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19.7.23

समय के साथ ‘मिजाज’ बदलता लूडो गेम

लूडो में ‘दिल’ हारने वाली सीमा जैसी ‘प्रेम कहानी’ इकरा की भी थी

 संजय सक्सेना,लखनऊ

   विश्व स्तर पर सबसे लोकप्रिय बोर्ड गेम लूडो का समय के साथ अपना ‘मिजाज’ बदलता जा रहा है.कभी यह बच्चों का खेल हुआ करता था तो अब लूडो को जवां दिलों की धड़कन बनते भी देखा जाता है. लूडो एक बौद्धिक खेल भी है. इसकी प्रसांगिकता को देखते हुए अब कई स्कूल-कालेजों में भी बच्चों का बौद्धिक विकास करने के लिए लूडो और शतरंज जैसे परम्परागत खेलों का आयोजन होने लगा है. इसी तरह से कल तो जो महिलाएं किटी पार्टी में ताश खेला करती थीं,अब वह भी लूडो खेलने लगी हैं. लूडो बुजुर्गो का टाइम पास का जरिया भी बनता जा रहा है.

17.7.23

मनाली के रास्ते से लापता 11 लोगों के प्रकरण में तहसील प्रशासन ने शुरू की छानबीन

 दिनेश कुमार जायसवाल-

 एसडीएम मिल्कीपुर और तहसीलदार ने पिठला गांव पहुंच लापता अब्दुल मजीद के दामाद से की वार्ता।

कुल्लू मनाली जा रहे एक ही परिवार के 10 सदस्य सहित 11 लोग हो गए हैं लापता।

अनहोनी की आशंका के चलते गांव में पसरा सन्नाटा।

मिल्कीपुर अयोध्या।
 कुमारगंज थाना क्षेत्र के पिठला गांव से हिमाचल प्रदेश के कुल्लू मनाली के लिए निकले एक ही परिवार के 10 सदस्य सहित 11 लोगों के रास्ते से लापता होने के मामले में अब तहसील प्रशासन मिल्कीपुर की ओर से जांच पड़ताल और छानबीन शुरू कर दी गई है। हालांकि अभी लापता लोगों का कोई सुराग नहीं लग सका है। फिलहाल गांंव में सन्नाटा पसरा हुआ है और चर्चाओं का बाजार भी गर्म है। हिमाचल प्रदेश स्थित ब्यास नदी में आई बाढ़ और भूस्खलन के चलते अब लापता लोगों के सगे संबंधियों सहित ग्रामीणों में किसी बड़ी अनहोनी की आशंका समा गई है। बता दें कि कुमारगंज थाना क्षेत्र स्थित पिठला गांव निवासी 62 वर्षीय अब्दुल मजीद कंकाली अपने दामाद रहबर एवं अपने पूरे परिवार सहित हिमाचल प्रदेश के कुल्लू मनाली में रहकर मेहनत मजदूरी करके जीवन का गुजर-बसर कर रहा था।

The Bhojpuri Legend Manoj Bhawuk Bestowed “Bhojpuri Icons" Filmfare and Femina Award





In a historic moment, two iconic brands “Filmfare and Femina”known for their steadfast dedication to recognising talent and excellence honoured eminent Bhojpuri writer, poet, lyricist and critic Mr. Manoj Bhawuk for his indelible contribution in the history of Bhojpuri cinema and literature. In a grand celebration at Ramada, Lucknow on 16 July 2023,Mr. Manoj Bhawuk was bestowed “Filmfare and Femina Bhojpuri Icons-Reel & Real Star”honour by Ambika Muttoo, Editor-in-Chief of Femina and Vikram Vasudev Narla, Director from South industry in presence of many celebs. This is first time Filmfare and Femina collaborated to honour Bhojpuri Icons who have made remarkable contributions to Bhojpuri entertainment industry.

16.7.23

कार्टूनिस्ट कमल किशोर की पेशकश

 


मुंह मोड़ते संगी-साथी,अकेले पड़ते अखिलेश

अजय कुमार,लखनऊ

    समाजवादी पार्टी पिछले करीब दस वर्षो में हार का ’चैका’ लगा चुकी है. 2014 के लोकसभा चुनाव से शुरू हुआ हार का यह सिलसिला 2017 के विधान सभा और 2019 के लोकसभा चुनाव के पश्चात एक बार फिर 2022 के विधान सभा में मिली हार तक जारी रहा था. हर बार सपा को भाजपा से मात खानी पड़ी.बीजेपी के समाने अखिलेश ने सभी दांव अपना चुके हैं. अब 2024 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर सपा के अध्यक्ष और पूर्व सीएम अखिलेश यादव की ’ चुनावी परीक्षा’ होगी,लेकिन इस बार भी अखिलेश की राह आसान नहीं लग रही है. अब तो अखिलेश के पास कोई नया ‘प्रयोग’ भी नहीं बचा है. वह कांगे्रस,बसपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ चुके हैं. राष्ट्रीय लोकदल और ओम प्रकाश राजभर की पार्टी का भी साथ करके देख लिया हैं,लेकिन कोई भी प्रयोग उनकी हार के सिलसिले को रोक नहीं पाया. स्थिति यह हो गई है कि आज की तारीख मंे 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए अखिलेश यादव बिल्कुल ‘तन्हा’ नजर आ रहे हैं.कांगे्रस और बहुजन समाज पार्टी तो समाजवादी पार्टी से दूरी बनाकर चल ही रहे हैं,इसके अलावा उसके मौजूदा साथी राष्ट्रीय लोकदल के चैधरी जयंत सिंह और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के मुखिया ओम प्रकाश राजभर भी भाजपा गठबंधन की तरफ पेंगे बढ़ा रहे हैं.

आदरणीय रामेश्वर पांडेय जी तो पीड़ित थे, मुलजिम नहीं

Rakesh Sharma-

बात आज जुबान पर आ ही गई है इसलिए आदरणीय रामेश्वर पांडेय जी की विनोदप्रियता और उनकी कुछ बातें जो आज तक नहीं भूला वे भी आप सभी के साथ साझा करने का प्रयास कर रहा हूं। दोस्तों पिछले कई महीनों से तकनीकी तौर पर अपंग था और संसाधनों की तंगी से जूझ रहा था इसी कारण उनके स्वर्गवास के बाद उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित नहीं कर पाया था। पिछले 23 साल पुरानी वे बातें आज भी यूं ही दिमाग में अंकित हैं। मैं ये सभी बातें इसलिए आप लोगों के सामने ला रहा हूं कि जिस व्यक्ति ने अपना पूरा जीवन लोगों की भलाई करने में बिताया वे इस सम्मान के हकदार हैं कि हमारी आगामी पीढ़ी के लोग उनके बारे में जरूर जानें।

आदरणीय अतुल जी भी अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन पत्रकारिता की दुनिया को निष्कलंक आगे बढ़ाने के लिए इन दोनों महानुभावों का योगदान में कभी कम नहीं आंकना हूं। एक दिन अतुल जी मेरी डेस्क से गुजर रहे थे तो अचानक रुक गए और मेरे द्वारा संपादित की जा रही खबर को देखने लगे और वर्तनी को लेकर  कुछ सवाल पूछे। उस समय मैं यह भी नहीं जानता था कि वे कौन हैं, लेकिन जैसे ही वे आगे बढ़े तो कई वरिष्ठ साथी आकर मेरे समाचार के संपादन को देखने लगे और घोषणा कर दी कि मुन्ना कल सुबह अपना बोरिया बिस्तर बांध लो और घर जाने के लिए अगली टिकट बुक करा लो। मैं बहुत परेशान और उस समय मेरी पत्नी अस्पताल में मेरे पहले बच्चे के जन्म के लिए भर्ती थी। पांडेय जी ने अगले दिन दोपहर में ही मुझे कार्यालय में किसी को संदेश भेजकर बुलवा लिया...
    
पत्रकारिता के जगत में आपके इर्द गिर्द जो भी पर घटनाएं घटती हैं उसके साक्षी मात्र हम ही नहीं होते हैं, परन्तु कुछ मामले इस तरह के होते हैं कि प्रत्यक्ष तौैर पर हम लोग एक मुलजिम नजर आते हैं लेकिन असल में हम पीड़ित होते हैं। इन अवस्थाओं की जानकारी हमें बाद में होती है तो उस समय सिर्फ पछतावे के अलावा कुछ किया नहीं जा सकता। भाई अमरीक ने हाल ही में अपनी तरफ से स्पष्ट किया है कि हर किसी का नजरिया किसी के लिए एक नहीं हो सकता और कुछ बातें हम इसलिए नजरअंदाज कर जाते हैं। किसी इंसान की अच्छी बातों को सिर्फ अपने कारणों से हम भुला दें तो उसे न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता...

वन स्टॉप सेंटर से एक पीड़ित नाबालिग किशोरी गायब!

देवरिया : प्रदेश के देवरिया जिले के वन स्टॉप सेंटर से एक पीड़ित नाबालिग किशोरी के फरार हो जाने की घटना ने पुलिस विभाग की सक्रियता पर सवालिया निशान लगा दिया है। जानकारी के अनुसार भटनी थाना क्षेत्र की एक गांव निवासी बलात्कार पीड़िता नाबालिग किशोरी बुधवार को रहस्यमई परिस्थितियों में फरार हो गई।

ज्ञानवापी : सबूतों का खजाना, फिर भी आक्रांता औरंगजेब महान?

Suresh Gandhi-

वेद-पुराणों से लेकर इतिहास में दर्ज है काशी दुनिया के सबसे प्राचीनतम से प्राचीन शहरों में से एक है। 2,500 साल से भी अधिक पुराना इसका इतिहास है। सारनाथ में अशोक की सिंह राजधानी को पांचवीं शताब्दी ईसा पूर्व में बुद्ध के पहले उपदेश की स्मृति के रूप में व्याख्या किया गया है। जबकि इस्लाम का इतिहास 14 सौ साल पुराना है। ऐसे में बड़ा सवाल तो यही है कथित ज्ञानवापी मस्जिद हजारों साल पुरानी कैसे हो सकती है? दस्तावेजों के मुताबिक इस्लाम की पहली मस्जिद कुवत-उल-इस्लाम मस्जिद 12वीं सदी के अंत की है, तो कथित ज्ञानवापी का निर्माण कैसे हो गया? जबकि स्कंद पुराण में कहा गया, देवस्य दक्षिणी भागे वापी तिष्ठति शोभना। तस्यात वोदकं पीत्वा पुनर्जन्म ना विद्यते। अर्थात प्राचीन विश्ववेश्वर मंदिर के दक्षिण भाग में जो वापी है, उसका पानी पीने से जन्म मरण से मुक्ति मिलती है

सुरेश गांधी-

दरअसल, वाराणसी के ज्ञानवापी केस में सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हो रही है। हिंदू पक्ष ने मुस्लिम पक्ष की याचिका पर अपना जवाब दाखिल करते हुए सर्वे में मिले शिवलिंग को फव्वारा बताना 125 करोड़ हिन्दुओं के अपमान का आरोप लगाया है। इसमें हिंदू पक्ष की तरफ से वादी महिलाओं ने अपनी दलील में औरंगजेब को क्रूर शासक बताते हुए आदि विश्ववेश्वर मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाने की बात कहीं है। जबकि मुस्लिम पक्ष का कहना है कि हिंदू पक्ष का दावा बिल्कुल बेबुनियाद है। ज्ञानवापी मामला सुनवाई योग्य नहीं है. मस्जिद हजारों साल पुराना है। जिसे शिवलिंग कहा जा रहा है, वो फव्वारा है. ज्ञानवापी के दीवार पर त्रिशूल, डमरू, ओम जैसी कलाकृतियां का अंकित कहना गलत है। औरंगजेब निर्दयी नहीं था और उसने किसी मंदिर पर आक्रमण नहीं किया था. हालांकि मुस्लिम पक्ष की इस दलील के जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को अपना जवाब दाखिल करने को कहा है. बता दें, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी में मिले कथित शिवलिंग का साइंटिफिक सर्वे कराने का आदेश दिया था. इस फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी थी. पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी थी. ऐसे में कोर्ट का फैसला क्या होगा, यह आने वाला वक्त बतायेगा। लेकिन औरंगजेब निर्दया नहीं था, वो मुस्लिमों का आदर्श रहा, यह 125 करोड़ हिन्दुओं का अपमान नहीं तो और क्या है? वह औरंगजेब जिसके क्रूरता के किस्से मथुरा, वृंदावन, काशी, अयोध्या से लेकर दिल्ली तक में टूटे सैकड़ों मंदिरों के अवशेष चीख-चीख कर गवाही दे रहे हैं।

कुल्लू मनाली जा रहे एक ही मुस्लिम परिवार के 11 सदस्य लापता, अनहोनी की आशंका के चलते गांव में पसरा सन्नाटा

दिनेश कुमार जायसवाल- 
 
मिल्कीपुर, अयोध्या।
 
हिमाचल प्रदेश के ब्यास नदी में आई बाढ़ एवं भूस्खलन के चलते बस सहित लापता होने की परिवारीजन जता रहे आशंका
 
कुमारगंज थाना क्षेत्र स्थित पिठला गांव से हिमाचल प्रदेश के कुल्लू मनाली के लिए निकले एक ही परिवार के 11 लोग अचानक लापता हो गए हैं। उनके सगे संबंधी अब उनकी खोजबीन में जुट गए हैं हालांकि किसी अनहोनी की आशंका से घबराए परिवारी जनों ने कुमारगंज पुलिस को मामले की जानकारी देते हुए कार्यवाही की गुहार की है। 

2.7.23

स्त्री का चरित्र और पुरुष का भाग्य देवता भी नहीं जानते, मनुष्य कैसे जान सकता है ?


सत्येंद्र कुमार

त्रिया चरित्रं, पुरुषस्य भाग्यम देवो न जानाति, कुतो मनुष्य: अर्थात स्त्री का चरित्र और पुरुष का भाग्य देवता भी नहीं जानते, मनुष्य कैसे जान सकता है ?

आपने वो फ़िल्म देखी होगी जिसका एक बड़ा मशहूर गाना था "ठुकरा के मेरा प्यार... मेरा इंतकाम देखेगी । इस फ़िल्म का वास्तविक चित्रण आजकल देखने को मिल रहा है ।उत्तर प्रदेश की फिज़ा में एक बेवफा एसडीएम की  बेवफाई की चर्चा जोरों पर है । मतलब अच्छा सिला दिया तूने मेरे प्यार का ! यह तराना आज लगभग हर वो शख्श गुन गुना रहा है जिसके सूख चुके जख्मों को फिर से एस डी एम साहिबा की बेवफाई वाले नए किस्से ने कुरेद दिया है । आज सोशल मीडिया में एक पति की दर्द भरी कहानी सभी की जुबानी चर्चा में शामिल हो चुकी है। सच के धरातल पर बेवफाई का नजारा ऐसा है कि एक पत्नी भक्त बेचारा सिसकता हुआ कह रहा है कि "अगर बेवफाओं की अलग कोई दुनिया होती... तो मेरी बीवी वहाँ की महारानी होती..!"

चारों तरफ शोर है, और सोशल मीडिया में उस बेवफा पत्नी के चरित्र का बेबाक वर्णन हो रहा है जो एक बड़ी पदाधिकारी है । दिल में चोट लगी पति आलोक मौर्या को और दर्द से कराहने लगे वे पत्नी भक्त, जो अपनी पत्नियों को सरकारी नौकरी या अधिकारी बनाने का ख्वाब लेकर तैयारी करवा रहे थे। आज बेवफाई के इस नए किस्से ने मुसीबत का ऐसा पहाड उन महिलाओं के सामने खड़ा कर दिया जो सपनो की उड़ान में अपने पतियों के भरोसे मचल रही थी । एक तरफ आज महिला सशक्तिकरण के इस युग में बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ जैसे स्लोगनों के जरिये देश का परिवेश बदलने का प्रयास चल रहा है वहीं दूसरी तरफ एस डी एम साहिबा के किस्से ने लोगों को दिलों में एक नई पटकथा का संवाद पिरोना शुरू कर दिया है । इस किस्से ने चर्चाओ के बाजार में उठे सवाल पर बवाल पैदा कर दिया है कि "बीबी मत पढ़ाओ वर्ना हश्र देख रहे हो भाई" ! आखिर एक ही मछली पूरे तालाब को गन्दा कर देती है वाली कहावत को बतौर पत्नी एस डी एम साहिब ने लोगों के बीच साबित कर दिया ! 

दर दर भटकता दो बच्चियों का बाप आज भविष्य के ताने बाने में ठीक वैसे ही उलझकर रह गया है जैसे दहेज प्रताड़ना के झूठे किस्सों में कई परिवार उलझे हुए बेचारगी से घूम रहे हैं । बेवफाई के इल्ज़ाम के लिए पहले से ही बदनाम नारी जाति के लिए नफ़रत की जो लहर आज फिर हिलोरें मारने लगी हैं उसका सारा श्रेय एस डी एम साहिब को जाता है , लेकिन साथ ही इसका  खामियाजा उन औरतों को भी भुगतना पड़ सकता है  जिनके लिए उनका घर परिवार ही सब कुछ होता है। तमाम उदाहरण  ऐसे भी मौजूद हैं जहाँ पति और परिवार की खुशी के लिए बड़े ओहदे की नौकरी को भी लात मार दी है वफ़ा की देवियों ने !समाज में मान सम्मान के साथ जीने का हक दिलाने वाली अर्धांगिनियों की बदौलत ही सभ्य समाज में पुरुष ने नारी को पूज्यनीय का दर्जा देकर खुशहाल जीवन जीने की परिकल्पना को साकार किया है। सदियों से एस डी एम साहिब जैसे बेवफाई के किस्से मशहूर जरुर है- मगर "छोड़ेंगे न हम तेरा साथ ओ साथी मरते दम तक का तराना भी मशहूर है" ! क्यों किसी को वफ़ा के बदले वफ़ा नहीं मिलती जैसा तराना सवाल बनकर भले आज की फ़िज़ाओं में गूंज रहा है लेकिन वफ़ा की देवियों की सुरीली आवाज में आज भी यह गीत सुनाई दे रहा है कि " तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है " ! 

आज पति चपरासी और पत्नी एस डी एम वाले किस्से को लेकर सोशल साईट पर जबरदस्त ज़ुबानी फाइट चल रही है और लोग कहने लगे हैं कि "तोता मैना की कहानी तो पुरानी और पुरानी हो गयी" ! इस किस्से ने समाज के भीतर, भीतरखानों में बैठे भेड़ियों को आज सवाल पूछने का मौका दे दिया है कि क्या पतियों को अपनी पत्नियों को उच्च शिक्षा नहीं दिलानी चाहिए ? क्या वास्तव में वक्त के साथ औरत बदल जाती है ? इस पर समाज ने फिर नये सिरे से मंथन करना शुरु कर‌ दिया है‌। एसडीएम साहिबा की बेवफाई को किसी भी महिला सामाजिक संगठन ने समर्थन नहीं दिया है लेकिन हकीकत के धरातल पर चपरासी पति की विवशता ने सभी के दिलों मे हमदर्दी का तूफान खड़ा कर दिया है । कल क्या होगा यह तो नहीं पता लेकिन इस किस्से ने आज हर एक पति के मन मे एक सशंकित भाव पैदा कर दिया है जो अपनी पत्नी को आईएस पीसीएस की तैयारी करवा रहे हैं । एक की ग़लती ने तमाम लोगों के भविष्य को गर्त‌ के किनारे लाकर खड़ा कर दिया है । सरकार द्वारा चलाए जा रहे महिला सशक्तिकरण अभियान का ज्वलंत उदाहरण बनकर उभरी हैं एस डी एम साहिब ! दूसरी तरफ अपनी कुर्बानी देकर और कर्ज लेकर अपनी पत्नी को आसमान की बुलन्दी पर पहुँचाने वाले चपरासी पति की बेबसी बयां कर रही है कि .. 

"पढ़ रहा हूँ मैं भी इश्क की किताब ! अगर बन गया वकील तो, बेवफओं की खैर नही.."

1.7.23

अपराधों के नये नये रिकार्ड रचता उत्तर प्रदेश

केपी सिंह-
योगी सरकार के समय उत्तर प्रदेश में हैरतअंगेज आपराधिक वारदातों के नये नये रिकार्ड रचे जा रहे हैं। कभी जेल के अन्दर माफिया को गोलियों से भून दिया जाता हैं तो कभी पुलिस हिरासत में माफिया भाई मीडिया के कैमरों के सामने फायरिंग की अंधाधुंध बौछार करके ढ़ेर कर दिये जाते हैं तो कोर्ट रूम में घुसकर जज के सामने माफिया को शूट कर दिया जाता हैं। एक ओर यह दावा किया जा रहा है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था इतनी मजबूत की जा चुकी है कि बड़े बड़े अपराधी अपनी जान की खैर मांगते हुये बाहरी राज्यों में भाग निकलें हैं या उन्हें बाहर रहने में डर लग रहा है जिसकी वजह से वे खुद थाने पहुंच कर पुलिस से अपने को जेल भेजने की भींक मांग रहे हैं। दूसरी ओर इन वारदातों की मिसाल है जो यह जाहिर करती है कि प्रदेश में कहीं भी, कोई भी सुरक्षित नहीं बचा है। अभैद्य सुरक्षा के रहते हुये भी शूटर कहीं भी प्रकट हो सकते है और कुछ भी कर सकते हैं। शूटर भी ऐसे जो नादान उम्र के हैं और जिनको वे टारगेट कर देते हैं उनसे अदावत का कोई कारण भी किसी को पता नहीं होता लेकिन उनकी प्लानिंग और तैयारी प्रशिक्षित आतंकियों से भी ज्यादा कमाल की रहती है। प्रयागराज में अतीक और अशरफ जैसे दुर्दान्त अपराधियों को मौत के घाट उतारने वाले नौजवानों के पीछे किसका मास्टर माइंड था और ऐसे कई सवालों को लेकर रहस्य बना हुआ है लेकिन यह भी रहस्य है कि अब उन सवालों की चर्चा न पुलिस के तीरंदाज कर रहे है न मीडिया के लाल बुझक्कड़। इसमें कौन सा आका है जिसका हुकुम बजाने के लिये उनको चुप्पी साधनी पड़ गयी है।

चौबीस लाख की गाड़ी में भी सुरक्षा तकनीक भगवान भरोसे ही है !

सत्येंद्र कुमार-

गोरखपुर : गाड़ियों में लाखों रुपये खर्च करने वालों का खुदा ही मालिक है । इनकी लाखों की गाड़ी कब इनके लिए कब्रगाह बन जाये कुछ कह नही सकते । तमाम सुरक्षा फीचर के दावे करने वाली गाड़ी कंपनियों का हाल यह है कि जान पर बन आने के बाद भी ये लोग इन घटनाओं को सीरियसली नही लेते । बड़े अरमान से साल भर पहले हमारे मित्र ने भी 24 लाख रुपये में चारपहिया वाहन टाटा हैरियर खरीदा था । लेकिन इनकी यही 24 लाख की उड़नखटोला इनकी कब्रगाह बन गयी होती । कल दोपहर के समय गाड़ी चलाते वक्त इनकी गाड़ी के अंदर अचानक धुआँ उठने लगा । धुएँ की रफ्तार बढ़ने पर जैसे ही इन्होंने ब्रेक लगाया कि गाड़ी बीच सड़क पर जेल में तब्दील हो गयी । गाड़ी के सारे सिस्टम लॉक हो गए । अब गाड़ी न आगे जा पा रही थी न पीछे । ट्राफिक जाम हुआ तो अंदर इन्हें फंसा देख जनता जनार्दन ने जैसे तैसे इन्हें बाहर निकाला । 

ये महाशय तो बच गए लेकिन कंपनी इतना सब कुछ होने पर भी बेहयाई पर उतर आई । कंपनी का कहना है ऐसा हो जाता है अब गाड़ी पूरी चेक अप के बाद लगभग डेढ़ दो महीने में मिलेगी । तब तक गाड़ी में 24 लाख खर्च करने वाले हमारे मित्र फिर से पैदल हो गए हैं ।
 

 

अमर उजाला : नम्बर एक या फ्रेश रद्दी

 पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद मंडल में खुद को नम्बर एक अखबार कहने वाले अमर उजाला की हालत खराब हो गई है। रिपोर्टर के माध्यम से दवाब बनाकर प्रसार बढ़ाने की कोशिश में एजेंटों पर अखबार जबरन रद्दी कराया जा रहा है। रामपुर जिले की मिलक तहसील के एक अखबार विक्रेता ने अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट व स्टोरी साझा की है, जिसमें अमर उजाला अखबार के बंडल का फोटो डालकर लिखा है कि किसी को अमर उजाला की फ्रेश रद्दी चाहिए तो सम्पर्क करें। विक्रेता ने अपना नाम और मोबाइल नम्बर भी दिया है।

30.6.23

केपी सिंह-

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला भारत को भी झकझोरेगा
अमेरिका में सुप्रीम कोर्ट ने अपने ताजा फैसले में काॅलेजों के एडमिशन में अश्वेतों को आरक्षण को गैरकानूनी बता दिया है। भारत में भी एक प्रभावशाली मुखर वर्ग आरक्षण के प्रावधानों के खिलाफ लंबे समय से मोर्चा खोले हुये है जिसे अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला बहुत उत्साहित करेगा।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की अध्यक्षता में 9 सदस्यीय पीठ द्वारा बहुमत से दिये गये इस फैसले में कहा गया है कि भले ही एक समय अश्वेत छात्रों को काॅलेज में एडमिशन के लिये न्यायपूर्ण रहा हो लेकिन अब इसे जारी रखने की तुक नहीं है। भेदभाव समाप्त करने के नाम पर लागू की गयी इस व्यवस्था में खुद ही भेदभाव के तत्व हैं क्योंकि इसमें यह देखना पड़ता है कि एडमिशन लेने वाला छात्र किस नस्ल का है - श्वेत या अश्वेत। जाहिर है कि सुप्रीम कोर्ट का अभिमत यह रहा कि आरक्षण की परिधि में श्वेत छात्र का प्रवेश विचारणीय नहीं होता जो उसके साथ अन्याय का द्योतक है। 

अमेरिका में विशेष अवसर के सिद्धांत को सकारात्मक कार्रवाई का नाम दिया गया था ताकि पहले नस्लीय भेदभाव के कारण अश्वेत हर अवसर में दरकिनार कर दिये जाते थे जिससे काॅलेजों, प्रशासन, प्राइवेट नौकरियों आदि में एक ही पक्ष को स्थान मिल पाता था उसमें एकरूपता आ सके। मतलब यह है कि इसके पीछे कोई नकारात्मक भावना न होकर समाज में विविधता को संजोने की सकारात्मक ललक निहित रही। यह टर्म बेहद सदभावपूर्ण था और अभी तक इस पर अमल जारी था। पूर्व रिपब्लिकन राष्ट्रपति डोनाॅल्ड ट्रम्प ने अपने अनुदारवादी रूझान के तहत कई फैसले किये जिनमें से एक में उन्होंने अमरीकी सुप्रीम कोर्ट मे 3 जड़वादी न्यायाधीशों की नियुक्ति कर दी। इसका प्रभाव यह हुआ कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से ऐसे फैसले आने शुरू हो गये जो उसकी प्रगतिशील दिशा को पलटने वाले थे। काॅलेजों के एडमिशन में आरक्षण को समाप्त करने वाली बैंच में भी 6 अनुदार जज शामिल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर वहां बटी हुयी प्रतिक्रिया सामने आयी है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाॅल्ड ट्रम्प ने जहां इसका स्वागत किया है वहीं वर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडन ने इस पर असहमति जताई है। 

लेकिन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला स्थानीय प्रभाव तक सीमित नहीं है। समूचा विश्व समाज इससे आंदोलित होने वाला है। भारत में लोग यह समझते है कि आरक्षण के प्रावधान सिर्फ उनके यहां लाद दिये गये हैं जबकि अन्य देश इससे मुक्त हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। जब मानवता के पैमाने पर समूचे विश्व समाज को तौले जाने की प्रवृत्ति जाग्रत हुयी तो ग्लोबल आॅर्डर इसी अनुरूप व्यवस्थित हुआ। नस्ल, जाति, भाषा, क्षेत्र आदि के आधार पर वंचित बनाये गये वर्गों के साथ न्याय के लिये विशेष अवसर के सिद्धांत का प्रवर्तन हुआ जिसके तहत कई देशों में भेदभाव के शिकार वर्गों के लिये आरक्षण का प्रावधान किया गया। भारत में वर्ण व्यवस्था के दुराग्रह सर्वाधिक कठोर थे इसलिये आजादी की लड़ाई के समय प्रबल हुयी नैतिक चेतना के चलते समाज के अगुआ वर्ग में भेदभाव से पीड़ितों के प्रति सहानुभूति का भाव उमड़ा और इन वर्गों द्वारा अपने अधिकारों के लिये किये जा रहे आंदोलनों के प्रति उन्होंने सकारात्मक दृष्टिकोंण अपनाया। जाहिर है कि यहां अफरमेटिव एक्शन अमेरिका की तरह सृजित न होकर स्वतः स्फूर्त था। यह अजीब विरोधाभास है कि भारत में रेनेेसां का उभार गुलामी के दौर के समय देखने में आया जबकि स्वदेशी शासन में उत्तरोत्तर पुनरूत्थान के भाव जोर मारने लगे। वैसे यह भी एक सच है कि आज सारी दुनिया रूढ़िवाद की लहर का सामना कर रही है। अमेरिका में डोनाॅल्ड ट्रम्प इसी के प्रतिबिम्ब थे। भारत में भी यह प्रवृत्ति आज चरमोत्कर्ष पर है।

2014 के बाद से ही भारत में वर्ण व्यवस्था की पैरवी का दौर शुरू हो गया था। जिसके तहत वंचितों को अपमान का पात्र ठहराये जाने को जायज माना जाने लगा था। भाजपा मुख्य धारा की पार्टी है इसलिये उसके सामने इसके कारण असमंजस की स्थिति बन गयी थी। जो तत्व उसकी वर्ग सत्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे थे भाजपा उनके खिलाफ भी नहीं जा सकती थी लेकिन दूसरी ओर खुलेआम हठधर्मियों के साथ भी खड़ी नहीं हो सकती थी। उसे एकतरफा माहौल बनने तक सब्र करने की जरूरत का एहसास था। इसलिये उसने पहले आरक्षण को खत्म करने वालों के दबाव के प्रतिकार का आभास कराया लेकिन व्यवहारिक स्तर पर वह उनके अनुकूल कार्य करती रही। लेटरल इंट्री जैसी व्यवस्थाओं से उसने आरक्षण को निष्प्रभावी करने के लिये चोर दरवाजा खोला। कई विभागों में भर्तियों में आरक्षण को चकमा दे दिया। इस बीच उसके समर्थक संत धर्मभीरूता के एहसास को गहराते रहे। उन्होंने वंचितों में यह भावना भरने की कुशलता दिखायी कि अच्छे अवसरों से वंचित रहना उनके लिये ईश्वरीय नियति है। नोबल पुरस्कार विजेता अमत्र्य सेन ने प्रतिपादित किया था कि शोषण के चक्र के पुराने होने के साथ शोषित वर्ग यह अनुभव करने के लिये विवश हो जाता है कि उत्पीड़न और भेदभाव को सहना ही उसका जीवन है। उसके अंदर इसके प्रतिरोध तक की इच्छाशक्ति समाप्त हो जाती है, विद्रोह तो बहुत दूर की बात है। आज स्थिति कुछ इसी तरह की है।

आरक्षण विरोधी तबके ने 2014 के शुरूआती वर्ष में जो तेवर दिखाये थे रणनीति के तहत उसने इसे बदल दिया था। उसे विश्वास हो गया था कि सत्ता में बैठे उसके चंद्रगुप्त आरक्षण को ठिकाने लगाने के अपने कर्तव्य को निश्चित रूप से अंजाम तक पहुंचायेंगे। आरक्षण की व्यवस्था एक प्रतीक है जो स्थापित करती है कि देश के बहुसंख्यक वर्ग को लंबे समय तक अन्याय का शिकार बनाया गया वरना वंचितों के पास भी योग्यता और पुरूषार्थ कम नहीं है। विशेष अवसर के सिद्धांत से इसको प्रस्फुटित किया जा रहा है जिससे देश की पूरी आबादी की क्षमताओं का लाभ उसे मिलेगा और  यह देश के लिये अत्यंत फायदेमंद होगा। इस स्थिति के तार्किक परिणति पर पहुंचने के पहले आरक्षण की प्रतिबद्धता से मुकरने का मतलब वर्ण व्यवस्था के औचित्य को सिद्ध करना है और यही होने का अवसर आ गया है।

2024 के लोकसभा चुनाव के बाद विशेष अवसर के प्रावधानों को वापस लिये जाने की पूरी उम्मीद वर्ण व्यवस्था की समर्थक ताकतों की थी और तब तक वे सब्र करने के लिये अपने को मानसिक रूप से तैयार किये हुये थे लेकिन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने उन्हें जैसे नया हांैसला दे डाला है। वैसे तो पूरे विश्व में इसका प्रभाव पड़ने की संभावना जतायी जा रही है लेकिन भारत में तो निर्णायक बदलाव का जोश ठाठें मार सकता है। हालांकि लोकसभा चुनाव के पहले तक सरकार के सामने इधर कुंआ उधर खाई की स्थिति बन सकती है क्योंकि वह न तो आरक्षण समर्थकों को नाराज करने का जोखिम मोल ले सकती है और न ही आरक्षण समर्थकों से एक सीमा से आगे दुराव कर सकती है। आखिर बहुसंख्यक जनता तो वंचित वर्ग से है। यह दूसरी बात है कि बहुसंख्यक होते हुये भी इस वर्ग में पर्याप्त चेतना नहीं है, धर्मभीरूता सर्वाधिक है और दूसरे वह दूसरे वर्ग का जितना मुखर भी न होने से बहुत प्रभावी नहीं है। सामाजिक न्याय के आंदोलनों की धार भी इस बीच बहुत भौथरी हो चुकी है। 

वैसे सरकार और जिस वर्ग सत्ता पर वह टिकी है दोनों ही बहुत हुनरमंद हैं। आंखों से अंजन चुरा ले जाने में उन्हें महारथ हांसिल है इसलिये 2024 तक आपदामोचन का कोई प्रबंध वे कर लें तो आश्चर्य न होगा। लेकिन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले की ध्वनि इतनी असरदार है कि भारत में जल्द ही इसके तख्तापलट जैसे परिणाम घटित होंगे।
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इमरजेंसी की ज्यादतियों का सच और वर्तमान दौर

केपी सिंह-

भारतीय राजनीति में वर्तमान दौर गड़े मुर्दों के विमर्श का दौर है। इसी रिवाज के कारण इमरजेंसी की दफन हो चुकी चर्चा फिर सतह पर ला दी गयी है। जबकि आज की नयी पीढ़ी को इमरजेंसी में कोई रूचि नहीं होनी चाहिये थी। उसने न इमरजेंसी को देखा है न भोगा है। उसने जब होश संभाला था तब के बहुत पहले इमरजेंसी की चर्चा बंद हो चुकी थी। पर 2014 के बाद इमरजेंसी का प्रेत एकदम से जिंदा किया गया। इसकी चर्चा से आज कई मतलब साधे जा रहे हैं। कांग्रेस के वर्तमान नेतृत्व को भी इमरजेंसी का बहुत अनुभव नहीं है लेकिन फिर भी उसे इस चर्चा से अपराध बोध में धकेलने में सहूलियत देखी गयी है। दूसरे वर्तमान सत्ता पर लोकतंत्र को कुचलने का जो आरोप तीव्रता से उछाला जाता है उसकी भी काट इमरजेंसी का मुद्दा कर देता है।

Assamese newspaper trolled for using fake photograph






Guwahati: A city-based acclaimed Assamese newspaper has been trolled
in social media for using a fake photograph to narrate the horrible
story of Manipur in the front page of 19 June 2023 issue. The social
media users slammed the editor of Amar Asom for using a photograph,
which has been lifted from Myanmar’s influential Mizzima newspaper,
with a completely different content.

किसके इशारों पर फ़िल्म निर्माता हमारे प्रभु श्री राम और भगवान हनुमान की छवि को बिगाड़ने में लगे हैं ?

~ अभिषेक कुमार सिंह ~

हर तरफ आजकल रामायण पर आधारित फ़िल्म आदिपुरुष की ही चर्चा है । लोगों के बीच इस फ़िल्म को लेकर बहुत नाराज़गी है । लोग इस फ़िल्म के संवाद, किरदार को लेकर काफ़ी गुस्से में है । फ़िल्म के निर्माता ओम राउत और संवाद लेखक मनोज मुंतशिर  को लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है । हालांकि मनोज मुंतशिर ने सफाई देते हुए कहा है कि यह हमने रामायण  नहीं बनाई है, बल्कि हम रामायण से प्रेरित है । लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि फ़िल्म निर्माता क्यों इतिहास और धार्मिक ग्रंथों के कहानियों पर आधारित फिल्म बना कर लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं ।

प्रतिदिन एक करोड़ रुपये से अधिक की रेती तस्करी








 
छत्तीसगढ़ राज्य में बीजापुर ज़िले के अंतिम छोड़ में मौजूद है तारलागुड़ा गाँव , जो की तेलंगाना राज्य के सीमा से लगता है । हमारी टीम को खबर मिली थी की , तारलागुड़ा गाँव से लगे गोदावरी नदी पर रेत तस्करों की बुरी नजर लग चुकी है । जहां से प्रति दिन सैकडो ट्रक अवैध रेत उत्खनन हों रहा है । रेत माफियायो ने शासन - प्रशासन को अपनी मुट्ठी में कर , प्रतिदिन गोदावरी नदी के घाट लाखों टन रेत उत्खनन कर पड़ोसी राज्य तेलंगाना भेजा जा रहा है ।

ये है बस्ती का शशि शेखर, गिरा दिया एक और ब्यूरो चीफ का विकेट

 हिन्दुस्तान अखबार के गोरखपुर यूनिट अंतर्गत बस्ती जिला भी आता है। जागरण, उजाला, सहारा समेत अन्य प्रमुख अखबारों ने दशकों से यहां अपना ब्यूरो कार्यालय खोल रखा है। हिन्दुस्तान ने भी अपना ब्यूरो कार्यालय जिला मुख्यायल पर गांधीनगर पक्के बाजार पर अरबन कोआपरेटिव बैंक बिल्डिंग में खोल रखा है। इस जिले और ब्यूरो कार्यालय का इतिहास जितना पुराना है उतना ही रोचक यहां तैनात होने वाले ब्यूरो चीफ साहबों का कार्यकाल भी रहा है। कहने को तो यहां गोरखपुर यूनिट के सम्पादक महोदय की कृपा से अनुभव और कार्य में ज्यादा तर्जुबा रखने वाले रिपोर्टर को तैनात किया जाता है लेकिन इस कार्यालय में तैनात एक अदना सा स्ट्रिंगर/ संवाददाता सुरेंद्र पांडेय इतना ‘ताकतवर’ है कि लोग उससे पनाह मांगते हैं। मजाल है कि कोई उसके सामने पनप पाए या उसका विरोध कर टिक पाए। साम, दाम और दंड भेद का ऐसा मर्मज्ञ कि पूर्व में कार्यरत रहे ब्यूरो चीफ मारे दहशत के सुरेंद्र पांडेय को  बस्ती ब्यूरो का शशि शेखर कहते हैं। अभी हाल ही में उसने यहां तैनात रहे एक और ब्यूरो चीफ का विकेट गिराकर अपनी यह पदवी/ नाम चरितार्थ कर दिया है। 

Stop Manipur Violence Say NAJ, DUJ

The National Alliance of Journalists (NAJ) and the Delhi Union of Journalists (DUJ) in a joint statement today condemned the ongoing violence in Manipur including attacks on journalists covering the violence. We call for an immediate cessation of violence by armed groups belonging to all sides.

बढ़ती बेरोजगारी भारत के लिए नई चुनौती

-डॉ. अशोक कुमार गदिया

विश्व पटल पर नजर दौड़ाएं तो पायेंगे कि भारत विश्व का सबसे युवा देश है। भारत की कुल आबादी लगभग 140 करोड़ है। इसमें लगभग 80 करोड़ युवा हैं। जबकि भारत की जनसंख्या ढाई प्रतिशत की दर से हर साल बढ़ रही है और रोजगार की व्यवस्था लगभग शून्य है। आज भारत सरकार, भारतीय समाज एवं भारतीय परिवार के लिये सबसे बड़ी चुनौती अपने देश के युवाओं को ठीक से पढ़ा-लिखाकर अच्छा प्रशिक्षण देकर उसे रोजगार के काबिल बनाना है। हमारा प्रत्येक युवा ठीक से रोजगार से जुड़ा हो, उद्यमी हो या पेशेवर हो या व्यापारी हो। हर युवा भारत की मुख्यधारा का हिस्सा हो और हमारी सकल आय में थोड़ा या ज्यादा योगदान देता हुआ दिखे, यह हम सब लोगोें का सपना है। फिर वह देश में काम करे या विदेश में काम करे इससे कोई विशेष फर्क नहीं पड़ता। इसी स्वप्न के पूरे होने पर ही हम विश्व की सबसे बड़़ी अर्थ व्यवस्था बन सकते हैं और हम विश्वगुरु बनने का लक्ष्य भी पुनः प्राप्त कर सकते हैं। इस स्वप्न को पूरा करने के लिये हमें सबसे पहले अपना ईमानदारी से आंकलन करना होगा।

ईसाई मशीनरी का प्रार्थना सभा बना मौत का अड्डा, इलाज कराने आए वृद्ध की मौत

 ----गंभीर बीमारी का इलाज करने के नाम पर किया जाता है धर्म परिवर्तन का खेल

----ग्रामीणों की माने तो अभी तक एक दर्जन से अधिक लोगों ने तोड़ चुका है दम
----इस भीषण गर्मी में हफ्ते में दो दिन लगती है दस हजार की भीड़, तेज धूप से बचने की नहीं है कोई व्यवस्था




कुशीनगर यूपी बिहार सीमा के बगहा पुलिस जिला के धनहा क्षेत्र के दहवा प्रखंड मुख्यालय से महज डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर गोबरहिया गांव में ईसाई मिशनरियों के द्वारा गंभीर बिमारी ठीक करने के नाम पर प्रार्थना सभा में इलाज कराने आए एक वृद्ध की मौत हो गई है। जिसका पहचान गोपालगंज जिला निवासी बबन सिंह उम्र लगभग 65 वर्ष के रूप में हुई है। ईसाई मिशनरियों द्वारा आयोजित प्रार्थना सभा में यूपी के कुशीनगर, देवरिया, महाराजगंज, गोरखपुर सहित बिहार के गोपालगंज, सिवान, छपरा, पश्चिमी चंपारण जिले के लोग शामिल होते है। जहां पर इलाज के अभाव में बिमारी से ग्रसित लोग झाड़ फुक के चक्कर में पड़कर अपनी जान गवा दे रहे हैं। ईलाज करवाने आए व्यक्ति की मौत होने के बाद तत्काल प्रार्थना सभा को बंद करते हुए मौके से पास्टर फरार हो गया। ग्रामीणों के अनुसार पिछले छह माह में लगभग एक दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है। पास्टर वैश्य राज राम उर्फ राजकुमार के द्वारा लगभग तीन वर्षो से प्रार्थना सभा का आयोजन किया जाता है। प्रार्थना सभा में अपने लोगों के द्वारा गवाही दी जाती है उस गवाही में पास्टर के लोगों के द्वारा इस बात की गवाही दी जाती है कि हमें गंभीर बीमारी थी जोकि प्रार्थना सभा में शामिल होने के बाद ठीक हो गया। प्रार्थना सभा में मौत होने का सबसे बड़ा कारण इलाज के जगह पर लोगों को प्रार्थना सभा में शामिल होने का कारण बताया जा रहा है। ग्रामीण मनोज शाह, वीरेंद्र चौधरी, रमेश यादव, मनोज गुप्ता, अकाश कुमार के अनुसार उक्त गांव में ईसाई मिशनरियों के द्वारा गंभीर से गंभीर बीमारी ठीक करने का दावा किया जाता है। गंभीर बीमारी ठीक करने के नाम पर गरीब, अनपढ़, गवार लोगों का मतांतरण करने का खेल किया जाता है। मतांतरण में यूपी के कुशीनगर, देवरिया, महाराजगंज, गोरखपुर सहित बिहार के गोपालगंज, सिवान, छपरा, पश्चिमी चंपारण जिले के लोग शामिल होते है। प्रार्थना सभा सप्ताह में दो दिन गुरुवार और रविवार को लगाया जाता है। भीषण गर्मी और तपती धूप से बचने की व्यवस्था नहीं होने के कारण उस व्यक्ति की मौत हुई है। अगर झाड़-फूंक की जगह पर समय से किसी डॉक्टर से इलाज कराया गया होता तो, उसकी जान बच सकती थी। अक्सर इस प्रार्थना सभा में समय से इलाज नहीं मिलने के जगह झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ कर लोग अपनी जान गवा दे रहे हैं। प्रशासन भी करवाई के बदले इनको शह दे रहा है। जबकि ग्रामीणों का कहना है कि अन्य किसी समुदाय का पर्व व त्यौहार मनाने के लिए अनुमंडल से लेकर थाना स्तर तक लाइसेंस के साथ परमिशन लेना पड़ता है। जबकि दस हजार की संख्या में जुट रही भीड़ के लिए किसी अनुमति की जरूरत नहीं है। अगर समय रहते स्थानीय प्रशासन के साथ जिला प्रशासन इस पर कानूनी कार्रवाई नहीं करती है तो समाज और देश के लिए घातक साबित होगा। गंभीर बीमारी से ग्रसित लोगों को तब तक प्रार्थना सभा में शामिल किया जाता है जब तक वह अपने धर्म को छोड़कर ईसाई धर्म को मानने न लगे। इनका जाल थाना क्षेत्र के अन्य गांव से भी जुड़ा हुआ है। जहां पर इस तरह का आयोजन किया जाता है। लेकिन पुलिस प्रशासन इनके प्रति मौन धारण की हुई है। वही मृतक का बेटा पप्पू सिंह ने बताया कि अपने पिता को इलाज के लिए लाए थे। लेकिन उनकी मौत हो गई है।
 
Akhilesh Anjan  
akhileshanjan3@gmail.com

28.6.23

पब्लिक ऐप में रिपोर्टरो का जमकर शोषण

 पब्लिक ऐप में रिपोर्टरो का जमकर शोषण किया जा रहा है और धमका कर काम कराया जा रहा है और इतना ही नही जुर्माना भी रोज लगाया जाता है जिसमे रिपोर्टर के काम की धनराशि से 50 से लेकर 200 रुपये तक काट लिए जाते है। इसके लिए बाकायदा धमकी भरा मैसेज भी ग्रुप में दिया जाता है । पब्लिक ऐप में काम करने वाले रिपोर्टरों को बेइज्जत भी किया जाता है और उत्तर प्रदेश भर में काम करने वाले पत्रकारों पर जुर्माना लगाने के बाद उनकी सूची भी ग्रुप में सार्वजनिक की जाती है कि कितना किस पर देर से खबर लगाने का जुर्माना लगाया गया, कितना खबर न लगाने पर लगाया गया ,कितना दूसरे तहसील की खबर पर लगाया गया है और जब चेतावनी दी जाती है तो भी स्पष्ट धमकी दी जाती है कि कारण स्पष्ट करो नही तो आई डी बन्द कर दी जाएगी या तो आप पर जुर्माना लगा दिया जाएगा।

रिपब्लिक के एंकर पर 10 हजार रुपए का जुर्माना

 

अश्लील वीडियो बनाकर प्रसारित करने के मामले में 8 में से 7 पत्रकार न्यायालय में हुए पेश,आरोप तय पर बहस नहीं करने को लेकर कोर्ट ने लगाया रिपब्लिक के एंकर पर 10 हजार रुपए का जुर्माना

 

नाबालिका के वीडियो को अश्लील बनाकर प्रसारित करने के मामले में गत 31 मई को गुरुग्राम के पॉक्सो की अदालत में सुनवाई हुई,जिसमे 8 में से 7 आरोपी चित्रा त्रिपाठी,अजीत अंजुम, रिपब्लिक भारत के एंकर सैयद सोहेल,ललित सिंह, अभिनव राज,सुनील दत, राशिद सभी पेश हुए।  न्यायालय की कार्यवाही में आरोप तय पर बहस जारी है। चित्रा त्रिपाठी, राशिद, अभिनव राज,अजीत अंजुम के वकीलों ने गत 18 अप्रैल को ही दलील पूरी कर ली है,बचे चार आरोपियों (दीपक चौरसिया, सैयद सोहेल,सुनील दत,ललित बडगुर्जर) के विरुद्ध आरोप तय पर बहस होनी थी। जानकारी के मुताबिक पिछली तीन तारीख से केस स्टडी नही करने का कारण बताकर बहस हेतु समय की मांग की जा चुकी है।

लोकसभा चुनाव के लिये बिछने लगी बिसात, क्या खरगे बनेंगे विपक्ष की ट्रंप

केपी सिंह-
लोकसभा चुनाव वैसे तो अगले वर्ष होने हैं लेकिन राजनैतिक माहौल अभी से गर्माने लगा है। इसी बीच बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यू के नेता नीतिश कुमार ने कहा है कि चुनाव के लिये अगले वर्ष के इंतजार में बैठना ठीक नहीं है क्योंकि चुनाव का ऐलान कभी भी हो सकता है। कुछ और लोग भी लोकसभा चुनाव इसी वर्ष संपन्न करा लिये जाने की अटकलें व्यक्त कर रहे हैं लेकिन अभी रामजन्म भूमि मंदिर का उद्घाटन होना है जो अगले वर्ष जनवरी में प्रस्तावित है। इसके पहले तो चुनाव होने से रहा। उधर भाजपा के एजेंडे में शामिल रहे समान नागरिक संहिता को लागू करने के मसले पर एकाएक सरकार में तेजी आयी है और उसका यह उतावलापन जाहिर करता है कि भले ही चुनाव इस वर्ष न हों लेकिन रामजन्म भूमि मंदिर के लोकार्पण के बाद तत्काल निर्धारित समय से पहले चुनाव करा लेने की तैयारी कहीं न कहीं सरकार की ओर से है। ऐसा मानने वाले राजनैतिक प्रेक्षकों की धारणा यह है कि मोदी का करिश्मा फीका हो चला है इसलिये केन्द्र सशंकित है इसलिये समान नागरिक संहिता लागू करने के साथ रामजन्म भूमि मंदिर का उद्घाटन होते ही फिर उसके लिये मुफीद माहौल बनेगा जिसमें देरी न करके समय से पहले फरवरी मार्च में ही चुनाव करा लेने का फैंसला लिया जा सकता है। प्रतिपक्षी दल सरकार के इस संभावित पैतरे को लेकर सतर्क रूख अपना रहे हैं इसलिये उन्होंने किसी भी समय चुनावी युद्ध में कूंदने की मानसिकता बना ली है और इसके लिये अपनी रणनीति तय कर डाली है भले ही इसका खुलासा न किया जा रहा हो।
भाजपा को शिकस्त देने के लिये प्रतिपक्ष के सोचने की जो पहली बात है वह भाजपा विरोधी मतों को बंटने न देने या एकजुट करने की है इसके लिये सारे प्रतिपक्षी दलों का एक बड़ा मोर्चा बनाने की जो बात है वह बहुत आसान नहीं है। कांग्रेस ने जब से कर्नाटक विधानसभा का चुनाव मैदान जीता है तब से विपक्षी कुनबे में उसकी स्थिति मजबूत हुयी है। जदयू, राजद और द्रमुक जैसे दल तो पहले से ही नेतृत्व उसको सौंपने के लिये सहमत थे लेकिन ममता बनर्जी जैसे नेता भी पहले के रूख को बदलते नजर आने लगे हैं। अखिलेश यादव को अभी भी कांग्रेस से परहेज है और वे नीतिश की अगुवाई में मोर्चा गठित करने की ओर आगे बढ़ने की कोशिश करेंगे। केसीआर की मानसिकता क्या रहेगी। स्वयं कांग्रेस नेतृत्व के सवाल पर क्या रूख अपनायेगी यह भी अभी स्पष्ट नहीं है। पश्चिम बंगाल में मोर्चा कैसे काम करेगा यह भी एक बड़ा सिर दर्द है। कांग्रेस, वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस तीनों का पश्चिम बंगाल में सीटों के बटवारे को लेकर तालमेल पर मंथन एक म्यान में तीन तलवारें डालने जैसा है। केरल को लेकर कांग्रेस और वाम मोर्चा के बीच भी टकराव रहेगा। मोदी द्वारा प्रतिपक्षी दलों के लिये अस्तित्व का सवाल बना दिये जाने को देखते हुये पहले उन्हें हटाने की जरूरत बड़ी होने को तो सभी दल स्वीकार कर रहे हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि इस खातिर अन्य बातें भुलाने को कोई तैयार हो। खास तौर से कांग्रेस इस बात को झेल चुकी है कि गर्दिश के समय भाजपा के अलावा प्रतिपक्षी दलों ने भी उसे आप्रासंगिक करार देने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी इसलिये वह विपक्षी कुनबे को एहसास कराना चाहती है कि राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के विकल्प के रूप में लोग उसी का वजूद मानते हैं और इस हकीकत को नकारना स्वीकार्य नहीं हो सकता।

राज्य सूचना आयोग ने कुलसचिव,कुलपति महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से किया जवाब तलब।

 वाराणसी:  राज्य सूचना आयोग के आयुक्त अजय कुमार उत्प्रेति ने सुधांशु कुमार सिंह के द्वारा दायर द्वितीय अपील को स्वीकार करते हुए जनसूचना अधिकारी/कुलसचिव एवम् प्रथम अपीलीय अधिकारी कुलपति महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से अपना लिखित अभिकथन दिनांक:17.07.23 को  प्रस्तुत करने हेतु निर्देशित किया है।

सहारा मीडिया में महा छँटनी अभियान की गुप्त ब्लूप्रिंट तैयार

 

सहारा मीडिया में गुप्त तरीके से आधे से ज्यादा कर्मचारियों की छँटनी की योजना को अमली जामा पहनाया जा रहा है। सहारा मीडिया में छँटनी के इस अभियान की बागडोर परिवार सहित दुबई बसे सुब्रत रॉय के छोटे भाई जयब्रत रॉय ने संभाली है। जब सहारा के उच्चाधिकारियों पर ताबडतोड पुलिस केस और मुकदमे हो रहे थेतब जयब्रत रॉय ने दुबई का रुख किया था । अब जयब्रत रॉय वापस भारत आ पहुंचे हैं और आजकल छँटनी के एजेंडे से नोएडा कैंपस में कैंप किए हुए हैं। जयब्रत रॉय पहले इसी प्रकार के अभियान को मुंबई में सफलता पूर्वक अन्जाम दे चुके हैं और जॉब (Job) रद्द रॉय के नाम से प्रसिद्ध हैं।

जल्द होगा मुरादाबाद जर्नलिस्ट क्लब का पुनर्गठन

पदाधिकारियों में लगी अध्यक्ष बनने की होड़

मुरादाबाद: मुरादाबाद जनरलिस्ट क्लब के पुनर्गठन की मांग उठने लगी है। क्लब के ही कुछ सदस्यों द्वारा अध्यक्ष बनने की होड़ लगी हुई है। पिछले वर्ष हुए चुनाव में न्यूज़ नेशन के रिपोर्टर इमरान खान को सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना गया था। उन्होंने अपने कार्यकाल में पत्रकार हेतु के लिए तमाम सारे कार्य किए। 

2024 चुनाव की डगर ....विपक्ष के लिए कितनी आसान कितनी मुश्किल?

 

Aman Anand-


जिस तरह 2024 का चुनाव पास आ रहा है, उसी तरह राजनीतिक हलचल तेज होने के साथ सियासी पारा भी बढ़ता जा रहा है | विपक्ष लगातार इस बात पर मंथन कर रहा है कि अगले साल होने वाले चुनाव में मोदी-योगी की जोड़ी को तोड़ा कैसे जाए | हाल ही में विपक्ष ने पटना में महाबैठक की जिसमें विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं ने 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा विरोधी मोर्चे के गठन की रूपरेखा तैयार करने के लिए विचार-विमर्श किया। लगभग चार घंटे की लंबी बैठक के बाद, 17 विपक्षियों ने भाजपा को हराने के लिए 2024 का लोकसभा चुनाव एकजुट होकर लड़ने और अपने मतभेदों को दूर करके एकजुट होकर काम करने का संकल्प लिया। हालांकि इस बैठक से केजरीवाल, अखिलेश, स्टालिन और मायावती जैसे विपक्ष बड़े चेहरे नदारद रहे | इस बैठक के बाद विपक्ष ने ऐलान किया कि अगली बैठक शिमला में होगी जिसकी अध्यक्षता कांग्रेस करेगी |  

बौद्धिक जागरण का उदगाता गीत प्रेस

 डाॅ मयंक मुरारी-


गीता प्रेस गोरखपुर को इस बार वर्ष 2021 के गांधी शांति पुरस्कार के लिए चुना गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से गीता प्रेस गोरखपुर को गांधी शांति पुरस्कार के प्राप्तकर्ता के रूप में चुनने का फैसला किया गया। संस्कृति मंत्रालय ने इस चयन को लेकरघोषणा में बताया कि गीता प्रेस ने 100 साल में लोगों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन को आगे बढ़ाने की दिशा में काफी सराहनीय काम किया है। इस घोषण के साथ ही कांग्रेस की ओर से इस पर अनावश्यक विवाद खड़ा कर दिया गया, जो सर्वथा अनुचित था। गीता प्रेस गोरखपुर को लागत से कम मूल्य में धार्मिक पुस्तकों के प्रकाशन के लिए जाना जाता है। गीता प्रेस सामाजिक और सांस्कृतिक उत्थान के लिए बौद्धिक जागरण का यह पुनीत कार्य पिछले 100 साल से करता आ रहा है। विरोध के बाद गीता प्रेस गोरखपुर की बोर्ड मीटिंग में तय हुआ है कि इस बार परंपरा को तोड़ते हुए सम्मान स्वीकार किया जाएगा, लेकिन पुरस्कार के साथ मिलने वाली धनराशि नहीं ली जाएगी। जानकारी के मुताबिक, बोर्ड की बैठक में तय हुआ है कि पुरस्कार के साथ मिलने वाली एक करोड़ रुपये की धनराशि गीता प्रेस स्वीकार नहीं करेगा।
गीता प्रेस के कल्याण पत्रिका के संपादक रहे हनुमान प्रसाद पोद्दार उर्फ भाई जी को भारत रत्न देने का प्रस्ताव तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की ओर से रखा गया थाए तब तत्कालीन गृहमंत्री गोविंद बल्लभ पंत गोरखपुर में भाई जी से मिलकर भारत रत्न देने की बात कहीं थी, तब भी उसे ठुकरा दिया गया था। आज जब पुनः विरोध के स्वर उठ रहे है, तो यह स्मरण करना अनिवार्य हो जाता है कि गीता प्रेस भारतवर्ष में सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का पहरूआ संस्था रहा है। गीता प्रेस का गठन जयदयाल गोयनका, घनश्याम दास जालान और हनुमान पोद्दार ने गोरखपुर में सन 1923 में किया था। गीता प्रेस के गठन का एकमात्र लक्ष्य सनातन धर्म का संरक्षण, संवर्द्धन और संपोषण करना था। गीता प्रेस पिछले एक साल से सनातन एवं शांत बहती सरिता की तरह है, जिसने भारतीय समाज को बौद्धिक, आत्मिक और जैविक समाज के रूप में बदला है। गीता प्रेस नहीं होती, तो आज भारतीय समाज को अपने अतीत और अपने धरोधर को बचाने के लिए संघर्ष करना पडता। पिछले एक सदी से देश में संस्कृति और परंपरा की शाश्वत धारा प्रवाहित कर रही है, जिसमें सांस्कृतिक मूल्यों के साथ, अहिंसा, सदाचार, देशनिर्माण एवं आयुर्वेद, योग और अध्यात्म को सिंचित, पुष्पित और पल्लवित किया गया है। 

27.6.23

कर्नाटक के बाद तेलंगाना साधने की कांग्रेस की तैयारी

विजय सिंह, 27  जून

कांग्रेस के युवराज और भाजपा के पप्पू राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को अप्रत्याशित सफलता मिलने के बाद, कर्नाटक विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की शानदार जीत अब तेलंगाना में के.चंद्रशेखर राव के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ पार्टी  भारत राष्ट्र समिति ( बीआरएस पूर्व नाम - तेलंगाना राष्ट्र समिति ,टी आर एस ) और भाजपा  नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने की सुगबुगाहट के साथ ही 2023 में दक्षिण भारत के आसन्न चुनावी राज्य तेलंगाना में कांग्रेस को पुनर्जीवन के लिए ऑक्सीजन की नई खेप मिलने के संकेत शुरू हो गए हैं।

टाइगर इन मेट्रो : ब्रशस्ट्रोक व जीवंत रंगों के माध्यम से बाघ को बचाने का संदेश

 





  • प्रदेश के वरिष्ठ कलाकार जय कृष्ण अग्रवाल समेत सैकड़ों लोगों ने किया टाइगर इन मेट्रो का अवलोकन । 


     लखनऊ , 27 जून 2023, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के हजरतगंज मेट्रो स्टेशन पर इन दिनों दस दिवसीय टाइगर इन मेट्रो अखिल भारतीय पेंटिंग एवं छायाचित्रों की प्रदर्शनी चल रही है। यह प्रदर्शनी मेट्रो स्टेशन पर आने वाले सभी यात्रियों के लिए सबके आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। सेव टाइगर प्रोजेक्ट पर आधारित इस प्रदर्शनी में देश के 13 राज्यों के 42 फोटोग्राफर एवं चित्रकारों की 76 कलाकृतियों को शामिल किया गया है। पिछले चार दिनों में हजारों की संख्या में लोगों ने इस प्रदर्शनी का अवलोकन किया। कलाकारों के सृजनात्मकता और छायाचित्रकारों की कुशल फोटोग्राफी को लोग काफी पसंद कर रहे हैं साथ इसके पीछे कलाकारों के भाव की भी सराहना हो रही है। टाइगर इन मेट्रो प्रदर्शनी के क्यूरेटर भूपेंद्र अस्थाना ने बताया कि यह देश की पहली कला प्रदर्शनी है जिसमें देश के समकालीन कलाकार और छायाकार इतनी बड़ी संख्या में शामिल हुए हैं। यह टाइगर के जीवन के प्रति इनकी संवेदनशीलता और गहरी भावना का भी परिचय देता है। 

26.6.23

सुचेता कृपलानी की 115वीं जन्मतिथि पर संगोष्ठी




25 जून, नई दिल्ली। सुचेता कृपलानी भारतीय समाज, राजनीति, स्वतंत्रता आंदोलन और मानव सेवा का वह चमकता हुआ सितारा है जिसकी चमक कभी फीकी पड़ ही नहीं सकती। यह उद्गार वरिष्ठ पत्रकार नीलम गुप्ता ने स्वर्गीय सुचेता कृपलानी की 115वीं जन्म तिथि पर आयोजित संगोष्ठी में व्यक्त किए। संगोष्ठी का आयोजन आचार्य कृपलानी मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा किया गया था।

18.6.23

फरमानो की नाफ़रमानी अफ़सरशाही का शग़ल रहा है !


सत्येंद्र कुमार

पहले के राजाओं महाराजाओं के राज्य और सल्तनतें भी काफी दूर दूर तक फैली होती थी । बड़े से बड़े और छोटे से छोटे सूरमाओं के सल्तनतों में हुक्म देने और हुक्म बजा लाने की फटाफट रवायत थी । हुक्म की नजरअंदाजी और नाफरमानी पर ऐसे कठोर दंड का प्रावधान था जिसे सोचकर रूह काँप जाती थी । शायद यही वजह थी कि हुक्म की नाफ़रमानी  करने की मजाल किसी अफसरशाही में नही थी । आज के समय में भी देखा जाए तो अफसरशाही की मुश्कें कसने में पूर्व सी एम  मायावती जितनी कामयाब रहीं शायद ही कोई और सी एम उतना कामयाब रहा हो । 

आज इस भीषण प्रचण्ड गर्मी में सूबे के मुखिया द्वारा बिजली विभाग को प्रदेश भर में निर्बाध तरीके से बिजली आपूर्ति का जो आदेश अभी कुछ दिन पहले ही दिया गया था, उस आदेश को भी बाकी आदेशों की तरह नाफ़रमान अफसरों के अहंकार और निकम्मेपन ने रद्दी में फेंक दिया है । जिलों में संचालित अवैध स्टैंड तथा अवैध शराब को लेकर जारी सी एम के आदेश का भी वैसा ही हश्र हुआ है, जैसा हश्र उन आदेशों का हुआ, जिसमे अधिकारियों को अपना सी यू जी नंबर खुद उठाने और 10 बजे सुबह कार्यालय पहुँच जाने के लिए आदेशित किया गया था। 

आज यूपी में बिजली सप्लाई की बुरी हालत है । लखनऊ में भी चौदह चौदह घंटे की कटौती जोरों पर है । यूपी के ग्रामीण क्षेत्रों में तो हालत बदतर है । जिलों में भी चौदह से अट्ठारह घंटे की करामाती कटौती हो रही है । ग्रामीण क्षेत्रों में तो महज कुछ घंटे ही बमुश्किल बिजली मिल पा रही है । भीषण गर्मी में जनता गर्मी से चित्कार कर रही है और बिजली संकट का हाहाकार मचा हुआ है ।

स्थिति यह है कि हालात से उपजे बदहालियों औऱ मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद भी अफसर नहीं सुधर रहे हैं । आई. ए. एस. अफसरों ने बिजली विभाग का भट्ठा बैठा दिया है ।कहीं कोई कार्रवाई नहीं है और न ही किसी की कोई जबावदेही है । अफसरों के अहंकार और निकम्मेपन ने अन्य व्यवस्थाओं की तरह बिजली व्यवस्था को भी आज कितना पंगु बना दिया है इसका अहसास सबको हो चला है । बिजली विभाग में दर्जनभर से ज्यादा आई. ए. एस. तैनात हैं लेकिन फिर भी बिजली विभाग की मनमानी को नियंत्रित कर पाना टेढ़ी खीर बना हुआ है । बिजली व्यवस्था सुदृढ़ करने की बजाय काम में अड़ंगा लगाने और फाइलों से पैसा बनाने की अफ़सरशाही प्रवृत्ति और दिलचस्पी ने बिजली विभाग का बेड़ा गर्क कर दिया है। बिजली सप्लाई समान्य कैसे हो इसपर ध्यान नहीं है और मंत्री के एक्शन का भी अफसरों पर कोई असर नहीं है । भीषण गर्मी से पूर्व विभागीय तैयारियों का हाल ऐसा है कि गर्मी से पहले ट्रांसफार्मर्स के आयल तक नहीं बदले गए। 

आदेशों को अनसुना करने की प्रवृत्ति यदि ऐसी ही बनी रही तो मूसलाधार बरसात से पूर्व बन्धों की मरम्मत की तैयारियों का भी बंटाधार होना तय है । हालात यह हैं कि ओवरलोडिंग और प्रॉपर मेंटेनेन्स के आभाव में रोजाना लगभग हजार से ज्यादा ट्रांसफार्मर दग जा रहे हैं और अफसरान हैं कि आपसी गुटबाजी और अहंकार में भ्रष्टाचार के नए नए कीर्तिमान गढ़ रहे हैँ । हुक्म की नाफ़रमानी वाली प्रवृति आज अफ़सरशाही में इतना भयंकर रूख अख़्तियार कर चुकी है कि नाफरमान अफ़सरशाही को जिल्ले इलाही , सुल्तान, महाराज जी या मुख्यमंत्री के फ़रमान की नाफ़रमानी का कोई खौफ़ बाकी नही रह गया है ।

16.6.23

News18 Punjab/Haryana Presents Education Summit: Exploring the Future of Learning with Artificial Intelligence

News18 Punjab/Haryana Presents Education Summit: Exploring the Future of Learning with Artificial Intelligence

 

Chandigarh, 16th June, 2023 — News18 Punjab/Haryana, the No.1* news channel of the region, is thrilled to announce the Education Summit, a pioneering event aimed at fostering discussions on leveraging technology to revolutionize education. The summit will take place in Chandigarh on 17th June, serving as a platform for educators, experts, and thought leaders to delve into the transformative potential of Artificial Intelligence (AI) in the field of education.

The Education Summit will serve as a catalyst for exploring pioneering solutions and strategies that can revolutionize the quality of education. With a specific focus on the theme "Artificial Intelligence (AI) and the Future of Learning," the summit will delve into the potential of AI in reshaping the landscape of education, equipping students with the necessary skills for a rapidly evolving future.

With a strong focus on innovation and the enhancement of education quality, the Education Summit seeks to spark conversations and highlight the role of technology in shaping the future of learning. The event will showcase panel discussions featuring esteemed guests and representatives from renowned educational institutes in the region, including Dr. Ajay Batish, Deputy Director of Thapar Institute of Engineering & Technology; Dr. Lalit Awasthi, Director of NIT, Uttarakhand; Dr. Padmakumar Nair, Director of Thapar Institute of Engineering & Technology; Dr. Rajeev Ahuja, Director of IIT Ropar; Kanwardeep Kaur, Senior Superintendent of Police, Chandigarh; Group Captain (Retd.) Sangeeta Kathait; Kamal Wadhera, CEO of TCY Online; Dr. Manbir Singh, Pro Vice-Chancellor of C T University; Dr. VK Rattan, Vice-Chancellor of GNA University; and Lieutenant General (Retd.) Deependra Singh Hooda.

The Education Summit will delve into the myriad possibilities presented by AI and its impact on the future of education. Attendees can expect in-depth discussions on how AI can be harnessed to drive innovation, enhance teaching methodologies, and create a personalized learning experience for students. The summit will explore practical solutions and shed light on successful AI implementations in educational institutions.

Tune in to News18 Punjab/Haryana on 17th June at 5:30 PM to watch the Education Summit. This conclave is a testament to News18 Punjab/Haryana's commitment to promoting educational advancements and driving positive change in the region.

 

*Source: BARC, TG: 15+, Period: Wk 23'23, Market: Pun/Cha, AMA 000's, 5 Channels Considered


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