Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

24.8.12

आरक्षण - सड़क से संसद तक

प्रमोशन में आरक्षण को लेकर घमासान जारी है...सड़क से लेकर संसद तक हर तरफ आरक्षण को लेकर बवाल मचा है। मायावती को इससे कुछ ज्यादा ही प्यार है...हो भी क्यों न भई आखिर माया की राजनीति भी तो आज तक इसी के सहारे परवान चढ़ती आयी है। अब 2007 की ही बात कर लेते हैं...उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के नतीजे आये तो शायद ही मायावती ने सोचा होगा कि उनका हाथी विधानसभा की दो तिहाई सीटों पर कब्जा कर लेगा। अब भला क्यों माया आरक्षण को लेकर हो हल्ला न मचाए...अभी तो बहुत साल राजनीति करनी है इन्हें। ये हाल सिर्फ मायावती का नहीं बल्कि देश के तमाम राजनीतिक दलों के नेताओँ को भी यही हाल है...वे भी अपनी अपनी सहूलियत के हिसाब से अपने अपने वर्ग के लोगों के लिए आरक्षण की बात करते आये हैं। चलिए ये तो थी माया औऱ दूसरे राजनेताओं की बात जो अपनी राजनीति चमकाने के लिए आरक्षण के जिन्न को समय समय पर बोतल से बाहर निकालने से गुरेज नहीं करते। आप ही सोचिए क्या वाकई में सरकारी नौकरी में आरक्षण के बाद प्रमोशन में भी किसी वर्ग विशेष के लिए आरक्षण जायज है। क्यों नहीं योग्यता का पैमाना ही यहां पर उपयोग किया जाए। लेकिन अफसोस ऐसा है नहीं...जाति धर्म के आधार पर राजनीति करने वाले सरकार चला रहे हमारे राजनेताओं को तो अपने वोट बैंक को साधना है...ऐसे में वे ये कैसे होने देते...नौकरी में प्रमोशन के लिए सत्ता पर बैठे इन लोगों ने आरक्षण लागू कर दिया। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने इसे अनुचित ठहराते हुए इस पर रोक तो लगा दी...लेकिन इसके बाद भी हमारे नेतागण हर इस जुगत में लगे हैं कि प्रमोशन में आरक्षण बहाल करने के लिए संविधन संशोधन विधेयक पास हो जाए। हालांकि कांग्रेस पहले ही इसके पक्ष में दिखाई दी जब 9 अगस्त 2012 को सरकार ने सदन में जोरदार हंगामे के बाद इस विधेयक को सदन में पेश करने की बात कही। हालांकि विधेयक रखे जाने से पहले प्रधानमंत्री ने अपने निवास पर 21 अगस्त 2012 को इस पर आम सहमति के लिए सर्वदलीय बैठ भी बुलाई...लेकिन ये बैठक भी बेनतीजा ही समाप्त हुई। सपा नेताओं के संविधान संशोधन विधेयक का पुरजोर विरोध करने के बाद सरकार ने 22 अगस्त को सदन में संविधान संशोधन विधेयक पेश करने की योजना टाल दी। हालांकि सरकार ने अपनी मंशा तो जाहिर कर ही दी है कि वो देर सबेर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने के लिए संविधान संशोधन विधेयक लेकर आएगी...यानि की प्रमोशन में आरक्षण सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ फिर से लागू हो जाएगा। अगर ऐसा होता है तो इस मुद्दे को लेकर दो गुटों  में बंटे सरकारी कर्मचारी कैसे एक दफ्तर में एक छत के नीचे साथ काम कर पाएंगे...वो भी उस स्थिति में जब एक कर्मचारी का जूनियर उसका सीनियर हो चुका होगा...या हो जाएगा...जाहिर है इससे कर्मचारियों में कुंठा आएगी...औऱ वो अपना सौ प्रतिशत नहीं दे पाएंगे...जो वैसे भी ज्यादातर सरकारी कर्मचारी नहीं देते हैं। खैर ये तो प्रमोशन में आरक्षण लागू होने के बाद की बात है...लेकिन इसको लागू करवाने में सरकार के सामने भी मुश्किलें बहुत हैं। मनमोहन सरकार कभी नहीं चाहेगी कि सपा की नाराजगी दूर किए बगैर वो संविधान संशोधन विधेयक सदन में पेश करे...औऱ सरकार की पूरी कोशिश विधेयक को पेश करने से पहले सपा को मनाने की भी होगी। साथ ही सरकार के सामने सबसे बड़ी और मुश्किल चुनौती सरकारी कर्मचारियों का वो बड़ा गुट है जो लगातार प्रमोशन में आरक्षण का विरोध कर रहा है। इस गुट ने साफ भी कर दिया है कि अगर प्रमोशन में आरक्षण लागू होता है तो वो बिना सूचना के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। अब सरकार अगर प्रमोशन में आऱक्षण लागू करने के लिए संविधान संशोधन विधेयक पेश करती है तो सरकार को सरकारी कर्मचारियों के इस गुट की नाराजगी झेलनी पड़ेगी जो सरकार को 2014 के आम चुनाव में भारी पड़ सकती है। ऐसे में सरकार भले ही बिल को लेकर अपनी मंशा जाहिर कर चुकी हो...लेकिन अंदरखाने इसको लेकर चिंतन जरूर चल रहा है कि आखिर वो करे तो क्या करे। बहरहाल सड़क से लेकर संसद तक जारी इस लड़ाई में किसके चेहरे पर खुशी झलकेगी और किसके चेहरे पर नाराजगी ये तो वक्त ही बताएगा...फिलहाल प्रमोशन में आरक्षण के जिन्न ने सबकी नींद जरूर उड़ाकर रखी है।

deepaktiwari555@gmail.com

नेताजी,मानता हूँ ।




(Google Images)



नेताजी, मानता  हूँ ।


मेरे  आख़री  निवाले  पर  भी, हक़  है  आप  का, मानता  हूँ ।


नेताजी, फिर  भी  आप  रह   जायेंगें   भूखे,  मैं   जानता  हूँ ।


१.

झूठे  -  मूठे   वर   देंगें,  रहने   को   ये   घर  देंगें,  खुशी   मना..!

कैसा  घर, कैसी  खुशी, महँगाई  ने  तिल-तिल  कर  हमें  मारा ।

नेताजी,  आप  तो  कभी  न   थे   इतने  सस्ते?  मैं  जानता  हूँ ।

मेरे   आख़री   निवाले   पर   भी,  हक़  है  आप  का, मानता  हूँ ।


२.


हाल  -  बेहाल  हम  रहते   हैं   और   मजबूरी   में   जीते   हैं ।

कब का  भूल चूके  हैं  रोना, दर्द  पर  भी  हम  तो  हँसते   हैं..!

नेताजी,  दर्द   की  आँख   के  आप   सितारे   हैं , जानता  हूँ ।

मेरे  आख़री  निवाले  पर  भी,  हक़  है  आप  का, मानता  हूँ ।


३.


मत  मारी  गई  थी  हमारी, जो   हमने  आप  का  बटन  दबाया ।

जंगल  जाने   को  बचा   था, एक ही  लोटन,  वो  भी  बिकवाया?

नेताजी,  फिर   भी   आप   रह   जायेंगे   प्यासे,  मैं  जानता  हूँ ।

मेरे   आख़री   निवाले   पर    भी,  हक़  है  आप  का, मानता  हूँ ।


मार्कण्ड दवे । दिनांकः२४-०८-२०१२.

23.8.12

दिल की दरार । (गीत)




(GOOGLE IMAGES.)


दिल की दरार । (गीत)



दिल   की   दरार  से,  दर्द  का  लावा  बह  रहा  है ।


दोस्त,राख बन कर अब वो,पछतावा  कर  रहा  है ।


(लावा=ज्वालामुखी पदार्थ;  छलावा= धोखेबाज़ी)



अंतरा-१.



इश्क  से   परहेज़   करने  के   पल  आ  गए,  शायद..!


किनारा  करते  हैं  हम  से  वो,  भुलावा   कह  रहा  है । 


दिल    की   दरार   से,  दर्द   का   लावा  बह  रहा  है ।

(परहेज़= एहतियात; भुलावा=  चकमा देना)



अंतरा- २.



अरमाँ भरा  चमन  खिला  तो  था, गुलों  के  लिए, पर..!


महफ़िल   सजाएगें   अब   कांटें,  बुलावा  कह  रहा  है ।


दिल    की     दरार   से,  दर्द    का   लावा  बह  रहा  है ।

(गुल= फूल; बुलावा= निमंत्रण)



अंतरा-३.



मुस्कुराहटों  में   तेरी,  ये  दिल  भी  तहत  था, मगर..!


दिल  की    दरार  से  देख अंदर,  छलावा  हँस  रहा  है ।


दिल    की     दरार   से,  दर्द    का   लावा  बह  रहा  है ।

(तहत= शामिल होना)



अंतरा-४. 



जाए  तो   जाए  कहाँ,  बेकस, टूटा - फूटा  सा  दिल..!


शायद,  मयक़दे   की  ओर,  ये  कारवाँ   चल  रहा  है?


दिल    की     दरार   से,  दर्द    का   लावा  बह  रहा  है ।

(बेकस= लावारिस)


मार्कण्ड दवे । दिनांकः२३-०८-२०१२.

22.8.12

महंगाई से खुश मंत्री, जनता बेहाल


देश की जनता भले ही महंगाई से त्रस्त हो। आम आदमी की कमर भले ही टूट रही हो, लेकिन ऐसे में कोई मंत्री महंगाई से खुश हो, तो आश्चर्य ही होता है। केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने यह कहकर सभी को चौंका दिया कि महंगाई बढ़ेगी तो किसानों का फायदा होगा। इसलिए वह बढ़ती महंगाई से खुश है। पता नहीं ही चला कि मंत्री का यह कोन सा गणित था। प्रधानमंत्री महंगाई पर चिंता जाहिर करते हैं उसे चुनौती भी बताते हैं ओर उन्हीं का मंत्री उनकी चिंता की हवा निकाल देता है। जमीनी हकीकत यह है कि महंगाई का असल फायदा दलालों, बिचौलियों को होता है। कृषि प्रधान देश में किसान ही आत्महत्या करते हों, तो दुर्भाग्य को समझा जा सकता है। महंगाई, भ्रष्टाचार व घोटालों से जनता में पहले ही आक्रोश है। इस तरह के बयान जनता के जख्मों पर नमक डालने जैसा है। ज्यादा पुरानी बात नहीं है जब हरविंदर नामक एक युवक ने कृषि मंत्री शरद पंवार को चाटा जड़ दिया था। कानूनी रूप से यह अपराध था जिसके लिये उसे जेल भी जाना पड़ा, लेकिन उसके आक्रोश को झलकाता था। वह महंगाई से परेशान था। पंवार महंगाई पर अपने बयानों को लेकर चर्चित रहे थे। कभी कहते थे कि वह कोई ज्योतिष नहीं कि बताये कब घटेगी महंगाई, कभी कहते थे कि चीनी या दूध के दाम बढेंगे। उनके बयान के बाद ही रेट बढ़ जाते थे। जरूरी हो जाता है कि जनता के आक्रोश को समझना चाहिए। क्योंकि जनता की मार कुछ-कुछ वैसी ही है जैसे खुदा की बेआवाज लाठी।

चुकंदर - सेहत का सिकंदर


चुकंदर - सेहत का सिकंदर


चुकंदर या बीटा वल्गेरिस (Family Chenopodiaceae) अनेक विटामिन, खनिज तत्व और एंटीऑक्सीडेंट से भर पूर एक सुपर फूड है। यह पीले, लाल, बैंगनी या जामुनी कई रंगों में मिलता है। चुकंदर हर सलाद, व्यंजन और सब्जियों में एक नया रंग भर देता है। यह सेहत के लिए बहुत उपयागी है, हम इसे सेहत का सिकंदर कहते है। कैंसर समेत कई बीमारियों में इसका उपयोग होता है। इसे कच्चा, उबाल कर या सब्जी बना कर खाया जाता है। इसकी पत्तियां और जड़ दोनो खाये जाते हैं। आयुर्वेद में इसका प्रयोग औषधि के रूप में भी होता है। इसका ज्यूस एक उत्कृष्ठ टॉनिक है।
चुकंदर का पौष्टिकता और स्वाद बनाये रखने के लिए इसको बिना छिलका निकाले डेढ़ दो इंच टहनी के साथ ही 15 मिनट तक भाप में पकाना चाहिये। पकने से इसकी ऊपरी परत आसानी से निकल आती है और यह अन्य व्यंजन बनाने के लिए तैयार हो जाता है।

इतिहास
चुकंदर की खेती 4000 वर्षों से की जा रही है। आयुर्वेद के कई ग्रंथों में चुकंदर के औषधीय गुणों का वर्णन मिलता है। सबसे पहले बेबीलोन साम्राज्य में इसे खाना शुरू किया गया। ग्रीक और रोम ने इसकी जड़ को औषधी के रूप में और पत्तियों को सब्जी के रूप में प्रयोग किया। हिपोक्रेट्स चुकंदर की पत्तियों से घाव की ड्रेसिंग करता था। इंगलैंड में इसका ज्यूस बूढ़े, कमजोर और रुग्ण लोगों को पिलाया जाता था। अफ्रीका में इसे सायनाइड पॉइजनिंग के उपचार  में प्रयोग किया जाता था।
पोषक तत्वों का गुलदस्ता
चुकंदर में लगभग 10 % जटिल शर्करा होती है, जो शरीर को ताकत देती है। इसमें  विटामिन-ए, विटामिन बी-6, विटामिन बी-12, विटामिन-सी, विटामिन-के, फोलिक एसिड आदि और पोटेशियम, कैल्शियम, मेगनीशियम, मेंगनीज, फोसफोरस, कॉपर, लोह, बोरोन आदि खनिज होते हैं। विदित रहे इसमें केले से भी ज्यादा पोटेशियम होता है। यह घुलनशील फाइबर का भी अच्छा स्रोत है। इसमें कई फाइटोन्यूट्रिएंट्स जैसे बीटाकोरोटीन, ल्यूटिन, जियाजेंथिन, बेटेन, ट्रिप्टोफेन आदि होते हैं।
चुकंदर में कुछ गहरे रंग के स्वास्थ्यवर्धक तत्व होते हैं जिन्हें बीटालेन (betalains) कहते हैं। बीटालेन दो तरह के होते हैं। 1- बीटासायनिन (betacyanins)  और 2- बीटाजेंथिन (betaxanthin)। बीटासायनिन लाल-बैंगनी रंग का तत्व है, जबकि बीटाजेंथिन पीले या नारंगी रंग का तत्व है। बीटानिन बीटरूट में प्रचुर मात्रा में होता है और इसका नाम भी उसी से निकला है। यह एक ग्लूकोसाइड है, जो निर्जलीकृत (hydrolyze) होकर ग्लूकोज और बीटानिडिन बनाता है। यह खाद्य पदार्थों को रंग देने के काम में आता है। बीटानिन नाम के बीटासायनिन तत्व पर बहुत शोध हुई है। हल्के या गहरे लाल, बैंगनी या जामुनी रंग के चुकंदर में मुख्यतः बीटासायनिन तत्व होता है।  पीले चुकंदर में मुख्य तत्व बीटाजेंथिन होता है। सभी बीटालेन में मुख्य अणु बीटालेमिक एसिड होता है, जिससे अमाइनो एसिड डेरीवेटिव जुड़ कर बीटालेन तत्व बनता है। अमाइनो एसिड डेरीवेटिव के आधार पर बीटालेन की पहचान होती है। बीटालेन पानी में धुलनशील होते हैं।  चुकंदर में बीटानिन के अलावा वल्गाजेंथिन, आइसोबीटानिन, प्रोबीटानिन और नियोबीटानिन अन्य बीटालेन होते हैं।  
बीटालेन एरोमेटिक इंडोल डेरीवेटिव हैं, जो टायरोसीन से बनते हैं। बीटालेन की रासायनिक संरचना एंथोसायनिन से बिलकुल भिन्न होती है, ये तो फ्लोवानॉयड भी नहीं हैं। बीटालेन में नाइट्रोजन होती है, जबकि एंथोसायनिन में नाइट्रोजन होती है। हर बीटालेन एक ग्लूकोसाइड है, जिसमें एक शुगर और रंग तत्व होता है। इनका निर्माण प्रकाश की उपस्थिति में प्रोत्साहित होता है। 
अधिकांश बीटालेन एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इन्फ्लेमेट्री होते हैं। इसके साथ ही ये बहुत जल्दी ऑक्सीडाइज हो जाते हैं। चुकंदर के अलावा रूबार्ब, कॉर्ड, एमरेंथ, प्रिकली पियर केक्टस, नोपल केक्टस आदि भी इनके अच्छे स्रोत हैं।
चुकंदर के औषधीय गुण
हृदयरोग में उपयोगी - चुकंदर रक्तचाप कम करता है। हार्टअटेक और स्ट्रोक के जाखिम का कम करता है। चुकंदर में नाइट्रेट्स होते हैं, जो शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाते हैं और रक्तवाहिकाओं को डायलेट करते हैं और रक्तचाप कम करते है। चुकंदर में मौजूद पोटेशियम स्ट्रोक से बचाने में मदद करता है। चुकंदर के बीटासायनिन एल.डी.एल. कॉलेस्टेरोल को ऑक्सीडाइज होने के रोकते है, जिससे धमनियों की भित्तियों में फैट्स जमा नहीं हो पाते हैं और हर्ट अटेक और स्ट्रोक का जोखिम कम होता है। होमोसिस्ट्रीन रक्तवाहिकाओं को क्षतिग्रस्त करता है और बीटेन शरीर में होमोसिस्ट्रीन के स्तर को कम करता है।
डायबिटीज में सहयोगी - चुकंदर में फैट्स बिलकुल नहीं होते और कैलोरी भी कम होती है। इसका ग्लायसीमिक इंडेक्स 64 (मध्यम) और ग्लायसीमिक लोड बहुत कम 2.9 होता है, जिसका मतलब है कि इसके कोर्बोहाइड्रेट बहुत धीरे ग्लूकोज में परिवर्तित होते हैं और इस तरह रक्तशर्करा के स्तर को स्थिर रखते हैं। 
यकृत का रक्षक - चुकंदर में विद्यमान बीटासायनिन निर्विषीकरण या शरीर के टॉक्सिन्स का उत्सर्जन (detox) करने में यकृत की बहुत सहायता करते हैं। साथ ही रक्तवाहिकाओं को साफ रखते हैं।
कैंसर का भक्षक - चुकंदर ल्यूकीमिया और कैंसर के उपचार में बहुत प्रभावशाली पाया गया है। यह यकृत, गुर्दा, पित्ताशय, रक्त और लिम्फ का शोधन करता है। चुकंदर में बीटालेन प्रजाति के एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इन्फ्लेमेट्री तत्व होते हैं, जो कैंसर कोशिकाओं का भक्षण करते हैं। बीटासायनिन डी.एन.ए. म्यूटेशन को बाधित करते हैं। इसमें एक बीटेन नाम का कैंसररोधी एमाइनो एसिड होता है।
विस्कोसिन-माडिसन विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने अपने शोध में यह पाया है कि चुकंदर में विद्यमान लाल रंग का तत्व शरीर में विशेष तरह के प्रोटीन्स का स्तर बढ़ाता है, जिन्हें फेज II एंजाइम कहते हैं। ये एंजाइम्स कैंसर पैदा करने वाले टॉक्सिन्स को निष्क्रिय करके विसर्जन करते हैं। (जरनल ऑफ एग्रीकल्चरल एण्ड फूड कैमिस्ट्री) सन् 1950 से सोमा हॉस्पीटल, हंगरी के डॉ. फेरेंजी सिर्फ चुकंदर से कैंसर का उपचार करते आ रहे हैं। वे चुकंदर के अलावा कुछ भी प्रयोग नहीं करते हैं।
बीटेन लाये खुशियों की बयार - चुकंदर में बेटेन और ट्रिप्टोफेन नामक फील गुड तत्व होते हैं जो मन को शांत करते हैं,  प्रसन्न रखते हैं, डिप्रेशन दूर करते हैं और मूड एलीवेटर का काम करते हैं।
बोरोन लाये यौवन की बहार - चुकंदर में बोरोन नामक तत्व पर्याप्त मात्रा में होता है, जो सीधा लैंगिक हार्मोन्स का निर्माण बढ़ाता है। इसलिए इसे प्राकृतिक कामोद्दीपक कहा जाता है। कई लोग इसे प्राकृतिक वियाग्रा मानते हैं। रोमन साम्राज्य में इसका ज्यूस कामोद्दीपक द्रव्य माना जाता था। पोम्पेई में स्थित प्राचीन काल के विख्यात वैश्यालय ल्यूपनारे की दीवारों पर लगे चित्रों में चुकंदर को  कामोद्दीपक के रूप में दिखाया गया है।
अन्य प्रयोग - इसमें विद्यमान विटामिन-सी अस्थमा से बचाव करता है। बीटाकेरोटीन मोतियाबिंद और मेक्यूलर डीजनरेशन से बचा कर रखता है।  चुकंदर में मौजूद फाइबर कब्जी में लाभ पहुंचाते हैं। स्वास्थ्य के साथ ही यह त्वचा के लिए भी बहुत उपयोगी है। चुकंदर के रस को थोड़े से सिरके में मिलाकर सिर में लगाने से यह रूसी को दूर करता है।  चुकंदर का प्रयोग टमाटर के पेस्ट, सॉस, डेज‌र्ट्स, जैम, जेली, आइसक्रीम और मिठाई में रंग द्रव्य के रूप में प्रयोग किया जाता है।
चुकंदर में सिलिका नामक खनिज होता है जो शरीर में कैल्शियम की उपयोगिता को बढ़ाता है, जिससे हड्डियां  स्वस्थ और मजबत बनती हैं। और ऑस्टियोपोरोसिस से बचाता है। चुकंदर में फोलिक एसिड होता है, जो भ्रूण की स्पाइनल कोर्ड के विकास के लिए बहुत आवश्यक होता है। और जन्मजात विकार स्पाइना बाइफिडा से बचाता है।
सावधानियां
·       इसका ज्यूस  हमेशा किसी अन्य सब्जी या फल जैसे गाजर, सेब, अजमोद आदि के ज्यूस में मिलाकर पीना चाहिये। खाली चुकंदर का ज्यूस पीने से वोकल कोर्ड में क्षणिक तकलीफ हो सकती है। 
·       कई बार चुकंदर खाने से लाल रंग का पेशाब आ सकता है। इसे बिटूरिया कहते हैं। लेकिन यह हिमेचूरिया नहीं है और चिंता का विषय भी नहीं है। यह सामान्य घटना है और थोड़ी देर बाद स्वतः नारमल यूरीन आने लगता है। यह रक्तस्राव नहीं है।
·       इसके पत्तों में ऑग्जेलेट होता है, यदि शरीर में इसकी मात्रा अधिक होने पर यह क्रिस्टलाइज हो सकता है। इसलिए पथरी के रोगियों को इसकी पत्तियां नहीं खाना चाहिये। 

बेक़रार दिल । (गीत)




(GOOGLE IMAGES)

बेक़रार  दिल । (गीत) 



दर - दर   की  ठोकरें  खाने  को,  दिल  बेक़रार   है ।


किसीने  कह  दिया  उसे, उनको  हम  से  प्यार   है ..!



अंतरा-१.



आगाह   किया   था  उसे,   कई   जहाँदीदा   यारों   ने ।


न  कश्ती, न  पतवार,फिर क्यूँ, तरंत का तलबगार  है ?


दर - दर   की   ठोकरें   खाने   को,  दिल   बेक़रार   है ।



(आगाह=सूचित; जहाँदीदा= अनुभवी; तरंत= समंदर; तलबगार= इच्छुक । )



अंतरा-२.



न आग़ाज़  का   पता  है उसे,  न  अन्जाम  का   पता..!


तब  भी,  कुछ  कर  गुज़रने  की  सनक  धुँआँधार   है ।


दर - दर   की    ठोकरें   खाने   को,  दिल   बेक़रार   है ।



(आग़ाज़= आरंभ; अन्जाम= नतीजा; सनक= जुनून)



अंतरा-३.



न  धुआँ, न  आग, न  जलन का  अहसास,  फिर  भी..!


उसे    अंगारों   पर   चलने   का    शौक,   बेशुमार   है ।


दर - दर    की    ठोकरें    खाने   को,  दिल  बेक़रार   है ।




अंतरा- ४.



न   कभी  सुनी  है,  न   कभी  सुनेगा  वो, दीवाना   है  ।


फिर,हर  मासूम दिल की, फ़ितरत  ही  ग़मख़्वार   है..!


दर - दर   की   ठोकरें    खाने   को, दिल  बेक़रार   है ।



(फ़ितरत=  स्वभाव; ग़मख़्वार= सहनशील)


मार्कण्ड दवे । दिनांकः २२-०८-२०१२. 

मेरे मन की कुछ बातें

  • मेरे आंगन में
देखो सूरज डूब रहा है।
अब तो तुम लौट आओ।
चांद के रहने तक रह लेना,
तुम साथ आंगन में मेरे ।
- रविकुमार बाबुल

  •  दर्द
आओ कात लें धागा हम तुम।
सिल दें हम अपने रिश्ते को।
जख्मों का इल्जाम न हो तेरे सर,
और जग-जाहिर न हो दर्द मेरा।
- रविकुमार बाबुल

  • तेरा चाहा
खुदा से तुम्हें,
मांगा था मैंने।
वह दे न सका,
तुम्हें मुझको।
तन्हा रहूं,
यह चाहा था तुमने,
कर दिया तेरा चाहा,
तू अब मेरे पास नहीं।
- रविकुमार बाबुल

21.8.12

भारत में गोहत्या का औचित्य-ब्रज की दुनिया

मित्रों,हमारी वर्तमान केंद्र सरकार किसी अजायबघर से कम नहीं है। इसके सारे-के-सारे मंत्री अजीब और अद्भुत हैं और इसलिए अजायबघर में रखे जाने के सबसे पहले हक़दार भी हैं। इन्हीं में से एक जो हिन्दू तो हैं ही ब्राह्मण भी हैं इन दिनों गोवध को उचित साबित करने में लगे हुए हैं। उनका कहना है कि गोवध देशहित में है और इसके चलते कमजोर वर्ग के लाखों लोगों को रोजगार मिला हुआ है। श्रीमान् जो इस समय सत्ता का निर्बाध आनंद ले रहे हैं और जिनका नाम भी आनंद शर्मा है का यह भी कहना है कि बूढ़ी गायों-भैंसों को घर में पालकर क्या फायदा? वे जब उत्पादक नहीं रह गयी हैं अर्थात् जब न तो दूध ही दे सकती हैं और न तो बच्चा ही पैदा कर सकती हैं तो फिर उनको मारकर खा जाना ही अच्छा है। श्रीमान् ने कितनी बार गोमांस का स्वाद चखा है यह उन्होंने नहीं बताया जबकि बताना चाहिए था;तब हम भी जान पाते कि आखिर वे कितने आधुनिक हिन्दू हैं या किस ग्रेड के आधुनिक हिन्दू हैं। खैर यह नहीं बताया तो कोई बात नहीं वे यही बता दें कि क्या उनके माता-पिता जीवित हैं? अगर हाँ तो मंत्रीजी ने उन्हें क्यों जिन्दा रखा है जबकि वे दोनों भी तो अब अनुत्पादक हो चुके हैं? मंत्रीजी उनको भी मारकर खा क्यों नहीं जाते? उनके शरीर को इससे काफी अच्छी मात्रा में सल्फर, कैल्शियम, प्रोटीन आदि तो प्राप्त हो जाता ही मुफ्त में मांस चाभने का सुअवसर भी मिल जाता। गोमाता और भैंसमाता का मल-मूत्र तो फिर भी सर्वोत्तम कोटि का खाद होता है मंत्रीजी के माता-पिता का तो मल-मूत्र भी किसी काम का नहीं होता। फिर उनके ऊपर मंत्रीजी धन और श्रम का अपव्यय क्यों कर रहे हैं?क्या उनका ऐसा करना किसी भी तरह से देशहित में है,अगर है तो कैसे;क्या मंत्रीजी बताएंगे?जहाँ तक कमजोर तबके के लोगों को रोजगार मिलने का प्रश्न है तो इससे बड़ा झूठ कोई हो ही नहीं सकता। हाँ,अल्पसंख्यक मुसलमानों को जरूर इससे लाभ प्राप्त हो रहा है,रोजगार मिल रहा है और गोमांस भी खाने को मिल रहा है।
                   मित्रों,जहाँ तक हिन्दू धर्म जिससे माननीय आनंद शर्मा भी आते हैं में हजारों सालों से माँ की तरह दूध पिलाकर मानवता की अमूल्य सेवा करनेवाली गाय के महत्त्व का सवाल है तो हम सभी जानते हैं कि गाय को हिन्दू धर्म में काफी सम्मानित स्थान प्राप्त है और हम उसे माँ अर्थात् गोमाता कहकर पुकारते हैं। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार गोसेवा के पुण्य का प्रभाव कई जन्मों तक रहता है। पौराणिक काल में ही गोसेवा को धर्म के साथ जोड़ दिया गया। श्रीमद्भागवत् पुराण में हम पाते हैं कि भगवान् गोपाल श्रीकृष्ण ने इन्द्रपूजा बंद कराकर गोपूजा आरंभ कराई। हमारे गांवों में आज भी ऐसी मान्यता है कि गाय को पहली रोटी खिला देने से सभी देवी-देवताओं को भोग लग जाता है। पुराणों में गायों को धर्म और पृथ्वी का प्रतीक माना गया है। दुनिया के सबसे प्राचीन धर्मग्रन्थ ऋग्वेद में गाय को अघन्या अर्थात वध न करने योग्य कहा गया है। विभिन्न रूपों में गौ शब्द का प्रयोग ऋग्वेद में 176 बार किया गया है। गौ शब्द तब धन का पर्यायवाची था और धनी व्यक्ति को गोमत कहा जाता था। गायों का महत्त्व तब इतना अधिक था कि युद्ध के शब्द भी गाय से ही बने,जैसे-गविष्टि। इतना ही नहीं समय को मापने  के लिए भी गाय से ही शब्द बने,जैसे-गोसु,गव्यत,गव्यु और गोधुली। तब राजा को गोप और गोपति संज्ञा दी जाती थी। पुत्री के लिए दुहित्री शब्द का प्रयोग किया जाता था। देवताओं की 4 श्रेणियों में से एक श्रेणी को गोजात कह कर पुकारते थे अर्थात् गाय से उत्पन्न। वैदिक लोगों को भारत में जब पहली बार भैंस के दर्शन हुए तो उन्होंने उसे भी गौदी या गवाला कहा। ऋग्वेद में एक अन्य महत्वपूर्ण शब्द है-गोत्र,ऋग्वेद में जिसका अर्थ है-गोरक्षक।
                  मित्रों,हिन्दू शास्त्रों की चर्चा तो बहुत हो चुकी अब कुछ इतिहास की बात भी कर लेते हैं। भारत में मुग़ल साम्राज्य के संस्थापक बाबर को आप किस रूप में जानते हैं,रूढ़िवादी मुस्लिम के रूप में न? परन्तु उसी बाबर के शासनकाल में ही भारत में गोवध पर प्रतिबन्ध लगाया गया था। बाद में हुमायूँ,अकबर,जहाँगीर,शाहजहाँ,औरंगजेब और यहाँ तक कि अहमदशाह के शासनकाल तक भारत में गोहत्या पूरी तरह से प्रतिबंधित थी। इतिहास का यह एक महत्वपूर्ण और सुनहरा अध्याय यह भी है कि मैसूर के शासक हैदर अली और टीपू सुल्तान ने गोवध में लिप्त लोगों के लिए सजा का भी प्रावधान कर रखा था। सजा भी कोई ऐसी छोटी-मोटी नहीं। अगर कोई व्यक्ति गोहत्या के आरोप में पकड़ा जाता तो उसके दोनों हाथ काट लिए जाते थे। इतिहास में सिर्फ हिन्दू शासकों ने ही नहीं बल्कि मुस्लिम शासकों ने भी गायों को कितना सम्मान दिया और अपनी बहुमत प्रजा हिन्दुओं की भावनाओं का किस कदर ख्याल रखा यह इन चंद उदाहरणों से आप भी अवश्य समझ गए होंगे।
             मित्रों,आधुनिक काल में जब अंग्रेजों ने 1757 ई. में बंगाल पर अधिकार कर लिया तब लॉर्ड क्लाईव ने भारत में पहली बार आधिकारिक तौर पर 1760 ई. में गोवध के लिए एक स्लाउटर हाउस (वधशाला) खोला। कोलकाता में स्थित इस वधशाला की क्षमता प्रतिदिन 30 हजार गाएँ काटने की थी। संभवतः उसी दौर में गायों को बचाने के लिए हिन्दू समाज के सुधारवादी नेताओं ने गोशालाएँ बनवाने का आंदोलन शु़रू किया।
                              मित्रों,गाय को भारतीय कृषि की रीढ की हड्डी माना जाता है। कृषि ही अर्थव्यवस्था का आधार थी इसी वजह से राबर्ट क्लाइव ने ध्यान केंद्रित किया क्योंकि वह भारतीय कृषि को विनष्ट करना चाहता था। आजादी की लड़ाई के समय पंडित जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी ने एक बार नहीं बल्कि सैकड़ों बार कहा कि आजाद भारत में गोहत्या पर प्रतिबंध होगा। परंतु आजादी के बाद गायों के साथ-साथ हिन्दू समाज के साथ भी धोखा किया गया और गोवध के प्रश्न को समान नागरिक संहिता की ही तरह भविष्य के नेताओं पर छोड़ दिया गया। तब से गोवध के मामले का कुछ ऐसा राजनीतिकरण हुआ और अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण की नीति पर इतना अधिक जोर दिया गया कि गांधीजी और संविधान की इस भावना का पालन आज स्वतंत्रता के 65 साल बाद तक भी नहीं किया गया है और जिस तरह से हिन्दू जनमानस सोया हुआ है शायद कभी गोवध को रोकने के लिए कानून बन ही नहीं पाए।
                   मित्रों,यह कितनी बड़ी बिडम्बना है कि ब्रिटिश काल से भी कई गुणा ज्यादा संख्या में गाएँ आज के स्वाधीन भारत में काटी जा रही हैं और फिर भी भारत के 90 करोड़ हिन्दू मूक बने हुए हैं। आज के भारत में गोशालाओं से भी कहीं ज्यादा 3600 गोवधशालाएँ हैं जिनमें रोजाना हजारों गाएँ काटी जा रही हैं। गोमाता के खून से भारत की धरती लाल हुई जा रही है और आश्चर्यजनक रूप से आनन्द शर्मा जैसे हिन्दू इसे रोकने की कोशिश करने के बदले उल्टे इसे उचित ठहराने में लगे हुए हैं। यह एक वैज्ञानिक तथ्य है कि मानव का पाचन तंत्र शाकाहार के लिए डिजाइन किया गया है और गोमांस भक्षण तो स्वास्थ्य के लिए और भी अधिक नुकसानदायक है। इससे फीताकृमि के जानलेवा संक्रमण का भी खतरा रहता है फिर भी भारत के कुछ अहिन्दू लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं। मैंने खुद भी नंगी आँखों से दिल्ली के बटाला हाऊस इलाके में हजारों गायों को मुसलमानों के घर-घर में बकरीद के दिन कटते देखा है।
                                    मित्रों,भारत एक हिन्दू देश तो नहीं है और मैं ऐसा चाहता भी नहीं हूँ परंतु एक हिन्दूबहुल देश तो है ही और इसलिए अल्पसंख्यकों को हिन्दू भावनाओं का आदर करना ही चाहिए। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो फिर वे कैसे और किस मुँह से हिंदुओं से उनकी भावनाओं का ख्याल रखने की उम्मीद करते हैं? यहाँ मैं यह भी स्पष्ट कर दूँ कि मैं अपने देश के पड़ोसी पाकिस्तान की तरह अल्पसंख्यकों को बेवजह तंग करने वाले ईशनिंदा कानून जैसे कानून तो नहीं चाहता हूँ परंतु अपने अल्पसंख्यक भाइयों से ऐसी उम्मीद रखना गलत भी नहीं मानता कि वे हमारी भावनाओं को सम्मान दें और ढिठाईपूर्वक हिन्दू अंतर्मन को चोट न पहुँचाएँ।
                                      मित्रों,अभी-अभी आपने देखा कि मैंने इस लेख के आरंभ में और मध्य में भी देश पर 50 सालों से भी ज्यादा समय तक और वर्तमान में भी सत्तासीन कांग्रेस पार्टी की गायों और तद् नुसार हिन्दुओं के प्रति नीतियों की आलोचना की है लेकिन मैं अब इस मुद्दे को अभी-अभी देश की जनता के समक्ष उठानेवाले और अगले चुनावों में भाजपा और राजग की ओर से प्रधानमंत्री पद के संभावित उम्मीदवार श्री नरेंद्र मोदीजी से भी ठोक-बजाकर पूछना चाहता हूँ कि जब केंद्र में 6 साल तक उनकी पार्टी की सरकार थी तब उन लोगों ने पूरे भारत में गोवध को पूर्णतः प्रतिबंधित क्यों नहीं कर दिया था?साथ ही मैं उनसे और उनके पूरे गठबंधन से इस बात की गारंटी भी चाहता हूँ कि अगर वे लोग अगले लोकसभा चुनावों में सत्ता में आ जाते हैं तो वे लोग गोहत्या पर पूरी तरह से रोक लगा देंगे और ऐसा करनेवालों के लिए वैसी ही सजा का प्रावधान करेंगे जैसी सजा का प्रावधान मानव-हत्या के लिए है।
नोट:आज 25-08-2012 को अब से कुछ देर पहले न जाने क्यों मेरे इस आलेख में लगी तस्वीर ब्लैंक कर दी गई थी। मैंने उसे फिर से लगा दिया है क्योंकि वह तस्वीर झूठी नहीं है। हो सकता है कि केंद्र सरकार के दबाव में गूगल इसे फिर से हटा दे। मैं केंद्र में बैठी नालायक सरकार से यह जानना चाहता हूँ कि क्या इस तस्वीर को हटा देने से भारत में गोहत्या का जघन्य कृत्य बंद हो जाएगा? क्या आँखें मूँद लेने से सच्चाई बदल जाएगी?

दिल से । (गीत)




(GOOGLE  IMAGES)


दिल  से । (गीत)





दिवार  से   मेरा   नाम  मिटा  तो  दोगे  पर,  दिल  से   कैसे..!


याद  आऊँगा  फिनिक्स  बन  कर, आये  वो जल  कर  जैसे ।


(phoenix=फिनिक्स= एक पक्षी, जो सुर्य को पाने की चाह में, बार-बार जल कर फिर से ज़िंदा हो जाता है ।) 
(जल के =  सुलग कर)


अंतरा-१.


तहज़ीब का तकाज़ा यही था, कुछ  तुम कहो,  कुछ  हम   कहें ।

तंग  तशनगी, बन गई  बंद  अलार, दरमियाँ  खुल  कर  कैसे..!

दिवार  से   मेरा   नाम   मिटा   तो  दोगे  पर,  दिल  से   कैसे..!


(तहज़ीब= शालीनता; तकाज़ा= स्मरण कराने की क्रिया ; तशनगी= प्यास; अलार= दरवाज़ा)


अंतरा = २. 


बेसब्री  ने    ठाना   था,  मिलने  का   कोई   बहाना  तो   मिले..!

आरज़ूओं  का  गला  घोंट  गई  वस्ल, गले   मिल  कर   जैसे ।

दिवार  से   मेरा   नाम   मिटा  तो  दोगे  पर,  दिल  से   कैसे..!


(बेसब्री=अधीरता; आरज़ू=इच्छा; वस्ल=मिलन)


अंतरा-३.


चश्मदीद  गवाह   माँग   रहा   है, ज़ालिम  ज़माना   लेकिन..!

क़ातिल  निगाहों ने  किया  है  छल, सँभल-सँभल कर  कैसे..!

दिवार  से  मेरा  नाम  मिटा  तो   दोगे   पर,  दिल  से   कैसे..!


(चश्मदीद= प्रत्यक्षदर्शी ) 


अंतरा-४.


उम्रभर    ढूंढा,   हुश्नो - इश्क    के   सरमाएदार ,  अब    तो..!

उम्र  सारी   घुल  गई, वक़्त  के  अंधेरों   में,  गल  कर  जैसे ।

दिवार  से   मेरा  नाम  मिटा  तो  दोगे  पर,  दिल  से   कैसे..!


(सरमाएदार= पूँजीपति; गलना=पिघलना)


मार्कण्ड दवे । दिनांकः- २१-०८-२०१२. 

20.8.12

भ्रष्ट सरकार गिराओ, तो ईद हो प्यारी............


वन्दे मातरम दोस्तों,

आप सभी को ईद की हार्दिक शुभकामनायें

आग नफरत की मिटाओ, तो ईद हो प्यारी,
नाग वहशत के जलाओ, तो ईद हो प्यारी............
भूखे प्यासे जो आये हैं, शरण में अपनी
ख़ुशी ढूंढ उनकी जो लाओ, तो ईद हो प्यारी............
है रहीम भी मेरा, राम का वंसज मैं,
सिंवई घर मेरे जो खाओ,तो ईद हो प्यारी...........
पार सरहद के पनाह पाए हैं, जो आतंकी,
सबक उनको सिखाओ, तो ईद हो प्यारी............
जान हथेली पे रख, खड़े हैं जो सरहद पे,
हीरो उनको जो बनाओ, तो ईद हो प्यारी............
मैं हिन्दू बन के दहाडा, तू मुसलमां बनके,
इंसान  बन के दिखाओ, तो ईद हो प्यारी............
सियासत से है, पशेमां बहुत ये देश मेरा,
भ्रष्ट सरकार गिराओ, तो ईद हो प्यारी............

भ्रष्ट सरकार गिराओ, तो ईद हो प्यारी............


वन्दे मातरम दोस्तों,

आप सभी को ईद की हार्दिक शुभकामनायें

आग नफरत की मिटाओ, तो ईद हो प्यारी,
नाग वहशत के जलाओ, तो ईद हो प्यारी............
भूखे प्यासे जो आये हैं, शरण में अपनी
ख़ुशी ढूंढ उनकी जो लाओ, तो ईद हो प्यारी............
है रहीम भी मेरा, राम का वंसज मैं,
सिंवई घर मेरे जो खाओ,तो ईद हो प्यारी...........
पार सरहद के पनाह पाए हैं, जो आतंकी,
सबक उनको सिखाओ, तो ईद हो प्यारी............
जान हथेली पे रख, खड़े हैं जो सरहद पे,
हीरो उनको जो बनाओ, तो ईद हो प्यारी............
मैं हिन्दू बन के दहाडा, तू मुसलमां बनके,
इंसान  बन के दिखाओ, तो ईद हो प्यारी............
सियासत से है, पशेमां बहुत ये देश मेरा,
भ्रष्ट सरकार गिराओ, तो ईद हो प्यारी............

भ्रष्ट सरकार गिराओ, तो ईद हो प्यारी............


वन्दे मातरम दोस्तों,

आप सभी को ईद की हार्दिक शुभकामनायें

आग नफरत की मिटाओ, तो ईद हो प्यारी,
नाग वहशत के जलाओ, तो ईद हो प्यारी............
भूखे प्यासे जो आये हैं, शरण में अपनी
ख़ुशी ढूंढ उनकी जो लाओ, तो ईद हो प्यारी............
है रहीम भी मेरा, राम का वंसज मैं,
सिंवई घर मेरे जो खाओ,तो ईद हो प्यारी...........
पार सरहद के पनाह पाए हैं, जो आतंकी,
सबक उनको सिखाओ, तो ईद हो प्यारी............
जान हथेली पे रख, खड़े हैं जो सरहद पे,
हीरो उनको जो बनाओ, तो ईद हो प्यारी............
मैं हिन्दू बन के दहाडा, तू मुसलमां बनके,
इंसान  बन के दिखाओ, तो ईद हो प्यारी............
सियासत से है, पशेमां बहुत ये देश मेरा,
भ्रष्ट सरकार गिराओ, तो ईद हो प्यारी............