Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

13.2.23

राम सरूप अणखी : भारतीय साहित्य की 'अणख'

अमरीक-

गुरबख्श सिंह प्रीतलड़ी, नानक सिंह, जसवंत सिंह कंवल के बाद राम सरूप अणखी पंजाबी और पंजाब के ऐसे लेखक थे जिन्हें सबसे ज्यादा पढ़ा गया। उनके विशाल पाठक वर्ग का दायरा आज भी निरंतर विस्तार ले रहा है। जबकि जिस्मानी तौर पर उन्हें विदा हुए आज पूरे तेरह साल हो गए हैं। पंजाबी के हिंदी तथा दूसरी भाषाओं में सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले साहित्यकारों में उनका नाम शिखर पर है। निसंदेह वह अपनी मिट्टी के ऐसे घने वृक्ष थे जो आज भी घनी छांह दे रहा है। पंजाब (खासकर मालवा) का ग्रामीण समाज और किसानी जनजीवन उनके कथा साहित्य की आधारभूमि रहा है। पंजाब की किसानी और ग्रामीण लोकाचार को साहित्य के जरिए जानने के लिए राम सरूप अणखी के बेमिसाल उपन्यास और कहानियां अपरिहार्य हैं। मालवा के केंद्र में बसा कदरन छोटा-सा कस्बेनुमा शहर बरनाला (जो अब जिला है) 'अणखी के शहर' के नाम से भी जाना जाता है। युवावस्था में पुश्तैनी गांव धौला से वह यहां आकर बस गए थे लेकिन मुड़-मुड़कर अपने गांव की मिट्टी की ओर जाते थे। प्रति सप्ताह गांव धौला जाना उन्होंने ताउम्र जारी रखा। मौसम, हालात और सेहत जैसी भी हो... यह अनवरत सिलसिला नहीं टूटा। धौला और उसके इर्द-गिर्द के गांव-कस्बे और वहां के बाशिंदे उनके हर उपन्यास-कहानी में मिलेंगे। गांव और ग्रामीण उनकी माशूक थे। मिट्टी से इतनी बेइंतहा मोहब्बत करने वाले लेखक बहुत कम हैं और अणखी सरीखे तो और भी कम। उनकी अस्थियां भी, वसीयत और आखिरी इच्छा के मुताबिक इन्हीं खेतों और जमीन को सींचने वालीं (खेतों के किनारे बहतीं) नहरों में विसर्जित की गईं थीं। 




 

9.2.23

अपनी कुंठाओं की पूर्ति के लिए निर्दोषों को फँसाती है गोरखपुर की शाहपुर पुलिस

सत्येंद्र कुमार-
satyendragudiya@gmail.com

गोरखपुर : जिस तरह यह बात सच है कि सभी पुलिस वाले बेईमान और भ्रष्ट नही होते ठीक उसी तरह यह बात भी सच है कि यदि पुलिस अपना काम ईमानदारी से करती  तो योगी आदित्यनाथ के रामराज्य का स्वप्न कब का पूरा हो जाता । ऐसी रिपोटर्स आती रही है कि लगभग 75 प्रतिशत से ज्यादा लोगों को पुलिस पर भरोसा ही नही है । कुछ भ्रष्ट और बेईमान पुलिस वालों की वजह से आज भारत एक ऐसा देश बन चुका है जहाँ पुलिस को देखकर लोग सेफ फील करने की बजाय डरते हैं । एक 15 साल के बच्चे को पता होता है कि आई पी एल में सट्टा लगाने के लिए किसके पास जाना है लेकिन हमारी पुलिस को पता नहीं होता । हर एक चरसिये से लेकर हर एक स्मैकिए को पता है कि किस दरवाजे पर उनका माल मिलेगा लेकिन हमारी पुलिस को पता नही होता । गोरखपुर शहर के थाना शाहपुर की पुलिस ने भी अजीबोगरीब कारनामा कर दिखाया है । इनका जोर भले अपराधियों पर न चलता हो लेकिन सामान्य व्यक्ति को अपराधी बनाने में ये कोई कसर नही छोड़ते हैं ।

1.2.23

दैनिक पंजाब केसरी कानपुर मण्डल के मैनेजर व डैस्क इंचार्ज रामु मिश्रा मनमानी पर उतारू हैं

 

सेवा में, 
           श्रीमान यशवंत सिंह  जी,
           सम्पादक 
           भडा़स मीडिया न्यूज


महोदय,
           अवगत कराना है कि दैनिक पंजाब केसरी कानपुर मण्डल के मैनेजर व डैस्क इंचार्ज रामु मिश्रा, प्रतिष्ठित संस्थान पंजाब केसरी दिल्ली,(द हिन्द समाचार लि०) और उसके स्व० डायरैक्टर अश्वनी कुमार द्वारा बनाये गये नियमों को ताख पर रखकर सिर्फ अपनी मनमानी पर उतारू हैं, गौरतलब है कि संस्थान के नियम के मुताबिक किसी शहर में रिपोर्टिंग से जुड़े व्यक्ति को न्यूज एजेंसी देकर उसे रिपोर्टर बनाया जाता है, जबकि न्यूज एजेंसी लेने के लिये संस्थान द्वारा उस व्यक्ति से 20, 25,30,50 और 100 paper copy की सप्लाई का तीन रुपये पर कापी के हिसाब से एक महीने का एडवांस (सिक्योरिटी) के तौर पर लिया जाता है और इसके बाद संस्थान द्वारा देहली से कानपुर तक ट्रेन के जरिये पेपर की सप्लाई के बंडल, जबकि बाकी सिर्फ जिला मुख्यालयों पर कानपुर पेपर एजेंसी होल्डर अपने हाकरों के जरिये बसों से पेपर की सप्लाई न्यूज एजेंसियों तक पहुंचाने का काम करते हैं, जबकि बसों से न्यूज एजेंसी  तक पेपर सप्लाई पहुंचने के टाईम की कोई गारंटी नहीं होती है और कभी कभी तो सप्लाई शाम को या दूसरे दिन पहुंचती रही है, जबकि महीना पूरा होने के बाद संस्थान रिपोर्टर को भेजी हुई कापियों की सप्लाई के भुगतान का न्यूज एजेंसी के नाम बिल भेजता है और हर न्यूज़ एजेंसी के रिपोर्टर को संस्थान में अगले महीने की 15 तारीख तक भेजे हुये बिल का भुगतान जमा करना होता है, हालांकि भुगतान न भेजने पर संस्थान उस न्यूज एजेंसी की सप्लाई बंद कर देता है।

स्टूडियो में बैठे एंकर हमारे कानों में विष घोल रहे हैं...




हरीश मिश्र

    किसी जानकारी को अधिक से अधिक प्रसारित करने के साथ साथ जब यह भी प्रयत्न हो कि जनता प्रसारित संदेश को न केवल स्वीकार करें अपितु उसके अनुरूप कोई कदम भी उठाएं या करवाई भी करें तो यह प्रक्रिया सूचना या प्रकाशन से एक कदम आगे प्रचार या प्रोपेगेंडा कहलाती है। जब किसी सूचना का प्रचार प्रसार किसी साज़िश या फिर अति से ज्यादा हो जाये तो सम्प्रचार या प्रोपेगेंडा कहा जा सकता है।

इनको देखा तो ख्याल आया.... हम इन म्यूजियमों को क्यों देखें?

भाष्कर गुहा नियोगी, हैदराबाद से


म्यूजियम बीते समय यानी इतिहास के ध्वंसाशेष के अलावा क्या है? खासकर राजा -   महाराजाओं, नवाबों, बादशाहों की उस शानोशौकत को संजोकर रखे गए इन म्यूजियमों को हम क्यों देखें ? वो जो साधारण लोग है।  वो जो मिट्टी से महल बनाने की प्रक्रिया में हिस्सेदार रहे है। जिन्होंने इन बड़े- बड़े महलों, किलाओं की ऊंची - ऊंची प्राचीरो की नींवें खोदी इन्हें गगनचुंबी बुलंदी दी जिनके हाथों ने महलों की दीवारों पर खुबसूरती नक्काशी की , जिन्होंने इन्हें  सजाया - संवारा। वो जो दुनिया को शून्य से शिखर तक ले कर आए है। उनके श्रम शक्ति के जज्बातों उनके हुनर के कमालों  की कथा कहने वाला उन्हें  संजोकर दिखाने वाला म्यूजियम कहीं है क्या?   

31.1.23

केरल में सामाजिक आंदोलन और दलित साहित्य किताब सम्मानित

राजस्थान,चित्तौड़गढ़। 'स्वतंत्रता सेनानी रामचन्द्र नंदवाना सम्मान' 2021 के लिए बजरंगबिहारी तिवारी लिखित पुस्तक 'केरल में सामाजिक आंदोलन और दलित साहित्य' (नवारुण प्रकाशन, ग़ाज़ियाबाद) का चयन निर्णायक मंडल के तीन सदस्यों- वरिष्ठ कथाकार काशीनाथ सिंह, कवि-चिंतक राजेश जोशी तथा आलोचक दुर्गाप्रसाद अग्रवाल ने किया। कुल 26 अध्यायों में लिखित इस किताब में पहली बार हिंदी में केरल के कम्युनिस्ट आंदोलन का इतिहास प्रस्तुत किया गया है। किताब सिलसिलेवार ढंग से इस मॉडल स्टेट के निर्माण की व्याख्या करती है। 1850 तक इस राज्य में गुलामी प्रथा क़ायम थी।


News18 उत्तर प्रदेश उत्तराखण्ड का गालीबाज रिपोर्टर

सब कहते है कि पत्रकार को शालीन और मर्यादित शब्दावली का प्रयोग करना चाहिए, लेकिन News 18 उत्तर प्रदेश उत्तराखण्ड का बुलंदशहर का रिपोर्टर तो गालीबाज निकला. अपना रुतबा दिखाने के लिए फोन पर ही बुलंदशहर के एक रिपोर्टर को जमकर गरिया लगा. 



 

सब परिंदे उड़ गए ,धीरे धीरे छोड़कर, बाग़बान अब अकेला है, उम्र के इस मोड़ पर !


सत्येंद्र कुमार-

आज जब मोबाइल स्विच ऑन किया तो गणतंत्र दिवस पर औपचारिकता वश दी जाने वाली बधाईयों से व्हाट्सएप्प पटा पड़ा मिला । मन हुआ की पूछ लूँ इन भेड़ चाल वालों से की भाई ये कैसी है बधाई, जब आज तक गणतंत्र की बात ही तुम्हे समझ नही आई !


 

न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल के नाम पर वसूली गैंग चला रहा है पर्ल्स न्यूज़ २४, मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाये










 


    श्रीमान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय      (By mail)
         अलीगढ
विषय: न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल के नाम पर बसूली गैंग चला रहा है पर्ल्स न्यूज़ २४,  मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाये

महोदय,  
  डिजिटल मीडिया के दुरुपयोग की कड़ी में नया मामला अलीगढ में सामने आया है| यहाँ पर्ल्स न्यूज़ २४ नाम ने एक पोर्टल में बसूली गैंग बना रखा है| एक न्यूज़ पोर्टल ने अपने यूट्यूब चैनल के नाम पर कुकरमुत्तों की तरह लोगो की भर्ती कर ली है| अपने तथाकथित रिपोर्टरों को एक प्रतिष्ठित न्यूज़ चैनल की मायिक आईडी से मिलती जुलती आईडी डिजाइन कराकर उनको थमां दी है| अब यह तथाकथित रिपोर्टर लोगो से खुलेआम खबर चलाने और बनाने के नाम पर खुलकर बसूली करते है|  यह तथाकथित लोग एक झुण्ड में कबरेज के लिए जाते है और गुडागर्दी करते है| इतना ही नहीं कोई इनसे टोकाटोकी करता है तो इस गैंग में शामिल महिलाओ को आगे करके फ़साने की धमकी दी जाती है| बाक्यात इस प्रकार है-

पत्रकार विजय कुमार राय की दादी श्रीमती शांति राय का निधन

 


शोक संदेश... हिन्दुस्थान समाचार नई दिल्ली में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार विजय कुमार राय की दादी श्रीमती शांति राय का आज उनके पैतृक निवास जिला गाजीपुर के डोरा सादात में शाम 7 बजे निधन हो गया।95वर्ष शांति राय अपना भरा पूरा परिवार छोड़कर परलोकवासी हो गई।

मौर्य के बयान पर अखिलेश के रूख से धर्म संकट में फस सकती है भाजपा

KP Singh-

स्वामी प्रसाद मौर्य के मुददे पर मनोज पाण्डेय एण्ड कम्पनी के दबाव को नकारकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव उन्हें पार्टी से बाहर करने की बजाय उनके साथ खडे हो गये हैं। यहां तक कि अपने चाचा शिवपाल यादव की राय को भी उन्होने दरकिनार कर दिया है। शनिवार को स्वामी प्रसाद से मुलाकात के बाद ही उन्होंने इसे जाहिर कर दिया था, एक दिन बाद तो उन्होंने स्वामी प्रसाद मौर्य का कद पार्टी में बढाकर उन्हें इनाम दे डाला है जो पुनरूत्थानवादियों को चिढाने जैसा है।

28.1.23

बिल्डर-गुंडों की यारी कानून पर भारी, अदालत से स्टे के बावजूद रात अंधेरे में तोड़वाने लगे कटरा

भाष्कर गुहा नियोगी-

वाराणसी। ताकत और अवैध पैसों का साथ यानी बिल्डर और गुंडों का गठजोड़ कानून पर भारी पड़ता दिख रहा है।   नहीं तो बीते 24 जनवरी  दालमंडी घुंघरानी गली स्थित एक कटरे की दुकानों को रात में जिस तरह से ढहाने की  कोशिश की गई वो बताने के लिए काफी है कि बिल्डर - गुंडा गठजोड़ किसी हद तक जा सकता है। खासकर दालमंडी सहित आसपास के इलाकों में इनका वर्चस्व कायम है। यहां कई  गुंडे खुद बिल्डर बन चुके है।  धमकी, मारपीट और जरूरत पड़ने पर किसी को जान से मार देना इनके लिए बड़ी बात नहीं है। 

ABP Majha honours unsung heroes of Maharashtra at its annual event ‘Shourya Puraskar’

 

Mumbai, January 27, 2023: ABP Majha, Maharashtra’s leading news channel, hosted its annual event 'Shourya Puraskar' at BKC Trident in Mumbai on 24th January 2023. This event is an initiative by the channel to recognize and celebrate the courage and heroism of common people across the Maharashtra region. Dedicated to celebrating the bravery of the common people, the event was aired on the occasion of Republic Day today.

ABP Majha’s ‘Majha Maharashtra Majha Vision’ sheds light on state matters

 

Mumbai, January 27, 2023: ABP Majha, Maharashtra’s leading news channel, successfully concluded its highly anticipated event, Majha Maharashtra Majha Vision, at BKC Trident, Mumbai. This one-of-a-kind event saw eminent leaders of Maharashtra present their vision for the state. It was an insightful platform to understand Maharashtra’s potential and the way forward. 

24.1.23

पंजाब की आप सरकार और अफसरशाही में फिर ठन गई

अमरीक-

पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार और अफसरशाही में एकबारगी फिर जबरदस्त ढंग से ठन गई है। इस बार भी वजह 'दिल्ली वाले' हैं। इस बार मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आला अफसरों के इसलिए आनन-फानन में तबादले कर दिए कि उन्होंने विभागीय राशि को 'प्रचार' के लिए इस्तेमाल करने से साफ इनकार कर दिया और सरकार को कतिपय ईमानदार अफसरों का यह रवैया पसंद नहीं आया। दो दिन के भीतर हुए कुछ तबादले बेहद चर्चा में हैं। इनमें से तो एक रविवार यानी छुट्टी के दिन किया गया। अफसरशाही में जबरदस्त खलबली है और सुगबुगाहट है कि मुख्यमंत्री ने 'ऊपर' के इशारे से मुख्य सचिव को मौखिक आदेश दिए जो मुख्य सचिव की मेज पर पहुंचते ही लिखित में बदल गए। पूरा घटनाक्रम बताता है कि अब राज्य सरकार को तर्क करने वाले और ईमानदारी के साथ फर्ज निभाने वाले आला अधिकारी रत्ती भर भी पसंद नहीं। नीचे के अफसरों को भी रोज ताश के पत्तों की मानिंद फेंटा जा रहा है। सरकार के पक्षधर अधिकारी इसे अपरिहार्य सख्ती बताते हैं, जबकि 'पीड़ित' अफसरों के हमदर्द (सूबे में जो कुछ इन दिनों हो रहा है) इसे अपने किस्म का सरकारी भ्रष्टाचार! चंद दिन पहले ही पीसीएस और आईएएस अफसरों तथा सरकार के बीच तनातनी बढ़ी थी और मुख्यमंत्री के संवैधानिक दबाव में आकर अफसर झुक गए थे। इसकी एक वजह और भी थी कि मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और उनके किचन कैबिनेट के सदस्य मीडिया तथा अन्य मंचों से प्रचार करने लगे थे कि सरकार से नाराज हुए अफसर दरअसल दागी अधिकारियों को बचाना चाहते हैं और खुद भी बचना चाहते हैं। लेकिन इस बार मामला दूसरा है। तब जिला स्तरीय अधिकारियों में अपने एक साथी की विजिलेंस द्वारा की गई गिरफ्तारी को लेकर रोष था और वे पांच दिन की सामूहिक हड़ताल पर चले गए थे लेकिन सरकार के दबाव का डंडा उन पर चल पड़ गया और वे काम पर लौट आए। मुख्यमंत्री ने खुद सामने आकर उन्हें नियमानुसार निलंबित करने की धमकी दी थी।         




 फोटो परिचय: मुख्य सचिव विजय कुमार जंजुआ,  आईएएस अधिकारी अजोय शर्मा और वीरेंद कुमार शर्मा। 

बसंत का यह 'खूनी' चेहरा भी देखिए!

अमरीक-

शेष देश की मानिंद पंजाब में भी बसंत पंचमी का पर्व बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। नए साल के आगाज के साथ ही बसंत का आगमन भी शुरू हो जाता है। जिस दिन आकाश साफ होता है, उस दिन चौतरफा पतंगे ही पतंगे दिखाई देती हैं। गोया बादलों की जगह पतंगों ने ले ली हो। इस बार भी ऐसा ही आलम है। वैसे, बसंत पंचमी 26 जनवरी को है लेकिन इसकी धूम अभी से है। इधर के कुछ सालों में बसंत पंचमी खुशियां ही नहीं, मातम भी दे रही है। पतंगबाजी के लिए होने वाले प्लास्टिक डोर ने कहर बरपा रखा है। प्लास्टिक डोर को पंजाब में 'चीनी मांझा' भी कहा जाता है और इस पर कानूनन सरकारी प्रतिबंध है। लेकिन फिर भी इसका आतंक समूचे सूबे के चप्पे-चप्पे में तारी है। अपने आप में यह आतंकवाद की शक्ल अख्तियार कर चुका है। प्लास्टिक डोर अथवा चीनी मांझे की की चपेट में जो भी आता है, वह गंभीर रूप से जख्मी एवं लहूलुहान हो जाता है। ऐसे-जैसे उस पर नुकीले या तीखे खंजर से बदस्तूर सैकड़ों वार किए गए हों।     









 

22.1.23

दैनिक जागरण के पत्रकार की शिक्षक ने प्रेस काउंसिल में की शिकायत

   

 

 अमृत विचार की टीम ने अखबार वितरकों की सेवा की





रहमान राही: खामोशी से गुजर गया कश्मीर का एक अहम युग

अमरीक-

कश्मीर अक्सर सियासी गतिविधियों और अन्य वजहों से सुर्खियों में रहता है। साल 2023 का पहला पखवाड़ा कश्मीर, कश्मीरियत और समूची अदबी  जमात के लिए बेहद नागवार साबित हुआ। कश्मीर और कश्मीरियत के दिग्गज एवं प्रतिनिधि/समकालीन प्रथम पुरुष साहित्यकार रहमान राही साहब जिस्मानी तौर पर दुनिया से रुखसत हो गए। एक ऐसा खजाना बल्कि बेशुमार खजानें दुनिया को देकर, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी उन्हें तथा कश्मीरियत और उर्दू जबान को हमेशा-हमेशा के लिए जिंदा रखेगा। प्रोफेसर रहमान राही के किए काम के जिक्र के बगैर कश्मीरियत की बाबत कोई भी संदर्भ निहायत अधूरा अथवा बेबुनियाद होगा। कश्मीरी और उर्दू भाषा की ऐसी ही अजीम शख्सियत थे रहमान राही, जिनसे पूरा मुल्क और समूची दुनिया का विशाल साहित्यिक दायरा बखूबी वाकिफ था।  






 

सुब्रत राय की बुद्धि शुद्धि हेतु सुंदर काण्ड पाठ

 2023 में सुब्रत राय सहारा से निवेशकों का भुगतान कराओ... हर तीसरा घर है प्रभावित.... भारत वर्ष की आधी आबादी परेशान...

 

थाली, चम्मच शंख घन्टा बजाकर सरकार का ध्यान आकृष्ट किया

सीतापुर। संयुक्त किसान मोर्चा के साथ सहारा इंडिया के विरुद्ध निवेशकों द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन में आज ग्यारहवें दिन जागरूकता अभियान के तहत ताली थाली और शंख बजाकर दोपहर दो बजे जुलूस यात्रा निकाल कर संगठन की तरफ से विरोध प्रदर्शन किया गया।संयोजक पिंदर सिंह सिद्धू ने कहा कोरौना महामारी के समय, ताली,थाली व शंख अभियान चलाकर कोरौना पर विजय पाई थी.

 पत्रकारिता की आड़ ले रहा भू माफिया दीपक गुप्ता


Abhishek Shukla
abhidipm.com@gmail.com


खुद को india watch चैनल का बाँदा जनपद का रिपोर्टर बताने वाला दीपक गुप्ता असल में अवैध प्लॉटिंग का कार्य करता है दीपक गुप्ता की शहर में लगभग दर्जन भर साइट हैं जिनमें 6 साइट पर विकास प्राधिकरण नोटिस दे चुका है  और एक साइट का ध्वस्टिकरण कर चुका है। जिस प्लॉटिंग को ध्वस्त किया गया है वहां के ग्राहक अब अपने आप को ढगा हुआ पा रहें हैं

 दादा लखमी- मन पर गहरी लकीर छोड़ती एक फ़िल्म

पंकज सुबीर-

भोपाल के केपिटल मॉल के आईनॉक्स में प्रसिद्ध फ़िल्म अभिनेता यशपाल शर्मा द्वारा निर्देशित राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित हरयाणवी फ़िल्म 'दादा लखमी' के विशेष शो को  देखने का अवसर मिला। सबसे पहले तो यह कि फ़िल्म भले ही हरयाणवी है लेकिन बहुत अच्छे से भाषा समझ में आ रही थी। इतनी हरयाणवी तो हम दंगल जैसी फ़िल्मों में सुन चुके हैं। फ़िल्म के बारे में क्या कहूँ, ज़्यादा कहूँगा तो लगेगा कि अपने मित्र की प्रशंसा कर रहा हूँ। लेकिन सच कह रहा हूँ कि मैंने बरसों बाद कोई ऐसी फ़िल्म देखी जो पूरे समय बाँध के रखती हो। इतना कसा हुआ निर्देशन, संपादन कि कुर्सी से हिलने का अवसर भी न मिले। यशपाल शर्मा ने अपनी पहली ही फ़िल्म से बहुत बड़ी लकीर खींच दी है। उनके अभिनय का तो मैं हमेशा कायल रहा लेकिन इस फ़िल्म को देख कर मुझे लगा कि उनके अंदर का निर्देशक शायद उनके अंदर के अभिनेता से कहीं ज़्यादा अच्छा है। बहुत चुनौतीपूर्ण है इस तरह की फ़िल्म बनाना और ऐसी बनाना कि दर्शकों को बाँध कर रख ले। आज के दर्शक को, जो कुछ ज़्यादा ही व्यस्त हो गया है। यशपाल शर्मा ने न केवल इस चुनौती को स्वीकार किया है, बल्कि उसे पूरा भी कर के दिखाया है। मेरा बस चले तो इस वर्ष के सारे पुरस्कार इस निर्देशक के नाम लिख दूँ। पिछले वर्ष हिन्दी फ़िल्म उद्योग का सबसे असफल वर्ष रहा है, हिन्दी फ़िल्में एक के बाद एक फ्लाप हुई हैं। हिन्दी फ़िल्म वालों को दादा लखमी देखना चाहिए, उनको समझ आएगा कि दर्शक क्या चाहता है। फ़िल्म हरयाणा में लगातार हाउसफुल चल रही है, जबकि रिलीज़ हुए दो माह से भी ज़्यादा हो चुका है।

 मैनेजमेंट गुरु और पूर्व मंत्री अभिषेक मिश्रा बोले- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंसानी विवेक की जगह नहीं ले सकती

मैनेजमेंट गुरु और यूपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री अभिषेक मिश्रा ने KCCILHE दीक्षांत में छात्रों को बताए सफलता के सही मायने

ग्रेटर नोएडा । हर क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते दखल और भविष्य में इससे पैदा होने वाली बेरोजगारी की आशंकाओं के बीच यूपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री और मैनेजमेंट स्कॉलर अभिषेक मिश्रा ने कहा है कि कृत्रिम बुद्धि कभी इंसानी विवेक की जगह नहीं ले पाएगी और मेधावी लोगों के लिए यह कभी भी चुनौती नहीं बन सकेगी.

13.1.23

 लोहड़ी का महानायक दूल्हा भट्टी

अमरीक-

लोहड़ी समूह पंजाबी लोकाचार का सबसे बड़ा पर्व है। पंजाबीयत की सांझा विरासत का सशक्त प्रतीक भी। माना जाता है कि लोहड़ी की रात के बाद कड़कड़ती ठंड का सफर ढलान की ओर जाने लगता है। हालांकि यह पक्ष अब ऋतु--चक्र के मिजाज पर ज्यादा निर्भर करने लगा है। फिर भी मान्यता यही है कि लोहड़ी की रात पूरे रस्मों रिवाज के साथ, अग्नि का अतिरिक्त सम्मान करते हुए ठंड को विदाई दी जाती है। पंजाबी पूरे उमंग से इसे मनाते हैं और यह कहकर लोहड़ी की रात खुशहाली की कामना करते हैं कि "इशर (खुशहाली) आए, दलिद्दर जाए/दलिद्दर दी जड़ चूल्हे पाए।" यानी बदहाली पूरी तरह से स्वाहा हो जाए। हर पर्व की तरह लोहड़ी से जुड़े मिथकों के भी कई आयाम हैंं और बदलते युग में खड़ी कुछ पुरातन विसंगतियां भी, जो नवचेतना अथवा वैज्ञानिक चेतना के साथ-साथ रफ्ता-रफ्ता बदल भी रही हैं। इनमें से एक अहम यह कि लोहड़ी पुत्र-जन्म और पुत्र-विवाह का प्रतिनिधि उत्सव भी है। अब पंजाब और इसके आसपास के इलाकों में 'धीओं (यानी बेटियों) की लोहड़ी' के बढ़ते प्रचलन ने इस त्योहार को यकीनन नया अक्स दिया है। इसे बेहतर समझने के लिए लोहड़ी पर्व के लगभग सर्वमान्य इतिहास की तहों में एकबारगी फिर से जाना गैर वाजिब नहीं।

11.1.23

 छेड़छाड़ का आरोपी प्रोफेसर बना एंटी रैगिंग केमेटी का सदस्य

कार्रवाई की जगह बचाने की जद्दोजहद में जुटा विश्वविद्यालय प्रशासन

रायपुर के कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में एक एसोसिएट प्रोफेसर ने छात्रा के साथ अश्लील हरकत की। इसकी शिकायत किए करीब 18 दिनों का समय बीत चुका है। लेकिन आरोपी प्रोफेसर पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। दूसरी तरफ अपने साथ हुई घिनौनी हरकत से परेशान स्टूडेंट ने अब कॉलेज जाना बंद कर दिया है।

10.1.23

 अवैध संबंधों के चलते बच्चों का पुराना खेल लूडो हुआ बदनाम

अजय कुमार,लखनऊ

मानवता जब भी शर्मसार होती है तो ‘वह’ अपने को बेगुनाह साबित करने के लिए मासूमियत का लबादा ओढ़ लेती है। सभी को याद होगा कि महाभारत काल में जुए में युधिष्ठिर द्रोपदी को हार गए थे! अब  कलयुग में एक महिला अपनी मर्जी से अपने आशिक से लूडो में खुद को हार गई! उसने कृष्ण भगवान को बुलाने के बजाय पति को ही धमकी दी कि वह उसे भूल जाए वरना उस पर पत्नी उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराएगी! दरअसल,उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में भी सामाजिक सरोकारों को बदनाम करने वाली ऐसी ही एक कहानी सामने आई है। जहां एक मकान मालिक और महिला किरायेदार ने अपने नाजायज संबंधों को छिपाने के लिए ऐसा कुचक्र रचा की सदियों से बच्चों के बीच बेहद लोकप्रिय खेल "लूडो"बदनाम हो गया। इस घटना के बाद से घर के बुजुर्गो ने बच्चों को लूडो नहीं खेलने तक की नसीहत देना शुरू कद दी है।

2.1.23

 कितना गिर गया पत्रकारिता का स्तर


भरतपुर । समाज की सेवा तथा समाज और सरकार के बीच सेतु का काम करने वाली पत्रकारिता का स्तर इतना गिर जाएगा शायद ही कभी किसी ने सोचा होगा । जब पत्रकार सड़क पर अपने कंधे पर थैला लटका कर और जेब में कलम लगाकर निकलता था तब लोग उन्हें सलाम करते थे और उनसे अपनी पीड़ा बयां कर मलहम लगाने की आस करते थे । पत्रकार भी उन्हें पूरा सम्मान देते और उनकी समस्या को अपनी कलम के माध्यम से  सरकार तक पहुंचाने में महत्ती भूमिका निभाते थे  ।

1.1.23

OPEN LETTER TO YOGI ADITYANATH : WHY DOES YOUR GOVERNMENT AND POLICE FEEL INSECURE?

 

Respected Yogi Maharaj,

 We were to take out a padyatra during 24-27 December, 2022 from Varanasi to Manduri, Azamgarh in support of a farmers’ movement going on at Manduri since 13 October against a proposed international airport which would involve taking over of 670 acres of land belonging to 8 villages uprooting close to ten thousand people. This padyatra was to mark the completion of 75 days of the daily sit-in observed by mainly women at Khiriya Bagh, an open space in Manduri.

26.12.22

संविधान की मूल आत्मा मानवतावादी: संजय सिंह

 



अंबेडकर नगर।  जलालपुर तहसील अंतर्गत ग्राम हुसैनपुर में सेंटर फॉर हारमोनी एंड पीस द्वारा राइज एंड एक्ट के तहत राष्ट्रीय एकता, शान्ति, सद्भाव एवं न्याय के लिए "भारत की परिकल्पना " विषयक परिचर्चा आयोजित की गई। इस अवसर पर समता मूलक समाज निर्माण का संकल्प लिया गया।

सहारा निवेशकों का शीघ्र भुगतान कराया जाए

 


सीतापुर आज माननीय सांसद व उपाध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी रेखा अरुण वर्मा जी को उत्पीड़ित सहारा निवेशक संघर्ष सीतापुर के अध्यक्ष व संयोजक नवल किशोर मिश्रा द्वारा ज्ञापन सौंपा गया । ज्ञापन में मुख्य मांगे हैं सहारा निवेशकों का शीघ्र भुगतान कराया जाए।

 मैथिली - हिंदी पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए निशांत सम्मानित।



हयाघाट : सामाजिक कार्यों और मैथिली - हिंदी पत्रकारिता में सक्रिय योगदान के लिए निशांत झा को भाजपा के वरिष्ठ नेता सह पूर्व राज्यसभा सांसद प्रभात झा ने पाग दोपटा व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

1.12.22

पार्टी विद ए डिफरेन्स से चुनावी उन्माद की गिरफ्त तक का भाजपा का सफर

 Krishan pal Singh-

मैनपुरी लोकसभा सीट  के उपचुनाव के लिये भाजपा ने तगडी व्यूह रचना की थी ताकि सपा की इस पुश्तैनी सीट पर अपनी जीत का परिचम लहराकर करिश्मा स्थापित किया जा सके। अगर ऐसा हो जाता तो विधानसभा के हाल में हुये आम चुनाव में सत्ता छीनने की कोशिश में विफल होने के बाबजूद सीटें बढने से सपा के हौंसले जिस तरह बुलन्द हुये थे उन पर पानी फिर जाता गो कि आजम खांन के गढ रामपुर की लोकसभा सीट न बचा पाने से उसे एक झटका तो लग ही चुका था , मैनपुरी में झटका और लग जाये तो उसकी जो फिजा बन रही थी उसका पूरी तरह सत्यानाश हो जाता ।

संविधान की प्रासंगिकता का मोदी राग

केपी सिंह-

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का न्यूज सेन्स कमाल का है। उन्हें पता है कि भाषण में किस समय क्या बात कहनी चाहिये जो मीडिया की सुर्खी बन जाये और सम्पादक उसी की लीड बनाने के लिये मजबूर हो जायें। फिर भले ही उन्होंने जो कहा उसके लिये खुद ही बहुत गम्भीर न हों। संविधान दिवस के दिन सुप्रीम कोर्ट परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि देश का संविधान आज और भी ज्यादा प्रासंगिक हो गया है। प्रधानमंत्री ने अवसर के अनुकूल संविधान का जो महिमा मण्डन किया उसमें कोई अतिश्योक्ति भी नहीं है। लेकिन इसकी सार्थकता तब है जब उनकी पार्टी और उनके अनुयायी भी इससे सहमत हों। अफसोस के साथ कहना पडता है कि इस मामले में वास्तविकता के धरातल पर स्थिति कुछ और ही नजर आती है।

1.11.22

A strong third quarter lifts gold demand to pre-pandemic levels

The World Gold Council’s latest Gold Demand Trends report reveals that gold demand (excluding OTC) in the third quarter of 2022 hit 1,181 tonnes, up 28% year-on-year. Strong demand pushed the year-to-date total to its pre-COVID levels. Gold demand was bolstered by consumers and central banks, although there was a notable contraction in investment demand.

40% of Indians surveyed have been targeted by a scam when shopping online during the festive season


 

• Over 4 in 5 Indian adults surveyed (85%) admit to risking their personal information or privacy in several ways during the festive season
• 74% of Indian adults surveyed say that spending time online via their connected devices helps their mental well-being during the holiday season

 

India, Delhi – November 1, 2022 – Norton, a global leader in consumer Cyber Safety, today published Indian findings from a global study conducted online in August 2022 among 1,001 Indian adults aged 18+ by The Harris Poll on behalf of NortonLifeLock that explored attitudes towards Cyber Safety and online shopping during the festive season. The report highlights the importance of taking precautions with your personal information online. The findings reveal that all (100%) of those planning to shop during the 2022 festive season expect to do so online, with 61% saying that they expect to do more than half of their festive season shopping online.

The festive season is often a time when many people buy gifts for their family and friends. This holiday season, Indian adults surveyed expect tech-based gifts including smartphones (64%), smart watches (55%), and smart home devices (47%) to be the most sought out gifts. Though only a small minority of adults in India surveyed(8%) plan to buy fewer technology gifts this festive season compared to years past, over 4 in 5 of those planning to buy less tech gifts (84%) say this is due to concerns of rising costs of living and inflation. To help with inflation/the rising cost of living, most Indians surveyed (91%) are likely to take cost cutting measures of some kind this festive season,  which for some includes clicking on a questionable link offering them a good deal on technology products (36%) or a reduced energy bill (29%).

27.10.22

गुजरात चुनाव-2022

शंभु चौधरी-

आगामी माह  गुजरात व हिमाचल प्रदेश  की विधान सभाअसें के चुनाव होने जा रहें हैं। इस बार के चुनाव में इस बार इन दोनों राज्यों में चुनाव त्रिकोणीय  चुनाव होने जा रहा है। मेरे इस लेख को गुजरात चुनाव तक केंद्रित कर लिखने का प्रयास कर रहा हूँ।  जैसा कि आप सभी जानते हैं कि बंगाल में वामपंथी  दलों को शासन 35 साल चलां, लोगों को लगता था कि इनकी जड़ें इतनी मजबूत है कि इसे बंगाल से उखाड़ फैंकना नामुमकिन ही नहीं असंभव भी प्रतित होता है। इसके बावजूद ममता के नये संगठन ने उसे मिट्टी में मिला दिया। आज बंगाल में वामपंथियों को राजनीतिक रूप से नई जमीन तलाशनी पड़ रही है।

6 गुणा अधिक प्रदूषित हुई काशी की आबोहवा

 



जम कर फूटे पटाखों ने फिर बिगाड़ी बनारस की आबोहवा, एक बार फिर जुमला साबित हुआ ग्रीन पटाखा

इंग्लिशिया लाइन, पांडेयपुर, सारनाथ, लहुराबीर बने गैस चेंबर, महमूरगंज और सिगरा रहे तुलनात्मक रूप से साफ़

क्लाइमेट एजेंडा की ओर से हर वर्ष की तरह सातवीं बार इस वर्ष भी दिवाली पर वाराणसी में वायु प्रदूषण की एक विस्तृत रिपोर्ट आज 26 अक्टूबर 2022 को दिन में 1 बजे जारी की गयी. इस रिपोर्ट के अनुसार, बनारस में ग्रीन पटाखे और जिला प्रशासन की ओर से हुई अपील इस बार पुनः बेअसर साबित हुई. कोविड 19 के साथ साथ अन्य श्वसन सम्बन्धी संक्रमण के खतरों के मद्देनजर, बनारस में वायु गुणवत्ता ठीक रखने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष के लिए जारी NGT के दिशा निर्देशों की खुल कर अवहेलना हुई और जिला प्रशासन हर वर्ष की तरह इस बार भी मूकदर्शक बना रहा. रात्री दस बजे के बाद पूर्ण रूप से पटाखा प्रतिबन्ध के लिए जारी आदेश को ताक पर रखते हुए काशीवासियों ने जहां एक तरफ जम कर पटाखे बजाये, वहीं दूसरी ओर इन पटाखों से शहर में पी  एम 2.5, पी एम 10 और वायु गुणवत्ता सूचकांक का स्तर भारत सरकार और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू एच ओ) , दोनों के ही मानकों की तुलना में काफी खराब हो गया.

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2023 में शामिल होंगे दुनिया के कुछ श्रेष्ठ कहानीकार

कथा लेखन में वो ताकत होती है, जो पाठकों को तुरंत ही एक काल्पनिक जगत में ले जाती है| ये ताकत वास्तव में कहानी कहने की कला में ही निहित है| जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के 16वें संस्करण में शामिल होने वाले दुनिया के श्रेष्ठ कहानीकार आपको इसी कला से रुबरु करायेंगे|

14.10.22

इल्तुतमिश ने तोड़ा, मोदी ने संवारा ! महाकाल शिवलिंग की वीरगाथा !!

के. विक्रम राव-

        खोरासान के बटमार मुहिउद्दीन मोहम्मद गोरी के गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक के ही गुलाम शम्सुद्दीन इल्तुतमिश ने करीब नौ सदियां बीते धर्मनगरी उज्जैन को खण्डित किया था, लूटा था। स्वयंभू दक्षिणामूर्ति शिवलिंग को क्षिप्रा नदी में फेंक दिया था। ऐसा ही फरगना के डाकू जहीरूद्दीन बाबर द्वारा श्रीराम जन्मस्थल पर जघन्य प्रहार हुआ था। आलमगीर औरंगजेब के वहशियानापन का शिकार बने विश्वनाथ मंदिर को तो मोदी ने विभूषित किया। भारत ऋणी है। राजा भोज द्वारा पूजित, कालिदास द्वारा महिमा मंडित, बारह लिंगों में से एक शंकर भगवान का यह देवालय जंबुद्वीप में प्राचीन ज्ञान का भण्डार रहा, मेधा का पर्याय और आस्था केन्द्र की धुरी। हिन्दुओं के धैर्य और शौर्य की सीमा अपार थी। अत: स्वाधीनता के बाद दशकों तक वे शांति से सुधार हेतु प्रतीक्षारत रहा। पराधीन प्रजा तो बेबस ही रही थी। आजादी के सात दशकों बाद वोट के लुटेरे, मजहब के दलालों की उदासीनता से ही शासन में लोकास्था डिगी। इस बीच अयोध्या का भी समाधान हो गया है। सोमनाथ को तो सरदार वल्लभभाई पटेल ने पहले ही संवार दिया था, जवाहरलाल नेहरु के जोरधार प्रतिरोध के बावजूद। अत: भला हो नरेन्द्र दामोदरदास मोदी का कि अपने सहप्रदेशीय सरदार पटेल की भांति वे भी तत्पर हुये राष्ट्र गौरव को संजोने के लिये।

इसका नाम मुलायम है जिसका जलवा कायम है!!

के. विक्रम राव-

एक गुत्थी उलझी है, मुलायम सिंह यादव के दिवंगत होने के बाद से। कभी खुलनी चाहिये। सार्वजनिक दर्शन तथा श्रद्धांजलि देने हेतु इस जननायक की शव यात्रा दिल्ली और लखनऊ पार्टी कार्यालय तथा दोनों आवासों से होते हुये जा सकती थी। हजारों चाहनेवाले वंचित रह गये। मेदांता (हरियाणा) से सैफई गांव सीधे ले जाने की तुलना में कुछ समय शायद ज्यादा लग जाता। यूं तो पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव का शव सोनिया गांधी ने कांग्रेस पार्टी मुख्यालय के फाटक के बाहर फुटपाथ पर ही  रखवा कर सीधे हैदराबाद रवना कर डाला था। मुलायम सिंह यादव तो जनप्रिय नायक रहे। फिर आधुनिक युग में तो इतने रसायन उपयोग में हैं कि लम्बे अरसे तक शव को परिरक्षित रखा जा सकता है। अब आमजन जिसके अत्यंत अजीज यह लोहियावादी नेता रहे को महरूम कर दिया गया। अक्षम्य है। गमगीन अधिक कर दिया गया।

12.10.22

औसत से भी नीचे चरित्र की पायदान पर खड़े भारतीय कैसे हों दुनिया के लिए रोल माडल, क्या संघ प्रमुख इसे विचारेंगे

केपी सिंह-

हाल ही में कोलकता में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के दो वयोवृद्ध प्रचारकों की याद में आयोजित कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने देश के प्रत्येक हिन्दू का पूरी दुनिया के लिए रोल माडल के रूप में अपने को तराशने का आवाहन पूरे हिन्दू समाज की गौरव ग्रन्थि को छू गया। किसी कोम के चारित्रिक उत्थान में ऐसे उपक्रम का बड़ा योगदान हो सकता है इसलिए संघ प्रमुख का हिन्दू समाज के सकारात्मक मनोबल बढ़ाने का यह तरीका फलदायक है।

पूंजीवाद का विकल्प हासिल करने के लिए मेहनतकशों के राजनीतिक आंदोलन को मजबूत करने का आह्वान

विद्यानंद चौधरी-
समाज में जब एक समुदाय की नागरिकता पर हमला होता है और बहुमत इसका समर्थन करता है तो वह खुद अपनी नागरिकता हारने की भी सहमति दे देता है। सवाल वह भी नहीं कर सकता। अधिकार वह भी नहीं मांग सकता। शिक्षा, स्वास्थ, रोजगार, किसानी, मजदूरी, महिलाओं, बच्चों, युवाओं आदि के नागरिक अधिकारों का क्या हाल है? किसने क्या खोया? बहुमत ने कुछ पाया क्या? नागरिकता संपूर्णता में हासिल होती है और संपूर्णता में खत्म भी हो जाती है। विभाजन केवल संपूर्णता में नागरिक अधिकारों को छीनने के लिए, उनके आंदोलनों के अधिकारों को कुचलने के लिए इस्तेमाल में लाए जाते हैं। वास्तविकता यह है कि कट्टरता और उन्माद पूंजीवाद द्वारा एक स्मोक स्क्रीन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। अपने छिनते अधिकारों को न देख नागरिक केवल नफरत और कट्टरता के अंधकार में गुम हो गया है। नशे में वह नफरत के नालियों में गिरा कीड़े की तरह गंदगी में लिपटा खुद को खो चुका है। चेतनाविहीनता की यह स्थिति बहुत खतरनाक है। वह पूंजीवादी अधिनायक को सर्वशक्तिमान समझ खुद निर्बल निरीह जीव बन समर्पण भाव में नतमस्तक खड़ा है। वह नफरती उन्मादी अधिनायक का हथियार बन गया है।

सहायक नगर आयुक्त मथुरा (sdm) राजकुमार मित्तल द्वारा दीपक पत्रकार के साथ मारपीट, गाली गलौज, अभद्रता

दीपक चौधरी- 

सरकारी गाड़ी में पालतू कुत्ते की सैर, फोटो खींचने पर पत्रकार से ही भिड़ गए 'SDM'

मथुरा - सरकारी गाड़ियों का दुरुपयोग कर रहे हैं अधिकारी ,सहायक नगर आयुक्त सरकारी गाड़ी में घूमा रहे थे पालतू कुत्ता , फोटो खींचने पर सहायक नगर आयुक्त ने पत्रकार के साथ जमकर की बदसलूकी ओर गाली गलौज ,किया हाई वोल्टेज ड्रामा

सामाजिक लोकतंत्र को पूर्व शर्त मानने वाले बाबा साहब और डा लोहिया के इरादे क्यों नहीं हुए कामयाब

केपी सिंह-

भारतीय लोकतंत्र की गुत्थियों में बहुत उलझाव है जिन्हें सुलझाना आसान नहीं है। पश्चिम की लोकतांत्रिक महाशक्तियों में इसकी प्रेक्टिस को लगभग पांच दशक का समय व्यतीत हो चुका है तब वहां परिपक्व लोकतंत्र बन सका, जबकि भारत में अभी सत्तर वर्ष से कुछ ही ज्यादा समय गुजरा है लेकिन तब दुनिया एक गांव में नहीं बदली थी। आज संचार की रफ्तार  वैश्विक विमर्श की सघनता कहां से कहां पहुंच चुकी है ऐसे में बदलाव के लिए सत्तर वर्ष का समय भी बहुत होता है। हालांकि भारतीय लोकतंत्र ने कई उत्कृष्ट सोपान भी चढ़े हैं लेकिन कई पहलुओं में यह इतनी विडम्बना का शिकार है कि स्थिति शोचनीय नजर आने लगती है।

बांसवाड़ा में साजिशन दर्ज किए जाते हैं पत्रकारों के खिलाफ मुकदमें

किशन सेन-

जब खेत ही बाढ़ को खाने लगे तो खेत का क्या कसूर यही हाल है वर्तमान में बांसवाड़ा के पत्रकारों का?

देश के  दो बड़े  अखबार के पत्रकारों कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी  क्या अन्य सस्थान के पत्रकारों के लिए मौका देखते है ये आखिर मजबूरी या फिर किसी साजिश का हिस्सा।

गांधी और लोहिया में उतना ही भेद देखता हूँ जितना कि राम और कृष्ण में!

-जयराम शुक्ल

 डा.लोहिया ने गांधी को पढ़ा भगत सिंह को जिया

राजनीति ऐसा तिलस्म है कभी सपनों को यथार्थ में बदल देता है तो कभी यथार्थ को काँच की तरह चूर चूर कर देता है। काँग्रेसमुक्त भारत की सोच डाक्टर राममनोहर लोहिया की थी। 12 अक्टूबर को डा. लोहिया की पुण्यतिथि पड़ती है। एक दिन पहले 11 अक्टूबर को जेपी और नाना जी पैदा हुए थे। आज देश लगभग कांग्रेस मुक्त है पर लोहिया मुखपृष्ठ पर नहीं हैं। 1967 में उत्तरप्रदेश में चरण सिंह चौधरी की सरकार के जरिये लोहिया ने गैरकांग्रेस सरकार की ओर पहला कदम बढाया था जिसे  दस साल बाद 77 में जयप्रकाश नारायण और नाना जी ने परिणति तक पहुँचाया।