24.8.12
आरक्षण - सड़क से संसद तक
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Unknown
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नेताजी,मानता हूँ ।
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Markand Dave
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23.8.12
दिल की दरार । (गीत)
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Markand Dave
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22.8.12
महंगाई से खुश मंत्री, जनता बेहाल
देश की जनता भले ही महंगाई से त्रस्त हो। आम आदमी की कमर भले ही टूट रही हो, लेकिन ऐसे में कोई मंत्री महंगाई से खुश हो, तो आश्चर्य ही होता है। केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने यह कहकर सभी को चौंका दिया कि महंगाई बढ़ेगी तो किसानों का फायदा होगा। इसलिए वह बढ़ती महंगाई से खुश है। पता नहीं ही चला कि मंत्री का यह कोन सा गणित था। प्रधानमंत्री महंगाई पर चिंता जाहिर करते हैं उसे चुनौती भी बताते हैं ओर उन्हीं का मंत्री उनकी चिंता की हवा निकाल देता है। जमीनी हकीकत यह है कि महंगाई का असल फायदा दलालों, बिचौलियों को होता है। कृषि प्रधान देश में किसान ही आत्महत्या करते हों, तो दुर्भाग्य को समझा जा सकता है। महंगाई, भ्रष्टाचार व घोटालों से जनता में पहले ही आक्रोश है। इस तरह के बयान जनता के जख्मों पर नमक डालने जैसा है। ज्यादा पुरानी बात नहीं है जब हरविंदर नामक एक युवक ने कृषि मंत्री शरद पंवार को चाटा जड़ दिया था। कानूनी रूप से यह अपराध था जिसके लिये उसे जेल भी जाना पड़ा, लेकिन उसके आक्रोश को झलकाता था। वह महंगाई से परेशान था। पंवार महंगाई पर अपने बयानों को लेकर चर्चित रहे थे। कभी कहते थे कि वह कोई ज्योतिष नहीं कि बताये कब घटेगी महंगाई, कभी कहते थे कि चीनी या दूध के दाम बढेंगे। उनके बयान के बाद ही रेट बढ़ जाते थे। जरूरी हो जाता है कि जनता के आक्रोश को समझना चाहिए। क्योंकि जनता की मार कुछ-कुछ वैसी ही है जैसे खुदा की बेआवाज लाठी।
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Nitin Sabrangi
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चुकंदर - सेहत का सिकंदर
चुकंदर
- सेहत का सिकंदर
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Shri Sitaram Rasoi
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बेक़रार दिल । (गीत)
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Markand Dave
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मेरे मन की कुछ बातें
- मेरे आंगन में
- दर्द
- तेरा चाहा
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babul
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21.8.12
भारत में गोहत्या का औचित्य-ब्रज की दुनिया
मित्रों,जहाँ तक हिन्दू धर्म जिससे माननीय आनंद शर्मा भी आते हैं में हजारों सालों से माँ की तरह दूध पिलाकर मानवता की अमूल्य सेवा करनेवाली गाय के महत्त्व का सवाल है तो हम सभी जानते हैं कि गाय को हिन्दू धर्म में काफी सम्मानित स्थान प्राप्त है और हम उसे माँ अर्थात् गोमाता कहकर पुकारते हैं। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार गोसेवा के पुण्य का प्रभाव कई जन्मों तक रहता है। पौराणिक काल में ही गोसेवा को धर्म के साथ जोड़ दिया गया। श्रीमद्भागवत् पुराण में हम पाते हैं कि भगवान् गोपाल श्रीकृष्ण ने इन्द्रपूजा बंद कराकर गोपूजा आरंभ कराई। हमारे गांवों में आज भी ऐसी मान्यता है कि गाय को पहली रोटी खिला देने से सभी देवी-देवताओं को भोग लग जाता है। पुराणों में गायों को धर्म और पृथ्वी का प्रतीक माना गया है। दुनिया के सबसे प्राचीन धर्मग्रन्थ ऋग्वेद में गाय को अघन्या अर्थात वध न करने योग्य कहा गया है। विभिन्न रूपों में गौ शब्द का प्रयोग ऋग्वेद में 176 बार किया गया है। गौ शब्द तब धन का पर्यायवाची था और धनी व्यक्ति को गोमत कहा जाता था। गायों का महत्त्व तब इतना अधिक था कि युद्ध के शब्द भी गाय से ही बने,जैसे-गविष्टि। इतना ही नहीं समय को मापने के लिए भी गाय से ही शब्द बने,जैसे-गोसु,गव्यत,गव्यु और गोधुली। तब राजा को गोप और गोपति संज्ञा दी जाती थी। पुत्री के लिए दुहित्री शब्द का प्रयोग किया जाता था। देवताओं की 4 श्रेणियों में से एक श्रेणी को गोजात कह कर पुकारते थे अर्थात् गाय से उत्पन्न। वैदिक लोगों को भारत में जब पहली बार भैंस के दर्शन हुए तो उन्होंने उसे भी गौदी या गवाला कहा। ऋग्वेद में एक अन्य महत्वपूर्ण शब्द है-गोत्र,ऋग्वेद में जिसका अर्थ है-गोरक्षक।
मित्रों,हिन्दू शास्त्रों की चर्चा तो बहुत हो चुकी अब कुछ इतिहास की बात भी कर लेते हैं। भारत में मुग़ल साम्राज्य के संस्थापक बाबर को आप किस रूप में जानते हैं,रूढ़िवादी मुस्लिम के रूप में न? परन्तु उसी बाबर के शासनकाल में ही भारत में गोवध पर प्रतिबन्ध लगाया गया था। बाद में हुमायूँ,अकबर,जहाँगीर,शाहजहाँ,औरंगजेब और यहाँ तक कि अहमदशाह के शासनकाल तक भारत में गोहत्या पूरी तरह से प्रतिबंधित थी। इतिहास का यह एक महत्वपूर्ण और सुनहरा अध्याय यह भी है कि मैसूर के शासक हैदर अली और टीपू सुल्तान ने गोवध में लिप्त लोगों के लिए सजा का भी प्रावधान कर रखा था। सजा भी कोई ऐसी छोटी-मोटी नहीं। अगर कोई व्यक्ति गोहत्या के आरोप में पकड़ा जाता तो उसके दोनों हाथ काट लिए जाते थे। इतिहास में सिर्फ हिन्दू शासकों ने ही नहीं बल्कि मुस्लिम शासकों ने भी गायों को कितना सम्मान दिया और अपनी बहुमत प्रजा हिन्दुओं की भावनाओं का किस कदर ख्याल रखा यह इन चंद उदाहरणों से आप भी अवश्य समझ गए होंगे।
मित्रों,आधुनिक काल में जब अंग्रेजों ने 1757 ई. में बंगाल पर अधिकार कर लिया तब लॉर्ड क्लाईव ने भारत में पहली बार आधिकारिक तौर पर 1760 ई. में गोवध के लिए एक स्लाउटर हाउस (वधशाला) खोला। कोलकाता में स्थित इस वधशाला की क्षमता प्रतिदिन 30 हजार गाएँ काटने की थी। संभवतः उसी दौर में गायों को बचाने के लिए हिन्दू समाज के सुधारवादी नेताओं ने गोशालाएँ बनवाने का आंदोलन शु़रू किया।
मित्रों,गाय को भारतीय कृषि की रीढ की हड्डी माना जाता है। कृषि ही अर्थव्यवस्था का आधार थी इसी वजह से राबर्ट क्लाइव ने ध्यान केंद्रित किया क्योंकि वह भारतीय कृषि को विनष्ट करना चाहता था। आजादी की लड़ाई के समय पंडित जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी ने एक बार नहीं बल्कि सैकड़ों बार कहा कि आजाद भारत में गोहत्या पर प्रतिबंध होगा। परंतु आजादी के बाद गायों के साथ-साथ हिन्दू समाज के साथ भी धोखा किया गया और गोवध के प्रश्न को समान नागरिक संहिता की ही तरह भविष्य के नेताओं पर छोड़ दिया गया। तब से गोवध के मामले का कुछ ऐसा राजनीतिकरण हुआ और अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण की नीति पर इतना अधिक जोर दिया गया कि गांधीजी और संविधान की इस भावना का पालन आज स्वतंत्रता के 65 साल बाद तक भी नहीं किया गया है और जिस तरह से हिन्दू जनमानस सोया हुआ है शायद कभी गोवध को रोकने के लिए कानून बन ही नहीं पाए।
मित्रों,यह कितनी बड़ी बिडम्बना है कि ब्रिटिश काल से भी कई गुणा ज्यादा संख्या में गाएँ आज के स्वाधीन भारत में काटी जा रही हैं और फिर भी भारत के 90 करोड़ हिन्दू मूक बने हुए हैं। आज के भारत में गोशालाओं से भी कहीं ज्यादा 3600 गोवधशालाएँ हैं जिनमें रोजाना हजारों गाएँ काटी जा रही हैं। गोमाता के खून से भारत की धरती लाल हुई जा रही है और आश्चर्यजनक रूप से आनन्द शर्मा जैसे हिन्दू इसे रोकने की कोशिश करने के बदले उल्टे इसे उचित ठहराने में लगे हुए हैं। यह एक वैज्ञानिक तथ्य है कि मानव का पाचन तंत्र शाकाहार के लिए डिजाइन किया गया है और गोमांस भक्षण तो स्वास्थ्य के लिए और भी अधिक नुकसानदायक है। इससे फीताकृमि के जानलेवा संक्रमण का भी खतरा रहता है फिर भी भारत के कुछ अहिन्दू लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं। मैंने खुद भी नंगी आँखों से दिल्ली के बटाला हाऊस इलाके में हजारों गायों को मुसलमानों के घर-घर में बकरीद के दिन कटते देखा है।
मित्रों,भारत एक हिन्दू देश तो नहीं है और मैं ऐसा चाहता भी नहीं हूँ परंतु एक हिन्दूबहुल देश तो है ही और इसलिए अल्पसंख्यकों को हिन्दू भावनाओं का आदर करना ही चाहिए। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो फिर वे कैसे और किस मुँह से हिंदुओं से उनकी भावनाओं का ख्याल रखने की उम्मीद करते हैं? यहाँ मैं यह भी स्पष्ट कर दूँ कि मैं अपने देश के पड़ोसी पाकिस्तान की तरह अल्पसंख्यकों को बेवजह तंग करने वाले ईशनिंदा कानून जैसे कानून तो नहीं चाहता हूँ परंतु अपने अल्पसंख्यक भाइयों से ऐसी उम्मीद रखना गलत भी नहीं मानता कि वे हमारी भावनाओं को सम्मान दें और ढिठाईपूर्वक हिन्दू अंतर्मन को चोट न पहुँचाएँ।
मित्रों,अभी-अभी आपने देखा कि मैंने इस लेख के आरंभ में और मध्य में भी देश पर 50 सालों से भी ज्यादा समय तक और वर्तमान में भी सत्तासीन कांग्रेस पार्टी की गायों और तद् नुसार हिन्दुओं के प्रति नीतियों की आलोचना की है लेकिन मैं अब इस मुद्दे को अभी-अभी देश की जनता के समक्ष उठानेवाले और अगले चुनावों में भाजपा और राजग की ओर से प्रधानमंत्री पद के संभावित उम्मीदवार श्री नरेंद्र मोदीजी से भी ठोक-बजाकर पूछना चाहता हूँ कि जब केंद्र में 6 साल तक उनकी पार्टी की सरकार थी तब उन लोगों ने पूरे भारत में गोवध को पूर्णतः प्रतिबंधित क्यों नहीं कर दिया था?साथ ही मैं उनसे और उनके पूरे गठबंधन से इस बात की गारंटी भी चाहता हूँ कि अगर वे लोग अगले लोकसभा चुनावों में सत्ता में आ जाते हैं तो वे लोग गोहत्या पर पूरी तरह से रोक लगा देंगे और ऐसा करनेवालों के लिए वैसी ही सजा का प्रावधान करेंगे जैसी सजा का प्रावधान मानव-हत्या के लिए है।
नोट:आज 25-08-2012 को अब से कुछ देर पहले न जाने क्यों मेरे इस आलेख में लगी तस्वीर ब्लैंक कर दी गई थी। मैंने उसे फिर से लगा दिया है क्योंकि वह तस्वीर झूठी नहीं है। हो सकता है कि केंद्र सरकार के दबाव में गूगल इसे फिर से हटा दे। मैं केंद्र में बैठी नालायक सरकार से यह जानना चाहता हूँ कि क्या इस तस्वीर को हटा देने से भारत में गोहत्या का जघन्य कृत्य बंद हो जाएगा? क्या आँखें मूँद लेने से सच्चाई बदल जाएगी?
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ब्रजकिशोर सिंह
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दिल से । (गीत)
दिवार से मेरा नाम मिटा तो दोगे पर, दिल से कैसे..!
याद आऊँगा फिनिक्स बन कर, आये वो जल कर जैसे ।
(phoenix=फिनिक्स= एक पक्षी, जो सुर्य को पाने की चाह में, बार-बार जल कर फिर से ज़िंदा हो जाता है ।)
(जल के = सुलग कर)
अंतरा-१.
तहज़ीब का तकाज़ा यही था, कुछ तुम कहो, कुछ हम कहें ।
तंग तशनगी, बन गई बंद अलार, दरमियाँ खुल कर कैसे..!
दिवार से मेरा नाम मिटा तो दोगे पर, दिल से कैसे..!
(तहज़ीब= शालीनता; तकाज़ा= स्मरण कराने की क्रिया ; तशनगी= प्यास; अलार= दरवाज़ा)
अंतरा = २.
बेसब्री ने ठाना था, मिलने का कोई बहाना तो मिले..!
आरज़ूओं का गला घोंट गई वस्ल, गले मिल कर जैसे ।
दिवार से मेरा नाम मिटा तो दोगे पर, दिल से कैसे..!
(बेसब्री=अधीरता; आरज़ू=इच्छा; वस्ल=मिलन)
अंतरा-३.
चश्मदीद गवाह माँग रहा है, ज़ालिम ज़माना लेकिन..!
क़ातिल निगाहों ने किया है छल, सँभल-सँभल कर कैसे..!
दिवार से मेरा नाम मिटा तो दोगे पर, दिल से कैसे..!
(चश्मदीद= प्रत्यक्षदर्शी )
अंतरा-४.
उम्रभर ढूंढा, हुश्नो - इश्क के सरमाएदार , अब तो..!
उम्र सारी घुल गई, वक़्त के अंधेरों में, गल कर जैसे ।
दिवार से मेरा नाम मिटा तो दोगे पर, दिल से कैसे..!
(सरमाएदार= पूँजीपति; गलना=पिघलना)
मार्कण्ड दवे । दिनांकः- २१-०८-२०१२.
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Markand Dave
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20.8.12
भ्रष्ट सरकार गिराओ, तो ईद हो प्यारी............
वन्दे मातरम दोस्तों,
आप सभी को ईद की हार्दिक शुभकामनायें
आग नफरत की मिटाओ, तो ईद हो प्यारी,
नाग वहशत के जलाओ, तो ईद हो प्यारी............
भूखे प्यासे जो आये हैं, शरण में अपनी
ख़ुशी ढूंढ उनकी जो लाओ, तो ईद हो प्यारी............
है रहीम भी मेरा, राम का वंसज मैं,
सिंवई घर मेरे जो खाओ,तो ईद हो प्यारी...........
पार सरहद के पनाह पाए हैं, जो आतंकी,
सबक उनको सिखाओ, तो ईद हो प्यारी............
जान हथेली पे रख, खड़े हैं जो सरहद पे,
हीरो उनको जो बनाओ, तो ईद हो प्यारी............
मैं हिन्दू बन के दहाडा, तू मुसलमां बनके,
इंसान बन के दिखाओ, तो ईद हो प्यारी............
सियासत से है, पशेमां बहुत ये देश मेरा,
भ्रष्ट सरकार गिराओ, तो ईद हो प्यारी............
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भारत एकता
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भ्रष्ट सरकार गिराओ, तो ईद हो प्यारी............
वन्दे मातरम दोस्तों,
आप सभी को ईद की हार्दिक शुभकामनायें
आग नफरत की मिटाओ, तो ईद हो प्यारी,
नाग वहशत के जलाओ, तो ईद हो प्यारी............
भूखे प्यासे जो आये हैं, शरण में अपनी
ख़ुशी ढूंढ उनकी जो लाओ, तो ईद हो प्यारी............
है रहीम भी मेरा, राम का वंसज मैं,
सिंवई घर मेरे जो खाओ,तो ईद हो प्यारी...........
पार सरहद के पनाह पाए हैं, जो आतंकी,
सबक उनको सिखाओ, तो ईद हो प्यारी............
जान हथेली पे रख, खड़े हैं जो सरहद पे,
हीरो उनको जो बनाओ, तो ईद हो प्यारी............
मैं हिन्दू बन के दहाडा, तू मुसलमां बनके,
इंसान बन के दिखाओ, तो ईद हो प्यारी............
सियासत से है, पशेमां बहुत ये देश मेरा,
भ्रष्ट सरकार गिराओ, तो ईद हो प्यारी............
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भारत एकता
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भ्रष्ट सरकार गिराओ, तो ईद हो प्यारी............
वन्दे मातरम दोस्तों,
आप सभी को ईद की हार्दिक शुभकामनायें
आग नफरत की मिटाओ, तो ईद हो प्यारी,
नाग वहशत के जलाओ, तो ईद हो प्यारी............
भूखे प्यासे जो आये हैं, शरण में अपनी
ख़ुशी ढूंढ उनकी जो लाओ, तो ईद हो प्यारी............
है रहीम भी मेरा, राम का वंसज मैं,
सिंवई घर मेरे जो खाओ,तो ईद हो प्यारी...........
पार सरहद के पनाह पाए हैं, जो आतंकी,
सबक उनको सिखाओ, तो ईद हो प्यारी............
जान हथेली पे रख, खड़े हैं जो सरहद पे,
हीरो उनको जो बनाओ, तो ईद हो प्यारी............
मैं हिन्दू बन के दहाडा, तू मुसलमां बनके,
इंसान बन के दिखाओ, तो ईद हो प्यारी............
सियासत से है, पशेमां बहुत ये देश मेरा,
भ्रष्ट सरकार गिराओ, तो ईद हो प्यारी............
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भारत एकता
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