एक मुलाकात नत्था से:
समझ में आगया की जो ज्यादा पैसा दे उसीके साथ रहूँगा.कुछ दिन फिर मैं दूसरे लोगों के साथ काम करने लगा,गरीबी पर भाषण देने के काम में बड़ा फायदा है.खूब ढेर सारी जान पहचान हो गयी,बहुत लोग अब नत्था जी कहते हैं.पिछले साल मैंने अपनी संस्था बनाली,दिल्ली में ही आफिस है.अब समय एकदम नहीं मिलता,अभी देश में बहुत काम करना है,असली आज़ादी अभी आई नहीं है.गरीब की दशा और ख़राब होगई है.उनका कोई सुनने वाला नहीं है."
21.8.11
धनंजय कहिन: एक मुलाकात नत्था से
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