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11.1.17

धीरेन्‍द्र श्रीवास्‍तव की यह कविता आप से बहुत कुछ कहती है...

यारों हिटलर का नाश करो

धीरेन्‍द्र श्रीवास्‍तव
जो गुजर गया मत याद करो।
अब समर क्षेत्र की बात करो।
देखो आगे हिटलर शाही।
त्रिशूल तानकर नाच रही।
जुमलों की फसलें काट रही।
दरवाजा आंगन बाँट रही।
इस बंटवारे से बचने को,
जो मित्र हैं उनसे साथ करो।
जो गुजर गया मत याद करो।
अब समर क्षेत्र की बात करो।

चोरों का कर्जा छोड़ दिया।
मेरा गुल्लक भी तोड़ दिया।
आकाश में पसरा कुहरा है।
धन अपना उसका पहरा है।
अपना धन पाने के खातिर,
इस लूट का पर्दाफाश करो।
जो गुजर गया मत याद करो।
अब समर क्ष्रेत्र की बात करो।
जिससे हर रोज लड़ाई है।
उसको भी दिया बधाई है।
जो ताज हिमालय रौंद रहा।
उसको ही बैंकिग सौंप रहा।
है इससे देश बचाना तो,
मिलजुलकर इसको मात करो।
जो गुजर गया मत याद करो।
अब समर क्षेत्र की बात करो।
भूलो नाली, दीवार, भीत।
भूलो सड़कों की मारपीट।
छोड़ो हदबन्दी का झगड़ा।
छोड़ो चकबन्दी का झगड़ा।
शनिवार, शुक्र, रविवार भूल,
केवल वोटों से वार करो।
जो गुजर गया मत याद करो।
अब समर क्षेत्र की बात करो।
किसके हिस्से में बाग़ पड़ा,
किसके हिस्से में है परती।
किसका है पलिहर पर कब्जा,
है मिली किसे बंजर धरती।
हर झगड़ा फिर फरिया लेंगे,
पहले हिटलर का नाश करो।
जो गुजर गया मत याद करो।
अब समर क्षेत्र की बात करो।
यारों हिटलर का नाश करो।
यारों हिटलर का नाश करो।

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