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26.3.10

तू औरत है औरत...प्रतिक्रिया ना दे!!


शादी से पहले यौन सम्बन्ध बनाना अपराध नहीं है. इन मुद्दों को इतना complicated बना कर मजेदार तरीके से परोसना, डिस्कशन करते वक़्त चेहरे पर एक घटिया मुस्कराहट, चीप लफ़्ज़ों का इस्तेमाल करते हुए परसनल प्रहार बेहद आम है. जब भी इस तरह के किसी मुद्दे पर टीवी शो में किसी महिला को बुलाया जाता है तो मर्दों को घटियापन पर उतरते देर नहीं लगती... डीबेट प्रोग्राम्स में पूजा भट्ट पर बातों बातों में कीचड़ उछालना लगभग सभी ने देखा होगा. एक सज्जन ने एक शो में बहस के दौरान स्ट्रगलिंग एक्ट्रेस प्रीती को कहा था 'अगर आप को सड़क चलते कुछ भी पहनने का अधिकार है, तो मुझे भी आपके साथ कुछ भी करने का अधिकार है'

यौन सम्बन्ध अपराध हो ना हो पर ऐसे टुच्चे शब्दों का इस्तेमाल वो मानसिकता दिखाता है जो पूरे समाज पर छाई हुई है.
अगर आपको अपनी so called आबरू प्यारी है तो इनसे लड़ा भी नहीं जा सकता..लफ़्ज़ों से आपके कपडे नोच लेंगे, नज़रों से आप को बेआबरू कर देंगे...मज़े की बात तो ये है की ये वही लोग हैं जो नारी जाती की भलाई और इज्ज़त की दुहाई देते हैं. जबकि खुद मौका मिलते ही अपना नकाब उतार फेंकते हैं, उस परदे के पीछे का चेहरा सड़क चलते लड़कियों की कमर पर हाथ मार कर निकल जाने वालों से हुबहू मिलता है.
शादी के बाद पति की पत्नी पर जोर ज़बरदस्ती को ये कह कर ढंका जाता है की पत्नी अगर शारीरिक ज़रूरतों को पूरा नहीं करेगी तो पति बाहर का रास्ता देखेगा. वहीँ अगर यही बात पत्नी पर लागू की जाए तो वो औरत बदचलन कहलाएगी. अगर दो लोग अपनी मर्ज़ी से करीब आते हैं तो इस पर ख़राब करेक्टर का दोष भी लड़की पर. अभी हाल ही में एक किस्सा बहुत करीब से देखा एक कपल को ऑफिस में 'किस' करते देखा गया. (जो की मैं मानती हूँ की personal रिश्तों को प्रोफेशनल जगहों से दूर रखना चाहिए या कम से कम प्रोफेशनली बिहेव करना ही चाहिए). इन हालात में वही हुआ जो होता आया है. लड़की को terminate कर दिया गया जबकि वो लड़का अब भी ऑफिस में धड़ल्ले से काम करता है हँसता बोलता है.
किसी भी फिसिकली इन्वोल्व्मेंट में लड़की का ही सर झुकता है जबकि उसमें आदमी और औरत दोनों भागीदार होते हैं.
कहते हैं इज्ज़त लुट गयी...अरे काहे की इज्ज़त जो कुछ हुआ उसमें क्या लड़कों का कोई role नहीं होता या तो दोनों की इज्ज़त लुटी या तो किसी की भी नहीं...इज्ज़त का टोकरा औरत ही क्यूँ उठाये.
कभी अपना दुपट्टा सही से ओढ़ लो और कहीं अपना मुंह चुपचाप बंद कर लो...तुम औरत हो प्रतिक्रिया देना तुम्हारा काम नहीं.

fauziya reyaz
http://iamfauziya.blogspot.com

2 comments:

धीरज शाह said...

दुसरे के गिरेबान मे देखने से पहले अपने गिरेबान मे झाँक ले।

RAJNISH PARIHAR said...

izzat sabko pyari hoti hai aur badnami se sab darte hai!aurat aur mard ka swal kahan uthta hai?galti kisi ki bhi ho sakti hai?