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11.6.09

विस्फोट के पत्रकार को 10 करोड़ का नोटिस


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सच बोलने और उस पर अडिग रहने की सजा विस्फोट.कॉम को मिलनी शुरू हो गयी है. उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री बी सी खण्डूरी ने विस्फोट के पत्रकार पर 10 करोड़ की मानहानि का मुकदमा दायर करने की तैयारी कर ली है. विस्फोट से जुड़े पत्रकार राजेन्द्र जोशी को आज ही मुख्यमंत्री के वकील की ओर से एक नोटिस मिला है जिसमें मुख्यमंत्री की मानहानि का हवाला देते हुए उनके ऊपर 10 करोड़ का दावा ठोंकने की नोटिस भेजी गयी है.

विस्फोट.कॉम देश के स्वतंत्र पत्रकारों का सबसे ताकतवर मंच बनकर उभरा है. आज के इस कारपोरेट मीडिया जमाने में कोई ऐसा माध्यम जो सच्चाई को साहस के साथ जनता के सामने ला सकता है इसमें देश के 100 से अधिक पत्रकार अपना योगदान दे रहे हैं. राजेन्द्र जोशी विस्फोट की शुरूआत से इस साईट के साथ जुड़े हैं और लगातार जनहित के मुद्दे उठाते रहे हैं. पुराने पत्रकार हैं और देश के विभिन्न अखबारों के लिए काम किया है.Rajendra_Joshi_02_308194657.jpg

हाल में ही संपन्न हुए लोकसभा चुनाव के दौरान उत्तराखण्ड में भाजपा की जैसी करारी पराजय हुई उसके कारण पूरी भाजपा में खलबली मच गयी. कम से कम उत्तराखण्ड से सभी नेताओं को बेहतर नतीजे आने की उम्मीद थी. लेकिन ढाई साल पुराने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में लड़े गये चुनाव में भाजपा पूरी तरह से धराशायी हो गयी. परिणाम आने के अगले ही दिन पूरी भाजपा में उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पूरी भाजपा के नेतृत्व के निशाने पर आ गये. आनन-फानन में एक दो सदस्यीय दल उत्तराखण्ड गया इस बात की समीक्षा करने के लिए कि वहां खण्डूरी की बजाय किसे मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. लेकिन जो दल वहां खण्डूरी को हटाने के लिए गnotice_259818475.jpgया था वह उन्हे अभयदान देकर लौट आया.

ऐसा क्यों हुआ? उत्तराखण्ड में हुए विधानसभा चुनावों में भारी सफलता मिलने के बाद तय था कि भगत सिंह कोश्यारी को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा. लेकिन अचानक ही बी सी खण्डूरी राज्य के मुख्यमंत्री बना दिये गये. उस वक्त से ही राज्य भाजपा में व्यापक असंतोष है. कोश्यारी को शांत करने के लिए उन्हें राज्यसभा में भेजा गया और विवाद न बढ़े इसलिए राज्य अध्यक्ष पद से भी मुक्त कर दिया गया. लेकिन इतना सब करने के बाद भी असंतोष थमा नहीं और भाजपा में अंदर ही अंदर कलह बढ़ती चली गयी. इसी कलह का परिणाम है कि राज्य में भाजपा को लोकसभा चुनावों के दौरान भारी पराजय का सामना करना पड़ा.

राजेन्द्र जोशी ने अपनी रिपोर्ट में सिलसिलेवार तरीके से यह बताया है कि पर्यवेक्षक यहां कैसे आये और कैसे विदा किये गये. इसमें ऐसा क्या है जो मुख्यमंत्री को नागवार गुजरा है? अगर वे ऊमानदार और निष्पक्ष हैं तो फिर किसी पत्रकार की इस रिपोर्टिंग से उन्हें तकलीफ क्यों हो रही है कि पर्यवेक्षकों को पैसा देने की अफवाह सुनाई दे रही है. अगर गुनाह करना गुनाह नहीं है तो फिर गुनाह की चर्चा करना कैसे गुनाह कैसे हो गया? राजेन्द्र जोशी ने वही लिखा जो वहां हुआ. फिर इसमें ऐसा क्या गलत है जो उन्हें नोटिस थमा दी गयी? क्या अब पत्रकार वही लिखेगा जिसे किसी प्रदेश का ताकतवर मुख्यमंत्री अपनी सहमति प्रदान करेगा? अगर यही करना है तो पत्रकारिता का क्या होगा? सच बताने के साहस का क्या होगा?

नोटिस मिलने के बाद भी राजेन्द्र जोशी परेशान नहीं है. वे कहते हैं कि उन्होंने विस्फोट पर कुछ भी गलत नहीं लिखा है इसलिए नोटिस से घबराने की जरूरत ही नहीं है. जरूरत है तो इस बात की कि एक प्रदेश के मुख्यमंत्री की वह सच्चाई लोगों के सामने आनी चाहिए कि वह अपने आप में कितना लोकतांत्रिक है? नोटिस में कहा गया है कि राजेन्द्र जोशी ने 24 विधायकों के समर्थन पर सवाल उठाकर उन्होंने गलत किया है. जब एनआईसी खुद इस बात की जांच कर रही है कि 24 विधायकों के समर्थन का ईमेल कहां से आया तो फिर एक पत्रकार द्वारा इसकी जानकारी लोगों तक पहुंचाना कैसे गलत हो सकता है? नोटिस भेजनेवाले मुख्यमंत्री के वकील भी इस बात को जानते ही होंगे उस ईमेल की जांच हो रही है जिसमें खण्डूरी को 24 विधायकों द्वारा समर्थन देने की बात कही गयी है.

राजेन्द्र जोशी ने वह लिखा जो उन्होंने देखा और सुना. बिना एक कदम पीछे हटते हुए राजेन्द्र जोशी इस लड़ाई को आगे ले जाना चाहते हैं. हम उनके साथ हैं.


5 comments:

AlbelaKhatri.com said...

bahut khoob !

Sunita said...

Joshi ji esa kyo hota hai sach bolanay valo ko saja kyu milti hai,kya sach bolna gunah hai.Apne jo bhi likha sach hi hoga aur ham apke sath hai sach joth mai jeet sachie ki hi hogi.
Sunita Sharma
freelance journalist

SALEEM AKHTER SIDDIQUI said...

joshi ji hu sab aapke saath hain.

शंकर फुलारा said...

joshi ji mukhyamantri ji itne bade akl ke dost nahin hain ki kisi patrakaar par das karod ka dava thoken . ham bhi aapke sathh hain.

Anonymous said...

gunah karna gunah nahin to gunah ko sarvajanik karna kahan ka gunah ho gaya ye baat bilkul sahi hai, ese dekhkar to yahi lagta hai ki amukhyamantri apne gireban main jhankne ke bajaye Patrakaron ko dhamkane main jayada hi intrest le le kar satya ka gala ghotne ka prayass kar rahe hain, yah kisi Bhi patrakar ko manjoor nahin hoga