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20.4.08

लडेंगे भिडेगे और जमकर लिखेंगे.....

सभी मित्रों को सुप्रभात.....सब मजे में होंगे...इधर खूब लिखा और उस लिखने के बाद जो होना था वोः भी हुआ.बेहद दिलचस्प..मेरे बेहद प्रिय यशवंत दादा ने कुछ बेहद काम की सलाह दे और भविष्य के लिए सीख भी....एक वरिष्ट साथी ने बड़ी बेहयाई से अपने मित्र का बचाव किया..तोः लगा..की मठाधीश आज भी हर कही मौजूद हैं...और ख़ुद पर किसी किस्म का हमला होते देख बेहद संगठित तरीके से सामनेवाले को कुचलने के लिए निकल पड़ते हैं...एक अच्छी ख़बर है..वोः येः की मेरा येः अभियान समय समय पर जारी रहेगा..बाकी प्रतिक्रिया कुछ भी हो....आज खुसी इस बात की हुयी की मेरे भडास के एक साथी बमबम बिहारी जी जब पत्रकार ने मालिक को पीटा नामके ब्लॉग में..उस पिल्पिले पत्रकार का एक और पिलपिला पहलू सबके सामने रखा..कुल मिलाकर भड़ास और इसके सदस्यों के तेवरों से ऐसा लगता है की कई मठ अभी हिलेंगे ....इसे कई चिरकुट अपने तरीके से कमजोर भी करेंगे....लेकिन येः नई पौध है ही खुराफाती और संजीदा...तोः खूब लिखिए....दरअसल हमारे विचारों को कुछ कथित वरिष्ठ कुंठा का नाम देते हैं....उनसे इतना ही पूछना चाहूँगा काहे की कुंठा...हम सब २५-३० साल के लड़के और लडकियां आप ४५-५० की उम्र वालों से जयादा पैसा, अच्छी पोजिसन और अच्छा प्रोफाइल बनाकर सीना चौडा करके घूम रहे हैं...आज एक सफल इंसान के पास जो चाहिए हमारे पास है तोः कुंठा किस बात की..बल्कि कुंठा के शिकार चोदु टाइप के वह वरिस्ट हैं जोः आज इस चिंता में घुले जा रहें हैं की अरे येः कल के छोकरे हमसे बहुत आगे कैसे निकले जा रहें हैं...बाजार में पिटी हुयी कविता और थके हुए लेख सफलता का पैमाना नही होते...इनको बेंचकर चावान्नी भी नही मिलती...तोः इनपर कोई कुछ लिखकर अपनी कुंठा तोः नही ही निकालना चाहेगा...
बाकी अनिल दादा, यशवंत भैया, रुपेश जी, वरुण जी, रजनीश जी(आप खासकर), वरुण जी बेहद सटीक कमेंट के लिए धन्यवाद....येः दरअसल इसलिए कह रहा हूँ क्यूंकि मैं एक यात्रा पर निकलूंगा...पंजाब और राजस्थान की उसके बाद ....भड़ास पर कुछ लिखा जायेगा....अभिभूत हूँ.....आप सबके स्नेह से....(अंत में पंकज जी आपके सवालों के जवाब मिल गए होंगे)....बाकि इस कदर तिलमिलाहट ठीक नही... अगर अनुभव है तोः उसका फायदा हम तक पहुन्चाइये न की....एक मित्र को बचाने के लिए सारी मर्यादा ताख पर रखकर हमें गरियाइये) ....बाकि हमारे लिए भड़ास घर है...आप जैसों के लिए क्या है...पता नही...यहाँ हम अपनी कम्जोरियूं पर भी नंगा होते हैं और दूसरो को भी नही छोड़ते) ...बाकी किसी के प्रति बिना किसी तल्खी के बहुत कुछ लिखा था और आगे भी लिखना बदस्तूर जारी रहेगा..शब्बा खैर....
हृदयेंद्र

5 comments:

Anonymous said...
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hridayendra pratap singh said...
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डॉ.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) said...

आखिर ऐसे कमेंट आ ही गए जिन्हें कि हटाना पड़े लेकिन ये तो दस्तूर है और असत्य और अन्याय के विरोध करने वालों का विरोध भी लिजलिजे,चिपचिपेऔर गिलगिले लोग करते भी रहेंगे...
जय जय भड़ास

रजनीश के झा said...

bhai,

likhte raho, gariyate raho, nanga karte raho kyounki satya vachan kahna hai. or bhadaas pe satya kahne se koi nahi rok sakta kyoun ki ye hai hi satya ka bhadaas forne ki jagah so bas for dalo sab ki.

yashvant dada jyada utsaah to nahi degaya main ;-) to maaf kariyega.

JAi Jai Bhadaas

Anonymous said...

kab likhoge happu?chatukarita vali serij ka intejar hai.