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4.10.13

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-नितिन सबरंगी
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SA lsuk bls cM+s [krjs ds :i esa ns[kdj eqdkcyk Hkh dj jgh gSA ikfdLrku dks njvly eqagrksM+ djkjk tokc lsuk vksj eqYd ds yksx dHkh dk ns pqds gksrs ysfdu gekjh fl;k;r dk uje :[k bls BaMk djus dk dke djrk gSA  आकाओं की नरमी ही है कि घुसपैठियों की संख्या पहले की मुकाबले बढ़ी है। पाकिस्तान अपनी खंजर मारने की फितरत नहीं छोड़ता ओर हम जान की कीमत पर उदारता। हमारे वतन ओर हमारी हिम्मत बहादुर सैनिकों से है, सफेदपोश नेताओं से नहीं! वतन के रखवाले सैनिक जागते हैं इसलिए हम महफूज सोते हैं! जनरल बिक्रम सिंह ने कहा है कि "घुसपैठ के लिहाज से यह काफी मुश्किल वक्त है. अतीत में भी घुसपैठ होती रही है. लेकिन निश्चित रूप से अब अधिक घुसपैठ हो रही है." पाकिस्तान को जरूरत सख्त जवाब की है। जय हिन्द!

17.8.13

खूंखार आतंकी टूंडा आ ही गया गिरफ्त में

मोस्ट वांटेड खूंखार आतंकवादी बम बनाने का एक्सपर्ट अब्दुल करीम उर्फ टूंटा आखिर पकड़ा गया। यह वह शख्स है जिसने पश्चिमी यूपी समेत देश के कई हिस्सों में आतंकवाद के बीज रोपे। देश में आतंक की पैदाईस करने में इसका बहुत बड़ा हाथ रहा है। हैरत यह कि निशाने पर होने के बावजूद यह पहली बार ही पकड़ में आया। पत्रकारिता के सफर में अब्दुल करीम उर्फ टूंडा पर कई बार लिखने का मौका मिला।  हिन्दुस्तान में ही जन्मे गाजियाबाद के पिलखुआ कस्बे के रहने वाले इस नापाक गद्दार हैवान के इरादे शुरू से ही खतरनाक रहे थे। खून-खराबा, हिंसा उसे पसंद थी। बम बनाते वक्त हुए एक विस्फोट में इसका हाथ उड़ गया तभी नाम टूंडा पड़ा। कोई दोराय नहीं कि यदि हिन्दुस्तान में ऐसे हैवान न हो तो पाकिस्तान की औकात इतनी नहीं कि वह हम पर चोट कर सके। पत्रकारिता के सफर में अब्दुल करीम उर्फ टूंडा पर कई बार लिखने का मौका मिला। कभी चिकित्सक रहे टूंटा का शुरू से ही देश को आतंकवाद की आग में झोंकने का मकसद रहा। उसका बीस साल पुराना आपराधिक इतिहास है। जिसमें सीरियल बम धमाके सबसे ज्यादा शामिल रहे हैं। चार भाषाओं पर उसकी पकड़ है। गिरफ्तारी के वक्त भी इस आतंकी की नजरों का अंदाज शातिराना था। दिल्ली पुलिस के सीपी एस0एन0 श्रीवास्तव ने उसकी गिरफ्तारी का खुलासा किया। कोई दोराय नहीं कि यह पुलिस के साथ हर हिन्दुस्तानी के लिये बड़ी सफलता है। कानूनी मजबूरियां न होती, तो शायद इस आतंकी को सजा बिना इंतजार के लिये गई होती। चार भाषाएं बोलने वाला यह बम एक्सपर्ट देखिए क्या राज उगलता है। ऐसे गद्दारों ने जो जख्म लोगों को दिये हैं शायद ही वह कभी भर सकें। 

21.11.12


कसाब की मौत से खुश सच्चे हिन्दुस्तानी
आज सुबह पाकिस्तान की हांडी के सड़े चावल अजमल कसाब की मौत की खबर मिली तो मन सच्चे हिन्दुस्तानी की तरह खुश हो गया कि आखिर देश का दुश्मन 166 लोगों की मौत का जिम्मेदार मर ही गया। उसके शव को जेल में ही दफना दिया गया। कहा जा रहा है कि कब्रिस्तान वालों ने उसके लिये जगह नहीं दी। ठीक ही किया जो नापाक जिस्म को जगह नहीं दी। हालांकि उसे बहुत पहले मर जाना चाहिए था, लेकिन कानूनी अड़चनों के बीच उसे जिंदा रखा गया। अफसोस यह भी कि उसे जिंदा रखने में करोड़ों रूपये खर्च हो गए। उसकी हाई सिक्योरिटी में बहुत खर्चा हो रहा था। यह पैसा जनता था। जेल में रहने के दौरान कसाब में इतना गुस्सा था कि सीसीटीवी कैमरों पर थूकता था। मनचाहा खाना चाहता था। गालियां देता था। नापाक जिस्म को नापाक पाकिस्तान ने लेने से इंकार कर दिया क्योंकि दोगले चरित्र से दुनिया को वह यह नहीं बताना चाहता था कि आतंक का पक्षधर है जबकि दुनिया हकीकत जानती है। वैसे पाकिस्तान खुद भी अब आस्तीन के सांपों आतंकवाद की आग में झुलस रहा है। सवाल उठाये जा रहे हैं कि कसाब की मौत डेंगू से हुई है और सरकार श्रेय ले रही है। अब कसाब डेंगू से मरा हो या फांसी से इससे फर्क भी क्या पड़ता है, उसने मरने से हर हिन्दुस्तानी खुश है क्योंकि उसने कभी ने भरने वाले जख्म दिये हैं। यह संदेश भी जाना चाहिए कि आतंकी हरकतें करने वालों का अंजाम ऐसा ही होगा। अभी ओर भी आतंकी हैं जिन्हें फांसी दी जानी है। दुआ करे जल्द उनका नंबर आये। अफसोस यह भी कि ऐसे गद्दार भी होंगे जो उसकी मौत पर गुपचुप मातम मना रहे होंगे।

22.5.11

आतंकवादी गदर्भराज । part-1-2-3


आतंकवादी गदर्भराज ।
(सौजन्य-गूगल)



क्षमिणं बलिन साधुर्मन्यते दुर्जनोऽन्यथा।
दुरुक॒तमप्यतः साधोः क्षमयेत॒ दुर्जनस्य न॥


अर्थात्- सज्जन,क्षमाशील मनुष्य को बलवान और दुष्ट लोग,क्षमाशील मनुष्य को निर्बल मानते हैं । ऐसे क्रम के चलते सज्जन व्यक्ति के ताने सहन कर लेना, पर दुष्ट लोगों के  कटु वचन का उचित जवाब देना चाहिए ।

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प्यारे दोस्तों,


रविवार  की  मदमस्त सुबह के वक़्त, मेरे घर के बरामदे में बैठ कर, अभी तो मैंने आज का अख़बार हाथ में थामा ही था कि अचानक, हमारे घर के सामनेवाले, हमारे पड़ोसी शर्माजी ने, अपने घर के बरामदेमें खड़े होकर, अपने हाथ में अख़बार उठाकर मेरी ओर हिलाते हुए, अत्यंत उत्तेजना-पूर्ण आवाज़ में मुझ से सवाल किया,

" दवेजी,आपने आज का अख़बार पढ़ा? अमेरिका ने पाकिस्तान के एबटाबाद में जाकर आतंकवाद के जनक,आतंकी ओसामा बिन लादेन पर, हेलिकाप्टर से हमला करके उसे मार कर समंदरमें दफ़ना दिया..!! हमारा देश कितने सालों से हमारे लिए मोस्ट वॉन्टेड आतंकी दाऊद इब्राहिम को हमें सौंपने के लिए पाकिस्तान को बार बार प्रेम पत्र भेज रहा है, तो क्या अमेरिका के माफिक हम भी दादागीरी करके पाकिस्तान में घुस कर उसे ज़िंदा या मुर्दा पकड़ नहीं सकते ? हम अमेरिका से कम है क्या? समझ में नहीं आता, हमारा देश वीर भगतसिंह का है या ठगतसिंह का?"

शर्माजी के ऐसे उत्तेजनापूर्ण सवाल से मेरे भीतर का प्रखर साहित्यकार (?)मानो जाग उठा । अपनी अक्ल पर जितना था उतना ज़ोर आज़माते हुए, शर्माजी के ज्ञान वृद्धि हेतु, जैसे ही मैंने अपना मुँह खोला ही था..!! बस उसी वक़्त मेरी अर्धांगिनी ने, मेरे पास आकर पुराने कुछ रद्दी कागज़ात का ढेर लगा दिया और आदेश किया,"लीजिए, अख़बार बाद में पढ़ना,पहले ये रद्दी कागज़ देख लो, अगर काम के न हों,तो उसे फाड़कर कचरेवाले को दे देना, घर साफ हो जाएगा..!!"

शर्माजी के ज्ञानवर्धन के लिए खुले हुए मेरे होंठ से, वीर भगतसिंह वाला `इन्कलाब ज़िंदा बाद` जैसा देश भक्ति का कोई नारा बाहर आए, उसके पहले ही पत्नी का यह आदेश पाकर, नतमस्तक होकर, मेरे मुँह से सिर्फ `सू..सू..सू..हूं..हूं..हूं..हाँ..देखता हूँ..!!` जैसे   बेकार के शब्द निकलते देख कर, शर्माजीके चेहरे पर, किसी ग़लत आदमी(?) से सवाल करने का अफसोस साफ दिखाई देने लगा..!!

आखिर, एक पत्नीव्रता-लाचार पति के ऐसे बुरे हालात पर मानो तरस आ रहा हो, शर्माजी बिना  कुछ बोले,बिना कारण अपना सिर दांये बायें हिलाते हुए, अपने घरके भीतर चले गए ।

हालाँकि, धर्म पत्नी फ़ालतू आदेश देकर और शर्माजी फ़ालतू अफसोस व्यक्त करके घर में तो चले गए,पर मेरे मन में छुपे साहित्यकार(?) को दिन दहाड़ें, दिन के सपने के गहन सागर में गोते लगाने के लिए बरामदे में ही छोड़ गए...!!

"अ..हा..हा..हा..!! दिन दहाड़ें, मुझे ऐसा अद्भुत  स्वप्न   आया कि, अमेरिका की तर्ज पर हमारी केन्द्रीय सरकार के आदेश पर हमारे जवाँमर्द सैनिक भी, पाकिस्तान के भीतर घुस कर आतंकी दाउद को जिंदा पकड़कर भारत में उठा लाए हैं,ऐसे समाचार आज के अखबार में छपे हैं और ऐसे मर्दाना समाचार पढ़कर मैं अत्यंत उत्तेजित होकर मेरे ख़्वाबिया हवा महल में, मारे खुशी के  उछल रहा हूँ..!!

आ..हा..हा, आज ज़िंदगी में पहली बार मुझे, अपने देश के राष्ट्रपति,अपनी केन्द्रीय सरकार और पंत प्रधान श्रीमनमोहनसिंहजी में, सचमुच भारतीय शेर की अद्भुत साहस कथा के दर्शन हुए..!!

सारा विश्व ये समाचार सुनकर आश्चर्य मुग्ध हो कर हम पर बधाई की बौछार कर  रहा था..!! 

दिल्ली में कैबिनेट की मिटिंग पर मिटिंग हो रही थी और हमने पाकिस्तान को आतंकवादी देश जाहिर कर दिया था,जिसके चलते एक के बाद एक विश्व के हमारे दूसरे  मित्र देश भी हमारी घोषणा का समर्थन कर रहे थे । (हालाँकि,अभी तक अमेरिका ने हमें समर्थन नहीं दिया,पर कोई दिक्कत नहीं,उसे तो हम बाद में देख लेंगे?)

श्रीमनमोहनसिंह के ऐसे साहसिक कदम से,सभी देशवासीओं के तन में वीरत्व का जुनून फैलने के कारण, पूरा देश सार्वजनिक तौर पर आनंद-उत्साह से देश भक्ति के नारे लगाता हुआ,नाचता-गाता हुआ चिल्ला रहा है..!!

देश की सारी प्रमुख न्यूज़ चैनलों पर,दाउद को पकड़ने के दिलधड़क ऑपरेशन के, जारी किए गए वीडियो क्लिपिंग्स बार बार अत्यंत रोचक शैली में दिखाए जा रहे हैं..!!

हमने आजतक कभी जिनकी शक्ल भी न देखी हो,ऐसे मिलिट्री के लान्स नायक से लेकर मेजर और उससे भी उपर की रेन्क के निवृत्त आला अफ़सर तक, तथाकथित निष्णातों को पकड़-पकड़ कर कैमरे के सामने बिठा कर, आतंकवादी दाउद पकड़ा गया उस वक़्त  जल्दी सवेरे सवेरे, उस बेचारे को, हमारे कमान्डोने, चाय-नाश्ते से लेकर,  ठीक से स्नान इत्यादि करने का मौका भी, दिया होगा कि नहीं? जैसे नाज़ुक विषय पर, बार बार एक ही सवाल दोहरा के, सभी संवाददाता अपनी-अपनी चैनल के टी.आर.पी. बढ़ाने का जुगाड़ कर रहे थे..!! 

वैसे संवाददाता का इसमें क्या दोष, वे बेचारे तो बढ़ा चढ़ा कर, ऐसी चर्चा कर के, दाउद को पकड़ने के दिलघड़क `ऑपरेशन दाउद` के बारे में, हमारी जिज्ञासा का समाधान कर के, आखिर में हमारे अमूल्य ज्ञान में वृद्धि करने की भरपूर कोशिश कर रहे थे..!!

हालाँकि, हमारी सरकार ने  `ऑपरेशन दाउद`के जारी किए हुए पूरे वीडियो क्लिपिंग्स में, दाउद के बाथरूम में धो ने के लिए पड़े हुए,दाउद के चड्डी-बनियान का दृश्य लगातार दिखा कर, सचमुच दाउद स्नान इत्यादि करके, जब  चाय-नाश्ता करने बैठने ही वाला था, उसी वक़्त, हमारे कमांडो के हाथों जिंदा पकड़ा गया,इस बात को साबित करने के लिए,सभी चैनलों के संवाददाता बेताबी से प्रयत्न कर रहे थे..!!

बीच बीच में हमारे छोटे से टीवी के भीतर, छोटी-छोटी  दूसरी चार-पांच खिड़की से (Windows) झांक कर, टीवी के क्षेत्रीय संवाददाता, उनके सहयोगी कैमरामेन को,`कैमरा यहाँ घुमाना-ज़रा वहाँ घुमाना` जैसी सूचनाएँ दे कर, पूरे देश के मूख्य नगरों की अति उत्साहित जनता के आघात-प्रत्याघात तथा ढोल-नगाड़े-बाजे सहित, आनंदोत्सव के दृश्य, सारे दर्शकों को बार-बार दिखा रहे थे..!!

पर, अरे...!! ये क्या? कुछ चैनल के रिपोर्टर तो, पूर्व प्रधानमंत्री श्रीअटल बिहारी वाजपेयीजी का साक्षात्कार करने उनके निवास स्थान पर पहुँच चुके हैं..!! 

अपनी तबियत ना-दुरुस्त होते हुए भी श्रीअटल बिहारी वाजपेयीजी अपने निवास स्थान के बरामदे में, आराम कुर्सी में बैठ कर, बचे कुचे जोश के साथ, अपनी सुप्रसिद्ध कविता, "हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा. काल के कपाल पर लिखता-मिटाता हूँ."ललकारते हुए, साथ-साथ श्रीलालकृष्ण आडवाणीजी के हाथों अपना मुँह भी मीठा करवा रहे हैं ..!!

एक रिपोर्टर श्रीअटलजी से सवाल कर रहा है," ये बताइए, बांग्ला देश के विजय के समय,श्रीमती इंदिरा गांधी में आप को, माँ दुर्गा के दर्शन हो रहे थे, क्या इस वक़्त `ऑपरेशन दाउद` के सफल होने पर, आज एक बार फिर,आप को श्रीमती सोनिया गांधी में, माँ दुर्गा के  दर्शन हो रहे हैं?"

रिपोर्टर का सवाल ठीक से समझने की कोशिश में, श्रीवाजपेयीजी ने अपना खुला मुँह ज्यादा देर तक खुला ही  छोड़ दिया,इसी बीच दूसरी चैनल के रिपोर्टर ने दूसरा सवाल पूछ लिया," क्या ये बात सच है कि आपके प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान पाकिस्तान के साथ हुए `आगरा वार्तालाप` में  वहाँ के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ के साथ,` वन टू वन` मिटिंग में, दाउद को पकड़ ने को लेकर,आप दोनों के बीच गुप्त समझौता हुआ था?" 

इस सवाल का जवाब देने के लिए भी श्रीवाजपेयीजी ने जैसे अपना मुँह फिर खोला, उसी वक़्त श्रीमतीसुष्मा स्वराज ने अचानक, उनके अधखुले मुँह में मिठाई का टुकड़ा रख दिया, अब किसी को खाते समय तकते रहना तो बहुत बूरी बात है..!! अतः मैंने चैनल ही बदल दिया ।

जैसे ही दूसरी चैनल पर मैंने शिवसेना प्रमुख श्रीबालासाहब और गुजरात के मुख्यमंत्री श्रीनरेन्द्र मोदीजी को देखा..!! उनका व्यू जानने के लिए, उत्सुकता वश मैं वहीं थम गया । वे दोनों एक ही सुर में, एक ही बात कह रहे थे,"हमारी केन्द्रीय सरकार को ऐसे मर्दानगी भरे कदम बहुत समय पहले उठा लेने चाहिए थे, अमेरिका के, `ऑपरेशन ओसामा` के बाद किए गए इस `ऑपरेशन दाउद` को सब अमेरिकन कमांडो के,`Geronimo IKEA - enemy killed in action.`कि हूबहू नक़ल ही मानेंगे..!!"

अरे..!! इसी चैनल पर अभी अभी ब्रेकिंग न्यूज़ फ्लैश हो रहा है..!! 

हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के चैरमेन सैयद शाह गिलानी ने कश्मीरी अवाम को, बेकसूर दाउद को तुरंत रिहा करवाने के लिए, अगले जुम्मे के दिन,`नमाज़-ए-आज़ादी` पढने के लिए आह्वान किया है?

इंडिया टीवी चैनल के सर्वेसर्वा श्रीरजत शर्मा,`जनता की अदालत` में योगगुरु बाबा श्रीरामदेवजी पर आरोप थोप रहे हैं," आप हर वक़्त वर्तमान सरकार की टीका टिप्पणी करते हैं, सरकार के ऐसे साहसिक कदम के बारे में अब आप क्या कहेंगे?"

यह सुनकर, बाबा अपने पेट के नाभी वाले हिस्से को,  पीछे  मेस्र्रज्जु तक धकेल कर, पेट को श्रीरजतजी के सामने गोल-गोल घुमाते हुए, गोल-मोल उत्तर देते हैं,

" देखिए..सुनिए..आप ही बताइए..!! ये सरकार कितनी बड़ी निकम्मी और नाकारा है..!! मैं,  चलन से  अधिकतम मूल्य की नोट रद्द करने की उनसे माँग करता हूँ, तो ये लोग देखो, तीस जुन २०११ से `चवन्नी` रद्द करने का एलान कर देते हैं? भ्रष्टाचार मिटाने का हमारा लक्ष्य इस तरह पूरा हो पाएगा क्या? दाउद तो पकड़ा गया,पर उसकी मदद से, हमारे भ्रष्ट नेताओं ने, फोरेन की बैंकों में, जो साढे चार ह..ज़ा..र करोड़ रुपया जमा किया है उसे वापस लाना अभी बाकी हैं ना..हैं..ई..हैं..ई..हैं..ई?

इन सभी व्यू में श्रीशरद पवारजी ने अपने बिलकुल बेतुके व्यू भी जोड़ दिए है, वे कह रहे हैं," कोई कुछ भी कहता हो, महँगाई के बारे में भले ही मैं भविष्यवेत्ता नहीं हूँ, पर मैंने भविष्यवाणी की थीं जो सच्ची हो गई,`ऑपरेशन दाउद` की प्रेरणा पाकिस्तान को क्रिकेट वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में  हरा कर, हमारे `धोनी आणी मंडली` ने ही दी है..!!"

इतने सारे लोगों के साथ कुछ गिने चुने स्थानीय काँग्रेसी नेता(?) `ऑपरेशन दाउद` का सारा श्रेय श्रीमती सोनिया गांधी और युवराज श्रीराहुल गांधी के सफल नेतृत्व को दे रहे हैं ।  

भगवान शिवजी के गले में लिपटे हुए सांप की तरह,बिना वजह गले में मफ़लर लपेट कर, अत्यंत गंभीर मुख मुद्रा धारण कर के, कॉग्रेस के कदावर नेता श्रीदिग्विजयसिंहजी, किसी भी नपुंसक की मर्दानगी को जगा देने वाला, शौर्यवान बयान कर रहे है," देखिए, हम आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए प्रतिबद्ध हैं..!!अब जब पाकिस्तान की संसद में, उनके प्रधानमंत्री श्रीयुसुफ रजा गिलानीजी, खुद ने ये बयान दिया है कि, आदरणीय मर्हुम शहीद श्रीओसामाजी लादेनजी को आतंकी बनानेवाला अमेरिका ही है? ऐसे में अगर भारत में अगले चुनाव में काँग्रेस स्पष्ट बहुमत के साथ श्रीराहुल गांधीजी के युवा नेतृत्व में केन्द्र में सत्तारूढ होती है तो, हम अमेरिका को भी सब से बड़ा आतंकवादी राष्ट्र ज़ाहिर कर के, वहाँ भी कमान्डो ऑपरेशन कर के दुनिया के सबसे बड़े आतंकवादी प्रेसिडन्ट ओबामा को भी ज़िंदा पकड़ कर ले आयेंगे?"

ये सुनकर श्रीदिग्विजयसिंह के इर्दगिर्द खड़े कई कार्यकर्ताओं ने, `देश का नेता कैसा हो? श्रीराहुल गांधी जैसा हो` के नारे लगाने शुरू कर दिए । 

एक स्थानीय काँग्रेसी नेता ने तो, जोश में आकर यहाँ तक कह दिया," हमारे युवा नेता श्रीराहुलजी जिस प्रकार अप्रतिम शौर्य दिखाते हुए, रात के अंधेरे में, भट्टा परसौल गाँव में घुस कर, सुश्रीमायावतीजी के आतंक के खिलाफ़ आवाज़ उठाने के लिए,` Geronimo IKEA` प्रकार के`ऑपरेशन लेन्ड`को अकेले ही अंजाम दे आए, इसे ध्यान में लेते हुए,अमेरिका में, आधी रात को, कमांडो ऑपरेशन कर के `ऑपरेशन ओबामा` को अंजाम देना,उनके लिए बस चुटकियोँ का खेल है..!!"

दोस्तों ये तो ग़जब ही हो गया..!! अभी-अभी पाकिस्तान ने हमारे कमांडो ऑपरेशन से भयभीत हो कर, हमारे गृह मंत्री श्रीचिदंबरमजी के दिए हुए मोस्ट वॉन्टेड आतंकवादी के लिस्ट के मुताबिक, सारे के सारे पचास आतंकवादी भारत में  बाय प्लेन भेज दिए  हैं..!! 

श्रीचिदंबरमजी ने, पाकिस्तान के गृहमंत्री श्रीरहमान मलिक को फोन किया और बताया कि, हमारी भेजी गई लिस्ट में तीन चार आतंकवादी के नाम ग़लती से अधिक लिखे गए हैं..!! फिर भी पाकिस्तान के गृहमंत्री श्रीरहमान मलिक  दिल्ली भेजे गए सारे के सारे पचास आतंकवादी भारत के पास ही रखने के लिए श्रीचिदंबरमजी से, ये कह कर, गिड़गिड़ा रहे है कि,

"हम ये बात मानने को तैयार ही नहीं है कि, जो देश पाकिस्तान में, रात के अंधेरे में छापा मार कर, अमेरिका जैसा साहसिक कमांडो ऑपरेशन करने की क्षमता रखता हो, उनके गृह मंत्री श्रीचिदंबरमजी द्वारा  भेजे गए लिस्ट में ग़लती हो ही नहीं सकती..!!"  

इतना कुछ देखने-सुनने के बाद, ठीक है, कोई कुछ भी कहे, मुझे अब पक्का यकीन हो गया है कि, हमारे सफल कमांडो `ऑपरेशन दाउद` के बाद..!!

* अब चाइना भी हम से भयभीत हो कर, जम्मू-कश्मीर के अलग नक्शे बनाना तुरंत बंद कर देगा..!! * जम्मू-कश्मीर के लोगों को अलग वीज़ा देने से पहले अब वह सौ बार सोचेगा..!! * हमारे हिमालय के आसपास,हमारी बिना इजाज़त लिए चाइना द्वारा  बनाये गए सारे मार्ग,वह बगैर माँगे हमें सुपुर्द कर देगा..!! * पाकिस्तान को परमाणु बम तकनीक से लेकर अन्य सारी सहायता वह बंद कर देगा..!! 

* हमारे देश की जनता अब वीर भगतसिंह, सावरकर, चंद्रशेखर आज़ाद के  देश प्रेम आदर्श को फिर से जीवित करेगी..!! 

* हमारे देश का युवा धन `ऑपरेशन दाउद` के जोश भरे माहौल से नये सिरे से चार्ज हो कर देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने की भावना को बढ़ावा देंगे..!!

आज के बाद, अमेरिका की दादागीरी,अंग्रेजों की बुद्धिमत्ता,जापान का देशप्रेम,इसराइल की हिम्मत, सउदी अरब की अमीरी, चीन की चालाकी जैसी सारी विशिष्टताओं को अपनाने की सलाह दे कर, देश का शासन युवाओं को सौंप कर, हमारे बूढ़े हो चले सारे नेता लोग, स्वैच्छिक एकान्त वास पसंद कर के, उनके जीवनकाल के दौरान हुए, कड़वे-मीठे अनुभव के अमूल्य (?) संस्मरण की किताबें लिखने का पून्य कार्य करेंगे..!!

इतना ही नहीं, ऐसे देशप्रेमी युवा शासन कर्ता, सत्ता संभालने के दूसरे ही दिन,अभी तक पकड़े गए सारे आतंकवादी दाउद, अफज़ल गुरु, अजमल कसाब और दूसरे कई देशद्रोही गुनाहगार को सैन्य कोर्ट में, हमारे देश विरुद्ध  षडयंत्र और अघोषित युद्ध के आरोप में, शीघ्र कार्यवाही कर के, चंद दिनों में देहांत दंड की सज़ा कराएँगे..!!

हालाँकि, मुझे तो अब डर सिर्फ एक बात का है, पाकिस्तान अगर चीन के बहकावे में आ कर, हम पर कहीं परमाणु बम से हमला करने का साहस कर देगा तब..!!

अरे..!! बम के गिरने और फटने की ये कैसी आवाज़ है? 


लगता है, आखिर बदला लेने के लिए पाकिस्तान ने हम पर परमाणु बम से हमला कर दिया लगता है, चलो जीव, अभी तो भाग कर घर में कही सलामत जगह ढूंढ कर छुप जाने में ही भलाई है? जान बची तो लाखों पाएँ..!!


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"दवेजी..अरे..दवेजी..!!! ये अखबार और कागज़ का ढेर, बरामदे में छोड़ कर कहाँ चले गए? देखिए,  आवारा गधे, आपके कागज़ात खा रहे हैं..!!

प्यारे दोस्तों, सामनेवाले घर के बरामदे में खड़े हो कर हमारे पड़ोसी शर्माजी, ज़ोर-ज़ोर से आवाज़ देकर, मुझे बाहर बुला रहे थे ।

मेरा सुखदाई  ख़्वाबिया हवा महल तब ध्वस्त हो गया जब, मैंने देखा कि, पाकिस्तान ने हम पर कोई परमाणु बम फेंके नहीं थे, बल्कि सोसायटी के बाहर मुख्य मार्ग पर किसी शादी के जूलुस में बाराती, बम जैसे बड़े पटाखे फोड़ रहे थे..!!

यहाँ मारे डर के भागते वक़्त, बरामदे में मेरे द्वारा छोड़े गए रद्दी काग़ज़ के कुछ अवशेष इधर-उधर पड़े थे..!!

मुझे अधिक दुःख तब हुआ जब मैंने देखा कि, मेरी धर्म पत्नी को आजतक लिखे हुए, इत्र की सुगंध से अभी तक महकते, मेरे  प्रेमपत्र का एक रद्दी बंडल भी, एक आवारा गधा बड़े मज़े लेकर चबा रहा था..!!

मेरे जैसे अति ज्ञानी(?), समर्थ विद्वान साहित्यकार के(?), अद्वितिय, अलौकिक, अद्भुत प्रेम की अभिव्यक्ति समान,  प्यार तथा  इत्र की सुगंध से महकते प्रेम पत्र की आखिर में ऐसी गदर्भ-मलोत्सर्गति? 

कुदरत का ये कैसा न्याय? 

अब क्या ये आवारा गधों द्वारा, मेरे प्यार और इत्र से महकते प्रेमपत्र के बंडल की, सुबह होते-होते तो नरकावासाद्‍गति हो जाएगी?
मैं अभागा, इसके आगे और कुछ न सोच पाया..!! 

खैर,जो होना था, सो हो गया, होनी को तो कौन टाल सकता है?

कई बार इस गदर्भ घटना के बारे में जब मैं सोचता हूँ तब ऐसा ध्यान आता  है, कई बरसों से  पाकिस्तान के  आतंकी अड्डे बंद करने और उनके वहाँ  छुपे मोस्ट वॉन्टेड आतंकवादी को हमारे हवाले करने के लिए, हम भी अपनी `लाचारी` का  इत्र छिड़क कर कई  बार अनगिनत प्रेमपत्र भेज चुके हैं..!! हाँ, ये बात और है कि, पाकिस्तान नामक `आतंकवादी गदर्भराज` हमारे प्रेमपत्र के बंडल को बड़े चाव से  चबा जाता है और रसीद के तौर पर डकार तक नहीं लेता है?

वैसे `रूझवॅल्ट` झूठ थोड़े ही ना बोलता होगा कि, 

" No one can make you feel inferior without your consent." 

- ELEANOR ROOSEVELT (1884-1962).U.S.Writer; Lecturer.

हमारे पड़ोसी शर्माजी कहते हैं," भारत की मोस्ट वॉन्टेड आतंकवादी लिस्ट की  `मानवीय भूल` की आजकल विश्व भर में जिस प्रकार फ़ज़ीहत हो रही है, उससे लगता है कि, ये सारे कांड का कर्ताधर्ता खुद `दाउद` है  क्योंकि, अमेरिका की `C.I.A`; पाकिस्तान की `I.S.I` और  हमारी `I.B.` से भी बढ़िया जासूसी नेटवर्क, आतंकवादी `दाउद`का है, क्या पता खुद को बचाने के लिए अमेरिका और पाकिस्तान सरकार के साथ गुप्त समझौता कर के, खुद दाउद ने `ओसामा बिन लादेन` का पता अमेरिका को दिया हो?"

मुझे लगता है, शर्माजी की बात में दम तो है..!! 

हालाँकि, इस ख़्वाबिया हवा महल सेम उम्मीद की एक किरन मुझे अवश्य दिखाई दे रही है । पाकिस्तान को पछाड़ने का स्वप्न आज मुझे आया है, कल दूसरे को,फिर तीसरे को, फिर चौथे को, बाद में सारे देश को और सब से आखिर में हमारे प्रधानमंत्रीजी तथा गृहमंत्रीजी को भी ऐसे मर्दाना स्वप्न आने लगेंगे..!!

और तब देख लेना इन मर्दों का करिश्माई कमाल? 

जिस दिन हमारी सरकार का दिमाग भड़क गया ना..!! उस रोज या तो पाकिस्तान/अमेरिका नहीं या फिर आतंकवाद नहीं..!! हम आतंकवादी पाकिस्तान, उसके गुरू घंटाल अमेरिका और/या तो उनके पैदा किये गए सारे आतंकीओं को हरगिज नहीं  छोड़ेंगे..!! (अगर पकड़े गये तो..ओ..ओ..ही..ही..ही..ही..!!)

वैसे, जनता तो ये मानती है कि,

"हस्ती अंकुशमात्रेण वाजी हस्तेन ताड्यते।
श्रृङ्गी लगुडहस्तेन खड्गहस्तेन दुर्जनः॥" - चाणक्य

अर्थात् - हाथी को अंकुश से, घोडे को हंटर से और जानवर को डंडे से वश में किया जा सकता है,परंतु  दुष्ट लोगों से मुक्ति पाने के लिए,उनका संहार करना पड़ता है ।"

बॉस, आप क्या मानते हैं? 

जय..जय..हिन्दुस्तान..!! 

जय..जय विद्वान पाठकश्री..!!

मेरा ब्लॉग-


मार्कण्ड दवे । दिनांकः २०-०५-२०११.  

21.5.11

आतंकवादी गदर्भराज । part-2


आतंकवादी गदर्भराज ।
(सौजन्य-गूगल)




देश की सारी प्रमुख न्यूज़ चैनलों पर,दाउद को पकड़ने के दिलधड़क ऑपरेशन के, जारी किए गए वीडियो क्लिपिंग्स बार बार अत्यंत रोचक शैली में दिखाए जा रहे हैं..!!

हमने आजतक कभी जिनकी शक्ल भी न देखी हो,ऐसे मिलिट्री के लान्स नायक से लेकर मेजर और उससे भी उपर की रेन्क के निवृत्त आला अफ़सर तक, तथाकथित निष्णातों को पकड़-पकड़ कर कैमरे के सामने बिठा कर, आतंकवादी दाउद पकड़ा गया उस वक़्त  जल्दी सवेरे सवेरे, उस बेचारे को, हमारे कमान्डोने, चाय-नाश्ते से लेकर,  ठीक से स्नान इत्यादि करने का मौका भी, दिया होगा कि नहीं? जैसे नाज़ुक विषय पर, बार बार एक ही सवाल दोहरा के, सभी संवाददाता अपनी-अपनी चैनल के टी.आर.पी. बढ़ाने का जुगाड़ कर रहे थे..!! 

वैसे संवाददाता का इसमें क्या दोष, वे बेचारे तो बढ़ा चढ़ा कर, ऐसी चर्चा कर के, दाउद को पकड़ने के दिलघड़क `ऑपरेशन दाउद` के बारे में, हमारी जिज्ञासा का समाधान कर के, आखिर में हमारे अमूल्य ज्ञान में वृद्धि करने की भरपूर कोशिश कर रहे थे..!!

हालाँकि, हमारी सरकार ने  `ऑपरेशन दाउद`के जारी किए हुए पूरे वीडियो क्लिपिंग्स में, दाउद के बाथरूम में धो ने के लिए पड़े हुए,दाउद के चड्डी-बनियान का दृश्य लगातार दिखा कर, सचमुच दाउद स्नान इत्यादि करके, जब  चाय-नाश्ता करने बैठने ही वाला था, उसी वक़्त, हमारे कमांडो के हाथों जिंदा पकड़ा गया,इस बात को साबित करने के लिए,सभी चैनलों के संवाददाता बेताबी से प्रयत्न कर रहे थे..!!

बीच बीच में हमारे छोटे से टीवी के भीतर, छोटी-छोटी  दूसरी चार-पांच खिड़की से (Windows) झांक कर, टीवी के क्षेत्रीय संवाददाता, उनके सहयोगी कैमरामेन को,`कैमरा यहाँ घुमाना-ज़रा वहाँ घुमाना` जैसी सूचनाएँ दे कर, पूरे देश के मूख्य नगरों की अति उत्साहित जनता के आघात-प्रत्याघात तथा ढोल-नगाड़े-बाजे सहित, आनंदोत्सव के दृश्य, सारे दर्शकों को बार-बार दिखा रहे थे..!!

पर, अरे...!! ये क्या? कुछ चैनल के रिपोर्टर तो, पूर्व प्रधानमंत्री श्रीअटल बिहारी वाजपेयीजी का साक्षात्कार करने उनके निवास स्थान पर पहुँच चुके हैं..!! 

अपनी तबियत ना-दुरुस्त होते हुए भी श्रीअटल बिहारी वाजपेयीजी अपने निवास स्थान के बरामदे में, आराम कुर्सी में बैठ कर, बचे कुचे जोश के साथ, अपनी सुप्रसिद्ध कविता, "हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा. काल के कपाल पर लिखता-मिटाता हूँ."ललकारते हुए, साथ-साथ श्रीलालकृष्ण आडवाणीजी के हाथों अपना मुँह भी मीठा करवा रहे हैं ..!!


एक रिपोर्टर श्रीअटलजी से सवाल कर रहा है," ये बताइए, बांग्ला देश के विजय के समय,श्रीमती इंदिरा गांधी में आप को, माँ दुर्गा के दर्शन हो रहे थे, क्या इस वक़्त `ऑपरेशन दाउद` के सफल होने पर, आज एक बार फिर,आप को श्रीमती सोनिया गांधी में, माँ दुर्गा के  दर्शन हो रहे हैं?"


रिपोर्टर का सवाल ठीक से समझने की कोशिश में, श्रीवाजपेयीजी ने अपना खुला मुँह ज्यादा देर तक खुला ही  छोड़ दिया,इसी बीच दूसरी चैनल के रिपोर्टर ने दूसरा सवाल पूछ लिया," क्या ये बात सच है कि आपके प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान पाकिस्तान के साथ हुए `आगरा वार्तालाप` में  वहाँ के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ के साथ,` वन टू वन` मिटिंग में, दाउद को पकड़ ने को लेकर,आप दोनों के बीच गुप्त समझौता हुआ था?" 

इस सवाल का जवाब देने के लिए भी श्रीवाजपेयीजी ने जैसे अपना मुँह फिर खोला, उसी वक़्त श्रीमतीसुष्मा स्वराज ने अचानक, उनके अधखुले मुँह में मिठाई का टुकड़ा रख दिया, अब किसी को खाते समय तकते रहना तो बहुत बूरी बात है..!! अतः मैंने चैनल ही बदल दिया ।


जैसे ही दूसरी चैनल पर मैंने शिवसेना प्रमुख श्रीबालासाहब और गुजरात के मुख्यमंत्री श्रीनरेन्द्र मोदीजी को देखा..!! उनका व्यू जानने के लिए, उत्सुकता वश मैं वहीं थम गया । वे दोनों एक ही सुर में, एक ही बात कह रहे थे,"हमारी केन्द्रीय सरकार को ऐसे मर्दानगी भरे कदम, बहुत समय पहले उठा लेने चाहिए थे, अमेरिका के, `ऑपरेशन ओसामा` के बाद किए गए इस `ऑपरेशन दाउद` को, सब अमेरिकन कमांडो के,`Geronimo IKEA - enemy killed in action.`कि हूबहू नक़ल ही मानेंगे..!!"


अरे..!! इसी चैनल पर अभी अभी ब्रेकिंग न्यूज़ फ्लैश हो रहा है..!! 


हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के चैरमेन सैयद शाह गिलानी ने कश्मीरी अवाम को, बेकसूर दाउद को तुरंत रिहा करवाने के लिए, अगले जुम्मे के दिन,`नमाज़-ए-आज़ादी` पढने के लिए आह्वान किया है?


इधर इंडिया टीवी चैनल के सर्वेसर्वा श्रीरजत शर्मा,`जनता की अदालत` में योगगुरु बाबा श्रीरामदेवजी पर आरोप थोप रहे हैं," आप हर वक़्त वर्तमान सरकार की टीका टिप्पणी करते हैं, सरकार के ऐसे साहसिक कदम के बारे में अब आप क्या कहेंगे?"

यह सुनकर, बाबा अपने पेट के नाभी वाले हिस्से को,  पीछे  मेस्र्रज्जु तक धकेल कर, पेट को श्रीरजतजी के सामने गोल-गोल घुमाते हुए, गोल-मोल उत्तर देते हैं,

" देखिए..सुनिए..आप ही बताइए..!! ये सरकार कितनी बड़ी निकम्मी और नाकारा है..!! मैं,  चलन से  अधिकतम मूल्य की नोट रद्द करने की उनसे माँग करता हूँ, तो ये लोग देखो, तीस जुन २०११ से `चवन्नी` रद्द करने का एलान कर देते हैं? भ्रष्टाचार मिटाने का हमारा लक्ष्य इस तरह पूरा हो पाएगा क्या? दाउद तो पकड़ा गया,पर उसकी मदद से, हमारे भ्रष्ट नेताओं ने, फोरेन की बैंकों में, जो साढे चार ह..ज़ा..र करोड़ रुपया जमा किया है उसे वापस लाना अभी बाकी हैं ना..हैं..ई..हैं..ई..हैं..ई?


दोस्तों, अब आगे? आप पढ़ते-पढ़ते थक गए क्या? आगे और भी है..!! 

आतंकवादी गधे की  ख़्वाबिया फॉबिया कहानी और पाकिस्तान के प्रत्याघात का अंतिम रोचक हिस्सा..कल इसी स्थान पर..!!
तो फिर मिलते हैं कल..!!

जय..जय..माँ दुर्गा..!! 

जय..जय..हिन्दुस्तान..!! 

जय..जय विद्वान पाठकश्री..!!

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मेरा ब्लॉग-

मार्कण्ड दवे । दिनांकः २०-०५-२०११.

20.5.11

आतंकवादी गदर्भराज । part-1



आतंकवादी गदर्भराज ।
(सौजन्य-गूगल)



क्षमिणं बलिन साधुर्मन्यते दुर्जनोऽन्यथा।
दुरुक॒तमप्यतः साधोः क्षमयेत॒ दुर्जनस्य न॥


अर्थात्- सज्जन,क्षमाशील मनुष्य को बलवान और दुष्ट लोग,क्षमाशील मनुष्य को निर्बल मानते हैं । ऐसे क्रम के चलते सज्जन व्यक्ति के ताने सहन कर लेना, पर दुष्ट लोगों के  कटु वचन का उचित जवाब देना चाहिए ।

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प्यारे दोस्तों,


रविवार  की  मदमस्त सुबह के वक़्त, मेरे घर के बरामदे में बैठ कर, अभी तो मैंने आज का अख़बार हाथ में थामा ही था कि अचानक, हमारे घर के सामनेवाले, हमारे पड़ोसी शर्माजी ने, अपने घर के बरामदेमें खड़े होकर, अपने हाथ में अख़बार उठाकर मेरी ओर हिलाते हुए, अत्यंत उत्तेजना-पूर्ण आवाज़ में मुझ से सवाल किया,

" दवेजी,आपने आज का अख़बार पढ़ा? अमेरिका ने पाकिस्तान के एबटाबाद में जाकर आतंकवाद के जनक,आतंकी ओसामा बिन लादेन पर, हेलिकाप्टर से हमला करके उसे मार कर समंदरमें दफ़ना दिया..!! हमारा देश कितने सालों से हमारे लिए मोस्ट वॉन्टेड आतंकी दाऊद इब्राहिम को हमें सौंपने के लिए पाकिस्तान को बार बार प्रेम पत्र भेज रहा है, तो क्या अमेरिका के माफिक हम भी दादागीरी करके पाकिस्तान में घुस कर उसे ज़िंदा या मुर्दा पकड़ नहीं सकते ? हम अमेरिका से कम है क्या? समझ में नहीं आता, हमारा देश वीर भगतसिंह का है या ठगतसिंह का?"


शर्माजी के ऐसे उत्तेजनापूर्ण सवाल से मेरे भीतर का प्रखर साहित्यकार (?)मानो जाग उठा । अपनी अक्ल पर जितना था उतना ज़ोर आज़माते हुए, शर्माजी के ज्ञान वृद्धि हेतु, जैसे ही मैंने अपना मुँह खोला ही था..!! बस उसी वक़्त मेरी अर्धांगिनी ने, मेरे पास आकर पुराने कुछ रद्दी कागज़ात का ढेर लगा दिया और आदेश किया,"लीजिए, अख़बार बाद में पढ़ना,पहले ये रद्दी कागज़ देख लो, अगर काम के न हों,तो उसे फाड़कर कचरेवाले को दे देना, घर साफ हो जाएगा..!!"


शर्माजी के ज्ञानवर्धन के लिए खुले हुए मेरे होंठ से, वीर भगतसिंह वाला `इन्कलाब ज़िंदा बाद` जैसा देश भक्ति का कोई नारा बाहर आए, उसके पहले ही पत्नी का यह आदेश पाकर, नतमस्तक होकर, मेरे मुँह से सिर्फ `सू..सू..सू..हूं..हूं..हूं..हाँ..देखता हूँ..!!` जैसे   बेकार के शब्द निकलते देख कर, शर्माजीके चेहरे पर, किसी ग़लत आदमी(?) से सवाल करने का अफसोस साफ दिखाई देने लगा..!!


आखिर, एक पत्नीव्रता-लाचार पति के ऐसे बुरे हालात पर मानो तरस आ रहा हो, शर्माजी बिना  कुछ बोले,बिना कारण अपना सिर दांये बायें हिलाते हुए, अपने घरके भीतर चले गए ।


हालाँकि, धर्म पत्नी फ़ालतू आदेश देकर और शर्माजी फ़ालतू अफसोस व्यक्त करके घर में तो चले गए,पर मेरे मन में छुपे साहित्यकार(?) को दिन दहाड़ें, दिन के सपने के गहन सागर में गोते लगाने के लिए बरामदे में ही छोड़ गए...!!


"अ..हा..हा..हा..!! दिन दहाड़ें, मुझे ऐसा अद्भुत  स्वप्न   आया कि, अमेरिका की तर्ज पर हमारी केन्द्रीय सरकार के आदेश पर हमारे जवाँमर्द सैनिक भी, पाकिस्तान के भीतर घुस कर आतंकी दाउद को जिंदा पकड़कर भारत में उठा लाए हैं,ऐसे समाचार आज के अखबार में छपे हैं और ऐसे मर्दाना समाचार पढ़कर मैं अत्यंत उत्तेजित होकर मेरे ख़्वाबिया हवा महल में, मारे खुशी के  उछल रहा हूँ..!!

आ..हा..हा, आज ज़िंदगी में पहली बार मुझे, अपने देश के राष्ट्रपति,अपनी केन्द्रीय सरकार और पंत प्रधान श्रीमनमोहनसिंहजी में, सचमुच भारतीय शेर की अद्भुत साहस कथा के दर्शन हुए..!!

सारा विश्व ये समाचार सुनकर आश्चर्य मुग्ध हो कर हम पर बधाई की बौछार कर  रहा था..!! 


दिल्ली में कैबिनेट की मिटिंग पर मिटिंग हो रही थी और हमने पाकिस्तान को आतंकवादी देश जाहिर कर दिया था,जिसके चलते एक के बाद एक विश्व के हमारे दूसरे  मित्र देश भी हमारी घोषणा का समर्थन कर रहे थे । (हालाँकि,अभी तक अमेरिका ने हमें समर्थन नहीं दिया,पर कोई दिक्कत नहीं,उसे तो हम बाद में देख लेंगे?)


श्रीमनमोहनसिंह के ऐसे साहसिक कदम से,सभी देशवासीओं के तन में वीरत्व का जुनून फैलने के कारण, पूरा देश सार्वजनिक तौर पर आनंद-उत्साह से देश भक्ति के नारे लगाता हुआ,नाचता-गाता हुआ चिल्ला रहा है..!!


देश की सारी प्रमुख न्यूज़ चैनलों पर,दाउद को पकड़ने के दिलधड़क ऑपरेशन के, जारी किए गए वीडियो क्लिपिंग्स बार बार अत्यंत रोचक शैली में दिखाए जा रहे हैं..!! 

प्यारे दोस्तों, अब आगे क्या होगा?

 क्या अमेरिका हमारा समर्थन करेगा? 

या फिर पाकिस्तान को समर्थन देते हुए हम पर हमला करेगा? 

क्या पकड़े जाने से पहले दाउद को नहाने-धोने का समय मिला होगा? 

दाउद किस हालत में पकड़ा गया? 

इन सभी सवालों के जवाब के लिए, यहीं पर कल मिलते हैं..!! ठीक हैं ना?

तब तक, जय भारत..!!

मेरा ब्लॉग-
http://mktvfilms.blogspot.com/2011/05/blog-post_20.html

मार्कण्ड दवे । दिनांकः २०-०५-२०११.

29.11.08

तांडव और नहीं

देश की वित्तीय राजधानी मुबंई में आखिरकार आतंक का नंगा नाच जंबाज सिपाहियों के बलिदान के बुते समाप्त हो गया। लेकिन कोलाबा के लियोपोल्ड रेस्तराँ से शुरू हुआ आतंक का यह नंगा नाच अपने पीछे कई ज्वलंत सवाल छोड़ गया हैं। सबसे बड़ा सवाल आखिर यह तांडव कब तक ? आज देश अपने हुक्ममरानों से पूछता हैं आखिर आतंकवाद के बेदी पर और कितने बलिदान देगा हिंदुस्तान ? कितने हेमंत करकरे,मेजर संदीप उन्नीकृष्णन और गजेंद्र सिंह को पूरे राजकीय सम्मान के साथ भावभीनी श्रद्धांजलि दी जायेगी ? आखिर क्यों 9/11 के बाद अमरीका में और 7/7 के बाद ब्रिटेन में कोई बडा आतंकवादी हमला नहीं हुआ ? क्या सही मायने में हम आतंकवाद के खिलाफ लडाई में हार रहे हैं ? अगर हाँ, तो जिम्मेदारी किसकी ?

आतंकवादी हमेशा एक नये तरीके से अपने कारनामों को अंजाम दे रहा हैं। लेकिन तमाम वादों,कसमों और दावों के बावजूद परिणाम वहीं ढाक के तीन पात आ रहे हैं। अगर पिछ्ले कुछ आतंकवादी हमलों का विश्लेषण किया जाये, तो एक खास पैटर्न का इस्तेमाल देखने को मिलता था। लेकिन मुबंई में उसे नहीं अपनाया गया। इतना ज्यादा गोला-बारुद हमले के वक्त़ एक बार में होटल के अंदर ले जाना नामुमकिन था। तो क्या इसे पहले से होटल के अंदर जमा किया जा रहा था ? अगर हाँ, तो क्या इसे खुफ़िया तंत्र और होटल प्रशासन की लापरवही मानी जाये ? आतंकी जिस तरह से पुलिस की गाड़ी लेकर मुबंई की सड़कों पर भागे, उससे लगता था कि वे मुबंई की सड़कों से अनजान नहीं थे। तो क्या सचमुच आतंकी विदेशी थे ? या फ़िर इनके साथ कुछ स्थानीय नुमांईदे भी थे ? या ये विदेशी आतंकी पहले से मुबंई मे डेरा जमा रखे थे ? यहाँ फिर खुफ़िया तंत्र की नकामी नज़र आ रही हैं।

हमेशा की तरह प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने इस हमले में विदेशी हाथ होने का दावा किया हैं। माननीय प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के पास इसके समर्थन में क्या सबुत हैं ? और अगर सबुत हैं,तो आखिर कितने बलिदानों का इंतजार हैं माननीय प्रधानमंत्री और गृहमंत्रीजी को ? मेरे पहुँचने से डर कर भाग गये आतंकी। क्या यह बयान किसी भी मुल्क के गृहमंत्री उन हालातों के बीच दे सकता हैं ? पाटिल साब अगर सचमुच आपके डर से आतंकी भाग खड़े हुये, तो कामा अस्पताल के साथ-साथ आपको ताज होटल, ओबेरॉय होटल और नरीमन हाउस भी जाना चाहिये था। अगर आप ऐसा करते तो शायद जान-माल की इतनी क्षति नहीं उठानी पड़ती।

पाटिल साब, इतनी मांगों के बावज़ूद आखिर क्यों एक आतंकवाद निरोधक केंद्रीय एजेंसी नहीं बनायी जा रहीं ? आखिर क्यों आतंकवाद के खिलाफ़ लड़ाई को भी राज्यों के भरोसे छोर दिया गया हैं ?

अब जनता हिसाब मांगना शुरू कर चुकी हैं, और अब हुक्ममरानों को जबाब देने के लिये तैयार हो जाना चाहिये। देश के नागरिकों की जान की कीमत चंद सिक्कों में नहीं तोली जा सकती। और न हमारी मौत का फ़ैसला सीमापार बैठे कुछ कायर कर सकते हैं। भारत के सरजमीं पर आये हर सैलानी यहाँ के मेहमान हैं, कसम उन जानों की यह तांडव और नहीं।

अब यह अवाम पूछता हैं हुक्ममरानों से आखिर यह तांडव कब तक ?
By: Sumit K Jha
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20.9.08

इन्होने तो मुसलमानों को आतंकवादी और देशद्रोही साबित कर दिया !!

"अमिताभ बुधौलिया 'फरोग' जी" ने "भड़ास" और अपने ब्लॉग "गिद्ध" पर एक पोस्ट लिखी थी उसमे उन्होंने जो लिखा मैं उनकी भावनाओ की इज्ज़त करता हूँ लेकिन उन्होंने ना - ना करते करते आपने मुसलमानों को आतंकवादी और देशद्रोही साबित कर दिया, और बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद् की पुरी तरह से वकालत की है,
सिमी पर तो प्रतिबन्ध लगा हुआ है और सिमी ने जितने भी हमले किए उसमे से कोई भी हमला किसी धर्म विशेष पर नही था लेकिन बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद् ने सिर्फ़ एक धर्म के लोगो और उनके धर्म स्थलों को निशाना बनाया है तो उन्हें कैसे धर्म निरपेक्ष कह सकते हो? आप लोग ही बताये उन पर प्रतिबन्ध क्योँ नही लगाया जाए?
इस्लाम क्या किसी धर्म में यह नही बताया गया है की दूसरे धर्म के लोगो को जीने ना दो, उन्हें और उन्हें धर्म स्थलों को तबाह कर दो.... इस्लाम तो अपने मानने वालो को कुरान में आदेश देता है की "दुसरो के माबुदो (उपास्यो) को बुरा ना कहो (सूरा-ए-अलंफाल : आयत-१०८) ' पाक कुरान में खुदा का हुक्म है, "जिसने एक बेकुसूर का कत्ल किया, गोया उसने सारी इंसानियत का कत्ल कर दिया सूरा-ए-अल्मायेदाह : आयत - 108) ' आख़िर यह कौन से जेहादी हैं और इनका कौन सा मज़हब है, जो बेगुनाह लोगो की जान लेने को इन्हे आतुर करता है दिल्ली बम काण्ड को ले, तो यह बात समझ नही आती की क्या कोई सच्चा मुस्लिम, और वे भी रमजान के पाक महीने में ऐसा जघन्य पाप करेगा साफ़ है, आतंक्वादियौं का कोई धर्म और ईमान नही होता
आज मुस्लिम समाज में कुछ लोग ऐसे हैं, जो इस्लाम की मानवतावादी शिक्षाओ से कोसो दूर हैं ऐसे लोगो की गैर इस्लामी हरकतों से इस्लाम का नाम बदनाम होता होता है इस्लाम का नाम बदनाम करने वाले आतंकवादी चाहे कश्मीर में हों, अफगानिस्तान में हों, पाकिस्तान में हों, अमेरिका में हों, या इंडोनेशिया में, ये सभी इंसानियत और मज़हब पर बदनुमा दाग हैं इस्लाम अपने मानने वालो को ये आदेश भी देता है की बुढो, बच्चो और औरतों पर हथियार न उठाओ, किसी भी धर्मस्थल में बैठे हुए राहिबो व सन्यासियों पर हमला न करो किसी ऐसे आदमी पर हमला न करो और ऐसे आदमी से न लड़ो, जो मुकाबला करने की हालत में न हो मगर आतंकियों ने कभी इन नसीहतो को नही पढ़ा सिर्फ़ नाम मुसलमान का और बाप - दादा के मुसलमान होने कोई मुसलमान नही हो जाता हैं,