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4.12.07

विज्ञापनो का हरामीपन : भाग दो!

विज्ञापनो के हरामीपन पर हम लोग पहले भी एक बार चर्चा कर चुके हैं।
उस वक्त भडास अपनी शैशवावस्था मे था।
आज फ़िर एक विज्ञापन ने मुझे इस बारे मे एक बार फ़िर लिखने पर
मजबूर कर दिया है। आप सभी ने भी देखा तो होगा ही,
एक नया डियोडेरेण्ट मार्केट मे आया है,
जिसके विज्ञापन नीयो स्पोर्ट्स पर दिखते रहते हैं।
इस विज्ञापन ने तो अमूल माचो के अलावा और भी ना जाने कितने ही
विज्ञापनो को पीछे छोड़ दिया है।
अनसेंसर्ड विज्ञापन देखें और प्रतिक्रिया दें।
http://www.youtube.com/watch?v=85dcxgRqM90
धन्यवाद...
अंकित माथुर...

2 comments:

गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल' said...

सच वैश्वीकरण का अर्थ ही नंगापन लगाने लगा है अब .
अमेरिका परस्ती आदिम युग को लौटती सभ्यता .!
विकास के नाम पे ये कमीनापन जारी रहेगा हम कुछ भी
नहीं कर पाएंगे ...!

Anurag Shukla said...

मैं सभी भाइयों की ओर से यह जानना चाहता हूं कि इस प्रतिदिन बढ़ती मंहगाई के जवाने में क्‍या सुप्रिम कोर्ट का आदेश भी कम है जो अभी तक किसी भी प्रिंट मिडिया या इलेक्टि
ानिक मीडिया ने वेजबोर्ड की बढ़ी हुई सिफारिशों को अभी तक लागू नहीं किया गया है वह क्‍या वजह है जो इतनी महंगाई में भी इतना सोचना पड़ रहा है।

आपसे मेरा विनम्र अनुरोध है कि माननीय सुप्रिम कोर्ट के आदेश का पालन करें और सभी का जिसमें निम्‍न वर्ग के लोगों को भला हो सके उसे लागू करने की जल्‍द से जल्‍द कष्‍ट करें।

आपका
अपना
सहयोगी