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26.8.08

मेरी पहली कविता...... अधूरा प्रयास


एक अनोखा एहसास सा क्यों है.......
आओगी तुम पास मेरे यह आस क्यों है.....

न मिलोगी कभी भी तुम मुझे यह जानता हू ....
लेकिन फिर भी यह तलाश क्यों है.......

न जाने क्यों हर वक्त चाहता है आपका साथ यह मन.........
जानते ही यह मुमकिन नही, फिर भी क्यों बेकरार है यह मन........

चाहते है आपसे बस थोड़ा सा प्यार.....
उसके लिए भी यह लंबा इंतज़ार क्यों है......

छमा चाहता हू सभी से... कोई लेखक या कवि नही हू मै.. बस मन में जो भाव आए उन्हें शब्द दे दिए.. इसे कविता का अपमान न समझियेगा :-)

7 comments:

Anonymous said...

very cool.

Anonymous said...

Sir,

Kavita vais bhi sirf ek aahsas ke alawa kuchh bhi nahi hai. yahan baat aapki bhavna samjhne ki hai to bhawnay aapki kafi achhi hai.

Anonymous said...

Sir,

Kavita vais bhi sirf ek aahsas ke alawa kuchh bhi nahi hai. yahan baat aapki bhavna samjhne ki hai to bhawnay aapki kafi achhi hai.

संगीता पुरी said...

चाहते है आपसे बस थोड़ा सा प्यार.....
उसके लिए भी यह लंबा इंतज़ार क्यों है......
बहुत अच्छा ......कौन कहेगा कि आप कवि या लेखक नहीं है....... बस कला को और निखारने की जरूरत है।

डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) said...

भाई,प्रयास करके कवि बनने की जरूरत नही है आप कवि हैं और आपके भाव ही कविता का आधार हैं ,अभिव्यक्ति कविता का मूर्त रूप...
बहुत सुंदर है... जारी रहिये

Unknown said...

वाह वाह,
बहुत दिनों से भड़ास पर कविता बंद सी हो गयी थी, लोग शायद पंडित जी को भूलने से लगे होंगे, आपका आगाज शानदार है, अभिव्यक्ति को शब्द रूप देते रहें,
शुभकामना

travel30 said...

sabhi ka hriday se dhanyawaad