
त सत्य के साथ होता है। जब कुछ गलत किया ही नहीं तो क्यों सामने आकर गिरफ्तारी नहीं दे दी? यदि झूठ होगा तो सामने आ जायेगा। सत्य को सामने लाने से किसी भी जांच से परहेज भी नहीं करना चाहिए। हकीकत यह है कि जिसका जो काम है वह कर ही नहीं रहा बाकी में टांग उड़ाकर खुद को महान बना रहा है। बाबा खुद को भगवान समझते हैं उनके भक्त भी यही मानते हैं। सत्य जानिए ऐसे लोग असाधारण तो हो सकते हैं परन्तु भगवान नहीं। हमारी तरह हाड़-मांस के पुतले हैं एक दिन पंचतत्व में विलीन भी हो जायेंगे। लोगों के दिलों में आदर के साथ बसने वाले बाबाओं द्वारा जनता की भावनाओं को छलने का सिलसिला पुराना है। कलयुग की आश्चर्यजनक हकीकत यह है कि जिनके ऊपर सभ्यता, संस्कृति की जिम्मेदार है वही उसे खंडित भी कर रहे हैं। लोगों को भोग-विलास से दूर रहकर सादगीपूर्ण जीवन जीने की शिक्षा देने वाले क्या स्वयं वास्तव में ऐसे हैं? एक साधारण व्यक्ति भी इसका जवाब ना में ही देगा। ऐसा क्यों? आश्रम सिर्फ नाम के होते हैं सुविधाए फाइव स्टार होटल से कहीं ज्यादा होती हैं। धरती की जन्नत आश्रमों में ही बसती है। देश के बाबा धर्म के नाम पर धंधा करने से संभल जाये तो ही अच्छा है वरना वह दिन भी दूर नहीं होता जब जनता उन्हें ढूंढकर इलाज करेगी। यह भी सच है कि अतिमहत्वाकांक्षा ओर बड़बोलेपन के घोड़े पर सवार होने वाले एक दिन गिरते जरूर हैं।
1 comment:
भारतमें पुलिस या कानून सत्य की रक्षा कतेहि नहीं कर शकता। .इसिलिये "रणछोड़राय" बनना उचित हैं
भारत में पुलिस की चुंगल में फंसना माने तबाही को स्वीकार करना होता है। सत्ता तथा कानून के नाम पर एक एक सत्य के सौ से अधिक विपरित अर्थ निकाल व् मिडिया के साथ की सांठ गांठ से, हर सत्यको कला चितरने की क्षमता पुलिस रखती हैं। . इसीलिए पुलिस से बचना भारतमें आवश्यक हैं।
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