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31.5.11

पेंसिल....चांद और समय

पेंसिल....चांद औऱ समय
पेंसिल....चांद औऱ समय.........इन तीनों की अगर बात करें तो समय के साथ धुंधले पड गये बचपन के वो दिन याद आते हैं......जब छत से चांद को देखते हुए मां से बडी मासूमियत से एक सवाल पूछता था....किमां दूर आसमां में दिन ढलने के साथ ही चमक बिखेरने वाला यह कौन है.....तो मां का जवाब होता था.....चंदा मामा....औऱ आज भी चांद के लिए यही अनुभूति होती है.....समय बीतता गया.....औऱ पता ही नहीं चला कि कब हाथों में पहले चॉक औऱ फिर पेंसिल ने इसकी जगह ले ली....समय बीतता गया....औऱ फिर पेंसिल से भी नाता टूटा....औऱ छठवीं कक्षा में पेंसिल की जगह ब़ॉल पैन ने ले ली.....लेकिन जिस तरह आज भी आसमान में चांद की चमक बरकरार है.....ठीक उसी तरह पहली बार पेंसिल से कागज पर लिखने की अनुभूति का एहसास होते ही जेहन में वो बात याद आ जाती है....साथ ही पेंसिल से जुडी वो कहानी याद आ जाती है....जो आज भी मुझे ऊर्जा प्रदान करती है.....
...........एक लड़का अपने पिता को कागज पर कुछ  लिखते  हुए देखकर पूछा -क्या आप मेरे लिए कहानी लिख रहे है ?
पिता ने कहा- कहानी तो लिख रहा हूँ पर उससे महत्वपूर्ण यह पेंसिल है जिससे मैं लिख रहा हूँ और उम्मीद करता हूँ तुम भी बड़े होकर पेंसिल कि तरह ही बनोगे . '
लड़के ने  कहा -'इसमें क्या बात है ये तो बाकी पेन्सिल जैसा ही तो है.'
पिता ने बोला -'ये तो तुम्हारे नजरिये पर निर्भर करता है ,तुम्हे पेंसिल में कुछ नजर नहीं आ रहा है पर मुझे इसके  पांच खास गुण नजर आ रहे है जिसे अपना लो तो तुम महान बन जाओगे.'
पहला : आप महान कामों को अंजाम दे सकते है लेकिन पेंसिल की तरह यह न भूले कि आपके भी पीछे एक हाथ होता है जो आपको मार्गदर्शन देता और उस हाथ को हम ईश्वर कहते है.
दूसरा: शार्पनर पेंसिल को थोड़ी देर के लिए बहुत तकलीफ पहुचाता है पर  इसके बाद वो नुकीली होकर और भी ज्यादा अच्छा लिखती है. इसलिए तुम्हे भी दुःख और तकलीफों को सहना सीखना चाहिए क्योकि वो तुम्हे  अच्छा  व्यक्तित्व प्रदान करती  है .
तीसरा: पेंसिल इरेजर द्वारा गलतियों को मिटाने का मौका  देती है यानी गलतिया हो तो उसको सुधारना भी जरुरी है यह हमें न्याय और सज्जनता के रास्ते  पर चलने में मदद करती है .
चौथा: पेंसिल में उसकी लकड़ी से ज्यादा उसके अन्दर कि ग्रेफिट महत्वपूर्ण है,जिसके कारण उसका वजूद है. इसलिए तुम हमेशा धयान दो कि तुम्हारे अन्दर क्या भरा है?
पांचवां: पेंसिल हमेशा निशान छोड़ जाती है,तुम भी जीवन में जो कुछ करते हो वह निशान छोड़ जाती है इसलिए कोई भी काम चाहे वो कितना भी छोटा क्यों न हो बुद्धिमानी और एकाग्रता से करो.  
.....जिस तरह पेसिंल.....जिसकी अहमियत इस कहानी को सुनने से पहले आपके जेहन में भी शायद बहुत ज्यादा या यूं कहें कुछ नहीं होगी.....उसी तरह चांद.....विज्ञान से नाता न रखने वालों के लिए बचपन में सिर्फ चंदा मामा....औऱ अब शायद रात के घने अंधेरे में एक रोशनी बिखेरने का माध्यम भले हो....लेकिन यही चांद वैज्ञानिकों के लिए किसी रहस्य से कम नहीं था.....औऱ समय के साथ वैज्ञानिकों ने इसे भी पार पाने की कोशिश की....औऱ 20 जुलाई 1969 को अमेरिका को इसमें सफलता भी मिली....जब पहले अमेरिकी नील आर्म स्ट्रांग ने अपने साथी एडविन एल्ड्रिनन के साथ चांद पर पहला कदम रखा। 1969 से 1972 के बीच कुल 12 अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा पर उतरे और सकुशल वापस लौटे। 7 दिसंबर 1972 को अपोलो 17 मिशन के दो अंतरिक्ष यात्रियों का चंद्रमा पर अवतरण और विचरण अब तक की अंतिम समानव चंद्रयात्रा थी.....अपोलो 17 ही एकमात्र ऐसी चंद्रयात्रा थी, जिस में कोई भूवैज्ञानि (जियोलॉजिस्ट) चन्द्रमा पर उतरा था और वहां से सौ किलो से अधिक कंकड़ पत्थर और मिट्टी साथ ले आया था........उसके बाद से ही लगातार चांद के रहस्यों को सुलझाने के साथ ही कई देशों की चांद पर भी वर्चस्व जमाने की कोशिशें आज भी जारी है।
.....हम बात कर रहे थे....पेंसिल....चांद औऱ समय की.....पेंसिल औऱ चांद जिसके साथ बचपन में हमारा गहरा नाता था.....समय बीतने के साथ ही चांद पर पेंसिल की उपयोगिता भी नजर आयी....जब चांद पर गुरूत्वाकर्षण न होने के कारण पेंसिल को चंद्रमा पर लिखने के लिए उपयोग किये जाने पर भी विचार किया जाने लगा.....जिस पर औऱ भी शोध जारी हैं.....औऱ उम्मीद करते हैं कि समय के साथ ही हमारे बचपन के साथी पेंसिल और चांद का संबंध औऱ भी गहरा हो जाएगा.....क्योंकि वक्त के साथ ही नयी चीजें संभव हैं....लेकिन समय बीतने के साथ इस तरह से पेंसिल औऱ चांद का नाता जुडेगा....ऐसा शायद ही कभी सोचा था।

दीपक तिवारी
09971766033
deepaktiwari555@gmail.com
deepaktiwariji@blogspot.com

3 comments:

अजित गुप्ता का कोना said...

बहूत ही सार्थक आलेख। पेन्सिल के माध्‍यम से बहुत ही प्रेरक बाते लिखी है आपने। लेकिन यह आलेख किस लेखक का है यह हम जान नहीं पाए। यदि नाम भी होता तो अच्‍छा होता।

Unknown said...

शुक्रिया

vandan gupta said...

ज्ञानवर्धक और प्रेरक जानकारी के लिये आभार्।