Bhadas ब्लाग में पुराना कहा-सुना-लिखा कुछ खोजें.......................

16.3.08

नही चाहिए हमें आप से शराफत का certificte साहेब....

एक छोटी सी कहानी से शुरुआत करती हूँ…बचपन में बाबा ने सुनाई थी,,किसी गाव में एक साँप का बड़ा खोफ फैला हुआ था ,वो सौंप जहाँ रहा करता था वो जगह बच्चो के खेलने का मैदान थी,,साँप के डर से बच्चो ने धीरे धीरे वहां खेलना ही छोड़ दिया. सौंप ऐसा नही चाहता था उसे बच्चे प्यारे लगते थे,,तब उसने अपनी मन की बात एक बाबा से कही,,बाबा ने उसे वो कारण बताया जिसकी वजे से बच्चे वहां खेलने से डरते थे,,बाबा ने कहा यदि तुम सचमुच बच्चो से प्यार करते हो तो उन्हें नुकसान पहुँचाना छोड़ दो..साँप ने उनसे ऐसा करने का वादा कर लिया..बाबा किसी दूसरी जगह चले गए…कुछ समय बाद दोबारा उनका उसी गाँव में आना हुआ तो उन्होंने एक अजीब मंज़र देखा,उन्होंने देखा की उसी खेलने के मैदान पर कुछ बच्चे एक रस्सी को एक दूसरे पर उछल रहे हैं,कभी पटक देते हैं तो कभी नोचते ख्सोटते में लग जाते हैं.बाबा ने करीब जाकर देखा तो ये देखकर हैरान रह गए की वो रस्सी नही बलकि वाही साँप था जिस के खोफ से कभी इस मैदान पर बच्चे तो क्या बड़े भी आने से डरते थे,उसकी हालत देख कर बाबा को बहुत दुःख हुआ,उन्होंने बच्चो को डांट कर वहां से भगाया ओर सांप से इस हालत की वजे पूछी,तब साँप ने बड़े भोलेपन से उनसे किया हुआ अपना वादा याद दिलाया.बाबा रो पड़े,उन्होंने कहा अरे बच्चे,,मैंने तुझे उन्हें नुकसान पहुंचाने से मन किया था,पर ये नही कहा था की तब भी चुप रह,जब कोई तुझे नुकसान पहुँचा रहा हो,ये दुनिया बहुत बुरी है,बहोत अच्छे लोगो को भी जीने नही देती,मेरे दोस्त,किसी को ख़ुद से हानि मत पहुँचाओ पर जब तुम्हें कोई नुकसान पहुँचने की कोशिश करे तो उसे बता दो की तुम कमज़ोर नही हो.. बचपन में ये कहानी अच्छी तरह समझ नही पायी थी,पर आज अहसास होता है की जब तक हम सो कॉल्ड शराफत का लबादा ओढे हर ज़ुल्म को चुपचाप सहेन कर लेते हैं,,दुनिया हमें शरीफ ओर cultured कहती है..हाँ..सदियों से यही होता आया है,,जो दबता है उसे दबाया जाता है..जो चुप रहता है उसे ओर चुप रहने का भाषण दिया जाता है..तुम cultured हो,तुम्हें ऐसे रहना है तुम्हें ऐसे बोलना है,शराफत ओर शिष्टाचार का पाठ पढ़ते पढ़ते हम हर ज़ुल्म ओर ज्यादती सहते रहते हैं पर कब तक?

इंसान की फितरत को दबाया नही जासकता,,बहते पानी का रास्ता भी कोई सका है,,जब भी उसे जबरन रोकने की कोशिश की गई वो ओर भयानक शक्ल में दुनिया को तबाह करके सामने आया है..गुस्सा हमारी फितरत का हिस्सा है…जब भी कही ना इंसाफी होती है,,ज़ुल्म होता है,,इंसान के अन्दर गुस्से का तूफ़ान उबल पड़ता है,,ओर हम उसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाते हैं,,धीरे से बोलने वालो को कोई नही सुनता…ज़ोर से बोलने वालो को बदतमीज़ भले ही कह दिया जाए पर सच यही है की दुनिया पहले उसे ही सुनने के लायेक समझती है…भडास में लोगो के नाइंसाफी के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने का ढंग ज़रूर हमारे socalled शरीफ लोगो को नागवार गुज़रता हो लेकिन मेरी नजरो में ये एक आम सीधे साधे भारतीय की सहेज ओर सच्ची आवाज़ है,,जो शराफत का ढोंग नही करता,जो भाषा की जादूगरी नही दिखाना चाहता,वो पढा लिखा होकर भी भारत का एक आम देहाती है…वो देहाती जो गुस्से में आता है तो खरी खरी ज़रूर सुना देता है पर जिस का दिल अन्दर से आईने की तरह साफ है…..वो मासूम है,हर छल कपट से पाक,भड़ास के ब्लॉग वाणी से बेदखल किए जाने का सुनकर दुःख के साथ साथ हँसी भी आती है,यही होता आया है,हमेशा से.इस में नया कुछ नही है.आम भारतीय हमेशा से दबाया जाता रहा है.पर कब तक? कब तक ये लोग आम भार्तिये की आवाज़ को दबा सकेंगे…ये आवाज़ ऐसे ही गूंजती रहेगी क्योंकि ये एक आम भार्तिये इंसान की आवाज़ है.

9 comments:

डा०रूपेश श्रीवास्तव said...
This comment has been removed by the author.
डा०रूपेश श्रीवास्तव said...

रक्षंदा आपा,धुंआधार लिखा आपने तो आग लगा दी ,ऐसे ही स्वयंभू शरीफ़ लोगों को आइना दिखाती रहिये आनंद आ गया । आशीर्वाद स्वीकारिये.....
रही बात ब्लागवाणी से बेदखल करे जाने की या किसी के चले जाने की तो हम अभी भी गिनती में उतने ही सिर हैं और दिन ब दिन बढ़ते ही जाने वाले हैं...
जय जय भड़ास

मुनव्वर सुल्ताना said...

रक्षंदा आपा,बहुत खूब लिखा ,दकियानूसी ख्यालों को मानने वालों और शराफ़त का ढोंग करने वालों को इतना बड़े साइज का जूता मारा कि बस सहलाते घूमेंगे कुछ दिन तक....

हिज(ड़ा) हाईनेस मनीषा said...

रक्षंदा आपा,तुस्सी ग्रेट हो ,कमाल कर रही हो ;आते ही रक्षा की कमान सम्हाल कर ब्लागवाणी पर हमला बोल दिया ,ठीक है मैं भड़ास का शिखंडी माना जाने वाला योद्धा इस युद्ध में आपके साथ हूं ये तो सिद्धांतों की लड़ाई है ।
जय भड़ास

मोहम्मद उमर रफ़ाई said...

अरे मेरे प्यारे बच्चों,खातून है तो कमज़ोर मत समझना ,हाथ में तलवार और कलम दोनो लेकर जंग कर सकती है ।
भड़ास ज़िन्दाबाद

मोहम्मद उमर रफ़ाई said...

अरे मेरे प्यारे बच्चों,खातून है तो कमज़ोर मत समझना ,क़लम और तलवार दोनो चला सकती हैं खातून जब जैसी जरूरत हो ।
खुश रहो बच्ची और खूब तरक्की करो
भड़ास ज़िन्दाबाद

Anonymous said...

RAKSHANDAA JI BADHAI KUBUL KIJIYE APNI BEBAAK LEKHNI KE LIYE....CHALO HIMMAT MILTI HAI AAP KE SAATH NE BHADAAS KO BULAND KIYAA HAI.
THANKS A LOT RAKSHANDAA..COME ON...BE JUSTICE FULL..

हरे प्रकाश उपाध्याय said...

aapa....donot worry, please...

rakhshanda said...

@Hari bhaai, Manavver aapa ,Manisha didi , Manish bhaai,Umar bhai n specially Rupesh bhaiyaa,,bahut bahut shukriya,aap sab ki itni hosla afzaayi ka...pls isi tarah mere saath rahiyega...thanks again