Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

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30.7.10

आकांक्षा को जन्मदिन की बधाई....

आज आकांक्षा यादव का जन्मदिन है। आकांक्षा उन चुनिंदा रचनाधर्मियों में शामिल हैं, जो एक साथ ही पत्र-पत्रिकाओं के साथ-साथ ब्लागिंग में भी उतनी ही सक्रिय हैं. इनके चार ब्लॉग हैं- शब्द-शिखर, उत्सव के रंग, सप्तरंगी प्रेम और बाल-दुनिया। आकांक्षा यादव के जन्मदिन पर ढेरों बधाई।


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तुम जियो हजारों साल !

साल के दिन हों पचास हजार !!

जन्मदिन के अवसर पर ढेरों शुभकामनायें और आशीर्वाद !!

आपकी कलम से यूँ ही प्रखर रचनाधर्मिता निरंतर प्रवाहित होती रहे !!

20.1.09

शुक्रिया मीडियाकर्मियों और साथियों, एकजुट होकर लड़ने-जीतने के लिए

शुक्रिया दोस्तों। केंद्र सरकार जिस काले कानून को लाने वाली थी, उसे अब किसी कीमत पर नहीं लाएगी। ऐसा भरोसा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश के टीवी न्यूज चैनलों के संपादकों को एक मीटिंग में दिया। प्रधानमंत्री ने सफाई दी कि सरकार मीडिया पर लगाम लगाने की कोई कोशिश आगे भी नहीं करेगी। प्रधानमंत्री के बयान और आश्वासन के बाद टीवी न्यूज चैनलों के संपादकों और काले कानून के खिलाफ संघर्ष कर रहे पत्रकारों की अलग-अलग बैठकों में आंदोलन वापस लेने का ऐलान किया गया। भड़ास4मीडिया देश भर के मीडियाकर्मियों को इस आंदोलन में तन-मन-वचन से साथ देने के लिए तहेदिल से थैंक्यू कहता है और उम्मीद करता है कि आफत के ऐसे मौकों पर हमारी एकजुटता सदा बनी रहेगी।

इस पूरे मामले पर ज्यादा जानकारी व अन्य विश्लेषणों के लिए इन लिंक पर क्लिक कर सकते हैं---


No curb on freedom of media, says Manmohan
Govt drops proposal to gag TV channels
Prime Minister assures TV Edtiors
सेंसर की कवायद : संपादक भी खुश, पीएम भी खुश
मीडियाकर्मीयो के आत्म मंथन का वक्त आ गया हैं
गेंद फिर समाचार चैनलों के पाले में
एक प्रस्तावित कानून के खिलाफ वास्तविक आंदोलन
आओ मिलकर मीडिया की आलोचना करें

18.11.08

भड़ास के बच्चे ने कायम किया रिकार्ड, बन गया गबरू जवान

भड़ास से प्रेरित होकर पांच महीने पहले जब भड़ास4मीडिया शुरू किया था तो मुझे कतई नहीं पता था कि पांच महीनों में ही यह बच्चा कमाल करने वाला है और एकाएक किशोर होकर नौजवान बन जाएगा। पर यह करिश्मा हो चुका है। मेरी तरह आपको भी यकीन नहीं हो रहा होगा लेकिन जो आंकड़े मिले हैं उसके मुताबिक पांच महीनों में बिना किसी प्रचार अभियान के 12 लाख पेज हिट्स पाने वाला पहला हिंदी पोर्टल बन चुका है भड़ास4मीडिया। भड़ास4मीडिया को लेकर कई सारी बातें जो मन में थीं, उसे लिख डाला है। इस मौके पर दुनिया के सबसे बड़े हिंदी ब्लाग भड़ास के सदस्य साथियों और इसके पाठकों से भी अनुरोध करुंगा कि वो कामयाबी के जश्न में शामिल होने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ें और अपने विचार यहां कमेंट के रूप में रखें। इस मौके पर मैं भड़ास के उन दर्जनों साथियों को याद करना चाहूंगा जिनके शुरुआती साथ और समर्थन के चलते भड़ास यहां तक पहुंचा और इसी के कारण भड़ास4मीडिया पैदा हुआ और बढ़ा। अगर कोई नाम छूट रहा हो तो मुझे माफ करेंगे.....ये साथी लोग हैं....रवि रतलामी, अविनाश दास, डा. रुपेश श्रीवास्तव, मनीष राज, रजनीश के झा, अंकित माथुर, विकास मिश्रा, रियाज हाशमी, दिवंगत अनिल सिन्हा, डा. मांधाता सिंह, डा. सुभाष भदौरिया, हृदयेंद्र प्रताप सिंह, सचिन श्रीवास्तव, हरेप्रकाश उपाध्याय, पंडित सुरेश नीरव, गोपाल राय, रंजन श्रीवास्तव, मनीषा दीदी, विनीत उत्पल, विनीत कुमार आदि आदि.....।

कई नाम छूट गए हैं, मुझे यकीन ही नहीं वरन पूर्ण विश्वास भी है। इस मौके पर अगर हम सब मिलकर पुराने नामों को यहां याद करें, नीचे कमेंट के रूप में लिखकर तो एक बार फिर यादें ताजा हो जाएंगी। मुझे जितने नाम तुरंत याद आए, लिख दिया। अब अंकित माथुर जी से चाहूंगा कि वो जरूर पुराने लोगों को याद कर उनके नाम यहां दर्ज कराएं। उपरोक्त जो नाम दिए गए हैं उसमें से ढेर सारी साथी न सिर्फ भड़ास से दूर हो चुके हैं बल्कि उनमें से कुछ से विभिन्न वजहों से मेरी बोलचाल भी बंद है। कुछ से तो हम लोगों ने घोषित तौर पर आनलाइन जंग भी की हुई है। बावजूद इसके, उनका नाम ससम्मान लेना चाहूंगा क्योंकि किसी ने आपके साथ अगर कभी रत्ती भर भी बड़प्पन दिखाया हो तो आपका फर्ज बनता है कि उस बड़प्पन को हर उस सफलता के पड़ाव पर पहुंचने के बाद याद करिए जहां कारवां के साथ होने के नाते आ सकने का बोध रहता हो। ये अलग बात है कि कारवां चलता रहता है और उस कारवां में किसी मोड़ पर शामिल हुए लोग अपनी सीमा व सामर्थ्य के अनुसार एक हद तक ही साथ चलकर अलग राह पर चले जाते हैं।

नए लोगों में कई लोग अब भड़ास की पहचान और जान बन चुके हैं जिनका नाम यहां लेने की इसलिए कोई जरूरत नहीं है क्योंकि उनके लिखे पोस्ट हम लोग हफ्ते में जरूर एकाध बार पढ़ लेते हैं।

तो चलिए, भड़ास के बच्चे की सफलता का जश्न मनाएं...... चिकन तंदूरी के साथ....चीयर्स....मेरे जैसे तामसिक भड़ासियों के लिए और डा. रूपेश जैसे सात्विक भड़ासियों के लिए पूड़ी तरकारी और कई हंड़िया खीर।

तो लीजिए भड़ास4मीडिया की सफलता से जुड़ा आलेख पढ़िए, लिंक यह है....

http://www.bhadas4media.com/index.php/kahin/32-kahin/704-editorial

और हां, भड़ासियों की जुटान का सपना अभी तक सपना ही बना हुआ है। इसे मूर्त रूप देने के लिए योजना कई बार बनाई गई लेकिन आर्थिक तंगी आड़े आती रही। लेकिन दुख भरे दिन बीते रे भइया....के अंदाज में जल्द ही जरूर हम लोग मिलकर भड़ासी कोरस गाने के लिए एक आयोजन दिल्ली में करेंगे। फिलहाल तो आप सभी के साथ खुशी शेयर करके खुश हो रहा हूं.....।

जय भड़ास
यशवंत


(एक अपील मैं आप लोगों से करना चाहूंगा कि आप लोग अपने अपने ब्लागों पर भड़ास4मीडिया का विजुअल लिंक डाल दें तो इससे भड़ास4मीडिया को काफी प्रोत्साहन मिलेगा। इसके लिए उपर बाईं तरफ लिखे Media ka Baap के लिंक के ठीक नीचे लगे भड़ास4मीडिया के लोगो की पिक्चर को अपने डेस्कटाप पर सेव एज कर लें और उसे अपने ब्लाग के लेआउट में जाकर न्यू गैजेट्स में पिक्चर लगाने के आप्शन में लोड कर उसमें भड़ास4मीडिया के यूआरएल http://www.bhadas4media.com/ का लिंक दे दें। अगर इस काम में किसी को कोई दिक्कत आती है तो वो मुझसे 09999330099 पर फोन करके संपर्क कर सकता है। आपका इतना सहयोग भड़ास4मीडिया के लिए एक बड़ा सपोर्ट होगा। आपका ब्लाग चाहे छोटा हो या बड़ा, रोज अपडेट करतें हों या कभी-कभार, यह महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण है आपके अपने ब्लाग के एक कोने पर भड़ास4मीडिया का साधिकार मौजूद होना। इससे जाहिर होगा कि आपके दिल में रहने वाला भड़ास4मीडिया वहां से निकल कर आपके ब्लाग पर भी प्रकट हो चुका है।)

14.8.08

बधाई हो बधाई

सभी सरकारी कर्मचारी भाइयों को नए वेतन मुबारक हो ।

8.8.08

जन्म दिवस कि बधाई

आज श्री श्री १०८ महराज धिराज महा भडासी यशवंत सिंह का जन्मदिवस है। सो तमाम बंधुवर सुचना सिर्फ़ इसलिए कि आप बधाई संदेश दे सकते हैं, देखिये कहीं ट्रेन ना छुट जाए।

जय जय यसवंत

जय जय भड़ास

14.6.08

भड़ास जिंदाबाद..जिंदाबाद।

आत्मीय बंधु यशवंतजी,
गूगल ने भड़ास की प्रासंगिकता को रेखांकित किया,
एतदर्थ आपको अनेकानेक बधाई
भड़ासियों की मेहनत और लगन
आखिर खूब रंग लाई
आलोचकों की उड़ा दी हवाई
और इस मुबारक मौके पर आपने
डॉ.रूपेश की हसीन तस्वीर भी दिखाई
खुशी में सारे भड़ासी हवा-हवाई
कब कर रहे हैं सोमरस की सप्लाई
थोड़ा नमकीन, थोड़ी-सी मिठाई
उत्सव की डेट क्यों गई छिपाई
बिड़ू ये बात अपुन को समझ नहीं आई
खैर.. जश्ने-मुबारकां पाइंदाबाद
भड़ास जिंदाबाद..जिंदाबाद।
पं. सुरेश नीरव
मो.९८१०२४३९६६

10.6.08

तरक्की

नागेन्द्र जी को संपादक और केय्दी जी को समाचार संपादक होने की आधिकारिक बधाई।

13.5.08

भाषा में सबसे पहले गाली आई, जो साफ़ तौर पर एक स्‍त्री को दी गई थी।






मातील्दा
...............................हमारा घर, जिसके दरो-दीवार हवा से बने हैं, जिसकी चाभी कहीं खो गई है...




एक घर, जो हवा में तैरता है
जब वो घर था, तब दुनिया में कुछ नहीं था। न सड़कें थीं, न कारख़ाने, न चौराहे थे, न लोग। दुनिया में कोई हिमालय नहीं था, कोई समंदर भी नहीं. कोई आग नहीं थी, कोई पानी नहीं. तब कोई भाषा भी नहीं थी. सिर्फ़ दो लोग थे। उन दोनों ने रहने के लिए एक घर बनाया था, जिसकी दीवार हवा की थी। छत हवा की थी। फ़र्श भी हवा की। हवा की दीवार में से थोड़ी-सी हवा निकाल कर उन दोनों ने हवा की एक खिड़की बना दी थी। इसी तरह हवा का एक दरवाज़ा। उन दोनों के पास कोई भाषा भी नहीं थी। गूं-गूं करती कोई आवाज़ थी। वह आवाज़ भी एक घर ही थी, जिसमें वे दोनों वैसे ही रहते थे, जैसे बेदरो-दीवार के उस हवाघर में. वहां कभी घुटन नहीं होती थी. हर वक़्त हवा आती थी. जाती भी थी.एक दिन भाषा बन गई। भाषा में सबसे पहले प्रार्थना ईजाद नहीं हुई थी। यह हमारी ग़लतफ़हमी है। भाषा में सबसे पहले नफ़रत और गाली ईजाद हुई। किसी विचारक ने कहा था कि भाषा में सबसे पहले प्रेम के लिए शब्‍द खोजा गया था. ग़लत था वह विचारक. प्रेम को भाषा की ज़रूरत थी ही नहीं.तो भाषा में सबसे पहले गाली आई, जो साफ़ तौर पर एक स्‍त्री को दी गई थी। फिर दुनिया फलने-फूलने लगी। फिर समंदर बना। फिर हिमालय. फिर दर्रे. घाटियां. झाडियां और फूल. कांटे भी साथ-साथ ही बने. सड़कें बनीं. इमारतें भी. उनसे पहले थोड़ी सी आग भी बन गई थी. वह दो पत्‍थरों के बीच रहती थी और तभी दिखती थी, जब पत्‍थर आपस में लड़ पड़ें. फिर बहुत सारे लोग भी बन गए। वे पत्‍थरों की तरह कई बार लड़ पड़ते थे और आग पैदा करते थे।वे दोनों चुप अपने हवाघर में रहते थे। किसी समय लोग आपस में पत्‍थरों की लड़ पड़े, जिससे आग पैदा हो गई। चिंगारियां उस हवाघर पर पड़ीं और वह जलने लगा। हवा की दीवार, हवा की खिड़की, हवा की छत, हवा की फ़र्श, सब जलने लगे। हवा का वह घर जल गया। हवा में ही बचा हुआ है अब। वे दोनों उसमें रहते थे, अब बेघर होकर भटकते हैं। न वह घर किसी को दिखता है, न उसमें रहने वाले वे दोनों। कहते हैं, हवा हो जाने का मतलब कभी दिखाई न पड़ना है।पर मुझे अब भी अपने आसपास ही दिखता है हवा का वह घर। हवा जैसे वो दोनों रहने वाले। आंखों पर पानी का परदा चढ़ाकर देखें, तो शायद आपको भी दिख जाएंगे वे दोनों. और हवा में तैरता उनका एक घर. दिख रहे हैं न?
Posted by शायदा at
6:42 PM
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2 comments:
आलोक said...
तो आ ही गईं आप चिट्ठों की दुनिया में! कोई समस्या हो तो लिखिएगा।शुक्रिया,आलोक
12 May, 2008 8:46 AM
सचिन लुधियानवी said...
बढिया. इस हवाघर का कोई मुहूर्त नहीं रहा होगा. ऐसा किसी विचारक ने कभी नहीं कहा. भारी सांस के साथ खींची गई इस हवादार पहली पोस्ट का इंतजार काफी समय से था. उम्मीद है जुबानदाराजी का वही अंदाज होगा जो वक्त वेवक्त आपके रंगीन दांतों से खिलखिलाहट की शक्ल में नुमायां होता है.. मेरी शुभकामनाएं ब्लॉगिंग में औपचारिक प्रवेश के लिए
12 May, 2008 7:41 PM



About Me



shayda
Who cares if I am sitting here alone/ No one and I don't give a damn/ Because I am what I am/ I am alone,I am no one/ Just an eccentric minority/ by himself on a bench/ Doing nothing with/ everything on my mind/ And still the world around/ me continues to go by/ While I linger in this meditation/ Feeling as though I would/ lose my mind at any moment/ Only my solitude is here by my side/ Only my solitude is helping me to cope with myself। Nasreen



shayda
लिंग: स्त्री
उद्योग: प्रकाशन
व्यवसाय: media
स्थान: chandigarh : UT : भारत

8.2.08

परवेज़ सागर जी को मिला बेस्ट क्राइम रिर्पोटर ऑफ दि ईयर अवार्ड़

आप सभी जानते हैं कि हमारे परवेज़ सागर जी को मीड़िया जगत के प्रतिष्ठित नेशनल मीड़िया एक्सीलेन्स अवार्ड़ के लिये नामित किया गया था। आपको जानकर खुशी होगी कि गुरुवार की शाम फिक्की ऑडीटोरिमय मे आयोजित दूसरे मीड़िया एक्सीलेन्स अवार्ड़ फंक्शन मे परवेज़ सागर सर को क्राइम श्रेणी मे बेस्ट रिर्पोटर ऑफ दि ईयर अवार्ड़ से सम्मानित किया गया। ये पुरुस्कार उन्हे केन्द्रीय मंत्री मंगत राम सिंघल और झारखण्ड़ के मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की उपस्थिति मे राजस्थान के गृहमंत्री गुलाब चन्द कटियार ने प्रदान किया। इस श्रेणी मे देशभर के 39 टीवी पत्रकारों को नामित किया गया था। ये अवार्ड़ परवेज़ सागर सर को 2007 मे आज तक पर दिखाई गयी ज़हरीली सब्ज़ियों वाली सनसनीखेज़ खंबर के लिये दिया गया। इस ख़बर के प्रसारण के बाद दिल्ली सरकार ने कई लोगों के खिलाफ कार्यवाही की थी। गौरतलब है कि इसी ख़बर के लिये परवेज़ सर को वर्ष 2007 मे ही ईएम बेस्ट रिर्पोटर ऑफ दि ईयर अवार्ड़ से सम्मानित किया जा चुका है। दस वर्षों से पत्रकारिता कर रहे परवेज़ सागर जी इससे पहले भी अपनी कई ख़बरों के लिये सुर्खियों मे बने रहें। जिसमें ताज कॉरिड़ोर, आगरा-अलीगढ के दंगे, मथुरा मे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के रिश्तेदार की ट्रेन से फेंककर हत्या और उत्तर प्रदेश के लखनऊ विकास प्राधिकरण का भूमि आवन्टन घोटाला जैसी कई बड़ी ख़बरें शामिल है। उनकी इस उपलब्धि पर उनके सिखाये गये छात्र ही नही बल्कि उनके साथ काम कर चुके और काम कर रहे सभी लोगों मे गौरव की अनुभूति है। देशभर के सभी पत्रकारों और रंगकर्मीयों की और से परवेज़ सर को हार्दिक बधाई....... हम सभी उनके उज्जवल भविष्य की कामना करतें है।

6.2.08

दिल को छू गयी कविता

हरेप्रकाश उपाध्याय जी, बहुत दिनों बाद कोई कविता इतनी प्यारी लगी कि दिल से कहने को मन हो रहा है कि वाकई, आपने जो लिखा है वो सौ फीसदी सच है। बुरे लोग ही हमेशा काम आए। आपको मेरी तरफ से ढेर सारी बधाइयां। भड़ास तो धन्यवाद, जो इतनी शानदार कविता यहां लगा रखी है, ये वाकई सर्वश्रेष्ठ कविता है।

विनोद सिंह

29.1.08

मैंने शादी कर ली है

सभी पत्रकार भाइयों को अबरार अहमद का प्रणाम,
बडे हर्ष के साथ आप सबको मैं यह बताना चाहता हूँ ही अब मैं अकेले नही रहा। अब मेरे भी पैरों मे बेडियां पड़ गई हैं। भाइयों मैंने शादी कर ली है और आप सबके आशीर्वाद का इच्छुक हूँ।
अबरार अहमद
दैनिक भास्कर
ludhiana
http://hamarelafz.blogspot.com

10.12.07

बधाई गौरव वाकई गौरव है


स्‍टार न्‍यूज के विशेष संवाददाता गौरव सावंत ने आकाश से छह छलांग लगाकर भारतीय नौसेना के ‘आईएनएस डेगा, विशाखापत्तनम’ का “विंग्स” प्राप्‍त किया है। गौरव इकलौते भारतीय पत्रकार हैं जिन्हें विंग्स प्रदान किए गए हैं। इसके लिए पूरी पत्रकार बिरादरी की ओर से हार्दिक बधाई। चार दिन में यह उपलब्धि हासिल करने के लिए गौरव का नाम ‘लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में एंट्री के लिए भेजा गया है।
डिफेंस से जुडी खबरों में विशेष दखल रखने वाले गौरव को स्काई डाइविंग का प्रशिक्षण इंडियन नेवी स्काई डाइविंग टीम के प्रमुख इन्सट्रक्टर लेफ्टीनेंट कमांडर एन. राजेश ने दिया। कमांडर राजेश आकाश से 1700 छलांग लगा चुके हैं।
वैसे जोश गौरवजी के खून में ही उनके पिता चितरंजन सावंत भारतीय सेना में ब्रिगेडियर पद से रिटायर हुए हैं। उनकी पत्‍नी आदिति अरोडा सावंत स्‍टार न्‍यूज में ही लाइफ स्‍टाइल कारस्‍पोंडेंट हैं।
गौरवजी करगिल के दौरान अपने ए‍क्‍सपीरियंस पर एक किताब डेटलाइन करगिल भी लिख चुके हैं।
पत्रकार बिरादरी की ओर से इस बहुमुखी पत्रकार को कीर्तिमान बनाने पर हार्दिक बधाई