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23.6.08

स्वागत के प्रत्युतर में दो शब्द

आज भडास पर यशवंत भाई नै म्हारे स्वागत मै बढै कसीदे
काढ राखे सैं । और भई क्युं ना काढै आखिर हम इस
लायक है ही । इब शरमा शरमी मै, मैं न्युं तो नही कहूंगा
के नही नही मैं इस लायक कहां ? पर भई ताऊ तो इस लायक सै
और सोलह आनै सै । किसी नै ऐतराज हो तो हुया करै ।
बल्कि हमनै तो यो लागै सै कि स्वागत किम्मै माडा (कमजोर) ही
हुया सै । बातां सै तो घणा ही स्वागत हुया पर भाई , जरा
ढोल ढमाकां की कमी सी रह गी सै । कोई बात ना यशवंत जी आगे
भी मोके आते ही रहेंगे ।
आगे आपने स्वागत भासण मै कह्या सै की - म्हारे भडासी बनने
से कूछ लोगां नै तकलीफ़ हो सकै सै । सो भाइ हम उनके
कहनै सै तो भडासी बने नही सैं । म्हारी मर्जी , हम भडासी
बनै या संडासी । और जब तक हम भडासी सैं तब तक
तो ठिक सै , उनका पीछा सिर्फ़ बातां धोरै ही छूट ज्यागा ।
और जै हम संडासी बण गे तो भाई उनको घणी तकलीफ़
खडी हो जावैगी । इब थम तो जाणो ही हो कि, संडासी किस काम
आवै सै ? भई वो ही .. जिसनै कुत्ते और बन्दर पकडने के लिये
उनके गले मै डाल्या करते हैं । तो भाइ जिसनै तकलीफ़ हो रही
हो , वो सोचले कि ताऊ की के इच्छा सै । सो सोच समझ कर
बात करैं तो ठिक रहवैगा ।
और भाई इब ताऊ कै जचगी तो जचगी .. कर ले जिसने
जो करना सै .. ताऊ तो बन गया भडासी । किसी नै ऐतराज हो तो
अपनी राधा नै खिलावै । पर ताऊ सै इस बारे मैं बात नही करै ।
ताऊ एक बार अपनै ऊंट नै लेके सडक कै बीचों बीच जावै था ।
पिछे सै एक छोरा अपनी नई नई कार लेके ताऊ कै पीछे
पीं... पीं... होर्न बजानै लग रया था । ताऊ नै किम्मै ध्यान दिया नही ।
सो उस छोरे नै कार की खिडकी मै से गरदन काढ के जोर से आवाज
लगाई-- ओ ताऊ तेरे कान फ़ूट गे क्या ? एक तरफ़ क्यूं नही
हटता, इतनी देर से होर्न बजानै लग रहा हूं ?
ताऊ-- अरे छोरे ! ताता (गर्म) क्युं हो रया सै ?
यो सडक के तेरे बाप की सै ?
वो छोरा भी किम्मै अकडू ही दिखै था । सो उसनै जबाव दिया कि--
हां यो सडक म्हारे बाप की ही सै ! बोल इब के कर लेगा ?
ताऊ बोल्या-- अरे तो , उस तेरे बाप नै कहता क्युं नही के,
तेरे खातर इसनै चोडी करवा दे..... ! ताऊ तो बीच मै ही चलेगा ।
सो भाइ किसी नै तकलीफ़ हो तो म्हारा जबाव पढ लियो ।
अच्छा भाइ इब म्हानै इजाजत देवो कूछ काम धन्धा भी करण दो ।
सप्ताह खत्म होनै तक कूछ कचरा दिमाग मै इक्क्ठा हो गया
तो फ़ेर थारै दिमाग मैं उंडेल देवांगे । तब तक थ्यावस (सब्र) राखो ।
राम राम ..

4 comments:

यशवंत सिंह yashwant singh said...

जय हो ताऊ की....यूं ही फाड्डे रहियो भाया.....मजा आय गवा.....

डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) said...

ताऊ,क्या बाप के बड़े भाई क्या लिख रएला ऐ बस जास्ती समझ नई आता पण प्यार की भाषा तो सब समझ ते तो अपुन बी तुमारा प्यार व्यार समझ इच लेंगा ऐसे इच चालू रैने का.....

vipin shah jaipur said...

taau khub jam ke patang chadhaai sai.. utaariyo mat...tham ke rohtak ke ho yaa jind bhiwani ke ?

P. C. Rampuria said...

भाई विपिन जी , थमनै म्हारा पता चाहिए तो आप ईमेल करो !आपनै जरुर बता देँगे | और गुप चुप मैँ चहिये तो , भइ रहण दे |
इब चाहे ताउ रोहतक का हो या जीँद भिवानी का |
और भइ आप भडासी बण के भि म्हारा पता जाण सको हो |आगे थ्हारी मरजी .. और खबर दार जै म्हारी पतंग काटनै की कोशीश करी तो...