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17.8.11

प्रधानमंत्री निर्दोष है. व्यंगात्मक कविता


भोला चेहरा ,साफ़ छवि आप अर्थशास्त्र के बॉस है
पर जाने क्यों ना लोग समझते प्रधानमंत्री  निर्दोष है.

घोटालों में देश लुट गया ,इनको कोई खबर नहीं
देश चल रहा अंगारों पर इनपर कोई असर नहीं
जन जन में आक्रोश भरा है पर ये जेसे बेहोश है
पर जाने क्यों ना लोग समझते प्रधानमंत्री  निर्दोष है. 

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प्रधानमंत्री निर्दोष है. व्यंगात्मक कविता

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