19.10.11
हाय रे हाय मीडिया बिक गया
सुबह सुबह नुक्कड़ पर दीपक हिंदूवादी दुखी नजर आये, हमने कारण पूछा तो फ़ट पड़े - " ये भारत का मीडिया बिकाउ है साला।" हमने कहा- "अरे भाई, अखबार बिकेंगे नही लोग खरीद कर पढ़ेंगे नही तो चलेंगे कैसे।" दीपक जी ने हमारी बुद्धी पर तरस खाते हुये समझाया -" अरे भाई वैसे बिकाउ नही कहा हमने, हमारा कहने का मतलब है कि संपादक लेखक लोग पैसे लेकर झूठी खबरे छापते हैं, खबरे दबा भी देते हैं"। हमने कहा - " भाई जरा बात को उदाहरण सहित समझाया करो पिछली बार ही हम उलझ गये थे।" दीपक भाई ने उदाहरण दिया - अब प्रशांत भूषण का मामला ही देख लो, सब लोग उसकी पिटाई करने वालों के खिलाफ़ उल्टा सीधा छाप रहे हैं। जबकी भगत सिंग सेना के लोगो ने देश भक्ती का काम किया था। कश्मीर को अलग करने की बात करने वालों को पीटना चाहिये था कि नही।"
Labels: भ्रष्ट मीडिया, हिंदूवादी
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2 comments:
बहुत बढ़िया दवेसाहब,
बधाई ।
कहीं पे निगाहें और कहीं पे निशाना वाला व्यंग शानदार लगा.
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