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22.6.21

काश 'रोटी दिवस' मनाया जाता!

 CHARAN SINGH RAJPUT-

कहावत है कि 'भूखे पेट भजन न होई गोपाला'। लोग अच्छी सेहत के लिए रोटी मांग रहे हैं और मोदी सरकार अच्छी सेहत के लिए योग करने को कह रही है। ये लोग यह समझने को तैयार नहीं कि जब भूखे पेट भजन नहीं हो सकता है तो योग कैसे होगा ? या फिर भूखे आदमी को योग से क्या फायदा होगा ? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी विफलता को छिपाने के लिए कोरोना महामारी में योग को उम्मीद की किरण बताने लगे। यदि योग ही सब कुछ होगा तो फिर देश में सरकारों की जरूरत ही क्या है ? वैसे भी योग की जरूरत तो उस व्यक्ति को पड़ती है जिसके पास खाने-पीने की कोई कमी न हो। कोरोना महामारी में मोदी सरकार के हर मोर्चे पर विफल होने पर आज देश में जो व्यक्ति है उसके अनुसार तो लोग दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज हैं। 

देश में भुखमरी की स्थिति यह है कि वैश्विक भुखमरी सूचकांक 2020 में भारत 107 देशों में 94वें स्थान पर रहा है। 2019 में भारत 117 देशों में से 102वें स्थान पर रहा था, जबकि वर्ष 2018 में भारत 103वें स्थान पर था। मतलब  भारत भुखमरी सूचकांक मामले में 27.2 के स्कोर के साथ 'गंभीरÓश्रेणी में है। भुखमरी के मामले में भारत की स्थिति यह है कि कुल 107 देशों में से केवल 13 देश भारत से खराब स्थिति में हैं, जिनमें रवांडा (97वें), नाइजीरिया (98वें), अफगानिस्तान (99वें), लाइबेरिया (102वें), मोजाम्बिक (103वें), चाड (107वें) शामिल हैं। कोरोना की दूसरी लहर के बाद तो हालात और बिगड़े हैं।

आज की स्थिति में तो योग दिवस लोगों को चिढ़ाने का काम कर रहा है। रोजी-रोटी छीनने से लोग अवसाद में हैं। स्थिति यह है कि रोज  बेरोजगारी और आर्थिक तंगी के चलते आत्महत्या करने की अनगिनत खबरें सुनने और पढऩे को मिल रही हैं। मतलब लोगों को सबसे पहले रोजी-रोटी चाहिए। वैसे भी क्या कभी किसी किसान और मजदूर को किसी ने योग करते देखा है ? हमारे देश में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता पैदा करन के लिए खेल कूद होते रहे हैं। हां योग भी साधना का एक बड़ा माध्यम रहा है पर योग को यदि धंधा बना लिया जाए तो उंगली तो उठेंगी ही। ऐसे कितने योग गुरु स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए धंधा खोले बैठे हैं। बाबा रामदेव ने भी अब योग को धंधा बना लिया है। बाबा रामदेव ने योग के माध्यम से ही बड़े स्तर पर अपने समर्थक तैयार किये और इन समर्थकों के बल पर ही मोदी सरकार में पैठ बनाई । अब  देश में अपना कारोबार फैला रहे हैं। बाबा रामदेव कॉरपोरेट संस्कृति में इतने ढल चुके हैं कि कभी जींस संस्कृति का मजाक बनाते थे और अब खुद जींस का प्रचार कर रहे हैं। ऐसे ही देश में योग दिवस के नाम पर देश में बाबा रामदेव का कारोबार और भाजपा की वोटबैंक की राजनीति चल रही है। प्रधानमंत्री से बाबा बनते जा रहे नरेंद्र मोदी भी कभी अडानी, अंबानी तो कभी बाबा रामदेव के कारोबार को बढ़ावा देन में जुट जाते हैं वह बात दूसरी है कि जनता उनकी नजरों में बस मूर्ख ही है।

जिस देश की संस्कृति तीज त्योहारों से ओतप्रोत रही है उस देश में मदर्स डे, फादर्स डे, टीचर्स डे और वेलेंटाइन डे न जाने क्या-क्या डे मनाये जा हैं। क्या तीज त्योहारों पर हम अपने माता-पिता, शिक्षकों और दूसरे लोगों का सम्मान नहीं करते ? क्या हमारे तीज त्योहार और रीति रिवाजों में प्यार-मोहब्बत नहीं है ? क्या ये पश्चिमी सभ्यता को बढ़ावा देने वाले डे आत्मीयता के रिश्तों को बढ़ावा दे रहे हैं ? क्या यह सब दिखावा मात्र नहीं  है ? क्या इस दिखावे के समाज में स्वार्थ के रिश्ते घर नहीं करते जा रहे हैं ?

जो लोग अस्पतालों में कोरोना मरीजों की हत्याओं पर चुप रहे। जो लोग आक्सीजन सिलेंडरों की कमी के चलते  कोरोना मरीजों के मरने की घटनाओं की अनदेखी करते देखे गये, जो लोग जलती चिताओं को दरकिनार कर प्रधानमंत्री के बंगाल में चुनावी रैली करने पर चुप्पी साधे बैठे रहे वे लोग अचानक योग दिवस पर दिखाई दिये। रोजी-रोटी के संकट पर चुप रहने वाले राजनीति से लेकर बॉलीवुड तक के लोग योग करते हुए तस्वीरें शेयर कर रहे हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्केंडेय काटजू ने आगे बढ़कर मोदी सरकार को घेरा है। जस्टिस मार्केंडेय काटजू ने योग दिवस को लेकर कई ट्वीट किए हैं। उन्होंने योग दिवस को नोटंकी करार देते हुए कहा है कि जब देश में 50 फीसदी भारतीय बच्चे कुपोषित हैं, हमारी 50 फीसदी महिलाएं एनीमिक हैं। देश में रिकॉर्ड बेरोजगारी है। ऐसे वक्त में लोगों को योग करने के लिए कहना क्रूरता की हद है। ये ऐसा ही है जैसे रानी मैरी एंटोनेट ने लोगों के रोटी मांगने पर कहा था कि रोटी नहीं है तो केक खाइए।  प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रह चुके जस्टिस मार्केंडय काटजू ने कहा कि योग करने से सेहत अच्छी होने और दिमाग को शांति और सुकून मिलने का दावा किया जाता है लेकिन क्या भूखे-गरीब और बेरोजगारों को भी वैसा ही फायदा मिलेगा? क्या योग कुपोषित बच्चे और खून की कमी से जूझती महिलाएं सेहतमंद हो पाएंगी?  

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