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27.8.10

ग़ज़ल

हौसला अपना बनाये रखना
आस का दीया जलाए रखना.

ज़िन्दगी हर क़दम पे झटके खिलाएगी
क़दम फिर भी बढ़ाए रखना.

इच्छाओं ने लूटा है बार-बार
उम्मींदों का आशियाँ बसाये रखना.

हो गई है जिस्म अब बाज़ार की 
हो सके तो थोड़ा ज़मीर बचाए रखना.

सफ़र हो सकता है तवील जीस्त का
आशाओं के क़दम चलाये रखना.

घुड़दौड़ तमन्नाओं में रिश्ते छूट गए
मिलें कहीं तो " प्रताप " ख़ुलूस बनाये रखना.

प्रबल प्रताप सिंह

1 comments:

डॉ. मोनिका शर्मा said...

बड़ी प्रेरणादायी पंक्तियाँ हैं......

आशाओं के क़दम चलाये रखना.
अच्छी ग़ज़ल के लिए आभार