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6.2.09

मेरठ में हो रहा है हिन्दी ब्लागिंग पर भव्य सेमिनार

हिन्दी ब्लागिंग अपना परचम दुनिया भर में लहरा कर अब जनसाधारण की अभिव्यक्ति का माध्यम बन गई है। अनेक देश-प्रदेशों में हिन्दी ब्लागिंग को लेकर चर्चाए और सेमिनार होते रहे है। दिल्ली में तो अब हर महिने की ब्लागिंग को लेकर छोटे बड़े सेमिनार हो रहे हैं। इस कड़ी में अब मेरठ शहर का नाम भी जुड़ने वाला है। यहां जमा हो रहे है देश के नामचीन ब्लागर।


मेरठ में ब्लागिंग के इस भव्य सेमिनार को आयोजित कर रही है चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी और रवि पब्लिकेशंस। कार्यक्रम यूनिवर्सिटी के प्रेमचंद सेमिनार हाल में 10 फरवरी को सायं 3 बजे होने जा रहा है।

इस कार्यक्रम में हिन्दी ब्लागिंग को लेकर अपने विचार रखने के लिए देश भर से ब्लागर आ रहे है। अभी तक प्राप्त सूचना के आधार पर आमंत्रित ब्लागरों में मुख्य रूप से 'भड़ास’ के यशवंत सिंह जी, 'इर्दगिर्द’ से हरि जोशी जी, 'आजकल’ से ओमकार चौधरी जी, 'दिल की बात’ से डा. अनुराग आर्य, 'हकबात’ से सलीम अख्तर सिद्दीकी जी, 'पापुलर कलाम’ से पापुलर मेरठी जी आदि ब्लागर कार्यक्रम में सम्मिलित हो रहे है। इसके अतिरिक्त अन्य ब्लागर भी हैं जिनके आगमन की सूचना है।

'उड़नतश्तरी’ के समीरलाल जी इन दिनों भारत में है और उनका इस कार्यक्रम में आने का आश्वासन है लेकिन प्राप्त जानकारी के अनुसार अभी हाल ही में उनका स्वास्थ्य गड़बड़ा गया है। ईश्वर उनको जल्दी सेहतमन्द करे ताकी हम इस सेमिनार में उनको भी सुन सकें।

कार्यक्रम में ब्लागिंग पर एक पुस्तक का विमोचन भी होना है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. एस. के. काक रहने वाले है। इसके साथ ही जागरण समूह के धीरेन्द्र मोहन गुप्ता जी का सानिध्य भी प्राप्त होने वाला है तथा मशहूर लेखक असलम जमेशदपुरी जी व रवि पब्लिकेशसं के मनेष जैन जी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहेगें। इसके अलावा और भी हिन्दी ब्लागरों के आने की सूचना मिल रही है जैसे-जैसे उनके नाम प्राप्त होते रहेगें आपको सूचित किया जाता रहेगा। आपका भी मेरठ में ब्लागिंग के इस भव्य समारोह में स्वागत है।
साभार- इरशादनामा

6.11.08

कार में बैठा हुआ, पैदल सफर करता रहा....

कल बहुत दिनों बाद अपने मेरठी मित्र विजेंद्र सिंह परवाज से मुलाकात हुई। अंग्रेजी के लेक्चरर पद से रिटायर होने के बाद परवाज साहब की असली जिंदगी शुरू हुई है। वे उम्दा शायर हैं, लड़ाकू शख्सीयत है, क्रांतिकारी व्यक्तित्व है, आध्यात्मिक मन है, मोरारी बापू के अनन्य भक्त हैं, औघड़ों का तन है, फकीरी रास आती है। भड़ास ब्लाग पर परवाज साहब को न सिर्फ पेश कर रहा हूं बल्कि उन्हें उनके मिजाज को देखते हुए परम भड़ासी की उपाधि भी देता हूं। परवाज साहब भड़ास से जुड़ चुके हैं और वे इसके सक्रिय सदस्य बनने की तैयारी कर रहे हैं। लीजिए, उनके कुछ लिखने से पहले मैं उनके लिखे कुछ शेर पेश करता हूं। मुझे यकीं है आपको पसंद आएगा....यशवंत

जब अमीरी में मुझे गुरबत के दिन याद आ गए

कार में बैठा हुआ पैदल सफर करता रहा।

जिस्म पर कपड़ा नहीं तो अपनी आंखें मूंद ले

कम से कम तुझसे तो तेरा तन छुपा रह जाएगा।

जरा सी बात की खातिर जमीर क्यों बेचें

जरूरतों का सफर सिर्फ जिंदगी तक है।

उम्र भर मेरी शराफत ने खड़ा पहरा दिया

तब कहीं ईमान की दौलत बचा पाया हूं मैं।

बिक गया बाजार में दोपहर तक एक एक झूठ

शात तक बैठे रहे हम अपनी सच्चाई लिए।

अपनी खराबियों को छुपाना पड़े मुझे

भूले से जब किसी ने समझदार कह दिया।

आप दुनिया को बदल डालेंगे, धीरे बोलिए

हौसले की बात कहना बुजदिली है आजकल।

न यूं उठा था धुआं आसमान से पहले

डरा हुआ है परिंदा उड़ान से पहले।

वो मेरे जनाजे में शामिल नहीं है

उसे जिंदगी से कुछ उम्मीद होगी।

दामन पे दाग आए न आए मेरा नसीब

कीचड़ उछालकर तेरी हसरत निकल गई।

आप फूंकों से बुझाने की न कोशिश कीजिए

इन चरागों का सफर तो आंधियों तक जाएगा।

आगे निकल गए हैं मेरे हमसफर तमाम

कांटा निकालने में बहुत देर हो गई।

तलवार पे जाहिर नहीं इक बूंद लहू की

शायद वो मेरे जिस्म के साए से लड़ा है।

...........ऐसा लिखते हैं अपने परवाज साहब।

किसान परिवार के परवाज साहब प्रचार से हमेशा दूर रहे। इसके चलते उनके लिखे को वो सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार हैं। परवाज साहब बेहद यारबाज आदमी हैं। जिसको दिल दिया फिर उसी के हो गए। जिसको अपनाया तो कभी छोड़ा नहीं। दोस्त कम बनाए लेकिन चुनकर बनाए। दुश्मनों की कभी परवाह नहीं की। परवाज साहब में गजब की विविधता है। उनके शेर में रेंज बहुत है। अध्यात्म से लेकर राजनीति तक, हर विषय पर उन्होंने गजब की लाइनें कहीं हैं।

भड़ास इस देसी और भदेस शायर को उसका सम्मान दिलाने के लिए कृत संकल्पित है। पहले चरण में परवाज साहब को भड़ास ब्लाग से जोड़ा जा रहा है। दूसरे चरण में उनके शेर को नियमित तौर पर यहां प्रकाशित किया जाएगा। तीसरे चरण में उनका एकल काव्य पाठ का प्रोग्राम दिल्ली में आयोजित कराया जाएगा।

कल परवाज साहब दिल्ली में थे। ढाई साल बाद मैं उनसे कल मिला। जब उनका फोन आया तो मैं उन्हें तीसरा स्वाधीनता आंदोलन द्वारा दिल्ली स्थित गांधी शांति प्रतिष्टान में आयोजित राष्ट्रीय विमर्श में बुला लिया। वहां रजनीश के झा समेत कई भड़ासी साथी थे। परवाज साहब ने विमर्श में अपने शेर व अपनी बातों से सबको मुग्ध कर दिया। प्रोग्राम के बाद रजनीश झा और मैंने अलग से परवाज साहब को सुना। वहां से चलने को हुए तो दारू का एक अद्धा लिया गया और कार में ही पीते पिलाते खाते रात 10 बजे तक यहां वहां घूमते रहे, उनको सुनते रहे, उनसे दिल का साझा करते रहे। रात में वे मेरे घर पर ही रुके। पिछले ढाई साल में उन्होंने जो जो नई किताबें लिखीं, उसकी एक प्रति भेंट की। उम्मीद है परवाज साहब से अब नियमित तौर पर हम सभी का संपर्क बना रहेगा।

भड़ास पर परवाज साहब का मैं दिल से स्वागत करता हूं।

जय भड़ास

यशवंत

17.4.08

पत्रकार और युवा कहानीकार सौरभ शर्मा निर्भय के कहानी संग्रह का विमोचन




उपरोक्त तस्वीर पर क्लिक करेंगे तो वो फुल साइज में खुलेगी, और आप युवा कहानीकार व पत्रकार सौरभ शर्मा निर्भय की किताब सबसे प्यारी मेरी मां के विमोचन से संबंधित तस्वीर देख सकेंगे व अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट भी पढ़ सकेंगे। हालांकि मैंने उपरोक्त प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर एक सूचनात्मक खबर हिंदी मीडियाः हलचल-हालचाल (बाईं तरफ के कालम में देखें) में भी डाल दी है। भड़ास सौरभ के उज्जवल भविष्य की कामना करता है और अपेक्षा करता है कि वो यूं ही अपनी पारखी नजरों व लेखनी और गहन संवेदना के जरिए रचनाओं की अनमोल मोती हम लोगों तक पहुंचाते रहेंगे।

जय भड़ास
यशवंत