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10.1.11

पूजा - पाठ एवं अन्य खुराफात

[ धर्म- कर्म ]
* मैं अपने इस आरोप पर आपसे सहमति चाहता हूँ कि, लगभग सारे के सारे अपने को आस्तिक कहने वाले लोग ईश्वर में सचमुच  विश्वास  नहीं रखते , इसीलिये उसके नाम पर पूजा - पाठ एवं अन्य खुराफात अनावश्यक रचते रहते हैं |
 
* Assigning the supernature [ as it is called ] with names of Ishwar / Allah is a blasphemy in itself .
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* मैंने वह किया जो मुझे नहीं करना चाहिए था | जो काम मेरे जिम्मे नहीं था , जिसे करने में मैं प्रशिक्षित / प्रवीण नहीं था | फिर भी मैंने किया , एक मनुष्य की हैसियत  से | कवितायेँ लिखना , विचार करना , धर्म  और  राजनीति  में दखल   देना इत्यादि | अब भला उसे मैं कितना कर पाया हूँगा , वह तो सबके सामने है |
गैर ज़रूरी ही सही , मैंने तो किया  |
 [  व्यक्तिगत डायरी ]


                        [ कविताएँ ]
१ - रोना ,
रोज़ - रोज़ का
फेनामेना |

२ - नक्सलवादी
वहां हैं ,
क्योंकि हम
वहां नहीं हैं |

३ - गालियाँ वही हैं
अब भी वही हैं
हूबहू वही ,
सिर्फ भाषा बदली है
गँवारु से हटकर
सम्भ्रांत दिखती
अंग्रेजी में हो गयीं हैं
अंगों के अंग्रेजी नाम
अब सभ्य हो गए है
बस और कुछ नहीं
गालियाँ अब भी हैं
और बिल्कुल वही हैं |

४ - आदमी में कमियां हैं
वही जो आदमी
इन कमियों से
ऊपर उठ जाता है ,
सम्मान्य हो जाता है ,
अब मेरा कहना यह है कि
जो आदमी
इनसे बाहर न निकल पाए ,
अपनी कमियों को
छोड़ न पाए  
उसे असम्मानित
न किया जाए |
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                        [ जीवन संग्रह ]

* जीवन छोटा और
कहने को बहुत कुछ हो
तो हड़बड़ी हो ही जाती है |
बहुत कुछ
समेट लेने की कोशिश में
बहुत कुछ
छूट जाता है |
                          - -  [कवि ]- अम्बिका दत्त


*  Being attracted to a scientist is the wrong way to be attracted to science .
                                           - Venkatraman Ramkrishnan
                                       [ 2009 Nobel Prize Winner Laureate for Chemistry ]

1 comment:

Shalini kaushik said...

vastav me unhe ishwar me nahi swayam par hi vishwas nahi hota.achchhi prastuti....