन को थी!
हां, प्रमोद जोशी ने शैलबाला को धक्का दिया : अनिल
अनिल उस दिन आफिस में थे ही नहीं : एचटी प्रबंधन
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साभार - भड़ास4मीडिया

24.10.08

सुशील प्रकरण : वेब पत्रकार संघर्ष समिति का गठन

Written by B4M Reporter
Friday, 24 October 2008 01:30

एचटी मीडिया में शीर्ष पदों पर बैठे कुछ मठाधीशों के इशारे पर वेब पत्रकार सुशील कुमार सिंह को फर्जी मुकदमें में फंसाने और पुलिस द्वारा परेशान किए जाने के खिलाफ वेब मीडिया से जुड़े लोगों ने दिल्ली में एक आपात बैठक की। इस बैठक में हिंदी के कई वेब संपादक-संचालक, वेब पत्रकार, ब्लाग माडरेटर और सोशल-पोलिटिकिल एक्टीविस्ट मौजूद थे। अध्यक्षता मशहूर पत्रकार और डेटलाइन इंडिया के संपादक आलोक तोमर ने की। संचालन विस्फोट डाट काम के संपादक संजय तिवारी ने किया। बैठक के अंत में सर्वसम्मति से तीन सूत्रीय प्रस्ताव पारित किया गया। पहले प्रस्ताव में एचटी मीडिया के कुछ लोगों और पुलिस की मिलीभगत से वरिष्ठ पत्रकार सुशील को इरादतन परेशान करने के खिलाफ आंदोलन के लिए वेब पत्रकार संघर्ष समिति का गठन किया गया।

इस समिति का संयोजक मशहूर पत्रकार आलोक तोमर को बनाया गया। समिति के सदस्यों में बिच्छू डाट काम के संपादक अवधेश बजाज, प्रभासाक्षी डाट काम के समूह संपादक बालेंदु दाधीच, गुजरात ग्लोबल डाट काम के संपादक योगेश शर्मा, तीसरा स्वाधीनता आंदोलन के राष्ट्रीय संगठक गोपाल राय, विस्फोट डाट काम के संपादक संजय तिवारी, लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार अंबरीश कुमार, मीडिया खबर डाट काम के संपादक पुष्कर पुष्प, भड़ास4मीडिया डाट काम के संपादक यशवंत सिंह शामिल हैं। यह समिति एचटी मीडिया और पुलिस के सांठगांठ से सुशील कुमार सिंह को परेशान किए जाने के खिलाफ संघर्ष करेगी। समिति ने संघर्ष के लिए हर तरह का विकल्प खुला रखा है।

दूसरे प्रस्ताव में कहा गया है कि वेब पत्रकार सुशील कुमार सिंह को परेशान करने के खिलाफ संघर्ष समिति का प्रतिनिधिमंडल अपनी बात ज्ञापन के जरिए एचटी मीडिया समूह चेयरपर्सन शोभना भरतिया तक पहुंचाएगा। शोभना भरतिया के यहां से अगर न्याय नहीं मिलता है तो दूसरे चरण में प्रतिनिधिमंडल गृहमंत्री शिवराज पाटिल और उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती से मिलकर पूरे प्रकरण से अवगत कराते हुए वरिष्ठ पत्रकार को फंसाने की साजिश का भंडाफोड़ करेगा। तीसरे प्रस्ताव में कहा गया है कि सभी पत्रकार संगठनों से इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए संपर्क किया जाएगा और एचटी मीडिया में शीर्ष पदों पर बैठे कुछ मठाधीशों के खिलाफ सीधी कार्यवाही की जाएगी।

बैठक में प्रभासाक्षी डाट काम के समूह संपादक बालेन्दु दाधीच का मानना था कि मीडिया संस्थानों में डेडलाइन के दबाव में संपादकीय गलतियां होना एक आम बात है। उन्हें प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाए जाने की जरूरत नहीं है। बीबीसी, सीएनएन और ब्लूमबर्ग जैसे संस्थानों में भी हाल ही में बड़ी गलतियां हुई हैं। यदि किसी ब्लॉग या वेबसाइट पर उन्हें उजागर किया जाता है तो उसे स्पोर्ट्समैन स्पिरिट के साथ लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि संबंधित वेब मीडिया संस्थान के पास अपनी खबर को प्रकाशित करने का पुख्ता आधार है और समाचार के प्रकाशन के पीछे कोई दुराग्रह नहीं है तो इसमें पुलिस के हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने संबंधित प्रकाशन संस्थान से इस मामले को तूल न देने और अभिव्यक्ति के अधिकार का सम्मान करने की अपील की।

भड़ास4मीडिया डाट काम के संपादक यशवंत सिंह ने कहा कि अब समय आ गया है जब वेब माध्यमों से जुड़े लोग अपना एक संगठन बनाएं। तभी इस तरह के अलोकतांत्रिक हमलों का मुकाबला किया जा सकता है। यह किसी सुशील कुमार का मामला नहीं बल्कि यह मीडिया की आजादी पर मीडिया मठाधीशों द्वारा किए गए हमले का मामला है। ये हमले भविष्य में और बढ़ेंगे।

विस्फोट डाट काम के संपादक संजय तिवारी ने कहा- ''पहली बार वेब मीडिया प्रिंट और इलेक्ट्रानिक दोनों मीडिया माध्यमों पर आलोचक की भूमिका में काम कर रहा है। इसके दूरगामी और सार्थक परिणाम निकलेंगे। इस आलोचना को स्वीकार करने की बजाय वेब माध्यमों पर इस तरह से हमला बोलना मीडिया समूहों की कुत्सित मानसिकता को उजागर करता है। उनका यह दावा भी झूठ हो जाता है कि वे अपनी आलोचना सुनने के लिए तैयार हैं।''

लखनऊ से फोन पर वरिष्ठ पत्रकार अंबरीश कुमार ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कई पत्रकार पुलिस के निशाने पर आ चुके हैं। लखीमपुर में पत्रकार समीउद्दीन नीलू के खिलाफ तत्कालीन एसपी ने न सिर्फ फर्जी मामला दर्ज कराया बल्कि वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत उसे गिरफ्तार भी करवा दिया। इस मुद्दे को लेकर मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश पुलिस को आड़े हाथों लिया था। इसके अलावा मुजफ्फरनगर में वरिष्ठ पत्रकार मेहरूद्दीन खान भी साजिश के चलते जेल भेज दिए गए थे। यह मामला जब संसद में उठा तो शासन-प्रशासन की नींद खुली। वेबसाइट के गपशप जैसे कालम को लेकर अब सुशील कुमार सिंह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह बात अलग है कि पूरे मामले में किसी का भी कहीं जिक्र नहीं किया गया है।

बिच्छू डाट के संपादक अवधेश बजाज ने भोपाल से और गुजरात ग्लोबल डाट काम के संपादक योगेश शर्मा ने अहमदाबाद से फोन पर मीटिंग में लिए गए फैसलों पर सहमति जताई। इन दोनों वरिष्ठ पत्रकारों ने सुशील कुमार सिंह को फंसाने की साजिश की निंदा की और इस साजिश को रचने वालों को बेनकाब करने की मांग की।

बैठक के अंत में मशहूर पत्रकार और डेटलाइन इंडिया के संपादक आलोक तोमर ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि सुशील कुमार सिंह को परेशान करके वेब माध्यमों से जुड़े पत्रकारों को आतंकित करने की साजिश सफल नहीं होने दी जाएगी। इस लड़ाई को अंत तक लड़ा जाएगा। जो लोग साजिशें कर रहे हैं, उनके चेहरे पर पड़े नकाब को हटाने का काम और तेज किया जाएगा क्योंकि उन्हें ये लगता है कि वे पुलिस और सत्ता के सहारे सच कहने वाले पत्रकारों को धमका लेंगे तो उनकी बड़ी भूल है। हर दौर में सच कहने वाले परेशान किए जाते रहे हैं और आज दुर्भाग्य से सच कहने वालों का गला मीडिया से जुड़े लोग ही दबोच रहे हैं। ये वो लोग हैं जो मीडिया में रहते हुए बजाय पत्रकारीय नैतिकता को मानने के, पत्रकारिता के नाम पर कई तरह के धंधे कर रहे हैं। ऐसे धंधेबाजों को अपनी हकीकत का खुलासा होने का डर सता रहा है। पर उन्हें यह नहीं पता कि वे कलम को रोकने की जितनी भी कोशिशें करेंगे, कलम में स्याही उतनी ही ज्यादा बढ़ती जाएगी। सुशील कुमार प्रकरण के बहाने वेब माध्यमों के पत्रकारों में एकजुटता के लिए आई चेतना को सकारात्मक बताते हुए आलोक तोमर ने इस मुहिम को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

बैठक में हिंदी ब्लागों के कई संचालक और मीडिया में कार्यरत पत्रकार साथी मौजूद थे।

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अगर आप भी कोई ब्लाग या वेबसाइट या वेब पोर्टल चलाते हैं और वेब पत्रकार संघर्ष समिति में शामिल होना चाहते हैं तो aloktomar@hotmail.com पर मेल करें। वेब माध्यमों से जुड़े लोगों का एक संगठन बनाने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। आप सबकी भागीदारी का आह्वान है।
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((इस पोस्ट को कापी करके आप अपने-अपने ब्लागों-वेबसाइटों पर प्रकाशित करें ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक यह संदेश पहुंचाया जा सके और वेब माध्यम के जरिए सुशील कुमार की लड़ाई को विस्तार दिया जा सके।))
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23.10.08

गासिप अड्डा में खबर पर सुशील के घर पुलिस पहुंची

राजनीति से लेकर धर्म-अध्यात्म और मीडिया से जुड़ी सत्य और कहीं न प्रकाशित होने वाली घटनाओं को विश्लेषणात्मक अंदाज में अपनी वेबसाइट गासिप अड्डा डाट काम पर पब्लिश करने वाले वरिष्ठ पत्रकार सुशील कुमार सिंह पुलिस के शिकंजे में आते दिख रहे हैं। बताया जा रहा है कि गासिप अड्डा डाट काम के मीडिया गासिप कालम में दैनिक हिंदुस्तान, लखनऊ से जुड़ी एक खबर प्रकाशित करने पर उनके खिलाफ लखनऊ में मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। मीडिया से जुड़े लोगों द्वारा मुकदमा दर्ज कराने पर पुलिस ने आनन-फानन में एक टीम सुशील कुमार सिंह के दिल्ली स्थित उनके आवास पर भेज दिया। भड़ास4मीडिया प्रतिनिधि ने सुशील कुमार सिंह से मोबाइल पर संपर्क किया और उनसे पूरे मामले की जानकारी ली। उन्होंने स्वीकार किया कि पुलिस उनके घर के बाहर खड़ी है।

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दुनिया का सबसे बड़ा हिंदी ब्लाग भड़ास अपने संपूर्ण 500 सदस्यों और हजारों पाठकों की तरफ से वरिष्ठ पत्रकार सुशील कुमार सिंह के पक्ष में खड़े होने की घोषणा करता है। आप सभी भड़ासियों, ब्लागरों और पाठकों से अपील है कि सुशील कुमार सिंह की कलम को रोकने की कोशिश करने वाले मीडिया के कुछ मठाधीशों के इशारे पर कराई गई पुलिस की इस अलोकतांत्रिक कार्रवाई की निंदा करें और अपने अपने ब्लागों पर विरोध दर्ज कराएं। पूरी खबर आप भड़ास4मीडिया डाट काम पर पढ़ सकते हैं। उपरोक्त Read More आप्शन पर क्लिक करके भी आप भड़ास4मीडिया पर प्रकाशित इस खबर को पढ़ सकते हैं।
जय भड़ास
यशवंत