9.12.13
त्रस्त जनता तख्ता पलट देती है, यही जनतंत्र है!
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Nitin Sabrangi
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Labels: अरविंद केजरीवाल, आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, चुनाव, जनता, महंगाई, वोट
22.8.12
महंगाई से खुश मंत्री, जनता बेहाल
देश की जनता भले ही महंगाई से त्रस्त हो। आम आदमी की कमर भले ही टूट रही हो, लेकिन ऐसे में कोई मंत्री महंगाई से खुश हो, तो आश्चर्य ही होता है। केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने यह कहकर सभी को चौंका दिया कि महंगाई बढ़ेगी तो किसानों का फायदा होगा। इसलिए वह बढ़ती महंगाई से खुश है। पता नहीं ही चला कि मंत्री का यह कोन सा गणित था। प्रधानमंत्री महंगाई पर चिंता जाहिर करते हैं उसे चुनौती भी बताते हैं ओर उन्हीं का मंत्री उनकी चिंता की हवा निकाल देता है। जमीनी हकीकत यह है कि महंगाई का असल फायदा दलालों, बिचौलियों को होता है। कृषि प्रधान देश में किसान ही आत्महत्या करते हों, तो दुर्भाग्य को समझा जा सकता है। महंगाई, भ्रष्टाचार व घोटालों से जनता में पहले ही आक्रोश है। इस तरह के बयान जनता के जख्मों पर नमक डालने जैसा है। ज्यादा पुरानी बात नहीं है जब हरविंदर नामक एक युवक ने कृषि मंत्री शरद पंवार को चाटा जड़ दिया था। कानूनी रूप से यह अपराध था जिसके लिये उसे जेल भी जाना पड़ा, लेकिन उसके आक्रोश को झलकाता था। वह महंगाई से परेशान था। पंवार महंगाई पर अपने बयानों को लेकर चर्चित रहे थे। कभी कहते थे कि वह कोई ज्योतिष नहीं कि बताये कब घटेगी महंगाई, कभी कहते थे कि चीनी या दूध के दाम बढेंगे। उनके बयान के बाद ही रेट बढ़ जाते थे। जरूरी हो जाता है कि जनता के आक्रोश को समझना चाहिए। क्योंकि जनता की मार कुछ-कुछ वैसी ही है जैसे खुदा की बेआवाज लाठी।
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Nitin Sabrangi
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Labels: चांटा, जनता, बयान, बेनी प्रसाद, महंगाई, शरद पंवार, सरकार
25.1.11
ये डायन भी डरती है !
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Atul Shrivastava
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Labels: महंगाई
11.7.08
उनको अपने भले की चिन्ता है, मुल्क की क्या करें भलाई वे
ग़ज़लदेश की दे रहे दुहाई वे.
बांट खायेंगे फिर मलाई वे.
लोटे बिन पेंदी के लुढ़क करके,
दे रहे देखो अब सफाई वे.
गांड फाड़े है सब की मँहगाई,
बुश से करने चले सगाई वे.
चोर-चोरों में मौसिया रिश्ता,
हैं तो आपस में भाई भाई वे.
उनको अपने भले की चिन्ता है,
मुल्क की क्या करे भलाई वे.
भाँड निकले हैं फिर तमाशे को,
कर रहे देखो जगहँसाई वे .
हमने जिन पे था एतबार किया,
आज करते हैं बेवफ़ाई वे.
रोज़ ताज़ा वो ज़ख्म देते हैं,
हँस के बांटे हैं फिर दवाई वे।
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subhash Bhadauria
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Labels: गज़ल, देश की हालत, महंगाई, विरोध, सियासत
4.6.08
बाप रे बाप
पेट्रोल-5, डीजल-3, एलपीजी-1, रसोईं गैस-50 रुपए महंगी
दिन-ब-दिन बढ़ रही महंगाई की मार, ऊपर से जब सरकार ने पेट्रोल की कीमत 5 रु, डीजली की 3 रु।, एलपीजी की एक तथा रसोई गैस की 50 रुपए बढ़ दी तो सभी लोगों के चेहरे से हवाईयां उड़ने लगी। ये नई कीमतें आज मध्यरात्रि से लागू हो जाएंगी। हालांकि गांववासियों को कुछ राहत मिली है। मिट्टी के तेल के कीमत में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
महंगाई दर वैसे ही आसमान छू रही है, उस पर पेट्रोल-डीजल के दामों में बढोतरी से गरीब तबके के साथ-साथ मिडिलक्लास लोग भी पिसेंगे। खासतौर से रसोईं गैस के दामों में अचानक की गई 50 रुपए की बढोतरी ने घरेलू महिलाओं के खर्च बढ़ा दिए हैं।
सरकार ने इनके दामों में बढोतरी करके खुद के पैर में कुल्हाड़ी मार ली है। इसका फायदा अगले लोकसभा चुनाव में एनडीए उठा सकती है।
इस खबर पर आप भड़ासियों की राय है।



