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28.12.15

इस प्रधानी के चुनाव से गांव में पिअक्कड़ों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है

-प्रवीण कुमार सिंह-

गावों जवार के जितने हरामखोर थे, 
प्रधान बन के आ गये अगली कतार में...! 

ये पक्तियॉं अदम गोंडवी की है। यह सुनने में भले ही ठीक न लगे। लेकिन ये खरा सच है?

उ. प्र. में पंचायत का चुनाव चल रहा है। जिसमें  खूब शह मात और सियासी दांव-पेच का खेल चल रहा है। जो पहले दश्मन थे वे दोस्त बन गये हैं। और दोस्त दुष्मन बन गये हैं। चुनाव नजदीक आने के साथ ही मुर्गा और दारू का भोज तेज होता जा है। षराब की बिक्री इतनी बढ़ गयी है कि अबकारी विभाग की सप्लाई कम पड़ गई है। ये तो न. 1 की दारू है। न. 2 की दारू कचिया शराब यहां के देवारा में प्रतिदिन बन रही है और खत्म हो जा रही है। चुनाव के साथ ही  शराब पी कर मरने की खबर आ रही है। लेकिन पीने वालो को नो टेंशन।



जनता के हर दर्द को छूमंतर करने के लिए मसीहाओं का तांता लगा हुआ है। जिसको जो चाहिए बिंदास बताओं- किसी ने ये कहा, नहीं कि हैंडपम्प लग रहा हैं.. खराब हो गया है! तुरन्त नया हैंडपम्प लग गया। किसी ने कहा कि घर पलस्तर करना है! तुरत-फुरत सीमेंट, गिट्टी-बालू सब सामान आ गया।

बिल्कुल आलादीन की चिराग की तरह, जो भी चाहिए आका... हाजिर है। बिन मांगें ही कोई पाकेट में 1 सौ, 5 सौ, 1 हजार का नोट हॅंसतें हुए डाल देता है। चुनाव के एक-दो दिन पूर्व की रात को साड़ी भी बटेगी। जिसका लाभार्थी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

इस बार के चुनाव में वितरण का श्रीगणेश शुभ दीपावली से हुआ है। भावी प्रधानों ने जनता को खूब मिठाई खिलाकर एक दूसरे को बधाई दिया। इसकेे पूर्व ललर छट्ट में भी कपड़ा, फल आदि का वितरण किया जा चुका है। एक छोटा सा गॉंव है। जहां लगभग 13 सौ मतदाता हैं। वहां के निवर्तमान प्रधान और वर्तमान प्रधान प्रत्याशी 1 वोट का 5 हजार रूपये दे रहे हैं।  जो मतदाता रोजी-रोटी के लिए दिल्ली, बंबई, गुजरात आदि बाहर है उन्हें आदर के साथ किराया-भाड़ा देकर बुलाया जा है। जिस शहर में ज्यादा मतदाता है। और टेªªन का टिकट नहीं मिल पा रहा है। तो उनको रिजर्व बस से बुलाया जा रहा है। ये सब बहुत आश्चर्यजनक नहीं है। काहें कि बीते लोकसभा चुनाव में ऐसा हो चुका है।  

हमारे देश में अपने से बड़ों का अनुसरण करने की परम्परा है। पूवर्ती लोकसभा चुनाव में जो-जो शुभ कार्य किया गया। वो सब कुछ करने की कोशिश की जा रही है। मैसेज, फेसबुक का भी प्रयोग किया जा रहा है।  जो समझतें है कि हिन्दुस्तान का गॉंव 50-60 का ‘मदर इण्डिया’ बराबर गॉंव है। वैसा नहीं है। क्योंकि अपुन का प्यारा भारत इण्डिया बन गया है। दिल्ली शिकागो बन गया.. काषी क्योटो बन गया तो गॉंव भी ‘विलेज’ बन गया है! जहां गॉंव-गॉंव में ‘शीतल बीयर’ की दुकान चार चॉंद लगा रही है।

मेरे आप के जमाने में बच्चें पैसा बचा के सिनेमा देखने जाते थे। अब 20 रूपया के सीडी में 4 फिल्म देखने को मिल जाता है। नहीं 10 रू. में एचडी डाउनलोडेड फिल्म गॉंव-गॉंव बिक रहा है। जिसे लैपटाप या मोबाईल पर मजे से देख सकते है। पैसे बच गये हैं। जिसका शीतल बीयर पीके गर्मी में कूल-कूल और ठंडी में... फुल इॅंज्वाय।    

छोड़िय, बात प्रधानी के चुनाव की करें। मसला ये है भाई कोई ये नहीं बोंल रहा है कि ये बुरा हो रहा है। बल्कि ये कहा जा रहा है कि ‘इसके बिना’ ...चुनाव संभव नहीं है? बापू ने ‘‘ग्राम स्वराज’’ से देश की तरक्की और खुशहाली का सपना देखा था। चलियें उनकी क्या खता है। वैसे भी हम उनके किस सपने के प्रति  प्रतिबद्ध हैं। आज तो उनके कातिलों को पूजा जा रहा है।

कुलमिलाकर जो इतना पैसा खर्च कर रहा है। वो इसकी पूर्ति भी करेगा। जानते ही है कि पूर्ति... कैसे होती है? इस चुनाव से पिअक्कड़ों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है। चुनाव के बाद तो कोई पिलाने वाला मिलेगा नहीं, अपना ही  पीना पड़ेगा। जिससे अबकारी विभाग का फायदा होगा। राजस्व में वृद्धि होगी।  रही बात जीतनें वाले के काम-काज की तो गांवों में कौन सा बड़ा काम शेष रह गया है। इनका काम होता है नाली, खड़ंजा आदि; इसी को तोड़-फोड़ कर बनाते रहते हैं। अब ग्रामसभा की ही क्यों बुराई करें माननीय सांसद और विधायक के भी विकास कार्य कंचित ही दिखाई देते है।

जो इस चुनाव को देखकर दुःखी होगा या चिन्ता करेगा। वो निरा बेवकूफ समझा जायेगा। ..पर क्या करें भाई दिल मानता नहीं।        

बापू का सपना... विलेज गॉंव अपना...

प्रवीण कुमार सिंह
ई-20, (प्रथम तल)
जवाहर पार्क, लक्ष्मी नगर
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फोनः 9473881407
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