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31.7.12

मेरी मिल्कियत । (गीत)


मेरी मिल्कियत । (गीत)




(सौजन्य-गूगल)


है  तड़पना मेरी मिल्कियत, तुझे छोड़ना है शराफ़त ।

चाहता  था  की  बनी  रहे, दरमियाँ  हमारी ये उलफ़त ।

(उलफ़त = पारस्परिक संबंध ।) 

अंतरा-१

वादा - ए - वफ़ा और कसमें वो, लबरेज़ निगाहें प्यार से..!

मिले आंसू-आंहें,टूटा दिल, लिखी नसीब में  ये विरासत..!

है  तड़पना  मेरी  मिल्कियत, तुझे  छोड़ना है शराफ़त ।

(लबरेज़=लबालब)

अंतरा-२

लिखे  जायेंगे,  अफ़साने    कई,   होंगे  हमारे  चर्चे   भी..!

सब बातें थीं, बातों का क्या? करे कौन हम पर शफ़क़त..! 

है  तड़पना  मेरी  मिल्कियत, तुझे  छोड़ना  है शराफ़त ।

(शफ़क़त =पीड़ित व्यक्ति के साथ दया भाव । )

अंतरा-३

ढूंढता  हूँ   अपने  वारिस  को, पूछता  रहा  मैं अपनों  से ।

चलो, आप से भी पूछता हूँ, क्या है आप का भी अभिमत ?

है  तड़पना  मेरी  मिल्कियत, तुझे  छोड़ना है शराफ़त ।

(अभिमत = विचार,राय )

अंतरा-४.

कुछ  कर  सको  तो अब  यही, दुआ करना तुम  मेरे  यार ।

मिले ना मुझे,प्यार फिर कभी, न हो ज़िंदगी में ये अज़मत ।

है   तड़पना  मेरी  मिल्कियत, तुझे  छोड़ना  है  शराफ़त ।

(अज़मत = चमत्कार ।)

मार्कण्ड दवे । दिनांक-२९-७-२०१२.

1 comment:

ana said...

bahut hi sundar prastuti