.....भड़ास की गांधीगीरी....
ब्लागवाणी, मैथिली और इनके पीआरओ अरुण अरोरा पर थू....
ब्लागवाणी जो ब्लागों के कई एग्रीगेटरों में से एक है, के संचालक मैथिली गुप्ता ने एक औ ब्लाग विस्फोट की जान ले ली है। इससे पहले भड़ास पर काली नजर डाली और उसे ठिकाने लगाने की कोशिश की, पर उसकी कुत्सित साजिशों के सामने हम झुके नहीं, उठ कर खड़े हुए और हाथी की माफिक आगे बढ़ गए। वो कुत्ते की माफिक पीछे भोंकता रह गया। उसके उखाड़े कुछ भी न उखड़ा। एक भी पाठक भड़ास से कम नहीं हुए बल्कि उल्टे कई पाठक बढ़ गए और आज भड़ास दुनिया का सबसे बड़ा हिंदी ब्लाग बन चुका है।
पर मैथिली की शतरंजी चालों, जो कुछ मठाधीश ब्लागरों के इशारे पर चली जा रही थीं, से नाराज होकर या उकताकर या स्तब्ध होकर विस्फोट ब्लाग के मुख्य माडरेटर संजय तिवारी ने उसे डिलीट कर दिया।
मैथिली को पसंद नहीं था कि विस्फोट के सदस्यों में यशवंत सिंह और डा. रूपेश और वरूण राय और ....कई भड़ासी साथी क्यों शामिल कर लिए गए....और तो और उसने संजय तिवारी को फोन कर इस बात पर आपत्ति भी जताई कि अब जब भड़ासी टाइप के लोग विस्फोट की टीम में शामिल हो गए, क्यों न विस्फोट को ब्लागवाणी से हटा दिया जाए। और...इस तानाशाह मैथिली ने, कुछ हाथों की कठपुतली मैथिली ने विस्फोट को ब्लागवाणी से हटा भी दिया।
आपको यकीन न हो तो हिंदी के पहले ब्लागर आलोक कुमार की इस पोस्ट को जरूर पढ़ें। उन्होंने साफ साफ लिखा है कि ब्लागवाणी के चलते विस्फोट विस्फोटित हो गया।
आप सभी भड़ासी ब्लागवाणी और मैथिली पर थू थू करें और इसके जरिए अपने गुस्से और भड़ास का इजहार करें।
शुरुवात मैं खुद करता हूं....
ब्लागवाणी, मैथिली और इनके पीआरओ अरुण अरोरा पर थू....
ये भड़ास की गांधीगीरी है, इसमें आप भी शामिल हों और एक बार थू थू कर दें.......
जय भड़ास
यशवंत
7.5.08
कितने ब्लागों का खून पीकर शांत होगा मैथिली
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यशवंत सिंह yashwant singh
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Labels: गांधीगिरी, थू थू अभियान, ब्लाग्वानी, भड़ास, मैथिली
17.4.08
दशानन देसाई के तीनों फोन नंबरों पर एक बार खतरे की घंटी जरूर बजाइये, थोड़ी गांधीगिरी आजमाइये
....उस सुअर अधिकारी का नाम, पता और टेलीफोन नं. लिखने को कहा है कि अगर हो सके तो उसे गांधीगिरी करते हुए फूल और गिफ़्ट भेजिये उसके कमीनेपन के व्यवहार के लिये धन्यवाद करिये-------
नाम : ए.के.देसाई
पद : चीफ़ आफ़िसर(मुख्याधिकारी)
पता: पनवेल नगर परिषद,जिला रायगढ़(नई मुंबई)-४१०२०६
फोन: ०२२-२७४५५७५१(आफ़िस)
०२२-२७४५२२०६(निवास)
०९३२४९८३३४४(मोबाईल)
Posted by मोहम्मद उमर रफ़ाई
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उपरोक्त बातें नीचे की एक पोस्ट से ली गई हैं जिसमें बताया गया है कि किस तरह एक बददिमाग अफसर देसाई ने सूचना के अधिकार कानून (आरटीआई) को हथियार बनाकर जनता की लड़ाई लड़ने वाले, सामाजिक सरोकारों वाले, जनता के पक्ष में हर हाल में खड़े होने वाले मशहूर आयुर्वेदिक डाक्टर और भड़ास के माडरेटर डा. रूपेश श्रीवास्तव के साथ सरेआम आफिस में बदतमीजी की और अपने सहकर्मियों को डाक्टर साहब की बेइज्जती करने के लिए उकसाया। अब्बा जान मोहम्मद उमर रफ़ाई भी उस वक्त डाक्टर साहब के साथ थे, जब ये बदतमीजी की जा रही थी।
मैं जब मुंबई गया था तो उस समय मैंने खुद देखा था कि किस तरह नवी मुंबई के इलाकों के विकास के नाम पर ठेकेदार, बिल्डर, अफसर, नेता, अपराधी गठजोड़ बनाकर पैसे हड़प रहे हैं। अगर इनके किये पर कोई आवाज उठाता है तो उसे ये गठजोड़ डरा धमका कर चुप कराने की कोशिश करता है। पर डाक्टर साहब ठहरे कफन बांधकर घूमने वाले औघड़, सो इन पर किसी की धमकी का कोई असर ही नहीं होता और अपने काम में ये जुटे रहते हैं।
देसाई ने जो कुछ किया वो अनपेक्षित नहीं है क्योंकि मीडिया हाउसों ने अपनी और अपने पत्रकारों की हालत ऐसी बना ही दी है कि कोई भी अफसर या नेता अब पत्रकार को दलाल से ज्यादा मानने को तैयार ही नहीं है। इसी कारण अगर देसाई ने डा. रूपेश के तेवर के आगे घबराकर आंय बांय सांय बकबका दिया हो तो कोई नई बात नहीं है। उसे तो यह भरोसा रहा होगा कि हर पत्रकार की तरह डाक्टर रूपेश भी ले देकर सेट हो जायेंगे पर रूपेश जी ठहरे बाल की खाल निकालने वाले, सो वह बेचार डाक्टर साहब के उकसावे में आ गया और लगा बकबकाने। बस उसने यही गलती कर दी। अब गलती कर दी तो उसे भुगतना भी होगा।
उपर देसाई का जो आफिस, घर का लैंडलाइन फोन नंबर दिया गया है और उसका खुद का पर्सनल मोबाइल नंबर दिया गया है, उस पर सभी भड़ासी एक बार फोन करें, और उसे कहें कि हिंदी पत्रकारों के सबसे बड़े ब्लाग भड़ास के माडरेटर डाक्टर रूपेश के साथ जो तुमने किया है, वो तुम्हारी वाट लगवाने के लिए काफी है और जल्द ही तुम्हारी वाट लगेगी। दिल्ली के पत्रकार शरद पवार से मिलकर महाराष्ट्र के ऐसा घटिया अफसर को तुरंत सस्पेंड करने की मांग करेंगे और अगर यह मांग नहीं मानी गई तो मुंबई दिल्ली के सभी पत्रकार मिलकर शरद पवार के घर के सामने धरना देंगे।
तो सभी भड़ासी साथियों, देसाई के फोन नंबरों पर इतनी घंटी बजाओ की उसे तीनों ही नंबर बंद करा देने पडें और किसी सच्चे पत्रकार से पंगा लेने के नतीजे का उसे अहसास हो सके। मैं तो हर दो मिनट में उपरोक्त नंबरों पर फोन करके उसे नमस्कार कर रहा हूं और डाक्टर रूपेश के साथ किए गए बर्ताव की सजा पाने के लिए तैयार रहने को कह रहा हूं। आप भी काम चालू रखें, साथ में सभी भड़ासी भाई हैं। देसाई जैसे कीड़े खुद ब खुद मर जाएंगे। बस इन्हें थोड़ा परेशान करने की जरूरत है।
मेरी मेल पर एक पत्रकार साथी ने कुछ यूं मेल भेजा हुआ है.....
dr.rupesh ke sath hui ghatna par pratikriya
from nitesh pal
nitesh.pal70@gmail.com
to yashwant
yashwantdelhi@gmail.com
date 16 Apr 2008 22:43
subject dr.rupesh ke sath hui ghatna par pratikriya
mailed-by gmail.com
yeshwant ji me indore or bhopal dono hi jagah reporting karta hu. or2no hi jagah rupesh ji ke sath hui ghatanajesi ghatnae aam baat he.lekin indore ke patrkaro ne iska tarika dundh rakha he.pahle latgiri.bad me gandhigiri.
apni awaz sarkar ke mukhiya tak pahuchane ke bad sarwajanik bahiskar.
Reply Forward Invite nitesh to chat
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उम्मीद है कि एक पत्रकार साथी के साथ एक अफसर द्वारा सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगे जाने के एवज में जो बदतमीजी की गई है उसका बदलना लेने को आप सभी पत्रकार साथी गांधीगिरी का रास्ता अपनायेंगे और देसाई के फोन नंबरों पर एक एक बार फोन करके उसे जरूर धन्यवाद देंगे और खुद को भड़ास का साथी बतायेंगे और ये भी कहेंगे कि उसने जो किया है अब पूरी दुनिया भड़ास के माध्यम से पढ़ रही है और उसकी वाट लगने वाली है। जल्द ही देश भर के पत्रकार दिल्ली में शरद पवार से मिलने के बाद धरना प्रदर्शन शुरू करने वाले हैं।
उम्मीद है, ये छोटा सा प्यारा सा काम आप लोग बेहद मजे में कर देंगे, और आपका ये छोटा सा काम हम लोगों के लिए एक बड़ी सफलता का पैगाम लेकर आएगा। बस यूं ही एकजुट बने रहिए, लगे रहिए....
जय भड़ास
यशवंत
इस प्रकरण से संबंधित अन्य पोस्ट पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें....
...मुहिम छेड़ दी है : गांधीगिरी बनाम गांडूगिरी
अमानवीय व्यवहार की निंदा करते हैं हम
फैलने लगा है राज ठाकरे का जहर
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यशवंत सिंह yashwant singh
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Labels: आरटीआई, गांधीगिरी, डा. रूपेश, पत्रकार, पहल, भड़ास, हिंदी मीडिया
16.4.08
यशवंत और डॉ.रूपेश ने मुहिम छेड़ दी है : गाधीगिरी बनाम गांडूगिरी
गांडीवर लात मारुन बाहेर काढ़ुन टाक या दोघा आई झवाड़्याना आले मोठे पत्रकार... (गांड पर लात मारकर बाहर निकाल दो इन दोनो मादरचो॑** को बड़े आए पत्रकार....)........। क्या आप यकीन करेंगे कि ये किसी गुंडे या मवाली के शब्द नहीं बल्कि एक ऊंचे सरकारी ओहदे पर बैठे अधिकारी के हैं। जरा ये भी जान लीजिये कि ऐसी ही दसियों गन्दी-गन्दी बातें कही किसके लिये गयी हैं। भड़ास परिवार के लिये आदरणीय माने जाने वाले तीखे तेवरों के लिये पहचाने जाने वाले आपके भड़ास के मॉडरेटर डॉ.रूपेश श्रीवास्तव के लिये और उनके साथ में था मैं नाचीज़(आप लोगों की मुनव्वर आपा का बाप हूं मैं) जो अपने जमाने का बड़ा रंगबाज हुआ करता था लेकिन अब सचमुच बूढ़ा हो गया हूं। बात भड़ास के मॉडरेटर डॉ.रूपेश श्रीवास्तव के द्वारा चलाए जा रहे सरकारी कामों में अनियमितता के खिलाफ़ R.T.I.(सूचना प्राप्ति के अधिकार) की है। उन्होंने तमाम सरकारी घपलों की पोल खोल कर रख दी है लेकिन धन्य हैं मुंबई और नई मुंबई के पत्रकार जो सिर्फ भड़वागिरी के अलावा कुछ नहीं करते हैं,पत्रकारिता के तमाम उसूल उन्होंने बेंच कर खा लिये हैं। सूचना प्राप्ति के अधिकार के अंतर्गत जो दस्तावेज कार्यालयों ने रो-रोकर दिये उन्हें हाथ में लेकर जब भड़ास के मॉडरेटर डॉ.रूपेश श्रीवास्तव हमारे क्षेत्र की नगर परिषद के चीफ़ आफ़िसर के पास लेकर गये तो उसने जो न सिर्फ़ गाली-गलौच करी बल्कि धक्का-मुक्की करते हुए कहा कि जो उखाड़ सकता है उखाड़ ले तुम पत्रकारों में इतनी भी ताकत भी नहीं है कि मेरी झांट का एक बाल भी टेढ़ा कर सको। इस अधिकारी ने कहा कि तुझे क्यों चाहिये ये सब जानकारी ? लोगों को ब्लैकमेल करता है साले....... पता नही कहां-कहां से मादरचो** हिन्दी बोलने वाले आकर हमें चो * ना सिखा रहे हैं..... । भड़ास के मॉडरेटर डॉ.रूपेश श्रीवास्तव ने इतना अपमान सहकर भी अपना आपा नहीं खोया बिना किसी नाराजगी के उन्होंने उस नीच अधिकारी से माफ़ी मांगी कि मेरी वजह से आपको तकलीफ़ हुई इसके लिये माफ़ करें। मेरे सामने उन्होंने तुरंत ही बाहर आकर भड़ास के दूसरे मॉडरेटर श्री यशवंत सिंह को फोन करके घटना की जानकारी दी और मशविरा किया कि ये लड़ाई कैसे लड़ेंगे हम सारे भड़ासी। उन्होंने मुझे अभी बताया कि भड़ास के दिग्गजों ने निर्धारित किया है कि इस लड़ाई को गांधीगिरी से लड़ना है। मुझे निजी तौर पर नहीं मालुम कि लड़ाई का ये कौन सा तरीका है? मेरे लिये तो ये एक बिलकुल नया अनुभव होने वाला है क्योंकि मैंने तो मामले पिस्टल से सुलझाए हैं अबतक। डॉ.रूपेश श्रीवास्तव ने मुझे बताया कि भड़ास के दूसरे मॉडरेटर श्री यशवंत सिंह ने तो ये मुहिम छेड़ भी दी है और उस अधिकारी से सीधे बात भी करी है कि आपने जो भी किया वो बड़ा अच्छा किया हम लोगों के साथ ऐसा ही किया जाना चाहिये क्योंकि हम हैं धरती ग्रह के हिन्दी के सबसे बड़े हिन्दी कम्युनिटी ब्लाग से जुड़े लोग, जिसमें हिन्दी मीडिया से जुड़े कथित महान-महान लोग जुड़े हैं। अब मैं देखना चाहता हूं कि बाकी भड़ासी क्या करते हैं मैं इस पोस्ट को लिख कर मूक दर्शक रहूंगा देखने के लिये कि भड़ास की ताकत क्या है और कितनी है?
उस सुअर अधिकारी का नाम, पता और टेलीफोन नं. लिखने को कहा है कि अगर हो सके तो उसे गांधीगिरी करते हुए फूल और गिफ़्ट भेजिये उसके कमीनेपन के व्यवहार के लिये धन्यवाद करिये-------
नाम : ए.के.देसाई
पद : चीफ़ आफ़िसर(मुख्याधिकारी),
पता: पनवेल नगर परिषद,जिला रायगढ़(नई मुंबई)-४१०२०६
फोन: ०२२-२७४५५७५१(आफ़िस)
०२२-२७४५२२०६(निवास)
०९३२४९८३३४४(मोबाईल)
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मोहम्मद उमर रफ़ाई
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