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30.8.09

दुनिया

आरती "आस्था "
कानपुर
दुनिया मेरी
छोटी सी है
कई मायनों में
फिर भी
लोगों से बड़ी ........
नहीं निर्धारित होती
अपनों की सीमा
यहाँ रिश्तों से
वह हर कोई
अपना है यहाँ
नहीं लगता जो पराया
खुश रहने के मौके
अपेक्षाकृत ज्यादा है यहाँ
खुशियों के मायने
निहित जो रहते हैं
अपनी हार
और दूसरों की जीत में ।
नहीं झरते
आंसू यहाँ
ख़ुद के दर्द से
बहती रहती है
अश्रुओं की अविरल धारा
देखकर मायूसी
औरों की आंखों की
नहीं होता जीवन का
कोई एक ध्येय यहाँ
पूरा होने पर
एक के
शुरू हो जाती है जद्दोजहद
दूसरे के लिए
इसलिए छोटा होकर भी
बड़ा लगता है
जीवन यहाँ .......

3 comments:

vijay mishra said...

bahut achcha ...

vijay mishra said...

bahut achcha kripaya kanpur ke baare me likhen mai apka abhari rahunga...

गनेश जी बागी said...

aapki sabhi rachnayey bahut achhi lagti hai, agar aap apaney rachnawo ko merey site par post karey to jyada sey jyada log labhanweet ho saktey hai, merey site ka naam hai www.openbooksonline.com