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13.3.08

यशवंत दादा पर हमला ,रक्तरंजित बेहोश....



रात लगभग पौने बारह बजे मुझे दिन में दसियों बार की तरह से ही यशवंत दादा का फोन आया ,बाइक किनारे खड़ी करके जैसे ही हैलो बोला तो उस तरफ से एक डरी सहमी सी महिला की आवाज आयी "भइया ये बुरी तारह घायल हैं नाक मुंह से खून बह रहा है और बेहोश से हैं बात तक नहीं कर पा रहे हैं" । इतना सुन कर मेरा दिमाग सुन्न हो गया ,दिल में एक झटके में हजारों ख्याल आ गये कि कैसी हालत है मेरे भाई की,क्या हुआ होगा,कौन लोग रहे होंगे ? मैं छटपटा कर रह गया समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूं किसी तरह दिल मजबूत करके दीदी को बोला कि गीले रुमाल से पहले खून साफ़ करो और देखो कि जख्म कितने गहरे हैं ,दूध में हल्दी मिला कर एक चुटकी फिटकरी निगलवा दो ,किसी तरह उन्हे दिलासा दिलाया कि दीदी कुछ नहीं होगा उन्हें आप डरो मत पहले जो बोला वो करो बात बाद में करते हैं । जिंदगी में पहली बार मुंबई से दिल्ली के बीच की दूरी का एहसास हुआ । कुछ सूझा नहीं तो चंद्रभूषण भाई को फोन लगाया कि कुछ मदद करो आप लोग करीब हो उनके उन्होंने तुरंत अपनी जिम्मेदारी और परिस्थिति को समझा और जो बन पड़ा वह किया और सूचित करा । इस बीच मुनव्वर आपा से लेकर तमाम मुंबई के लोगों को मैंने यह दुर्घटना बता दी । मैं नहीं जानता कि क्या हुआ है लेकिन डेढ़ बजे मुझे खुद यशवंत दादा ने फोन करा और तूटे-फूटे शब्दों में बताने की कोशिश करने लगे कि क्या हुआ कैसे वो आईबीएन 7 के किसी बंदे को घर ड्राप कर वापिस आ रहे थे पर जिस कष्ट से वे बोल रहे थे मैंने उन्हें सख्ती से मना कर दिया कि आप सो जाइये सुबह बात करेंगे ।
ये क्या हो रहा है ? क्या हमारे द्वारा दबे कुचले मजदूर खेतिहर और अछूत से तबके की जो हमनें आवाज बनने की हमारी कोशिश भड़ास के मंच पर है क्या अब वह विचारों से निकल कर सड़को पर विरोधी ले आये हैं ? या फिर हमारी भाषा जिसे लोग जाहिलपन से जोड़ते हैं और खुद को बुद्धिजीवी मानते हैं वे बुद्धिजीवी शब्दों की स्याही के रंग में खून मिलाने लगे हैं क्योंकि उनके चेहरों से हमारी तेजाबी गालियों ने शराफ़त के चढ़ाए नकली मुखौटे गला कर उनके वीभत्स असली चेहरे लोगो को दिखाने का काम शुरू कर दिया है ?एक सज्जन बोले कि भड़ास का भाषाई अभिव्यक्ति गलत है बात सही तरीके से भी कही जा सकती है वगैरह वगैरह......... । क्या कहूं इस पूरी घटना के बाद कि मैं इस कायरतापूर्ण कर्म पर विरोधियों की कड़े शब्दों में निन्दा करता हूं या यह एक निन्दनीय काम है जिसका हम सबको विरोध करना चाहिए..... । अरे तुम शब्द तलाशो ये कहने के लिये कि अच्छा अंदाज और लहजा क्या होगा ,जब मेरे भाई को कोई दस हरामी मिल कर मारें तो मैं निन्दा और भर्त्सना करने की बजाय उन्हें पा जाने पर उनकी गांड में गोली मार देना चाहूंगा लेकिन पिस्तौल नहीं है तो जो मुंह में है वो आग तो गालियों के रूप में ही बाहर निकलेगी ही । जिसे लगता हो कि मैं आपे से बाहर हो रहा हूं तो भाइ तुम आपे में रहो और जूते खाओ मैं अगर पलट कर मार नहीं सकता तो गाली तो दूंगा ही और जितनी हो सकेगी उतनी दूंगा ।
दादा से बात होने पर ही सब विस्तार से मालुम पड़ेगा लेकिन एक बात है कि लोग हम से डर गये हैं इस लिये ऐसी ओछी हरकतों पर उतारू हैं । हम मर सकते हैं हजारों बार लेकिन अपना सहज धर्म नहीं छोड़ सकते । आप लोग जो उनके घर से नजदीक हों उनका हालचाल लीजिए यथासम्भव मदद करिये क्योंकि मेरी बहन तो एकदम डरी हुई है । आगे देखते हैं कि क्या हो रहा है और क्या करना है ?

18 comments:

Anonymous said...

doctor sahab...abhi pata chala ki ye kya ho gaya hai yashvant dada ko.abhi phone kar ke baat karta hun.

Anonymous said...

doctor saahab maine phone lagayaa lekin ring ho raha tha aur kisi ne uthaayaa nahi.tab hare prakash bhaiya se baat hui lekin koi anya number nahi hone ki vajah se daada kaa haal-chaal nahi le payaa.
doctor saaheb chintaa ho rahi hai batao na kya karun?

Anonymous said...

doctor sir ....dada phone nahi utha rahe hain ,man chintit ho raha hai....kya karun samajh mein nahi aa raha hai.

Anonymous said...

doctor sir ....dada phone nahi utha rahe hain ,man chintit ho raha hai....kya karun samajh mein nahi aa raha hai.

संजय तिवारी said...

अरे यह क्या बुरी खबर है?
क्या हुआ पूरी बात तो बताते.

संजय तिवारी said...

अरे यह क्या बुरी खबर है?
क्या हुआ पूरी बात तो बताते.

डा०रूपेश श्रीवास्तव said...

मनीष भाई,परेशान न हों ऐसा तो हरगिज नहीं कहूंगा क्योंकि बात तो चिन्ता की है ही । अभी दादा से बात हुई है वो ठीक है आप भी बात कर लीजिए । बाकी रही ढिठाई की तो वो अभी भी कायम है...
और दिन ब दिन बढ़्ती जायेगी...
सदा सर्वदा जय भड़ास

avinash said...

यशवंत एक बहादुर इंसान हैं। उन पर हमला करने वालों ने अपनी कायरता ही प्रदर्शित की है। हम सब इस हमले की घोर भर्त्‍सना करते हैं।

avinash said...

सबसे पहले यशवंत जी को कार का नंबर लेकर अनाम हमलावरों के खिलाफ एफआईआर करानी चाहिए। या नहीं तो ब्‍लॉग के जो उनके साथी हैं, उन्‍हें आगे बढ़ कर ये काम कराना चाहिए।

rakhshanda said...

its so bad,,sir kaise hain?
i m very worried about him...he is a very nice person...khuda kare wo jaldi theek ho jayen...meri duaayen unke sath hain..AMEEN
please take care of him...

मोहम्मद उमर रफ़ाई said...

बच्चा लोग,यशवंत के साथ हम सब का प्यार और दुआयें हैं ;अल हम्दु लिल्लाह सब ठीक हो जाएगा आमीन ।

मोहम्मद उमर रफ़ाई said...

बच्चा लोग,यशवंत के साथ हम सब का प्यार और दुआयें हैं ;अल हम्दु लिल्लाह सब ठीक हो जाएगा आमीन ।

Sanjeet Tripathi said...

बुरी खबर!!
उम्मीद है जल्द ही यशवंत जी पूर्ण स्वस्थ होकर यह बताएंगे कि मामला क्या है,हमलावर कौन और क्यों।

अंकित माथुर said...

मुझे नही पता कि किस वजह से उन पर हमला
हुआ है, ये कोई लूट की कोशिश थी या,फ़िर
पत्रकारिता संबन्धित उनके तेवरों के कारण।
यदि दूसरा कारण है तो ये बेहद कायरतापूर्ण और
शर्मनाक कृत्य है।
घोर भर्त्सना की जानी चाहिये।

गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल' said...
This comment has been removed by the author.
गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल' said...
This comment has been removed by the author.
गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल' said...

KYAA HO RAHAA HAI YE...!!
अंतस की पीर को कैसे व्यक्त करें हम
हिंसा की घोर निंदा ईश्वर से उनके शीघ्र होने की कामना के साथ.

Anonymous said...

maa chod denge hamla larne valon ki