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22.4.11

नित नये उठते विवाद


नित नये उठते विवाद
दिनांक - 22-4-2011
लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिये गठित संयुक्त समिति मे नित नये  विवाद सामने आने के बाद से शांति भूषण के इस्तीफे की मांग उठने लगी है। पहले तो अनना हजारे की संपत्ति की जांच हुई दो-चार दिनों तक उस पर वाद विवाद चलता रहा, और अब शुरु हुआ विवाद एक तरफ कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने शांति भूषण और उनके पुत्र जयंत को आबंटित फ़ार्म हाउसों पर सवाल उठाए हैं। इन दलों के नेताओ ने कहा कि शांति भूषण को संयुक्त समिति से हट जाना चाहिए। इधर जाने-माने वकील राम जेठमलानी ने मंगलवार को कथित फ़र्जी सीडी मामले में वरिष्ठ वकील शांति भूषण के समर्थन मे यह कहा कि वह बहुत सम्मानित व्यक्ति हैं। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और सपा के पूर्व नेता के साथ कथित बातचीत की सीडी सामने आने के बाद से लोकपाल विधेयक का मसौदा बनाने वाली संयुक्त समिति के सह-अध्यक्ष शांति भूषण विवादों में घिरते चले जा रहें हैं। पहले सीडी को फर्जी बताया गया परन्तु सीडी की जांच होने से और उसकी रिपोर्ट आ जाने के बाद इस बात का खुलासा हुआ कि सीडी से कोई छेड़खानी नही कि गई है, इसलिए यह विल्कुल सही है। इससे हमारे देश के जन मानस के मध्य क्या संदेश पहुंचा। यह तो वही कहावत हुई कि खुद बिल्ली को मलाई का ठेका दिया जा रहा था। यह एक अलग मुद्दा है कि आज से पहले पूर्व मंत्री जी के संपत्ति को न तो कभी खंगाला गया और नही उनके संपत्ति पर हमारे किसी भी नेता की नजर पड़ी वल्कि आज उनके लोकपाल विधेयक का मसौदे के लिये गठित संयुक्त समिति के सहअध्यक्ष पद पर पर आते ही इस तरह के सवालात क्यों उठे एवं उठये जा रहे हैं। साधारणतः इसके तिन मुख्य कारण ही हो सकते हैं। पहला तो जिन भ्रष्टाचारी लोगों के बचाने का उन्होने काम किए उन लोगों को आज यह लगने लगा कि तब शांति भूषण हमारे साथ थे आज खतरे को भांपते हुए पाला बदल क्यों कर लिया। दूसरा यह है कि इस पद पर रहते हुए यदि लोक पाल विधेयक पास हो जाता है तो उन्ही लोगों को आसानी से दोवारा बैकमेल कर निचोड़ा जा सकता है। तिसरी बजह यह है कि इन भ्रष्टाचारीयो को बचा कर बाद मे उन्हे आत्म ग्लानी हुई, और इस पद का भार संभाल कर खुद उसका प्रायश्चित करना चाहते हो। खैर सत्य तो बही जाने लेकिन सारे तथ्यों पर नजर डाला जाए तो एक बात बहुत आसानी से समझ मे आता है कि हमारे देश के नेता लोग चाहते हैं कि हम कुछ भी करें कैसे भी रुपए जोड़े बनाएं इस बात से भारतीय जनता का कोई भी सरोकार नही होना चाहिए। हमारे अलावा कोई दूसरा भ्रष्टाचारी से घन नही कमा सकता है, और यदि कमा भी लिया हो तो हमारे साथ रहों और विल्कुल हमारी तरह चुपृ-चाप रहो। हम जो भी करें बह सब सही है, और सही हो भी क्यों ना जनता ने ही हमे चुन कर यांहा तक पहुंचाया है। इसलिए हमारे द्वारा किया गए हर काम की तारीफ मे हमारा जय-जय कार करो।......?.      

2 comments:

vishwajeetsingh said...

ड्राफ्टिंग समिति में शामिल सदस्यों द्वारा अभी तक अपनी कुल सम्पत्ति की सार्वजनिक घोषणा न करना शक पैदा करता हैं । ज्यादा अच्छा हो कि सदस्य पहले अपनी सम्पत्ति की घोषणा करें और उसके बाद सम्मान पूर्वक पूर्वक भ्रष्टाचार मुक्त भारत का आन्दोलन चलाये ।
आन्दोलन की सफलता के लिए ड्राफ्टिंग समिति का दायरा बढाकर सुबह्मण्यम स्वामी , डॉ. अब्दुल कलाम , किरण बेदी और कर्णसिंह जैसे सच्चे राष्ट्रभक्त समाज सेवियों को भी इसमें लिया जाना चाहिए ।
www.vishwajeetsingh1008.blogspot.com

तीसरी आंख said...

इस पूरे प्रकरण में समझदार लोगों में बहस कुछ ज्यादा ही हो रही है, निष्कर्ष तक पहुंचने की बजाय हर पक्ष अपने आपको ज्याा समझदार साबित करने की कोशिश कर रहा है