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7.1.09

Bhadas: A window to the world of Indian media

A website has become a forum for raising media-related issues in India, especially the Hindi print and electronic media.

No longer can a newpaper refuse to pay salaries to a stringer or a group sack its staffers without a whimper. It was an irony that exploitation within the media world remained unreported and nobody could raise voice.But the website Bhadas4Media has changed all that.

Yashwant Singh, who is the editor of the site, is credited for brining this change. When Bhadas reported that a particular media group hadn't paid its stringers, the news reached across the Indian media world and the money was released.

When Dainik Bhaskar, a prominent Hindi newspaper group, that is a profitable venture, started sacking journalists without rhyme and reason, the site raised the issue and Bhaskar editors had to send emails to stop the panic and put an end to the controversy that was bringing negative publicity.The website has achieved this fame in little time.

Literally Bhadas (or Bhadaas), a Hindustani-Urdu-Hindi word is used for giving vent to one's angst, frustration or pentup anger.The website has brought a sea change as things which couldn't be printed in papers, are being openly reported and discussed. News from this journalistic watchdog website spreads across media circles in a matter of minutes.Apart from news from within media, the interviews and autobiographical accounts of journalists have made the site, a successful venture.

Our congratulations to Bhadas4Media Team and the Editor Mr Yashwant Singh.

(साभारः एडिटइंडिया)

13.7.08

राजस्थान पत्रिका में हिंदी ब्लागिंग पर स्टोरी- ब्लॉग बोलता है

राजस्थान पत्रिका ने आज के अंके में संडे के परिशिष्ट में हिंदी ब्लागिंग पर स्टोरी प्रकाशित की है जिसे लिखा है मशहूर हिंदी ब्लागर शैलेश भारतवासी ने। इसमें भड़ास के बारे में भी जिक्र है। यहां भड़ास के बारे में जो कुछ प्रकाशित हुए है, उसे हू ब हू दे रहा हूं ताकि बाकी भड़ासियों को भी पता चल सके....

पत्रकारों के ब्लॉग सबसे आगे
हिंदी ब्लागिंग में अभी पत्रकार ब्लागरों का प्रतिशत सबसे अधिक है। इस बात का अंदाजा यहां से लगाया जा सकता है कि हिंदी के सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले कम्युनिटी ब्लाग भड़ास http://bhadas.blogspot.com में 300 से अधिक कांट्रीब्यूटर हैं और अधिकाधिक पत्रकार हैं। इस ब्लाग पर हिंदी पत्रकारों की जाब छोड़ने-पकड़ने की जानकारी भी मुहैया कराई जाती है। भड़ास पर अभद्र ब्लाग का आरोप लगने पर ब्लाग प्रमुख यशवंत सिंह कहते हैं, ''हम तो खुद कहते हैं कि हम फटेहाल, परेशान, कुंठित, दमित, डरे हुए लोग हैं, जो गांव देहात से आए हैं और शहर के अजनबीपन और प्रोफेशनलिज्म में अपने अस्तित्व को तलाश रहे हैं।''

पूरी स्टोरी आप यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं

5.7.08

Hindi media news portal

Yashwant Singh of Bhadas blog fame has launched India's first Hindi media news portal. Yashwant a rebel by heart is a pure journalist who is experimenting with different forms of communication. His blog was in news last month. Blog Bhadas is unique in the way that it has 360 bloggers submitting their posts regularly. Blog is an example of freedom of expression where bloggers at times use abuses also. Now Yashwant's news portal provides news of media, mainly Hindi media, in real time. The portal in the popular Joomla Content Management System is the creation of Yashwant from concept to creation to commissioning. It took almost a month for Yashwant to learn fundas of joomla to create the website having some excellent web 2.0 tools. Here is Bhadas 4 media http://www.bhadas4media.com more troubled time for small and medium newspapers that have already facing manpower resource crunch.

साभारः गुजरात ग्लोबल डाट काम

19.4.08

नरेंद्र मोदी के कवरेज का पत्रकारों ने बहिष्कार किया

यह एक ऐसी खबर है जो शायद ही कहीं छपे क्योंकि अब किसी भी मीडिया हाउस का प्रबंधन भाजपा के सुपर स्टार और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से पंगा नहीं ले सकता। हाल में हुए गुजरात चुनावों में फिर जीत हासिल करके असीम ताकत के प्रतीक बने मोदी आजकल दिल्ली में हैं।

यहां सिविल लाइंस में गुजराती समाज की तरफ से आज मोदी के अभिनंदन का कार्यक्रम था। समारोह के कवरेज के लिए बाकायदा पत्रकारों को निमंत्रण पत्र भेजे गए। वहां जब पत्रकार पहुंचे तो उनसे निमंत्रण पत्र मांगा गया लेकिन कई पत्रकार साथी बिना निमंत्रण पत्र पहुंचे थे क्योंकि ये वो पत्रकार थे जो लगातार बीजेपी बीट को कवर करते हैं। इन पत्रकारों ने बीजेपी नेताओं को फोन कर किसी तरह अंदर जाने का जुगाड़ किया। वहां कैमरे वगैरह लगाए।

इसी बीच नरेंद्र मोदी पहुंच गए। समारोह में मौजूद कुछ लोगों ने एकाएक चिल्लाना शुरू कर दिया कि इन मीडिया वालों को किसने यहां बुलाया, इन्हें यहां से भगाओ। इतना सुनते ही समारोह में मौजूद 20-25 लोगों ने मीडिया वालों को भगाने के लिए नारेबाजी व बदतमीजी शुरू कर दी। इस पूरी परिघटना के दौरान नरेंद्र मोदी चुप बैठे रहे। अंततः पानी सिर से उपर निकलता देख और बदतमीजी की हद पार होते देख टीवी पत्रकारों ने कवरेज के बहिष्कार का फैसला किया और समारोह से बाहर निकल गए।

सभी प्रमुख टीवी न्यूज चैनलों एनडीटीवी, आजतक, जी न्यूज, आईबीएन7....आदि के पत्रकारों ने पत्रकारों से बदतमीजी की घटना की निंदा की और इसे मीडिया के प्रति नेताओं के असहिष्णु रवैये का परिचायक बताया। भड़ास इस घटना की निंदा करता है और सभी पत्रकार बंधुओं से अपील करता है कि वो अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए ऐसे कार्यक्रमों का बहिष्कार भविष्य में भी करते रहें जहां उन्हें उचित सम्मान नहीं दिया जाता।

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दो सूचनाएं भड़ास से संबंधित ...

1- भड़ास पर कुल पोस्ट की संख्या 2025 हो गई है, जो अपने आप में एक रिकार्ड है।

2- भड़ास की सदस्य संख्या 260 से बढ़कर 272 तक पहुंच गई है, ये भी एक नया रिकार्ड है।


जय भड़ास
यशवंत सिंह

25.2.08

यशवंत जी डाक्टर जी के नाम एक खत

भैया जी
आप के आमंत्रण से अस्वीकृति कैसी ,ज्याइन कर ली भडास । अभी समझ नहीं पा रहा हूँ क....क...क्या....चल रही है मनीषा पर बहस क्यों
कीजिए खुलासा इधर ::> किसी रंजिश को हवा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी !! गौर किया तब पता चला फाकिर साहब नहीं रहे...
यहाँ आनंद आ गया
एक अदद खूंटा चाहिए

20.1.08

दैनिक भाष्कर में भड़ास----अच्छे-अच्छे सूरमाओं के लिए खतरे की घंटी

...इस ब्लाग का मूल मंत्र है अगर कोई बात गले में अटक गई हो तो उगल दीजिये, मन हल्का हो जायेगा। इसके बैनर पर यही वाक्य लिखा हुआ है। हालांकि महज इसी बात के लिए शुरू किया गया यह ब्लाग कहने को तो फिलहाल हास्य-व्यंग्य के किसी भी ब्लाग की तरह नजर आता है लेकिन आगे चलकर यह अच्छे-अच्छे सूरमाओं के लिए भी खतरे की घंटी साबित हो सकता है क्योंकि भड़ास की सूली पर कब-कौन लटका हुआ पाया जाएगा, यह कहना बहुत मुश्किल है। इसके अलावा मीडिया की दुनिया में कौन कहां चला गया है, ये खबरें भी इस ब्लाग पर काफी बहुतायत से हैं। फलां शख्स, फलां अखबार, या फलां चैनल से फलां अखबार या चैनल में ठीकठाक पैकेज पर पहुंच गया है। यानी कि अगर आपको मीडिया की दुनिया पर नजर रखनी है, तो आपके लिए ये ब्लाग है।

बहरहाल अगर आप किसी मुद्दे पर किसी से नाराज हैं या आप काफी सोचते हैं तो खुद को जैसे चाहें जाहिर करने का मंच यही है। शायद यही वजह है कि भड़ासियों ने अब अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। रोज कई नए लोग लिख रहे हैं। कुछ लोग नियमित रूप से लिखने लगे हैं। ये अच्छी बात है क्योंकि दरअसल जब लिखते हैं तो न सिर्फ लिखते हैं बल्कि बहुत कुछ नया सीखते हैं, अपने एकाकी व्यक्तित्व को एक्सपोजर देते हैं, खुद की भड़ास से दुनिया को रूबरू कराते हैं। कहिए, आप भी बनना चाहते हैं भड़ासी?

(दैनिक भाष्कर अखबार के राष्ट्रीय संस्करण में दिनांक 19 जनवरी 2008 को पेज नंबर नौ पर प्रकाशित स्तंभ ब्लाग(उ)वाच का एक अंश)


भई, अपन लोग का भड़ास तो छा गया जी। दैनिक भाष्कर के ब्लाग(उ)वाच कालम में रवींद्र दुबे ने अबकी भड़ास का अच्छा खासा विश्लेषण किया है। उन्होंने डा. मांधाता सिंह द्वारा भड़ास पर प्रेषित एक पोस्ट गांव को गांव ही रहने दो यारों के कंटेंट को उद्धृत करते हुए अपने कालम की शुरुआत की है। हेडिंग दी है, एकाकी व्यक्तित्व को एक्सपोजर की चाहत। पहले दो बड़े पैरे में डा. मांधाता सिंह की भड़ास में प्रकाशित पोस्ट में कही गई बातों, बहस, तथ्यों का जिक्र किया गया है। अगले दो पैरों में भड़ास के बारे में बताया गया है, जिसे मैंने उपर हू-ब-हू उद्धृत किया है।

पूरा पढ़ने के लिए आप 19 जनवरी के दैनिक भाष्कर का राष्ट्रीय संस्करण देखें जो दिल्ली से प्रकाशित होता है। मुझे ई-पेपर पर यह दिखा लेकिन उसे डाउनलोड करने के लिए लागिन मांगा जा रहा था सो टाइम न होने की वजह से मैं उस झमेले में नहीं पड़ा।

अगर कोई साथी ई-पेपर से डाउनलोड कर भड़ास पर उस हिस्से को पोस्ट कर दें तो पूरा लेख सभी साथी लोग पढ़ सकेंगे। और हां, इस लेख के प्रकाशित होने के बारे में सबसे पहले भड़ासी साथी रामकृष्ण जी ने मुझे एसएमएस से सूचना दी। भाई रामकृष्ण जी, आपको ढेर सारा धन्यवाद। और, रवींद्र दुबे जी, आपको खांची-छिट्टा भर धन्यवाद, जो आपने भड़ास को इस लायक पाया कि अपने कालम में जगह दिया।

डा. मांधाता सिंह को उस पोस्ट को पढ़ने के लिए, जिसकी वजह से भड़ास की चर्चा कालम में की गई, यहां क्लिक करें...गांव को गांव ही रहने दो यारों

जय भड़ास
यशवंत