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31.5.10

क्या लापरवाह छात्र भी बन सकते है पत्रकार !


लापरवाह छात्र मैं उन छात्रों की बात कर रहा हूं जो देश के जाने-माने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एंव संचार विश्वविद्यालय नोएड़ा कैंपस की। वैसे तो इस युनिवर्सिटी में छात्रो को प्रवेश परीक्षा पास कर ही दाखिला दिया जाता है जिसका मतलब छात्रों में वाकई पत्रकार बनने के गुण है। लेकिन छात्र इसके विपरीत ये सोचते है कि माखनलाल में दाखिला मिलने के बाद वो पत्रकार बन गये है जो सोच शायद मेरे हिसाब से बिल्कुल गलत है।
नोएड़ा कैंपस में रोजाना सुबह 10 बजे क्लास शुरू होने का समय है। कुछ छात्र समय पर पहुंच जाते है, लेकिन कुछ ने तो कसम ही खा रखी है कि हम समय पर नहीं पहुंचेंगे। छात्रों के पास तमाम ठोस बहाने है सर जाम लग गया था, आटो खराब हो गया था, सर पानी नहीं आ रहा था, देर से उठ पाये है। इतना ही नहीं कुछ वरिष्ठ बुद्धीजीवी छात्र ऐसे भी है जिनका मानना है कि कैंपस में आने वाली फैक्लटी तो किताब से पढ़ कर पढ़ाती है अपने अनुभव शेयर करती है बकवास पढाते है हमें नहीं पढ़ना है, हम तो उनसे अधिक जानते है। माना की आप उनसे ज्यादा जानते है लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आप उनकी क्लास ना लें। बहरहाल, हम आपको एक करिश्मा बताते है- जो छात्र दस बजे कभी कालेज नहीं पहुंचे वो आज सुबह साढ़े आठ बजे शुरू होने वाले प्रेक्टिकल परीक्षा के दौरान कैंपस में समय पर पहुंच गये क्योंकि यहां सवाल परीक्षा का था। वर्तमान में आधे से अधिक मीड़िया संस्थान में सुबह 6 बजे से शिफ्ट शुरू होती है तो ये लोग वहां कैसा बहाना बनायेंगे। ओह! माफ करना वहां तो बॉस का डंडा सभी की अक्ल को ठिकाने लगा देता है। खैर आज कहीं कोई जाम नहीं था, किसी की बस नहीं छूटी थी और कोई देर से नहीं उठा था सभी सही टाईम पर कालेज में उपस्थित थे। अगर ऐसी स्थिति क्लास के दौरान होती तो शायद पढ़ाई और नॉलेज का स्तर कोई ओर ही होता। छात्रों के लापरवाही से तो ऐसा लगता है वो शायद पत्रकार नहीं बन पायेंगे, क्योंकि जो क्लास ना ले सके, समय पर नहीं पहुंच सके वो क्या खाक पत्रकार बनेगा।

वैसे मेरा एक मानना यह भी है कि अगर कालेज प्रशासन छूट ना देता तो शायद छात्र इतने लापरवाह नहीं होते क्योंकि परेशानी और मुश्किल एक दो लोगों के साथ होती है सभी के साथ नहीं। कालेज के प्रशासन को इस बात पर ध्यान होगा कि कमीं कहां पर है क्योंकि देश में माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्विद्यालय का नाम है। इसकी गरिमा छात्रों और कालेज प्रशासन के हाथों में ही है। मैं भी इसी कालेज से एम. जे प्रथम वर्ष का छात्र हूं।

सूरज सिंह।

3 comments:

Akhtar Khan Akela said...

surj singh ji yeh hindustaan he yhaan laaprvaah or sifaarishi log hi ptrkaar,i a s, ips bnte hen fikr mt kro aap bhi aaprvaah bno khud ke prti nhin dsh ke prti nhin jntaa ke prti laaprvaah bnoge to bs khub aage bdhoge. akhtar khan akela kota rajasthan mere ahindi blog. akhtarkhanakela.blogspot.com he

brajkiduniya said...

आप ठीक से क्लास करते हैं न.मैं भी वहां का एम्.जे. का छात्र रह चुका हूँ ६-८ बैच का.मेरी हाजिरी १०० प्रतिशत होती थी.भगत सर से पूछिएगा.मेरा आशीर्वाद आपके साथ है.

aditya mishra said...

yar librairy me jakr achhi kitabon ki photo copy karakr padho...aur 2-3 mahine kahin interndhip karlo....hindustan-jansatta- me ho jae to bahut achha....baki aise hi chakta hai....mai bahut khus hu ki tumne apne man ki bat kahi...mai bhi MAKHANLAL UNIVERSITY BHOPAL KA MABJ 2008-2010 STUDENT THA..ABHI DAINIK JAGRAN REWA (M.P) ME TRAINEE REPORTER HU....DONT WORRY NAUKRI MIL JAYEGI...LEKIN INTERSHIP JARUR KARLO....adityagkp2010@gmail.com