Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

15.8.15

Biography of Dr. Johanna Budwig


I gladly announce that Biography of Dr. Johanna Budwig is published in Health of India as Cover Story. Definitively Budwig Protocol is a miracle cure for cancer with documented 90% success if you follow this treatment perfectly and religiously. This treatment targets on prime cause of cancer.
Prime cause of Cancer is oxygen deficiency in the cells. Two factors are essential to attract oxygen in the cells: 1- Sulfur containing protein (found in cottage cheese) and 2- some unknown fat which nobody could identify until 1949 when Dr. Budwig developed paper chromatography technique to identify fats. These fats were Alpha-linolenic acid and linoleic acid found abundantly in FLAX OIL. Thus she developed Cancer therapy based on Flax oil and cottage cheese. I shall soon give you link to download this file.

Click here to download

Dear Friends,
If anybody wants to have hard copy of this issue, you may get from Mr. Mohit chaturvedi on his mobile (09314937709 or 09309291100) or email (dietvictuals@gmail.com). Cost is Rs. 60/- + courier, if applicable. In Jaipur no courier charges.Thanks. Dr. O.P.Verma

  • Comments on FB
  • Brent Wilcox im telling you this lady was WAY WAY WAY AHEAD OF HER TIME...the body was set up to heal itself...Dr. Budwig understood this to be true...i have researched her and the Budwig Center, this proves that cancer is curable WITHOUT chemotheraphy!!!
    12 hrs · Unlike · 9
  • Inge Kalkhoven I agree Brent
    11 hrs · Edited · Unlike · 1
  • Kelly Madsen Holmes I Love Her!!! I am so Grateful for her, she's Awesome!!!
    11 hrs · Unlike · 4
  • Kelly Madsen Holmes Great job on cover story !!
    6 hrs · Unlike · 1
  • Om Verma Friends, the cover story includes her biography, some quotes, protocol in brief, some testimonials, biography of Mr Lothar Hirneise and 5 important herbs used in Cancer e.g. Dandelion, Mulberry, Milk Thistle, Stinging Nettle and Essiac tea
    2 hrs · Like
  • Om Verma Even cover page looks awesome. It is for the first time thart Budwig appears on cover page of an Indian magazine. How thrilled and excited I am.!!!
    2 hrs · Like
  • Om Verma I definitely agree with Brent Wilcox. In my opinion Budwig was the best scientist of the era. It is very sad that no body worked on Quantum Biology after her demise.

14.8.15

धर्म को धोखा देते ये कथित संत

-सिद्धार्थ शंकर गौतम- 

आसाराम प्रकरण के बाद ऐसा लगने लगा था कि देश में बाबाओं के मायाजाल से आम आदमी दूर हो जाएगा किन्तु हाल ही में उजागर हुए दो मामलों से मैं गलत साबित हुआ हूं। ओडिशा में खुद को भगवान विष्णु का अवतार बताने वाले सारथि बाबा हों या देवी दुर्गा का अवतार कहलाने वाली सुखविंदर कौर उर्फ़ बब्बू उर्फ़ राधे मां; धर्म का ऐसा मखौल इस देश में बन गया है मानो ईश्वर इन कथित धर्मगुरुओं के बगैर मिल ही नहीं सकता। क्या भारत में इससे पूर्व संतों को इस कदर धूर्त होते देखा गया है? क्या देश का सनातन धर्म, मान्यताएं, परम्पराएं तथा संस्कार इस बात की इजाजत देते हैं कि संत अपनी संतई को सार्वजनिक रूप से उपहास का पात्र बनाए? सारथि बाबा पर आरोप हैं कि उनके कई महिलाओं से शारीरिक संबंध हैं और वे सेक्स रैकेट में भी लिप्त हैं।

महिलाओं को आजादी कब मिलेगी?


-प्रियंक द्विवेदी-

15 अगस्त 1947..एक ऐसा दिन जिस दिन भारत अंग्रेजों के अत्याचारों से मुक्त हुआ था। सारे देश में खुशी की लहर छा गई थी। इस साल यानी 15 अगस्त 2015 को हमारे देश को आजाद हुए 68 साल पुरे हो जाएंगे। इन 68 सालों से हम आजादी में जी रहे हैं, लेकिन एक सवाल आज भी है कि आखिर महिलाओं को आजादी कब मिलेगी?

भगाना के दलित : इंसाफ माँगा था, इस्लाम मिला!

-भंवर मेघवंशी-
लगभग 4 माह तक उनका सामाजिक बहिष्कार किया गया, आर्थिक नाकेबंदी हुयी, तरह तरह की मानसिक प्रताड़नाएँ दी गयी| गाँव में सार्वजनिक नल से पानी भरना मना था ,शौच के लिए शामलात जमीन का उपयोग नहीं किया जा सकता था ,एक मात्र गैर दलित डॉक्टर ने उनका इलाज करना बंद कर दिया ,जानवरों का गोबर डालना अथवा मरे जानवरों को दफ़नाने के लिए गाँव की भूमि का उपयोग तक वे नहीं कर सकते थे | उनका दूल्हा या दुल्हन घोड़े पर बैठ जाये ,यह तो संभव ही नहीं था|

भारत का अखंड स्वरुप

--डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री--

कहा जाता है कि वीर सावरकर की अस्थियाँ अभी भी उनके वंशजों के पास सुरक्षित हैं । वे अपनी मृत्यु से पूर्व वसीयत कर गये थे कि उनकी अस्थियाँ सिन्धु नदी में तभी प्रवाहित की जायें जब भारत एक बार फिर से अखंड हो जाये । अखंड भारत का क्या अर्थ है ? पन्द्रह अगस्त के दिन इसकी चर्चा करना सामयिक होगा क्योंकि इसी दिन भारत का विभाजन हुआ था ।       भारत की परिभाषा दो प्रकार से की जाती है । पहली सांस्कृतिक भारत और दूसरा भौगोलिक भारत । सांस्कृतिक भारत की सीमा तो निश्चित नहीं की जा सकती क्योंकि वह अवधारणा मानचित्र पर नहीं बल्कि ह्रदय में होती है । इसीलिए कहा जाता है कि किसी भी देश का सांस्कृतिक पक्ष अमूर्त होता है और भौगोलिक पक्ष मूर्त होता है ।

कोलकाता के वयोवृद्ध फोटो पत्रकार मनोजीत का निधन

कोलकाता : वयोवृद्ध फोटो पत्रकार मनोजीत चंदा का आज यहां के एक अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 87 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से बीमार थे।

तिरंगे के भगवा और हरे रंग के पक्षधर ये ना भूले कि दोनों के बीच शांति का प्रतीक सफेद रंग भी है जिसके बिना देश की प्रगति की कल्पना संभव नहीं

आज हम 69 वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे है। अंग्रेजों की 2 सौ साल की गुलामी के बाद आज के दिन हमें आजादी मिली थी। जिन अंग्रेजों के राज में कभी सूरज नहीं डूबता था उन्हें अहिंसा के हथियार से हमने देश से खदेड़ दिया था। हमने अपने संविधान में धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनने का संकल्प लिया था लेकिन कुछ तबकों में फैली संप्रदायिक ताकतों के चलते  हमें देश को एक और अखंड़ रखने के लिये आजादी के बाद भी तीन तीन गांधियों,महात्मा गांधी,इंदिरा गांधी और राजीव गांधी, की शहादत देनी पड़ी। आज भी देश के कुछ हिस्सों में आतंकवाद का खतरा मंड़रा रहा है। आये दिन पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान युद्ध विराम और सीमाओं का उल्लंघन करके सीमा पर गोलीबारी करते रहता है। 

13.8.15

फिर सक्रिय किया जाएगा भड़ास Blog, पुराने निष्क्रिय हटाए जाएंगे, नयों को मिलेगा स्थान

Yashwant Singh : जागरण ग्रुप के बच्चा अखबार आई-नेक्स्ट के कानपुर संस्करण की लांचिंग कराने के बाद इसके संपादक पद से इस्तीफा देकर कई महीने तक अपने गांव में रहा. जी भर खुली हवा में सांस लेकर छाती मजबूत बनाने और घूम घूमकर ताड़ी पीकर गला तर करने के बाद नई नोकरी खोजने नोएडा पहुंचा. शराब न पीने और झगड़ा न करने टाइप कई किस्म की शर्तों को मुझसे मनवाए जाने के बाद अंतत: कामकाज के मेरे पुराने अच्छे रिकार्ड को देखते हुए दैनिक जागरण नोएडा में नौकरी दे दी गई. इसी दौरान सुना कि हिंदी में ब्लागिंग का दौर शुरू हुआ है और किसिम किसिम के हिंदी ब्लाग बन चल लिखे जा रहे हैं.


कथित डिप्लोमाधारी भ्रष्टाचारी जनता की आवाज कदापि नहीं हो सकता

-सुरेश मिश्र -

साथियों , आजकल देश की संसद हमारे माननीयों के हंगामे की भेट चढ़ी हुई है। हंगामा के पीछे कुछ ख़ास बजह बताई जा रही है जिसे सरकार सुनना नहीं चाहती। उसके पीछे भी कुछ ख़ास बजह है। ज्यादा वक्त नहीं गुजरा है। विपक्ष में रहते हुए एन डी ए ने यू पी ए सरकार के कई मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाकर संसद में सरकार की जबरदस्त घेराबंदी की थी। दबाव में आकर तत्कालीन यू पी ए सरकार ने आरोपित मंत्रियों से इस्तीफा ले लिया था। जनता में यह मैसेज गया की यू पी ए सरकार भ्रष्टाचारी है। एक के बाद एक कई मंत्रियों के इस्तीफे के बाद जनता में सरकार के खिलाफ ऐसा माहौल बना की 2014 में हुए आम चुनाव में उसे विपक्ष में बैठने का जनादेश मिला। संख्या भी उसकी इतनी की उँगलियों में गिनती हो जाय। भाजपा उसी खेल से सत्ता में आई है। भाजपा और सत्ता में बैठे उसके चतुर धुरंधर यह जानते है कि यदि गंभीर आरोप झेल रहे मध्य प्रदेश के सी एम शिवराज सिंह चौहान , राजस्थान की सी एम वसुंधरा राजे और केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज का इस्तीफा ले लिया गया तो जनता यह मान लेगी की भ्रष्टाचार हुआ है इसीलिए इन माननीयों का इस्तीफा हुआ है।


याकूब, नौशाद, जलालुद्दीन का बरी होना साबित करता है कि खुफिया-सुरक्षा एजेंसियां बेगुनाहों को फंसाती हैं- रिहाई मंच

आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों को छोड़ने का वादा सपा सरकार निभाती तो बेगुनाह जेलों में सड़ने को मजबूर न होते

लखनऊ 10 अगस्त 2015। रिहाई मंच ने आतंकवाद के फर्जी मुकदमें में गिरफ्तार
याकूब, नौशाद और जलालुद्दीन के बरी किए जाने को साम्प्रदायिक जांच एंव
खुफिया एजेंसियों के मुंह पर तमाचा बताया है। मंच ने कहा कि यदि सपा
सरकार ने चुनाव के समय किए गए वादे को पूरा करते हुए इन बेगुनाहों को
2012 में छोड़ दिया होता तो इनकी जिन्दगी के कीमती तीन साल बच सकते थे।

30 युवा कलाकारों ने शुरू किया कला का सजीव प्रदर्शन, 16 अगस्त तक चलेगा


लखनऊ कला महोत्सव में " कला संगती " युवा एवं वरिष्ठ चित्रकला कार्यशाला / कैम्प का हुआ शुभारम्भ

लखनऊ ,13 अगस्त 2015 ,लखनऊ  में कला स्रोत फाउंडेशन के ओर से  9 से 23 अगस्त तक चलने वाले " लखनऊ कला महोत्सव " में दिनांक 13  अगस्त  से 16 अगस्त तक "कला संगती " नाम से  युवा एवं वरिष्ठ चित्रकला कार्यशाला / कैम्प  का शुभारम्भ हुआ  इस कैम्प का उद्धघाटन ललित कला अकादमी , क्षेत्रीय केंद्र के सचिव श्री सिद्धार्थ घोष ने कैनवास पर रेखाचित्र पोर्ट्रेट बना कर किया  ,यह आयोजन कला स्रोत स्टूडियो में हुआ  यह कैम्प 16 अगस्त तक  सुबह 11  बजे  से  सायं 6 बजे तक कला प्रेमी आ सकते है

कृपया चुनावी भाषणों को गालियों में तब्दील मत कीजिए

-शैलेन्द्र चौहान-

एक समय था जब नेता एक-दूसरे के प्रति शालीन भाषा का इस्तेमाल करते थे। वे इसका ख्याल रखते थे कि राजनीतिक बयानबाजी व्यक्तिगत आक्षेप के स्तर पर न आने पाए। उनकी ओर से ऐसी टिप्पणियों से बचा जाता था जो राजनीतिक माहौल में कटुता और वैमनस्य पैदा कर सकती थीं। दुर्भाग्य से आज वह लक्ष्मण रेखा मिट गई है। नेताओं के बीच एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने की होड़ जिस तरह बढ़ती जा रही है उससे भारतीय लोकतंत्र की मर्यादा को आघात लग रहा है। बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की गरिमा का कोई ख्याल न रखते हुए जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया वह आहत करने वाली है। हद तो तब हो गई भाजपा के स्थानीय संयोजक शकुनि महाराज ने नीतीश कुमार को अब तक का सबसे लुच्चा सीएम कह डाला।

इस शासन की जड़ भी हिल जायगी....

आओ! देखो! भारत के प्राणो में क्या उन्माद भरा है ।
शासन के प्रतिबन्ध व्यर्थ है, और व्यर्थ है सब धारायें ,
उन्हें तोङकर जनता के स्वर गुज रही हैं सभी दिशाएँ ।
नारी कंण्ठ पुकार रही है, उनके उपर हो रहे जुर्म मिटाओ ,
जनता दाँत पिसती जाती, बंद हथेली उसकी खुल जाती।

एटीवी न्यूज़ चैनल की प्रिंट मीडिया में दस्तक

एटीवी न्यूज़ चैनल & एजेंसी 2007 से मीडिया में अपना अलग स्थान बनाने में सक्षम हुए हैं | एटीवी के मोबाइल रेडियो ने कुछ दिन पहले मीडिया में आकर बिना एंड्रोड और नेट कनैक्टिविटी के खबर को गाव गाव घर बिना शुल्क के पहुचने का का जो अहम मंच बना है उससे मीडिया में एक नै क्रांति आई है | चैनल हेड केशव पंडित जी ने अपनी पत्रिका का वैशवारा के बाद मीडिया मित्र को मार्किट में उतरा है | जल्द ही पत्रिका गिनीज और लिम्का बुक में भी दर्ज होगी |

गेस्टोकेयर में धोखा, नाम बड़े दर्शन खोटे... निजी चिकित्सालय जाने के पूर्व सावधान

-राधावल्लभ शारदा-
भोपाल । जब स्वयं या अपने किसी नजदीकी पर कुछ अनहोनी घटती है तब खबर बनती है। कहावत है-जाके पैर की बिवाई नहीं फटती वह दूसरे का दर्द नहीं जानता। मैं आज भोपाल के एक नामी चिकित्सालय की बात करुँगा। सडक़ पर कब्जा कर नो पार्किंग का बोर्ड लगाये इस चिकित्सालय का नाम है। गेस्टोकेयर पूरा नाम भोपाल इन्सटीट्यूट ऑफ गेस्ट्रोलॉजी प्रा.लि. जहां लीवर सहित पेट की बीमारियों का इलाज किया जाता है। संस्थान ई-3/120 एवं 121 दो प्लाटों पर बना है।

बीहड़ बचाने के लिए डकैतों की अनोखी मुहिम

–रिज़वान चंचल- 
बीहड़ जो कि कभी खूंखार डकैतों के शरण स्थली के रुप में जाना जाता था आजकल वीरान सा है कल तक बीहड़ो में दस्यु सरगनाओं एवं दस्युसुंदरियों के शौतिया डाह के चलते जहां चूड़ियों की खनखनाहट और गोलियों की तड़तड़ाहट आम बात थी आज वहां सन्नाटा सा पसरा है । उ0 प्र0 एवं म0 प्र0 के ज्यादातर दस्यु गिरोहों के खात्में के चलते दस्युओं का खैाफ जो ग्रामीणों के सिर चढ़कर बोलता था अब नजर नही आता ! चंबल के निकट बसे ग्रामीण अब जब इन दस्युयों की चर्चा छेड़तें हैं तो ऐसा प्रतीत होता है कि स्थितियां चाहे जो भी रहीं हो किन्तु कई दस्यु ऐसे भी रहें हैं जिन्हें आज भी लोग डकैत नही बल्कि सम्मान से बागी कहना ज्यादा पसन्द करते हैं । कल तक गोलियों से बीहड़ थर्रा देने वाले यही डकैत अब वन बचाने की मुहिम में शामिल होने जा  रहे हैं। यह डकैत अब लोगों को पर्यावरण बचाने का संदेश देंगे। इस मुहिम में चंबल के खूंखार डकैत रहे मोहर सिंह, मलखान सिंह, सरला यादव समेत दर्जनों पूर्व डकैत शामिल होंगे। चंबल की सबसे चर्चित दस्यु सुंदरियों में से एक सीमा परिहार भी इसमें हिस्सा लेंगी। इसके लिए तैयारियां भी जोरों पर चल रही हैं। सीमा परिहार ने बताया कि जंगल बहुत जरूरी हैं। तरक्की चाहे कितनी भी हो, लेकिन जीवन इन्हीं से है। वह 'पहले बसाया बीहड़, अब बचाएंगे बीहड़' का नारा देंगी।

स्वास्थ्य सेवा : कहीं जय जयकार तो कहीं हाहाकार

-कुमार कृष्णन-
नदियों के किनारे हमारी सभ्यता और संस्कृति विकसित हुई। आदमी की मूल जरूरत थी खेती और इसके लिये वहाँ जल आसानी से उपलब्ध होता था। विकास के दौर में वे तौर तरीके बदल गए। हरित चक्र नष्ट हो गए। ज्ञान की पारम्परिक पद्धतियों को दरकिनार कर मॉडर्न यूरोपीय स्वास्थ्य ज्ञान राजनीति का हिस्सा बन गया है। इसे समझना होगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार स्वास्थ्य का तात्पर्य शारीरिक, मानसिक सामाजिक खुशहाली है न कि व्यक्ति का सिर्फ बीमार नहीं होना। ‘‘स्वास्थ्य सेवा के नाम पर कहीं जय जयकार है तो कहीं हाहाकार है।’’ देश के स्वास्थ्य सेवा की तल्ख सच्चाईयों से वाक़िफ़ कराने और एक समझदारी विकसित करने के मकसद से विकास संवाद की ओर से झाबुआ में तीन दिवसीय राष्ट्रीय मीडिया संवाद आयोजन किया गया। इस दिशा में वर्षों पहले जनसरोकारों के विषय पर समझदारी विकसित करने के लिये एक पहल की गई थी। यह निरन्तर प्रयासों का नतीजा है कि अब इस संवाद ने एक व्यापक रूप धारण कर लिया है। आरम्भ में सचिन कुमार जैन ने स्वास्थ्य के सरोकारों से वाक़िफ़ कराया तो दूसरी ओर चिन्मय मिश्र ने विषय की गम्भीरता की चर्चा करते हुए कहा कि- ‘‘एक ओर देश जहाँ पोलियो उन्मूलन की सफलता के लिये जय जयकार कर रहा है तो यह भी तल्ख सच्चाई है कि पोलियो की खुराक लेने के बावजूद जल के कारण लोग विकलांग हो रहे हैं, यह हाहाकार को बयाँ करने के लिये काफी है।

सिलकोसिस: गुजरात का अमानवीय चेहरा

-कुमार कृष्णन-
स्वास्थ्य एक ऐसा विषय है जिससे हर व्यक्ति सरोकार है। स्वास्थ्य पर हमारे देश में जो स्थितियाँ हैं उससे यह भी निकलता है कि देश में जनस्वास्थ्य की स्थितियाँ कमोबेश बेहतर नहीं है। खासकर मध्यमवर्गीय और निम्नवर्गीय समाज में बेहतर स्वास्थ्य रखना और बिगड़े हुए स्वास्थ्य को दुरुस्त करवाना खासा मुश्किल हो रहा है। स्वास्थ्य के निजीकरण ने इस क्षेत्र को सेवा क्षेत्र से लाभ आधारित व्यवस्था का पर्याय बना दिया है। स्वास्थ्य एक ऐसा विषय है जिससे हर व्यक्ति सरोकार है। स्वास्थ्य पर हमारे देश में जो स्थितियाँ हैं उससे यह भी निकलता है कि देश में जनस्वास्थ्य की स्थितियाँ कमोबेश बेहतर नहीं है। खासकर मध्यमवर्गीय और निम्नवर्गीय समाज में बेहतर स्वास्थ्य रखना और बिगड़े हुए स्वास्थ्य को दुरुस्त करवाना खासा मुश्किल हो रहा है। स्वास्थ्य के निजीकरण ने इस क्षेत्र को सेवा क्षेत्र से लाभ आधारित व्यवस्था का पर्याय बना दिया है।

लोकआंदोलन का मुद्दा बने स्वास्थ्य का सवाल

-कुमार कृष्णन-
विकास संवाद की ओर से मध्य प्रदेश के झाबुआ में ' स्वास्थ्य और मीडिया' पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय मीडिया समागम अनेक मायने में महत्वपूर्ण रहा। समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवा में तकसंगत सुरक्षित इलाज और सबके पहुंच लायक और विश्वसनीयता का समावेश होना चाहिए। सरकार का मकसद ऐसी परिस्थितियां बनाने का होना चाहिए जो समग्र गुणवत्ता के रास्ते पर ले जाए। स्वास्थ्य सेवा के नीतिकारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है कि सभी पद्धतियों के बीच संतुलन कैसे बिठाया जाए। कार्यावन्यन के लिए ठोस कदम अनेक प्रकार के हैं,जो नीति के अनुसार चुने और गढ़े जा सकते हैं। स्वास्थ्य के सवाल को लोकआंदोलन का मुद्दा बनाया जाना चाहिए।

भूजल के दोहन से अमृत बना जहर

-कुमार ​कृष्णन-
आज देश में जल गुणवत्ता के सवाल से ज्यादा महत्त्वपूर्ण गुणवत्ता का सवाल है। जगह—जगह आरओ या फिल्टर लग चुके हैं। इंडियन काउंसिल आॅफ रिसर्च का आकलन है कि आने वाले दिनों में पानी पीने योग्य नहीं रह जाएगा। ग्रेटर नोएडा के आसपास के 60 से ज्यादा गाँवों में लोग कैंसर के शिकार हैं। दरअसल अन्धाधुन्ध औद्योगीकरण के कारण सुरक्षित भूजल पूरी तरह से दूषित हो गया है। आर्सेनिक, फ्लोराइड, नाइट्रेट जैसे जहरीले तत्व पाए गए हैं। विकास संवाद की ओर से मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में 'मीडिया और स्वास्थ्य' के तीन दिवसीय राष्ट्रीय पत्रकार समागम का दूसरा दिन कई मायने में महत्त्वपूर्ण रहा। इसके दूसरे सत्र में जहाँ फ्लोराइड नॉलेज एंड एक्शन नेटवर्क और हिन्दी इण्डिया वाटर पोर्टल की ओर से प्रकाशित पुस्तक 'अमृत बनता जहर' का लोकार्पण किया गया, वहीं दूसरी पुस्तक 'कुपोषण और हम' का लोकार्पण हुआ। दोनों पुस्तकें स्वास्थ्य के मौलिक जानकारी के लिये समसामयिक हैं।

दवा कम्पनियां अपने ब्रांड की बिक्री और प्रमोशन के लिए डॉक्टरों को आर्थिक या अन्य प्रलोभन देती हैं


- कुमार कृष्णन -
दवा कम्पनियाँ काफी अरसे से अपने ब्रांड की बिक्री और प्रमोशन के लिए डॉक्टरों को आर्थिक या अन्य माध्यम से प्रलोभन देती रही है। इन फायदों में छोटे-मोटे गिफ्ट्स से लेकर घरेलू उपयोगी सामान या फिर विदेश यात्रा तक शामिल हैं। ये पूरा कारोबार अरबों रुपयों का है। इस तरह की प्रैक्टिस से मरीजों को ही खामियाजा भुगतना पड़ता है। उन्हें अनावश्यक दवाएँ खरीदने पर मजबूर किया जाता है। विकास संवाद की ओर से मध्यप्रदेश के झाबुआ में 'मीडिया और स्वास्थ्य' विषय पर आयोजित परिसंवाद के प्रथम दिन के तीसरे सत्र में 'स्वास्थ्य और पत्रकारिता' सचिन कुमार जैन ने कहा कि एक ओर सहस्त्राबदि विकास का लक्ष्य रखा गया तो दूसरी ओर 1.60 लाख बच्चे अपना पहला जन्म दिन नहीं देख पाते हैं। नीतिगत प्राथमिकता की बात तो की जाती है, लेकिन बजट में कटौती की जा रही है। अस्पताल हैं तो डॉक्टर नहीं। संसाधन उपलब्ध नहीं है। देश भर में 14 लाख डॉक्टर्स की कमी है जो कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुरूप चिकित्सक और मरीज के अनुपात में कम है। दूसरी ओर प्राइवेट अस्पतालों में शोषण का अंतहीन सिलसिला। इलाज के क्रम से ही हर साल लोग गरीबी रेखा के नीचे जा रहे हैं। ऐसे में पत्रकारिता की भूमिका अहम है। पत्रकारिता का क्या नजरिया हो, इस पर संजीदगी से गौर करने की आवश्यकता है।

कम्पनियों के हवाले बीमार स्वास्थ्य सेवा

-कुमार कृष्णन-
सस्ती दवाएँ बनने के बाद भारत को ‘गरीब देशों की दवा की दुकान’ कहा जाने लगा क्योंकि यहाँ से एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिकी देशों में सस्ती दवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। सबसे बड़ी त्रासदी है कि देश का 60 फीसदी तबका दवाओं से वंचित है। बदले हालातों में भारतीय कम्पनियाँ दवाओं के निर्माण की बजाय सिर्फ व्यापार में लिप्त हैं जिससे चीन का दवा बाजार पर कब्जा बढ़ा है। हाल में आयी एनएसओ की रिपोर्ट के मुताबिक गाँवों की 86 फीसदी तथा 82 फीसदी शहरी आबादी के पास इलाज का कोई इन्तज़ाम नहीं होता है। इनके लिए न तो सरकारी योजना है और न ही कोई निजी स्वास्थ्य बीमा। पूरा जीवन भगवान भरोसे गुजरता है। लोग 80 फीसदी दवा पर खर्च अपने कीमत पर करते हैं। आम आदमी के पहुँच से दूर होती जा रही है स्वास्थ्य सेवा। असमानता की खाई का आलम यह है कि जहाँ गरीबों तथा आम लोगों को इलाज के लिए अपना पैसा खर्च करना पड़ता है, वहीं दूसरी ओर लोग सरकारी धन पर विदेश जाकर इलाज कराते हैं। बात यहीं खत्म नहीं होती है दवाओं के व्यापार और इसमें तरह-तरह के गठजोड़ ने पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था को कम्पनियों के हवाले करने पर आमादा है।

कला के माध्यम से लखनऊ की समस्यायों के निवारण की छात्रों ने की अभिव्यक्ति

कला स्रोत कला केंद में कला स्रोत फाउंडेशन द्वारा आयोजित " लखनऊ कला महोत्सव " के अंतर्गत 15 दिवशीय कार्यक्रम के तीसरे दिन दिनांक 11 अगस्त 2015 को पोस्टर एवं निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया ,यह आयोजन कला महाविद्यालय  एवं करामात गर्ल्स कॉलेज निशातगंज ,लखनऊ के प्रांगण में हुआ जिसमे 24 कला महाविद्यालय के और 30 करामात गर्ल्स कॉलेज के छात्र छात्राओं  ने भाग लिया ,पोस्टर एवं निबंध लेखन के लिए विषय " एरर इन डेवलपमेंट आफ लखनऊ  " और  " ए पी जे  अब्दुल की उपलब्धिया "  जैसे विषय दिया गया

भारत का कानून मंत्रालय अभी महारानी एलिजाबेथ के लिए काम कर रहा है!

प्रति,
सचिव महोदय
राजभाषा विभाग
गृह मंत्रालय
नई दिल्ली
सन्दर्भ: राज्यों के मुख्यमंत्रियों एवं उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों का संयुक्त सम्मेलन
विषय: कानून मंत्रालय ही कर रहा कानून का निरंतर उल्लंघन
महोदय,

५ अप्रैल २०१५ को कानून एवं न्याय मंत्रालय के अधीन न्याय विभाग ने जो सम्मेलन आयोजित हुआ, उसकी तारीख को लेकर विवाद हुआ पर उसी कार्यक्रम में राजभाषा कानून की धज्जियाँ उड़ाई गईं। इस कार्यक्रम के सभी बैनर/पोस्टर, आगंतुकों के बिल्ले, आमंत्रण-पत्र, ईमेल आमंत्रण-पत्र एवं अतिथि न्यायाधीशों,मुख्यमंत्रियों के नामपट आदि केवल अंग्रेजी में बनाए गए थे।  ऐसा लग रहा था यह कार्यक्रम रानी एलिजाबेथ के लन्दन शहर में हो रहा हो।

दोस्तियों की छांव के सिवाय इंसानियत के वास्ते अब कोई पनाह नहीं

आसमान में सूराख हमने नहीं किये,आसमां सूराख है और  कायनात में बेइंतहा सूखा है आगे,बादल फिर बरसेंगे नहीं सुनामियों में दम तोड़ने लगा है समुंदर भी और हिमालयहो गया है नंगा और सपाट सिरे से आंकड़ों में जकड़ा वतन मेरा मर रहा है आहिस्ते आहिस्ते होश में आओ लोगों कि तमाशा बहुत रंगीन है कि चोरों में जंग छिड़ी है हिस्से के बंटवारे के लिए

-पलाश विश्वास-

मजा भी बहुत आ रहा है लेकिन किस्सा बेहिसाब संगीन है। इस किस्साई संगीन से जो भी हो जख्मी,माफ करें।

गुगल बाबा की मेहरबानी है कि दुनिया देखने लगी है कि कुछ कुछ किस्से हमारी झोली में भी हैं। अब सुंदर भी हो गया है गुगल और यूं समझें की गुगल ही हमारा असली मालिक है।वे सुंदर भी खड़गपुर के एक्स स्टुडेंट हैं और वहां अब सुंदर जश्न भी है।अब थोड़ा दिल थामकर बैठें,दमादम जो हम पोस्ट कर रहे हैं।शायद फिर बहुत जल्द वह सिलसिला थमने वाला है क्योंकि हमें भी जीने के लिए आखिर देर सवेर गुगल के विज्ञापन लगाने हैं।सिर्फ अपनी रिहाई का इंतजार है।गुगल बाबा अब सुंदर है तो सुंदर का स्वागत है।

मोदी की अचानक दुबई-यात्रा


 -डॉ. वेदप्रताप वैदिक-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अचनाक होने वाली दुबई-यात्रा पर आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है। यह कहा जा रहा है कि उन्होंने यह संकल्प किया था कि वे जब भी देश के बाहर जाएंगे तो कम से कम तीन देशों में एक साथ जाएंगे ताकि समय और पैसे की बचत हो और उनका ठीक से सदुपयोग हो। तो अब प्रश्न उठता है कि वे इस वक्त (16 और 17 अगस्त) को अकेले संयुक्त अरब अमारात क्यों जा रहे हैं? वास्तव में यह देश नहीं, संघ है। यह सात अरब देशों से मिलकर बना है। अब वे दुबई और अबू धाबी पहुंचेंगे तो यह एक साथ सात देशों की यात्रा होगी।

इलाहाबाद में शान-ए-गुफ्तगू सम्मान समारोह पांच को, इब्राहीम अश्क मुख्य अतिथि होंगे


इलाहाबाद । साहित्यिक संस्था ‘गुफ्तगू’ के तत्वावधान में आगामी पांच
सितंबर की शाम ‘शान-ए-गुफ्तगू’ सम्मान समारोह का आयोजन नगर के धूमनगंज
में स्थित सुधा वाटिका में शाम 7.30 बजे से किया जाएगा। कार्यक्रम के
मुख्य अतिथि फिल्म गीतकार इब्राहीम अश्क होंगे, अध्यक्षता पं. बुद्धिसेन
शर्मा करेंगे।

12.8.15

मोदी विरोध के बहाने देश को नुकसान पहुँचा रहे हैं लालू-नीतीश-कांग्रेस

हाजीपुर,ब्रजकिशोर सिंह। मित्रों,नाना पाटेकर ने यशवंत फिल्म में एक डॉयलॉग कहा था कि गिरना है तो झरने की तरह गिरो लेकिन हमारे कुछ राजनेता कुत्ते की तरह गिर गए हैं। इनलोगों की प्राथमिकता सूची में देशहित कहीं है ही नहीं। वे दिखाने के लिए तो विरोध कर रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी का लेकिन वास्तविकता यह है कि वे देश को भी नुकसान पहुँचाना चाहते हैं और पहुँचा भी रहे हैं। क्या लालू-नीतीश और कांग्रेस को पता नहीं है कि संसद के ठप्प होने से सरकार अर्थव्यवस्था को गति देनेवाले दोनों महत्वपूर्ण विधेयकों जीएसटी बिल और भूमि अधिग्रहण बिल को पास नहीं करवा पाएगी और जब तक ये दोनों विधेयक पारित नहीं होते हैं देश में देसी-विदेशी निवेश को द्रुत-गति मिलना असंभव है? निश्चित रूप से लालू-नीतीश और कांग्रेस को यह पता है। तो फिर संसद को ठप्प करने का क्या मतलब है? क्या इसका यह मतलब नहीं है कि ये नेता भारत को बर्बाद कर देना चाहते हैं। इनको यह भी पता है कि पीएम मोदी जो रोजगार-निर्माण और अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए जाने जाते हैं संसद को ठप्प कर देने से ऐसा नहीं कर पाएंगे और तब उन पर इस बाबत आरोप लगाना आसान हो जाएगा कि कहाँ कि 10 प्रतिशत की विकास दर और कहाँ हैं रोजगार?
मित्रों,दुर्भाग्यवश उसी फिल्म में नाना पाटेकर ने एक और डॉयलॉग बोला था कि एक मच्छर आदमी को हिजड़ा बना देता है। क्या मुट्ठी-भर राजद,जदयू और कांग्रेस के सदस्यों ने अपनी मनमानी और देशविरोध नीति से पूरे भारत को हिजड़ा नहीं बना दिया है? आखिर कब तक हम आँखें बंद कर देखते रहेंगे कि चंद लोगों ने किस तरह भारत के विकास के पहिए को अवरूद्ध करके रख दिया है? एक अकेले जीएसटी के आने से भारत की जीडीपी में 2 प्रतिशत का उछाल आ जाएगा। आखिर कब तक हम इन भारतविरोधी पार्टियों की मनमानी को बर्दाश्त करते रहेंगे? लालू-नीतीश को अगर बिहार और बिहारियों को अमीर बनाना है तो उनको किसकी तरफ होना चाहिए? उनलोगों की तरफ जिनकी राजनीति आजादी के बाद से ही गरीबों को गरीब बनाकर रखने से चलती है या फिर उनलोगों के पाले में जो सबको अमीर बनाना चाहते हैं? कल तो इन विपक्षी दलों ने हर सीमा को पार कर लिया। अब इनको मनाने का समय बीत चुका है। अगर ये लोग चाहते हैं कि प्रत्येक विधेयक को संयुक्त सत्र बुलाकर ही पास कराया जाए तो मोदी-सरकार बिना ज्यादा सोंच-विचार किए ऐसा भी करना चाहिए और ऐसे प्रत्येक कदम उठाने चाहिए जिससे देश के आर्थिक विकास को नई गति मिले क्योंकि देश संसदीय परंपराओं से भी ऊपर है,सबसे ऊपर है।

हाजीपुर टाईम्स पर भी प्रकाशित

11.8.15

सावधान,मोदी जी,ई बिहार है,जुबान संभाल के!

सावधान,मोदी जी,ई बिहार है,जुबान संभाल के!

हाजीपुर,ब्रजकिशोर सिंह। मित्रों,जब लोकसभा का चुनाव-प्रचार चल रहा था तब नरेंद्र मोदी अक्सर कहा करते थे कि मेरे हिसाब से पानी से आधा भरा गिलास पूरा भरा हुआ है यानि कि नरेंद्र मोदी जी सुपर आशावादी हैं लेकिन बिहार की दो रैलियों में नरेंद्र मोदी जी ने जो भाषण दिया है वह कदापि उनके इस पूर्व के बयान का समर्थन नहीं करता। उनके दोनों ही भाषणों में घबराहट है,पराजय का भय है मगर आत्मविश्वास नहीं है। मैं यह नहीं कहता कि मोदी का गिलास पूरी तरह से खाली है लेकिन आधा खाली तो जरूर है।
मित्रों,इन दोनों ही भाषणों में वही गलती की है जो कभी उन्होंने दिल्ली में केजरीवाल को अराजकतावादी और धरना विशेषज्ञ बताकर किया था। सकारात्मक सोंचवाले लोग दूसरों की आलोचना करने में समय बर्बाद नहीं करते बल्कि जनता को यह बताते हैं कि वे राज्य को क्या देने जा रहे हैं या उनकी झोली में राज्य के लिए कौन-कौन सी योजनाएँ हैं। मगर बिहार में मोदी जी ने अपने दोनों ही भाषणों में गाली-गलौज ही ज्यादा की है। शायद मोदी जी को पता नहीं है कि बिहार में गाली-गलौज को कितना बुरा माना जाता है और अक्सर गाली-गलौज के चलते हत्या तक हो जाया करती है। इसलिए उनको जो भी बोलना चाहिए जुबान संभाल के बोलना चाहिए अन्यथा भगवान न करे उनको एक बार फिर से दिल्ली का अनुभव करना पड़ सकता है। अगर ऐसा होता है तो वो भारत के पीएम के लिए तो झटका होगा ही बिहार की जनता के लिए भी दुःस्वप्न के समान होगा और बर्बाद बिहार और भी बर्बाद हो जाएगा।
मित्रों,इसलिए हम नरेंद्र मोदी जी से अनुरोध करते हैं कि जब वे अगली बार बिहार आएँ तो पूरी तरह भरे गिलासवाला भाषण दें। जनता को गठबंधन और गठबंधन करनेवालों की हकीकत पता है और उनसे ज्यादा पता है इसलिए आपादमस्तक कीचड़ में डूबे लोगों पर ढेला फेंकने की कोई जरुरत नहीं है बल्कि उनको सिर्फ यह बताना चाहिए कि वे बिहार के लिए क्या करने जा रहे हैं और इसके लिए उनके पास किस तरह की योजनाएँ हैं। मोदी जी पहले अपने मन में विश्वास उत्पन्न करें कि विकास के मुद्दे पर भी चुनाव जीते जा सकते हैं जनता खुद ही उनपर विश्वास कर लेगी। भयभीत व्यक्ति कभी जंग नहीं जीतते क्योंकि घबराहट बुद्धि और प्रतिउत्पन्नमतित्व को नष्ट कर देती है। कभी-कभी अतिआत्मविश्वास भी नुकसानदेह होता है क्योंकि वो आदमी को लापरवाह बना देता है।
हाजीपुर टाईम्स पर भी प्रकाशित

10.8.15

यथार्थ और सौन्दर्य के बीच की ग़ज़लें

कुमार कृष्णन
समकालीन हिन्दी ग़ज़ल आज जिस भाव और कथ्य को लेकर आगे बढ़ रही है,वह हिन्दी कविता के लिए उत्साहवद्धक है। हिन्दी में ग़ज़ल के प्रवेश से हिन्दी कविता जो पठनीयता के संकट से जूझ रही थी, उस संकट को तोड़ने में हिन्दी ग़ज़ल को काफी हद तक सफलता मिली है। हिन्दी ग़ज़ल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह आत्ममुग्ध्ता और दंभ से ग्रसित नहीं है। यह पाठकों की जुवान में ही पाठक की ही बात करती है। इसके कथ्य को गंभीरता से देखा जाय तो न तो उपदेश और न ही शव्दों के इंद्रजाल मिलते हैं। यही कारण है कि पाठकों ने इसका हिन्दी साहित्य में तहे दिल से स्वागत किया है।

स्वतंत्र भारत में खबरों की आजादी...!!

-तारकेश कुमार ओझा-
आजादी के बाद से खबरचियों यानी मीडिया के क्षेत्र में भी आमूलचूल परिवर्तन आया है। पहले मीडिया से जुड़े लोग फिल्म निदेशकों की तरह हमेशा पर्दे के पीछे ही बने रहते थे। लेकिन समय के साथ  इतना बदलाव आया है कि अब इस क्षेत्र के दिग्गज बिल्कुल किसी सेलीब्रिटी की तरह परिदृश्य के साथ  पर्दे पर भी छाये रहते हैं।अपने ही चैनल पर अपना इंटरव्यू देते हैं और हमपेशा लोगों की बखिया उधेड़ने से भी बिल्कुल गुरेज नहीं करते। बदलते दौर में खबरें शानदार शाही नाश्ते की प्लेट की तरह हो गई है जिसमें कई प्रकार के कलरफूल मिठाईयां सजी होती है। खबरों की दुनिया में दुनिया की खबरें वाकई बड़ी दिलचस्प है। इनमें से कई खबरें इसके बावजूद सुर्खियां बनती है जबकि यह पहले से मालूम होता है कि कुछ घंटे बाद ही यह खबर बिल्कुल उलटी होने वाली है। जैसे भारत – पाक संबंधों में सुधार।


विश्वविद्यालय से न्याय पाने के लिए सिकन्दरपुर बलिया से सत्याग्रह पदयात्रा करके बनारस पहुंचे छात्र

विषय : श्री बजरंग स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सिकंदरपुर वलिया के छात्र 200 किलोमीटर की पदयात्रा करके आज वाराणसी पहुच गये, ये सत्याग्रही छात्र कल महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ प्रशासन के एक अविवेकपूर्ण निर्णय के खिलाफ कुलपति से मिलेंगे और यदि बात नही बनी तो परिसर में ही गाँधी जी की प्रतिमा के समक्ष अनशन करेंगे.  श्री बजरंग स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सिकंदरपुर वलिया के छात्र 200 किलोमीटर की पदयात्रा करके आज वाराणसी पहुच गये, ये सत्याग्रही छात्र कल महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ प्रशासन के एक अविवेकपूर्ण निर्णय के खिलाफ कुलपति से मिलेंगे और यदि बात नही बनी तो परिसर में ही गाँधी जी की प्रतिमा के समक्ष अनशन करेंगे.

कलास्रोत के लखनऊ कला महोत्सव की भव्य शुरूआत

सांस्कृतिक परिदृश्य में अपनी गतिविधियों से गंभीर हस्तक्षेप करने वाले नगर के कला स्रोत कला दीर्घा एवं कला केन्द्र ने रविवार को युवा एवं वरिष्ठ कलाकारों की बड़ी संख्या में उपस्थिति के बीच अपनी पहली सालगिरह के अवसर पर आयोजित लखनऊ कला महोत्सव की भव्य शुरूआत की। केन्द्र के अलीगंज स्थित कला दीर्घा में सूचना विभाग के प्रमुख सचिव नवनीत सहगल और उनकी कलाकार पत्नी वन्दना सहगल ने इस उत्सव का उद्घाटन किया। उत्सव का आरम्भ दिल्ली की नीव कला दीर्घा द्वारा आयोजित सामूहिक कला प्रदर्शनी से हुआ। 23 अगस्त तक चलने वाले इस उत्सव में कला प्रदर्शनी के साथ ही छायाचित्र प्रदर्शनी, कार्यशाला, प्रतियोगिता, संगोष्ठी एवं संगीत कार्यक्रमों के विविध आयोजन किए जा रहे हैं।

कानपुर प्रेस क्लब कानपुर महानगर का फर्जीवाड़ा

कानपुर प्रेस क्लब कानपुर महानगर के वर्तमान स्वयंभू महामंत्री अवनीश दीक्षित ने अपने और अपने साथियों के अपराध को छुपाने के लिए दिए कुछ ऐसे बयान जिन्होंने प्रेस क्लब की विश्वसनीयता पर ही खड़े किये प्रश्न चिंन्ह |

एस.आर.न्यूज़ टीम | दोस्तों एस.आर.न्यूज़ चार हफ़्तों बाद एक बार फिर अपने निर्भीक और अकाट्य तथ्यों के साथ कानपुर प्रेस क्लब कानपुर महानगर का खुलासा करने जा रहा है, आज हम फिर हाज़िर हैं कुछ ऐसे स्वयंभू पत्रकारों के फर्ज़ीवाड़े का खुलासा करने के लिए जिन्होंने अपने निज स्वार्थों के लिए एक सम्मानित संस्था ( एनजीओ ) कानपुर प्रेस क्लब कानपुर महानगर पर फ़र्ज़ी प्रपत्रों और फ़र्ज़ी चुनाव तथा दबंगई के बल पर कर लिया कब्ज़ा |

8.8.15

आरपी. सिंह की दो टूक

 मीडिया के नाम पर देश में तमाम बड़ी दुकानें चल रही हैं। ये अपनी स्वार्थ सिध्दि के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। देश की सर्वोच्च अदालत के आदेश को सरेआम ठेंगा दिखा सकते हैं। किसी की भी इज्जत को मिट्टी में मिला सकते हैं। यहां अपने स्वार्थ वाले समाचार पूरे दिन दिखाए जाते हैं और जिनसे असल सरोकार नहीं है वे सीधे दबाए जाते हैं। यही कारण है कि समाचार अब खटकते, पत्रकार नेताओं और अधिकारियों को लटकते, महाप्रबंधक उन्हीं पत्रकारों को झटकते, मंत्रियों के आगे मटकते, चपरासियों पर चटकते और विज्ञापन नहीं मिलने पर हाथ पैर पटकते दिखाई देते हैं। सपाट बयानी ये है कि मीडिया अब मड़िया हो गया है, और इसमें जो भी फंसा है वो गले तक धंसा है।



Ishq Ka Rang Safed: Dhaani-Biplab’s Impossible Love Story!



FilmiBeat 
The quote ‘ Love has no boundaries’ holds good for Color’s new show, Ishq Ka Rang Safed, which is all about Bilap and his impossible love for Dhaani. Eisha Singh plays the role of Dhaani, who is loyal and easy going girl and rarely speaks her heart out.

Ishq Ka Rang Safed: Dhaani-Biplab’s Impossible Love Story! ° The quote ‘Love has no boundaries' holds good for Color's new show, Ishq Ka Rang Safed, which is all about Bilap and his impossible love for Dhaani. Eisha Singh plays the role of Dhaani, who is loyal and easy going girl and rarely speaks her heart out.


Bollywood movies that have spoken about widow marriage ° Love holds no boundaries and the story of Biplab and Dhaani in Ishq Ka Rang Safed is one such example. Set amidst the ancient city of Benaras, home to one of the largest widow population in the world, Ishq Ka Rang Safed hopes to break the taboo that still ...

When lead actors of 'Ishq ka Rang Safed' feasted on Indori breakfast ° ,Television actors Mishal Raheja and Eisha Singh — the lead pair of 'Ishq ka Rang Safed' who visited the city recently confessed that the weather in Indore was a welcome change, from the humidity of Mumbai. Eisha who is making her debut with 'Ishq Ka Rang ...

Colors new show Ishq Ka Rang Safed is a perfect comeback for Mishal Raheja ° TV actor Mishal Raheja, best known for his roles in shows like Laagi Tujhse Lagan, Love Story and Maharakshak Aryan, will next be seen in the love saga Ishq Ka Rang Safed as Viplav. He says the role "perfectly syncs" into the type of comeback he wanted on ...

Wanted to come back on TV with strong role: Mishal Raheja ° TV actor Mishal Raheja, best known for his roles in shows like “Laagi Tujhse Lagan”, “Love Story” and “Maharakshak Aryan”, will next be seen in the love saga “Ishq Ka Rang Safed” as Viplav. He says the role “perfectly syncs” into the ...
Wanted to come back on TV with strong role: Mishal Raheja (With Images) ° ,TV actor Mishal Raheja, best known for his roles in shows like Laagi Tujhse Lagan, Love Story and "Maharakshak Aryan", will next be seen in the love saga Ishq Ka Rang Safed as Viplav. He says the role perfectly syncs into the type of comeback he wanted on ...
Wanted to come back on TV with strong role: Mishal Raheja ° TV actor Mishal Raheja, best known for his roles in shows like "Laagi Tujhse Lagan", "Love Story" and "Maharakshak Aryan", will next be seen in the love saga "Ishq Ka Rang Safed" as Viplav. He says the role "perfectly syncs" into the type of comeback he ...
DID YOU KNOW THIS:
Ishq
Ishq is an Arabic word used in Arabic as well as many other languages., means ?Ishq (Arabic: ??? ; in Persian: eshgh; in Urdu: ishq; in Dari: eshq; in Pashto: eshq; in ... nFreebase Data Team nDocument n?Ishq is an Arabic word used in Arabic as well as many other languages.
Safed Safed is a city in the Northern District of Israel. Located at an elevation of 900 metres, Safed is the highest city in the Galilee and in Israel. Due to its high elevation, Safed experiences warm summers and cold, often snowy, winters. Since the 16th century, Safed has been considered one of Judaism's Four Holy Cities, along with Jerusalem, Hebron and Tiberias; since that time, the city has remained a center of Kabbalah, also known as Jewish mysticism. n Due to its mild climate and scenic views, Safed is a popular holiday resort frequented by Israelis and foreign visitors.

7.8.15

याकूब अमर है ।

30 जुलाई की सुबह खबर आई कि याकूब मेनन को फांसी हो गई है और उसकी लाश पोस्टमार्टटम के बाद उसके परिवार वालों को दे दी गई । लेकिन क्या सचमुच याकूब मर गया है ? क्योंकि याकूब तो कभी अकेला था ही नही । इस याकूब के साथ और भी कई याकूब थे । एक याकूब को तो उसके फर्जी नाम और  पासपोर्ट के बाद भी खुफिया एजेंसी पकड लाई लेकिन जो याकूब पकडाया वो तो केवल एक था । इसके बाद देश ने देखा  एक साथ 40 और याकूबों को  जो अलग अलग नामों और चेहरों  के साथ अपने शरीर के ही एक हिस्से याकूब को बचाने की लिए भागदौड कर रहे थे । फिर देखा ऐसे ही 12 और याकूबों को जो आधी रात को देश की सबसे बडी अदालत को रात मे ही उठा कर बैठा दिये और तब तक अपने शरीर के एक अंग को बचाने का प्रयास करते रहे जब तक कि उसके नष्ट होने की खबर नही मिली । इसके बाद फिर से देश ने देखा दुसरे दिन देश के महानायक स्व. अब्दुल कलाम की खबर को  एक खलनायक याकूब मेमन के जनाजे तले दबते हुए ।
                                                                    यदि अपने प्राचीन कथाओं पर यकिं करें तो इस याकूब का असली नाम  रक्तबीज है जिसके गिरे हर खून के कतरे से एक नया याकूब तैय्यार हो रहा है । वह याकूब इतनी तेजी से जमीन पर गिर कर फैले कि समझ ही नही पडा कि वो याकूब कब अभिनेता बन गया या कब पत्रकार कब विधायक और कब सांसद या समाजसेवी , ये देश को पता ही नही चला । अब याकूब को मारना असंभव हो गया है क्योंकि उसकी जडें तो संसद मे भी है मिडिया मे भी और जनता के बीच मे भी ..
                                                    इसीलिये मैने यह निष्कर्ष निकाला है कि याकूब ना तो मरा है ना ही मर सकता है क्योंकि रक्तबीज को खत्म करना  अब किसी के वश मे नही है । विदेश मे बैठे ढेर याकूबों को मारने की बात करने   वाले लोग क्या ये बताएंगे कि जब अपने ही देश के याकूब को मारने पर सैकडों याकूब खडे हो सकते है तो दस पंद्रह याकूबों के लिए कितने याकूब आ जाएंगे ?
                                                    अब तो मान ही लो भाई याकूब अमर है ।