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27.12.10

पंचायती चुनावों से सबक लें राजनेता व प्रत्याशी

पंचायती चुनावों से सबक लें राजनेता व प्रत्याशी

अरविन्द विद्रोही

उ0प्र0 में पंचायती चुनाव क्षेत्र पंचायत प्रमुखों के निर्वाचन के साथ ही सम्पन्न हो चुके हैं।ग्राम्य प्रधान,ग्राम्य पंचायत सदस्य,क्षेत्र पंचायत सदस्य तथा जिला पंचायत सदस्य के पद पर चुनाव प्रचार के दौरान आम मतदाताओं की चांदी रही।सामाजिक,राजनैतिक,विकास के मुद्दों के स्थान पर व्यक्तिगत स्वार्थ,लाभ,दबाव,धन का अंधाधुंध वितरण,शराब का वितरण,दावतों का आयोजन आदि प्रभावी व निर्णायक साबित हुए थे।पंचायती चुनावों में पद प्राप्ति के फेर में अधिकांश प्रत्याशियों ने अपनी पूॅंजी,क्षमता व ताकत का भरपूर इस्तेमाल किया।ग्राम्य पंचायत सदस्य पद का चुनाव फीका रहा लेकिन ग्राम्य प्रधान पद पर निर्वाचित होने की लालसा में अधिकतर प्रत्याशियों ने लाखों रूपये पानी की तरह बहाये।ग्राम्य प्रधान पद पर निर्वाचित होने के लिए लाखों रूपया खर्च करने का कारण ग्राम्य पंचायतों में आने वाले ग्राम्य विकास के धन की लूट व बन्दर-बॉंट करना ही है।ग्रामीण जनता एक तरफ भ्रष्टाचार का रोना रोती रहती है,वहीं चुनावों में प्रत्याशियों का भरपूर आर्थिक दोहन करने में भी कोई कोताही नहीं बरतती है।साफ-सुथरी छवि के अधिकतर प्रत्याशी ग्राम्य प्रधान पद पर निर्वाचित होने की कौन कहे,चुनावी संघर्ष में ही नहीं गिने गये।प्रधान पद की योग्यता जानकारी,कर्मठता,ईमानदारी ना मानकर जनता ने कुछ और ही मानी।

क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य पद के निर्वाचन में भी काफी जोर-आजमाइश हुई।कई दिग्गजों का समीकरण चक्रानुक्रम आरक्षण के चलते बिगड़ गया।क्षेत्र प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में खरीद-फरोख्त के सुअवसर के फेर में सदस्य पद के चुनाव में लाखों रूपये लगाकर दावेदारी की गई।औसत अनुमान के अनुसार क्षेत्र पंचायत सदस्य पद हेतु लगभग 50हजार रूपया तथा जिला पंचायत सदस्य पद हेतु लगभग 12लाख रूपया खर्च करने के पश्चात् ही प्रत्याशी गण सदस्य निर्वाचित हुए।ग्राम्य प्रधान,क्षेत्र पंचायत सदस्य व जिला पंचायत सदस्य पद के प्रत्याशियों के द्वारा आदर्श चुनाव संहिता का जमकर माखौल उडाया गया।जिससे जो बन पड़ा उसने वो किया।कहीं भी आदर्श चुनाव संहिता के पालन व लोकतांत्रिक मूल्यों की चर्चा नहीं की गई।सभी प्रत्याशी व राजनैतिक दल अपनी व अपने समर्थकों की ऐन केन प्रकारेण विजय श्री सुनिश्चित करने की लालसा में अनैतिक कृत्य करते रहे।

जिला पंचायत अध्यक्ष पद हेतु निर्वाचन की प्रक्रिया में जीते जिला पंचायत सदस्यों को अपने-अपने पाले में करने के लिए जमकर घमासान मचा।सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी पर सत्ता के बेजा इस्तेमाल का आरोप समाजवादी पार्टी,कांग्रेस,भाजपा ने जमकर लगाया।बसपा पर दबाव,खरीद-फरोख्त के जरिए जिला पंचायत सदस्यों को अपने पाले में करने का आरोप लगा रहे विपक्षी दलों के अपने ही नव-निर्वाचित सदस्यों ने विभिन्न जनपदों में बहुजन समाज पार्टी के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी को मत व समर्थन दिया।समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने अनुशासनहीनता के खिलाफ ठोस निर्णय लेते हुए दर्जनों नेताओं को समाजवादी पार्टी से बाहर कर दिया।उ0प्र0 में कांग्रेस का नेतृत्व कोई निर्णय नही ले सकता यह सर्व विदित है।शायद भाजपा के उ0प्र0 के नेतृत्व को कमजोर व लाचार मानकर ही विकास के नाम पर राजधानी से सटे जनपद बाराबंकी में भारतीय जनता पार्टी के जिला पंचायत सदस्यों व जिले के नेतृत्व ने बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष पद की प्रत्याशी को घोषित समर्थन व मत दिया।भारतीय जनता पार्टी का प्रदेश नेतृत्व बसपा पर आज तक खरीद-फरोख्त का आरोप पानी पी पी कर लगा रही है और सरेआम बसपा की मदद कर चुके अपने दल के लोगों पर कोई कार्यवाही नहीं कर रही है,यह बात गले नही उतरती है।क्या भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस का नेतृत्व बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशियों की मदद को,उनको मत व समर्थन देने को अनुशासनहीनता व मतदाताओं के प्रति विश्वासघात नही मानता?

जिला पंचायत अध्यक्ष पद के निर्वाचन के तत्काल बाद क्षेत्र पंचायत चुनावों में भी यही मंजर दिखा।अब इसे कानून व्यवस्था बनाये रखने की कोशिश कहिए या सरकार के द्वारा प्रशासन से विपक्षी प्रत्याशियों पर दबाव बनवाना,लेकिन यह सत्य है कि पुलिस के छापों व सख्ती से बड़े-बड़े सूरमा जो अपने को दबंग,प्रभावी व बाहुबली समझते थे,चुनाव मैदान में ही नही आये।जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत दोनों के प्रमुखों के निर्वाचन में बसपा का दबदबा रहा सिर्फ समाजवादी पार्टी ही बसपा के मुकाबिल रही।

आने वाले नगर निकायों के चुनावों के संदर्भ में अभी से सभी राजनैतिक दलों और प्रत्याशियों को सचेत हो जाना चाहिए।नगर निकायों के चुनाव प्रक्रिया में बदलाव करके नगर अध्यक्षों का चुनाव जनता के मतों से ना करा के निर्वाचित सभासदों के द्वारा करवाये जाने के प्रस्ताव की चर्चा जोरों पर है।अगर यह बदलाव हो गया तो यह भी निश्चित है कि पंचायती चुनावों की तरह नगर निकायों के निर्वाचन में बहुजन समाज पार्टी का परचम लहरायेगा।



2 comments:

पुष्पा बजाज said...

आपकी रचना वाकई तारीफ के काबिल है .

* किसी ने मुझसे पूछा क्या बढ़ते हुए भ्रस्टाचार पर नियंत्रण लाया जा सकता है ?

हाँ ! क्यों नहीं !

कोई भी आदमी भ्रस्टाचारी क्यों बनता है? पहले इसके कारण को जानना पड़ेगा.

सुख वैभव की परम इच्छा ही आदमी को कपट भ्रस्टाचार की ओर ले जाने का कारण है.

इसमें भी एक अच्छी बात है.

अमुक व्यक्ति को सुख पाने की इच्छा है ?

सुख पाने कि इच्छा करना गलत नहीं.

पर गलत यहाँ हो रहा है कि सुख क्या है उसकी अनुभूति क्या है वास्तव में वो व्यक्ति जान नहीं पाया.

सुख की वास्विक अनुभूति उसे करा देने से, उस व्यक्ति के जीवन में, उसी तरह परिवर्तन आ सकता है. जैसे अंगुलिमाल और बाल्मीकि के जीवन में आया था.

आज भी ठाकुर जी के पास, ऐसे अनगिनत अंगुलीमॉल हैं, जिन्होंने अपने अपराधी जीवन को, उनके प्रेम और स्नेह भरी दृष्टी पाकर, न केवल अच्छा बनाया, बल्कि वे आज अनेकोनेक व्यक्तियों के मंगल के लिए चल पा रहे हैं.

अरविन्द विद्रोही said...

thanx...