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2.4.09

खबरें न प्रकाशित करने देने की अर्जी कोर्ट में खारिज

एचटी मीडिया बनाम भड़ास4मीडिया : सुनवाई की अगली तारीख 24 जुलाई

शैलबाला-प्रमोद जोशी प्रकरण से संबंधित खबरें भारत के नंबर वन मीडिया न्यूज पोर्टल भड़ास4मीडिया पर पब्लिश किए जाने के खिलाफ एचटी मीडिया और प्रमोद जोशी द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट में दायर केस की पहली सुनवाई आज हुई। वादी एचटी मीडिया और प्रमोद जोशी की तरफ से दायर केस में भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह और तीन अन्य को प्रतिवादी बनाया गया है। हाईकोर्ट में दर्ज इस केस संख्या सीएस (ओएस) 332/2009 की सुनवाई हाईकोर्ट के कोर्ट नंबर 24 में विद्वान न्यायाधीश अनिल कुमार ने की।

इस दौरान एचटी मीडिया और प्रमोद जोशी की तरफ से हाजिर हुए वकील ने केस निपटारे तक भड़ास4मीडिया पर एचटी मीडिया और इससे जुड़े लोगों से संबंधित खबरें प्रकाशित न करने देने का आदेश पारित करने का अनुरोध कोर्ट से किया। इस बाबत एचटी मीडिया और अन्य की तरफ से कोर्ट में अर्जी भी दी गई थी। कोर्ट ने इस अनुरोध को ठुकरा दिया। प्रतिवादियों की तरफ से दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील निलॉय दासगुप्ता ने कोर्ट को जानकारी दी कि कुछ प्रतिवादियों ने नोटिस 29 मार्च को रिसीव किया है और एक प्रतिवादी के पास अभी तक नोटिस सर्व नहीं हुआ है। इस पर कोर्ट ने वादी एचटी मीडिया और प्रमोद जोशी के वकील को सभी प्रतिवादियों को नोटिस समेत सभी जरूरी दस्तावेज मुहैया कराने के आदेश दिए। प्रतिवादियों को अगले चार हफ्तों में जवाब दाखिल करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई की तारीख 24 जुलाई तय की गई है। प्रतिवादियों के वकील निलॉय दासगुप्ता ने बाद में बताया कि एचटी मीडिया और प्रमोद जोशी की तरफ से जो केस दायर किया गया है, उससे संबंधित जो नोटिस प्रतिवादियों के पास भेजा गया है, उसमें कई चीजें मिसिंग हैं। उदाहरण के तौर पर नोटिस के पेज नंबर 117 पर जिस कांपैक्ट डिस्क के होने का उल्लेख किया गया है, वो नदारद है। साथ ही सभी प्रतिवादियों को अभी तक नोटिस सर्व नहीं हुआ है। ऐसे में कोर्ट ने वादियों के वकील को सभी दस्तावेज व कागजात प्रतिवादियों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। वेबसाइट पर वादियों से संबंधित कंटेंट पब्लिश न करने को लेकर जो अनुरोध कोर्ट से किया गया, उसे नामंजूर कर दिया गया।

इस खबर से संबंधित तस्वीर और वीडियो देखने के लिए क्लिक करें-- भड़ास बनाम एचटी

7.2.08

महर्षि आपको ये जबलपुर याद कर रहा है

*जबलपुर से चले महर्षि महेश योगी ने पूरी दुनिया को शिक्षा दी * सामयिक विषयों पर उनकी टिप्पणी उनकी तत्परता / त्वरितता की निशानी है।

किन्तु मेरा शहर इनको तब कितना दुलारता था मुझे कम ही मालूम है किन्तु एक बात ज़रूर जानता हूँ.... परसाई का शहर ओशो का शहर प्रेम नाथ और अब ज्ञानरंजन के अलावा आदेश श्रीवास्तव , आभास जोषी , प्राजक्ता शुक्रे आदि का जबलपुर जब तक सिद्ध न किया जाए घास भी नहीं डालता । अब उड़न तश्तरी, महेन्द्र मिश्र ,पंकज स्वामी ,विजय तिवारी,जैसे ब्लागर्स को कोई सुनने को खाली नहीं हें। कमोबेस हर शहर की यही हालत है। मुझे यहाँ की गोलबंद साहित्यकारी उर्फ़ दूकानदारी ने खूब नुकसान पहुंचाने की कोशिश की , जबलपुर की तासीर में चुगली भी रच बस सी गयी है...बावरे-फकीरा को लेकर मुझे कईयों ने हतास करने की कोशिश की उनमें एक हैं "श्री ........." जो पेशे से "........"हैं .....उनको मेरी श्रध्दांजलि ...? उस पर मैं आजिज़ आ गया हूँ "उफ़...ये चुगलखोरियाँ....!! " झूठी-सच्ची सब कह देते हैं जा देखो तब उंगली कर देते हैं क्योंकि ""जंग इश्क और अंगुली करने में सब जायज़ है...?"