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17.3.08

अब भी सबसे बडा ब्लोग है भड़ास....देखा....इसको कहते हैं छा जाना

''ले लिया....बरबाद कर दिया...तेरे लोग को अब कोई पढेगा भी नही....तू लोग चुतिया है.....देखा बड़ा फट फट कर रहा था...ब्लोग्वानी ने भी गांड पर लात मार कर भगा दिया...अब का करोगे ...स्साला महीना दिन से कह रहे थे की भुत उतारो और गुडी गुडी लिखो ....अच्छा लिखो...जैसे सब लिखते हैं,लेकिन माने तब न...अब लो जो भी मार्केट में तेरे को लोग पढता था न अब तेरे से बोलना भी नही चाहेगा.....हल्कत....पागल...उल्लू की दुम...''


जी ये बेगुसराय के एक शुभचिंतक हैं जो एक अखबार के डेस्क पर हैं. उनकी इन बातों से थोरा गुस्सा भी आया की ये बिल्कुल गधे हैं ,भैया मैं तो ठहरा बुरल लोग...तुरंत भाई जान को बोला दादा आज दरोगा जी मीरा मोटेल में बुलाए हैं बोले की आप को साथ जरुर लाना...उधर गरम रम का इंतजाम है ..चखना तो मजेदार है...तो चलो न गुरु अभी साढे छह ही हुए हैं नौ बजे तक लौट कर आ जाएंगे...अब भैया दारु के नाम पर तो जैसे इनको पर लग गया...तुरंत तैयार हो कर चालू..चल न रे मनिशवा....मैं साहब को फतफतिया पर बैठा कर डाइरेक्ट नेट कोम साइबर कैफे में ले कर आ गया और बोला दादा तनी एगो मेल कर लेते हैं तब चलते हैं.दरअसल मैं बहाना बनाकर उनको इधर लाया था.तो कम्पयूटर पर भडास खोला ......भाई लोग मैंने जो देखा न ...अब क्या बताऊँ मेरे जी में आया की इस साले को १२० की स्पीड से चलती बाइक से फेंक दूँ,......अब आपको बताता हुं की इनके आँख में जुज कैसे घसल था?

टाइम छः बज कर छतीस मिनट .शाम ...भडास पर एक सौ बेरान्वे लोग आए थे......उनको सारे कथित बडे ब्लोगों के हिट्स दिखाए और सबसे ज्यादा हिट्स भड़ास की ही निकली ... तो मैंने भले मानुष को दिखाया और बोला देख बे...ये ब्लोग्वानी ने हटा भी दिया तो क्या उखड गया भडास का...अब तेरे टैप के लोग अपना फ़िक्र चालू कर दो....हम भडासी अब और बम्केंगे.....पहले गाली देते थे ...अब खोज-खोज कर बांस करेंगे.....तो साहब बमक गए...मैंने ऐसा नही बोला,मैंने वैसा नही बोला...मैं समझ गया ये सचमुच तनाव में आ गए हैं तो बोला की सर जी टेंसन काहे लेते हो दरोगा जी दारू नही पिलायेगा तो क्या हुआ चलिए आज हम अपनी तरफ़ से आपको पिलाता हुं। तो भाई बहिन लोग....ये मानुष मेरे बाजू में बैठा हुआ है....उसे मैंने चाय में उलझा दिया है ....फट फट टैप कर के पोस्ट डाल रहा हुं ......और साले को दारु पिलाने भी जाना है.तो भाई बहिन लोग तब तक आप पढिये हम तनी गरम हो के आवत हैं।

जय भडास

जय यशवंत

मनीष राज बेगुसराय

1 comment:

डा०रूपेश श्रीवास्तव said...

मनीष भाई,पिलाओ और पिलाओ सालों को ताकि लीवर के लिये रिलीवर मंगवाना पड़े । अरे कौवे के कोसने से कहीं ढोर मरते हैं ,भड़ास का कोई क्या उखाड़ेगा ???
जय जय भड़ास