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6.3.09

कल इंदौर नगरी में हूं, सचिन भाई....व्यवस्था टाइट रखना

कल सुबह इंदौर पहुंच रहा हूं। दो दिन का कार्यक्रम है। एक प्रोग्राम में शरीक होना है उसके बाद घूमना-मिलना है। जिन लोगों को मैं आनलाइन या आफलाइन जानता हूं, उनको सूचित किया। सचिन भी आजकल वहीं पत्रकारिता कर रहे हैं। उनसे अनुरोध है कि व्यवस्था टाइट रखें, बहुत दिन हुए हंगामा किए :) आशीर्ष महर्षि थे तो वहां लेकिन आजकल वे फिर भोपाल की सेवा में हैं। सुबोध इंदौरी को भी फोन कर बता दिया है। उन्होंने खाने का एडवांस निमंत्रण दे दिया है। पीन का न्योता एडवांस में सचिन ने थमा दिया है। इसी खाने-पीने में ब्लाग ब्लाग भी बतिया लेंगे और खेल लेंगे।
बहुत दिनों बाद दिल्ली से इतना दूर जा रहा हूं। दो साल से गांव भी नहीं गया। होली पर जाने का मन था लेकिन इस बार भी नहीं जा रहा हूं। इंदौर से ही दिल लगाकर वापस आने का इरादा है ताकि फिर कहीं जाने की कमी महसूस न हो।
इंदौर के अन्य साथियों से भी मिलने को उत्सुक हूं। वे मुझे 09999330099 पर रिंग कर सकते हैं।

जय हो।
यशवंत

6.2.09

मेरठ में हो रहा है हिन्दी ब्लागिंग पर भव्य सेमिनार

हिन्दी ब्लागिंग अपना परचम दुनिया भर में लहरा कर अब जनसाधारण की अभिव्यक्ति का माध्यम बन गई है। अनेक देश-प्रदेशों में हिन्दी ब्लागिंग को लेकर चर्चाए और सेमिनार होते रहे है। दिल्ली में तो अब हर महिने की ब्लागिंग को लेकर छोटे बड़े सेमिनार हो रहे हैं। इस कड़ी में अब मेरठ शहर का नाम भी जुड़ने वाला है। यहां जमा हो रहे है देश के नामचीन ब्लागर।


मेरठ में ब्लागिंग के इस भव्य सेमिनार को आयोजित कर रही है चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी और रवि पब्लिकेशंस। कार्यक्रम यूनिवर्सिटी के प्रेमचंद सेमिनार हाल में 10 फरवरी को सायं 3 बजे होने जा रहा है।

इस कार्यक्रम में हिन्दी ब्लागिंग को लेकर अपने विचार रखने के लिए देश भर से ब्लागर आ रहे है। अभी तक प्राप्त सूचना के आधार पर आमंत्रित ब्लागरों में मुख्य रूप से 'भड़ास’ के यशवंत सिंह जी, 'इर्दगिर्द’ से हरि जोशी जी, 'आजकल’ से ओमकार चौधरी जी, 'दिल की बात’ से डा. अनुराग आर्य, 'हकबात’ से सलीम अख्तर सिद्दीकी जी, 'पापुलर कलाम’ से पापुलर मेरठी जी आदि ब्लागर कार्यक्रम में सम्मिलित हो रहे है। इसके अतिरिक्त अन्य ब्लागर भी हैं जिनके आगमन की सूचना है।

'उड़नतश्तरी’ के समीरलाल जी इन दिनों भारत में है और उनका इस कार्यक्रम में आने का आश्वासन है लेकिन प्राप्त जानकारी के अनुसार अभी हाल ही में उनका स्वास्थ्य गड़बड़ा गया है। ईश्वर उनको जल्दी सेहतमन्द करे ताकी हम इस सेमिनार में उनको भी सुन सकें।

कार्यक्रम में ब्लागिंग पर एक पुस्तक का विमोचन भी होना है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. एस. के. काक रहने वाले है। इसके साथ ही जागरण समूह के धीरेन्द्र मोहन गुप्ता जी का सानिध्य भी प्राप्त होने वाला है तथा मशहूर लेखक असलम जमेशदपुरी जी व रवि पब्लिकेशसं के मनेष जैन जी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहेगें। इसके अलावा और भी हिन्दी ब्लागरों के आने की सूचना मिल रही है जैसे-जैसे उनके नाम प्राप्त होते रहेगें आपको सूचित किया जाता रहेगा। आपका भी मेरठ में ब्लागिंग के इस भव्य समारोह में स्वागत है।
साभार- इरशादनामा

8.7.08

कविता का उत्सव बन गया एक आयोजन



आज की इस भागदौड़भरी जिंदगी में कुछ लम्हें कविता के जी लेना अपने आप में स्थित होना है। अपने से हौलो-हौले बतियाना है। राजधानी के काव्यरसिकों को कविता के कुछ ऐसे ही क्षण उपलब्ध कराए पं. रामप्रसाद बिस्मिल फाउंडेशन ने, महात्मा गांधी शांति प्रतिष्ठान में। रविवार का अवकाशभरा दिन। मानो श्रोताओं का मन ही रविवार हो रहा था। रिमझिम फुहारों से जहां वातावरण कवितामय हो रहा था वहीं सभागार में कविता की रसभावन फुहारों से कविता स्वयं कविता से बतिया रही थी। कविता की हर अच्छी पंक्ति पर जीवंत श्रोताओं की मिल रही दाद से कवियों का उत्साह बढ़ रहा था, वहीं धीरे-धीरे कवि सम्मेलन का आयोजन किवता-दर-किवता अपनी ऊंचाइयों को छूता जा रहा था। भगवान सिंह हंस ने जब पंक्षी उड़ता जाता है,गीत सुनाकर वातावरण को एक गीतात्मक प्रारंभ दिया तो वहीं दूसरी ओर अरविंद चतुर्वेदी ने दुमदार दोहे पढ़कर वातावरण को खुशनुमा बनाया। डा. मधु चतुर्वेदी ने गजलें सुनाकर एक अदभुत समां बांध दिया तो वहीं भड़ास शिरोमणि यशवंत ने जागो..रे जागो..गीत सुनाकर समारोह में एक नई जान फूंक दी। संचालन कर रहे पुरुषोत्तम.एन.सिंह ने सूरत तेरी रेशम-रेशम गीत सुनाकर जहां रेशमी संवेदवाओं से माहौल को लवरेज कर दिया तो वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सुप्रसिद्ध कवि पं. सुरेश नीरव ने ग्लोबलवार्मिंग और अणुधर्मी आतंक के विरुद्ध अपने गीत सुनाकर कविता के इस अप्रतिम अनुष्ठन को अभिव्यक्ति का एक सुखद उत्सव बना दिया- टूटती ओजोन पर्तें रोज़ आसमानों में,आतिशों की बारिस है प्यास के तराने हैं डूबते जहाजों पर तैरते खजाने हैं और फिर आध्यात्मिक प्रतीकों के गीत श्लोक अधर मंत्र-सी आंखें,देवालय-सा तन, रामायण-सा रूप तुम्हारा सांसें वृंदावन सुनाकर पूरी महफिल को एक मुकद्दस पाकीजगी से भर दिया। अरविंद पथिक ने भी इस बार वीर रस की कविताएं न पढ़कर गीत सुनाए। अन्य कवियों में रजनी कांत राजू, रमाकांत पूनम और यशवर्धन ने भी कविताएं पढ़ीं। इस अवसर पर भोपाल से आए वीरेद्र सिंह ने हवा मान जाएगी ओर शहीदो के लिए कविताएं पढ़कर जहां वातावरण को फिर एक नया रंग दिया तो भोपाल के ही सतीश चतुर्वेदी ने सत्यं-शिवं-सुंदरं कविता पढ़करआयोजन को एक नया तेवर दे दिया। अंत में जयपुर से आये युवा गीतकार शिव दर्शन ने वंदे मातरम रचना का गायन कर शब्द के इस सात्विक अनुष्ठान को सार्थक पूर्णविराम दिया। इस अवसर पर भड़सी बंधुओं की उपस्थितिने कार्यक्रम की सार्थकता को और बढ़ाया।
प्रस्तुतिः मृगेन्द्र मकबूल