Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

7.8.16

जंतर-मंतर पर न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं आकाशवाणी के कैज़ुअल एनाउंसर







आकाशवाणी के कैज़ुअल एनाउंसर का एक दल, सामाजिक न्याय राज्य मंत्री रामदास अठावले से मिलने गया और न्याय पाने के लिए विनम्र निवेदन किया. सामाजिक न्याय राज्य मंत्री रामदास अठावले ने न्याय पूर्ण इन्साफ दिलवाने का वादा किया है. उधर, हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और फ़िलहाल कांगड़ा से बीजेपी सांसद शांता कुमार ने भी आकाशवाणी के कैज़ुअल एनाउंसर से अपने कार्यालय में मिले और हर संभव सार्थक मदद करने का भरोसा दिलाया.

3.8.16

इन दागी पत्रकारों के सहारे कब तक टिकेगा चौथा खंभा?









हिमाचल प्रदेश के चम्बा जिला के डलहौज़ी में पत्रकार महिलाओं से अश्लील हरकतें व सरकारी कर्मचारियों को पीटने जैसी कुकृत्य करने लगे हैं। इंडिया टीवी और mh1 के पत्रकार बताने वाले अपूर्व महाजन पर महिला ने अश्लील हरकत करने का मामला दर्ज कराया है। वहीं उनके खिलाफ सरकारी कर्मचारी से उसके कार्यालय जा कर मारपीट करने का मामला भी दर्ज हो चुका है। फिलहाल उसने अग्रिम जमानत ले रखी है।

1.8.16

कब बदलेगी होमगार्डों की हालत


असगर नकी

मौजूदा सरकार के प्रेरणा स्रोत मुलायम सिंह यादव जिनके लिये आम है कि नेता जी की "कथनी-करनी" में फ़र्क नहीं, शायद 1993 के सपा के चुनावी एजेंडे में  क्रम संख्या 9 पर  होमगार्ड जवानों को 5 वर्ष के अंदर नियमित कर दिये जाने की घोषणा नेता जी की कथनी थी, जिसे करनी में बदलने में दो दशक बीत गये और फिर उनके लाडले की मौजूदा समय में सरकार है लेकिन होमगार्डों की समस्या जस की तस है, जबकि देश की सबसे बड़ी अदालत का फैसला भी होमगार्डों के पक्ष में है, ऐसे में सवाल ये है कि आखिर नेता जी की करनी अमली जामा कब पहनेगी?

यूपी में कांग्रेस को जीत दिलाएगा ब्राहम्ण!

प्रभुनाथ शुक्ल

राजनीतिक लिहाज से अहम राज्य उत्तर प्रदेश में कांग्रेस नए अवतार में दिखी है। 29 जुलाई को लखनउ के रमाबाई पार्क में बूथ स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन में राहुल गांधी जिस भूमिका में दिखे वह कांग्रेस के लि शुभ संकेत है। कांग्रेस क्या बदल रही है। क्या वह बदलाव चाहती है। उसके बदलाव का आखिर जमीनी आधार क्या है। वह किस थ्योरी पर यूपी जैसे राज्य में सपा, बसपा और भाजपा को सीधी चुनौती देना चाहती है। जहां सांगठनिक स्तर पर वह कमजोर और खुद में उपेक्षित हो। कार्यकर्ताओं के टूटे हुए मनोबल पर वह कैसे आगे बढ़ेगी। सवाल पीके फार्मूला कितना कामयाब होगा। यह आशंकाए सिर्फ मेरी ही नहीं आपकी और राज्य के आम आदमी की हो सकती हैं जो कांग्रेस को बदलते रुप में देख रहे हैं। कांग्रेस 27 साल से राज्य के परिदृश्य से गायब है। 2014 के लोकसभा में बुरी पराजय के बाद राज्यों में ढहता उसका जनाधार तममा सवाल खड़ा करता है। लेकिन कांग्रेस और उसके रणनीतिकारों को यूपी एक उर्वर जमीन के रुप में दिख रही है।

मजीठिया वेज बोर्ड के लाभ पाने को लड़ रहे कर्मियों ने छुड़ाये मालिकानों के पसीने

पत्रकारों/गैर पत्रकारों के वेतन व अन्य परिलाभों के लिए केन्द्र सरकार द्वारा गठित मजीठिया वेज बोर्ड ने की संस्तुतियों ने देशभर के अखबार मालिकों की नींद उडाकर रख दी है, आखिर क्यों ? यह पहला वेज बोर्ड नहीं है लेकिन है ऐतिहासिक और इसे ऐतिहासिक बनाया है पत्रकार संगठनों और पत्रकार/गैर पत्रकारों की चट्टानी एकजुटता ने वर्ना देश की आजादी से लेकर अब तक हर दस साल (केंद्रीय व राज्य कर्मचारियों की तरह) पर वेतन आयोग का गठन किया जाता है। अब तक छह वेतन आयोगों का गठन पत्रकारों की बेहतरी के लिए किया जा चुका है लेकिन लागू एक भी नहीं हुआ आखिर क्यों ? हर बार आयोग अपनी रिपोर्ट सौंपता रहा, संसद की दोनों सदनें उसे पास करती रहीं, मालिकान अदालत की शरण लेते रहे और नतीजा " ढाक के तीन पात होता रहा। मालिकानों ने इस बार भी सारे घोडे खोल दिये फिलहाल अभी तक उसे कामयाबी नहीं मिली।

राधा गोविन्द इंस्टीट्यूट के प्रबन्धकों पर एफ़आईआर के आदेश




रामजी मिश्र 'मित्र'

राधा गोविन्द इंस्टीट्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी निकट अकरोली चौराहा चंदौसी जिला सम्भल के फर्जी होने का मामला सामने आया है। अब तक यह इंस्टिट्यूट खुद को हापुड़ दिल्ली मार्ग पर स्थित मोनाड यूनिवर्सिटी से खुद को सम्बद्ध बता रहा था। सारे जिम्मेदार ऐसा सोये कि खुले आम शिक्षा का फर्जी केंद्र चलता रहा और किसी को भनक तक न लगी। भविष्य बनाने की चाहत में एक एक करके हजारों अपना भविष्य ही बर्बाद कर बैठे।

जिसने तोड़ी टांग उसी को 400 करोड़ में बैसाखी बनाने का ठेका!

दिल्ली : इस बार लोकसभा चुनाव में कोई कामयाब हुआ या नाकाम लेकिन निजी तौर पर अगर किसी बड़े नेता की सबसे ज्यादा फज़ीहत हुई तो वो थे मिस्टर पप्पू। जी हां आप ठीक ही समझे हैं। जो आदमी देश की सबसे पुरानी और बड़ी सियासी जमात का सीधा सीध उत्तराधिकारी कहा जा सकता हो, उसको लोग पप्पू मानने लगे। इससे बड़ा भला क्या राजनीतिक मज़ाक़ हो सकता है। लेकिन थोड़ा पीछे जाएं तो ये भी समझ मे आ जाता है कि ये महाशय पप्पू बने कैसे या इनको इस हालत में पहुंचाने वाले कौन लोग थे।

जलवायु परिवर्तन के कारण हाथी की चार प्रजातियां लुप्त हुईं

जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में मीडिया की भूमिका पर कार्यशाला आयोजित

देहरादून । जलवायु परिवर्तन एक विश्व व्यापी समस्या है और इसका प्रभाव देश के संवेदनशील क्षेत्रों पर भी पड रहा है। जलवायु परिवर्तन की जानकरी जन-जन तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका अति महत्वपूर्ण है। यह बात मीडिया के लिए आयोजित एक वर्कशाप में मुख्य वन संरक्षक ' पर्यावरण/नोडल अधिकारी जलवायु परिवर्तन आर एन झा ने कही। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की समस्या पिछले 40-50 साल से रही है लेकिन हाल के वर्षो में बडी तेजी से बढी है। जानकरी के आभाव में मीडिया खासकर न्यूज चैनल जनता के सम्मुख भ्रामक तस्वीर पेश करते हैं। अब ऐसे में मीडिया का रोल अहम हो जाता है।

गाय के नाम पर लखनऊ में दलितों का पीटा जाना, दलित हिंसा का एक और ताजा उदाहरण

ऊना से लेकर लखनऊ तक गाय के नाम पर दलित हिंसा, संघ की सुनियोजित साजिश

लखनऊ । रिहाई मंच ने लखनऊ के तकरोही के चंदन गांव में मरी गाय को ले जा रहे दो दलित कर्मचारियों को अराजक तत्वों द्वारा मारने-पीटने की घटना को देश में हो रही दलित हिंसा का एक और ताजा उदाहरण बताया। मंच ने कहा कि जिस तरीके से पिछले दिनों मैनपुरी में 15 रुपए के लिए दलित दंपत्ति भारत व ममता को अशोक मिश्रा द्वारा कुल्हाड़ी से मार डाला गया और अब राजधानी में दलितों पर हमला साफ करता है कि अखिलेश सरकार हत्यारे सामंती तत्वों का खुला संरक्षण कर रही है।

कैंसर एक जानलेवा बीमारी कारण और निदान

डॉ सौरभ मालवीय

आधुनिक जीवन शैली और दोषपूर्ण खान-पान के चलते विश्वभर में हर साल लाखों लोग केंसर जैसे बीमारी की चपेट में आ रहे है और असमय ही काल कवलित हो जाते है, विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के बाकी देशों के मुक़ाबले भारत में केंसर रोग से प्रभावितों की दर कम होने के बावजूद यहाँ 15 प्रतिशत लोग केंसर के शिकार होकर अपनी जान गवा देते है। डब्लू एच्चों की ताज़ा सूची के मुताबिक 172 देशों की सूची में भारत का स्थान 155वां हैं। सूची के मुताबिक भारत उन देशों में शामिल है जहां केंसर से होने वाली मौत की दरें सर्वाधिक कम है। फिलहाल भारत में यह प्रतिलाख 70.23 व्यक्ति है। डेन्मार्क जैसे यूरोपीय देशों में यह संख्या दुनिया में सर्वाधिक है यहाँ केंसर प्रभावितों  की दर प्रतिलाख 338.1 व्यक्ति है। भारत में हर साल केंसर के 11 लाख नए मामले सामने आरहे है वर्तमान में कुल 24 लाख लोग इस बीमारी के शिकार है।

31.7.16

राष्ट्र सेवा और भारत माँ का कर्ज चुकाने के लिए पत्रकारिता के पेशे में आयें- जयभान सिंह पवैया


भोपाल । राष्ट्र सेवा और भारत माँ का कर्ज चुकाने के लिए पत्रकारिता के पेशे में आयें। पत्रकारिता करते समय आप जितनी बड़ी दृष्टि रखेंगे, आपका क्षितिज भी उतना बड़ा होगा। स्वाध्याय के साथ, अहंकार रहित जीवन एवं भयादोहन जैसी बुराईयों से दूर रहकर ही पत्रकारिता के पेशे का वास्तविक सम्मान प्राप्त किया जा सकता है। पत्रकार के जीवन में दिशा नहीं होगी तो वह राष्ट्र की सेवा नहीं कर सकता है। यह विचार आज माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित सत्रारंभ 2016 के तृतीय दिवस पर समापन सत्र में मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री, श्री जयभान सिंह पवैया ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि पत्रकार वह होता है जो दूसरों को ख्याति देता है। यदि एक हिन्दू नेता के रूप में देश ने मुझे पहचाना है तो इसमें सबसे बड़ी भूमिका पत्रकार एवं मीडिया की है।

30.7.16

पहले से संजरपुर से उठाए गए युवकों के साथ फर्जी मुठभेड़ दिखा रही है पुलिस!

खुदादादपुर सांप्रदायिक हिंसा से जोड़ने की हो रही है सांप्रदायिक कोशिश, प्रतापगढ़ में मंदिर से विस्फोटक बरामदगी मामले में संघ की भूमिका की हो जांच


लखनऊ, 30 जुलाई 2016। रिहाई मंच ने आजमगढ़ पुलिस द्वारा संजरपुर के तीन युवकों की आज दिखाई गई मुठभेड़ को फर्जी करार देते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि आजमगढ़ के निजामाबाद थाने के रानीपुर गांव के पास जिन तीन युवकों सलमान, आफताब और अकरम को पुलिस मुठभेड़ में घायल और गिरफ्तार दिखाकर आजमगढ़ एसएसपी अजय कुमार साहनी अपनी पीठ थपथपा रहे हैं उन तीनों युवकों को गुरुवार 28 जुलाई को संजरपुर चैक, छाऊं मोड़ के पास जब वे बाजार में थे तब गिरफ्तार किया गया था।

29.7.16

दलितों की दुर्दशा का सच....

हाल ही में दबंगो द्वारा गुजरात के ऊना में दलितों के साथ किया गया अमानवीय व्यवहार ने सारे देश के बहुजनो को हिलाकर रख दिया वैसे तो देशभर में आये दिन इस प्रकार की घटनाये देखने में व् सुनने में आती रहती है । पर इस घटना से एक बात साफ दिखाई देती है की दबंगो के हौंसले कितने बुलंद है की वो दलितों के साथ मार् पिटाई करके अपनी दबंगई का साबुत सोशल मीडिया पर वायरल करते है उन्हें कानून का तनिक भी भय नहीं है इससे प्रतीत होता है कि वो दूषित मानशिकता के  लोग यह दिखना चाहते है की आप लोग आज भी गुलाम है और हम मालिक है, हम इस देश में जैसा चाहेंगे वैसा करेंगे कोई भी हमारा बाल बांका भी नहीं कर सकता ।

भोपाल में भुट्टा पार्टी और छत्तीसगढ़ के चैनल में बनी लिस्ट

इंदौर के भाई दिल्ली से भोपाल पहुँचे तो पार्टी तो होना तय था...और पार्टी हुई भी भुट्टा पार्टी,लेकिन इस भुट्टा पार्टी की खास बात रही छत्तीसगढ़ की राजधानी से प्रसारित होने वाले चैनल में बनी मेहमानों की लिस्ट...दरअसल भाई की भुट्टा पार्टी में कौन आएगा यह तय किया रायपुर से प्रसारित एक चैनल के दफ्तर के अय्यर ने....जिन्हें बाइज्जत कुछ दिनों पहले एक प्रतिष्ठित चैनल से विदा किया गया था...साहब जनसम्पर्क के वेब घोटाले के चपेट में आ गए थे...सो सीएम की कृपा से इन्हें बेज्जत कर तो नहीं पर चुपचाप विदा कर दिया गया...तो सीएम साहब ने फिर दरियादिली दिखाई और इन्हें छत्तीसगढ़ के रीजनल चैनल में चिपकवा दिया...

23.7.16

Letter to Union Minister for An Effective Model Locayukta Bill for States

20-06-2016
To,
Hon’ble Union Minister
Ministry of Law and Justice
Government of India, New Delhi-110001
Subject: An Effective Model Locayukta Bill for States
Dear Sir,
After ratifying the United Nation Convention Against Corruption on 12-05-2011, the Parliament adopted ‘Sense of House Resolution’ on 27-08-2011, which reads as thus: “This House agrees in principle on following issues: (i) Citizen Charter (ii) Lower bureaucracy under Lokpal through an appropriate mechanism, (iii) Establishment of Lokayukta in the States; And further resolves to forward the proceedings of the House to the Standing Committee on Law and Justice while finalizing its report”.

21.7.16

President of India Urges Indian Universities to take global rankings seriously

New Delhi, 21 July 2016 :The International Institute for Higher Education Research & Capacity Building (IIHEd) of O.P. Jindal Global University and Indian Centre for Academic Rankings and Excellence (ICARE) gave a presentation on the “State of Indian Universities in the Global Academic Rankings” to the President of India, Mr. Pranab Mukherjee at Rashtrapati Bhavan on 20th July.

कवि कुमार विश्वास हो गए म्यूज़िकल - वीडियो रिलीज़ किया

विख्यात कवि डा कुमार विश्वास ने सोमवार, 18 जुलाई को एक मिनट का एक वीडियो रिलीज़ किया, जो उनके म्यूज़िकल कॉन्सर्ट का प्रीव्यू है। 'के वी म्यूज़िकल' नाम से लांच किए गए इस वीडियो में विश्वास अपनी संगीतमय प्रस्तुति देते नज़र आ रहे हैं। इस वीडियो को विश्वास ने फेसबुक, ट्विटर एवं यूट्यूब पर एक साथ लांच किया। इस लांच के समय से पहले ही ट्विटर पर #KVMusical ट्रेंड हो रहा था।

हम पढ़ना चाहते हैं, अवसर तो दो

लखन सालवी

किशन (6 साल) व आरूषि (3 साल) पढ़ना चाहते है। किशन से ज्यादा आरूषि का मन लगता है पढ़ाई में। पर एक तो गरीबी उपर से बिजली विभाग के कर्मचारी बैरी बने हुए है। कमोबेश देशभर में ऐसे न जाने कितने ही किशन व आरूषियां गरीबी के कारण पढ़ाई से वंचित रह जाती है और आगे जाकर वे मजदूर के रूप में दिखाई पड़ते है।

कालाबाजारियों से पत्रकारों द्वारा की गई वसूली की तस्वीरें

जालौन से सूचना है कि उरई के कुछ पत्रकारों ने वसूली के लिए राठ रोड पर मारुति ओमिनी वैन यूपी 92 एल 6548 पर दबिश डाल दी. इसमें चोर बाजार में सप्लाई के लिए भेजा जा रहा राशन का चावल लदा था. पत्रकारों की छापामारी से ब्लैक मार्केटियर हड़बड़ा गये. सड़क लगभग एक घंटे तक सौदेबाजी हुई. आखिरकार 40 हजार में सौदा तय हुआ. देखें कुछ तस्वीरें....

18.7.16

रिलायंस वालों का फ्राड : टावर से कमाई कराने का प्रलोभन देकर इंश्योरेंस पालिसी बेच रहे हैं

Subject : reliance tower fraud and forcly selling insurance policy

रेस्पेक्टेड सर

मेरा नाम पंकज सेवालाल चौहान है. मुझे मार्च  २०१६ में रिलायंस टावर डिपार्टमेंट से एक कॉल आई जिसका नंबर (८४४७०५३०४६ निशा) और (८८८२२९२७५६ गौरव) उन्होंने मुझे मेरे प्लाट पर रिलायंस टावर लगाने के लिए ऑफर दी,  यहाँ तक तो ठीक था, उन्होंने मुझे लाइट वेट टावर और हैवी ड्यूटी टावर की इंस्टालेशन प्रोसेस की सारी जानकारी बताई लेकिन उन्होंने (निशा) मुझे सबसे पहले रिलायंस लाइफ इन्सुरेंस की पालिसी लेने के लिए कहा.



छुटकही : आखिर कहां है ये चिड़ी!

अमरेंद्र प्रताप सिंह, लखनऊ

जैसे इस पूरी दुनिया में कोई भी अवधारणा या धारणा हर किसी पर लागू नहीं होती, कुछ लोग अपवाद स्वरूप उससे इतर हमेशा ही होते हैं वैसे ही हमारा यह मामूली लेख भी हर किसी पर लागू नहीं होता, अपितु अनेक लोग न सिर्फ इससे ऊपर इतर हैं बल्कि उनके साथ सानिध्य प्राप्त कितने ही उन्ही की तरह अपवाद है।

खैर बात कुछ यूं जहन में आई कि इधर कई समकालीन महानतम पत्रकार श्रेष्ठों, पत्रकारिता के मूल्यों में गिरावट से अत्यधिक आहत देवतुल्य पत्रकारिता एवं सर्वोच्च लेखन कला में हो रहे क्रमिक क्षरण के दर्द से कराह रहे, समाधान के बजाय समस्या के विस्तृत विवरण पर पूरा ध्यान एकाग्र रखने वाले सम्भवतः समुद्र मंथन से निकले स्वनामधन्य, शीर्ष स्वप्रशंसक अग्रजों के लेख-विचार कई वेबसाइटों, समाचार पत्र-पत्रिकाओं विशेषकर समाचारों की चयन सम्बन्धी श्रेष्ठता एवं विषय सामग्री के लिए विशेष लोकप्रिय एक प्रतिष्ठित साप्ताहिक समाचार पत्र में पढ़ने को मिले। पढ़कर लगा कि जिस प्रकार के पत्रकारों की आलोचना के कसीदों पर उनका पूरा जोर था उसमें से कई गुण तो हम जैसे तुच्छ ननहऊआ प्राणी में भी विद्यमान है। हालांकि आलोचना लच्छित समूह में हमने स्वयं को बहुत पीछे खड़ा पाया परन्तु यह तो लगा कि चलो कहीं न कहीं गिनती में तो आये। हमारे जैसे तो एकल दौड़ में भी हमेशा द्वितीय आते हैं। लेख निश्चित तौर पर सर्वग्राही, विचारपूर्ण एवं बेहद ऊंचे दर्जे का रहा होगा। तभी तो पूरे तौर कुछ बातें हम जैसे न समझ सकें परन्तु इतनी जिज्ञासा जरूर प्रकट हुई कि इन   साक्षात्कार सामग्री रूपी लेखों में वृहद् समस्या चिंतन दरअसल होता किस लिए है।

यदि यह पत्रकारिता के हित में होता है तो फिर इसे समाचार पत्र में छापने की, और यदि छापना ही हो, तो आमजन के अति समक्ष प्रथम पृष्ठ पर स्थान क्यों? इस प्रकार तो आम जनमानस इसे पढ़कर पत्रकारों आदि के बारे में अपने बचे खुचे अच्छे विचारों को भी तिलांजलि दे देगा। और यदि आमजन के बजाय पत्रकारिता विधा के लोगों के विचारार्थ प्रस्तुत होता है तो कुछ सुझाव-चिंतन समाधानोन्मुख भी होना चाहिए। केवल समस्या का रोना ही क्यों? मुझे नहीं याद है कि पिछले कुछ वर्षों में, किसी ख्याति श्रेष्ठ अग्रज ने कोई कार्यशाला, सेमीनार, दक्षता कक्षा या जागरूकता कार्यक्रम नव आगंतुक एवं अल्पज्ञ अनुजों के लिए आयोजित किया हो, जिससे उनमें भी थोड़ी सी आपकी शैली, कला और विद्वता का अंश समाहित हो सके।

हम जैसे ननहऊों ने तो बोधमय जीवन की शुरुआत में ही पाठ्य पुस्तकों, मासिक, साप्ताहिक पत्रिकाओं एवं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध समाचार पत्रों में दिए गए लेखों आदि को पढ़कर श्री अरुण शौरी, श्री राजनाथ सिंह सूर्य एवं श्री ह्रदय नारायण दीक्षित आदि को जो कि राजनीति में भी  उच्च पदस्थ रहे, उन्हें श्रेष्ठतम पत्रकार ही जाना-माना है।  बड़े होकर जिले से लखनऊ आगमन पर साथियों-सहयोगियों की मदद-मुसीबत में राज्य-समाज से लड़ भिड़कर उनकी सहायता करने वालों के रूप में अनेक पत्रकार अग्रजो एवं पत्रकारिता क्षेत्र से आगे बढ़कर सरकार में उच्च पदस्थ सम्मानित पद सूचना सलाहकार एवं सूचना आयुक्तों के रूप में आज के वरिष्ठों को भी पत्रकारिता की प्रोफाइल बढ़ाने वाला श्रेष्ठतम पत्रकार ही जाना-माना है। मुझे नहीं लगा कि उपरोक्त सभी जो पत्रकारिता से अलग अन्य क्षेत्रों में भी प्रशंसित-पुरस्कृत हुए ने पत्रकारिता को कोई हानि पहुंचाई हो, तो फिर इतनी आलोचना किसकी और किस लिए?

हाँ इससे कुछ अलग कुछ ज्ञात श्रेष्ठों को सामान्यतः विधान सभा, विधान परिषद सत्रों के दौरान टंडन हाल एवं वी आई पी कैफेटेरिया में हँसते बतलाते, विधायक गणों एवं मंत्री परिषद के सदस्यों से मिलते जुलते, विधान सभा के प्रेस रूम एवं एनेक्सी के मीडिया सेंटर में राज्य एवं केंद्र सरकार की नीतियों, नियमों एवं प्रस्तुतियों पर लेखन-मंथन करते, मुख्यमंत्री के आवास पर होने वाले आयोजनों-उदघाटनों से लेकर उनके प्रदेश दौरों के दौरान होने वाली प्रेस मीडिया कांफ्रेंसों पर अपने अलग-अलग विचार प्रस्तुत करते, शासन के बड़े साहब से लेकर मंत्री-नेता एवं विभागीय अफसरों के कार्यक्रमों-प्रेस आयोजनों में थोड़ा बहुत खाते पीते भी देखा है और थोड़ा बहुत जो भी आदर्श, ज्ञान या सीख, स्वयं या उनके माध्यम से प्राप्त की इसका अवसर यहीं पर ही मिला है। कुछ एक बार शाम आदि को भी यूपी प्रेस क्लब आदि में कुछ वरिष्ठों को फुरसत में देखने का सौभाग्य मिला वहां पर भी उनका व्यवहार प्रेम और स्नेह भरा ही था।

कमियां हैं, परन्तु आवश्यक नहीं है कि कमियों के प्रत्यक्ष वर्णन पर ही पूरी ऊर्जा लगाई जाये। कमियां वकील, इंजीनियर, डॉक्टर, चार्टर्ड अकाउंटेंट आदि अन्य प्रोफेशनल्स की जमात में भी कुछ लोगों में होती हैं, परन्तु हमने कभी पब्लिकली उन्हें इसका मुजाहिरा करते नहीं देखा।

तो फिर हमारे प्रोफेशन में ही यह प्रज्ञा-प्रलाप किसलिए। साहित्य की किन ऊंचाइयों का आरोहण करने जा रहे हैं हम इन साक्षात्कार सामग्रियों से, और पाठकों पर प्रभाव की बात करें तो हमें लगता है कि सम्भवतः इसी आत्म संतोषी साहित्य को पढ़-पढ़कर अब चौराहे का एक अदना सा होमगार्ड भी हमें पत्रकारिता कि शुचिता पर लेक्चर देने लगा है। यही है वो परिभाषा जो हमने स्वयं गढ़ी है।

यह ऊपर की पूरी बात हमने इसलिए लिखी कि इस सबको देखने-जानने में हम आज तक  यह नहीं समझ सके कि आदर्श से भी ऊपर समुद्र मंथन जैसी किसी क्रिया से निकली देव श्रेष्ठ पत्रकारिता की वह चिड़िया, जिसके दुर्बल होने का रोना इन साक्षात्कार सामग्रियों में आज कल रोया जा रहा है, ऐसी अद्भुत चिड़ी हमें तो कहीं नहीं मिली। अगर मिलती तो उसकी पूंछ के एकाध पंख की क्षणिक हवा खाकर हम भी सबसे पीछे की गिनती के चिड़ीमार सही कुछ न कुछ तो बन जाते-कहलाते ही, तो फिर है कहाँ यह चिड़ी? समाधान पर कोई बात न करके केवल समस्या पर चहचहाने वाली यह श्रेष्ठ पत्रकारिता की चिड़ी मिले तो हमें भी बताना। हो सकता है स्थिति पहले से कुछ बदली हुई हो या कुछ खराब भी हुई हो, परन्तु ऐसा तो कभी नहीं लगा कि पब्लिकली कमियों को रोया जाना चाहिए।  मेरी तुच्छ समझ से तो अभी-

’तुम पूछो और मैं न बताऊँ, ऐसे तो हालात नहीं,
एक जरा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं’

Amrendra Pratap Singh
9415027811
sharpmedia24@gmail.com

राणा अयूब को एकता कपूर के टीवी सीरियल की लेखिका स्क्रिप्ट राइटर होना चाहिए



एकता कपूर के टीवी सीरियल की तरह यह एक विचित्र बच्चा है ,जिसके इत्त्ने डबल रोल है की ये बच्चा पैलेट गन से तीन बार अँधा हो चुका है ,सबसे पहले 2014 फिलिस्तीन में इजराइल आर्मी हमले में, इसका एक और रोल था कश्मीर में जब ये 2015 में एक बार फिर अँधा हुआ पुलिस से।  और आज ये बच्चा फिर से कश्मीर में आर्मी की पैलेट गन से अँधा हो गया। इस सीरियल की लेखिका है बेस्ट बुक सेलर महिला पत्रकार --राणा अयूब !!!

भोजपुरी महासभा ने यूपी, सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के 102 मेधावी छात्रों को किया सम्मानित


गाजियाबाद : रविवार को पुराने बस अड्डे स्थित मीनामल धर्मशाला पूर्वांचल भोजपुरी महासभा द्वार मेधावी छात्रों के हौसला अफजाही के लिए सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह बोर्ड परीक्षाओं में प्रतिभा के दम पर मुकाम हासिल करने वाले 102 छात्रों को पूर्वांचल भोजपुरी महासभा ने सम्मानित किया। इस मौके पर यूपी बोर्ड, सीबीएसई एवं आईसीएसई के इन छात्रों मोमेटों और प्रशस्ति पत्र दिए गए।

संसदीय सचिव ने भाजपा मंडल अध्यक्ष, एल्डमैन और निजी पीए व पीए के रिशतेदारों को ही बांट दी निधि

शासन की जनसंपर्क निधि का मनमाने ढंग से किया जा रहा वितरण

रविकांत 

मनेंद्रगढ़। एक ओर दिल्ली में संसदीय सचिवों को लेकर विवाद थम नहीं रहा है। वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ की महिला संसदीय सचिव अपनी मनमानी को लेकर एक बार फिर विवादों में है। अपने सगे शिक्षाकर्मी भाई को अपना शासकीय निज सहायक बनाने के बाद छत्तीसगढ़ शासन की संसदीय सचिव व भरतपुर सोनहत विधायक चंपादेवी पावले एक बार फिर विधायक जनसंपर्क निधि की बंदरबाट करने के कारण सुर्खियों में है। एक बार संसदीय सचिव द्वारा जनसंपर्क निधि की राशि का जमकर दुरुपयोग किया गया है। वित्तीय अधिकारों का फायदा उठाकर जनप्रतिनिधि अपने चहेतों को रेवडिय़ां बांट दी।

कांग्रेसी विधायक ठाकुर रजनीश सिंह ने ह्वाट्स ग्रुप पर 11 सेकेंड की ब्लू फिल्म पोस्ट कर दिया!

सिवनी (मध्य प्रदेश)। कुछ वर्षो पूर्व विधानसभाओं में यह चर्चा बड़े जोर से गर्मायी थी कि विधायक विधानसभाओं में काम के वक्त कम्प्यूटरों में नीली फिल्म देखते हैं और यह मामला गर्माया मगर शनै: शनै: शांत हो गया, यह मामला उस समय उठा था जब स्वयं स्व. हरवंश सिंह दिग्विजय सिंह जी के कार्यकाल में केबीनेट मंत्री थे। ऐसी ही स्थिति गत दिनों केवलारी के विधायक ठा. रजनीश सिंह के साथ भी निर्मित हुई जब उन्होंने सफाई दे देकर अपने आपको स्वयं उलझन में डाल दिया। मामला कुछ यूं हुआ कि ठा. रजनीश सिंह के वाट्सएप नंबर से एक नीली फिल्म लगभग 11 सेकेंड की एक ह्वाट्सएप ग्रुप को देर रात्रि में सेंड कर दी गयी। 

14.7.16

रवीश और रोहित के नाम चार दिन के पत्रकार का खत

आदरणीय,

रवीश कुमार जी और रोहित सरदाना जी,

आज पहली बार आप दोनों का खत पढ़ा अच्छा लगा. आप दोनों की बातों से बहुत
जानकारीयां भी मिली. लेकिन इस जानकारी से इतर एक ऐसा भी दृष्टिकोण मिला
जिसमें एक पत्रकार दूसरे पत्रकार से सवाल कर रहा था. और उसी दृष्टिकोण से
इस चार दिन के पत्रकार का दो वरिष्ठ पत्रकारों से कुछ सवाल है. हालांकि
मुझे यह नहीं पता कि मेरा यह खत आप दोनों तक पहुंचेगा भी या नहीं, लेकिन
फिर भी मुझे आप दोनों के जवाब का इंतजार रहेगा.

11.7.16

‘कुपोषण से जंग’ सरकार का नारा धोखा

आंगनवाड़ियों के श्रम का हो सम्मान, राष्ट्रव्यापी विरोध दिवस के तहत पूरे प्रदेश में किया आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन ने प्रदर्शन, प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को भेजा पत्रक

लखनऊ, 11 जुलाई 2016, आंगनबाड़ियों का मानदेय 18000 रूपए करने, राज्य कर्मचारी का दर्जा देने, बढ़े हुए मकान किराए को लागू करने, कुपोषण दूर करने के मूलभूत काम के अतिरिक्त कामों में न लगाने, बीमा प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने, निशुल्क चिकित्सा सुविधा देने, केंद्र तक पोषाहार पहुंचाने, शिकायत निवारण कमेटी के गठन समेत बारह सूत्रीय मांगों पर आज अखिल भारतीय आंगनबाड़ी व सहायिका संघ द्वारा आयोजित राष्ट्रव्यापी विरोध दिवस के तहत सीआईटीयू से सम्बद्ध आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन, उ0 प्र0 की तरफ से पूरे प्रदेश में धरना, प्रदर्शन किया गया। सहारनपुर, मुरादाबाद, मेरठ, गाजीपुर, सोनभद्र, गोंडा, बस्ती, लखनऊ समेत तमाम जिलों में आयोजित इन विरोध कार्यक्रमों द्वारा प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को संबोधित पत्रक भेजा गया। लखनऊ में जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन कर पत्रक सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा गया।    

ok india news चैनल की आईडी बेचने का मामला सामने आया

उत्तराखंड (रामनगर) : ok india न्यूज़ चैनल की आईडी  रिपोर्टरों को बेचने का मामला सामने आया है. दरसल मामला ये है कि बाजपुर के रहने बाले भूपेन्दर सिंह पन्नू पिछले कुछ दिनों से खुद को रिपोर्टर बता रहे हैं. इनकी छवि ठीक नहीं है. मीडिया में काम करने के साथ ही उसके सम्बन्ध आस पास के पत्रकार भाइयों से हो गए. पत्रकारों पर अपना विश्वास जमाते हुए whatsapp के ग्रुपों में लिख दिया कि ओके इंडिया न्यूज़ चैनल में काम करने के इच्छुक अपना बायोडाटा मुझे मेल करें.

यजीदीयो की नस्ल है ज़ाकिर नायक : जैनुल आबेदीन हाश्मी

सुल्तानपुर : इस्लाम के आंगन में धोके से इस्लामिक लेबास पहनकर आये कट्टरपंथी ज़ालिम ज़ाकिर नायक ने आलमी पैमाने पर जहां मुसलमानों को अपने लोक लुभावन बोल से  गुमराह किया वहीं ये बहरुपिया आज मज़हब के लिये नासूर बन गया है, जिससे दुनिया भर में इस्लाम बदनामी की ज़नजीरों में जकड़ गया है, लेकिन पढ़े लिखे मुसलमान इस ज़ालिम के मंसूबों को समझ चुके हैं जिन्होंने आखिर इसके खिलाफ ज़बान खोल ही दी, इसी मुद्दे पर रविवार को अंजुमन इस्लाहुल कुरैश के अधयक्ष एवं इंडियन इस्लामिक आर्गनाइजेशन यू.पी. के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष जैनुल आबेदीन हाश्मी ने ख़ास बातचीत में बड़ी बेबाकी से अपनी बात रखी। पेश है श्री हाश्मी से हुई ख़ास बातों के कुछ अंश.....

इन्सान बनना मुश्किल है पर पत्रकार बनना आसान

"जागरण / भास्कर जैसे अखबारो में रहा हूँ मैं''

''वहाँ किसके साथ काम किया?''

''जिसके-जिसके साथ काम किया, सब मर चुके हैं "

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इन्सान बनना मुश्किल है पर पत्रकार बनना आसान
.....

वो खुद को पत्रकार कहें..झूठ बोले..सच बोले..हमसे क्या मतलब। जब चाय वाला प्रधानमंत्री बन सकता है तो एक ड्राइवर, ठेकेदार , बरफ वाला, पंचर वाला..टैम्पो वाला, बिल्डर.. कलाकार..चित्रकार अगर पत्रकार बन जाता है या अपने पेशे की व्यस्तता से समय निकाल कर पत्रकारिता करता है तो किसी को क्या ऐतराज?

9.7.16

जीरो बजट योग और 10,000 करोड़ का व्यापार संकल्प

मंजुल भारद्वाज 
(रंगचिंतक)

एक योग दिखावा कार्यक्रम में देश के शीर्ष पर बैठे राजनैतिक व्यक्ति को योग " जीरो बजट " स्वास्थ्य इन्शुरन्स लगा.... उसने कहा योग हमारा जीरो बजट स्वास्थ्य बीमा है... बात सही है.. हमारे ऋषि मुनियों और भारतीय संस्कृति के सूत्रधारों ने वित्त को संस्कृति , स्वास्थ्य और प्रकृति से दूर रख, आत्मशोध के लिए "ध्यान" और ध्यान में " ज्ञान " अर्जित किया और अनोखे नायाब आविष्कार किए और दुनिया में मानवता को अपने कल्याण के लिए मार्ग दिखाया !

अगर 2017 में प्रियंका नहीं चलीं तो 2019 के लिये कांग्रेस के पास कोई विकल्प न बचेगा

यूपी फतह के लिये राहुल को बहन का सहारा


अजय कुमार, लखनऊ

कांग्रेसियों अपनी ‘सियासी हांडी’ पकाने के लिये कभी किसी चीज/बात  से गुरेज नहीं रहता है। वह अपनी विचारधारा को त्याग सकते है। सियासी फायदे के लिये किसी के भी सामने ‘नतमस्तक’ होने जाने की कांग्रेसी संस्कृति दशकों पुरानी है। इसी संस्कृति की देन है कांग्रेसियों का एक परिवार विशेष के प्रति लगाव। नेहरू से लेकर राहुल गांधी तक यह सिलसिला बद्स्तूर जारी रहा। अब इस सिलसिले को प्रियंका गांधी वाड्रा आगे बढ़ायेंगी। कांग्रेस 2017 में पांच राज्यों में होने वाले विधान सभा चुनाव के लिये प्रियंका को आगे करेगी,यह खबर सुर्खियां बनते ही कांग्रेसी मंशा पर सवाल उठने लगे हैैंं।

8.7.16

आतंक को आक्सीजन देती उदारवादियों की खामोशी

अजय कुमार, लखनऊ

बेबाक लेखनी के कारण हमेशा विवादों और कट्टरपंथियों के निशाने पर रहने वाली बांग्लादेश की लेखिका और भारत में निर्वासित जीवन जी रही तस्लीमा नसरीन ने ढाका में आतंकवादी हमले के बाद चार ट्वीट के माध्यम से अपनी भड़ास निकाली। जिसमें उन्होंने लिखा,‘बांग्लादेश ग्लोबल टेरर में कॉन्ट्रिब्यूट करता रहा है।उनका दूसरा ट्वीट आया,’ हमले के सभी आतंकी अमीर फैमिली से थे। वे काफी पढ़े-लिखे थे। कृपया यह न कहें कि गरीबी और कम पढ़ा-लिखा होना लोगों को इस्लामिक टेररिस्ट बनाता है।फिर उन्होंने लिखा,’इंसानियत के लिए ये न कहें कि इस्लाम अमन का मजहब है। इस्लामिक टेररिस्ट बनने के लिए आपको गरीबी, लिटरेसी, अमेरिकी पॉलिसी, इजरायल या साजिश की जरूरत नहीं है। आपको इस्लाम की जरूरत है।’

27.6.16

दलित आंदोलन : पहचान की राजनीति बनाम संसाधनों के पुनर्वितरण की लड़ाई

राधा सरकार और अमर सरकार 
(लन्दन स्कूल ऑफ़ इकनोमिक्स)
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अनुवादक: एस.आर. दारापुरी

उत्तर तथा मध्य भारत में दलित राजनीति अधिकतर पहचान के एजंडा के गिर्द ही रही है जिस में समान सम्मान की मांग तो की गयी परन्तु संसाधनों के पुनर्वितरण की मांग नहीं उठाई गयी. इससे वर्ग के हिसाब से उच्च दलितों का सामाजिक और आर्थिक स्तर तो ऊँचा हुआ है परन्तु अधिकतर दलितों के जीवन स्तर में कोई ख़ास परिवर्तन नहीं आया है. दलितों की समान बर्ताव की चाहत सीमित ही रहेगी जब तक शोषणकारी आर्थिक संबंधों को बदलने वाली पुनर्वितरण की राजनीति का अभाव रहेगा.

22.6.16

सेबी को गरियाने और बड़ी बड़ी फेंकने से फिर चूक नहीं रहे सुब्रत रॉय

बेसहारा से सहाराश्री का शाही स्वागत और कवरेज...

भोपाल : सहारा के बेसहारा से सहाराश्री सुब्रत राय को तीन एक साल पहले जब सुप्रीम कोर्ट ने तिहाड़ जेल भेजा तो उन्होने गिरफ्तारी से बचने और बाद मे रिहाई के लिए बीमार माँ की सेवा-सुश्रुषा का बहाना बनाया। इसके बावजूद अदालत नहीं पिघली और लम्बे समय तक उन्हें जेल की हवा खानी पड़ी। वे अब भी जेल की शोभा बढ़ा रहे होते पर बक़ौल सुप्रीम कोर्ट उनकी माँ मरते-मरते बेटे की मदद कर गईं।

आजमगढ़ में हुई सांप्रदायिक हिंसा में घायल लोग इलाज के अभाव में तड़प रहे

पुलिस ने घरों में घुसकर उत्पीड़न किया, प्रशासन के दबाव में पीड़ितों का न तो मेडिकल किया गया और न ही एफआईआर 

लखनऊ 22 जून 2016। रिहाई मंच ने कहा कि जिस तरह रमजान के महीने में सूबे में जगह-जगह से छिटपुट सांप्रदायिक तनाव की खबरें आ रही हैं ऐसे में इसपर प्रदेश सरकार सख्ती से कार्रवाई करे। मंच ने responseinsafmuhim@gmail.com मेल जारी करते हुए कहा कि अगर कहीं भी तनाव होता है तो आप इस मेल पर सूचित करें। रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि पिछले दिनों आजमगढ़ के खुदादातपुर में हुई सांप्रदायिक हिंसा में घायल हुए लोग आज भी चिकित्सा के अभाव में पीड़ा सह रहे हैं, उन्हें कोई मुआवजा अब तक नहीं दिया गया या फिर खुदादातपुर जहां पुलिस ने घरों में घुसकर जो उत्पीड़न किया वो सरकार की मानसिकता को उजागर करता है कि प्रशासन के दबाव में न तो उनका मेडिकल किया गया और न ही एफआईआर।

कांग्रेस ने तिलक की अवहेलना नहीं की होती तो सुराज्य बहुत पहले आ जाता : वेंकैया नायडू

लोकमान्य तिलक व कांग्रेस के संबंधों के सच पर प्रकाशित पुस्तक का वेंकैया ने किया विमोचन


मुंबई, 22 जून। लोकमान्य बाल गंगाधर के जीवन से जुड़ी अनेक घटनाओं, कई विषयों एवं विवादों व अनेक रहस्यों से परदा हटाने के उद्धेश्य से प्रकाशित पुस्तक ‘लोकमान्यांची सिंहगर्जना’ का विमोचन केंद्रीय आवास मंत्री वेंकैया नायडू ने किया। लोकमान्य के पुणे स्थित निवासस्थान केसरीवाड़ा के लोकमान्य सभागार में भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष मंगल प्रभात लोढ़ा द्वारा आयोजित इस विमोचन समारोह में लोकमान्य के वंशज तिलक विद्यापीठ के कुलपति डॉ. दीपक तिलक एवं मुक्ता तिलक की उपस्थित में संपन्न इस विमोचन समारोह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री पीयूष गोयल, भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष रावसाहेब दानवे, वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार, खाद्य व आपूर्ति मंत्री गिरीश बापट, सांसद अनिल शिरोळे विधायक माधुरी मिसाळ विशेष रूप से उपस्थित थे।

19.6.16

सरकार की असहिष्णुता के शिकार हुए राजन

विवेक दत्त मथुरिया

रघुराम राजन को जिस तरह सनसनी स्वामी द्वारा जिस तरह आहत किया गया है, यह सरकार की असहिष्णुता का जीवंत प्रमाण है। वही देश के अकादमिक संस्थानों में नाख्वादा लोगों की नियुक्ति कर सरकार एक तरह से तानाशाही का परिचय दे रही है। सरकार और उसके मुंह लगे। लोग सिरफिरों जैसी हरकत कर अकादमिक संस्थानों का सत्यानाश करने पर आमादा हैं। मोदी सरकार का सत्तामद चरम पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह नहीं भूलना चाहिए कि यही सत्तामद कांग्रेस के सत्यानाश का कारण बना। एक अर्थशास्त्री के तौर पर रघुराम राजन ने अपनी योग्यता का परिचय दिया, वह उनकी गंभीरता और समझ को दर्शाता है।

दिल्ली से दारू दूर भगाने के लिए भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने केजरीवाल को लिखा पत्र

To,

Hon’ble Chief Minister
Government of NCT of Delhi-110001
Subject: Ban on liquor and other intoxicating drinks

Dear Sir,

Provisions contained in Part-IV of the Constitution of India namely Directives Principles of State Policy and the principles therein laid down are nevertheless fundamental in the Governance and it is duty of the State to apply these principles in letter and spirit. Idea of prohibiting the Liquor is connected with public health and to enforce prohibition effectively, the wider definition of the word ‘Liquor’ would have to be adopted so as to include all alcoholic liquids which may be used as substitutes for intoxicating drinks, to the detriment of health.

कितना नीचे गिरेगा दैनिक भास्कर...



भास्कर अपने को आगे बढ़ाने के लिए कितना गिर सकता है इसका एक जीता-जागता उदाहरण भेज रहा हूं। नीचे दिया गया अटैचमेंट देखिए कैसे एक रेप की खबर को भास्कर विज्ञापन बनाकर बेच रहा है और खबर भी कैसी.. सांस बन होने तक रेप।

खबर से बौखलाये भदोही विधायक ने संपादक को दी देख लेने की धमकी

भदोही 19 जून। खबरों से बौखलाये भदोही विधायक जाहिद बेग ने भदोही से प्रकाशित सत्यम् न्यूज़ के प्रधान संपादक नसीर कुरैशी को देख लेने की धमकी दे डाली। संपादक नसीर कुरैशी को आज उस समय देख लेने की धमकी दी गयी जब वह विधायक के पचभैया स्थित आवास पर सैकड़ों लोगों के प्रदर्शन को कवर करने पहुंचे थे।

छत्तीसगढ़ में संसदीय सचिव ने भाई को ही बना दिया सरकारी पीए

चंपादेवी पावले ने भाई को ही बना ​दिया शासकीय निज सहायक, शासकीय नियमों के तहत ​शिक्षाकर्मी नहीं बन सकते निज सहायक, 




संसदीय सचिव चंपा देवी पावले। भाई बबन सिंह। भाजपा कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान लाल घेरे में मंच पर बैठे बबन सिंह।

गढ़वाल की 18 पहाड़ी सीटों पर चुनाव लड़ेगी प्रजामंडल पार्टी

An apeal for prajamandal party



आदरणीय महानुभाव,
सप्रेम वन्दे !!

उत्तराखण्ड का पर्वतीय क्षेत्र जो देश के हर वर्ग के जनमानस से किसी न किसी प्रकार से जुड़ाव रखता है व हमारे भारतवर्ष के इतिहास की गंगा, उसी पर्वतीय क्षेत्र के वीथियों से निकलती दिखाई देती है I इस इतिहास के श्रोत का संरक्षण को लेकर आज भी पहाड़ में रहने वाला व्यक्ति प्रयासरत है I हमारे गौरव व राष्ट्र कि शान से जाने जाना वाला पर्वतीय क्षेत्र आज संसार के तथाकथित उन कुरीति व परंपरा का शिकार हो रहा है जो आज एक आम जन मानस के हृदय को स्वीकार नही I भ्रष्ट तंत्र के अलावा आज पहाड़ का  जन मानस, जो एक प्रहरी के रूप में है, के साथ आज भी छलावा किया जा रहा हैI

17.6.16

बिहार टॉपर घोटाला का पर्दाफाश करने वाले पत्रकारों ‎चंद्रमणि‬ और ‪‎मधुप‬ को उनका वाज़िब हक़ मिलना चाहिए


बिहार टॉपर घोटाला का पर्दाफाश करने वाले ‎चंद्रमणि‬ और ‪‎मधुप‬ को भी उनका वाज़िब हक़ मिलना चाहिए। इनके चैनल वाले बस इतना 'रहम' कर दें कि स्ट्रिंगर का 'ओहदा' हटाकर इन्हें अपना एम्प्लॉय बना लें। Chandra Mani मेरे बैचमेट रहे हैं और एक मेजर एक्सीडेंट के बाद ज़िन्दगी की 'दूसरी पारी' जी रहे हैं। टॉपर को इंसाफ दिए जाने के बाद इन दोनों को भी 'इंसाफ' मिलना चाहिए, इस सफलता पर मुआवजा दिया जाना चाहिए। मुआवजा इसलिए क्योंकि स्ट्रिंगर को हमेशा से 'मुआवजा' ही दिया जाता रहा है।

केजरीवाल के मोहल्ला क्लीनिक वाले प्रयोग से खुश हैं जस्टिस काटजू




A visit to two Mohalla Clinics... I had heard about the Mohalla Clinics set up by the Aam Aadmi Party, but I had never personally visited any of them. So I decided today to make a surprise visit. I visited two Mohalla Clinics, one behind Masjid Nooh, Zakir Nagar, Okhla and the other at Jogabai Extension. They were in congested areas, and I had to go through narrow lanes to reach them. It was obvious that a lot of poor people live in the area.

गुजरात दंगों में जलाकर मार डाले गए पूर्व सांसद एहसान जाफरी की एक नज़्म


गीतों से तेरी जुल्फ को मीरा ने संवारा
गौतम ने सदा दी
तुझे नानक ने पुकारा

14.6.16

भारत के मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर को जनहित में एक पत्र : न्यायालयों को पोस्ट ऑफिस बनने से बचाया जाय

माननीय न्यायाधीश टी. एस. ठाकुर,
मुख्य न्यायाधीश उच्चतम न्यायालय, भारत।

मी लार्ड न्याय देश में धंधा बनता जा रहा है, इसे न्यायप्रणाली के रूप फिर से स्थापित करिये... गुस्ताखी माफ़ करें कि हिंदी में लिख रहा हूँ, हिंदी पट्टी का हूँ और बचपन से इसी में पला और बढ़ा हूँ। अपने मन की व्यथा इसी में अच्छे से व्यक्त कर सकता हूँ, मुझे पूरा विश्वास है कि अंग्रेजी में न लिखे होने के बावजूद आप इस पर गौर करेंगे।  

सहारा के मीडियाकर्मियों का तालकटोरा व जंतर-मंतर पर प्रदर्शन





वेतन बकाया की अदायगी के लिए सुब्रात राय सहारा के साथ-साथ पीएमओ, गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय को ज्ञापन

नई दिल्ली। पिछले लगभग दो वर्षों से वेतन की अदायगी में सहारा इडिया परिवार प्रबंधन के टालमटोल रवैये से परेशान सहारा मीडिया के सैकड़ों कर्मचारियों को शुक्रवार को सुबह तालकटोरा स्टेडियम पर कंपनी के चेयरमैन सुब्रात राय सहाया से मिलकर वेतन की शीघ्र अदायगी की अपील करने पहुंचे मगर भारी पुलिस बल के बंदोबस्त के कारण उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। मौके पर मौजूद सीनियर पुलिस अधिकारियों ने उन्हें स्टेडियम के गेट से काफी पहले ही रोक दिया आैर उन्हें वापस भेजने लगे। प्रबंधन आैर पुलिस के रवैये से आक्रोशित सहारा मीडिया के कर्मचारी वहीं अपना बैनर आैर तख्तियां लहराने लगे तो पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर बस द्वारा उन्हें जंतर-मंतर भिजवा दिया।

सहारा हड़ताल : आखिर चाहते क्या हैं सहारा श्री

आज राष्ट्रीय सहारा छपा या नहीं, छपा तो कौन-कौन सा एडिशन। सारे संस्करण छपे या केवल सिटी। आज हडताल रहेगी या अखबार छपेगा। कुछ ऐसी ही खबरों/अफवाहों से पिछले कई माह से दो-होना पड रहा है सहारा मीडिया में काम करने वाले और छोड़ (चाहे सेफ एक्जिट प्लान के तहत नौकरी छोडने वाले हों या दूध में पडी मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिये जाने वाले कर्मचारी हों) देने वाले कर्तव्ययोगी हों।

देखें स्टिंग : खाकी में खलनायक

प्रेस विज्ञप्ति

असल न्यूज़ मासिक पत्रिका ने इस बार "खाकी में खलनायक" नाम से स्पेशल स्टोरी प्रकाशित की है, इसमें असल न्यूज़ ने यूपी पुलिस को लेकर स्टिंग ऑपरेशन किया है, जिसमें सब-इंस्पेक्टर स्तर के कुछ पुलिवाले पैसा लेकर किसी बेगुनाह का एनकाउंटर करने का दावा कर रहे हैं। पुलिसवालों ने विस्तार से बताया है कि वो फर्जी एनकाउंटर कैसे करते हैं और एनकाउंटर से पहले कैसे पैसा वसूल करते हैं। इतना ही नहीं खुफिया कैमरे पर यह किसी बेगुनाह पर आर्म्स एक्ट के तहत केस लगाने की बात कर रहे हैं तथा उसे हत्या के प्रयास में फंसाने और थाने में थर्ड डिग्री टॉर्चर करने के बारे में भी विस्तार से बता रहे हैं। इसके अलावा ये पुलिसवाले ड्रग्स का इंतजाम तक खुद करने का दावा करते हुए किसी बेगुनाह को झूठे ड्रग्स केस में फंसाने की बात कबूल कर रहे हैं।

रमज़ान पर विशेष : मरहबा सद मरहबा आमदे-रमज़ान है

-फ़िरदौस ख़ान

मरहबा सद मरहबा आमदे-रमज़ान है
खिल उठे मुरझाए दिल, ताज़ा हुआ ईमान है
हम गुनाहगारों पे ये कितना बड़ा अहसान है
या ख़ुदा तूने अता फिर कर दिया रमज़ान है...

माहे-रमज़ान इबादत, नेकियों और रौनक़ का महीना है. यह हिजरी कैलेंडर का नौवां महीना होता है. इस्लाम के मुताबिक़ अल्लाह ने अपने बंदों पर पांच चीज़ें फ़र्ज क़ी हैं, जिनमें कलमा, नमाज़, रोज़ा, हज और ज़कात शामिल है. रोज़े का फ़र्ज़ अदा करने का मौक़ा रमज़ान में आता है. कहा जाता है कि रमज़ान में हर नेकी का सवाब 70 नेकियों के बराबर होता है और इस महीने में इबादत करने पर 70 गुना सवाब हासिल होता है. इसी मुबारक माह में अल्लाह ने हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर क़ु़रआन नाज़िल किया था. यह भी कहा जाता है कि इस महीने में अल्लाह शैतान को क़ैद कर देता है.

मीडिया का जोगीप्रेम


छत्तीसगढ़ में तीन साल तक मुख्यमंत्री रहने का दायित्व निभाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी कांग्रेस को टाटा क्या बोल पड़े, रायपुर से दिल्ली अख़बार, और टीवी चैनल्स को छग से फ़िर एक बड़ी ख़बर मिल गई है. कांग्रेस के नेता जहाँ बकायदा आधिकारिक बयान जारी कर ख़ुदको जोगी से छुटकारा पाने बताते पटाखे फोड़ रहे हैं, वहीँ कोटमी में सोमवार को हुई जोगी की महत्वपूर्ण सभा के जरिये जोगी समर्थकों ने एक बार फ़िर जोगी की महिमा का राग अलापा.

जुबान फि‍सलने की बीमारी वाले मंत्रीजी ने मीडि‍या वालों को मीटिंग से बाहर कर दिया

बहन मां की गाली देते मीडि‍या के कैमरे में आ गए थे, अब मंत्री जी मीडि‍या का कैमरा देखते ही कांप जाते हैं.... हरि‍याणा में पहली बार कष्‍ट निवारण जैसी ओपन मीटिंग से मीडि‍या को बाहर नि‍काला... हरि‍याणा के इति‍हास में पहली बार ऐसा हुआ कि‍ मीडि‍या वालों को कष्‍ट नि‍वारण समि‍ति‍ की मीटिंग से बाहर नि‍काल दि‍या गया हो। दरहअसल सोमवार को हरि‍याणा सरकार के मंत्री कृष्‍ण बेदी यमुनानगर में इस मीटिंग की अध्‍यक्षता करने आए थे। पि‍छली मीटिंग में वो एक अधि‍कारी को बहन मां की गाली नि‍कालते हुए मीडि‍या के कैमरे में आ गए थे। 15 फरवरी का ये वाकया है। बाद में उन्‍होंने कहा की रनिंग में कुछ ऐसा नि‍कल गया, जुबान पि‍सल गई। इससे पहले उन्‍होंने एक फतेहाबाद में खुद मोदी के बारे ही कह दि‍या था कि‍ पता नहीं ये मोदी भी क्‍या क्‍या कराकर छोडेगा। कहा मीडि‍या का कैमरा चौबीस घंटे फांसी बनकर लटका रहता है, कई नि‍जी भावों को भी व्‍यक्‍त नहीं कर सकते।

कैसी पत्रकारिता.......?

एक वो दौर था जब खादी का झोला स्याही वाली कलम और कॉपी से पत्रकार की पहचान होती थी. समय बीतता गया और झोले की जगह लेपटॉप का बैग कलम कागज की जगह कीबोर्ड और माउस ने ले ली. समय और दौर की मांग थी लिहाजा आधुनिक संसाधनों से लेस होना भी जरुरी था. आधुनिक संसाधनों से जहां एक ओर पत्रकारिता जगत में क्रांति आई और सूचनाएं त्वरित रूप में आम जनों तक पहुँचने लगी , इसी बिच ग्लेमर की चकाचौंध भी बढ़ी जिसने ज़मीन से कइयों को आसमान तक पहुंचा दिया. लेकिन इन्ही सब के बिच ग्लेमर और तड़क-भड़क में पत्रकारिता कहीं गुम सी होती लग रही है. कम से कम आज के दौर में ग्राउंड लेव्हल के पत्रकारों को देख कर तो कुछ ऐसा ही लगता है........

उत्तर प्रदेश में किसकी बनेगी सरकार!

 अभिषेक कांत पाण्डेय

इस बार उत्तर प्रदेश में किसकी सरकार बनेगी इसकी कवायद तेज होने लगी है। इधर इलाहाबाद में भाजपा कार्यकारणी की बैठक के बाद परिवर्तन रैली से पीएम मोदी ने अपने भाषण से जनता को संदेश दिया की उत्तर प्रदेश में भाजपा आएगी तो वह विकास करेगी। 50 साल का विकास वह पांच साल में करके दिखाएगी। उत्तर प्रदेश में कानून व्यव​स्था की खराब हालत के लिए सपा सरकार पर निशाना साधा। वहीं इलाहाबाद की रैली में भले भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री के लिए कोई चेहरा नहीं चुना गया लेकिन राजनाथ सिहं को सशक्त बताया, उत्तर प्रदेश में उनके राज को अब तक का बेहतर कार्यकाल बताकर नरेंद्र मोदी ने फिलहाल राजनाथ सिंह को उत्तर प्रदेश आगे रखा है। रैली में भीड़ को देखकर उत्साहित होने वाले ये अंदाजा लगा सकते हैं कि इस बार भाजपा उत्तर प्रदेश की सत्ता की प्रबल दावेदार है। लेकिन सही रणनीति बनाने में भाजपा अगर सफल रही तो आने वाले चुनाव से पहले वह मुद्दों को अपने पक्ष में कर सकती है, जिससे उसे चुनाव में फायदा मिलेगा।

जिसके पास गाय नहीं है वह गरीब है : जगदीश्वर गोबर्धन


''देश का विकास करना है , खुद को स्वस्थ रखना है और अपनी संस्कृति को जिन्दा रखना है तो गौ माता की सेवा करो। जिसके पास गाय नहीं है वह गरीब है। '' उक्त बातें नारायणी साहित्य अकादमी, नई दिल्ली द्वारा 11 जून, द्वारका, दिल्ली में  आयोजित भारत मॉरिशस की साझा सांस्कृतिक विरासत पर परिचर्चा में बतौर मुख्य अतिथि मारीशस गणराज्य के उच्चायुक्त महामहिम जगदीश्वर गोबर्धन  ने कही।  उन्होंने कहा कि भारत और मारीशस का खून एक ही है , इसलिए एक दुसरे के प्रति खिंचाव स्वाभाविक है. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि नरेश नाज और संयोजन -संचालन भोजपुरी के प्रख्यात साहित्य्कार और टेलीविजन पर्सनालिटी मनोज भावुक ने किया।

आखिर क्या होगा जी पुरवईया का?

जी मीडिया समूह यूँ तो 90 के दशक में ही अस्तित्व में आया लेकिन शुरूआती समय में मीडिया जगत में कैसे उसे जगह और पहचान मिले,यह चुनौती उसके सामने मुंह बाए खड़ी थी।बड़ी मिहनत और जद्दोजहद से जी समूह की मजबूत टीम बनी और धीरे--धीरे जी मीडिया लोगों के दिल में उतरता चला गया।हांलांकि इस दौर में समय--समय पर इस समूह के सामने कई तरह की मुश्किलें और पेचीदगियां भी आईं लेकिन सभी से पार पाते हुए बदस्तूर इस समूह का सितारा बुलंद रहा।पुरानी बातों पर ज्यादा चर्चा से बेहतर है की हम कुछ हालिया घटनाक्रम पर ध्यान दें जिससे हमारे पाठकों के लिए रोचकता भी बनी रहेगी और वे मौलिकता से सने सच से रूबरू भी होंगे।

मॉरिशस, फीजी, गुयाना कहीं भी देखो तुम.... हम जहाँ जाते हैं सरकार बना लेते हैं...

भारत-मॉरिशस की साझा सांस्कृतिक विरासत





मनोज भावुक 

भारत और मॉरिशस के बीच मुझे सिर्फ हिन्द महासागर की दूरी का अंतर लगता है। वहाँ के किसी गांव में जाने पर ऐसा लगता है जैसे हम आरा, बलिया , छपरा या आजमगढ़ के किसी गांव में बैठे हैं। सिर्फ फ्रेंच या क्रियोल के शब्द कान में पड़ने से हम उसे अलग नहीं कर सकते।  मै बिहार के सिवान जिले का  रहने वाला हूँ।  रेणुकूट, सोनभद्र , उत्तर प्रदेश में पला बढा हूँ।  मुझे मॉरिशस तमिलनाडु, केरला , कर्नाटक या असम से ज्यादा अपना लगता है क्योंकि हमारी भाषा एक है, हमारी संस्कृति और संस्कार एक हैं।  विदित है कि मॉरिशस की दो तिहाई से भी ज्यादा आबादी भोजपुरी बोलती है और  इन  भोजपुरी भाषियों के पूर्वज लगभग 182 साल पहले बिहार और उत्तर प्रदेश से गिरमिटिया मजदूर बनकर वहाँ गए थे। अब सवाल यह उठता है कि इतने वर्षों के बाद भी अपनी विरासत को अक्षुण्ण सुरक्षित बनाए रखना कैसे सम्भव हो पाया। आखिर वह कौन सी ताकत है कि हम ग्लोबलाइजेशन के दबाव और अवरोध के बावजूद मॉरिशस में अपनी जड़ों से कटे नहीं।

भारत-मॉरिशस के रिश्तों पर काव्य पाठ : ....सात समुन्दर के पार हैं, लेकिन लगता है, अपनी ही मिटटी है, अपना डेरा है





7 जून, आगरा में ग्रैंड होटल में भारत मॉरिशस मैत्री कवि सम्मलेन व विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता आगरा कॉलेज के प्राचार्य डा ० मनोज रावत ने की। मुख्य अतिथि थे केंद्रीय हिंदी संस्थान के निदेशक प्रो० नन्द किशोर पांडेय। साहित्यिक- सांस्कृतिक विनिमय हेतु आयोजित इस कवि सम्मलेन में मॉरिशस के कवियों डाक्टर हेमराज सुन्दर,अरविन्द बिसेसर,रीतेश मोहाबिर,अभी ऊदोय,अशिता रघू और अंजली चिंतामणि ने अपनी खांटी भोजपुरी से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भारत की ओर से डा० चंद्रमणि ब्रम्हदत्त, रुचि चतुर्वेदी, जयशंकर प्रसाद द्विवेदी, विनय विनम्र, अनूप पांडेय ने भी खूब तालियां बटोरी।

सलमान की सनक, अरिजीत सिंह की कसक

NEERAJ CHOUDHARY 
अक़बर के बारे में कहा जाता है कि, वो जमुना किनारे सूर्य को अर्घ्य भी
देता था और नमाज़ भी पढ़ता था। नाटे क़द का अक़बर राजनीति, कुशल रणनीति और
विरोधियों को गिराने-उठाने में पारंगत था। कुछ इतिहासकार उसे पक्का
नौटंकीबाज भी बताते हैं, बिल्कुल आजकल के नेताओं की तरह। मौज़ूदा दौर के
नेता भी उसी तर्ज़ पर रहते हैं कि, ‛गंगा गए तो गंगादास, जमुना गए तो
जमुनादास।’

जब बंदा सिंह बहादुर ने इतिहास रच डाला...

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अठारहवीं शताब्दी के शुरु में ही हुई दो लड़ाइयाँ अपना ऐतिहासिक महत्व रखती हैं । इन दोनों लड़ाईयों ने पश्चिमोत्तर भारत में विदेशी मुग़ल वंश के कफ़न में कील का काम किया । ये लडाईयां थीं  पंजाब में सरहिन्द और गुरदास नंगल की लडाई । इन दोनों लड़ाईयों का नेतृत्व बंदा सिंह बहादुर ने किया । बंदा सिंह बहादुर को इस संग्राम के लिए गुरु गोविन्द सिंह ने तैयार किया था । मध्य एशिया से आए मुग़ल वंश ने भारत पर क़ब्ज़ा करने की शुरुआत 1526 में की थी । जिन दिनों इस वंश के बाबर ने हिन्दोस्तान पर हमला किया था , उन्हीं दिनों भारत में एक ऐतिहासिक गुरु परम्परा प्रारम्भ हुई थी , जिसके वानी गुरु नानक देव थे । उसी गुरु परम्परा के दशम गुरु श्री गोविन्द सिंह हुए ।

9.6.16

वाह पसिन्जर जिंदाबाद (कविता)

पसिंजरनामा
.......................
काठ की सीट पर बैठ के जाना
वाह पसिन्जर जिंदाबाद
बिना टिकस के रायबरेली
बिना टिकस के फ़ैज़ाबाद
हम लोगों की चढ़ी ग़रीबी को सहलाना
वाह पसिन्जर जिंदाबाद.

Cover page of Journalist Manish Sharma’s another Fiction Novel released



The Journalist Manish Sharma with experience of 13 year, as an author, added another feather cap in his writing as his second fiction-real novel: I want to be Tendulkar’s cover page has been released today on Social Media and is being hailed by peoples in large number and discussed among the readers.The novel would be available in market almost with in one & half month and also on leading websites,like; Amazon &flipkart. Apart from that the novel would be available for the international audiencein various countries, and could be purchased through Amazon International website.

पत्रकार अभिषेक पांडेय सम्मानित किए गए


इंडिया टीवी और इंडिया न्यूज़ जैसे चैनल्स में रिपोर्टिंग कर चुके पत्रकार अभिषेक पान्डेय को गणेश शंकर विद्यार्थी समर्पित (हिन्द स्वाभिमान अवार्ड 2016) से नवाज़ा गया।

ज्यादातर विवाद फ़िल्म की पब्लिसिटी के लिए होते हैं

फ़िल्म सेंसर बोर्ड फ़िल्म उड़ता पंजाब को लेकर एक बार फिर विवाद में है। सेंसर बोर्ड में बतौर सलाहकार पैनल सदस्य 3 साल के अपने अनुभव के आधार पर कह सकता हु कि फिल्मो के सेंसर से जुड़े ज्यादातर विवाद फ़िल्म की पब्लिसिटी के लिए होते हैं।