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8.5.08

थू थू भेंट करने पर अरुण अरोरा बोले--आप ही रखो जी, हम घटिया चीजें नहीं स्वीकारते

भड़ासी गांधीगिरी उर्फ थू थू अभियान रंग लाने लगा है। आज जीमेल खोला तो देखा कि वहां ब्लागवाणी के पीआरओ अरुण अरोरा जी आनलाइन हैं। मैंने देर न करते हुए उन्हें झट से चैट के रास्ते थू भेज दिया। वो जाने उनके शरीर के किस हिस्से पर पड़ा, वो तिलमिलाये और मुझे भी थोड़ी लानत मलानत सभ्य शब्दों में भेज दी। भई, हम भड़ासी तो ठहरे असभ्य और गंवार लोग। आपने (ब्लागवाणी वालों ने) भड़ास और विस्फोट ब्लाग के साथ जो कुछ किया है, उसका बदला तो लेना ही है, और ये बदला निजी तौर पर नहीं बल्कि गांधीगिरी के जरिए सामूहिक आंदोलन से लिया जा रहा है। अरुण जी ने लास्ट में लिखा कि आखिरी नमस्कार। मेरा कहना है कि अरुण भाई, आपकी तरफ से आखिरी नमस्कार हो सकता है, हम लोग तो आपको जहां देखेंगे, सर कहेंगे और थूकेंगे। ताकि आप लोगों को याद आए कि आप लोगों ने क्या कुछ किया है।

अगर अब भी जमीर हो तो विस्फोट ब्लाग के संजय तिवारी और भड़ास ब्लाग के डा. रूपेश से माफी मांग लो, लिखित या मौखिक, दोनों आप्शन खुले हैं, वरना हम भड़ासी ता-उम्र थू थू अभियान चलाते रहेंगे, जहां मिलोगे वहां थू थू करते रहेंगे।

जय भड़ास
यशवंत

पेश है वो चैट जिसमें भड़ास की तरफ से मैंने ब्लागवाणी के अरुण अरोरा को थू थू भेंट किया...
aroonarora@gmail.com
yashwantdelhi@gmail.com

date 8 May 2008 04:40
subject Chat with Arun Arora
mailed-by gmail.com

04:40 me: sir, thoo.....
maithili ko bhi thoo
Arun: आप ही रखो जी, हम घटिया चीजें नहीं स्वीकारते
ना ही, घटिया बातों में पड़ते हैं जी
आखिरी नमस्कार

5.5.08

ब्लागवाणी वालों ने विस्फोट पर भी कहर बरपा दिया

ब्लागवाणी जो ब्लागों का एग्रीगेटर है, उसने एक दूसरे कम्युनिटी ब्लाग विस्फोट.ब्लागस्पाट.काम को भी अपने यहां से हटा दिया है। ऐसा मेरे समेत कई भड़ासियों के विस्फोट का सदस्य बन जाने के चलते किया गया है।

हालांकि ब्लागवाणी के इस सामंती और तानाशाही भरे बर्ताव से न तो भड़ास की लोकप्रियता में कमी आई और न विस्फोट की लोकप्रियता कम होगी, बल्कि ये दोनों और ज्यादा फूलेंगे फलेंगे। पर इससे यह जरूर साफ हो गया है कि धंधेबाज लोगों के हाथों एग्रीगेटर का काम होने से हिंदी ब्लागिंग का कितना नुकसान हो रहा है।

इस कृत्य से जाहिर हो गया है कि ब्लागवाणी के संचालक मंडल के पास अपना कोई विवेक नहीं है। वे चंद मठाधीश ब्लागरों के एक गुट के द्वारा निर्देशित और संचालित होते हैं।

हम मैथिली समेत ब्लागवाणी संचालक मंडल की इस कुकृत्य के लिए निंदा करते हैं और सभी ब्लागरों से ब्लागवाणी के बहिष्कार की अपील करते हैं।

जय भड़ास
यशवंत

20.2.08

तब ब्लागवाणी पर बाकी ब्लागों का क्या होगा?

आपने सोचा है? ब्लागवाणी डाट काम, जो कि ब्लागों के बारे में बताता है कि किस पर कब क्या लिखा गया, के पहले पेज पर लगातार भड़ास बना रहता है। वजह यह है कि इस ब्लाग की सदस्य संख्या 225 पहुंच चुकी है और हर एकाध घंटे में कोई न कोई भड़ासी पोस्ट डालता रहता है। इस तरह आज अभी मैं ब्लागवाणी देख रहा था तो उसकी नई प्रविष्टियों के पेज पर सबसे ज्यादा जगह अगर किसी ब्लाग ने घेर रखा है तो वो है भड़ास। कुल 18 हेडिंग हैं भड़ास की। उपर से नीचे तक ब्लागवाणी का ये वाला पेज देखिए। सबसे ज्यादा आकार प्रकार में अगर कोई ब्लाग दिख रहा है तो वो है भड़ास। कल्पना कीजिए, जब भड़ास की सदस्य संख्या एक हजार पहुंच जाएगी और हर रोज ढाई सौ पोस्टें लिखी जाएंगी तब ब्लागवाणी के नई प्रविष्टियों वाले पूरे पहले पेज पर सिर्फ और सिर्फ भड़ास ही रहेगा, बाकी दूसरा कोई ब्लाग नहीं टिकेगा, उसे अंदर के पेज पर जाना पड़ेगा।

हालांकि ये कोई बड़ा मुद्दा ब्लागवाणी के लिए नहीं है क्योंकि मैथिली जी और सिरिल जी (पिता पुत्र हों तो ऐसे) की जो ऊर्जावान जुगलबंदी है, टेक्नालजी पर, उससे जरूर ये लोग कोई न कोई रास्ता निकाल लेंगे लेकिन हमारे विस्फोट वाले संजय तिवारी जो तो कल मुझी से कह रहे थे कि वो मांग करेंगे कि ये जो कम्युनिटी ब्लाग हैं, इन्हें ब्लाग एग्रीगेटर अपने यहां से हटा दें या फिर इनके लिए कोई एक नई कैटगरी बनाएं जिसे कम्युनिटी ब्लाग की कैटगरी कहा जाए और इस कैटगरी में जाने पर ही भड़ास और मोहल्ला और चोखेरबाली आदि दिखें।

मैंने संजय जी के सुझाव को भड़ास पर अत्याचार कहकर खारिज कर दिया पर संजय जी का कहना था कि दरअसल भड़ास और मोहल्ला अब बाकी ब्लागों पर अत्याचार कर रहे हैं। भड़ास पर जितना ज्यादा संख्या में लोग लिखते हैं, उससे तो भड़ास घुमा फिराकर ब्लागवाणी के फ्रंट पर हमेशा डंटा रहता है, इससे बाकी ब्लागरों की टीआरपी प्रभावित होती है।

कुल मिलाकर एक मजेदार बहस शुरू हो सकती है।

फिलहाल तो सब सही चल रहा है इसलिए मेरे खयाल से अभी दिमाग लगाने की कोई जरूरत नहीं है, क्यों संजय भाई?

जय भड़ास
यशवंत