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7.8.15

"इश्क का रंग सफेद'' के सितारे नए चित्र

"इश्क का रंग सफेद'' के सितारे नए चित्र

TV actor Mishal Raheja, best known for his roles in shows like Laagi Tujhse Lagan, Love Story and Maharakshak Aryan, will next be seen in the love saga Ishq Ka Rang Safed as Viplav. He says the role "perfectly syncs" into the type of comeback he wanted on the small screen.

"I wanted to make a comeback to the small screen with a strong character with a difference. Viplab fit in perfectly and was in sync with what I had in mind. Besides, in a female-centric industry, it is rare that you bag a character which has much do in a soap," Mishal said in a statement.
"Ishq Ka Rang Safed gives me an opportunity to do a lot with my character since it is a show with several layers, colours and transitions," he added.
Set against the backdrop of culturally rich Banaras, Ishq Ka Rang Safed, which will be aired on Colors starting August 10, will focus on the story of a young widow Dhani and her love story with Viplav.
Eisha Singh, who is making her acting debut with the show, will be seen playing the role of Dhani. The actress says she is "lucky" to have bagged this role.
"At the threshold of my journey as an actor, essaying the role of the young widow Dhani, will add great value to my experience. While playing a bubbly girl-next door appeals to every young actor, I feel lucky to have landed a challenging role such as Dhani," Eisha said.
"Eminent Bollywood actresses such as Vidya Balan and Preity Zinta have played roles which have been in contrast to their age, but these roles have only enhanced their performance as an actor. I too am certain that 'Ishq Ka Rang Safed' will groom me in the right direction as an actor," she added.
Apart from Mishal and Eisha, the show will also star Arun Bakshi, Nishikant Dixit and Vidya Sinha.

6.8.15

"इश्क का रंग सफेद'' के लीड रोल में नज़र आएंगी ईशा


"इश्क का रंग सफेद'' के लीड रोल में नज़र आएंगी ईशा 


     इंतज़ार की घड़िया खत्म होने वाली हैं, हमारी ईशा 10 अगस्त से कलर्स के स्क्रीन पर छाने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसके प्रसारण का समय शाम के 6 बज कर 30 मिनट रखा गया है। "इश्क का रंग सफेद'' अमर प्रेम की एक अनूठी दास्तान है। इसमें ईशा एक विधवा का मुश्किल किरदार निभा रही है। पूरी कहानी ईशा के इर्द-गिर्द घूमती है। सचमुच स्टोरी लाइन बहुत पावरफुल है। इंडस्ट्री के लोग ईशा की एक्टिंग की बहुत तारीफ कर रहे है। मैंने कुछ रशेज देखे हैं। क्या गज़ब की नेचुरल एक्टिंग की है ईशा ने। आजकल पूरे भारत में इस सीरियल और ईशा के रोल की चर्चा है। रोज किसी न किसी पेपर में इनका इंटरव्यू छपता है। 

       
  2014 में मिस एमपी जीत चुकीं ईशा की मां रेखा सिंह ईशा फाउंडेशन प्ले स्कूल चलाती हैं और पापा पंकज सिंह चौहान बिल्डर और कोलोनाइज़र हैं। ईशा और उनका पूरा परिवार स्वस्थ और सुंदर बने रहने के लिए फ्लेक्स ऑयल का सेवन करता है। ईशा को अलसी मैया का पूरा आशीर्वाद मिला है और वह जल्दी ही फिल्म इंडस्ट्री की माधुरी दीक्षित बनने वाली है। रेखा जी ने बताया कि ईशा के लिए धानी का सीरियस रोल निभाना थोड़ा मुश्किल था, क्योंकि वो अभी सिर्फ 17 साल की हैं और 11वीं की स्टूडेंट हैं। इस रोल को पाने के लिए ईशा ने काफी मेहनत की है। इस रोल के लिए पहला ऑडिशन जनवरी में हुआ था। इसके बाद ऑडिशन के पांच और राउंड हुए। ऑडिशन में ईशा का अभिनय कमाल का था। पूरी टीम ईशा की एक्टिंग की कायल हो गई। उसके बाद ईशा को इस रोल के लिए फाइनल किया गया।


    
     ईशा जो जॉन अब्राहम प्रोडक्शन की फिल्म "17 को शादी है' में सपोर्टिंग किरदार निभा चुकी हैं। इस फिल्म में भी ईशा के अभिनय की बहुत तारीफ हुई। उनके छोटे भाई रुद्राक्ष ने भी फिल्म "17 को शादी है'' में काम किया है और फिलहाल भोपाल में ही एक्टिंग सीख रहे हैं। यह फिल्म कुछ ही महीनों में रिलीज़ होने वाली है। 

Staff atyachar reliance trends dwarka

Me rahul kumar me no ek sal se reliance trends dwarka sector 10 me job kar raha tha to me ek mahine me koi weekly of nahi liya tha or mujhe Sunday me apni sister ko doctor ke leke jana tha to mene apne senior ko bata diya tha ki sir me Sunday ko 5    6 baje tak aaunga me let ho or mene sare sath baje phone kiya ki sir me aa raha hu to senior ne bola ab mat aao sandeep dm sir gusha honge tum subha hi aana or me agle din gaya or vaha koi bat nahi hui fir me jab agle din job ke liye ja raha tha to mere manager ka phone aaya ki tum kaha ho rahul char panch din se tum stor nahi ja rahe ho


BCCI के Joint Secretary को 1 सामान्य सदस्य की बधाई

व्यक्ति विशेष : श्री अमिताभ चौधरी

अमिताभ चौधरी होना आसान नहीं है । उसके लिए एक बड़ा दिल चाहिए, खिला हुआ चेहरा, चिर परिचित मुस्कान, कठोर प्रशासक, त्वरित निर्णयक्षमता, विषम परिस्थितियों में भी बिना तनाव के सही राह चुनना, ये अमिताभ चौधरी होने की जरूरी शर्त है । bcci का संयुक्त सचिव निर्वाचित होकर हम सबके हरदिल अज़ीज अमिताभ सर आपने झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन के 80 वर्षों के सफ़र में इतिहास रच दिया है । bcci में हमारा राज्य संघ आज आपके नेतृत्व में जिस प्रभावकारी भूमिका में है, ऐसा विगत वर्षों में कभी भी नहीं रहा है ।आपको झारखंड के सर्वाधिक पिछड़े जिलों में से एक लातेहार के इस सदस्य की हार्दिक बधाई । आपकी इस उपलब्धि से JSCA का प्रत्येक सदस्य अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहा है ।

तारिक खोसा ने दिखाया नया रास्ता

-डॉ. वेदप्रताप वैदिक-
पाकिस्तान के संघीय जांच ब्यूरो के पूर्व महानिदेशक (2009) तारिक खोसा ने पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ में एक लेख लिखकर तहलका मचा दिया है। उन्हें मुंबई में हुए आतंकवादी हमले की जांच का काम सौंपा गया था। उनका कहना है कि मुंबई-हमले की सारी योजना कराची में बनी थी। उसे किसने और कैसे अंजाम दिया, उसके लिए पैसा और हथियार कहां से आए, मुंबई तक बोट कैसे पहुंचा, यह सब अच्छी तरह पता चल गया था। उन्होंने अपने लेख में सात तर्क दिए हैं, जिनके आधार पर उक्त बात सही सिद्ध की गई है। उन्होंने यह भी कहा है कि पाकिस्तान को अपनी गल्ती स्वीकार करनी चाहिए और संकल्प करना चाहिए कि उसकी ज़मीन से इस तरह की आतंकवादी गतिविधियां बिल्कुल बंद हो जाएं। उन्होंने अपने लेख में यह भी लिख दिया है कि समझौता एक्सप्रेस के अपराधियों और बलूच बगावत के बारे में भी भारत अपनी भूमिका को स्पष्ट करे।

राधे मां अपने भक्तों को आई लव यू कहती है

नई दिल्ली। राधे मां पर दहेज उत्पीड़न का आरोप लगने के बाद एक महिला वकील ने अश्लील हरकतें करने का आरोप लगाया है। एक न्यूज चैनल से की गई बातचीत में मुंबई की वकील फाल्गुनी ब्रह्मभट्ट ने कहा है कि राधे मां भवन में होने वाले कार्यक्रमों में अश्लीलता परोसी जा रही है। उल्लेखनीय है कि राधे मां भवन एमएम गुप्ता परिवार का है, इसी परिवार की बहू ने राधे मां और गुप्ता परिवार पर दहेज के लिए परेशान करने की रिपोर्ट लिखाई थी।

सुभाष चंद्रा जी, यदि ऐसे लोग इस चैनल को चलायेंगे तो चैनल राम भरोसे रहेगा

सुभाष चंद्रा जी आपको चैनल पर देखा और आपकी बात सुनी तो लगा आपकी पहल अच्छी है. भ्रष्ट पत्रकारों पर अंकुश और मीडिया संस्थानों पर कार्यवाही होनी चाहिए. लेकिन हम दुनिया को सुधारने की बात कह रहें हैं, पहले आप अपना घर में तो देखो. एक नहीं तीन विभीषण हैं आपकी लंका में. पहले उन्हें निकालें. सफाई घर में करो तो बेहतर है. एक निवेदन है.

जन कवि धूमिल के गाँव खेवली में महिलाओं के लिए खुला व्यावसायिक केन्द्र


वाराणसी : लोक समिति और विवेकानन्द जन कल्याण समिति खेवली में "आशा ट्रस्ट" के सहयोग से जन कवी सुदामा प्रसाद "धूमिल" के गाँव खेवली में महिलाओं व बालिकाओं के लिए 'सिलाई कढ़ाई व  ब्यवसायिक केन्द्र' का उद्घाटन आज किया गया। इस अवसर पर गांव के लोगों ने धूमिल जी के याद में विभिन्न प्रजातियों के 21 पौधे भी रोप गए. केंद्र का उद्धघाटन समाज सेवी वल्लभाचार्य पाण्डेय ने फीता काटकर किया.

जब मैं हुआ साइबर ठगी का शिकार

बीती 6  जुलाई को मैंने बिल डेस्क पर हाउस टैक्स के रु० 797 का पेमेंट नगर निगम को न पहुँचने की  एक शिकायत दर्ज की। फ़ौरन ही  मेरे पास एक कॉल आई जिसमे कॉल करने वाले ने कहा कि आपके रु० 797 रिफंड करने के लिए आपके एटीएम कार्ड नंबर की जरुरत है साथ ही यहाँ से भेजा पिन आप हमें बतायें, ये कॉल बिल डेस्क से आई समझ के मैंने ये जानकारियां उसे दे दीं, जिसके फ़ौरन बाद उसने रु० 23555 मेरे खाते से निकाल लिए और ईबे (E-bay) को भेजकर ऑनलाइन शॉपिंग कर ली. दरअसल बिल डेस्क कस्टमर केयर नाम से ये साइट ही फ़र्ज़ी थी। इसका URL था www.consumercomplaints.in. घटना की जानकारी उसी दिन ईबे के कॉल सेंटर पर मैंने दे दी. अगले दिन स्थानीय साइबर सेल और थाने  में भी लिखित तहरीर देने के साथ ही बिल डेस्क की आधिकारिक साइट पर पब्लिक ग्रीवांस को सूचना दी।

अखिलेश यादव सरकार ने राजनैतिक फायदे के लिए कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे पर पाबंदी लगाई

मुरादाबाद : कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे पर प्रतिबन्ध को लेकर विश्लेषकों ने इसे अखिलेश सरकार की नई परम्परा बताते हुए प्रतिबन्ध को राजनैतिक फायदे का सौदा कहां है। उल्लेखनीय है कि पश्चिमी यूपी में सावन माह के दौरान एतिहासिक कांवड यात्रा के साथ परम्परागत रूप से गीत-संगीत व डीजे बजाने की वर्षो पुरानी रिवाज पर प्रतिबन्ध लगाने के प्रदेश की अखिलेश यादव सरकार के फैसले की हिन्दू व मुस्लिम सहित सभी वर्गो द्वारा चौतरफा निन्दा की जा रहीं है। लोग समझते है कि आखिर आस्था के सैलाब पर अपनी शर्त थोपने के निर्णय को सरकार ने किस वजट से लिया है।

कामकाजी महिलाओं को कार्यक्षेत्र में स्तनपान कराने के लिए अलग से कक्ष की व्यवस्था करे सरकार


: स्तनपान से ही स्वस्थ समाज का निर्माण संभव : विश्व स्तनपान सप्ताह के अर्न्तगत आयोजित होने वाले कार्यक्रमो की श्रृंखला में चिकित्सकों के समक्ष के अपने विचार व्यक्त करते हुए जोधपुर मेडिकल कालेज के सह आचार्य डा विकास कटेवा ने  स्तनपान के बारे में नवीनतम जानकारी से अवगत कराते हुए कहा कि स्तनपान एवं उनसे जुडे महत्वपूर्ण पहलुओं एवं इस प्रथा को पुर्नजीवित करने में चिकित्सकों की महती भूमिका है। उन्होंने विषेशकर कामकाजी महिलाओं के इस संबंध में आधिकार एवं उन्हें मिलने वाली सुविधओं के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने सरकार से कामकाजी महिलाओं को कार्यक्षेत्र में स्तनपान कराने के लिए अलग से कक्ष की व्यवस्था करने पर जोर दिया। कार्यक्रम का संचालन डा सुरेन्द्रसिंह चौधरी ने किया। विश्व स्तनपान सप्ताह की कड़ी में आज चौथे दिन जिला मुख्यालय पर तीन कार्यक्रम हुए।

पोर्न फिल्मों पर लगाये गये प्रतिबंध पर विदेशी षडयंत्र का विरोध करें

नागदा जं.। मोदी सरकार को पानी पी पीकर कोसने वालों ने अब हद ही कर दी जबकि सरकार कि तरफ से इंटरनेट सर्विस प्रोवाईडरों को 851 वेबसाईटों को ब्लॉक करने के लिये किये गये जारी निर्देश का इस आधार पर विरोध करना शुरू कर दिया कि आखिर इन वेेबसाईटों का चुनने का पैमान क्या है ? हजारों लाखों वेबसाईटें में से मात्र 857 क्यों चुनी गई ? वेबसाईटों को रोकने के पीछे सरकार कि क्या मंशा है ? कानूनी निर्देश कि अस्पष्ट भाषा पर प्रश्न चिन्ह लगाया गया ? आय.टी. एक्ट कि धारा 79 के अन्तर्गत सुझाव दिया, लेकिन धारा 69 किसी संज्ञेय अपराधों को उकसाने कि रोकथाम पर कार्यवाही करने का निर्देश देता है और पोर्न साईट से कोई संज्ञेय अपराध नहीं होता है ?

पत्रकार नेता ने मजीठिया को लेकर मध्य प्रदेश के श्रमायुक्त को लिखा पत्र- 'ग्रामीण अंचल से समाचार भेजने वालों को भी पत्रकार माना जाये'

प्रति,
श्रमायुक्त
इंदौर (म.प्र.)

विषय :- मजीठिया वेज बोर्ड पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के पालन हेतु।

महोदय,

उपरोक्त विषय में निवेदन है कि देश के समाचार पत्रों में सिर्फ राजधानी अथवा बड़े शहरों के ही समाचार प्रकाशित नहीं होते, तमाम समाचार पत्रों में ग्रामीण अंचल के समाचार भी प्रकाशित होते है। अत: ग्रामीण अंचल के पत्रकारों के बारे में विचार करने बावत्।

भावनाओं का ज्वार, रोए जार- जार...

-तारकेश कुमार ओझा-

मेरे मोहल्ले के एक बिगड़ैल युवक को अचानक जाने क्या सूझी कि उसने साधु बनने का फैसला कर लिया। विधिवत रूप से संन्यास लेकर वह मोहल्ले से निकल गया। बषों बाद लौटा तो उसके गले में कई चेन  तो अंगलियों  में सोने की एक से बढ़ कर अंगूठी देख लोग दंग रह गए। पूछने पर उसने बताया कि अब तक उसे न जाने कितनी ही ऐसी अंगुठियां व अन्य आभूषण मिल चुके हैं। लेकिन कुछेक को छोड़ सब उसने किसी न किसी को दान कर दिया। बातों का लोगों पर असर पड़ता देख उसने मोहल्ले में बड़ा यज्ञ कराने की इच्छा जताई। देखते ही देखते संसाधन जुटते गए और विशाल भव्य यज्ञ का आयोजन मोहल्ले में कई दिनों तक चला। समापन पर भंडारे का आयोजन जो सुबह शुरू हुआ तो रात का अंधेरा घिरने तक लगातार चलता ही रहा। इस सफलता से साधु का उत्साह बढ़ा और उसने मोहल्ले में कुछ और कल्याणमूलक  सामाजिक कार्य करने की इच्छा जताई। इसके लिए वह बैठक दर बैठकें बुलाता रहा, लेकिन इसमें दो एक अपवाद को छोड़ कोई नहीं आया। आखिरकार साधु निराश होकर अपनी राह निकल लिया।

आइसा कार्यकर्ताओ ने लखनऊ विवि गेट पर धरना देकर लाल-नीली बत्ती हटाने की मांग की


-रामजी मिश्र 'मित्र'-


-छात्र बोले एलयू प्राक्टर इस्तीफा दें।
-छात्र नेता बोले ल0वि0वि0 मे हुये सभी घोटालों की लोकयुक्त जांच करवाओ।

आज ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के कार्यकर्ताओ ने लखनऊ विश्वविद्यालय मे गेट न0-1 पर सरस्वती प्रतिमा के पास धरना दिया और एलयू प्राक्टर के इस्तीफे की मांग, सभी घोटालों की लोकयुक्त जांच करवाने तथा वीसी व प्राक्टर के वाहनो से लाल व नीली बत्ती हटाये जाने की मांग की।

4.8.15

अब मातृ शक्ति भी निकली ‘घर-घर तुलसी - हर घर वृक्ष’ अभियान पर

प्रैस विज्ञप्ति
दिल्ली में अनेक स्थानों पर महिलाओं के साथ बच्चों ने भी की सहभागिता

नई दिल्ली। अगस्त 04, 2015।  घर-घर तुलसी - हर घर वृक्ष अभियान से अब दिल्ली की मातृ शक्ति भी जुड गई है। अभियान का शुभारम्भ करते हुए मातृ शक्ति की प्रान्त संयोजिका श्रीमती संध्या शर्मा ने आज बताया कि हमारा लक्ष्य है कि श्रावण के पवित्र माह में हम दिल्ली के हर घर में तुलसी और यथा संभव हर घर के बाहर एक पौधा लगाएंगे। विश्व हिन्दू परिषद की स्वर्ण जयंती वर्ष के अवसर पर देश व्यापी वृक्षारोपण अभियान के एक हिस्से के रूप में चल रहे इस पवित्र कार्य में हम दिल्ली की अधिकाधिक महिलाओं को जोडकर दिल्ली को आक्सीजन युक्त और प्रदूषण मुक्त बनाएँगे। रोज मंदिरों में तुलसी को जल और पूजन के बाद बहिनें घर-घर जा कर इस कार्य हेतु राजधानी-वासियों (विशेष कर महिलाओं) को प्रेरित करेंगी। उन्होंने दिल्ली की समस्त नारी शक्ति के साथ बच्चों से भी इस हेतु आगे आने की अपील की है जिससे घरों में चौबीसों घण्टे शुद्ध आक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

कोचिंग सेंटर बने ईश्कबाजी का अड्डा

-अखिलेश दुबे-

सिवनी। शिक्षा सत्र शुरू होने के साथ ही मजनुओं का मौसम भी शुरू हो जाता है। इन दिनों मजनुओं को छात्राओं का पीछा व छेडख़ानी करते आसानी से देखा जा सकता है। इतना ही नहीं व्हीआईपी इलाकों में चलने वाले कोचिंग सेंटर भी मजनुओं के लिए जन्नत से कम नही हैं। हम बात कर रहे हैं नगर में बढ़ रही छेडख़ानी की घटनाओं पर। हम आपकों यहां बता दें कि नया शिक्षण सत्र शुरू हो चुका है। कुछ असामाजिक तत्व (मजनू) छात्राओं के स्कूल जाने वाले मार्ग पर बढिय़ा टीप-टॉप होकर खड़े हो जाते हैं और उनके ऊपर तंज कसने से भी बाज नहीं आते। कई बार तो यह देखा जाता है कि यह टपोरी किस्म के लड़के लड़कियों को राह चलते प्रपोच भी कर देते हैं और जब लड़की द्वारा इसका विरोध किया जाता है तो वह दूसरे दिन रास्ता ही बदल देते हैं।

मजदूरों के अनोखे प्रयोगों का गवाह बनता मधुबन

-रूपेश कुमार


जैन तीर्थयात्रियों के विश्वप्रसिद्ध पर्यटक स्थल के रूप में ख्यातिप्राप्त पारसनाथ पहाड़, जिसे सम्मेद शिखर के नाम से भी जाना जाता है, का ऐतिहासिक विकासक्रम मजदूरों के शोषण व संघर्ष की जीती-जागती मिसाल है। झारखंड के गिरिडीह जिला के पीरटांड़ प्रखंड में अवस्थित पारसनाथ पहाड़ सदियों से जैन धर्म के अनुयायियों व संथाल आदिवासियों के लिए अलग-अलग कारणों से पूजनीय है। जहां एक तरफ, जैन धर्मावलम्बियों का मानना है कि इसी पहाड़ पर 24 जैन तीर्थंकरों में से 20 तीर्थंकरों को मोक्ष प्राप्त हुआ था, वहीं दूसरी तरफ संथाल आदिवासी इसे ‘‘मरांग बुरु’’ मानकर पूजते हैं, जहां जुग जहर स्थित है।

नई जीवन दृष्टि को विकसित करें

-ललित गर्ग-

हर इंसान की चाहत है सफल और सार्थक जीवन, आनन्द और खुशीभरा जीवन। प्रकृति में आनन्द सर्वत्र बिखरा पड़ा है पर उसे समेटने वाला जो मन होना चाहिए, वह मन हमारे पास नहीं है। भगवान ने हमारे आनन्द के लिए हमारे जीवन को खुशहाल बनाने के लिये ही प्रकृति का निर्माण किया है। प्रकृति दोनों हाथ फैलाकर हमें खुशियां की खुशियंा देना चाहती है, लेकिन हम हैं कि उन खुशियों को बटोर ही नहीं पाते। झोली में आई खुशियां और आनन्द हमारी कुछ कमजोरियों के कारण, मानसिक दुर्बलताओं के कारण लौट जाती है। और हर समय चिंता करते हुए तनाव में ही जीना हमारी नियमि बना रहता हैं। डाॅक्टर ने कहा है इसलिए पार्क में टहलने चले जाते हैं। किसी तरह तीन-चार चक्कर पूरे हो जाएं तो छुट्टी मिले। क्या कभी पार्क के सौन्दर्य को निहारा है, प्रकृति की छटा पर विचार किया है? पेड़-पौधे, फूल-पत्तियां सब आपसे मिलने को बेचैन हैं, आपसे मीठी-मीठी बातें करना चाहती हैं लेकिन आपके पास तो फुरसत ही नहीं है उनसे बात करने की। वे तो आपको तनाव से मुक्त करके आनन्द प्रदान करने के लिए आतुर हैं, बेचैन हैं परन्तु आप तो सजावटी फूलों और गमलों की छटा देखकर ही खुश होना चाहते हैं। ऐसे में वास्तविक आनन्द कैसे मिलेगा? कैसे जीवन खुशहाल बनेगा? कैसे जीवन से नकारात्मकता को मुक्ति मिलेगी?

ज़ाकिर को ग़ायब करने में हो एजेंसियों की भूमिका की जांच : रिहाई मंच

Rihai Manch : For Resistance Against Repression
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लखनऊ एयर पोर्ट से गायब जाकिर अपने घर पहुंच गया
आज़मगढ़ जनपद के अल्पसंख्यक युवकों के साथ पहले भी हो चुकी हैं इस तरह की घटनाएं
रिहाई मंच का प्रतिनिधि मंडल ने जाकिर के घर का दौरा कर तफ्शील से पूरे
हालात को जाना

लखनऊ/ आज़मगढ़ 4 अगस्त 2015। ग्राम मिमारिज़पुर (मीरपुर), जनपद आज़मगढ़
निवासी मो० ज़ाकिर जो कि 13 जून को अमौसी हवाईअड्डे लखनऊ से गायब हुआ, वह
52 दिनों बाद 2 अगस्त को अपने घर पहुंचा तो परिजनों को जहां उसके घर वापस
पहुंचने की खुशी थी. वही वह उसकी हालत देख परेशान और दुखी भी थे। तथ्यों
की जानकारी के लिए रिहाई मंच का तीन सदस्यीय दल जिसमें मसीहुद्दीन संजरी,
विनोद यादव, तारिक शफीक शामिल थे, ने मोमारिज़पुर का दौरा कर ज़ाकिर और
उसके परिजनों से मुलाकात की।

क्या सचमुच आतंकवाद का कोई मज़हब नहीं होता?

Dr. Praveen Tiwari

मुंबई धमाकों का गुनहगार फांसी पर चढ़ा दिया गया। भारतीय न्यायव्यवस्था और लोकतंत्र की सुंदरता भी दुनिया के सामने आई। इतने बड़े गुनाह के लिए किसी और मुल्क में पकड़े जाने के बाद ही सरेआम किसी को सजा दे दी जाती लेकिन ये हमारे लोकतंत्र की मजबूती है कि हमारे देश में गुनहगार को भी अपना पक्ष रखने का मौका मिलता है। मेमन क्या, कसाब जैसे दुर्दांत पाकिस्तानी आतंकवादी को भी इस देश के कानून ने अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार दिया और सभी कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद फांसी पर चढ़ाया गया। जिस मेमन को लेकर बहस छेड़ी गई उसके परिवार के 7 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया था इनमें से चार सदस्यों को सितंबर 2012 में रिहा भी कर दिया गया था।

12 दोषी इस मामले के ऐसे थे जिन्हें इसी समय पर मौत की सजा सुनाई गई थी। 20 को उम्र कैद की सजा सुनाई गई इन्हें अधिकार मिला कि उच्चतम न्यायालय में अपील करें और इन्होंने की भी। माननीय कोर्ट ने जिसके लिए थोड़ी भी गुंजाईश देखी उसे राहत दे दी। कई गुनहगार छूट जाएं लेकिन कोई बेगुनाह न सजा पाए के फलसफे पर काम करने में हमारा कानून कामयाब रहा। इसी मेमन परिवार के और भी सदस्यों की मुंबई ब्लास्ट में संदिग्ध भूमिकाएं सामने आना, फिर उनका दोषी भी ठहराया जाना, इस बात को साफ साबित करता है कि मेमन परिवार की कितनी अहम भूमिका इस दुर्दांत आतंकी घटना में रही थी। भगोड़े टाइगर मेमन और दाऊद को असली गुनहगार बताकर याकूब के गुनाह को कम बताने वाले या तो इस मामले से बिलकुल नावाकिफ लोग हैं या वो लोग है जो कभी न कभी इस परिवार या इस मामले से संदिग्ध रूप से जुड़े रहे।
इस फांसी को राजनैतिक रंग देने की कोशिश की गई।

इस कोशिश में सांप्रदायिक राजनीति करने वाले चेहरे कुछ हद तक कामयाब भी हुए। इस पर होने वाली बहस ही थी जिसकी वजह से ऐसे कई युवा जो शायद इन धमाकों के समय पैदा भी नहीं हुए थे या बहुत से ऐसे लोग जो इन धमाकों के बारे में जानते भी नहीं है वे हजारों की तादाद में कानून के तहत सजा ए मौत पाए एक आतंकवादी के जनाजे में शामिल हुए। ये भी शायद दुनिया में इसी देश में हो सकता है कि सांप्रदायिक उन्मादियों की इस हरकत की आशंका के बावजूद, फांसी पर चढ़ाए गए मुजरिम के परिवार के प्रति संवेदनाएं दिखाना ज्यादा महत्वपूर्ण माना गया। ये हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की ही ताकत है कि वे लोग जो कभी इस मामले में गिरफ्तार किए गए और बाद में साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिए गए वे भी चैनलों पर इस फांसी का विरोध करने का अधिकार पा पाए। क्या आप दुनिया में किसी ऐसे देश की कल्पना कर सकते हैं जिसकी सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रपति ने कई याचिकाओं को पढ़ने और खारिज करने बाद जिसे जिसे सजा दी हो उसकी पैरवी करने के लिए चंद सांप्रदायिक राजनीति करने वाले चीखते चिल्लाते नजर आएं। निश्चित ही पूरी दुनिय़ा के सामने हम ये संदेश देने में कामयाब हो पाए हैं कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का असली आनंद इसी देश में लेना संभव है। जो आतंकवाद की सजा में नरमी का समर्थन कर रहे हैं वे न सिर्फ टेलीविजन चैनलों पर बैठें हैं बल्कि हमारी संसद का भी हिस्सा हैं।

वे लोग जो किसी के बहकावे में आकर एक आतंकवादी के लिए जरा भी हमदर्दी महसूस कर रहे हैं उन्हें जानना चाहिए कि उसके समर्थने में उठने वाली आवाजें कौन सी है? इनमें एक हैं एआईएमएम पार्टी के प्रमुख और सांसद असाउद्दीन औवेसी और दूसरे हैं समाजवादी पार्टी के नेता अबु आजमी। औवेसी की राजनीति का आधार सभी जानते हैं वे एक धर्म आधारित पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनकी राजनीति मुस्लिम मतदाताओं के इर्द गिर्द घूमती है। किसी धर्म विशेष का प्रतिनिधित्व बुरी बात नहीं है लेकिन उससे जुड़े लोगों को गुमराह करते हुए किसी मुद्दे को भड़काना एक गलत बात जरूर है। ये गलत बात औवेसी ने मेमन के मुद्दे पर की और उन्हें भरपूर सहयोग मिला तमाम टीवी चैनलों का। इस फांसी ने भारतीय टीवी चैनलों के गैर जिम्मेदाराना रवैए को एक बार फिर उजागर किया है। आप अपनी बहस को आगे बढ़ाने के लिए एक विरोधी और एक समर्थन के पक्ष को लाते हैं। ये बहस को चलाने के जरूरी भी है लेकिन किन मुद्दों पर बहस की जाए ये भी तो विवेक के इस्तेमाल का विषय है? याकूब मेमन जैसे आतंकी की फांसी के बाद उसके जनाजे में उमड़ें हुजूम का जिम्मेदार ये मीडिया भी है।

 हमारे देश में मीडिया को भी पूरी स्वतंत्रता है लेकिन भेड़ चाल पर चलने वाला मीडिया किसी एक मुद्दे को उठाता है और देखते ही देखते उसे एक बड़ा रूप देने की कवायद में सब जुट जाते हैं। फिर औवेसी जैसे नेताओं को इस पर बोलने का एक सुनहरा अवसर मिल जाता है। इसी अवसर को हथियाने वाले एक और नेता सामने आए अबु आजमी। आजमी भी तमाम चैनलों पर फांसी के खिलाफ जमकर बोलते नजर आए। यहां ये जानना भी जरूरी है कि अबु आजमी भी मुंबई धमाकों के मामले में गिरफ्तार किए गए थे। 10 अप्रैल 1995 को इस मामले में 26 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया इनमें उस वक्त के ट्रैवल एजेंट अबु आसिम आजमी भी थे जो अब समाजवादी पार्टी के सांसद हैं। फांसी के फौरन बाद समाजवादी पार्टी का मेमन की पत्नि को राज्यसभा का टिकट देने का मुद्दा उछालना भी घटिया सियासत का ही हिस्सा है। आजमी मेमन की पैरवी करते दिखाई दे रहे थे, लेकिन शायद वे भूल गए कि देश के इसी कानून की पारदर्शिता की वजह से वे न सिर्फ खुली हवा में सांस ले रहे हैं बल्कि सम्मानित सांसद भी हैं।

इस पूरे मामले में याकूब मेमन ने आत्मसमर्पण किया था या उसे गिरफ्तार किया गया को आधार बनाकर बहस को आगे बढ़ाया गया। इस बहस के मूल में एक पूर्व रॉ अधिकारी के कथित आर्टिकल का जिक्र किया गया। कथित इसीलिए क्यूंकि अपने जीते जी उन्होंने कभी ये बात सामने नहीं रखी। उनकी मृत्यू के बाद उनके भाई से इजाजत लेकर एक वेबसाइट ने इसे छापा। इन सभी तथ्यों को सत्य मानकर भी बात करें तो क्या एक पूर्व रॉ अधिकारी के विचार (इस बात की कोई पुष्टि नहीं कि ये उनके विचार हैं या नहीं) देश की सर्वोच्च न्यायालय, संपूर्ण न्याय व्यवस्था, माननीय राष्ट्रपति आदि के विवेक से ऊपर हैं और किसी के अनौपचारिक विचार को आधार बनाकर इन पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया जाए? लेकिन ये अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का देश है और यहां सभी को अपनी बात कहने का हक है वो चाहे गलत ही क्यूं ना हो। जिन लोगों के मन में याकूब मेमन के प्रति करूणा जागी वे सिर्फ उसकी उम्र, परिवार, फांसी, सियासत जैसी बातों के इर्द गिर्द उलझ कर रह गए। उन्होंने शायद इस मामले के तथ्यों को पढ़ने और समझने की जहमत भी नहीं उठाई होगी। हमारे देश में कई अधिकारी रिटायर होने के बाद लेखन और प्रकाशन की दुनिया में आते हैं। प्रकाशक अपना माल बेचने के लिए उनसे कुछ सनसनीखेज मांगता है और वो कुछ ऐसी बातें लिख देते हैं जो खबरों में आ जाएं। क्या ये धोखेबाजी किसी और मुल्क में संभव है?

कोर्ट ने जब याकूब पर अपना फैसला सुनाया था तो उसमें साफ लिखा था कि उसका और टाइगर मेमन का इन धमाकों में बराबर का हाथ दिखाई देता है। साक्ष्यों, अभियोजन और बचाव पक्ष की बहस, गवाहों को सुनने के बाद ये फैसला लिखा गया और ये फैसला शब्दशः आराम से उपलब्ध भी है, लेकिन टाइगर को असली गुनहगार बताकर याकूब को छोड़ने की बात कहने वालों ने शायद इस फैसले को भी पढ़ने की जहमत नहीं उठाई। याकूब मेमन सिर्फ टाइगर मेमन का भाई नहीं है वो इस गुनाह में बराबर का भागीदार भी था। यदि सिर्फ टाइगर मेमन के परिजनों को निशाना बनाना होता तो उसके परिवार के बाकी सदस्यों को बरी नहीं किया जाता या उम्र कैद की सजा नही दी जाती। ये बात सही है कि टाइगर मेमन और दाऊद जैसे नामों को दबोचना जरूरी है। ये भी एक हौव्वा सा ही लगते हैं जिनके नाम पर कई सालों से राजनीति की जा रही है। इनके चमचों को टीवी पर मौका देकर तो कुछ चैनलों ने तो हदें ही पार कर दी। ये भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाजायज इस्तेमाल का एक बड़ा उदाहरण है। किसी और देश में ऐसे चैनल बंद कर दिए जाते लेकिन हमारे देश में घिघियाता हुआ पत्रकार एक माफिया सरगना से फोन पर बात करता है और चैनल टीआरपी बढ़ाने के लिए उसे ऑन एयर भी कर देता है। ये गंभीर इसीलिए है क्यूंकि देश से अपराध कर फरार हुआ एक कुख्यात अपराधी हमारी कानून व्यवस्था के बारे में अनाप-शनाप बोलता है और हम बेशर्मों की तरह सुनते रहते हैं।

मानवाधिकारों की रक्षा के नाम पर मासूमों के हत्यारों को माफ कर देना हमारी न्यायव्यवस्था को कमजोर करता जाएगा। जो इस फांसी से डरे हैं उनके मन में चोर है। शायद वे इस बात से भयभीत हैं कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रा और बेगुनाह को बचाने के चक्कर में गुनहगारों को भी छोड़ देने वाले देश की व्यवस्था सांप्रदायिक ताकतों को कमजोर न कर दे। सबसे ज्यादा जरूरी है देश को किसी धर्म के चश्में से देखने वालों से बचाना। ये देश अपने संविधान और अपनी व्यवस्था से चलता है। जब इस प्रक्रिया को बाधित किया जाता है तो सिस्टम की खराबी शुरू होती है। जो भ्रष्टाचार आज हम देखते हैं उसके मूल में भी सस्ते तरीकों से अपराध से बच निकलने के तरीके ही मिलेंगे। सजा का प्रावधान सोच समझकर किया गया है और उस पर बहस करने वाले खुद ही को एक्सपोज करते दिखते हैं। धर्म या मजहब से इस फांसी का कोई लेना देना नहीं है। अलबत्ता इसे मजहब से जोड़ना बहुत आसान है इसीलिए मजहबी पार्टियों ने इसका इस्तेमाल किया। इन लोगों को इस तरह की छूट, देश में एक अप्रिय स्थिति तो बनाती ही है। वे लोग जिनका अपराध और राजनीति दोनों से कोई लेना देना नहीं वे भी अंधों की तरह भावनाओं में बहते हैं और अपने दिमाग के कचरे को और बढ़ा लेते हैं। आज किसी से पूछिए तो शान से ये जुमला कहता दिखाई देगा कि आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता लेकिन क्या सचमुच हम इस बात को समझ भी पाते हैं? आतंकवादियों को हीरो बना देने वाले और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर सड़कों पर बहस करने वाले कहीं आतंकवाद को मजहब का रंग देने की साजिश तो नहीं कर रहे हैं?


2.8.15

जलाभिषेक के लिए मिटटी के स्थान पर प्लास्टिक के बर्तन के प्रयोग के आदेश पर पुनर्विचार हेतु


सेवा में,
श्रीमान मंडलायुक्त महोदय,
वाराणसी मंडल, वाराणसी

महोदय,

गंगा गोमती संगम तट पर स्थित श्री मार्कंडेय महादेव धाम कैथी में सावन मेले के दौरान जलाभिषेक हेतु मिटटी के कुल्हड़ पर जिला प्रशासन द्वारा लगाये गए पूर्ण प्रतिबंध और केवल प्लास्टिक के बर्तन के उपयोग का आदेश पर पुनर्विचार करना चाहिए. मिटटी के कुल्ल्ड के प्रयोग पर प्रतिबन्ध से जहाँ सैकड़ों ग्रामीण परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी वहीँ मंदिर के आस पास लाखों की संख्या में प्लास्टिक के बर्तन बिखरेंगे जिसका कोई दूसरा उपयोग नही होगा और अंततः पर्यावरण पर दुष्प्रभाव पड़ेगा.

1.8.15

विश्व स्तनपान सप्ताह : मां का दूध अमृत समान

बाड़मेर जिले में विश्व स्तनपान सप्ताह दि. 01 अगस्त से 7 अगस्त तक मनाया जाएगा। केयर्न इंडिया, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, केयर इंडिया एवं लायंस क्लब बाडमेर के सहयोग से एवं इंडियन ऐकेडेमी आफ पीडियाट्र्रिक्स की बाडमेर शाखा के तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम का आगाज आज सुबह नर्सिंग छात्रों की रैली से हुआ। रैली को सुबह आठ बजे जिला प्रमुख श्रीमती प्रियंका मेघवाल ने हरी झंडी दिखा कर जिला चिकित्सालय से रवाना किया।

मार्कण्डेय महादेब धाम कैथी में रुकेगी सभी रोडवेज की बसें

वाराणसी : चौबेपुर क्षेत्र के कैथी चौराहे पर अब रोडवेज के सभी मार्ग की बसें रुकेंगी, गाजीपुर गोरखपुर मार्ग की रोडवेज की बसों का ठहराव और कैथी से किराया निर्धारण की स्थानीय ग्रामीणों की वर्षों पुरानी  मांग के मद्देनजर उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक श्री पी के तिवारी के निर्देश पर आज से कैथी बस स्टैंड का विधिवत शुभारम्भ हुआ. एक दो दिन के अंदर ही सभी परिचालको की टिकट मशीन में भी किराये की फीडिंग कर दी जायेगी. इस तरफ से गुजरने वाली सभी रूट की बसों का अब कैथी चौराहे पर ठहराव होगा.सावन माह में दर्शनार्थी इस सेवा का लाभ उठाएंगे.  

हम सकारात्मक खबरों के बजाय निरर्थक और विध्वंस की खबरों में अधिक रुचि ले रहे हैं

पिछले दो-तीन दिनों में जब देश में दो बडी खबरें थी-पहली पूर्व राष्ट्रपति भारतरत्न डा एपीजे अब्दुल कलाम के निधन और दूसरी मुम्बई सीरियल ब्लास्ट के अभियुक्त  याकूब मैनन की फांसी।  डा कलाम देश की शान और अपने विचारों से देश को रास्ता दिखाने वाले महापुरुष जो सदियों बाद आता है और जिसके लिए दुनिया जहान आंसू बहाता है। जिसका चला जाना अपूर्णनीय क्षति होती है। वे देश के एक वैज्ञानिक, राष्ट्रपति, शिक्षक और सबसे अधिक एक अच्छे इंसान थे जो खुली आंखों से सपना देखते थे और खुली आंखों से सपना देखने को प्रेरित करते रहे।

'हिंदी समय' में इस हफ्ते



मित्रवर

उदय प्रकाश हिंदी साहित्य का ऐसा नाम हैं जो न केवल भारतीय भाषाओं में खूब पढ़े और जाने जाते हैं बल्कि दुनिया भर में अपनी अद्भुत रचनात्मकता के लिए समादृत हैं। उनकी कुछ कहानियाँ आप हिंदी समय पर पहले पढ़ चुके हैं। इस बार हिंदी समय (http://www.hindisamay.com) पर उनकी कविताएँ प्रस्तुत करते हुए हम एक हार्दिक संतोष का अनुभव कर रहे हैं। उनकी कविताओं को पढ़ते हुए आप पाएँगे कि उनकी कविताओं में जहाँ एक तरफ महत्वहीन मानकर भुला दी गई वस्तुएँ अपनी जगह पुनः वापस पाती हैं वहीं वह वर्तमान राजनीतिक सत्ता और उसकी भयानक एब्सटर्डिटी का भी विखंडन करने से नहीं चूकते। इसीलिए वे अपने बारे में कह पाते हैं कि ‘राजनीतिक सत्ताएँ कभी भी किसी कविता को ईनाम नहीं देतीं। क्योंकि वे हमेशा पिछली कुछ सदियों में कविता विरोधी सिद्ध होती आई हैं।

31.7.15

"इश्क का रंग सफेद'' के लीड रोल में नज़र आएंगी ईशा


"इश्क का रंग सफेद'' के लीड रोल में नज़र आएंगी ईशा 


     इंतज़ार की घड़िया खत्म होने वाली हैं, हमारी ईशा 10 अगस्त से कलर्स के स्क्रीन पर छाने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसके प्रसारण का समय शाम के 6 बज कर 30 मिनट रखा गया है। "इश्क का रंग सफेद'' अमर प्रेम की एक अनूठी दास्तान है। इसमें ईशा एक विधवा का मुश्किल किरदार निभा रही है। पूरी कहानी ईशा के इर्द-गिर्द घूमती है। सचमुच स्टोरी लाइन बहुत पावरफुल है। इंडस्ट्री के लोग ईशा की एक्टिंग की बहुत तारीफ कर रहे है। मैंने कुछ रशेज देखे हैं। क्या गज़ब की नेचुरल एक्टिंग की है ईशा ने। आजकल पूरे भारत में इस सीरियल और ईशा के रोल की चर्चा है। रोज किसी न किसी पेपर में इनका इंटरव्यू छपता है। 
   

    2014 में मिस एमपी जीत चुकीं ईशा की मां रेखा सिंह ईशा फाउंडेशन प्ले स्कूल चलाती हैं और पापा पंकज सिंह चौहान बिल्डर और कोलोनाइज़र हैं। ईशा और उनका पूरा परिवार स्वस्थ और सुंदर बने रहने के लिए फ्लेक्स ऑयल का सेवन करता है। ईशा को अलसी मैया का पूरा आशीर्वाद मिला है और वह जल्दी ही फिल्म इंडस्ट्री की माधुरी दीक्षित बनने वाली है। रेखा जी ने बताया कि ईशा के लिए धानी का सीरियस रोल निभाना थोड़ा मुश्किल था, क्योंकि वो अभी सिर्फ 17 साल की हैं और 11वीं की स्टूडेंट हैं। इस रोल को पाने के लिए ईशा ने काफी मेहनत की है। इस रोल के लिए पहला ऑडिशन जनवरी में हुआ था। इसके बाद ऑडिशन के पांच और राउंड हुए। ऑडिशन में ईशा का अभिनय कमाल का था। पूरी टीम ईशा की एक्टिंग की कायल हो गई। उसके बाद ईशा को इस रोल के लिए फाइनल किया गया।

     

ईशा जो जॉन अब्राहम प्रोडक्शन की फिल्म "17 को शादी है' में सपोर्टिंग किरदार निभा चुकी हैं। इस फिल्म में भी ईशा के अभिनय की बहुत तारीफ हुई। उनके छोटे भाई रुद्राक्ष ने भी फिल्म "17 को शादी है'' में काम किया है और फिलहाल भोपाल में ही एक्टिंग सीख रहे हैं। यह फिल्म कुछ ही महीनों में रिलीज़ होने वाली है। 



एफआईआर दर्ज करवाकर पछता रहे हैं सुरेश बाबू

हाजीपुर,ब्रजकिशोर सिंह। मित्रों, सही पहचाना आपने! मैंने बताया तो था आपको 13 मार्च,2015 को उनके बारे में। हमने खबर लगाई तो थी। शीर्षक था-कानून नहीं थानेदारों की मर्जी से चलते हैं बिहार के थाने
ये वही सुरेश बाबू हैं मेरे मित्र रंजन के ससुर,पिता का नाम-स्व. रामदेव सिंह,साकिन-गुरमिया,थाना-सदर थाना,हाजीपुर,जिला-वैशाली। बेचारे के साथ इसी साल के 10 मार्च को सदर थाना परिसर से दक्षिण सटे एक्सिस बैंक के एटीएम के साथ धोखा हुआ और किसी लफंगे ने उनकी मदद करने के बहाने उनके खाते से 16000 रुपये निकाल लिए। बेचारे भागे-भागे हमारे पास आए। हमने लगे हाथों 12 मार्च,2015 को सदर थाने में एफआईआर के लिए अर्जी डाल दी ताकि पुलिस से अपराधी का पता लगाकर बुजुर्ग सुरेश बाबू को न्याय मिल सके।
मित्रों,उसके बाद कई दिनों तक रोज सुबह-शाम सुरेश बाबू का फोन मेरे पास आता कि एफआईआर दर्ज हुआ कि नहीं। फिर मैं इंस्पेक्टर को फोन करता। जब थाने के चक्कर लगाते दो दिन बीत गए तब मैंने एसपी को फोन किया। एसपी साहब से जब भी बात होती लगता जैसे वे सोकर उठे हों। इस प्रकार किसी तरह से दिनांक 17 मार्च को एफआईआर दर्ज हुआ। थाने में मौजूद एक फरियादी से पता चला कि बिना हजार-500 रुपये लिए एफआईआर दर्ज ही नहीं किया जाता।
मित्रों,हमने तुरंत सुरेश बाबू को सूचित किया और कहा कि कल जाकर एफआईआर की कॉपी ले जाईए। मगर यह क्या जब वे थाने में एफआईआर की कॉपी लेने गये तो मुंशी ने उनसे 500 रुपये की रिश्वत की मांग कर दी। मैंने उनको मुंशी से बात करवाने को कहा तो मुंशी फोन पर ही नहीं आया। फिर मैंने उनसे कहा कि आराम से घर जाईए क्योंकि यह पुलिस कुछ नहीं करनेवाली है क्योंकि हम उसे एक चवन्नी की भी रिश्वत नहीं देंगे और वे बिना पैसे लिए कुछ करेंगे नहीं। सुरेश बाबू बेचारे दिल पर पत्थर रखकर अपने घर चले गए और ठगे गए 16000 रुपयों से संतोष कर लिया।
मित्रों,फिर परसों अचानक सुरेश बाबू का फोन आया कि सदर थाने से उनको फोन गया था। वे काफी घबराए हुए थे। कहा कि पुलिस ने पैसा तो ऊपर किया नहीं फिर तंग क्यों कर रही है? मैंने कल उनको सदर थाने में आने को कहा। कल जब हम सदर थाने पहुँचे तो इंस्पेक्टर साहब अपने चेंबर में नहीं थे। मैंने अन्य पुलिसवालों से फोन के बारे में पूछा तो उन्होंने हमलोगों पर ही इल्जाम लगाया कि हम एफआईआर करके सो गए। हमने सीधे-सीधे कहा कि मुंशी ने एफआईआर की कॉपी देने के पैसे मांगे और घूस देना हमारी फितरत में नहीं है इसलिए हम निराश होकर थाने नहीं आए।
मित्रों,उनलोगों की सलाह पर जब हमने उस नंबर पर पलटकर फोन किया जिससे हमें फोन गया था तो पता चला कि श्रीमान् थाने के पीछे केस डायरी के पन्ने काले कर रहे हैं। पिछवाड़े में जाने पर पता चला कि उनका नाम लक्ष्मण यादव है और वे गया जिले के रहनेवाले हैं। वे हमारे केस के आईओ यानि अनुसंधान अधिकारी हैं। बेचारे काफी परेशान दिखे। अरे,हमारे लिए नहीं बल्कि खुद के लिए। उनको अपनी नौकरी बचाने की फिक्र थी। उन्होंने हमसे दरख्वास्त की कि हम उनको सुरेश बाबू के चार परिचितों के नाम लिखवा दें जिनका नाम वे गवाह के रूप में केस डायरी में लिखेंगे और केस को समाप्त करने के लिए कोर्ट में अर्जी दे देंगे। सुरेश बाबू से पूछा तो बोले कि पैसा तो अब मिलने से रहा गवाह के नाम लिखवा देते हैं झंझट खत्म हो जाएगा।
मित्रों,इस तरह सुरेश बाबू का मुकदमा हाजीपुर की पुलिस ने खल्लास कर दिया। हमने कहा लक्ष्मण बाबू कम-से-कम अब तो हमें एफआईआर की कॉपी दे दीजिए। बेचारे ने मना भी नहीं किया वो भी बिना रिश्वत लिए। हमने पूछा कि इस केस में आपको क्या करना चाहिए था आप जानते हैं क्या तो वे बोले नहीं। फिर हमने अपनी तरफ से पहल करके बताया कि आपको एटीएम का सीसीटीवी फुटेज देखना चाहिए था और अपराधी को पकड़ना चाहिए था क्योंकि जबतक वो अपराधी बाहर रहेगा थाना क्षेत्र में इस तरह की ठगी की घटनाएँ होती ही रहेंगी। बेचारे लक्ष्मण यादव कुछ बोले नहीं सिर्फ सुनते रहे और हम भी आहिस्ता-आहिस्ता चलते हुए थाने से बाहर आ गए। वैसे सुरेश बाबू को एफआईआर दर्ज करवाने का पछतावा तो है लेकिन इस घटना से उन्होंने एक सीख भी ली है। और अब बेचारे ने एटीएम कार्ड से पैसा निकालना ही छोड़ दिया है।

हाजीपुर टाईम्स पर भी प्रकाशित।

कलाम बनाम याकूब

इस देश का मीडिया कितना  अपरिपक्व और गैर जिम्मेदार हैं कि उसने पिछले दो दिनों में जितना मुंबई बम ब्लास्ट के गुनहगार याकूब मैनन की फांसी और उससे जुडी  खबर  को दिखाया उतना देश के पूर्व राष्ट्र पति और देश के सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक मिसाइल मैन ए पी जे अब्दुल कलाम की मौत और उनसे जुडी  खबर को भी  नहीं दिखाया। मीडिया ने तो जैसे रातो रात सुप्रीम कोर्ट से फांसी की सजा पाये २५७ लोगो की हत्या के  गुनाहगार याकूब मेनन को हीरो की तरह पेश किया,लगातार याकूब मेनन का चित्र टी वी चैनेलो पर तैरता रहा , जब कि इस देश के सबसे बड़े हीरो ए पी जे  अब्दुल कलाम की मौत और उनसे जुडी हुई खबर को दूसरे नंबर की खबर के रूप में  दिखाया गया । 

30.7.15

याकूब मेमन की फांसी पर बहुत से राजनेता रो रहे हैं।  हैरानी की बात यह है कि  ये लोग कैसे आतंकवाद के खिलाफ लड़ पाएंगे । इन लोगों को कौन समझाये कि  यदि हमारी न्याय व्यवस्था उस तरह चुस्त दुरस्त होती जिस प्रकार से याकूब मेमन को फांसी देने से पहले राजनाथ सिंह जी की सक्रियता और उसके बाद रात में कोर्ट का चलना और तमाम उन औपचारिकताओं को पूरा करना ताकि हमारे देश में याकूब का कोई  समर्थक कल को कोई अंगुली न उठा सकें , आदि तरीकों में यह सक्रियता देखने में आई उस प्रकार की न्याय व्यवस्था होती तो शायद हाफिज सईद कभी का फांसी पा चुका  होता और फिर उसे छुड़ाने के लिए कोई कंधार काण्ड न होता और जब यह हाफिज सईद को हमें न छोड़ना पड़ता तो २६/११ न होता।  लेकिन इस वक्त ऐसे तमाम लोग कोई एक प्रतिक्रिया उन लोगों के लिए नहीं दे रहे हैं जो उन धमाकों में मारे गए थे। जाके पैर न परी  बिवाई वो क्या जाने पीर पराई । खैर , हैरानी है कि  ये लोग न्याय व्यवस्था पर भी सवाल उठा रहे हैं । देशद्रोह पर न कोई माफ़ी , न विलम्ब । शास्त्र कहते हैं - सतयुग तब शुरू होता है जब न्याय व्यवस्था दंड का आश्रय लेती है । इसलिए दंड में कोई देर नहीं ।  

आयुर्वेद विश्व परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने डॉ राजा राम त्रिपाठी

कोण्डागांव । हिन्दोस्तान के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद की मंश के अनुरूप 1959 में आयुर्वेद को बढावा देने के लिये किया गया था। आयुर्वेद को विश्व स्तर पर स्थापित करने के लिये भारत के प्रथम राष्ट्रपति बाबू  राजेन्द्र प्रसाद का यह प्रयास तब से अब तक पू विश्व में अपनी अर्थपूर्ण महत्ता का निर्वहन करता रहा है । इस संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर बस्तर के कोण्डागांव जिले के एक औषधि कृषक डॉ राजाराम त्रिपाठी का चयन पू छग प्रदेश के लिये गर्व का विषय है । जिले के आयुर्वेद प्रेमियों ने इस नियुक्ति पर हर्षित हो कर कहा है कि यह प्रसन्नता की बात है कि आयुर्वेद विश्व परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष हमा जिले के निवासी है।

रंगकर्म और साधन सम्पन्नता

-   मंजुल भारद्वाज

रंगकर्म और साधन सम्पन्नता – बड़ी आकर्षक और दिल को छूने वाली बात है हर रंगकर्मी का ख्वाब होता है की उसके रंगकर्म के लिए सभी संसाधन मौजूद हों चाहे वो “राज्य व्यवस्था” उपलब्ध कराए या समाज व्यवस्था उपलब्ध  कराए...  बड़ी अच्छी बात है ..और दिल की बात है और दिल की बात हर व्यक्ति को पसंद आती है ... पर क्या रंगकर्म केवल लोक लुभावन दिल को छूने भर की कला है .. नहीं रंगकर्म दिल को छूते हुए दिमाग को झक झोरने और चिंतन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने वाली , मानसिक रूढ़ियों को तोड़ने वाली कला है .. यानी इंसान को इंसान बनाये रखने वाली विधा है ..एक ऐसे “व्यक्ति और समाज” का निर्माण करने वाली विधा जो न्याय संगत और शोषण मुक्त हो, जो मानवीय मूल्यों , शांति, सौहार्द और समानता वाली व्यवस्था का निर्माण करे .

यूरोप में अगर कलाम जैसे किसी महापुरुष का निधन हुआ तो कतई एकतरफा महिमामंडन नहीं होता


सब लोग किसी न किसी उद्देश्य को लेकर तत्परमान है, चिन्तित है। हमारी जाति, हमारा धर्म, ये वो से लेकर पंथ, वाद, विवाद तक के मामले चलायमान है सोशल मीडिया पर। सब परेशान है। दूसरे को लेकर तीसरे और चाौथे को लेकर पहले वाले सब परेशान है कि वही सही हैं और बाकी सब गलत। सब अपनी सोच, विचार और अपने मंतव्य को लेकर एक तरह से गतिमान है कि उनका सोचना ही सही है बाकी सब मुर्ख है। अभी मिसाईल मैन का निधन हुआ है और इसपर सेकुलर से लेकर बहुतायत लोगों के पोस्ट और कमेन्ट आये हैं। किसी भी समाज में कटेगेरिशन का बहुत महत्व है। जितना ही गहन विचार किसी विषय विशेष पर होगा उतने ही अधिक उसके विभाग होंगे। आज हम वैश्विक वैचारिक जनसंचार के राहों में हैं। सोशाल मीडिया ने विश्व को वह प्लेटफार्म दिया है जिसपर अनेक समाज, जाति, पाति और पंथ आदि सहित बहुतायत लोग अपने विचार और उसपर प्रतिपुष्टिीकरण कर एकतरह मनःस्थिति के प्रति बदलाव की क्रान्ति कर सकते हैं। हमारा देश, हमारा समाज हमेशा ही से एक तरह से रूढ़ीवादिता का पोषक रहा है।

नेपाल में गायः पवित्र जीव से राष्ट्रीय पशु तक


विष्णु शर्मा
नेपाल के नए संविधान में गाय को राष्ट्रीय पशु स्वीकार किया गया है। अब एक गणतंत्र’, ‘धर्मनिरपेक्ष, ‘समाजवाद उन्मुख’, ‘बहुजातीय’, ‘बहुभाषिक’, ‘बहुधार्मिक’, ‘बहुसांस्कृतिकतथा भौगोलिक विविधायुक्तदेश की मां गाय होगी जो दूध देगी और पंचगव्य से रोगों का निदान होगा। अब नेपाली जनता बिना किसी धार्मिक दवाब के कानूनी तौर पर गाय पर गर्व कर सकेगी। इसके साथ गौ हत्या के आरोपियों को मौत की सजा देने की ''सेकुलर'' मांग का विकल्प खुला रहेगा । अभी गौ हत्या की अधिकतम सजा 12 वर्ष है। एक अध्ययन के अनुसार गौ हत्या के मामले में सारे आरोपी जनजाति, पिछड़ी मानी जाने वाली हिन्दू जातियां या अल्पसंख्यक समुदाय से हैं।

अब्दुल कलामः साधु वैज्ञानिक

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

इससे अच्छा महाप्रयाण क्या हो सकता है? डॉ. अब्दुल कलाम को वह सौभाग्य मिला, जो आज तक भारत के किसी भी राष्ट्रपति को नहीं मिला। वे अंतिम क्षण तक कार्यरत रहे। राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद भी वे जितने सक्रिय रहे, कोई और राष्ट्रपति नहीं रहा। वे राष्ट्रपति नहीं बनते तो भी वे बड़े आदमी थे। वे भारत के ऐसे पहले राष्ट्रपति थे, जो राजनीति से किसी भी तरह जुड़े नहीं थे। वैसे कोई व्यक्ति अक्सर राष्ट्रपति तो कई निजी विशेषताओं के कारण बनता है लेकिन राष्ट्रपति बनने के लिए अनेक राजनीतिक परिस्थितियां ही जिम्मेदार होती हैं। अब्दुल कलाम शुद्ध अपने गुणों के कारण राष्ट्रपति बने। मिसाइलमेन की तौर पर विख्यात होकर वे भारत रत्न तो बन ही चुके थे। उनके निधन पर सारे देश में जैसा शोक का माहौल बना है, वही बताता है कि वे कितने लोकप्रिय थे।

एन जी टी का आदेश कंपनियों के हित में, स्थानीय वाशिंदे होंगे वंचित

हिमालय नीति अभियान
गाँव खुंदन, डाक बंजार, जिला कुल्लू , हिमाचल प्रदेश।

Note on NGT order on Manali Rohtang Tourism  to  Press for publication and public debate

दिनांक: 12-7-2015

नेशनल ग्रीन ट्रिवूनल (एनजीटी) के 6 जुलाई 2015 के आदेशानुसार अब घोड़ों, वर्फ के स्कूटर, ATV, पेराग्लाइडिंग इत्यादि के चलाने पर भी रोक लगा दी है। इस से पहले मनाली रोहतांग सड़क पर दस बर्ष पुराने व डीजल वाहनों के चलाने पर पाँच मई से रोक लगा दी गई  थी तथा इस सड़क पर दिन में केवल छ: सौ पेट्रोल व चार सौ डीजल के पर्यटन वाहन को चलाने की अनुमति दी थी। 2008 से चल रहे इस केस में कई अलग –अलग आदेशों में एन जी टी ने सोलंग नाला व इस सड़क के अन्य स्थलों पर से सभी खोखों  व ढ़ावों को हटाने तथा लघु पर्यटन से जुड़ी बहुत सी सेवाओं पर भी रोक का फर्मान जारी किया है।

मीटिंगें इन्तजार कर सकती हैं, पर किसान और खेती को कभी इंतजार न कराएं : कलाम

डॅा राजाराम त्रिपाठी


: कलाम को आखिरी सलाम, नहीं शाश्वत प्रणाम! :  "कलाम" कभी मरते नहीं, अमर हो जाते हैं। कलाम सकारात्मक प्रेरणा के अजस्र स्रोत थे। " पारस " थे  कलाम,  इन्होंने बस्तर के इस अकिंचन, अनाम से साधारण किसान को, एवं हमारे मां दन्तेश्वरी हर्बल समूह को छूकर " सोना " बना दिया, "खरा सोना"। आज बस्तर का यह समूह देश का सबसे बड़ा वनौषधि कृषक समूह ही नहीं, बल्कि अन्तराष्ट्रीय  प्रमाणीकरण संस्थानों द्वारा प्रमाणित, एवं विदेशी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के उत्पादों को गुणवत्ता के मामले में टक्कर देने वाले  " सर्टिफाइड आर्गेनिक हर्बल फूड सप्लीमेंटस " उत्पाद देश के  विदेश के बाजार में उतारने  वाले पहले भारतीय किसान समूह बन गये हैं।

SWASTHYA VIBAG DAWARA KI GAYI FARZI KARYAWAHI

Shriman Sampadak Mhodya ji,

Mera naam Sanjeev Sharma hai me Haryana Ke Yamunanagar Distt. Ke Chote se village Machhrouli  ka rahnewala hu. Shriman ji  dinak 19 April 2015 ko me apni wife ke sath Bilaspur me Satsang me gye the, meri wife ko thoda temperature tha to jab hum satsang se nikle to mene socha ki Dr. se medicine le lete hai, jiske liye hum Bilaspur me hi Arogya Clinic me Dr. Jagmal ke pass chle gye. Dr. Jagmal ne temperature check kiya to 99 digri tha. Uske bad Dr. Jagmal bole ki blood test karwalo hume blood test karwaliya jisme thoda tifid ki compliant thi. Dr. Jagmal ne tifid ke liye injection laga diya jiske turent bad meri wife ki condition bout khrab ho gayi. Jab iske bare me Dr. Jagmal ko batya to usne nazerandaj kar diya. Sirf 15 minute me meri wife ki death ho gyi hume chod kar dr. Jagmal bag gya.

बुडविग उपचार - कैंसर के इलाज में 90% सफलता

बुडविग उपचार - कैंसर के इलाज में 90% सफलता


        जयपुर में 14 सितंबर, 2014 को प्रेस क्लब में पिंक सिटी प्रेस क्लब और प्रानो फ्लेक्स ने मीडिया के परिवारों
के लिए कैंसर का फ्री कैम्प और वर्कशॉप आयोजित किया। इस कैम्प में देश के विख्यात बुडविग उपचार विशेषज्ञ डॉ. ओ.पी.वर्मा ने कैंसर के मरीजों को देखा और उन्हें उपचार के हर पहलू के बारे में विस्तार से बतलाया। मरीजों को अलसी का तेल, उपचार पुस्तिका और डी.वी.डी. भी दी गई। 
       1 बजे डॉ. वर्मा ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि यह महान उपचार कैंसर के हर रोगी तक पहुँचना चाहिए और सरकार को इस उपचार की जागरुकता और शोध के लिए कार्य करना चाहिए। यह उपचार जर्मनी की विश्व-विख्यात डॉ. जोहाना बुडविग ने विकसित किया था। अलसी के तेल और स्वस्थ आहार विहार पर आधारित इस उपचार से 90% प्रामाणिक सफलता मिलती है। उन्हें नोबल प्राइज के लिए 7 बार नोमिनेट किया गया। बुडविग ने पहली बार यह भी साबित किया था कि ट्रांसफैट से भरपूर वनस्पति और रिफाइंड तेल मनुष्य के सबसे बड़े दुष्मन हैं और इन्हें प्रतिबंधित कर ने की पुरजोर वकालत की थी। नियमित अलसी के तेल का सेवन कर के इस रोग से बचा जा सकता है।

मिसाइलमैन कैसे अहिंसा के प्रति आकर्षित हुए?


- ललित गर्ग-

मिसाइलमैन के नाम से प्रसिद्ध एवं बच्चों के चेहते डाॅ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम अब हमारे बीच नहीं रहे। एक सच्चा देशभक्त हमसे जुदा हो गया। देह से विदेह होने के क्षणों को भी इस महापुरुष ने कर्ममय रहते हुए बिताया। वे जन-जन के प्रेरणास्रोत थे, विजनरी थे। उन्होंने राष्ट्र को शक्तिशाली बनाने के लिये अस्त्र-शस्त्र की शक्ति को संगठित करने पर जोर दिया वही अमन एवं शांति के लिये अहिंसा को भी तेजस्वी बनाया। वे समय-समय पर अहिंसा को भी संगठित करने के लिये संतों एवं अध्यात्मपुरुषों से मिलते रहे। वे दुनिया को अणुबम से अणुव्रत ( अहिंसा ) की ओर ले जाने वाले विरल महामानव थे। अहिंसा की प्रेरणा उन्हें आचार्य श्री महाप्रज्ञ ने दी थी और उससे वे इतने अधिक प्रभावित थे कि अपना हर जन्म दिन आचार्य महाप्रज्ञ की सन्निधि में ही मनाते थे। जहां भी आचार्य महाप्रज्ञ होते वे वहां पहुंचा जाते थे।

29.7.15

कैंसर - कारण और निवारण - प्रेस मीट कोटा

बुडविग प्रोटोकोल की जागरुकता 

पत्रकार वार्ता 
प्राक्कथन
कोटा 13 अप्रेल, 2015 

आदरणीय प्रिन्ट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के संपादकों और पत्रकारों, 

मैं डॉ. ओ.पी.वर्मा आपको नमन करता हूँ और इस पत्रकार वार्ता में आपका इस्तकबाल करता हूँ। आज हम कैंसर के महान उपचार बुडविग प्रोटोकोल पर चर्चा करेंगे जिसे मैं कैंसर के हर मरीज तक पहुँचाना चाहता हूँ। मैं आप सभी का तहे दिल से शुक्रगुजार हूँ कि आप हमेशा मेरी बातों को बड़े प्रभावशाली तरीके से जन जन तक पहुँचाते रहे हैं।



हे मेरे देश के सजग प्रहरियों 
आज हमारे सामने एक बड़ी चुनौती आ गई है जिसका नाम है कैंसर। 
दोस्तों, 
कैंसर एक गंभीर रोग है, जिसे प्रायः लाइलाज माना जाता है। पिछले 200 वर्षों से अमेरिका और अन्य देश इस रोग पर शोध कर रहे हैं। अरबों रुपया इस रिसर्च में फूँका जा रहा है, अनेक संस्थाओं से डोनेशन लिया जाता है। लेकिन न तो कैंसर की मृत्यु दर कम हुई है और ना ही इसका इंसीडेंस कम हुआ है। हां, नई नई मशीने इजाद हुई हैं, डायग्नोसिस आसान हो गया है। हमारे पास काबिल डॉक्टर्स और स्टाफ की पूरी फौज है। हर साल दर्जनों कीमोथेरेपी दवाइयाँ बनाई जाती हैं। हर बार कहा जाता है कि बस हम कैंसर के क्यौर से बस थोड़ा ही सा दूर हैं। लेकिन यह थोड़ी सी दूरी हम 200 साल में भी तय नहीं कर पाए हैं। हम जहाँ तब थे वहीं आज खड़े हैं। ऐसा क्यों है, कहीं ऐसा तो नहीं कि हमारी दिशा ही गलत हो। कहीं हमें एक यू टर्न लेने की जरूरत तो नहीं है। 
कैंसर का मूल कारण क्या है...
अगर किसी बीमारी का कारण मालूम हो जाए तो निवारण आसान हो जाता है। कैंसर के मुख्य कारण की खोज 1931 में डॉ. ओटो वारबर्ग ने कर ली थी। जिसके लिये उन्हें नोबल पुरस्कार से नवाजा गया। उन्होंने अपने प्रयोगों द्वारा सिद्ध किया कि यदि सामान्य कोशिकाओं को ऑक्सीजन की आपूर्ति 48 घन्टे के लिए 35 प्रतिशत कम कर दी जाए तो वह कैंसर कोशिकाओं में परिवर्तित हो जाती हैं। सामान्य कोशिकाएँ अपनी जरूरतों के लिए ऑक्सीजन उपस्थिति में ही ऊर्जा बनाती है जबकि कैंसर कोशिकायें ग्लूकोज को फर्मेंट करके ऊर्जा प्राप्त करती हैं। यदि कोशिकाओं को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती रहे तो कैंसर का अस्तित्व संभव ही नहीं है। आप नोबलप्राइज डॉट ऑर्ग पर जाइये, सारा सत्य आपके सामने आ जाएगा। 
वारबर्ग और कई अन्य शोधकर्ता मान रहे थे कि कोशिका में ऑक्सीजन को आकर्षित करने के लिए दो तत्व जरूरी होते हैं पहला सल्फरयुक्त प्रोटीन जो कि पनीर में पाया जाता है और दूसरा एक फैटी एसिड जिसे कोई पहचान नहीं पाया था। वारबर्ग भी इस रहस्यमय फैट को पहचानने में नाकामयाब रहे। 
हे कलम के शूरवीरों
कहानी में इस मोड़ पर डॉ. जोहाना बुडविग की एंट्री होती है। डॉ. जोहाना ने वारबर्ग के शोध को जारी रखा। 1949 में उन्होंने पेपरक्रोमेटोग्राफी तकनीक विकसित की जिससे सेल्यूलर रेस्पिरेशन के सारे राज उजागर हो गए। वह रहस्यमय फैट पहचान लिया गया जिसे दुनिया भर के अनुसंधानकर्ता ढूँड़ रहे थे। यह फैट था अल्फा लिनोलेनिक एसिड जो अलसी के तेल में भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इस तकनीक द्वारा ही मालूम हुआ कि इस लिनोलेनिक एसिड में सक्रिय और ऊर्जावान इलेक्ट्रोन्स की अपार संपदा होती है। ये इलेक्ट्रोन ही कोशिका में ऑक्सीजन को खींचते हैं।
बुडविग ने मरीजों को अलसी का तेल तथा पनीर देना शुरू कर दिया। नतीजे चौंका देने वाले थे। बुडविग द्वारा कैंसर के इलाज में सफलता की पहली पताका लहराई जा चुकी थी। इसका हीमोग्लोबिन बढ़ चुका था। कैंसर के रोगी ऊर्जावान और स्वस्थ दिख रहे थे, उनकी गांठे छोटी हो गई थी। डॉ. जोहाना ने अलसी के तेल और पनीर के मिश्रण और स्वस्थ आहार विहार को मिला कर कैंसर के उपचार का तरीका विकसित किया था, जो बुडविग प्रोटोकोल के नाम से विख्यात हुआ। 
इस खोज से यह भी स्पष्ट हो चुका था कि वनस्पति और रिफाइंड तेल बनाते समय ये ऊर्जावान इलेक्ट्रोन्स नष्ट हो जाते हैं। बुडविग ने इन्हे स्यूडो फैट या लिक्विड प्लास्टिक की संज्ञा दी और इनको मानव का सबसे बड़ा शत्रु बताया और इन्हे प्रतिबंधित करने की पुरजोर वकालत की। 
हे आवाज के योद्धाओं
कैंसर के खिलाफ युद्ध का बिगुल बज चुका है। अपने तरकश से तीर निकालिए, उसे अलसी के तेल में डुबो कर धनुष पर अवस्थित कर लीजिए और प्रत्यंचा चढ़ा कर तैयार रहिए। हमें बुडविग उपचार को कैंसर के हर मरीज तक पहुँचाना है। तथा हमें भारत सरकार को यह संदेश पहुँचाना है कि इस उपचार को आम लोगों तक पहुँचाने के लिए समुचित कदम उठाए। इस उपचार द्वारा हम कैंसर के लाखों मरीजों को राहत और सुकून भरा जीवन दे सकते हैं और बहुत सारी विदेशी मुद्रा भी बचा सकते हैं। 
उनका नाम नोबल प्राइज के लिए सात बार नोमिनेट हुआ, परंतु उन्हें कीमो और रेडियोथेरेपी को भी अपने उपचार में शामिल करने को कहा गया। उन्होंने सशर्त दिये जाने वाले नोबल पुरस्कार को हर बार ठुकराया। 


कैंसर की डॉक्टर जोहाना बुडविग शोध किया पहचाना
अलसी तेल पनीर मिलाया किया अचंभित फल जो पाया
जन हित धर्म कर्म चमकाया सात बार नोबल ठुकराया
कर्क रोग से सब जग हारा अलसी खिला खिला उपचारा
 

Cancer - Cause And Cure .... Based on Quantum Physics developed by Dr. Johanna Budwig

Dr. O. P. Verma's book is highly recommended to every cancer patient and to anyone
interested in prevention of cancer. The book is a very thorough and easy readable introduction to Dr. Johanna Budwig's method, which starts with bringing oxygen to the cells and energy to the body. The book gives a lot of supplemental possibilities to fortify the method and bring it into a modern perspective. The language used is formed by Dr. O. P. Verma's clinical experience and his contact with Mr. Lothar Herneise, who was educated by Dr. Johanna Budwig, and he has found a balance between explanations and transparency. The book supports the 3E-Program developed by Lothar Herneise. Eat well (Raw Organic Diet) Eliminate toxins (Detoxification) Energy (Balance the flow of life force) It also contains: Eldi oil, Coffee Enema, Epsom bath, Sun Therapy, Energy Healing, Budwig-Compatible Natural Alternatives to Pain Medication, Remedy for Bone pain. Several methods to strengthen the spirit, as emotional problems must be overcome. Dr. Ryke Geerd Hamer's astonishing discovery of a emotional trauma - brain - cancer connection is nicely explained. A dozen important herbs are highlighted and their positive impact described. The chapter about Ligians gives flax seeds a unique position. Ligian health benefits extend beyond hormone-dependent breast cancer, osteoporosis, and prostate cancer to include brain function, cardiovascular disease, immune function, inflammation and reproduction. The chapters about omega 3, 6, 9 fatty acids and corresponding Series 1, 2, 3 prostaglandins contain vital information also expressed with unusual clarity.
This book is available at http://pothi.com/pothi/book/dr-o-p-verma-cancer-cause-and-cure

अच्छी चिकित्सा पद्धति कौनसी?

डाॅ. चंचलमल चोरडिया

अच्छे स्वास्थ्य हेतु निम्नतम आवश्यकताएँ-

                स्वस्थ जीवन जीने के लिए शरीर, मन और आत्मा, तीनों की स्वस्थता आवश्यक होती है। तीनों एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। तीनों के विकारों को दूर कर तथा सन्तुलित रख आपसी तालमेल द्वारा ही स्थायी स्वास्थ्य को प्राप्त किया जा सकता है। अतः स्वास्थ्य की चर्चा करते समय जहाँ एक-तरफ हमें यह समझना आवश्यक है कि शरीर, मन और आत्मा का सम्बन्ध क्या है? किसका कितना महत्त्व है? दूसरी तरफ जीवन की मूलभूत आवश्यक ऊर्जा स्रोतों का सम्यक् उपयोग करना होता है तथा दुरुपयोग अथवा अपव्यय रोकना पड़ता है।

.... लिपटे रहत भुजंग! (शोध-प्रबंध: देवेश शास्त्री)

‘‘जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग। चन्दन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग।’’ रहीमदास के इस सूक्ति-परक दोहे को प्रयोग कर नीतीश कुमार चन्दन और विषधर भुजंग के प्रतीकात्मक पात्रों की खोज की जिज्ञासा जगाई, जब खुद (नीतीश कुमार) को चन्दन और सहयोगी (लालू यादव) को भुजंग के रूप में समीक्षा-पंडितों ने शिनाख्त की, जो सर्वथा यर्थार्थ यानी नीतीश कुमार का प्रकट मन्तव्य था। तो कथित बिहारी-गठजोड़ पर नकारात्मक प्रभाव को भांपते ही बिहारी सीएम नीतीश कुमार तत्काल बोले भुजंग लालू को नहीं बीजीपी को कहा है। यानी अपने ही मन्तव्य को वाणी में पलट देने वाली ‘‘उत्तम प्रकृति’’ का परिचय दे दिया। इस सन्दर्भ में रहीमदास के उक्त दोहे के भाष्य की आवश्यकता महसूस हुई, जो प्रस्तुत है।

तकनीकी राष्ट्रवाद एवं आर्थिक राष्ट्रनिष्ठा आज की आवश्यकता - प्रो. भगवती प्रसाद शर्मा

: पत्रकारिता विश्वविद्यालय के सत्रारम्भ कार्यक्रम में आज दूसरे दिन प्रख्यात विद्वानों के हुए व्याख्यान : भोपाल । विश्व में यदि हमें अग्रिम पंक्ति में स्थान पाना है तो ज्ञान आधारित क्षेत्रों में अपना योगदान बढ़ाना होगा। इसके लिए आवश्यक है कि हम अपने खुद के उत्पाद एवं ब्राण्ड विकसित करें। तकनीकी क्षेत्रों में भारतीय मानव संसाधन दुनिया में पहचाना जाता है परंतु इनके द्वारा तैयार किए गए तकनीकी उत्पाद का फायदा वैश्विक मल्टीनेशनल कंपनियाँ उठाती हैं। इससे भारतीय ज्ञान एवं प्रतिभा से प्राप्त मुनाफा विदेशी कंपनियों को प्राप्त होता है। इसे रोकने के लिए भारत को तकनीकी राष्ट्रवाद एवं आर्थिक राष्ट्रनिष्ठा की ओर जाना होगा। यह विचार आज प्रख्यात अर्थशास्त्री एवं पैसिफिक विश्वविद्यालय, उदयपुर के कुलपति प्रो. भगवती प्रसाद शर्मा ने टी.टी.नगर स्थित समन्वय भवन में चल रहे पत्रकारिता विश्वविद्यालय के सत्रारम्भ कार्यक्रम के दूसरे दिन व्यक्त किए।

India has Been Ranked As One Of The Most Racist Countries In The World

By Asees Bhasin

In a map of a survey released last year by The Washington Post, India was ranked as one of the most racist countries in the world. Through the course of this article, I have tried inspecting the reasons which many have caused a deep rooted xenophobia in the minds of the Indian populace.

Racism as an ego defence mechanism

After two hundred years of colonial domination and being labelled as barbarians, the Indian identity faced a major setback. The belief that India needed saving from itself and the initiation of an entire ‘civilizing mission’ for the populace reiterated a sense of Indian inferiority time and again. Some regressive Indian cultural practices were questioned at a global level, and many were changed. The attempt to get the Indians to emulate the Western ways of living infuriated the Indians, while making them question their own identity time and again. Post independence, in order to counter the existing mindset, a strong patriotic identity was forged. This identity led to an exaltation of Indian culture and practices, and portrayed these to be superior to British or Western tradition.

इस बार 144 साल बाद सावन महीने में सौभाग्य योग बनेगा

हिंदू धर्म में सावन का महीना काफी पवित्र माना जाता है। इसे धर्म-कर्म का माह भी कहा जाता है। सावन महीने का धार्मिक महत्व काफी ज्यादा है। बारह महीनों में से सावन का महीना विशेष पहचान रखता है। इस दौरान व्रत, दान व पूजा-पाठ करना अति उत्तम माना जाता है व इससे कई गुणा फल भी प्राप्त होता है। इस बार का सावन अपने आप में अनूठा होगा। इस बार 144 साल बाद सावन महीने में सौभाग्य योग बनेगा। श्रद्धालुओं में इसे लेकर खासा उत्साह है।

28.7.15

शहर में दो गर्ल्स कॉलेज हैं या सरकार के मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने सदन में मुनमुन के सवाल का गलत जवाब दिया है? 
   सिवनी के विधायक दिनेश मुनमुन राय ने नेता जी सुभाषचंद्र बोस कन्या महाविद्यालय के संबंध में विधानसभा में प्रश्न पूछा। इसका जवाब देते हुये प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने जवाब दिया कि,सिवनी के नेताजी सुभाषचंद्र बोस कन्या माविद्यालय के पास भवन नहीं हैं इस वजह से यूजीसी से राशि नहीं मिल पा रही है। जबकि बींझावाड़ा की भूमि पर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वोरा ने गर्ल्स कालेज का भूमिपूजन किया था जिसमें कालेज भवन के साथ साथ पचास पचास सीट के दो हास्टल भी बनाये गये थे। लेकिन शहर से दूरी को मुद्दा बनाकर जब विरोध पुनः हुआ तो तत्कालीन भाजपा विधायक नरेश दिवाकर की पहल पर उस अपने खुद के भवन को छोड़कर इस कालेज को एक बार फिर उसी जेल भवन में ले जाया गया।इसी दौरान शासकीय कन्या महाविद्यालय का नामकरण नेताजी सुभाषचंद्र बोस कन्या महाविद्यालय के रूप में कर दिया गया। लेकिन कालेज का स्थापना वर्ष तो एक ही है। व्यापम के विरोध में प्रदेश कांग्रेस के आव्हान पर 16 जुलाई को जिले में भी बंद का आव्हान किया गया था। कांग्रेस के इस बंद को जिल मुख्यालय लगभग सभी बड़े कस्बों में आशातीत सफलता मिलने से जिले के कांग्रेसी उत्साहित है। प्रदर्शनकारी युवा कांग्रेसी कार्यकर्त्ताओं पर पुलिस ने अश्रु गैस के गोलों के साथ जम कर लाठी भी भांजी जिसमें सिवनी जिले के बरघाट विस क्षेत्र के युवक कांग्रेस के अध्यक्ष देवेन्द्र ठाकुर भी घायल हो गये और उनके हाथ की हड्डी टूट गयी।

मुनमुन के सवाल से उठे कई सवाल-सिवनी के विधायक दिनेश मुनमुन राय ने नेता जी सुभाषचंद्र बोस कन्या महाविद्यालय के संबंध में विधानसभा में प्रश्न पूछा। इसका जवाब देते हुये प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने जवाब दिया कि,सिवनी के नेताजी सुभाषचंद्र बोस कन्या माविद्यालय के पास भवन नहीं हैं इस वजह से यूजीसी से राशि नहीं मिल पा रही है। जेल भवन की भूमि को महाविद्यालय को देने के लिये उच्च शिक्षा विभाग ने अर्धशासकीय पत्र लिखकर इस संबंध में कार्यवाही करने को लिखा है। विधायक के प्रश्न और मंत्री के द्वारा दिये गये जवाब से यह सवाल पैदा हो गया है कि क्या शहर के दो गर्ल्स कॉलेज है? ऐसा सवाल इसलिये उठ खड़ा हुआ क्योंकि सन 1980 के दशक में जिले में छात्राओं को उच्च शिक्षा मिले इसकी मांग उठने लगी थी। प्रदेश की तत्कालीन दबंग कांग्रेस सरकार की मंत्री कु. विमला वर्मा की पहल पर जिले के सिवनी मुख्यालय में शासकीय कन्या महाविद्यालय खोला गया था जो अपने शुरुआती दिनों में एमएलबी स्कूल में लगा था। फिर कुछ समय बाद इसे जेल के भवन में स्थानान्तरित कर दिया गया था। जब प्रदेश के मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा थे तब प्रदेश के उच्चशिक्षा मंत्री चित्रकांत जैसवाल जिले के प्रभारी मंत्री थे। उसी समय इस कालेज के भवन के लिये राशि स्वीकृत हुयी और जिले की प्रथ महिला कलेक्टर श्रीमती आभा अस्थाना ने निकटवर्ती ग्रात बींझावाड़ा की लगभग 40 एकड़ शासकीय भूमि चिन्हित की जिसमें से 15 एकड़ जमीन गर्ल्स कालेज के लिये आवंटित की गयी एवं शेष जमीन कलेक्टरेट सहित ऐसे शासकीय कार्यालयों को आवंटित कर दी थी जिनके स्वयं के भवन नहीं थे। इसी भूमि पर प्रदेश के मुख्यमंत्री वोरा ने गर्ल्स कालेज का भूमिपूजन किया था जिसमें कालेज भवन के साथ साथ पचास पचास सीट के दो हास्टल भी बनाये गये थे। छुट पुट स्थानीय विरोध के बाद भी गर्ल्स कॉलेज नये भवन में ले जाया गया एवं आवागमन की दिक्कत को देखते हुये एक कालेज बस भी सरकार ने दिलायी थी।लेकिन शहर से दूरी को मुद्दा बनाकर जब विरोध पुनः हुआ तो तत्कालीन भाजपा विधायक नरेश दिवाकर की पहल पर उस अपने खुद के भवन को छोड़कर इस कालेज को एक बार फिर उसी जेल भवन में ले जाया गया। और कालेज के उस भवन का तो कुछ उपयोग हो भी रहा है लेकिन हास्टल के दोनों भवन बिना चालू हुये ही खंडहर में तबदील होते जा रहे है। तात्कालिक राजनैतिक लाभ के लिये गये इस निर्णय से कालेज का कितना नुकसान हुआ इसका अंदाज तो सदन में दिये गये उच्च शिक्षा मंत्री के बयान से ही लग रहा है खुद का भवन ना होने के कारण यूजीसी के अनुदान प्राप्त नहीं हो सकते है। इससे कालेज का पूरा विस्तार ही थम गया है। इसी दौरान शासकीय कन्या महाविद्यालय का नामकरण नेताजी सुभाषचंद्र बोस कन्या महाविद्यालय के रूप में कर दिया गया। लेकिन कालेज का स्थापना वर्ष तो एक ही है। सदन में उच्च शिक्षा मंत्री गुप्ता द्वारा दिये गये बयान से प्रतीत होता है कि शहर में या तो दो गर्ल्स कॉलेज हैं या फिर उन्होंने सदन में गलत बयानी की है कि जिले के कन्या महाविद्यालय के पास अपना खुद का भवन नहीं हैं क्योंकि नेता जी सुभाषचंद्र बोस कन्या महाविद्यालय के रूप में जिले के शासकीय कन्या महाविद्यालय का ही नामकरण किया गया था। अब यह एक शोध का विषय बन गया है कि जिस कालेज का एक भवन हो और वह अपने भवन में नहीं लग रहा है तो क्या यूजीसी उसी कालेज के लिये दूसरा भवन बनाने के लिये राशि देगी? और क्या जिले की छात्राओं को दिखाये जा रहे सपने पूरे होंगें? इनके जवाब भविष्य की गर्त में छिपे हुये हैं।
व्यापम के विरोध में कांग्रेस का बंद रहा सफल-व्यापम के विरोध में प्रदेश कांग्रेस के आव्हान पर 16 जुलाई को जिले में भी बंद का आव्हान किया गया था। कांग्रेस के इस बंद में जिले भर में व्यवसायिक प्रतिष्ठान बंद रखने का आव्हान कांग्रेस ने किया था। कांग्रेस के इस बंद को जिला मुख्यालय लगभग सभी बड़े कस्बों में आशातीत सफलता मिलने से जिले के कांग्रेसी उत्साहित है। जिस तरह से भाजपा के समर्थकों ने सोशल मीडिया पर बंद का विरोध किया था उससे ऐसा लगता था कि भाजपा के लोग सड़क पर उतरकर शायद बंद का विरोध करें। कुछ जानकारों का ऐसा मानना है कि भाजपा के कुछ नेताओं की ऐसी तैयारी भी थी लेकिन शहर में कांग्रेस के सभी गुट के लोगों के एक साथ सड़क पर उतर कर बंद में सहयोग देने के लिये की गयी अपील अधिक कारगर साबित हुयी और लोगों ने स्वयं ही अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। प्रदेश के युवाओं की योग्यता के साथ किये गये शिवराज सरकार के व्यापम के खूनी खिलवाड़ के खिल
ाफ लोगों में आक्रोश था और इसी के चलते कांग्रेस को अपने बंद में सफलता मिली। राष्ट्रीय और प्रादेशिक स्तर पर कांग्रेस जिस आक्रामक तरीके से इस मामले को उठा रही है उससे प्रदेश में पहली बार भाजपा और शिवराज सिंह बेकपुट पर दिखायी दे रहे हैं। इस मामले में भाजपा आला कमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के स्तीफे को लेकर चाहे जो भी निर्णय ले लेकिन इस मामले से प्रदेश में भाजपा की साख को जरूर धक्का लगा है।  
घेराव के दौरान देवेन्द्र ठाकुर की हड्डी टूटी-व्यापम के विरोध की श्रृंखला में प्रदेश युवक कांग्रेस ने मुख्यमंत्री निवास के घेराव की घोषणा की थी। इसमें जिले से कई युवा कांग्रेसी शरीक हुये थे। प्रदर्शनकारी युवा कांग्रेसी कार्यकर्त्ताओं पर पुलिस ने अश्रु गैस के गोलों के साथ जम कर लाठी भी भांजी जिसमें सिवनी जिले के बरघाट विस क्षेत्र के युवक कांग्रेस के अध्यक्ष देवेन्द्र ठाकुर भी घायल हो गये और उनके हाथ की हड्डी टूट गयी। कांग्रेस शासनकाल में कभी ये ही भाजपा के कार्यकर्त्ता गला फाड़ फाड़ कर नारे लगाते थे कि लाठी गोली की सरकार नहीं चलेगी चलेगी और आज भाजपा की सरकार ही अपने मुख्यमंत्री के निवास तक लोग ना पहुंच पाये इसके लिये लाठियां भांज रही है। “मुसाफिर” 
दर्पण झूठ ना बोले सिवनी
28 जुलाई 2015 से साभार